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रासायनिक अभिक्रियाएँ कब और कैसी-कैसी
Chhattisgarh · Class 8 · 🔬 Science · Chapter 4

रासायनिक अभिक्रियाएँ कब और कैसी-कैसी

रासायनिक अभिक्रियाएँअभिकारक और उत्पादरासायनिक अभिक्रियाओं के लक्षणसंयोजन अभिक्रियाअपघटन अभिक्रियाविस्थापन अभिक्रिया

यह अध्याय छात्रों को रासायनिक अभिक्रियाओं की दुनिया से परिचित कराता है। यह रासायनिक परिवर्तनों की पहचान करने के लक्षणों जैसे गैस का निकलना, रंग परिवर्तन, अवक्षेप का बनना, ऊष्मा परिवर्तन और अवस्था परिवर्तन पर प्रकाश डालता है। अध्याय संयोजन, अपघटन, विस्थापन, अवक्षेपण, उदासीनीकरण, ऑक्सीकरण और अपचयन जैसी विभिन्न प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं की भी व्याख्या करता है। छात्र जैव रासायनिक अभिक्रियाओं और दैनिक जीवन में रासायनिक अभिक्रियाओं के महत्व के बारे में भी सीखते हैं। यह अध्याय छात्रों को उनके आसपास होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

रासायनिक परिवर्तन की पहचान

रासायनिक अभिक्रियाएँ: एक अवलोकन
रासायनिक अभिक्रियाएँ: एक अवलोकन
नए पदार्थ की पहचान
नए पदार्थ की पहचान
अभिकारक और उत्पाद
अभिकारक और उत्पाद

हमारे चारों ओर होने वाले परिवर्तन दो मुख्य प्रकार के होते हैं:

  • भौतिक परिवर्तन:
  • इसमें पदार्थ की रासायनिक पहचान नहीं बदलती
  • केवल पदार्थ की अवस्था, आकार या रूप बदलता है।
  • कोई नया पदार्थ नहीं बनता
  • उदाहरण: बर्फ का पिघलना, पानी का वाष्पीकरण, शक्कर का पानी में घुलना।
  • रासायनिक परिवर्तन (रासायनिक अभिक्रिया):
  • इसमें पदार्थ की रासायनिक संरचना बदल जाती है
  • नए पदार्थ बनते हैं जिनके गुण मूल पदार्थों से पूरी तरह भिन्न होते हैं।
  • यह परिवर्तन स्थायी होता है और आमतौर पर अनुत्क्रमणीय (irreversible) होता है।
  • उदाहरण: लोहे पर जंग लगना, भोजन का पकना, दूध का खट्टा होना।

रासायनिक परिवर्तन की मुख्य पहचान:

  • नए पदार्थ का बनना ही रासायनिक परिवर्तन का निश्चित प्रमाण है।

अभिकारक और उत्पाद:

  • अभिकारक (Reactants): वे पदार्थ जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं और अपनी रासायनिक पहचान बदलते हैं। इन्हें समीकरण में बाईं ओर लिखा जाता है।
  • उत्पाद (Products): वे नए पदार्थ जो अभिक्रिया के परिणामस्वरूप बनते हैं। इन्हें समीकरण में दाईं ओर लिखा जाता है।
  • अभिकारकों और उत्पादों के बीच एक तीर (→) का निशान होता है जो अभिक्रिया की दिशा को दर्शाता है। इसे 'देता है' या 'उत्पन्न करता है' पढ़ा जाता है।

उदाहरण:

  • सोडियम बाइकार्बोनेट को गर्म करने पर:

2 NaHCO₃ (अभिकारक) → Na₂CO₃ + H₂O + CO₂ (उत्पाद)

  • यहाँ सोडियम बाइकार्बोनेट (खाने का सोडा) गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे नए पदार्थों में परिवर्तित होता है।
महत्त्वपूर्ण

केवल ऊष्मा का उत्पन्न होना या अवशोषित होना हमेशा रासायनिक परिवर्तन का संकेत नहीं होता। उदाहरण के लिए, सल्फ्यूरिक अम्ल को पानी में मिलाने पर ऊष्मा निकलती है, लेकिन यह एक भौतिक परिवर्तन है क्योंकि कोई नया पदार्थ नहीं बनता।

