त्रिकोणमितीय अनुपात एवं सर्वसमिकाएँ
अध्याय 'त्रिकोणमितीय अनुपात एवं सर्वसमिकाएँ' छात्रों को समकोण त्रिभुजों में कोणों और भुजाओं के बीच संबंधों से परिचित कराता है। आप sin, cos, tan जैसे विभिन्न त्रिकोणमितीय अनुपातों के बारे में जानेंगे, उनके व्युत्क्रमों को समझेंगे, और पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं को सिद्ध करना सीखेंगे। यह अध्याय 0°, 30°, 45°, 60° और 90° जैसे विशिष्ट कोणों के लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों के मानों की गणना करना भी सिखाता है, जो आगे चलकर त्रिकोणमिति के अनुप्रयोगों को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
त्रिकोणमितीय अनुपात की प्रारंभिक अवधारणा
त्रिकोणमिति गणित की वह शाखा है जो त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंध का अध्ययन करती है। विशेष रूप से, यह समकोण त्रिभुज पर केंद्रित है।
- सीढ़ी का उदाहरण:
- जब सीढ़ी दीवार से टिकी होती है, तो यह जमीन और दीवार के साथ एक समकोण त्रिभुज बनाती है।
- सीढ़ी के पायदानों की ऊँचाई (लंब) और दीवार से दूरी (आधार) का अनुपात स्थिर रहता है, जब तक कि सीढ़ी का जमीन के साथ कोण न बदले।
- यह अनुपात ही त्रिकोणमितीय अनुपात की मूल अवधारणा है।
- कोण और अनुपात:
- यदि सीढ़ी का जमीन के साथ कोण बढ़ता है, तो लंब और आधार का अनुपात भी बढ़ता है।
- इस अनुपात को कोण का टेंजेंट (tangent) कहा जाता है।
- समकोण त्रिभुज में:
- कोण के सामने की भुजा को लंब कहते हैं।
- कोण से सटी हुई भुजा को आधार कहते हैं।
- समकोण के सामने की भुजा को कर्ण कहते हैं। यह त्रिभुज की सबसे लंबी भुजा होती है।
त्रिकोणमितीय अनुपात केवल न्यूनकोणों (0° से 90° के बीच के कोणों) के लिए परिभाषित होते हैं, जो समकोण त्रिभुज में होते हैं।
त्रिकोणमितीय अनुपातों की परिभाषा (sin, cos, tan)
एक समकोण त्रिभुज में, किसी न्यूनकोण के लिए छह त्रिकोणमितीय अनुपात परिभाषित किए जाते हैं। ये अनुपात कोण की भुजाओं के अनुपात होते हैं।
- कोण \(\theta\) के लिए (चित्र: [IMAGE: TODO: Right triangle with angle theta])
- लंब (Perpendicular): कोण \(\theta\) के सामने वाली भुजा।
- आधार (Base): कोण \(\theta\) से सटी हुई भुजा (कर्ण को छोड़कर)।
- कर्ण (Hypotenuse): समकोण के सामने वाली भुजा।
- मुख्य त्रिकोणमितीय अनुपात:
- साइन (Sine \(\theta\) या \(\sin \theta\)):
- \(\sin \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}}\)
- कोसाइन (Cosine \(\theta\) या \(\cos \theta\)):
- \(\cos \theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}}\)
- टेंजेंट (Tangent \(\theta\) या \(\tan \theta\)):
- \(\tan \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}}\)
- याद रखने का तरीका:
- "लाल कक्का" या "पंडित बद्री प्रसाद हर हर बोले"
- लंब / कर्ण = \(\sin \theta\)
- आधार / कर्ण = \(\cos \theta\)
- लंब / आधार = \(\tan \theta\)
किसी भी समकोण त्रिभुज में, एक निश्चित न्यूनकोण के लिए इन अनुपातों का मान हमेशा स्थिर रहता है, चाहे त्रिभुज का आकार कुछ भी हो।
त्रिकोणमितीय अनुपातों में संबंध (tan, sin, cos)
त्रिकोणमितीय अनुपातों के बीच कुछ महत्वपूर्ण संबंध होते हैं जो समस्याओं को हल करने में सहायक होते हैं।
- \(\tan \theta\) का \(\sin \theta\) और \(\cos \theta\) से संबंध:
- हमें पता है: \(\tan \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}}\)
