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रासायनिक सूत्र और मोल संकल्पना
Chhattisgarh · Class 9 · 🔬 Science · Chapter 9

रासायनिक सूत्र और मोल संकल्पना

रासायनिक सूत्रअणुभारमोल संकल्पनाआवोगाद्रो संख्याबहुपरमाणुक आयन

यह अध्याय रासायनिक सूत्र लिखने के नियमों, सहसंयोजी और आयनिक यौगिकों के अणुभार और सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना, बहुपरमाणुक आयनों और मूलकों की पहचान, और सबसे महत्वपूर्ण, मोल संकल्पना और आवोगाद्रो संख्या को विस्तार से समझाता है। यह छात्रों को रासायनिक गणनाओं और अभिक्रियाओं को समझने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

सहसंयोजी यौगिकों के सूत्र लेखन

रासायनिक सूत्र किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों के परमाणुओं की निश्चित संख्या को दर्शाते हैं। सहसंयोजी यौगिकों में, परमाणु इलेक्ट्रॉनों का साझा करके बंध बनाते हैं।

  • स्थायित्व का नियम: परमाणु तब तक बंध बनाते हैं जब तक वे अपने बाह्यतम कोश में स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (आमतौर पर 8 इलेक्ट्रॉन) प्राप्त नहीं कर लेते (अष्टक नियम)।
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उदाहरण:
  • कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • ऑक्सीजन के बाह्यतम कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
  • एक कार्बन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दो-दो इलेक्ट्रॉनों का साझा करके स्थिर CO₂ अणु बनाता है।
  • प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु कार्बन के साथ दो इलेक्ट्रॉन साझा करता है और अपने अष्टक को पूरा करता है। कार्बन भी दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ कुल चार इलेक्ट्रॉन साझा करके अपना अष्टक पूरा करता है।
  • CO₃ जैसे यौगिक संभव नहीं हैं क्योंकि कार्बन के पास अतिरिक्त ऑक्सीजन के साथ साझा करने के लिए इलेक्ट्रॉन नहीं होते, और ऑक्सीजन के पास भी अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन साझा करने से उसका अष्टक अस्थिर हो जाएगा।
  • सूत्र लिखने के लिए आवश्यक जानकारी:
  • तत्वों के प्रतीक।
  • तत्वों की संयोजन क्षमता (संयोजकता)

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • सहसंयोजी यौगिकों में, परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों का साझा होता है।
  • यौगिक का सूत्र परमाणुओं के निश्चित अनुपात को दर्शाता है।
  • स्थिरता प्राप्त करने के लिए परमाणु अष्टक नियम का पालन करते हैं।
महत्त्वपूर्ण

अष्टक नियम: रासायनिक बंध बनाते समय परमाणु अपने बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की प्रवृत्ति रखते हैं, जिससे वे स्थिर हो जाते हैं। हाइड्रोजन और हीलियम जैसे छोटे तत्वों के लिए यह 2 इलेक्ट्रॉन (द्विक नियम) हो सकता है।

सहसंयोजी यौगिकों के अणुभार की गणना

यौगिक का अणुभार उसके सभी घटक परमाणुओं के परमाणु भारों का योग होता है। यह यौगिक के एक अणु का सापेक्षिक भार होता है।

