चतुर्भुज
यह अध्याय चतुर्भुजों और उनके विभिन्न प्रकारों जैसे समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज, आयत और वर्ग का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करता है। छात्र चतुर्भुजों के कोण योग गुणधर्म, विकर्णों के गुणों और सर्वांगसमता प्रमेयों को सीखते हैं। मध्य बिंदु प्रमेय और तीन समांतर रेखाओं से संबंधित प्रमेय भी इसमें शामिल हैं। यह अध्याय ज्यामिति की नींव को मजबूत करने और छात्रों को जटिल ज्यामितीय समस्याओं को हल करने में मदद करता है।
चतुर्भुज की परिभाषा और निर्माण
- परिभाषा: चार असंरेख बिंदुओं को एक क्रम में मिलाने पर बनी बंद आकृति को चतुर्भुज कहते हैं।
- आवश्यक शर्तें:
- चार बिंदु होने चाहिए।
- इनमें से कोई भी तीन बिंदु असंरेख (एक ही रेखा पर न हों) होने चाहिए।
- बिंदुओं को एक क्रम में मिलाया जाना चाहिए।
- अवयव:
- भुजाएँ: चार रेखाखंड (जैसे AB, BC, CD, DA)।
- कोण: चार अंतः कोण (जैसे \(\angle A, \angle B, \angle C, \angle D\))।
- शीर्ष: चार बिंदु (जैसे A, B, C, D)।
- विकर्ण: सम्मुख शीर्षों को मिलाने वाले रेखाखंड (जैसे AC, BD)।
- उदाहरण: श्यामपट्ट, खिड़की का पल्ला, पुस्तक का पन्ना आदि चतुर्भुजाकार होते हैं।
त्रिभुज तीन असंरेख बिंदुओं को मिलाने पर बनी आकृति है, जिसमें तीन भुजाएँ, तीन कोण और तीन शीर्ष होते हैं।
चतुर्भुज के प्रकार: उत्तल, अवतल और समलंब
- विकर्णों के आधार पर वर्गीकरण:
- उत्तल चतुर्भुज: वह चतुर्भुज जिसमें दोनों विकर्ण चतुर्भुज के अंदर बनते हैं।
- कोई भी अंतः कोण \(180^\circ\) से अधिक नहीं होता।
- उदाहरण: वर्ग, आयत, समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज, समलंब।
- अवतल चतुर्भुज: वह चतुर्भुज जिसमें एक विकर्ण चतुर्भुज के बाहर बनता है।
- कम से कम एक अंतः कोण \(180^\circ\) से अधिक होता है (प्रतिवर्ती कोण)।
- भुजाओं की समानता के आधार पर वर्गीकरण:
- समलंब चतुर्भुज (Trapezium):
- वह चतुर्भुज जिसकी सम्मुख भुजाओं का केवल एक युग्म समांतर हो।
- उदाहरण: ABCD में यदि AB || DC हो।
- अध्ययन का केंद्र: इस अध्याय में हम मुख्य रूप से उत्तल चतुर्भुजों का अध्ययन करेंगे।
उत्तल चतुर्भुज: एक चतुर्भुज जिसमें सभी अंतः कोण \(180^\circ\) से कम होते हैं।
अवतल चतुर्भुज: एक चतुर्भुज जिसमें कम से कम एक अंतः कोण \(180^\circ\) से अधिक होता है।
समांतर चतुर्भुज की परिभाषा
- परिभाषा: एक चतुर्भुज जिसमें सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हों, उसे समांतर चतुर्भुज कहते हैं।
- यदि ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, तो AB || DC और AD || BC।
- विशेषताएँ:
- यह एक विशेष प्रकार का समलंब चतुर्भुज है (क्योंकि इसमें कम से कम एक युग्म समांतर भुजाओं का होता है)।
- आयत, वर्ग और समचतुर्भुज सभी समांतर चतुर्भुज के विशेष रूप हैं।
एक समांतर चतुर्भुज हमेशा एक समलंब चतुर्भुज होता है, लेकिन एक समलंब चतुर्भुज हमेशा एक समांतर चतुर्भुज नहीं होता।
समचतुर्भुज की परिभाषा
- परिभाषा: यदि एक समांतर चतुर्भुज की चारों भुजाएँ बराबर हों, तो वह समचतुर्भुज कहलाता है।
- गुणधर्म:
- यह एक समांतर चतुर्भुज है, इसलिए समांतर चतुर्भुज के सभी गुणधर्म इसमें भी लागू होते हैं।
- सभी भुजाएँ बराबर होती हैं।
- विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
समचतुर्भुज: एक समांतर चतुर्भुज जिसकी सभी भुजाएँ समान लंबाई की होती हैं।
आयत और वर्ग का समांतर चतुर्भुज से संबंध
- आयत:
- एक विशेष प्रकार का समांतर चतुर्भुज जिसका प्रत्येक कोण \(90^\circ\) होता है।
- सम्मुख भुजाएँ बराबर और समांतर होती हैं।
- विकर्ण बराबर होते हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