रासायनिक अभिक्रिया के लक्षण

ऊष्मा और परिवर्तन
ऊष्मा और परिवर्तन
रासायनिक अभिक्रिया की पहचान
रासायनिक अभिक्रिया की पहचान
ऊष्मा परिवर्तन: ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ
ऊष्मा परिवर्तन: ऊष्माक्षेपी और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ
रंग में परिवर्तन
रंग में परिवर्तन
सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के अपघटन और CO₂ परीक्षण का आरेख
सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के अपघटन और CO₂ परीक्षण का आरेख
कार्बन डाइऑक्साइड की प्रयोगशाला तैयारी का आरेख
कार्बन डाइऑक्साइड की प्रयोगशाला तैयारी का आरेख
सिल्वर क्लोराइड का प्रकाश-अपघटन
सिल्वर क्लोराइड का प्रकाश-अपघटन

रासायनिक अभिक्रियाओं को कुछ दृश्यमान लक्षणों द्वारा पहचाना जा सकता है। ये लक्षण अभिक्रिया के संपन्न होने का संकेत देते हैं, लेकिन नया पदार्थ बनना ही अंतिम प्रमाण है।

  1. गैस का निकलना:
  • कुछ अभिक्रियाओं में गैस बुलबुले के रूप में निकलती है।
  • उदाहरण: कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) डालने पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस निकलती है।

CaCO₃ (s) + 2HCl (aq) → CaCl₂ (aq) + CO₂ (g) + H₂O (l)

  • जिंक धातु पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालने पर हाइड्रोजन गैस (H₂) निकलती है।

Zn (s) + 2HCl (aq) → ZnCl₂ (aq) + H₂ (g)

  1. ऊष्मा परिवर्तन (तापमान में परिवर्तन):
  • ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ (Exothermic Reactions): वे अभिक्रियाएँ जिनमें ऊष्मा उत्पन्न होती है और बाहर निकलती है, जिससे आसपास का तापमान बढ़ जाता है।
  • उदाहरण: अनबुझे चूने (कैल्शियम ऑक्साइड) में पानी डालना। CaO (s) + H₂O (l) → Ca(OH)₂ (aq) + ऊष्मा
  • मैग्नीशियम तार का जलना।
  • ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ (Endothermic Reactions): वे अभिक्रियाएँ जिन्हें होने के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है और वे ऊष्मा का अवशोषण करती हैं, जिससे आसपास का तापमान घट जाता है।
  • उदाहरण: शक्कर को गर्म करना (अंगारण)। C₁₂H₂₂O₁₁ (s) + ऊष्मा → 12C (s) + 11H₂O (g)
  • ग्लूकोज को पानी में घोलने पर ठंडक महसूस होना।
  1. रंग में परिवर्तन:
  • अभिकारकों या उत्पादों के रंग में बदलाव।
  • उदाहरण: ताँबे की छीलन को सांद्र नाइट्रिक अम्ल में डालने पर भूरे रंग की नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैस (NO₂) बनती है।
  • लोहे में जंग लगने पर उसका रंग भूरा-लाल हो जाता है।
  • सिल्वर क्लोराइड का सूर्य के प्रकाश में धूसर रंग में बदलना।
  1. अवक्षेप का बनना:
  • जब दो विलयनों को मिलाया जाता है और एक अघुलनशील ठोस पदार्थ बनता है जो विलयन में नीचे बैठ जाता है, उसे अवक्षेप कहते हैं।
  • उदाहरण: दूध में नींबू का रस डालने पर सफेद अवक्षेप (पनीर) का बनना।
  • चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) में कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करने पर दूधिया रंग का कैल्शियम कार्बोनेट (अवक्षेप) बनना।

Ca(OH)₂ (aq) + CO₂ (g) → CaCO₃ (s) ↓ + H₂O (l)

  1. अवस्था में परिवर्तन:
  • अभिकारकों की अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) से उत्पादों की अवस्था का भिन्न होना।
  • उदाहरण: मोमबत्ती का जलना (मोम ठोस से द्रव और फिर गैस में बदलता है, साथ ही CO₂ और H₂O बनते हैं)।
याद रखें

कई रासायनिक अभिक्रियाएँ एक से अधिक लक्षण प्रदर्शित करती हैं। उदाहरण के लिए, मोमबत्ती का जलना एक रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें ऊष्मा, प्रकाश और गैस (CO₂) का निकलना तथा अवस्था परिवर्तन (मोम का पिघलना और जलना) जैसे कई लक्षण दिखते हैं।

संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)