  • गणना विधि:
  1. यौगिक का रासायनिक सूत्र ज्ञात करें।
  2. सूत्र में उपस्थित प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या ज्ञात करें।
  3. प्रत्येक तत्व का परमाणु भार ज्ञात करें।
  4. प्रत्येक तत्व के परमाणु भार को उसके परमाणुओं की संख्या से गुणा करें।
  5. सभी तत्वों के गुणनफलों को जोड़ दें।
  • उदाहरण: पानी (H₂O) का अणुभार:
  • हाइड्रोजन (H) का परमाणु भार = 1 u
  • ऑक्सीजन (O) का परमाणु भार = 16 u
  • H₂O में 2 हाइड्रोजन परमाणु और 1 ऑक्सीजन परमाणु हैं।
  • अणुभार = $(2 \times 1 \text{ u}) + (1 \times 16 \text{ u}) = 2 \text{ u} + 16 \text{ u} = 18 \text{ u}$
  • उदाहरण: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का अणुभार:
  • सल्फर (S) का परमाणु भार = 32 u
  • ऑक्सीजन (O) का परमाणु भार = 16 u
  • SO₂ में 1 सल्फर परमाणु और 2 ऑक्सीजन परमाणु हैं।
  • अणुभार = $(1 \times 32 \text{ u}) + (2 \times 16 \text{ u}) = 32 \text{ u} + 32 \text{ u} = 64 \text{ u}$
  • आयनिक यौगिकों के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान:
  • आयनिक यौगिकों में अणु नहीं होते, बल्कि आयन होते हैं।
  • इनके लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान (Formula Unit Mass) की गणना की जाती है, जो मूलानुपाती सूत्र (Empirical Formula) में उपस्थित सभी आयनों के परमाणु भारों का योग होता है।
  • यह एक अणु का भार नहीं होता, बल्कि एक सूत्र इकाई का भार होता है।
  • उदाहरण: सोडियम क्लोराइड (NaCl) का सूत्र इकाई द्रव्यमान:
  • सोडियम (Na) का परमाणु भार = 23 u
  • क्लोरीन (Cl) का परमाणु भार = 35.5 u
  • सूत्र इकाई द्रव्यमान = $23 \text{ u} + 35.5 \text{ u} = 58.5 \text{ u}$

परमाणु भार (कुछ सामान्य तत्वों के): | तत्व | प्रतीक | परमाणु भार (u) | | :-------- | :---- | :------------- | | हाइड्रोजन | H | 1 | | कार्बन | C | 12 | | नाइट्रोजन | N | 14 | | ऑक्सीजन | O | 16 | | सोडियम | Na | 23 | | मैग्नीशियम| Mg | 24 | | सल्फर | S | 32 | | क्लोरीन | Cl | 35.5 | | कैल्शियम | Ca | 40 |

अणुभार/सूत्र इकाई द्रव्यमान की इकाई: 'u' (एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई) या 'amu' (परमाणु द्रव्यमान इकाई)।

💡सुझाव

अणुभार और सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना में अक्सर परमाणु भार दिए जाते हैं, लेकिन कुछ सामान्य तत्वों के परमाणु भार याद रखना उपयोगी होता है। इकाई 'u' लिखना न भूलें।

बहुपरमाणुक आयन और उनकी संयोजकता

बहुपरमाणुक आयन परमाणुओं का ऐसा समूह होता है जिस पर कुल आवेश विद्यमान होता है। ये समूह एक इकाई के रूप में व्यवहार करते हैं।

  • उदाहरण:
  • नाइट्रेट आयन: NO₃⁻ (एक नाइट्रोजन और तीन ऑक्सीजन परमाणुओं पर कुल एक ऋण आवेश)
  • अमोनियम आयन: NH₄⁺ (एक नाइट्रोजन और चार हाइड्रोजन परमाणुओं पर कुल एक धन आवेश)
  • सल्फेट आयन: SO₄²⁻ (एक सल्फर और चार ऑक्सीजन परमाणुओं पर कुल दो ऋण आवेश)
  • हाइड्रॉक्साइड आयन: OH⁻ (एक ऑक्सीजन और एक हाइड्रोजन परमाणु पर कुल एक ऋण आवेश)
  • कार्बोनेट आयन: CO₃²⁻ (एक कार्बन और तीन ऑक्सीजन परमाणुओं पर कुल दो ऋण आवेश)
  • मूलक (Radicals):
  • आवेशित परमाणु या परमाणुओं के आवेशित समूह को मूलक कहते हैं।
  • क्षारीय मूलक (Basic Radicals): ये प्रायः धन आयन होते हैं जो क्षार से प्राप्त होते हैं। इनकी संयोजकता धनात्मक होती है।
  • उदाहरण: Na⁺, NH₄⁺, Ca²⁺, Mg²⁺, Al³⁺
  • अम्लीय मूलक (Acidic Radicals): ये प्रायः ऋण आयन होते हैं जो अम्ल से प्राप्त होते हैं। इनकी संयोजकता ऋणात्मक होती है।
  • उदाहरण: Cl⁻, NO₃⁻, SO₄²⁻, OH⁻, CO₃²⁻, PO₄³⁻
  • रासायनिक सूत्र लिखने की आड़ा-तिरछा पद्धति (Criss-Cross Method):