- वर्ग:
- एक विशेष प्रकार का आयत जिसकी चारों भुजाएँ बराबर होती हैं।
- एक विशेष प्रकार का समचतुर्भुज जिसका प्रत्येक कोण \(90^\circ\) होता है।
- सभी भुजाएँ बराबर होती हैं और प्रत्येक कोण \(90^\circ\) होता है।
- विकर्ण बराबर होते हैं और एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
- संबंधों का सारांश:
- सभी वर्ग आयत होते हैं।
- सभी वर्ग समचतुर्भुज होते हैं।
- सभी आयत समांतर चतुर्भुज होते हैं।
- सभी समचतुर्भुज समांतर चतुर्भुज होते हैं।
- सभी समांतर चतुर्भुज समलंब चतुर्भुज होते हैं।
- लेकिन इसका विलोम हमेशा सत्य नहीं होता।
छात्र अक्सर 'क्या आयत एक वर्ग है?' और 'क्या वर्ग एक आयत है?' में भ्रमित होते हैं। सभी वर्ग आयत होते हैं, लेकिन सभी आयत वर्ग नहीं होते।
चतुर्भुज के अंतः कोणों का योग गुणधर्म
- प्रमेय: किसी भी चतुर्भुज के चारों अंतः कोणों का योग \(360^\circ\) होता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक चतुर्भुज ABCD लीजिए।
- एक विकर्ण AC खींचिए, जो चतुर्भुज को दो त्रिभुजों \(\triangle ABC\) और \(\triangle ADC\) में विभाजित करता है।
- \(\triangle ADC\) में, त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म से: \(\angle DAC + \angle ACD + \angle D = 180^\circ\) (समीकरण 1)
- \(\triangle ABC\) में, त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म से: \(\angle BAC + \angle ACB + \angle B = 180^\circ\) (समीकरण 2)
- समीकरण (1) और (2) को जोड़ने पर:
\((\angle DAC + \angle BAC) + (\angle ACD + \angle ACB) + \angle B + \angle D = 180^\circ + 180^\circ\) \(\angle A + \angle C + \angle B + \angle D = 360^\circ\)
- अतः, \(\angle A + \angle B + \angle C + \angle D = 360^\circ\)।
चतुर्भुज के कोणों का योग: \(\angle A + \angle B + \angle C + \angle D = 360^\circ\)
समांतर चतुर्भुज के विकर्ण का गुणधर्म
- प्रमेय 11.1: समांतर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में विभाजित करता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए और विकर्ण AC खींचिए।
- हमें सिद्ध करना है कि \(\triangle ABC \cong \triangle CDA\)।
- \(\triangle ABC\) और \(\triangle CDA\) में:
- AB || DC (समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ) और AC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle BAC = \angle DCA\) (एकांतर अंतः कोण)।
- AD || BC (समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ) और AC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle DAC = \angle BCA\) (एकांतर अंतः कोण)।
- AC = CA (उभयनिष्ठ भुजा)।
- अतः, ASA सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle ABC \cong \triangle CDA\)।
यह प्रमेय समांतर चतुर्भुज के अन्य गुणों को सिद्ध करने का आधार है। इसे अच्छे से समझें।
समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं का गुणधर्म
- प्रमेय 11.2: किसी समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए और विकर्ण AC खींचिए।
- प्रमेय 11.1 से, हम जानते हैं कि \(\triangle ABC \cong \triangle CDA\)।
- सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं (CPCTC)।
- इसलिए, AB = CD और BC = DA।
- अतः, समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।
समांतर चतुर्भुज में सम्मुख भुजाएँ समांतर और बराबर दोनों होती हैं।
सम्मुख भुजाओं की समानता से समांतर चतुर्भुज की पहचान
- प्रमेय 11.3 (विलोम): यदि एक चतुर्भुज की सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म बराबर है, तो वह एक समांतर चतुर्भुज होता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक चतुर्भुज ABCD लीजिए जिसमें AB = CD और BC = AD। विकर्ण AC खींचिए।
