ध्वनि
अध्याय 'ध्वनि' हमें अपने आस-पास की दुनिया में ध्वनि की घटना से परिचित कराता है। यह बताता है कि ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है (कंपन के माध्यम से), इसके मुख्य गुण जैसे आयाम, आवृत्ति और आवर्तकाल क्या हैं। छात्र ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता, विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल, श्रव्य और अश्रव्य ध्वनियों के बीच अंतर और प्रतिध्वनि की अवधारणा को सीखते हैं। अध्याय मानव कान की संरचना और विभिन्न वाद्य यंत्रों और जानवरों द्वारा ध्वनि के उत्पादन को भी शामिल करता है। यह छात्रों को ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में मदद करता है, जो भौतिकी में आगे की पढ़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है।
ध्वनि का उत्पादन
ध्वनि ऊर्जा का एक रूप है जो कंपन करती हुई वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है।
- कंपन: किसी वस्तु का अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर या आगे-पीछे गति करना कंपन कहलाता है।
- ध्वनि उत्पादन का मूल सिद्धांत: जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम (जैसे वायु) के कणों को भी कंपित करती है। ये कंपन माध्यम में तरंगों के रूप में आगे बढ़ते हैं और हमारे कानों तक पहुँचकर हमें ध्वनि का अनुभव कराते हैं।
- उदाहरण:
- स्कूल की घंटी को बजाने पर वह कंपन करती है और ध्वनि उत्पन्न होती है। घंटी को छूने पर कंपन महसूस होते हैं और कंपन रुकने पर ध्वनि भी बंद हो जाती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t1_scene2]
- स्वरित्र द्विभुज (Tuning Fork) को रबर पैड पर मारने पर उसकी भुजाएँ कंपन करती हैं और ध्वनि सुनाई देती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t1_scene3]
- बात करते समय गले पर हाथ रखने पर वाक्-तंतुओं के कंपन महसूस होते हैं।
निष्कर्ष: ध्वनि उत्पन्न करने के लिए वस्तु का कंपन करना अनिवार्य है।
ध्वनि का स्रोत हमेशा एक कंपन करती हुई वस्तु होती है।
कंपन का आयाम, आवृत्ति एवं आवर्तकाल
कंपन गति को समझने के लिए कुछ महत्वपूर्ण पद:
- दोलन गति: किसी वस्तु का अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर गति करना दोलन गति कहलाता है। जैसे सरल लोलक की गति। [IMAGE: oscillation_and_frequency_fig77]
आयाम (Amplitude)
- परिभाषा: कंपन करती हुई वस्तु अपनी माध्य स्थिति से अधिकतम जितनी दूरी तक विस्थापित होती है, उसे कंपन का आयाम कहते हैं।
- उदाहरण: यदि कोई स्केल माध्य स्थिति 'क' से 'ख' तक जाता है, तो 'क' से 'ख' तक की दूरी आयाम है।
- निर्भरता: आयाम को वस्तु पर लगाए गए बल को कम या अधिक करके बदला जा सकता है।
- ध्वनि से संबंध: ध्वनि की तीव्रता आयाम पर निर्भर करती है। बड़ा आयाम = तीव्र ध्वनि, छोटा आयाम = मंद ध्वनि।
आवृत्ति (Frequency)
- परिभाषा: कंपन करती हुई वस्तु एक सेकंड में जितने कंपन पूरे करती है, उसे कंपन की आवृत्ति कहते हैं।
- मात्रक: आवृत्ति को कंपन प्रति सेकंड या हर्ट्ज (Hz) में मापा जाता है। (वैज्ञानिक हेनरिच रूडोल्फ हर्ट्ज के सम्मान में)
- उदाहरण: यदि कोई वस्तु 1 सेकंड में 10 कंपन करती है, तो उसकी आवृत्ति 10 Hz होगी।
- ध्वनि से संबंध: ध्वनि का तारत्व (Pitch) आवृत्ति पर निर्भर करता है। उच्च आवृत्ति = उच्च तारत्व (पतली/तीक्ष्ण ध्वनि), निम्न आवृत्ति = निम्न तारत्व (मोटी/गहरी ध्वनि)।
आवर्तकाल (Time Period)
- परिभाषा: कंपन करती हुई वस्तु को एक कंपन पूरा करने में जितना समय लगता है, उसे आवर्तकाल कहते हैं।
- मात्रक: इसे सेकंड (s) में मापा जाता है।
- संबंध: आवृत्ति और आवर्तकाल के बीच व्युत्क्रम संबंध होता है:
