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गुरुत्वाकर्षण
Chhattisgarh · Class 9 · 🔬 Science · Chapter 11

गुरुत्वाकर्षण

गुरुत्वाकर्षण बलगुरुत्वीय त्वरण (g)न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियममुक्त पतनद्रव्यमान और भार में अंतरगुरुत्वीय केंद्र

अध्याय 'गुरुत्वाकर्षण' ब्रह्मांड में वस्तुओं के बीच लगने वाले आकर्षण बल की अवधारणा का परिचय देता है। इसमें न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम, गुरुत्वीय त्वरण (g) की गणना, मुक्त पतन, और द्रव्यमान व भार के बीच के अंतर को समझाया गया है। छात्र गुरुत्वाकर्षण के दैनिक जीवन में महत्व और इसके अनुप्रयोगों को सीखेंगे। यह अध्याय खगोलीय पिंडों की गति और पृथ्वी पर वस्तुओं के गिरने के पीछे के भौतिकी को समझने के लिए आधार तैयार करता है।

गुरुत्वाकर्षण की अवधारणा

गुरुत्वाकर्षण वह बल है जिसके कारण ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु दूसरी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है। यह बल वस्तुओं के द्रव्यमान पर निर्भर करता है।

  • न्यूटन का अवलोकन: न्यूटन ने निष्कर्ष निकाला कि आकर्षण बल केवल पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के बीच ही नहीं, बल्कि संसार की हर छोटी-बड़ी सभी वस्तुओं के बीच होता है।
  • आकर्षण का कारण: पत्थर, धूल कण, पानी, ग्रह, तारे इत्यादि प्रत्येक वस्तु अपने द्रव्यमान के कारण हर दूसरी वस्तु पर आकर्षण बल लगाती है।
  • गुरुत्वाकर्षण बल की परिभाषा: द्रव्यमान के कारण आकर्षित करने का यह गुण गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ:
  • पहले माना जाता था कि चंद्रमा और अन्य वस्तुओं को आकर्षित करना पृथ्वी का विशेष गुण है।
  • कॉपरनिकस के सौर केंद्रिक ब्रह्मांड की धारणा और केपलर के नियमों ने इस मान्यता को चुनौती दी।
  • न्यूटन ने सभी अवलोकनों को समझकर सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को प्रतिपादित किया।
महत्त्वपूर्ण

गुरुत्वाकर्षण बल एक सार्वत्रिक बल है, जिसका अर्थ है कि यह ब्रह्मांड में किन्हीं भी दो द्रव्यमान वाली वस्तुओं के बीच कार्य करता है।

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम

न्यूटन के अनुसार, ब्रह्मांड की किन्हीं दो वस्तुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है।

  • नियम का कथन:
  • दो वस्तुओं के बीच लगने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।

\(F \propto m_1 \times m_2\) ...(1)

  • यह बल उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

\(F \propto \frac{1}{r^2}\) ...(2)

  • सूत्र का व्युत्पन्न:
  • समीकरण (1) और (2) को मिलाने पर:

\(F \propto \frac{m_1 m_2}{r^2}\)

  • समानुपाती स्थिरांक 'G' का उपयोग करने पर:

\(F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}\) ...(3)

  • सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G):
  • 'G' एक सार्वत्रिक नियतांक है, जिसका मान पूरे ब्रह्मांड में स्थिर रहता है।
  • SI पद्धति में G का मान \(6.67 \times 10^{-11}\) Nm²/kg² है।
  • इस मान की गणना सबसे पहले हेनरी कैवेंडिश ने की थी।
  • दूरी का प्रभाव:
  • यदि वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी कर दी जाए, तो बल \(\frac{1}{4}\) गुना हो जाएगा।
  • यदि दूरी तिगुनी कर दी जाए, तो बल \(\frac{1}{9}\) गुना हो जाएगा।
  • दूरी बढ़ने के साथ बल का मान तेजी से कम होता है
  • गुरुत्वाकर्षण बल के महत्वपूर्ण अनुप्रयोग:
  • हमें पृथ्वी से बांधे रखता है।
  • चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर गति कराता है।
  • ग्रहों को सूर्य के चारों ओर गति कराता है।
  • ज्वार-भाटा का कारण बनता है।
🧮सूत्र

गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम: \(F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}\) जहाँ, \(F\) = गुरुत्वाकर्षण बल, \(G\) = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक, \(m_1, m_2\) = वस्तुओं के द्रव्यमान, \(r\) = वस्तुओं के केंद्रों के बीच की दूरी।

💡सुझाव

गुरुत्वाकर्षण बल की गणना करते समय, दूरी \(r\) हमेशा वस्तुओं के केंद्रों के बीच की दूरी होती है, न कि उनकी सतहों के बीच की दूरी।

गुरुत्वीय त्वरण 'g'

जब कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गति करती है, तो उसमें एक त्वरण उत्पन्न होता है जिसे गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इसे 'g' से दर्शाया जाता है।