यह विधि आयनों पर उपस्थित आवेश (संयोजकता) का उपयोग करके रासायनिक सूत्र लिखने का एक सरल तरीका है।

  1. प्रतीक/सूत्र लिखें: धनात्मक भाग (क्षारीय मूलक) बाईं ओर और ऋणात्मक भाग (अम्लीय मूलक) दाईं ओर लिखें।
  • उदाहरण: अमोनियम कार्बोनेट के लिए: NH₄⁺ CO₃²⁻
  1. संयोजकताएँ लिखें: प्रत्येक आयन के नीचे उसकी संयोजकता (आवेश का परिमाण) लिखें।
  • NH₄⁺ (संयोजकता 1), CO₃²⁻ (संयोजकता 2)
  1. आड़ा-तिरछा करें: एक आयन की संयोजकता को दूसरे आयन के पादांक (subscript) के रूप में लिखें।
  • NH₄⁺ की संयोजकता (1) CO₃²⁻ के पादांक के रूप में, और CO₃²⁻ की संयोजकता (2) NH₄⁺ के पादांक के रूप में।
  1. सूत्र लिखें: यदि बहुपरमाणुक आयन की संख्या 1 से अधिक है, तो उसे कोष्ठक में रखें। यदि संख्या 1 है, तो उसे नहीं लिखा जाता।
  • NH₄⁺₂ CO₃¹⁻ → (NH₄)₂CO₃
  • अन्य उदाहरण: (आड़ा-तिरछा पद्धति से)
  • सोडियम नाइट्रेट: Na⁺ (1), NO₃⁻ (1) → NaNO₃
  • मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड: Mg²⁺ (2), OH⁻ (1) → Mg(OH)₂
  • अमोनियम फॉस्फेट: NH₄⁺ (1), PO₄³⁻ (3) → (NH₄)₃PO₄
  • सोडियम सल्फेट: Na⁺ (1), SO₄²⁻ (2) → Na₂SO₄
  • कैल्शियम सल्फेट: Ca²⁺ (2), SO₄²⁻ (2) → CaSO₄ (यहाँ, दोनों संयोजकताओं को 2 से विभाजित करके सरल किया गया है, Ca₂ (SO₄)₂ को CaSO₄ के रूप में लिखते हैं)
  • ऐलुमिनियम सल्फेट: Al³⁺ (3), SO₄²⁻ (2) → Al₂(SO₄)₃

संयोजकताएँ याद रखें: | आयन | प्रतीक | संयोजकता | | :-------- | :-------- | :------- | | सोडियम | Na⁺ | +1 | | पोटेशियम | K⁺ | +1 | | अमोनियम | NH₄⁺ | +1 |\ | मैग्नीशियम| Mg²⁺ | +2 |\ | कैल्शियम | Ca²⁺ | +2 |\ | ऐलुमिनियम | Al³⁺ | +3 |\ | क्लोराइड | Cl⁻ | -1 |\ | नाइट्रेट | NO₃⁻ | -1 |\ | हाइड्रॉक्साइड| OH⁻ | -1 |\ | कार्बोनेट | CO₃²⁻ | -2 |\ | सल्फेट | SO₄²⁻ | -2 |\ | फॉस्फेट | PO₄³⁻ | -3 |

🚧ग़लत धारणा

बहुपरमाणुक आयनों को कोष्ठक में रखना न भूलें यदि उनकी संख्या 1 से अधिक हो। उदाहरण के लिए, Mg(OH)₂ सही है, MgOH₂ गलत।

💡सुझाव

आड़ा-तिरछा पद्धति से सूत्र लिखना बोर्ड परीक्षाओं में एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। विभिन्न आयनों की संयोजकताएँ याद रखना आवश्यक है।