- \(\triangle ABC\) और \(\triangle CDA\) में:
- AB = CD (दिया है)
- BC = AD (दिया है)
- AC = CA (उभयनिष्ठ भुजा)
- अतः, SSS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle ABC \cong \triangle CDA\)।
- CPCTC से, \(\angle BAC = \angle DCA\) और \(\angle BCA = \angle DAC\)।
- चूंकि \(\angle BAC\) और \(\angle DCA\) एकांतर अंतः कोण हैं और बराबर हैं, इसलिए AB || DC।
- चूंकि \(\angle BCA\) और \(\angle DAC\) एकांतर अंतः कोण हैं और बराबर हैं, इसलिए AD || BC।
- चूंकि सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं, अतः ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।
यह प्रमेय समांतर चतुर्भुज सिद्ध करने के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड है।
समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोणों का गुणधर्म
- प्रमेय 11.4: समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए।
- AB || DC और AD एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle A + \angle D = 180^\circ\) (तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग)। (समीकरण 1)
- AD || BC और DC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle D + \angle C = 180^\circ\) (तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग)। (समीकरण 2)
- समीकरण (1) और (2) से, \(\angle A + \angle D = \angle D + \angle C\)।
- \(\angle A = \angle C\)।
- इसी प्रकार, AB || DC और BC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle B + \angle C = 180^\circ\)।
- समीकरण (2) और (6) से, \(\angle D + \angle C = \angle B + \angle C\)।
- \(\angle D = \angle B\)।
- अतः, समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
समांतर चतुर्भुज में, आसन्न कोणों का योग \(180^\circ\) होता है, और सम्मुख कोण बराबर होते हैं।
सम्मुख कोणों की समानता से समांतर चतुर्भुज की पहचान
- प्रमेय 11.5 (प्रमेय 11.4 का विलोम): किसी चतुर्भुज में यदि सम्मुख कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर हो, तो वह एक समांतर चतुर्भुज होता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक चतुर्भुज ABCD लीजिए जिसमें \(\angle A = \angle C\) और \(\angle B = \angle D\)।
- हम जानते हैं कि \(\angle A + \angle B + \angle C + \angle D = 360^\circ\)।
- \(\angle A + \angle B + \angle A + \angle B = 360^\circ\) (चूंकि \(\angle C = \angle A\) और \(\angle D = \angle B\))।
- \(2(\angle A + \angle B) = 360^\circ\) \(\implies \angle A + \angle B = 180^\circ\)।
- चूंकि \(\angle A\) और \(\angle B\) आसन्न कोण हैं और उनका योग \(180^\circ\) है, इसलिए AD || BC।
- इसी प्रकार, \(\angle B + \angle C = 180^\circ\) (क्योंकि \(\angle A + \angle B = 180^\circ\) और \(\angle A = \angle C\))।
- चूंकि \(\angle B\) और \(\angle C\) आसन्न कोण हैं और उनका योग \(180^\circ\) है, इसलिए AB || DC।
- चूंकि सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं, अतः ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।
यह प्रमेय भी समांतर चतुर्भुज सिद्ध करने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है।
समांतर चतुर्भुज के विकर्णों का समद्विभाजन गुणधर्म
- प्रमेय 11.6: समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए जिसके विकर्ण AC और BD एक-दूसरे को बिंदु O पर प्रतिच्छेद करते हैं।
- हमें सिद्ध करना है कि AO = OC और BO = OD।