संयोजन अभिक्रिया का परिचय
संयोजन अभिक्रिया का परिचय
संयोजन अभिक्रिया के उदाहरण
संयोजन अभिक्रिया के उदाहरण
सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण
सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण
संयोजन अभिक्रिया का महत्व
संयोजन अभिक्रिया का महत्व

परिभाषा: ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें दो या दो से अधिक अभिकारक आपस में मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं, संयोजन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

सामान्य रूप: A + B → AB

उदाहरण:

  1. मैग्नीशियम का जलना: मैग्नीशियम (Mg) ऑक्सीजन (O₂) के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) बनाता है।

2Mg (s) + O₂ (g) → 2MgO (s)

  • यह अभिक्रिया ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करती है।
  1. आयरन और सल्फर का संयोजन: आयरन (Fe) और सल्फर (S) मिलकर आयरन सल्फाइड (FeS) बनाते हैं।

Fe (s) + S (s) → FeS (s)

  1. अमोनिया और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का संयोजन: अमोनिया (NH₃) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) मिलकर अमोनियम क्लोराइड (NH₄Cl) बनाते हैं।

NH₃ (g) + HCl (g) → NH₄Cl (s)

  1. सल्फ्यूरिक अम्ल का औद्योगिक निर्माण: यह कई संयोजन अभिक्रियाओं की एक श्रृंखला है।
  • सल्फर का दहन: S (s) + O₂ (g) → SO₂ (g)
  • सल्फर डाइऑक्साइड का ऑक्सीकरण: 2SO₂ (g) + O₂ (g) → 2SO₃ (g)
  • सल्फर ट्राइऑक्साइड का जल से संयोजन: SO₃ (g) + H₂O (l) → H₂SO₄ (aq)

महत्व:

  • नए यौगिकों के संश्लेषण के लिए आधार।
  • दवाइयों, उर्वरकों, प्लास्टिक आदि के उत्पादन में उपयोग।
  • प्रकृति में कई जैव रासायनिक प्रक्रियाएँ भी संयोजन अभिक्रियाओं पर आधारित होती हैं।
💡सुझाव

संयोजन अभिक्रिया में हमेशा एक ही उत्पाद बनता है, भले ही अभिकारक कितने भी हों। यह इसकी पहचान का मुख्य बिंदु है।

अपघटन या वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)

सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के अपघटन और CO₂ परीक्षण का आरेख
सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के अपघटन और CO₂ परीक्षण का आरेख
सिल्वर क्लोराइड का प्रकाश-अपघटन
सिल्वर क्लोराइड का प्रकाश-अपघटन

परिभाषा: ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है, अपघटन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

सामान्य रूप: AB → A + B

अपघटन के प्रकार (ऊर्जा के स्रोत के आधार पर):

  1. तापीय अपघटन (Thermal Decomposition): जब अपघटन अभिक्रिया ऊष्मा द्वारा होती है।
  • उदाहरण: कैल्शियम कार्बोनेट (चूने का पत्थर) को गर्म करने पर कैल्शियम ऑक्साइड (चूना) और कार्बन डाइऑक्साइड में टूटना।

CaCO₃ (s) + ऊष्मा → CaO (s) + CO₂ (g)

  • खाने के सोडे (सोडियम बाइकार्बोनेट) का अपघटन।

2NaHCO₃ (s) + ऊष्मा → Na₂CO₃ (s) + H₂O (l) + CO₂ (g)

  1. विद्युत अपघटन (Electrolytic Decomposition): जब अपघटन अभिक्रिया विद्युत धारा प्रवाहित करने से होती है।
  • उदाहरण: जल का विद्युत अपघटन करने पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसें प्राप्त होती हैं।

2H₂O (l) + विद्युत → 2H₂ (g) + O₂ (g)

  1. प्रकाश अपघटन (Photolytic Decomposition): जब अपघटन अभिक्रिया प्रकाश ऊर्जा (जैसे सूर्य का प्रकाश) द्वारा होती है।
  • उदाहरण: सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का सूर्य के प्रकाश में सिल्वर (Ag) और क्लोरीन (Cl₂) में अपघटन।

2AgCl (s) + सूर्य का प्रकाश → 2Ag (s) + Cl₂ (g)

  • इस अभिक्रिया का उपयोग श्याम-श्वेत फोटोग्राफी में होता है।

महत्व:

  • कई यौगिकों को उनके मूल तत्वों या सरल यौगिकों में तोड़ने के लिए महत्वपूर्ण।
  • उद्योगों में धातुओं के निष्कर्षण और विभिन्न रसायनों के उत्पादन में उपयोग।
याद रखें

