बहुपद
अध्याय 'बहुपद' बीजगणित का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो छात्रों को बीजीय व्यंजकों की एक विशेष श्रेणी से परिचित कराता है। छात्र सीखते हैं कि बहुपद क्या होते हैं, उनके पद, गुणांक और घात कैसे निर्धारित करते हैं। यह अध्याय रैखिक, द्विघातीय और त्रिघातीय बहुपदों के व्यापक रूपों को भी समझाता है, साथ ही अचर और शून्य बहुपदों की अवधारणा भी देता है। इसके अतिरिक्त, बहुपद के शून्यक ज्ञात करना और बहुपदों को जोड़ना, घटाना और गुणा करना भी इस अध्याय के मुख्य विषय हैं। यह ज्ञान उच्च कक्षाओं में बीजगणित की गहरी समझ के लिए आधार तैयार करता है।
अंक और संख्याएँ
गणित में, हम संख्याओं का उपयोग विभिन्न मात्राओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं।
- अंक: 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ये दस मूल प्रतीक हैं जिनसे सभी संख्याएँ बनती हैं।
- संख्याएँ: अंकों के संयोजन से बनी मात्राएँ। उदाहरण: 14, 6000, 30।
- संख्या पद्धति: संख्याओं को लिखने और व्यक्त करने का एक तरीका (जैसे हमारी दशमलव पद्धति, रोमन अंक आदि)।
- इन संख्याओं का मान निश्चित होता है।
संख्याएँ निश्चित मान वाली होती हैं और इन्हें अंकों की सहायता से लिखा जाता है।
अक्षर संख्याएँ और गणितीय कथन
गणित में, हम केवल निश्चित संख्याओं का ही उपयोग नहीं करते, बल्कि उन मात्राओं को भी व्यक्त करते हैं जिनके मान परिवर्तनशील हो सकते हैं या ज्ञात नहीं होते।
- अक्षर संख्याएँ (चर): वे अक्षर (जैसे a, l, b, x, y, m, z) जिनका उपयोग ऐसी संख्याओं को दर्शाने के लिए किया जाता है जिनके मान बदल सकते हैं या अज्ञात होते हैं।
- उदाहरण: एक वर्ग की भुजा 'a' है, तो उसका परिमाप \(4a\) होगा। यहाँ 'a' का मान बदल सकता है।
- उदाहरण: पिता की आयु पुत्र की आयु के दुगने से 6 वर्ष अधिक है, इसे \(x = 2y + 6\) लिखते हैं। यहाँ \(x\) और \(y\) अक्षर संख्याएँ हैं।
- नियत अक्षर संख्याएँ (अचर): कुछ अक्षर संख्याएँ ऐसी भी होती हैं जिनके मान निश्चित होते हैं, जैसे \(\pi\) (पाई) का मान लगभग \(22/7\) या \(3.14\) होता है।
- समानता: अक्षर संख्याओं में भी जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग की संक्रियाएँ की जा सकती हैं।
चर (Variable): वह अक्षर संख्या जिसका मान विभिन्न संदर्भों में बदल सकता है। अचर (Constant): वह संख्या जिसका मान निश्चित होता है, चाहे वह अंक में लिखी हो या अक्षर से दर्शाई गई हो (जैसे \(\pi\) या कोई संख्या)।
अक्षर संख्याओं के मान अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग हो सकते हैं, जबकि अंकों में लिखी संख्याओं के मान निश्चित होते हैं।
बीजीय व्यंजक और पदों की पहचान
अक्षर संख्याओं और अंकों को जोड़ने, घटाने, गुणा करने और भाग करने से बीजीय व्यंजक बनते हैं।
- बीजीय व्यंजक: चर और अचर के संयोजन से बने गणितीय कथन, जिनमें गणितीय संक्रियाएँ शामिल होती हैं।
- उदाहरण: \(4a\), \(a+b+c\), \(3\pi r^3\), \(x+2x+3\), \((x+3)\), \(m-9\), \(2p+q\), \(\sqrt{3}a^2/4\).