- \(\triangle AOB\) और \(\triangle COD\) में:
- AB || DC (समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ) और AC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle OAB = \angle OCD\) (एकांतर अंतः कोण)।
- AB || DC और BD एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle OBA = \angle ODC\) (एकांतर अंतः कोण)।
- AB = CD (समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ)।
- अतः, ASA सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle AOB \cong \triangle COD\)।
- CPCTC से, AO = OC और BO = OD।
- अतः, समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
यह गुणधर्म समांतर चतुर्भुज की पहचान के लिए भी प्रयोग किया जाता है। यदि किसी चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं, तो वह एक समांतर चतुर्भुज होता है।
बराबर विकर्ण वाले समांतर चतुर्भुज का आयत होना
- प्रमेय: यदि किसी समांतर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों, तो वह आयत होता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए जिसमें विकर्ण AC = BD।
- हमें सिद्ध करना है कि ABCD एक आयत है (अर्थात, इसके सभी कोण \(90^\circ\) हैं)।
- \(\triangle ABC\) और \(\triangle DCB\) में:
- AB = DC (समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ)।
- BC = CB (उभयनिष्ठ भुजा)।
- AC = BD (दिया है)।
- अतः, SSS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle ABC \cong \triangle DCB\)।
- CPCTC से, \(\angle ABC = \angle DCB\)।
- चूंकि AB || DC और BC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए \(\angle ABC + \angle DCB = 180^\circ\) (तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण)।
- \(\angle ABC + \angle ABC = 180^\circ\) \(\implies 2\angle ABC = 180^\circ\) \(\implies \angle ABC = 90^\circ\)।
- चूंकि एक समांतर चतुर्भुज का एक कोण \(90^\circ\) है, इसलिए उसके सभी कोण \(90^\circ\) होंगे (सम्मुख कोण बराबर और आसन्न कोणों का योग \(180^\circ\))।
- अतः, ABCD एक आयत है।
आयत के विकर्ण बराबर होते हैं और एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
लंबवत् विकर्ण वाले समांतर चतुर्भुज का समचतुर्भुज होना
- प्रमेय: यदि किसी समांतर चतुर्भुज के विकर्ण परस्पर लंबवत् हों, तो वह समचतुर्भुज होता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए जिसके विकर्ण AC और BD एक-दूसरे को बिंदु O पर लंबवत् प्रतिच्छेद करते हैं (अर्थात \(\angle AOD = 90^\circ\))।
- हमें सिद्ध करना है कि ABCD एक समचतुर्भुज है (अर्थात, इसकी सभी भुजाएँ बराबर हैं)।
- \(\triangle AOD\) और \(\triangle COD\) में:
- AO = OC (समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं)।
- \(\angle AOD = \angle COD = 90^\circ\) (दिया है कि विकर्ण लंबवत् हैं)।
- OD = OD (उभयनिष्ठ भुजा)।
- अतः, SAS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle AOD \cong \triangle COD\)।
- CPCTC से, AD = CD।
- चूंकि ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, इसलिए AB = CD और AD = BC।
- AD = CD और AD = BC \(\implies\) AB = BC = CD = DA।
- अतः, ABCD एक समचतुर्भुज है।
समचतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
समचतुर्भुज के विकर्णों का लंबवत् होना
- प्रमेय: एक समचतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे पर लंब होते हैं।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समचतुर्भुज ABCD लीजिए जिसके विकर्ण AC और BD एक-दूसरे को बिंदु O पर प्रतिच्छेद करते हैं।
- हमें सिद्ध करना है कि \(\angle AOB = 90^\circ\)।
