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त्रिभुजों की सर्वांगसमता
Chhattisgarh · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 10

त्रिभुजों की सर्वांगसमता

सर्वांगसमता की परिभाषासर्वांगसमता के मानदंड (SAS, ASA, SSS, AAS, RHS)समद्विबाहु त्रिभुज के गुणएक ही आधार और समांतर रेखाओं के बीच बनी आकृतियाँत्रिभुजों में असमानताएँ

अध्याय 'त्रिभुजों की सर्वांगसमता' में आप सीखेंगे कि दो आकृतियाँ कब सर्वांगसम कहलाती हैं, विशेष रूप से त्रिभुजों के संदर्भ में। आप सर्वांगसमता के विभिन्न मानदंडों जैसे SAS, ASA, SSS, AAS और RHS को समझेंगे। यह अध्याय समद्विबाहु त्रिभुज के गुणों और सर्वांगसमता के अनुप्रयोगों पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें एक ही आधार और समांतर रेखाओं के बीच बनी आकृतियों के क्षेत्रफल के संबंध शामिल हैं। त्रिभुजों में असमानताओं की अवधारणा भी प्रस्तुत की गई है, जो छात्रों को ज्यामितीय आकृतियों के गुणों को गहराई से समझने में मदद करती है।

सर्वांगसमता का परिचय

सर्वांगसमता का अर्थ है "सभी अंगों का समान होना"। ऐसी आकृतियाँ जिनके सभी अंग समान होते हैं, एक-दूसरे को पूरी तरह से ढँक लेती हैं।

  • ज्यामितीय आकृतियों की सर्वांगसमता:
  • दो आकृतियाँ सर्वांगसम कहलाती हैं यदि उनका आकार (shape) और माप (size) समान हो।
  • यदि एक आकृति को दूसरी आकृति पर रखा जाए और वे एक-दूसरे को पूरी तरह से ढँक लें, तो वे सर्वांगसम होती हैं।
  • त्रिभुजों के संदर्भ में सर्वांगसमता:
  • दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी संगत भुजाएँ और संगत कोण समान हों।
  • उदाहरण के लिए, यदि \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) है, तो:
  • संगत भुजाएँ: \(AB = PQ\), \(BC = QR\), \(AC = PR\)
  • संगत कोण: \(\angle A = \angle P\), \(\angle B = \angle Q\), \(\angle C = \angle R\)
  • सर्वांगसमता का चिह्न:
  • सर्वांगसमता को "\(\cong\)" चिह्न से दर्शाया जाता है। जैसे \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\).
  • संगतता का महत्व:
  • सर्वांगसमता लिखते समय शीर्षों के क्रम का सही होना बहुत महत्वपूर्ण है।
  • यदि \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) है, तो इसका अर्थ है कि A, P के संगत है; B, Q के संगत है; और C, R के संगत है।
  • हम \(\triangle ABC \cong \triangle RQP\) नहीं लिख सकते, क्योंकि इससे संगतता बदल जाती है।
  • CPCT (Corresponding Parts of Congruent Triangles):
  • सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भागों के लिए संक्षेप में स.त्रि.स.भ. या CPCT (Corresponding Parts of Congruent Triangles) लिखा जाता है।
  • इसका अर्थ है कि यदि दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं, तो उनके सभी संगत भाग (भुजाएँ और कोण) बराबर होते हैं।
महत्त्वपूर्ण

सर्वांगसमता की जाँच के लिए सभी अंगों की समानता दिखाना हमेशा आवश्यक नहीं होता। कुछ विशेष कसौटियों का उपयोग करके भी सर्वांगसमता सिद्ध की जा सकती है।

विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों में सर्वांगसमता

  • वर्गों की सर्वांगसमता:
  • दो वर्ग सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी एक भुजा की लंबाई समान हो।
  • उदाहरण: यदि वर्ग ABCD की भुजा AB, वर्ग PQRS की भुजा PQ के बराबर है (यानी \(AB = PQ\)), तो वर्ग ABCD \(\cong\) वर्ग PQRS।
  • वृत्तों की सर्वांगसमता:
  • दो वृत्त सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी त्रिज्याएँ समान हों।
  • उदाहरण: यदि वृत्त 1 की त्रिज्या \(r_1\) और वृत्त 2 की त्रिज्या \(r_2\) है, और \(r_1 = r_2\), तो दोनों वृत्त सर्वांगसम हैं।
  • आयत की सर्वांगसमता:
  • दो आयत सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी संगत आसन्न भुजाओं की माप बराबर हों।
  • उदाहरण: यदि आयत ABCD की भुजाएँ AB और AD, आयत PQRS की भुजाओं PQ और PS के बराबर हैं (यानी \(AB = PQ\) और \(AD = PS\)), तो आयत ABCD \(\cong\) आयत PQRS।
  • त्रिभुजों की सर्वांगसमता का महत्व:
  • त्रिभुज ज्यामिति में सबसे कम रेखाखंडों से बनी बंद आकृति है।
  • सभी बहुभुज त्रिभुजों से ही बने होते हैं, इसलिए त्रिभुजों की सर्वांगसमता पहचानना बहुभुजों की सर्वांगसमता जाँचने के लिए उपयोगी है।
महत्त्वपूर्ण

संक्षेप में:

  1. दो वर्ग सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी भुजाएँ समान हों।
  2. दो वृत्त सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी त्रिज्याएँ समान हों।
  3. दो आयत सर्वांगसम होते हैं यदि उनकी संगत आसन्न भुजाएँ बराबर हों।

त्रिभुजों की सर्वांगसमता के नियम

त्रिभुजों की सर्वांगसमता की जाँच के लिए कुछ कसौटियाँ (नियम) हैं, जिन्हें अभिधारणा (स्वयं सिद्ध सत्य) माना जाता है या प्रमेय के रूप में सिद्ध किया जाता है।

1. SAS सर्वांगसमता नियम (भुजा-कोण-भुजा)

  • कथन: दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण (उनके बीच का कोण) दूसरे त्रिभुज की संगत दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।
  • संक्षेप में: \(S \rightarrow A \rightarrow S\)
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) में:
  • \(AB = DE\) (भुजा)
  • \(\angle B = \angle E\) (अंतर्गत कोण)
  • \(BC = EF\) (भुजा)

तो, \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\) (SAS नियम से)।

2. ASA सर्वांगसमता नियम (कोण-भुजा-कोण)

  • कथन: दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनके बीच की भुजा दूसरे त्रिभुज के संगत दो कोणों और उनके बीच की भुजा के बराबर हों।
  • संक्षेप में: \(A \rightarrow S \rightarrow A\)
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) में:
  • \(\angle B = \angle E\) (कोण)
  • \(BC = EF\) (अंतर्गत भुजा)
  • \(\angle C = \angle F\) (कोण)

तो, \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\) (ASA नियम से)।

3. SSS सर्वांगसमता नियम (भुजा-भुजा-भुजा)

  • कथन: दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की संगत तीनों भुजाओं के बराबर हों।
  • संक्षेप में: \(S \rightarrow S \rightarrow S\)
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) में:
  • \(AB = DE\)
  • \(BC = EF\)
  • \(AC = DF\)

तो, \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\) (SSS नियम से)।

4. AAS सर्वांगसमता प्रमेय (कोण-कोण-भुजा)

  • कथन: दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज के दो कोण और एक असंगत भुजा (जो कोणों के बीच न हो) दूसरे त्रिभुज के संगत दो कोणों और संगत असंगत भुजा के बराबर हों।
  • संक्षेप में: \(A \rightarrow A \rightarrow S\)
  • उपपत्ति:
  • यदि दो कोण बराबर हैं, तो त्रिभुज के कोण योग गुणधर्म से तीसरा कोण भी बराबर होगा।
  • इससे यह ASA नियम में परिवर्तित हो जाता है।
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) में:
  • \(\angle A = \angle D\)
  • \(\angle C = \angle F\)
  • \(BC = EF\) (यहाँ BC, \(\angle B\) और \(\angle C\) के बीच की भुजा नहीं है)

तो, \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\) (AAS प्रमेय से)।

5. RHS सर्वांगसमता प्रमेय (समकोण-कर्ण-भुजा)

  • कथन: दो समकोण त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा दूसरे त्रिभुज के संगत कर्ण और एक भुजा के बराबर हों।
  • संक्षेप में: \(R \rightarrow H \rightarrow S\)
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) दो समकोण त्रिभुज हैं (जहाँ \(\angle B = \angle E = 90^\circ\)) और:
  • \(AC = DF\) (कर्ण)
  • \(BC = EF\) (भुजा)