- पद (Terms): बीजीय व्यंजक का वह हिस्सा जो '+' या '-' चिह्न द्वारा अलग किया जाता है। गुणा ('x') या भाग ('÷') चिह्न पदों को अलग नहीं करते।
- एक पद केवल संख्या, केवल अक्षर संख्या, या संख्या व अक्षर संख्या का गुणनफल हो सकता है।
- उदाहरण:
- \(4a\), \(\sqrt{3}a^2/4\), \(4/3\pi r^3\), \(5ax-yz\) — ये सभी एकपदीय व्यंजक हैं। (ध्यान दें: \(5ax-yz\) में दो पद हैं, \(5ax\) और \(-yz\))
- \((x+3)\), \(m-9\), \(2p+q\) — ये द्विपदीय व्यंजक हैं।
- \(a+b+c\), \(x^2+2x+3\) — ये त्रिपदीय व्यंजक हैं।
- समान पद: वे पद जिनमें चर और उनकी घातें समान हों। उदाहरण: \(2x\) और \(5x\) समान पद हैं, \(2x^2\) और \(5x\) समान पद नहीं हैं।
बीजीय व्यंजक (Algebraic Expression): चर और अचर का संयोजन, जो गणितीय संक्रियाओं (+, -, x, ÷) से जुड़ा हो। पद (Term): व्यंजक का वह भाग जो '+' या '-' चिह्न से अलग होता है।
छात्र अक्सर गुणा या भाग के चिह्नों से पदों को अलग मान लेते हैं। याद रखें, पद केवल '+' या '-' से अलग होते हैं। उदाहरण: \(3xy\) एक पद है, \(3+xy\) दो पद हैं।
बहुपद की परिभाषा और पहचान
सभी बीजीय व्यंजक बहुपद नहीं होते। बहुपद एक विशेष प्रकार का बीजीय व्यंजक है।
- बहुपद (Polynomial): एक बीजीय व्यंजक जिसमें चर की घातें केवल पूर्ण संख्याएँ (0, 1, 2, 3, ...) हों।
- पहचान के नियम:
- चर की घात ऋणात्मक नहीं होनी चाहिए। (जैसे \(x^{-1}\) या \(1/x\) नहीं)
- चर की घात भिन्न (fraction) नहीं होनी चाहिए। (जैसे \(x^{1/2}\) या \(\sqrt{x}\) नहीं)
- चर वर्गमूल या घनमूल के अंदर नहीं होना चाहिए। (जैसे \(\sqrt{x}\) नहीं)
- बहुपद के उदाहरण:
- \(x^2 + 5x\)
- \(p - 1\)
- \(x^3 - 2x^2 + 3x - 7\)
- \(5y\)
- जो बहुपद नहीं हैं, उनके उदाहरण:
- \(x + 1/x = x + x^{-1}\) (घात ऋणात्मक है)
- \(y^2 + \sqrt{y} + 3 = y^2 + y^{1/2} + 3\) (घात भिन्न है)
- \(p^3 - 2p + 3\sqrt{p} = p^3 - 2p + 3p^{1/2}\) (घात भिन्न है)
- \(3x^{-1}\) (घात ऋणात्मक है)
बहुपद (Polynomial): एक बीजीय व्यंजक जिसमें चर की सभी घातें पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers) हों।
बहुपद की पहचान करते समय, चर की घातों पर विशेष ध्यान दें। यदि कोई भी घात पूर्ण संख्या नहीं है, तो वह बहुपद नहीं है।
बहुपद के पदों की संख्या और वर्गीकरण
बहुपदों को उनके पदों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
- एकपदी (Monomial): वह बहुपद जिसमें केवल एक पद हो।
- उदाहरण: \(3y\), \(4a\), \(5x^2\)
- द्विपदी (Binomial): वह बहुपद जिसमें दो पद हों।
- उदाहरण: \(x^2 + 3x\), \(m - 9\), \(2p + q\)
- त्रिपदी (Trinomial): वह बहुपद जिसमें तीन पद हों।
- उदाहरण: \(a + b + c\), \(x^2 + 2x + 3\)
- बहुपदी (Polynomial): तीन से अधिक पदों वाले व्यंजक को सामान्यतः बहुपद ही कहा जाता है, लेकिन विशेष नाम नहीं होते।