- \(\triangle AOB\) और \(\triangle BOC\) में:
- AO = OC (समचतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज है, इसलिए इसके विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं)।
- OB = OB (उभयनिष्ठ भुजा)।
- AB = BC (समचतुर्भुज की भुजाएँ बराबर होती हैं)।
- अतः, SSS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle AOB \cong \triangle BOC\)।
- CPCTC से, \(\angle AOB = \angle BOC\)।
- चूंकि \(\angle AOB\) और \(\angle BOC\) एक रैखिक युग्म बनाते हैं, इसलिए \(\angle AOB + \angle BOC = 180^\circ\)।
- \(\angle AOB + \angle AOB = 180^\circ\) \(\implies 2\angle AOB = 180^\circ\) \(\implies \angle AOB = 90^\circ\)।
- अतः, समचतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे पर लंब होते हैं।
वर्ग के विकर्ण भी एक-दूसरे पर लंब होते हैं क्योंकि वर्ग एक विशेष प्रकार का समचतुर्भुज है।
समांतर चतुर्भुज के कोण समद्विभाजकों द्वारा आयत का निर्माण
- प्रमेय: एक समांतर चतुर्भुज के कोणों के समद्विभाजक एक आयत बनाते हैं।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक समांतर चतुर्भुज ABCD लीजिए। \(\angle A, \angle B, \angle C\) और \(\angle D\) के कोण समद्विभाजक P, Q, R, S पर प्रतिच्छेद करते हैं, जिससे चतुर्भुज PQRS बनता है।
- हमें सिद्ध करना है कि PQRS एक आयत है (अर्थात, इसके सभी कोण \(90^\circ\) हैं)।
- समांतर चतुर्भुज में, आसन्न कोणों का योग \(180^\circ\) होता है, इसलिए \(\angle A + \angle D = 180^\circ\)।
- \(\triangle ASD\) में, AS और DS क्रमशः \(\angle A\) और \(\angle D\) के समद्विभाजक हैं।
- \(\angle SAD = \frac{1}{2}\angle A\) और \(\angle SDA = \frac{1}{2}\angle D\)।
- \(\angle SAD + \angle SDA = \frac{1}{2}(\angle A + \angle D) = \frac{1}{2}(180^\circ) = 90^\circ\)।
- \(\triangle ASD\) में कोण योग गुणधर्म से: \(\angle SAD + \angle SDA + \angle ASD = 180^\circ\)।
- \(90^\circ + \angle ASD = 180^\circ\) \(\implies \angle ASD = 90^\circ\)।
- \(\angle PSR = \angle ASD = 90^\circ\) (शीर्षाभिमुख कोण)।
- इसी प्रकार, हम सिद्ध कर सकते हैं कि \(\angle PQR = \angle QRS = \angle RSP = 90^\circ\)।
- चूंकि चतुर्भुज PQRS के सभी कोण \(90^\circ\) हैं, अतः PQRS एक आयत है।
यह एक महत्वपूर्ण उपपत्ति है जो बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती है।
आयत और वर्ग के विकर्णों के विशेष गुण
- आयत के विकर्ण:
- आयत के विकर्ण समान लंबाई के होते हैं।
- आयत के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।
- विलोम: यदि किसी समांतर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों, तो वह एक आयत होता है।
- वर्ग के विकर्ण:
- वर्ग के विकर्ण समान लंबाई के होते हैं।
- वर्ग के विकर्ण एक-दूसरे को समकोण पर समद्विभाजित करते हैं।
- विलोम: यदि किसी समांतर चतुर्भुज के विकर्ण बराबर और एक-दूसरे पर लंब हों, तो वह एक वर्ग होता है।
वर्ग में आयत और समचतुर्भुज दोनों के गुणधर्म होते हैं।
समांतर चतुर्भुज के विकर्णों के गुणों पर आधारित प्रश्न
- समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं। इस गुण का उपयोग करके विकर्णों के खंडों की लंबाई ज्ञात की जा सकती है।
- उदाहरण 5: किसी समांतर चतुर्भुज ABCD में यदि विकर्णों का कटान बिंदु O हो और OA=3 सेमी. और OB = 4 सेमी. हो तो रेखाखण्ड OC, OD, AC और BD की लंबाई ज्ञात कीजिए।
- हल: चूंकि समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं:
- OC = OA = 3 सेमी.
- OD = OB = 4 सेमी.
- AC = AO + OC = 3 + 3 = 6 सेमी.
- BD = BO + OD = 4 + 4 = 8 सेमी.