- और: \(\sin \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}}\) तथा \(\cos \theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}}\)
- यदि हम \(\sin \theta\) को \(\cos \theta\) से भाग दें:
\(\frac{\sin \theta}{\cos \theta} = \frac{\frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}}}{\frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}}} = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}}\)
- अतः, \(\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta}\)
- यह संबंध बहुत महत्वपूर्ण है और इसका उपयोग कई त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं को सिद्ध करने और व्यंजकों को सरल बनाने में किया जाता है।
\(\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta}\)
अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात और उनके व्युत्क्रम
मुख्य तीन अनुपातों \(\sin \theta, \cos \theta, \tan \theta\) के व्युत्क्रम (reciprocals) भी तीन अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात होते हैं।
- कोसेकेंट (Cosecant \(\theta\) या \(\csc \theta\) या \(\cosec \theta\)):
- यह \(\sin \theta\) का व्युत्क्रम है।
- \(\csc \theta = \frac{1}{\sin \theta} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{लंब}}\)
- सेकेंट (Secant \(\theta\) या \(\sec \theta\)):
- यह \(\cos \theta\) का व्युत्क्रम है।
- \(\sec \theta = \frac{1}{\cos \theta} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{आधार}}\)
- कोटेंजेंट (Cotangent \(\theta\) या \(\cot \theta\)):
- यह \(\tan \theta\) का व्युत्क्रम है।
- \(\cot \theta = \frac{1}{\tan \theta} = \frac{\text{आधार}}{\text{लंब}}\)
- इसे \(\frac{\cos \theta}{\sin \theta}\) के रूप में भी लिखा जा सकता है।
- सारांश तालिका:
| अनुपात | परिभाषा | व्युत्क्रम संबंध | | :------------- | :--------------------------------------- | :-------------------------------------------- | | \(\sin \theta\) | \(\frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}}\) | \(\frac{1}{\csc \theta}\) | | \(\cos \theta\) | \(\frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}}\) | \(\frac{1}{\sec \theta}\) | | \(\tan \theta\) | \(\frac{\text{लंब}}{\text{आधार}}\) | \(\frac{1}{\cot \theta}\) | | \(\csc \theta\) | \(\frac{\text{कर्ण}}{\text{लंब}}\) | \(\frac{1}{\sin \theta}\) | | \(\sec \theta\) | \(\frac{\text{कर्ण}}{\text{आधार}}\) | \(\frac{1}{\cos \theta}\) | | \(\cot \theta\) | \(\frac{\text{आधार}}{\text{लंब}}\) | \(\frac{1}{\tan \theta}\) |
इन व्युत्क्रम संबंधों को याद रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये त्रिकोणमितीय व्यंजकों को सरल बनाने और सर्वसमिकाओं को सिद्ध करने में बहुत काम आते हैं।
पाइथागोरस प्रमेय और त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ
पाइथागोरस प्रमेय समकोण त्रिभुज की भुजाओं के बीच संबंध स्थापित करता है। इसी प्रमेय का उपयोग करके हम तीन मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ व्युत्पन्न कर सकते हैं।
- पाइथागोरस प्रमेय:
- एक समकोण त्रिभुज में, \(\text{लंब}^2 + \text{आधार}^2 = \text{कर्ण}^2\)