$$ \text{आवृत्ति} = \frac{1}{\text{आवर्तकाल}} \quad \text{या} \quad f = \frac{1}{T} $$ जहाँ $f$ आवृत्ति है और $T$ आवर्तकाल है।
सारांश तालिका:
| गुणधर्म | परिभाषा | मात्रक | ध्वनि पर प्रभाव | |---|---|---|---| | आयाम | माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन | मीटर (m) | तीव्रता (Loudness) | | आवृत्ति | प्रति सेकंड कंपनों की संख्या | हर्ट्ज (Hz) | तारत्व (Pitch) | | आवर्तकाल | एक कंपन में लगा समय | सेकंड (s) | आवृत्ति का व्युत्क्रम |
$$ \text{आवृत्ति} = \frac{1}{\text{आवर्तकाल}} $$
आवृत्ति और आवर्तकाल एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
ध्वनि और माध्यम
ध्वनि तरंगों को संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम की आवश्यकता होती है। यह माध्यम ठोस, द्रव या गैस हो सकता है।
- संचरण प्रक्रिया: जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम के कणों को कंपित करती है। ये कण अपनी ऊर्जा अगले कणों को स्थानांतरित करते हैं, जिससे कंपन एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रा करते हैं। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t3_scene1]
विभिन्न माध्यमों में ध्वनि का संचरण
- ठोस में संचरण:
- उदाहरण: मेज पर कान लगाकर दूसरे सिरे पर धीरे से ठोकने पर ध्वनि स्पष्ट सुनाई देती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t3_scene2]
- कारण: ठोस में कण एक-दूसरे के बहुत करीब होते हैं, जिससे कंपन तेज़ी से और प्रभावी ढंग से संचरित होते हैं। ध्वनि ठोस में सबसे तेज़ गति से यात्रा करती है।
- अनुप्रयोग: खिलौना टेलीफोन (माचिस की डिब्बियों और धागे से बना) धागे (ठोस) के माध्यम से ध्वनि का संचरण दर्शाता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t3_scene3]
- द्रव में संचरण:
- उदाहरण: पानी से भरी बाल्टी में पत्थर गिराने पर हाइड्रोफोन (गुब्बारे और ट्यूब से बना) के माध्यम से ध्वनि सुनाई देती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t3_scene4]
- कारण: द्रव के कण भी ध्वनि ऊर्जा को स्थानांतरित कर सकते हैं। ध्वनि की गति द्रव में गैस से अधिक लेकिन ठोस से कम होती है।
- गैस में संचरण:
- उदाहरण: सामान्य बातचीत या संगीत सुनना वायु (गैस) के माध्यम से होता है।
- कारण: गैस के कण दूर-दूर होते हैं, जिससे ध्वनि की गति सबसे कम होती है।
निर्वात में ध्वनि का संचरण
- बेलजार प्रयोग: एक विद्युत घंटी को वायुरोधी बेलजार में रखकर बजाने पर हवा होने पर ध्वनि सुनाई देती है। जब वायु चूषक पंप से हवा निकाल दी जाती है (निर्वात उत्पन्न होता है), तो घंटी बजने पर भी ध्वनि सुनाई नहीं देती। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t3_scene4]
- निष्कर्ष: ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती, क्योंकि वहाँ कंपन को स्थानांतरित करने के लिए कोई कण नहीं होते।
- चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री: चंद्रमा पर वायुमंडल (माध्यम) न होने के कारण अंतरिक्ष यात्री सीधे बात नहीं कर सकते। वे संचार के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करते हैं, जिन्हें संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
ध्वनि की चाल (लगभग 20°C पर):
- ठोस: सबसे अधिक (जैसे स्टील में ~5100 m/s)
- द्रव: मध्यम (जैसे पानी में ~1480 m/s)
- गैस: सबसे कम (जैसे वायु में ~343 m/s)
ध्वनि को यात्रा करने के लिए हमेशा एक माध्यम की आवश्यकता होती है।
छात्र अक्सर सोचते हैं कि ध्वनि निर्वात में भी यात्रा कर सकती है। याद रखें, निर्वात में ध्वनि का संचरण असंभव है।
ध्वनि हम कैसे सुनते हैं?