ऐसे सीधे प्रश्न अक्सर छोटे अंकों के लिए पूछे जाते हैं। विकर्णों के समद्विभाजन गुण को याद रखें।
त्रिभुज की माध्यिका से समांतर चतुर्भुज का निर्माण
- उदाहरण 6: त्रिभुज ABC में भुजा BC पर खींची गई माध्यिका AD है जो E तक इस प्रकार बढ़ाई गई है कि AD=ED। सिद्ध कीजिए कि ABEC एक समांतर चतुर्भुज है।
- हल:
- \(\triangle ABD\) और \(\triangle ECD\) में:
- BD = DC (D, BC का मध्य-बिंदु है क्योंकि AD माध्यिका है)।
- \(\angle ADB = \angle EDC\) (शीर्षाभिमुख कोण)।
- AD = ED (दिया है)।
- अतः, SAS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle ABD \cong \triangle ECD\)।
- CPCTC से, AB = CE और \(\angle ABD = \angle ECD\)।
- चूंकि \(\angle ABD\) और \(\angle ECD\) रेखाओं AB और CE के साथ तिर्यक रेखा BC द्वारा बने एकांतर अंतः कोण हैं और बराबर हैं, इसलिए AB || CE।
- चतुर्भुज ABEC में, AB || CE और AB = CE (सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर और समांतर है)।
- अतः, ABEC एक समांतर चतुर्भुज है।
यह प्रश्न सर्वांगसमता और समांतर चतुर्भुज के गुणों को एक साथ लागू करने का एक अच्छा उदाहरण है।
एक युग्म भुजाओं की समानता और बराबरी से समांतर चतुर्भुज की पहचान
- प्रमेय 11.7: किसी चतुर्भुज में यदि उसकी सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर हो और समांतर हो, तो ऐसा चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज होता है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक चतुर्भुज ABCD लीजिए जिसमें AB || DC और AB = DC। विकर्ण AC खींचिए।
- \(\triangle ABC\) और \(\triangle CDA\) में:
- AB = DC (दिया है)।
- \(\angle BAC = \angle DCA\) (AB || DC और AC एक तिर्यक रेखा है, इसलिए एकांतर अंतः कोण)।
- AC = CA (उभयनिष्ठ भुजा)।
- अतः, SAS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle ABC \cong \triangle CDA\)।
- CPCTC से, BC = DA और \(\angle BCA = \angle DAC\)।
- चूंकि \(\angle BCA\) और \(\angle DAC\) एकांतर अंतः कोण हैं और बराबर हैं, इसलिए AD || BC।
- चूंकि सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म (AB || DC और AD || BC) समांतर हैं, अतः ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।
समांतर चतुर्भुज सिद्ध करने के लिए यह एक और महत्वपूर्ण शर्त है।
समांतर चतुर्भुज के मध्य बिंदुओं से बने चतुर्भुज
- उदाहरण 7: ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, जिसमें P और Q क्रमशः सम्मुख भुजाओं AB और CD के मध्य-बिंदु हैं। यदि AQ, DP को S पर प्रतिच्छेद करें और BQ, CP को R पर प्रतिच्छेद करें तो दर्शाइए कि-
- (i) APCQ एक समांतर चतुर्भुज है।
- (ii) DPBQ एक समांतर चतुर्भुज है।
- (iii) PSQR एक समांतर चतुर्भुज है।
- हल:
- (i) APCQ को समांतर चतुर्भुज सिद्ध करना:
- ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, इसलिए AB || DC और AB = DC।
- P, AB का मध्य-बिंदु है \(\implies AP = \frac{1}{2}AB\)।
- Q, CD का मध्य-बिंदु है \(\implies CQ = \frac{1}{2}CD\)।
- चूंकि AB = CD, इसलिए \(AP = CQ\)।
- AP || QC (क्योंकि AB || DC)।
- चतुर्भुज APCQ में, सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (AP और QC) बराबर और समांतर है।
- अतः, APCQ एक समांतर चतुर्भुज है।
- (ii) DPBQ को समांतर चतुर्भुज सिद्ध करना:
- इसी प्रकार, DP || BQ (क्योंकि DC || AB)।
- DP = \(\frac{1}{2}DC\) और BQ = \(\frac{1}{2}AB\)।
- चूंकि DC = AB, इसलिए DP = BQ।
- चतुर्भुज DPBQ में, सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (DP और BQ) बराबर और समांतर है।
- अतः, DPBQ एक समांतर चतुर्भुज है।
- (iii) PSQR को समांतर चतुर्भुज सिद्ध करना:
- APCQ एक समांतर चतुर्भुज है (भाग i से), इसलिए AQ || PC।
- DPBQ एक समांतर चतुर्भुज है (भाग ii से), इसलिए DP || QB।