अपघटन अभिक्रियाएँ संयोजन अभिक्रियाओं के विपरीत होती हैं। संयोजन में ऊर्जा निकलती है (ऊष्माक्षेपी), जबकि अपघटन में ऊर्जा की आवश्यकता होती है (ऊष्माशोषी)।

विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)

विस्थापन अभिक्रिया
विस्थापन अभिक्रिया
विस्थापन
विस्थापन

परिभाषा: ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में से कम क्रियाशील तत्व को उसके स्थान से विस्थापित कर देता है, विस्थापन अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

सामान्य रूप: A + BC → AC + B (जहाँ A, B से अधिक क्रियाशील है)

उदाहरण:

  1. जिंक द्वारा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से हाइड्रोजन का विस्थापन: जिंक (Zn) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) से हाइड्रोजन (H₂) को विस्थापित करके जिंक क्लोराइड (ZnCl₂) बनाता है।

Zn (s) + 2HCl (aq) → ZnCl₂ (aq) + H₂ (g)

  • यह अभिक्रिया हाइड्रोजन गैस के निकलने का एक उदाहरण है, जिसे जलती माचिस की तीली ले जाने पर 'पॉप' ध्वनि के साथ पहचाना जा सकता है।
  1. आयरन द्वारा कॉपर सल्फेट से कॉपर का विस्थापन: आयरन (Fe) कॉपर सल्फेट (CuSO₄) विलयन से कॉपर (Cu) को विस्थापित करके आयरन सल्फेट (FeSO₄) बनाता है।

Fe (s) + CuSO₄ (aq) → FeSO₄ (aq) + Cu (s)

  • इस अभिक्रिया में नीले रंग का कॉपर सल्फेट विलयन हरे रंग के आयरन सल्फेट विलयन में बदल जाता है और भूरे रंग का कॉपर आयरन की कील पर जमा हो जाता है।

क्रियाशीलता श्रृंखला (याद रखने के लिए):

  • कुछ धातुओं की क्रियाशीलता का क्रम (घटते क्रम में): पोटैशियम > सोडियम > कैल्शियम > मैग्नीशियम > एल्युमिनियम > जिंक > आयरन > लेड > हाइड्रोजन > कॉपर > सिल्वर > गोल्ड।
  • जो धातु इस श्रृंखला में ऊपर है, वह अपने से नीचे वाली धातु को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है।

महत्व:

  • धातुओं के निष्कर्षण में महत्वपूर्ण।
  • विभिन्न उद्योगों में शुद्ध धातुओं के उत्पादन में उपयोग।
🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर क्रियाशीलता श्रृंखला को भूल जाते हैं, जिससे वे गलत विस्थापन अभिक्रियाएँ लिख देते हैं। हमेशा याद रखें कि अधिक क्रियाशील तत्व ही कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित कर सकता है।

अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction)

चूने का पानी कैसे तैयार करें
चूने का पानी कैसे तैयार करें

परिभाषा: ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें दो विलयनों को मिलाने पर एक अघुलनशील ठोस पदार्थ (अवक्षेप) बनता है जो विलयन से अलग होकर नीचे बैठ जाता है, अवक्षेपण अभिक्रियाएँ कहलाती हैं।

अवक्षेप (Precipitate): अभिक्रिया के दौरान बनने वाला अघुलनशील ठोस पदार्थ।

उदाहरण:

  1. चूने के पानी का दूधिया होना: चूने का पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, Ca(OH)₂) में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस प्रवाहित करने पर सफेद रंग का कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO₃) का अवक्षेप बनता है, जिससे पानी दूधिया हो जाता है।

Ca(OH)₂ (aq) + CO₂ (g) → CaCO₃ (s) ↓ + H₂O (l)

  • यह अभिक्रिया कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान के लिए उपयोग की जाती है।
  1. बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट की अभिक्रिया: बेरियम क्लोराइड (BaCl₂) और सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄) के विलयनों को मिलाने पर सफेद बेरियम सल्फेट (BaSO₄) का अवक्षेप बनता है।

BaCl₂ (aq) + Na₂SO₄ (aq) → BaSO₄ (s) ↓ + 2NaCl (aq)