मोल संकल्पना और आवोगाद्रो संख्या

मोल पदार्थ की वह मात्रा है जिसमें उतनी ही संख्या में कण (परमाणु, अणु, आयन या अन्य कण) होते हैं जितने 12 ग्राम कार्बन-12 समस्थानिक में परमाणु होते हैं। यह एक संख्यात्मक इकाई है।

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
  • गेलुसाक का नियम (1808): निश्चित ताप और दाब पर गैसें आयतन के अनुसार सरल अनुपात में क्रिया करती हैं।
  • बर्जीलियस की परिकल्पना (1811): समान ताप और दाब पर, सभी गैसों के समान आयतन में कणों की संख्या समान होती है।
  • आवोगाद्रो की परिकल्पना (1811): समान ताप और दाब पर, सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। (यह बर्जीलियस की परिकल्पना का विस्तार था)
  • आवोगाद्रो संख्या (N₀):
  • यह 1 मोल पदार्थ में उपस्थित कणों की संख्या है।
  • इसका मान $6.022 \times 10^{23}$ होता है।
  • इसे N₀ या N_A से दर्शाया जाता है।
  • यह एक बहुत बड़ी संख्या है, जो परमाणुओं और अणुओं जैसे सूक्ष्म कणों की बड़ी मात्रा को गिनने में मदद करती है।
  • मोल और द्रव्यमान संबंध:
  • किसी भी पदार्थ के ग्राम परमाणु भार (परमाणु भार को ग्राम में व्यक्त करना) में $6.022 \times 10^{23}$ परमाणु होते हैं।
  • उदाहरण: 12 ग्राम कार्बन में $6.022 \times 10^{23}$ कार्बन परमाणु होते हैं।
  • किसी भी पदार्थ के ग्राम अणु भार (अणुभार को ग्राम में व्यक्त करना) में $6.022 \times 10^{23}$ अणु होते हैं।
  • उदाहरण: 18 ग्राम पानी में $6.022 \times 10^{23}$ पानी के अणु होते हैं।
  • मोल और आयतन संबंध (गैसों के लिए):
  • मानक ताप और दाब (STP) पर (0°C या 273.15 K और 1 वायुमंडलीय दाब पर), किसी भी गैस के 1 मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है।
  • उदाहरण: 2 ग्राम हाइड्रोजन (1 मोल) का आयतन 22.4 लीटर होता है।
  • मोल शब्द की उत्पत्ति:
  • सन् 1896 में विल्हेल्म ओस्टवाल्ड ने 'मोल' शब्द प्रस्तावित किया।
  • यह एक लैटिन शब्द 'moles' से आया है, जिसका अर्थ 'ढेर' या 'समूह' होता है।
  • सन् 1967 में मोल को एक SI इकाई के रूप में स्वीकार किया गया।

मोल अवधारणा का महत्व:

  • यह रासायनिक गणनाओं को सरल बनाती है।
  • यह प्रयोगशाला में मापी जा सकने वाली मात्राओं (द्रव्यमान, आयतन) को सूक्ष्म कणों की संख्या से जोड़ती है।
  • रासायनिक अभिक्रियाओं को मात्रात्मक रूप से समझने में मदद करती है।
महत्त्वपूर्ण

1 मोल = $6.022 \times 10^{23}$ कण = ग्राम परमाणु भार / ग्राम अणु भार = 22.4 लीटर (गैस के लिए STP पर)

मोलों की संख्या का परिकलन

मोलों की संख्या (n) की गणना विभिन्न तरीकों से की जा सकती है, जो दी गई जानकारी पर निर्भर करता है।

  • द्रव्यमान से मोलों की संख्या:
  • तत्वों के लिए:

$$n = \frac{\text{दिया गया द्रव्यमान (m)}}{\text{ग्राम परमाणु भार (M)}}$$

  • उदाहरण: 92 ग्राम सोडियम (Na) में मोलों की संख्या ($M_{Na} = 23 \text{ g/mol}$)