  • 'g' का व्युत्पन्न:
  • मान लें कि पृथ्वी की सतह पर 'm' द्रव्यमान की एक वस्तु है।
  • पृथ्वी द्वारा वस्तु पर लगाया गया गुरुत्वाकर्षण बल (सार्वत्रिक नियम से):

\(F = G \frac{M m}{R^2}\) ...(4) जहाँ \(M\) = पृथ्वी का द्रव्यमान, \(R\) = पृथ्वी की त्रिज्या (केंद्र से सतह की दूरी)।

  • न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार, बल \(F = ma\) होता है। गुरुत्वीय त्वरण के लिए, \(F = mg\) ...(5)
  • समीकरण (4) और (5) को बराबर रखने पर:

\(mg = G \frac{M m}{R^2}\) \(g = G \frac{M}{R^2}\) ...(6)

  • 'g' के मान की गणना:
  • पृथ्वी का द्रव्यमान \(M = 6 \times 10^{24}\) kg
  • पृथ्वी की त्रिज्या \(R = 6.4 \times 10^6\) m
  • \(G = 6.67 \times 10^{-11}\) Nm²/kg²
  • इन मानों को समीकरण (6) में रखने पर, \(g \approx 9.8\) m/s² प्राप्त होता है।
  • गणितीय सवालों को हल करने के लिए सुविधा हेतु अक्सर 'g' का मान \(10\) m/s² लिया जाता है।
  • 'g' के मान को प्रभावित करने वाले कारक:
  • पृथ्वी का आकार: पृथ्वी पूर्णतः गोलाकार नहीं है, यह ध्रुवों पर थोड़ी चपटी और भूमध्य रेखा पर उभरी हुई है।
  • ध्रुवों पर \(R\) कम होता है, इसलिए \(g\) का मान अधिक होता है।
  • भूमध्य रेखा पर \(R\) अधिक होता है, इसलिए \(g\) का मान कम होता है।
  • ऊँचाई: पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर \(R\) बढ़ता है, जिससे \(g\) का मान घटता है।
  • गहराई: पृथ्वी की सतह के नीचे जाने पर भी \(g\) का मान घटता है और केंद्र पर शून्य हो जाता है।
  • वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भरता: समीकरण (6) से स्पष्ट है कि 'g' का मान वस्तु के द्रव्यमान 'm' पर निर्भर नहीं करता। इसका अर्थ है कि विभिन्न द्रव्यमान की वस्तुएँ समान गुरुत्वीय त्वरण से गिरती हैं (वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर)।
🧮सूत्र

गुरुत्वीय त्वरण 'g' का सूत्र: \(g = G \frac{M}{R^2}\) जहाँ, \(g\) = गुरुत्वीय त्वरण, \(G\) = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक, \(M\) = पृथ्वी का द्रव्यमान, \(R\) = पृथ्वी की त्रिज्या।

🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर 'G' (सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक) और 'g' (गुरुत्वीय त्वरण) के बीच भ्रमित हो जाते हैं। याद रखें, G एक नियतांक है जबकि g एक त्वरण है जिसका मान स्थान के साथ बदलता है।

मुक्त पतन

जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गति करती है, तो उसकी गति को मुक्त पतन कहते हैं। इस स्थिति में वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है।

  • मुक्त पतन की विशेषताएँ:
  • वस्तु पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करता है।
  • वस्तु का त्वरण 'g' के बराबर होता है।
  • ऊपर की ओर गति करने पर त्वरण \(-g\) और नीचे की ओर गति करने पर त्वरण \(+g\) लिया जाता है।
  • गुरुत्वीय त्वरण में गति के समीकरण:
  • गति के तीन समीकरणों में त्वरण 'a' को 'g' से प्रतिस्थापित किया जाता है:
  1. \(v = u + gt\)
  2. \(h = ut + \frac{1}{2}gt^2\)
  3. \(v^2 = u^2 + 2gh\)

जहाँ, \(u\) = प्रारंभिक वेग, \(v\) = अंतिम वेग, \(t\) = समय, \(h\) = तय की गई दूरी या ऊँचाई।

  • मुक्त पतन के उदाहरण:
  • ऊपर फेंकी गई गेंद का वापस नीचे आना (अधिकतम ऊँचाई के बाद)।
  • पेड़ से फल का गिरना।
  • निर्वात में गिराई गई कोई भी वस्तु।
  • वायु प्रतिरोध का प्रभाव: वास्तविक जीवन में वायु प्रतिरोध के कारण हल्की वस्तुएँ (जैसे कागज की शीट) भारी वस्तुओं (जैसे पत्थर) की तुलना में धीमी गिरती हैं। निर्वात में, दोनों एक ही समय पर गिरेंगी।
महत्त्वपूर्ण

मुक्त पतन में, वस्तु का द्रव्यमान उसकी गति या त्वरण को प्रभावित नहीं करता (वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करने पर)। सभी वस्तुएँ, चाहे वे कितनी भी भारी या हल्की हों, समान गुरुत्वीय त्वरण से गिरती हैं।