  1. लेड नाइट्रेट और पोटैशियम आयोडाइड की अभिक्रिया: लेड नाइट्रेट (Pb(NO₃)₂) और पोटैशियम आयोडाइड (KI) के विलयनों को मिलाने पर पीले रंग का लेड आयोडाइड (PbI₂) का अवक्षेप बनता है।

Pb(NO₃)₂ (aq) + 2KI (aq) → PbI₂ (s) ↓ + 2KNO₃ (aq)

महत्व:

  • रासायनिक विश्लेषण में आयनों की पहचान के लिए।
  • जल उपचार में अशुद्धियों को दूर करने के लिए।
  • रंगों और पिगमेंट के निर्माण में।
महत्त्वपूर्ण

अवक्षेपण अभिक्रियाएँ अक्सर द्वि-विस्थापन अभिक्रियाओं का एक प्रकार होती हैं, जहाँ आयनों का आदान-प्रदान होता है और एक अघुलनशील उत्पाद बनता है।

उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralization Reaction)

उदासीनीकरण: अम्ल और क्षार का मिलन
उदासीनीकरण: अम्ल और क्षार का मिलन

परिभाषा: ऐसी रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अम्ल (Acid) और एक क्षार (Base) आपस में अभिक्रिया करके लवण (Salt) और जल (Water) बनाते हैं, उदासीनीकरण अभिक्रिया कहलाती है। इस अभिक्रिया में अम्ल की अम्लीयता और क्षार की क्षारीयता समाप्त हो जाती है, जिससे विलयन उदासीन हो जाता है।

सामान्य रूप: अम्ल + क्षार → लवण + जल

उदाहरण:

  1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अभिक्रिया:

NaOH (aq) + HCl (aq) → NaCl (aq) + H₂O (l)

  • यहाँ, सोडियम हाइड्रॉक्साइड (क्षार) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (अम्ल) मिलकर सोडियम क्लोराइड (लवण) और जल बनाते हैं।
  1. पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड और सल्फ्यूरिक अम्ल की अभिक्रिया:

2KOH (aq) + H₂SO₄ (aq) → K₂SO₄ (aq) + 2H₂O (l)

उदासीनीकरण के लक्षण:

  • यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, यानी इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है।
  • सूचक (जैसे फिनॉलफ्थेलीन या लिटमस) का उपयोग करके उदासीनीकरण बिंदु (जब विलयन उदासीन हो जाता है) का पता लगाया जा सकता है। फिनॉलफ्थेलीन क्षारीय माध्यम में गुलाबी होता है और अम्लीय या उदासीन माध्यम में रंगहीन हो जाता है।

महत्व:

  • दैनिक जीवन में अपच (एसिडिटी) को कम करने के लिए एंटासिड (क्षार) का उपयोग।
  • मिट्टी की अम्लीयता या क्षारीयता को नियंत्रित करने के लिए।
  • उद्योगों में अपशिष्ट जल के उपचार में।
💡सुझाव

उदासीनीकरण अभिक्रिया में लवण और जल हमेशा उत्पाद के रूप में बनते हैं। यह एक महत्वपूर्ण पहचान है।

ऑक्सीकरण और अपचयन अभिक्रिया (Oxidation-Reduction Reaction / Redox Reaction)

ऑक्सीकरण-अपचयन का प्रयोग
ऑक्सीकरण-अपचयन का प्रयोग
ऑक्सीकरण और अपचयन का महत्व
ऑक्सीकरण और अपचयन का महत्व

ऑक्सीकरण और अपचयन अभिक्रियाएँ हमेशा साथ-साथ होती हैं, इसलिए इन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएँ भी कहते हैं।

ऑक्सीकरण (Oxidation):

  • ऑक्सीजन का जुड़ना: किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का संयोजन।
  • उदाहरण: मैग्नीशियम का जलना: 2Mg + O₂ → 2MgO
  • सल्फर का जलना: S + O₂ → SO₂
  • लोहे में जंग लगना: 4Fe + 3O₂ → 2Fe₂O₃
  • हाइड्रोजन का निकलना: किसी पदार्थ से हाइड्रोजन का निष्कासन।
  • उदाहरण: अमोनिया का अपघटन: 2NH₃ → N₂ + 3H₂ (यहाँ अमोनिया का ऑक्सीकरण होता है)

अपचयन (Reduction):