मानव कान एक जटिल संवेदी अंग है जो ध्वनि तरंगों को ग्रहण करके उन्हें तंत्रिका संकेतों में परिवर्तित करता है, जिन्हें मस्तिष्क ध्वनि के रूप में पहचानता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t4_scene1]
कान की संरचना
मानव कान के तीन मुख्य भाग होते हैं:
- बाह्य कर्ण (Outer Ear):
- इसमें कर्णपल्लव (Pinna) और कर्ण नहर (Ear Canal) शामिल हैं।
- कार्य: ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करके कर्ण नहर के माध्यम से मध्य कर्ण तक पहुँचाना।
- मध्य कर्ण (Middle Ear):
- इसमें कर्णपट्ट (Eardrum) और तीन छोटी हड्डियाँ (मैलेअस, इन्कस, स्टेपीज़) शामिल हैं।
- कार्य:
- कर्णपट्ट: ध्वनि तरंगों के कारण कंपन करता है। यह एक पतली, तनी हुई झिल्ली होती है।
- हड्डियाँ: कर्णपट्ट के कंपन को प्रवर्धित करके अंतः कर्ण तक पहुँचाती हैं।
- अंतः कर्ण (Inner Ear):
- इसमें कॉक्लिया (Cochlea) और श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve) शामिल हैं।
- कार्य:
- कॉक्लिया: हड्डियों से प्राप्त कंपनों को तरल पदार्थ में तरंगों में बदलता है।
- श्रवण तंत्रिका: इन तरंगों को तंत्रिका संकेतों में परिवर्तित करके मस्तिष्क तक भेजती है, जहाँ उन्हें ध्वनि के रूप में समझा जाता है।
ध्वनि सुनने की प्रक्रिया
- बाह्य कर्ण ध्वनि तरंगों को इकट्ठा करता है।
- ये तरंगें कर्ण नहर से गुजरकर कर्णपट्ट से टकराती हैं।
- ध्वनि तरंगों के दबाव से कर्णपट्ट कंपन करने लगता है।
- कर्णपट्ट के कंपन मध्य कर्ण की तीन छोटी हड्डियों (मैलेअस, इन्कस, स्टेपीज़) द्वारा प्रवर्धित होते हैं।
- ये प्रवर्धित कंपन अंतः कर्ण में स्थित कॉक्लिया के तरल पदार्थ में तरंगें उत्पन्न करते हैं।
- कॉक्लिया में मौजूद संवेदी कोशिकाएँ इन तरंगों को विद्युत संकेतों में बदल देती हैं।
- ये विद्युत संकेत श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।
- मस्तिष्क इन संकेतों की व्याख्या करके हमें ध्वनि का अनुभव कराता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t4_scene3]
कान की देखभाल
- कान बहुत संवेदनशील अंग हैं। कर्णपट्ट बहुत नाजुक होता है और इसे कोई भी क्षति सुनने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
- कान में कोई भी नुकीली वस्तु नहीं डालनी चाहिए।
- तेज आवाज या शोर से कानों को नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए।
- कानों की सफाई के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t4_scene4]
मानव कान की संरचना और ध्वनि सुनने की प्रक्रिया का नामांकित चित्र बनाने का अभ्यास करें। यह अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
श्रव्य तथा अश्रव्य ध्वनियाँ
सभी कंपन करने वाली वस्तुएँ ध्वनि उत्पन्न करती हैं, लेकिन सभी ध्वनियाँ हमें सुनाई नहीं देतीं। मानव कान एक निश्चित आवृत्ति सीमा के भीतर ही ध्वनियों को सुन सकता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t5_scene1]
ध्वनि आवृत्तियों का वर्गीकरण
- श्रव्य ध्वनि (Audible Sound):
- परिभाषा: वे ध्वनियाँ जिनकी आवृत्ति 20 हर्ट्ज (Hz) से 20,000 हर्ट्ज (Hz) के बीच होती है, जिन्हें मानव कान सुन सकता है।
- यह मानव की श्रवण सीमा है।
- अपश्रव्य ध्वनि (Infrasonic Sound):
- परिभाषा: वे ध्वनियाँ जिनकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है।
- मानव कान इन्हें नहीं सुन सकता।