- उदाहरण: \(m^3 - 2m^2 + 9m + 1\) (चार पद)
महत्वपूर्ण बिंदु:
- समान पदों को हमेशा जोड़कर या घटाकर एक पद में लिखा जाता है। उदाहरण: \(2p + p = 3p\) (यह एकपदी है, द्विपदी नहीं)।
- \((x+2)^2 = x^2 + 4x + 4\) इसमें तीन पद हैं।
पदों की संख्या निर्धारित करते समय, पहले समान पदों को सरल करें।
बहुपद की घात ज्ञात करना
बहुपद की घात उसके चर की अधिकतम घात होती है।
- एक चर वाले बहुपद की घात: चर की सबसे बड़ी घात।
- उदाहरण: \(3x^5 - 2x^4 + 3x^3 + 9\) में \(x\) की अधिकतम घात 5 है, अतः बहुपद की घात 5 है।
- उदाहरण: \(x^2 + 3\) में घात 2 है।
- उदाहरण: \(5y\) में घात 1 है।
- एक से अधिक चर वाले बहुपद की घात: प्रत्येक पद में चरों की घातों का योग करें, फिर जो योग सबसे बड़ा हो, वही बहुपद की घात होती है।
- उदाहरण: \(x^2y^1 + xy^2\)
- पहले पद \(x^2y^1\) की घात \(2+1=3\)
- दूसरे पद \(xy^2\) की घात \(1+2=3\)
- अतः बहुपद की घात 3 है।
- उदाहरण: \(uv + uv^2 + 13\)
- \(uv\) की घात \(1+1=2\)
- \(uv^2\) की घात \(1+2=3\)
- \(13\) की घात 0 (अचर पद)
- अतः बहुपद की घात 3 है।
- गुणांक (Coefficient): चर के साथ गुणा में लिखी संख्या।
- उदाहरण: \(m^3 - 3m^2 + 1\) में \(m^3\) का गुणांक 1 है, \(m^2\) का गुणांक -3 है।
बहुपद की घात (Degree of Polynomial): बहुपद में चर की सबसे बड़ी घात। यदि एक से अधिक चर हों, तो प्रत्येक पद में चरों की घातों के योग में से सबसे बड़ा योग।
एक घात वाले बहुपदों को रैखिक बहुपद (Linear Polynomial) कहा जाता है।
अचर बहुपद
कुछ बहुपद केवल संख्याओं से बने होते हैं।
- अचर बहुपद (Constant Polynomial): वह बहुपद जिसमें केवल एक अचर पद हो (कोई चर न हो, या चर की घात 0 हो)।
- उदाहरण: 6, 2, 7, \(3/122\)
- व्याख्या: किसी भी संख्या को \(6x^0\) के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ \(x^0 = 1\)। चूँकि 0 एक पूर्ण संख्या है, इसलिए ये बहुपद हैं।
- घात: अचर बहुपद की घात हमेशा 0 होती है।
- उदाहरण: 8 की घात 0 है।
अचर बहुपद (Constant Polynomial): केवल एक संख्या वाला बहुपद। इसकी घात शून्य होती है।
बहुपदों का प्रतीकात्मक निरूपण
बहुपदों को बार-बार लिखने से बचने के लिए, उन्हें प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाता है।
- निरूपण: यदि बहुपद में चर \(x\) है, तो उसे \(p(x)\), \(q(x)\), \(r(x)\) आदि से दर्शाया जाता है।
- यदि चर \(y\) है, तो \(p(y)\), \(q(y)\) आदि।
- यह निरूपण बताता है कि बहुपद किस चर में है।
- उदाहरण:
- \(p(x) = 3x^5 - 2x^4 + 3x^3 + 9\)
- \(q(y) = 5y\)
- \(s(u) = u^2 + 3u^3\)
- \(t(x) = x^8 - 2x^7 + 3x - 1\)
- \(r(b) = b^4 - b^2 + 6\)
- एक बार किसी प्रतीक (जैसे \(p(x)\)) को चुन लिया जाए, तो उस विशेष प्रश्न में उसी प्रतीक का उपयोग किया जाता है।