द्रव्यमान एवं भार

द्रव्यमान और भार दो अलग-अलग भौतिक राशियाँ हैं, जिन्हें अक्सर एक ही मान लिया जाता है।

| विशेषताएँ | द्रव्यमान (Mass) | भार (Weight) | | :-------------- | :------------------------------------------------------- | :---------------------------------------------------------- | | परिभाषा | किसी वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा। | वह बल जिससे पृथ्वी (या कोई अन्य खगोलीय पिंड) किसी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है। | | मात्रक | किलोग्राम (kg) | न्यूटन (N) (बल का मात्रक) | | प्रकृति | अदिश राशि (केवल परिमाण होता है) | सदिश राशि (परिमाण और दिशा दोनों होते हैं) | | परिवर्तन | स्थिर रहता है, स्थान बदलने पर नहीं बदलता। | परिवर्तनशील है, स्थान बदलने पर बदलता है (गुरुत्वीय त्वरण 'g' पर निर्भर करता है)। | | मापन | साधारण तुला या बीम बैलेंस से मापा जाता है। | स्प्रिंग बैलेंस से मापा जाता है। | | सूत्र | कोई सीधा सूत्र नहीं, पदार्थ की मात्रा। | \(W = mg\) (जहाँ \(m\) द्रव्यमान और \(g\) गुरुत्वीय त्वरण है) | | उदाहरण | 2 kg चावल का द्रव्यमान पृथ्वी और चंद्रमा पर समान होगा। | 2 kg चावल का भार पृथ्वी पर चंद्रमा की तुलना में अधिक होगा। |

  • भार की गणना: किसी वस्तु का भार \(W = mg\) होता है।
  • पृथ्वी पर \(g \approx 9.8\) m/s²।
  • चंद्रमा पर \(g_{moon} \approx 1.62\) m/s² (पृथ्वी के \(\frac{1}{6}\) गुना)।
  • अतः, किसी वस्तु का भार चंद्रमा पर पृथ्वी की तुलना में लगभग \(\frac{1}{6}\) गुना होता है।
📖परिभाषा

द्रव्यमान (Mass): किसी वस्तु में निहित पदार्थ की कुल मात्रा को उसका द्रव्यमान कहते हैं। यह एक स्थिर राशि है।

📖परिभाषा

भार (Weight): वह बल जिससे कोई ग्रह किसी वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह एक परिवर्तनशील राशि है और \(W = mg\) द्वारा दिया जाता है।

गुरुत्वीय केंद्र

गुरुत्वीय केंद्र किसी वस्तु का वह बिंदु है जहाँ वस्तु का संपूर्ण भार केंद्रित माना जा सकता है। यह वह बिंदु है जहाँ से वस्तु को संतुलित किया जा सकता है।

  • परिभाषा: भार वितरण की औसत या संतुलित स्थिति को गुरुत्वीय केंद्र कहा जाता है।
  • नियमित आकार की वस्तुओं के लिए:
  • एक समान मीटर पैमाने का गुरुत्वीय केंद्र उसके मध्य बिंदु पर होता है।
  • गोले का गुरुत्वीय केंद्र उसके ज्यामितीय केंद्र पर होता है।
  • अनियमित आकार की वस्तुओं के लिए गुरुत्वीय केंद्र ज्ञात करना:
  1. वस्तु को किसी एक बिंदु (O) से स्वतंत्रतापूर्वक लटकाएँ।
  2. निलंबन बिंदु (O) से एक ऊर्ध्वाधर रेखा खींचें (एक साहुल सूत्र का उपयोग करके)। गुरुत्वीय केंद्र इस रेखा पर कहीं होगा।
  3. वस्तु को किसी अन्य बिंदु (O') से स्वतंत्रतापूर्वक लटकाएँ।
  4. निलंबन बिंदु (O') से दूसरी ऊर्ध्वाधर रेखा खींचें।
  5. इन दोनों ऊर्ध्वाधर रेखाओं का प्रतिच्छेद बिंदु ही वस्तु का गुरुत्वीय केंद्र होगा।
  • संतुलन में गुरुत्वीय केंद्र का महत्व:
  • कोई वस्तु तब तक स्थिर संतुलन में रहती है जब तक उसका गुरुत्वीय केंद्र उसके आधार के भीतर रहता है।
  • रस्सी पर चलने वाला व्यक्ति अपने हाथों को फैलाकर या लंबी छड़ी का उपयोग करके अपने गुरुत्वीय केंद्र को नीचे की ओर केंद्रित करने का प्रयास करता है, जिससे उसका संतुलन बना रहता है।
याद रखें

गुरुत्वीय केंद्र वह काल्पनिक बिंदु है जहाँ वस्तु का संपूर्ण भार क्रियाशील माना जा सकता है। यह वस्तु के संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।

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