तो, \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\) (RHS प्रमेय से)।

📖परिभाषा

अभिगृहीत (Axiom): एक स्वयं सिद्ध कथन जिसे सभी विषयों में सत्य माना जाता है। अभिधारणा (Postulate): एक स्वयं सिद्ध कथन जो किसी विशेष विषय (जैसे ज्यामिति) से संबंधित होता है। प्रमेय (Theorem): एक गणितीय कथन जिसे अभिगृहीतों, अभिधारणाओं और परिभाषाओं का उपयोग करके तार्किक रूप से सिद्ध किया जाता है। उपप्रमेय (Corollary): एक प्रमेय जो सीधे किसी अन्य प्रमेय से व्युत्पन्न होता है।

💡सुझाव

बोर्ड परीक्षा में सर्वांगसमता के नियमों को सही क्रम में लिखना और उनका सही संक्षिप्त नाम (जैसे SAS, ASA) उपयोग करना महत्वपूर्ण है। CPCT का उपयोग करते समय संगतता का ध्यान रखें।

समद्विबाहु त्रिभुज के गुणधर्म

एक त्रिभुज जिसकी दो भुजाएँ बराबर होती हैं, उसे समद्विबाहु त्रिभुज (Isosceles Triangle) कहते हैं।

1. प्रमेय 10.3: बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण

  • कथन: किसी भी समद्विबाहु त्रिभुज में, बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं
  • उपपत्ति (Proof):
  • माना \(\triangle ABC\) एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें \(AB = AC\) है।
  • हमें सिद्ध करना है कि \(\angle B = \angle C\).
  • \(\angle A\) का कोणार्द्धक \(AD\) खींचिए जो \(BC\) को \(D\) पर मिलता है।
  • अब \(\triangle BAD\) और \(\triangle CAD\) में:
  • \(AB = AC\) (दिया है)
  • \(\angle BAD = \angle CAD\) (रचना से, \(AD\) कोणार्द्धक है)
  • \(AD = AD\) (उभयनिष्ठ भुजा)
  • इसलिए, \(\triangle BAD \cong \triangle CAD\) (SAS सर्वांगसमता नियम से)।
  • अतः, \(\angle ABD = \angle ACD\) (CPCT से)।
  • यानी, \(\angle B = \angle C\).

2. प्रमेय 10.4: बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ (प्रमेय 10.3 का विलोम)

  • कथन: यदि किसी त्रिभुज के दो कोण बराबर हों, तो उनकी सम्मुख भुजाएँ भी बराबर होंगी
  • उपपत्ति (Proof):
  • माना \(\triangle ABC\) में \(\angle B = \angle C\) है।
  • हमें सिद्ध करना है कि \(AB = AC\).
  • \(\angle A\) का कोणार्द्धक \(AD\) खींचिए जो \(BC\) को \(D\) पर मिलता है।
  • अब \(\triangle ABD\) और \(\triangle ACD\) में:
  • \(\angle B = \angle C\) (दिया है)
  • \(\angle BAD = \angle CAD\) (रचना से)
  • \(AD = AD\) (उभयनिष्ठ भुजा)
  • इसलिए, \(\triangle ABD \cong \triangle ACD\) (AAS सर्वांगसमता प्रमेय से)।
  • अतः, \(AB = AC\) (CPCT से)।

3. समबाहु त्रिभुज के गुणधर्म

  • एक समबाहु त्रिभुज की सभी भुजाएँ बराबर होती हैं।
  • एक समबाहु त्रिभुज के सभी कोण बराबर होते हैं (प्रत्येक \(60^\circ\) का)।
  • यह समद्विबाहु त्रिभुज के गुणधर्म का एक विशेष मामला है। यदि \(AB=BC=CA\), तो \(\angle A=\angle B=\angle C\). त्रिभुज के कोणों का योग \(180^\circ\) होता है, इसलिए प्रत्येक कोण \(180^\circ/3 = 60^\circ\) होगा।
याद रखें

ये दोनों प्रमेय (प्रमेय 10.3 और 10.4) एक-दूसरे के विलोम हैं और त्रिभुजों की समस्याओं को हल करने में बहुत उपयोगी होते हैं। इन्हें अच्छी तरह से याद रखें।