\(p(x)\) का मतलब 'चर \(x\) में एक बहुपद' है।
रैखिक और द्विघात बहुपदों के व्यापक रूप
बहुपदों को उनकी घात के आधार पर भी वर्गीकृत किया जाता है और उनके व्यापक रूप होते हैं।
- रैखिक बहुपद (Linear Polynomial):
- घात: 1
- व्यापक रूप: \(ax + b\)
- शर्तें: \(a\) और \(b\) वास्तविक संख्याएँ हैं, और \(a \neq 0\) (क्योंकि यदि \(a=0\) तो यह रैखिक नहीं रहेगा)।
- उदाहरण: \(2x + 3\), \(\sqrt{7}x - 4\), \(x\) (यहाँ \(a=1, b=0\))
- द्विघात बहुपद (Quadratic Polynomial):
- घात: 2
- व्यापक रूप: \(ax^2 + bx + c\)
- शर्तें: \(a, b, c\) वास्तविक संख्याएँ हैं, और \(a \neq 0\) (क्योंकि यदि \(a=0\) तो यह द्विघात नहीं रहेगा)।
- उदाहरण: \(4x^2 + 3x\), \(-y^2 + 2\), \(x^2 - 4x - 9\), \(\sqrt{2}m^2\)
- वास्तविक संख्याएँ: इसमें सभी पूर्णांक, परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ शामिल होती हैं।
रैखिक बहुपद का व्यापक रूप: \(ax + b\), जहाँ \(a \neq 0\) द्विघात बहुपद का व्यापक रूप: \(ax^2 + bx + c\), जहाँ \(a \neq 0\)
इन व्यापक रूपों में \(a \neq 0\) की शर्त बहुत महत्वपूर्ण है। इसे अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों में पूछा जाता है।
उच्च घात वाले बहुपदों का परिचय
घात 2 से अधिक वाले बहुपदों को उच्च घात वाले बहुपद कहते हैं।
- त्रिघात बहुपद (Cubic Polynomial):
- घात: 3
- व्यापक रूप: \(ax^3 + bx^2 + cx + d\)
- शर्तें: \(a, b, c, d\) वास्तविक संख्याएँ हैं, और \(a \neq 0\).
- उदाहरण: \(4x^3 + 2x^2 + 5x - 7\), \(m^3 - 3m^2 + 2\)
- जैसे-जैसे बहुपद की घात बढ़ती है, अधिकतम संभव पदों की संख्या भी बढ़ सकती है।
- घात का निर्धारण: बहुपद की घात उसमें उपस्थित चर की अधिकतम घात से तय होती है। अतः, अधिकतम घात वाले पद का गुणांक शून्य नहीं हो सकता।
त्रिघात बहुपद का व्यापक रूप: \(ax^3 + bx^2 + cx + d\), जहाँ \(a \neq 0\)
शून्य बहुपद
एक विशेष प्रकार का बहुपद है शून्य बहुपद।
- शून्य बहुपद (Zero Polynomial): वह बहुपद जिसके सभी गुणांक शून्य हों।
- उदाहरण: \(0\) या \(0x^2 + 0x + 0\)
- घात: शून्य बहुपद की घात अपरिभाषित होती है।
- इसे किसी भी घात के बहुपद के रूप में लिखा जा सकता है (जैसे \(0x^5\), \(0x^{10}\) आदि)।
शून्य बहुपद (Zero Polynomial): वह बहुपद जिसके सभी गुणांक शून्य हों। इसकी घात अपरिभाषित होती है।
बहुपद के शून्यक
बहुपद के शून्यक वे मान होते हैं जिनके लिए बहुपद का मान शून्य हो जाता है।
- शून्यक (Zeroes of a Polynomial): चर का वह मान जिसके लिए बहुपद \(p(x)\) का मान शून्य \((p(x) = 0)\) हो जाए।
- ज्ञात करने की विधि:
- बहुपद को \(p(x) = 0\) के बराबर रखें।
- चर \(x\) के लिए समीकरण को हल करें।
- उदाहरण: बहुपद \(p(x) = x^2 + x - 6\)
- यदि \(x = 1\), तो \(p(1) = 1^2 + 1 - 6 = 1 + 1 - 6 = -4\).