  • ऑक्सीजन का निकलना: किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का निष्कासन।
  • उदाहरण: मरक्यूरिक ऑक्साइड का अपघटन: 2HgO → 2Hg + O₂ (यहाँ मरक्यूरिक ऑक्साइड का अपचयन होता है)
  • कॉपर ऑक्साइड को हाइड्रोजन के साथ गर्म करना: CuO + H₂ → Cu + H₂O (यहाँ CuO का अपचयन होता है)
  • हाइड्रोजन का जुड़ना: किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का संयोजन।
  • उदाहरण: हाइड्रोजन और क्लोरीन का संयोजन: H₂ + Cl₂ → 2HCl (यहाँ क्लोरीन का अपचयन होता है)

रेडॉक्स अभिक्रिया का उदाहरण:

  • कॉपर ऑक्साइड (CuO) को हाइड्रोजन गैस (H₂) के साथ गर्म करने पर कॉपर (Cu) और पानी (H₂O) बनता है।

CuO (s) + H₂ (g) → Cu (s) + H₂O (l)

  • इस अभिक्रिया में: CuO से ऑक्सीजन निकलती है, अतः CuO का अपचयन होता है।
  • H₂ में ऑक्सीजन जुड़ती है, अतः H₂ का ऑक्सीकरण होता है।

महत्व:

  • श्वसन, प्रकाश संश्लेषण जैसी जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण।
  • धातुओं के संक्षारण (जंग लगना) और धातुओं के निष्कर्षण में।
  • बैटरी और ईंधन सेल के कार्यप्रणाली में।
याद रखें

ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक साथ होते हैं। एक पदार्थ ऑक्सीकृत होता है तो दूसरा अपचयित होता है।

जैव रासायनिक क्रियाएँ और दैनिक जीवन में महत्व

परिवर्तनों को पहचानना
परिवर्तनों को पहचानना
रासायनिक परिवर्तन की पहचान
रासायनिक परिवर्तन की पहचान
जैव रासायनिक क्रियाएँ: जीवन के आधार
जैव रासायनिक क्रियाएँ: जीवन के आधार

जैव रासायनिक क्रियाएँ (Biochemical Reactions):

  • ये वे रासायनिक अभिक्रियाएँ हैं जो सजीवों के शरीर में होती हैं।
  • इन क्रियाओं में रासायनिक पदार्थों के साथ-साथ सूक्ष्म जीवाणु (एंजाइम) भी भाग लेते हैं।
  • ये जीवन की प्रक्रियाओं, जैसे वृद्धि, उपापचय (metabolism), प्रजनन और पर्यावरण के प्रति प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक हैं।
  • उदाहरण:
  • प्रकाश संश्लेषण: पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से ग्लूकोज (भोजन) बनाते हैं।

6CO₂ + 6H₂O + सूर्य का प्रकाश → C₆H₁₂O₆ + 6O₂

  • श्वसन: जीव ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज को तोड़ते हैं।

C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा

  • भोजन का पाचन।
  • दही का जमना।
  • दोसा बनाने के लिए भिगोए गए चावल और उड़द की दाल में खमीर का उठना।
  • भोजन का सड़ना।

रासायनिक अभिक्रियाओं का दैनिक जीवन में महत्व:

  • पदार्थों का निर्माण: हमारे दैनिक जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएँ जैसे दवाइयाँ, खाद, कीटनाशक, पेंट, पॉलिश, सीमेंट, साबुन, सौंदर्य प्रसाधन आदि रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा ही बनाए जाते हैं।
  • ऊर्जा उत्पादन: ईंधन का जलना (दहन अभिक्रिया) ऊर्जा उत्पन्न करता है जिसका उपयोग परिवहन, बिजली उत्पादन और खाना पकाने में होता है।
  • खाद्य संरक्षण: भोजन को खराब होने से बचाने के लिए विभिन्न रासायनिक विधियों का उपयोग किया जाता है।
  • पर्यावरण संरक्षण: जल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रासायनिक प्रक्रियाएँ उपयोग की जाती हैं।
  • जैविक प्रक्रियाएँ: हमारे शरीर में होने वाली सभी जैविक प्रक्रियाएँ (पाचन, श्वसन, रक्त परिसंचरण) रासायनिक अभिक्रियाओं पर आधारित हैं।
  • कृषि: उर्वरक और कीटनाशक रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा बनते हैं, जो कृषि उत्पादन में वृद्धि करते हैं।
महत्त्वपूर्ण

रासायनिक अभिक्रियाएँ हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं। इनके बिना न तो हमारा शरीर कार्य कर सकता है और न ही आधुनिक समाज का विकास संभव है।

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