- उदाहरण: भूकंप से पहले उत्पन्न होने वाली तरंगें, व्हेल और हाथी जैसी कुछ जानवर इन ध्वनियों का उपयोग संचार के लिए करते हैं।
- पराश्रव्य ध्वनि (Ultrasonic Sound):
- परिभाषा: वे ध्वनियाँ जिनकी आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक होती है।
- मानव कान इन्हें नहीं सुन सकता।
- उदाहरण: कुत्ते 40,000 Hz तक, चमगादड़ 70,000 Hz तक की आवृत्ति सुन और उत्पन्न कर सकते हैं। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t5_scene3]
पराश्रव्य ध्वनि के उपयोग [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t5_scene4]
पराश्रव्य ध्वनियाँ अपने उच्च आवृत्ति और छोटी तरंगदैर्ध्य के कारण विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी हैं:
- चिकित्सा क्षेत्र में:
- धातुओं के भीतर की बारीक दरारों का पता लगाने के लिए।
- मस्तिष्क के ट्यूमर के स्थान का पता लगाने के लिए।
- गठिया के दर्द को दूर करने के लिए।
- मोतियाबिंद के इलाज में।
- गुर्दे की पथरी को तोड़ने में।
- अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग (गर्भावस्था में भ्रूण की जाँच)।
- औद्योगिक क्षेत्र में:
- बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए।
- घड़ी के पुर्जों जैसे छोटे और नाजुक उपकरणों को साफ करने के लिए।
- सोनार (SONAR) में समुद्र की गहराई मापने और पानी के नीचे की वस्तुओं का पता लगाने के लिए। [IMAGE: sonar_sound_navigation_and_ranging_fig913]
- जंतुओं द्वारा: चमगादड़ और डॉल्फ़िन पराश्रव्य ध्वनियों का उपयोग शिकार करने और नेविगेट करने के लिए करते हैं (इकोलोकेशन)।
मानव कान की श्रवण सीमा 20 Hz से 20,000 Hz है।
पराश्रव्य ध्वनि के उपयोग अक्सर 2-3 अंकों के प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं। कम से कम तीन उपयोग याद रखें।
ध्वनि का परावर्तन और प्रतिध्वनि
प्रकाश की तरह, ध्वनि भी किसी सतह से टकराकर परावर्तित हो सकती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t6_scene1]
ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound)
- परिभाषा: जब ध्वनि तरंगें किसी बाधा (जैसे दीवार, पहाड़ी, या कुएँ की सतह) से टकराकर अपने मूल माध्यम में वापस लौट आती हैं, तो इस घटना को ध्वनि का परावर्तन कहते हैं।
- नियम: ध्वनि का परावर्तन भी प्रकाश के परावर्तन के नियमों का पालन करता है:
- आपतित ध्वनि तरंग, परावर्तित ध्वनि तरंग और परावर्तक सतह पर आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- आपतन कोण (Angle of Incidence) परावर्तन कोण (Angle of Reflection) के बराबर होता है।
- उदाहरण: एक समतल तख्ते से ध्वनि का परावर्तन। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t6_scene2]
प्रतिध्वनि (Echo)
- परिभाषा: परावर्तित होकर वापस आने वाली ध्वनि को प्रतिध्वनि कहते हैं।
- प्रतिध्वनि सुनने की शर्तें:
- समय अंतराल: मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि (प्रतिध्वनि) के बीच कम से कम 1/10 सेकंड (0.1 s) का समय अंतराल होना चाहिए, ताकि मानव कान दोनों ध्वनियों को अलग-अलग सुन सके।
- न्यूनतम दूरी: वायु में ध्वनि की चाल (लगभग 20°C पर) 340 मीटर/सेकंड होती है।
- 0.1 सेकंड में ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी = चाल × समय = $340 \text{ m/s} \times 0.1 \text{ s} = 34 \text{ मीटर}$।
- यह दूरी ध्वनि के स्रोत से परावर्तक सतह तक जाने और वापस आने की कुल दूरी है।