सर्वांगसम आकृतियों के क्षेत्रफल

  • सर्वांगसम आकृतियों के क्षेत्रफल:
  • यदि दो आकृतियाँ सर्वांगसम हैं, तो उनके क्षेत्रफल हमेशा समान होते हैं।
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\), तो \(क्षेत्रफल(\triangle ABC) = क्षेत्रफल(\triangle PQR)\).
  • समान क्षेत्रफल वाली आकृतियाँ:
  • यदि दो आकृतियों के क्षेत्रफल समान हैं, तो यह आवश्यक नहीं है कि वे सर्वांगसम हों।
  • उदाहरण: एक \(3 \times 4\) आयत का क्षेत्रफल \(12\) वर्ग इकाई है। एक \(2 \times 6\) आयत का क्षेत्रफल भी \(12\) वर्ग इकाई है। इनके क्षेत्रफल समान हैं, लेकिन ये सर्वांगसम नहीं हैं क्योंकि इनके आकार अलग-अलग हैं।
  • इसी प्रकार, दो त्रिभुजों का क्षेत्रफल समान हो सकता है, लेकिन वे सर्वांगसम न हों (आकार भिन्न हो)।
  • एक ही आधार और समांतर रेखाओं के बीच बनी आकृतियाँ:
  • परिभाषा: दो आकृतियाँ एक ही आधार और समांतर रेखाओं के एक ही जोड़े के बीच बनी मानी जाती हैं, यदि उनका एक उभयनिष्ठ आधार हो और उभयनिष्ठ आधार के सम्मुख शीर्ष या भुजाएँ उभयनिष्ठ आधार के समांतर एक रेखा पर स्थित हों।
  • प्रमेय 10.5: एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच बने समांतर चतुर्भुजों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं
  • प्रमेय 10.6: एक ही आधार पर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच बने त्रिभुज, क्षेत्रफल में बराबर होते हैं
  • त्रिभुज का क्षेत्रफल सूत्र:
  • प्रमेय 10.7: किसी त्रिभुज का क्षेत्रफल उसके आधार और उसकी संगत ऊँचाई के गुणनफल का आधा होता है।
  • सूत्र: \(क्षेत्रफल = \frac{1}{2} \times आधार \times ऊँचाई\)
  • उपपत्ति: एक त्रिभुज को एक समांतर चतुर्भुज के आधे भाग के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल \(आधार \times ऊँचाई\) होता है।
🚧ग़लत धारणा

याद रखें, समान क्षेत्रफल का अर्थ हमेशा सर्वांगसमता नहीं होता, लेकिन सर्वांगसम आकृतियों का क्षेत्रफल हमेशा समान होता है।

त्रिभुजों में असमानताएँ

त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच कुछ महत्वपूर्ण असमानताएँ होती हैं।

1. प्रमेय 10.8: बड़ी भुजा के सामने का कोण

  • कथन: यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाएँ असमान हैं, तो बड़ी भुजा के सामने का कोण बड़ा होता है
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) में \(AC > AB\) है, तो \(\angle B > \angle C\).

2. प्रमेय 10.9: बड़े कोण की सम्मुख भुजा

  • कथन: किसी त्रिभुज में, बड़े कोण की सम्मुख भुजा बड़ी होती है। (प्रमेय 10.8 का विलोम)
  • उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) में \(\angle B > \angle C\) है, तो \(AC > AB\).

3. प्रमेय 10.10: त्रिभुज की भुजाओं का योग

  • कथन: एक त्रिभुज में किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से अधिक होता है
  • उदाहरण: \(\triangle ABC\) में:
  • \(AB + BC > AC\)
  • \(BC + CA > AB\)
  • \(CA + AB > BC\)
  • महत्व: यह गुणधर्म यह निर्धारित करने में मदद करता है कि दी गई भुजाओं की लंबाई से एक त्रिभुज का निर्माण संभव है या नहीं। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती, तो त्रिभुज बनाना संभव नहीं है।

4. समकोण त्रिभुज में असमानता

  • एक समकोण त्रिभुज में, कर्ण सबसे लंबी भुजा होती है। (यह प्रमेय 10.9 का एक परिणाम है, क्योंकि समकोण सबसे बड़ा कोण होता है)।
💡सुझाव

त्रिभुज असमानताओं पर आधारित प्रश्न अक्सर MCQ या छोटे उत्तर वाले प्रश्नों में पूछे जाते हैं, जहाँ आपको दी गई भुजाओं या कोणों के आधार पर संबंधों की पहचान करनी होती है।

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