- सर्वसमिका 1: \(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1\)
- व्युत्पत्ति:
- पाइथागोरस प्रमेय से: \(P^2 + B^2 = H^2\) (जहाँ P=लंब, B=आधार, H=कर्ण)
- दोनों पक्षों को \(H^2\) से भाग देने पर:
\(\frac{P^2}{H^2} + \frac{B^2}{H^2} = \frac{H^2}{H^2}\)
- \(\left(\frac{P}{H}\right)^2 + \left(\frac{B}{H}\right)^2 = 1\)
- चूंकि \(\frac{P}{H} = \sin \theta\) और \(\frac{B}{H} = \cos \theta\), अतः
\(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1\)
- अन्य रूप:
- \(\sin^2 \theta = 1 - \cos^2 \theta\)
- \(\cos^2 \theta = 1 - \sin^2 \theta\)
- सर्वसमिका 2: \(1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta\)
- व्युत्पत्ति:
- पाइथागोरस प्रमेय से: \(P^2 + B^2 = H^2\)
- दोनों पक्षों को \(B^2\) से भाग देने पर:
\(\frac{P^2}{B^2} + \frac{B^2}{B^2} = \frac{H^2}{B^2}\)
- \(\left(\frac{P}{B}\right)^2 + 1 = \left(\frac{H}{B}\right)^2\)
- चूंकि \(\frac{P}{B} = \tan \theta\) और \(\frac{H}{B} = \sec \theta\), अतः
\(1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta\)
- अन्य रूप:
- \(\tan^2 \theta = \sec^2 \theta - 1\)
- \(\sec^2 \theta - \tan^2 \theta = 1\)
- सर्वसमिका 3: \(1 + \cot^2 \theta = \csc^2 \theta\)
- व्युत्पत्ति:
- पाइथागोरस प्रमेय से: \(P^2 + B^2 = H^2\)
- दोनों पक्षों को \(P^2\) से भाग देने पर:
\(\frac{P^2}{P^2} + \frac{B^2}{P^2} = \frac{H^2}{P^2}\)
- \(1 + \left(\frac{B}{P}\right)^2 = \left(\frac{H}{P}\right)^2\)
- चूंकि \(\frac{B}{P} = \cot \theta\) और \(\frac{H}{P} = \csc \theta\), अतः
\(1 + \cot^2 \theta = \csc^2 \theta\)
- अन्य रूप:
- \(\cot^2 \theta = \csc^2 \theta - 1\)
- \(\csc^2 \theta - \cot^2 \theta = 1\)
- त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ: ये समीकरण कोण \(\theta\) के सभी मानों के लिए सत्य होते हैं (कुछ प्रतिबंधों के साथ, जैसे \(\tan \theta\) और \(\sec \theta\) के लिए \(\theta \neq 90^\circ\), और \(\cot \theta\) और \(\csc \theta\) के लिए \(\theta \neq 0^\circ\))।
तीन मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ:
- \(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1\)
- \(1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta\)
- \(1 + \cot^2 \theta = \csc^2 \theta\)
इन सर्वसमिकाओं को अच्छी तरह याद कर लें और उनके विभिन्न रूपों को भी समझ लें। ये बोर्ड परीक्षाओं में सिद्ध करने वाले प्रश्नों और मान ज्ञात करने वाले प्रश्नों में बहुत उपयोगी होते हैं।
एक अनुपात से अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात करना
यदि हमें किसी कोण का एक त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात हो, तो हम पाइथागोरस प्रमेय और त्रिकोणमितीय संबंधों का उपयोग करके अन्य सभी पाँच त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात कर सकते हैं।
- विधि 1: समकोण त्रिभुज बनाकर
- दिए गए अनुपात का उपयोग करके समकोण त्रिभुज की दो भुजाओं का अनुपात लिखें।
- इन भुजाओं को \(k\) (या \(x\)) के पदों में मान लें। उदाहरण के लिए, यदि \(\sin \theta = \frac{3}{5}\), तो लंब \(= 3k\) और कर्ण \(= 5k\) मान लें।
- पाइथागोरस प्रमेय \((P^2 + B^2 = H^2)\) का उपयोग करके तीसरी भुजा ज्ञात करें।