- अतः, स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी = $34 \text{ मीटर} / 2 = 17 \text{ मीटर}$ होनी चाहिए।
- यदि दूरी 17 मीटर से कम है, तो परावर्तित ध्वनि मूल ध्वनि में मिल जाएगी और प्रतिध्वनि स्पष्ट सुनाई नहीं देगी। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t6_scene3]
ध्वनि अवशोषण
- कुछ पदार्थ, जैसे कपड़े, कार्क, थर्मोकोल, ध्वनि के अच्छे अवशोषक होते हैं। ये ध्वनि को परावर्तित करने के बजाय अवशोषित कर लेते हैं।
- अनुप्रयोग: सिनेमा हॉल, ऑडिटोरियम और बड़े कमरों की दीवारों, छतों और फर्शों पर ध्वनि अवशोषक सामग्री लगाई जाती है, ताकि अनावश्यक प्रतिध्वनि (गूँज) को रोका जा सके और ध्वनि की स्पष्टता बनी रहे।
प्रतिध्वनि के अनुप्रयोग
- समुद्र की गहराई मापना (सोनार): ध्वनि संकेत समुद्र में भेजे जाते हैं। संकेत के तल तक जाने और वापस आने में लगे समय को मापकर समुद्र की गहराई ज्ञात की जाती है।
- चमगादड़ द्वारा नेविगेशन: चमगादड़ पराश्रव्य ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं और उनकी प्रतिध्वनि सुनकर अपने रास्ते और शिकार का पता लगाते हैं।
- चिकित्सा निदान: अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग में पराश्रव्य ध्वनि का उपयोग शरीर के आंतरिक अंगों की छवियाँ प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए ध्वनि स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की न्यूनतम दूरी 17 मीटर होनी चाहिए।
प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी की गणना (17 मीटर) अक्सर न्यूमेरिकल प्रश्न के रूप में पूछी जाती है।
ध्वनि की चाल
ध्वनि की चाल वह गति है जिससे ध्वनि तरंगें किसी माध्यम से यात्रा करती हैं। यह माध्यम के प्रकार और तापमान पर निर्भर करती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t7_scene1]
प्रकाश और ध्वनि की चाल की तुलना
- प्रकाश का वेग: लगभग 3,00,000,000 मीटर प्रति सेकंड ($3 \times 10^8 \text{ m/s}$)। यह ब्रह्मांड में सबसे तेज़ गति है।
- ध्वनि का वेग:
- वायु में 0°C पर लगभग 332 मीटर प्रति सेकंड।
- वायु में 20°C पर लगभग 340 मीटर प्रति सेकंड।
- ठोस और द्रवों में ध्वनि की चाल वायु से अधिक होती है।
निष्कर्ष: प्रकाश का वेग ध्वनि के वेग से बहुत अधिक होता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t7_scene2]
बिजली और गर्जन का उदाहरण
- बरसात के दिनों में बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट एक ही समय पर उत्पन्न होती हैं।
- लेकिन हमें चमक पहले दिखाई देती है और गर्जन बाद में सुनाई देती है।
- कारण: प्रकाश की चाल ध्वनि की चाल से बहुत अधिक होने के कारण, बिजली की चमक हम तक तुरंत पहुँच जाती है, जबकि ध्वनि को हम तक पहुँचने में अधिक समय लगता है।
ध्वनि की चाल का महत्व
- ध्वनि की चाल विभिन्न माध्यमों में भिन्न-भिन्न होती है:
- ठोस: सबसे अधिक (जैसे स्टील में 5100 m/s)
- द्रव: मध्यम (जैसे पानी में 1480 m/s)
- गैस: सबसे कम (जैसे वायु में 343 m/s)
- यह गुण सोनार, अल्ट्रासाउंड और अन्य तकनीकों में महत्वपूर्ण है जहाँ दूरी या संरचना का पता लगाने के लिए ध्वनि के यात्रा समय का उपयोग किया जाता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t7_scene3]
ध्वनि की चाल माध्यम पर निर्भर करती है: ठोस > द्रव > गैस।
ध्वनि के गुण
ध्वनि के तीन मुख्य गुण होते हैं जो हमें विभिन्न ध्वनियों के बीच अंतर करने में मदद करते हैं: तीव्रता, तारत्व और गुणवत्ता। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t8_scene4]