- चतुर्भुज PSQR में:
- SP || QR (क्योंकि DP || QB और SP, DP का भाग है, QR, QB का भाग है)।
- SQ || PR (क्योंकि AQ || PC और SQ, AQ का भाग है, PR, PC का भाग है)।
- चूंकि सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं, अतः PSQR एक समांतर चतुर्भुज है।
यह प्रश्न कई प्रमेयों का एक साथ उपयोग करता है और बोर्ड परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
मध्य बिंदु प्रमेय
- प्रमेय 11.8: किसी त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा तीसरी भुजा के समांतर और उसकी आधी होती है।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- एक \(\triangle ABC\) लीजिए जिसमें D और E क्रमशः AB और AC के मध्य-बिंदु हैं। DE को F तक इस प्रकार बढ़ाइए कि DE = EF। C को F से मिलाइए।
- \(\triangle ADE\) और \(\triangle CFE\) में:
- AE = CE (E, AC का मध्य-बिंदु है)।
- \(\angle AED = \angle CEF\) (शीर्षाभिमुख कोण)।
- DE = EF (रचना से)।
- अतः, SAS सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle ADE \cong \triangle CFE\)।
- CPCTC से, AD = CF और \(\angle ADE = \angle CFE\)।
- चूंकि D, AB का मध्य-बिंदु है, इसलिए AD = BD। अतः, BD = CF।
- चूंकि \(\angle ADE\) और \(\angle CFE\) एकांतर अंतः कोण हैं और बराबर हैं, इसलिए AD || CF।
- चूंकि AD || CF, इसलिए BD || CF।
- चतुर्भुज DBCF में, सम्मुख भुजाओं का एक युग्म (BD और CF) बराबर और समांतर है।
- अतः, DBCF एक समांतर चतुर्भुज है।
- समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर और समांतर होती हैं, इसलिए DF || BC और DF = BC।
- चूंकि DE = EF और DF = DE + EF, इसलिए DF = 2DE।
- अतः, BC = 2DE \(\implies DE = \frac{1}{2}BC\)।
- इस प्रकार, DE || BC और \(DE = \frac{1}{2}BC\)।
- मध्य-बिंदु प्रमेय का विलोम:
- किसी त्रिभुज की एक भुजा के मध्य-बिंदु से दूसरी भुजा के समांतर खींची गई रेखा तीसरी भुजा को समद्विभाजित करती है।
मध्य-बिंदु प्रमेय: यदि D और E क्रमशः \(\triangle ABC\) की भुजाओं AB और AC के मध्य-बिंदु हैं, तो \(DE \parallel BC\) और \(DE = \frac{1}{2}BC\).
मध्य-बिंदु प्रमेय और इसका विलोम दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनकी उपपत्ति और अनुप्रयोग दोनों पर ध्यान दें।
तीन समांतर रेखाओं और तिर्यक रेखाओं का गुणधर्म
- प्रमेय 11.9: यदि तीन समांतर रेखाएँ (l, m, n) किसी एक तिर्यक रेखा (p) पर समान अंतःखंड (DE = EF) काटती हैं, तो वे किसी भी अन्य तिर्यक रेखा (q) पर भी समान अंतःखंड (AB = BC) काटेंगी।
- उपपत्ति (प्रमाण):
- दी गई हैं तीन समांतर रेखाएँ l, m, n और दो तिर्यक रेखाएँ p और q।
- तिर्यक रेखा p, l, m, n को क्रमशः D, E, F पर काटती है, और DE = EF दिया है।
- तिर्यक रेखा q, l, m, n को क्रमशः A, B, C पर काटती है। हमें AB = BC सिद्ध करना है।
- बिंदु E से होकर q के समांतर एक रेखा खींचिए जो l और n को क्रमशः G और H पर काटती है।
- चतुर्भुज AGEB एक समांतर चतुर्भुज है (क्योंकि AG || BE और GE || AB)। अतः, AG = BE और GE = AB।
- चतुर्भुज BEHC एक समांतर चतुर्भुज है (क्योंकि BE || CH और EH || BC)। अतः, BE = CH और EH = BC।
- \(\triangle GED\) और \(\triangle HEF\) में:
- \(\angle DGE = \angle FHE\) (एकांतर कोण, क्योंकि GE || EH और DF एक तिर्यक रेखा है)।
- DE = EF (दिया है)।
- \(\angle DEG = \angle FEH\) (शीर्षाभिमुख कोण)।
- अतः, ASA सर्वांगसमता नियम से, \(\triangle GED \cong \triangle HEF\).
- CPCTC से, GE = EH।
- चूंकि GE = AB और EH = BC, इसलिए AB = BC।
- अतः, तीन समांतर रेखाएँ किसी भी तिर्यक रेखा पर समान अंतःखंड काटती हैं यदि वे एक तिर्यक रेखा पर समान अंतःखंड काटती हों।
यह प्रमेय भी बोर्ड परीक्षाओं में उपपत्ति के लिए महत्वपूर्ण है। रचना और सर्वांगसमता का उपयोग ध्यान से करें।