- अब, त्रिभुज की तीनों भुजाएँ ज्ञात होने पर, किसी भी अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात की परिभाषा का उपयोग करके उनका मान ज्ञात करें।
- विधि 2: त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं का उपयोग करके
- दिए गए अनुपात से संबंधित सर्वसमिका का उपयोग करें। उदाहरण के लिए, यदि \(\sin \theta\) ज्ञात है, तो \(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1\) का उपयोग करके \(\cos \theta\) ज्ञात करें।
- फिर, \(\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta}\) जैसे संबंधों का उपयोग करके अन्य अनुपात ज्ञात करें।
- व्युत्क्रम संबंधों \((\csc \theta = \frac{1}{\sin \theta}\) आदि) का उपयोग करके शेष अनुपात ज्ञात करें।
- उदाहरण: यदि \(\sin \theta = \frac{3}{5}\) है, तो अन्य अनुपात ज्ञात करें।
- विधि 1:
- लंब \(= 3k\), कर्ण \(= 5k\)
- आधार \(= \sqrt{(5k)^2 - (3k)^2} = \sqrt{25k^2 - 9k^2} = \sqrt{16k^2} = 4k\)
- अब:
- \(\cos \theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}} = \frac{4k}{5k} = \frac{4}{5}\)
- \(\tan \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}} = \frac{3k}{4k} = \frac{3}{4}\)
- \(\csc \theta = \frac{1}{\sin \theta} = \frac{5}{3}\)
- \(\sec \theta = \frac{1}{\cos \theta} = \frac{5}{4}\)
- \(\cot \theta = \frac{1}{\tan \theta} = \frac{4}{3}\)
- विधि 2:
- \(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1 \Rightarrow \left(\frac{3}{5}\right)^2 + \cos^2 \theta = 1\)
- \(\frac{9}{25} + \cos^2 \theta = 1 \Rightarrow \cos^2 \theta = 1 - \frac{9}{25} = \frac{16}{25}\)
- \(\cos \theta = \sqrt{\frac{16}{25}} = \frac{4}{5}\)
- \(\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta} = \frac{3/5}{4/5} = \frac{3}{4}\)
- शेष व्युत्क्रम संबंधों से ज्ञात करें।
दोनों विधियाँ सही हैं। समकोण त्रिभुज विधि अक्सर अधिक सीधी और कम त्रुटिपूर्ण होती है, खासकर जब आप सर्वसमिकाओं को लेकर अनिश्चित हों।
विशेष कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात
कुछ विशेष कोणों (0°, 30°, 45°, 60°, 90°) के लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों के मानों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इन्हें ज्यामितीय रूप से व्युत्पन्न किया जा सकता है।
- 45° के लिए:
- एक समकोण समद्विबाहु त्रिभुज लें (जिसमें दो कोण 45° हों)।
- यदि लंब \(= a\) और आधार \(= a\), तो कर्ण \(= a\sqrt{2}\) होगा।
- \(\sin 45^\circ = \frac{a}{a\sqrt{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}}\)
- \(\cos 45^\circ = \frac{a}{a\sqrt{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}}\)
- \(\tan 45^\circ = \frac{a}{a} = 1\)
- 30° और 60° के लिए:
- एक समबाहु त्रिभुज लें जिसकी प्रत्येक भुजा \(2a\) हो।
- एक शीर्ष से सामने वाली भुजा पर लंब डालें। यह त्रिभुज को दो सर्वांगसम समकोण त्रिभुजों में विभाजित करेगा, जिनमें कोण 30° और 60° होंगे।
- 30° के लिए (चित्र: [IMAGE: TODO: Equilateral triangle with altitude forming 30-60-90 triangle])
- लंब \(= a\), आधार \(= a\sqrt{3}\), कर्ण \(= 2a\)
- \(\sin 30^\circ = \frac{a}{2a} = \frac{1}{2}\)
- \(\cos 30^\circ = \frac{a\sqrt{3}}{2a} = \frac{\sqrt{3}}{2}\)