$n = \frac{92 \text{ g}}{23 \text{ g/mol}} = 4 \text{ मोल}$

  • यौगिकों या अणुओं के लिए:

$$n = \frac{\text{दिया गया द्रव्यमान (m)}}{\text{ग्राम अणु भार (M)}}$$

  • उदाहरण: 36 ग्राम पानी (H₂O) में मोलों की संख्या ($M_{H₂O} = 18 \text{ g/mol}$)

$n = \frac{36 \text{ g}}{18 \text{ g/mol}} = 2 \text{ मोल}$

  • कणों की संख्या से मोलों की संख्या:

$$n = \frac{\text{दिए गए कणों की संख्या (N)}}{\text{आवोगाद्रो संख्या (N₀)}}$$

  • उदाहरण: $18.066 \times 10^{23}$ ऑक्सीजन परमाणुओं में मोलों की संख्या ($N₀ = 6.022 \times 10^{23}$)

$n = \frac{18.066 \times 10^{23}}{6.022 \times 10^{23}} = 3 \text{ मोल}$

  • मोलों की संख्या से कणों की संख्या:

$$N = n \times N₀$$

  • उदाहरण: 2 मोल कार्बन परमाणुओं में कणों की संख्या

$N = 2 \times 6.022 \times 10^{23} = 12.044 \times 10^{23}$ परमाणु

  • द्रव्यमान से कणों की संख्या:
  • उपरोक्त सूत्रों को मिलाकर:

$$N = \frac{\text{दिया गया द्रव्यमान (m)}}{\text{ग्राम परमाणु भार/ग्राम अणु भार (M)}} \times N₀$$

  • उदाहरण: 10 ग्राम नाइट्रोजन (N₂) अणुओं में कणों की संख्या ($M_{N₂} = 28 \text{ g/mol}$)

$N = \frac{10 \text{ g}}{28 \text{ g/mol}} \times 6.022 \times 10^{23} = 2.15 \times 10^{23}$ अणु

  • रासायनिक अभिक्रियाओं में मोल अवधारणा का उपयोग:
  • रासायनिक समीकरण में गुणांक (coefficients) अणुओं की संख्या के साथ-साथ मोलों की संख्या को भी दर्शाते हैं।
  • उदाहरण: $2\text{H₂} + \text{O₂} \rightarrow 2\text{H₂O}$
  • इसका अर्थ है कि 2 अणु हाइड्रोजन, 1 अणु ऑक्सीजन से क्रिया करके 2 अणु पानी बनाते हैं।
  • इसका यह भी अर्थ है कि 2 मोल हाइड्रोजन, 1 मोल ऑक्सीजन से क्रिया करके 2 मोल पानी बनाते हैं
  • यह हमें अभिक्रिया में अभिकारकों और उत्पादों की मात्राओं की गणना करने में मदद करता है।
  • उदाहरण: $\text{H₂} + \frac{1}{2}\text{O₂} \rightarrow \text{H₂O}$
  • यह दर्शाता है कि 1 मोल हाइड्रोजन अणु, आधा मोल ऑक्सीजन अणु से संयोग करके 1 मोल जल का अणु बनाते हैं।

मोल अवधारणा के दोहरे अर्थ:

  • जब हम H₂ लिखते हैं, तो इसका अर्थ हो सकता है:
  1. एक हाइड्रोजन अणु, जिसका सापेक्षिक अणुभार 2u है।
  2. एक मोल हाइड्रोजन अणु, जिसका ग्राम अणुभार 2 ग्राम है।

सारांश में: मोल अवधारणा हमें सूक्ष्म कणों की दुनिया को स्थूल (मापनीय) दुनिया से जोड़ने का एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करती है।

🧮सूत्र

मोलों की संख्या के सूत्र:

  1. $n = \frac{m}{M}$ (द्रव्यमान से)
  2. $n = \frac{N}{N₀}$ (कणों की संख्या से)

जहाँ, n = मोलों की संख्या, m = दिया गया द्रव्यमान, M = ग्राम परमाणु/अणु भार, N = कणों की संख्या, N₀ = आवोगाद्रो संख्या।

💡सुझाव

मोल अवधारणा पर आधारित न्यूमेरिकल प्रश्न बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं। सूत्रों को याद रखें और उनका सही उपयोग करना सीखें।

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