1. तीव्रता (Loudness)
- निर्भरता: ध्वनि की तीव्रता कंपन के आयाम (Amplitude) पर निर्भर करती है।
- संबंध:
- बड़ा आयाम = तीव्र ध्वनि (तेज आवाज)
- छोटा आयाम = मंद ध्वनि (धीमी आवाज)
- उदाहरण:
- जब हम किसी घंटी को जोर से बजाते हैं, तो वह अधिक आयाम से कंपन करती है और तीव्र ध्वनि उत्पन्न करती है।
- फुसफुसाहट मंद ध्वनि का उदाहरण है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t8_scene1]
- मात्रक: ध्वनि की तीव्रता को डेसिबल (dB) में मापा जाता है।
2. तारत्व (Pitch)
- निर्भरता: ध्वनि का तारत्व कंपन की आवृत्ति (Frequency) पर निर्भर करता है।
- संबंध:
- उच्च आवृत्ति = उच्च तारत्व (पतली या तीक्ष्ण ध्वनि)
- निम्न आवृत्ति = निम्न तारत्व (मोटी या गहरी ध्वनि)
- उदाहरण:
- उच्च तारत्व: महिलाओं की आवाज, कोयल की कूक, मच्छरों की भिनभिनाहट, वायलिन की ध्वनि।
- निम्न तारत्व: पुरुषों की आवाज, शेर की दहाड़, ड्रम की ध्वनि। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t8_scene2]
- भारतीय संगीत: भारतीय संगीत में 'सा, रे, ग, म, प, ध, नि' स्वर बढ़ते हुए तारत्व (आवृत्ति) के क्रम में होते हैं।
3. गुणवत्ता (Quality या Timbre)
- परिभाषा: ध्वनि की गुणवत्ता वह गुण है जो हमें समान तीव्रता और तारत्व की दो ध्वनियों में अंतर करने में मदद करता है। यह ध्वनि तरंग के जटिल आकार (ओवरटोन या हार्मोनिक्स) पर निर्भर करती है।
- उदाहरण: हम दो अलग-अलग वाद्य यंत्रों (जैसे सितार और वायलिन) से उत्पन्न समान तारत्व और तीव्रता की ध्वनि को उनकी गुणवत्ता के कारण पहचान सकते हैं।
सुस्वर ध्वनि एवं शोर (Musical Sound and Noise)
- सुस्वर ध्वनि (Musical Sound):
- परिभाषा: वह ध्वनि जो कानों को मधुर और सुखद लगे।
- उत्पत्ति: नियमित और आवधिक कंपनों से उत्पन्न होती है।
- उदाहरण: वाद्य यंत्रों से निकलने वाली ध्वनियाँ, गायन। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t8_scene3]
- शोर (Noise):
- परिभाषा: वह ध्वनि जो कानों को अप्रिय और असहज लगे।
- उत्पत्ति: अनियमित और अनावधिक कंपनों से उत्पन्न होती है।
- उदाहरण: बंदूक के चलने की आवाज, निर्माण स्थल का शोर, वाहनों का हॉर्न।
ध्वनि प्रदूषण: अत्यधिक या अवांछित शोर को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
तीव्रता $\propto$ आयाम$^2$ (तीव्रता आयाम के वर्ग के समानुपाती होती है)।
तीव्रता और तारत्व ध्वनि के दो स्वतंत्र गुण हैं।
विभिन्न वाद्य यंत्रों द्वारा उत्पन्न ध्वनि
वाद्य यंत्र ध्वनि उत्पन्न करने के लिए विभिन्न कंपन सिद्धांतों का उपयोग करते हैं। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t9_scene2]
वाद्य यंत्रों के प्रकार
- डोरी वाले वाद्य यंत्र (तंतुवाद्य):
- सिद्धांत: खिंचे हुए तार या डोरियों को रगड़कर, खींचकर या तोड़कर कंपित किया जाता है।
- उदाहरण: सितार, वीणा, वायलिन, गिटार।
- रीड वाद्य यंत्र (वायु वाद्य):
- सिद्धांत: वायु स्तंभ को कंपित करके ध्वनि उत्पन्न की जाती है। इनमें हवा फूँकी जाती है।
- उदाहरण: बाँसुरी (वायु के स्तंभ का कंपन), शहनाई, हारमोनियम (रीड का कंपन)।
- झिल्ली वाद्य यंत्र (ताल वाद्य):
- सिद्धांत: एक तनी हुई झिल्ली (पर्दा) पर आघात करके उसे कंपित किया जाता है।
- उदाहरण: तबला, ढोलक, मृदंग।
- अन्य वाद्य यंत्र:
- टकराने वाले वाद्य: मंजीरा (झांझ), करताल, घंटे - धातु के टुकड़ों को आपस में टकराकर ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