- \(\tan 30^\circ = \frac{a}{a\sqrt{3}} = \frac{1}{\sqrt{3}}\)
- 60° के लिए (चित्र: [IMAGE: TODO: Equilateral triangle with altitude forming 30-60-90 triangle])
- लंब \(= a\sqrt{3}\), आधार \(= a\), कर्ण \(= 2a\)
- \(\sin 60^\circ = \frac{a\sqrt{3}}{2a} = \frac{\sqrt{3}}{2}\)
- \(\cos 60^\circ = \frac{a}{2a} = \frac{1}{2}\)
- \(\tan 60^\circ = \frac{a\sqrt{3}}{a} = \sqrt{3}\)
- 0° के लिए:
- जब एक न्यूनकोण 0° के करीब पहुँचता है, तो लंब लगभग शून्य हो जाता है और आधार लगभग कर्ण के बराबर हो जाता है।
- \(\sin 0^\circ = \frac{0}{\text{कर्ण}} = 0\)
- \(\cos 0^\circ = \frac{\text{कर्ण}}{\text{कर्ण}} = 1\)
- \(\tan 0^\circ = \frac{0}{\text{आधार}} = 0\)
- \(\cot 0^\circ = \frac{\text{आधार}}{0} = \text{अपरिभाषित}\)
- \(\csc 0^\circ = \frac{\text{कर्ण}}{0} = \text{अपरिभाषित}\)
- \(\sec 0^\circ = \frac{\text{कर्ण}}{\text{कर्ण}} = 1\)
- 90° के लिए:
- जब एक न्यूनकोण 90° के करीब पहुँचता है, तो आधार लगभग शून्य हो जाता है और लंब लगभग कर्ण के बराबर हो जाता है।
- \(\sin 90^\circ = \frac{\text{कर्ण}}{\text{कर्ण}} = 1\)
- \(\cos 90^\circ = \frac{0}{\text{कर्ण}} = 0\)
- \(\tan 90^\circ = \frac{\text{लंब}}{0} = \text{अपरिभाषित}\)
- \(\cot 90^\circ = \frac{0}{\text{लंब}} = 0\)
- \(\csc 90^\circ = \frac{\text{कर्ण}}{\text{कर्ण}} = 1\)
- \(\sec 90^\circ = \frac{\text{कर्ण}}{0} = \text{अपरिभाषित}\)
- सारणी:
| कोण \(\theta\) | \(\sin \theta\) | \(\cos \theta\) | \(\tan \theta\) | \(\csc \theta\) | \(\sec \theta\) | \(\cot \theta\) | | :-------------- | :--------------- | :--------------- | :--------------- | :--------------- | :--------------- | :--------------- | | 0° | 0 | 1 | 0 | अपरिभाषित | 1 | अपरिभाषित | | 30° | \(\frac{1}{2}\) | \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) | \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)| 2 | \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)| \(\sqrt{3}\) | | 45° | \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)| \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)| 1 | \(\sqrt{2}\) | \(\sqrt{2}\) | 1 | | 60° | \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)| \(\frac{1}{2}\) | \(\sqrt{3}\) | \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)| 2 | \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)| | 90° | 1 | 0 | अपरिभाषित | 1 | अपरिभाषित | 0 |
इस सारणी को कंठस्थ कर लें। यह त्रिकोणमिति के अधिकांश प्रश्नों को हल करने की कुंजी है। इसे बनाने का अभ्यास भी करें।
याद रखें कि \(\tan 90^\circ, \sec 90^\circ, \cot 0^\circ, \csc 0^\circ\) अपरिभाषित होते हैं। इनके मान अनंत की ओर अग्रसर होते हैं।
त्रिकोणमितीय समीकरणों का हल
त्रिकोणमितीय समीकरण वे समीकरण होते हैं जिनमें त्रिकोणमितीय अनुपात शामिल होते हैं और हमें अज्ञात कोण का मान ज्ञात करना होता है। कक्षा 9 में, हम ऐसे समीकरणों को हल करते हैं जहाँ कोण \(\theta\) का मान 0° और 90° के बीच होता है।
- हल करने की विधि:
- दिए गए समीकरण को सरल करें ताकि एक त्रिकोणमितीय अनुपात (जैसे \(\sin \theta\), \(\cos \theta\), \(\tan \theta\)) एक संख्यात्मक मान के बराबर हो जाए।