- यदि \(x = 2\), तो \(p(2) = 2^2 + 2 - 6 = 4 + 2 - 6 = 0\). अतः, 2 बहुपद \(p(x)\) का एक शून्यक है।
- यदि \(x = -3\), तो \(p(-3) = (-3)^2 + (-3) - 6 = 9 - 3 - 6 = 0\). अतः, -3 भी बहुपद \(p(x)\) का एक शून्यक है।
- रैखिक बहुपद के शून्यक: एक रैखिक बहुपद \(ax+b\) का केवल एक शून्यक होता है, जो \(-b/a\) होता है।
- \(ax+b = 0 \Rightarrow ax = -b \Rightarrow x = -b/a\)
बहुपद का शून्यक (Zero of a Polynomial): चर का वह मान जिसके लिए बहुपद का मान शून्य हो जाता है।
शून्यक ज्ञात करने के लिए, हमेशा बहुपद को शून्य के बराबर रखें और चर के लिए हल करें। यह बोर्ड परीक्षाओं में एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
बहुपदों का योग और घटाव
बहुपदों का योग और घटाव बीजीय व्यंजकों के समान पदों को जोड़ने या घटाने जैसा ही होता है।
- नियम: केवल समान पदों को ही जोड़ा या घटाया जा सकता है। समान पदों में चर और उनकी घातें समान होनी चाहिए।
- चरण:
- बहुपदों को लिखें।
- समान पदों को एक साथ समूहबद्ध करें।
- प्रत्येक समूह के गुणांकों को जोड़ें या घटाएँ।
- उदाहरण (योग): \(p(x) = 2x^2 + x + 1\) और \(q(x) = 3x^2 + 4x + 5\)
- \(p(x) + q(x) = (2x^2 + x + 1) + (3x^2 + 4x + 5)\)
- \(= (2x^2 + 3x^2) + (x + 4x) + (1 + 5)\)
- \(= 5x^2 + 5x + 6\)
- उदाहरण (घटाव): \(p(t) = 7t^2 - 3t + 2\) में से \(q(t) = t^2 - 5t + 2\) घटाएँ।
- \(p(t) - q(t) = (7t^2 - 3t + 2) - (t^2 - 5t + 2)\)
- \(= 7t^2 - 3t + 2 - t^2 + 5t - 2\) (कोष्ठक हटाने पर चिह्न बदल जाते हैं)
- \(= (7t^2 - t^2) + (-3t + 5t) + (2 - 2)\)
- \(= 6t^2 + 2t + 0\)
- \(= 6t^2 + 2t\)
- परिणामी बहुपद की घात: योग या घटाव के बाद प्राप्त बहुपद की घात, मूल बहुपदों में से किसी एक की घात के बराबर या उससे कम हो सकती है।
घटाते समय, दूसरे बहुपद के प्रत्येक पद का चिह्न बदलना न भूलें।
बहुपदों का गुणा
बहुपदों का गुणा भी बीजीय व्यंजकों के गुणा के नियमों का पालन करता है।
- नियम: प्रत्येक पद को दूसरे बहुपद के प्रत्येक पद से गुणा करें। घातों को जोड़ें और गुणांकों को गुणा करें।
- चरण:
- पहले बहुपद के प्रत्येक पद को दूसरे बहुपद के प्रत्येक पद से गुणा करें।
- गुणा करते समय, गुणांकों को गुणा करें और समान चर की घातों को जोड़ें (जैसे \(x^a \times x^b = x^{a+b}\)).
- प्राप्त सभी पदों को जोड़ें और समान पदों को सरल करें।
- उदाहरण: \((3x + 4)\) का \((7x^2 + 2x + 1)\) से गुणा करें।
- \((3x)(7x^2) + (3x)(2x) + (3x)(1) + (4)(7x^2) + (4)(2x) + (4)(1)\)
- \(= 21x^3 + 6x^2 + 3x + 28x^2 + 8x + 4\)
- समान पदों को जोड़ें:
- \(21x^3\)
- \((6x^2 + 28x^2) = 34x^2\)
- \((3x + 8x) = 11x\)
- \(4\)
- अतः, गुणनफल \(= 21x^3 + 34x^2 + 11x + 4\)
- गुणनफल की घात: दो बहुपदों के गुणनफल की घात, उनके अलग-अलग घातों के योग के बराबर होती है।
- उदाहरण: यदि \(p(x)\) की घात \(m\) है और \(q(x)\) की घात \(n\) है, तो \(p(x)q(x)\) की घात \(m+n\) होगी।
- उपरोक्त उदाहरण में, \((3x+4)\) की घात 1 है और \((7x^2+2x+1)\) की घात 2 है। गुणनफल की घात \(1+2=3\) है, जो \(21x^3 + 34x^2 + 11x + 4\) में \(x^3\) की घात के बराबर है।
बहुपदों के गुणनफल की घात = (पहले बहुपद की घात) + (दूसरे बहुपद की घात)।