- मिट्टी के बर्तन: घटम, नूट - मिट्टी के बर्तनों को पीटकर ध्वनि निकाली जाती है।
- जल तरंग: पानी से भरे बर्तनों पर आघात करके ध्वनि उत्पन्न की जाती है, जहाँ पानी का स्तर ध्वनि के तारत्व को नियंत्रित करता है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t9_scene3]
निष्कर्ष: सभी वाद्य यंत्रों में ध्वनि उत्पादन का मूल सिद्धांत कंपन ही है, बस कंपन उत्पन्न करने का तरीका और माध्यम अलग-अलग होता है।
किसी भी वाद्य यंत्र में ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपन आवश्यक है।
मनुष्यों और जंतुओं द्वारा ध्वनि उत्पादन
मनुष्य और विभिन्न जंतु ध्वनि उत्पन्न करने के लिए अलग-अलग शारीरिक संरचनाओं और तरीकों का उपयोग करते हैं। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t10_scene4]
मनुष्यों में ध्वनि उत्पादन
- स्रोत: मनुष्यों में ध्वनि का मुख्य स्रोत कंठ (स्वरयंत्र या Voice Box) है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t10_scene1]
- संरचना: कंठ में दो वाक्-तंतु (Vocal Cords) होते हैं जो एक-दूसरे के समानांतर तने होते हैं। इनके बीच हवा के निकलने के लिए एक संकीर्ण झिरी होती है।
- प्रक्रिया:
- फेफड़ों से हवा इस झिरी से बलपूर्वक निकलती है।
- हवा के दबाव से वाक्-तंतु कंपन करने लगते हैं।
- इन कंपनों से ध्वनि उत्पन्न होती है।
- तारत्व नियंत्रण: वाक्-तंतुओं से जुड़ी मांसपेशियां उनके खिंचाव को नियंत्रित करती हैं:
- तने हुए और पतले वाक्-तंतु: तेजी से कंपन करते हैं, जिससे उच्च आवृत्ति (उच्च तारत्व) की तीक्ष्ण ध्वनि उत्पन्न होती है।
- ढीले वाक्-तंतु: धीमी गति से कंपन करते हैं, जिससे निम्न आवृत्ति (निम्न तारत्व) की गहरी ध्वनि उत्पन्न होती है। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t10_scene2]
- लिंग और आयु का प्रभाव:
- पुरुष: वयस्क पुरुषों के वाक्-तंतु लगभग 20 मिलीमीटर लंबे होते हैं, जिससे उनकी आवाज गहरी होती है।
- स्त्रियाँ: स्त्रियों के वाक्-तंतु पुरुषों की अपेक्षा लगभग 5 मिलीमीटर छोटे होते हैं, जिससे उनकी आवाज तीक्ष्ण होती है।
- बच्चे: बच्चों के वाक्-तंतु बहुत छोटे होते हैं, इसलिए उनकी आवाज सबसे तीक्ष्ण होती है।
जंतुओं में ध्वनि उत्पादन
- वाक्-तंतुओं द्वारा: कुत्ते, गाय, बकरी जैसे कई जंतु मनुष्यों की तरह वाक्-तंतुओं का उपयोग करके ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
- अन्य तरीके:
- चिड़िया: अपनी श्वासनली में मौजूद विशेष वाक् यंत्र (स्यरिंक्स) से ध्वनि उत्पन्न करती हैं।
- मक्खियाँ: अपने पंखों को तेजी से कंपित करके भिनभिनाहट की ध्वनि निकालती हैं।
- मेंढक: अपने वाक्-तंतुओं और वाक्-कोशों की सहायता से टर्र-टर्र की आवाज करते हैं।
- मछलियाँ: कुछ मछलियाँ अपने तैरने के गलफड़े (air bladder) से हवा निकालकर विभिन्न आवाजें निकालती हैं।
- सर्प: सर्प में वाक्-तंतु नहीं होते, लेकिन वे अपने मुँह से हवा निकालकर फुफकार उत्पन्न करते हैं। [IMAGE: cg_c8_science_ch10_t10_scene3]
निष्कर्ष: जंतुओं में ध्वनि उत्पादन के तरीके भिन्न हो सकते हैं, लेकिन मूल सिद्धांत हमेशा किसी अंग का कंपन ही होता है।
मनुष्यों में ध्वनि का उत्पादन कंठ (स्वरयंत्र) द्वारा होता है।
पुरुषों, स्त्रियों और बच्चों की आवाज में अंतर का कारण वाक्-तंतुओं की लंबाई में अंतर है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।