- विशेष कोणों की सारणी का उपयोग करके उस कोण \(\theta\) को पहचानें जिसके लिए त्रिकोणमितीय अनुपात का मान समीकरण में प्राप्त मान के बराबर है।
- उदाहरण: यदि \(2\sin \theta - 1 = 0\)
- \(2\sin \theta = 1\)
- \(\sin \theta = \frac{1}{2}\)
- सारणी से, हम जानते हैं कि \(\sin 30^\circ = \frac{1}{2}\)
- अतः, \(\theta = 30^\circ\)
- महत्वपूर्ण बिंदु:
- सुनिश्चित करें कि \(\theta\) का मान 0° और 90° के बीच हो, जैसा कि प्रश्न में दिया गया है।
- कभी-कभी समीकरणों में वर्ग (squares) या अन्य बीजगणितीय रूप हो सकते हैं, जिन्हें पहले सरल करना होता है।
- उदाहरण: यदि \(3\tan^2 \theta - 1 = 0\)
- \(3\tan^2 \theta = 1\)
- \(\tan^2 \theta = \frac{1}{3}\)
- \(\tan \theta = \sqrt{\frac{1}{3}} = \frac{1}{\sqrt{3}}\)
- सारणी से, \(\tan 30^\circ = \frac{1}{\sqrt{3}}\)
- अतः, \(\theta = 30^\circ\)
त्रिकोणमितीय समीकरणों को हल करते समय विशेष कोणों के मानों की सारणी बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसे याद रखना या जल्दी से बनाना आना चाहिए।
त्रिकोणमितीय अनुपातों के अनुप्रयोग
त्रिकोणमितीय अनुपातों का उपयोग केवल समकोण त्रिभुजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इनका उपयोग विभिन्न प्रकार के त्रिभुजों और वास्तविक जीवन की समस्याओं में अज्ञात भुजाओं या कोणों को ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
- असमकोण त्रिभुजों में अनुप्रयोग:
- यदि किसी त्रिभुज में कोई कोण 90° न हो, तो हम एक शीर्ष से सामने वाली भुजा पर लंब खींचकर उसे समकोण त्रिभुजों में विभाजित कर सकते हैं।
- फिर, इन समकोण त्रिभुजों में त्रिकोणमितीय अनुपातों का उपयोग करके अज्ञात भुजाओं या कोणों को ज्ञात किया जा सकता है।
- उदाहरण: एक त्रिभुज ABC में, यदि \(\angle B = 45^\circ\), \(\angle C = 30^\circ\) और \(AB = 5\) सेमी है। AC और BC ज्ञात करें।
- शीर्ष A से भुजा BC पर एक लंब AD खींचें। अब हमारे पास दो समकोण त्रिभुज हैं: \(\triangle ABD\) और \(\triangle ADC\)।
- \(\triangle ABD\) में (\(\angle D = 90^\circ\)):
- \(\sin 45^\circ = \frac{AD}{AB} \Rightarrow AD = AB \sin 45^\circ = 5 \times \frac{1}{\sqrt{2}} = \frac{5}{\sqrt{2}}\) सेमी।
- \(\cos 45^\circ = \frac{BD}{AB} \Rightarrow BD = AB \cos 45^\circ = 5 \times \frac{1}{\sqrt{2}} = \frac{5}{\sqrt{2}}\) सेमी।
- \(\triangle ADC\) में (\(\angle D = 90^\circ\)):
- \(\sin 30^\circ = \frac{AD}{AC} \Rightarrow AC = \frac{AD}{\sin 30^\circ} = \frac{5/\sqrt{2}}{1/2} = \frac{10}{\sqrt{2}} = 5\sqrt{2}\) सेमी।
- \(\cot 30^\circ = \frac{DC}{AD} \Rightarrow DC = AD \cot 30^\circ = \frac{5}{\sqrt{2}} \times \sqrt{3} = \frac{5\sqrt{3}}{\sqrt{2}}\) सेमी।
- BC ज्ञात करें:
- \(BC = BD + DC = \frac{5}{\sqrt{2}} + \frac{5\sqrt{3}}{\sqrt{2}} = \frac{5(1+\sqrt{3})}{\sqrt{2}}\) सेमी।
- वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग:
- ऊँचाई और दूरी (Heights and Distances) की समस्याओं में।
- इंजीनियरिंग, वास्तुकला, नेविगेशन और खगोल विज्ञान में।
- उदाहरण: किसी इमारत की ऊँचाई ज्ञात करना, नदी की चौड़ाई मापना, किसी वस्तु की दूरी ज्ञात करना।
त्रिकोणमिति का उपयोग अप्रत्यक्ष मापन के लिए किया जाता है, जहाँ सीधे मापन संभव या व्यावहारिक नहीं होता है।