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वायु
Chhattisgarh · Class 8 · 🔬 Science · Chapter 3

वायु

वायुमंडलऑक्सीजननाइट्रोजनवायु प्रदूषणग्रीनहाउस प्रभावअम्ल वर्षा

यह अध्याय वायुमंडल की संरचना और विभिन्न गैसों के महत्व को समझाता है। छात्र ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के गुणों और उपयोगों के बारे में सीखते हैं। यह अध्याय वायु प्रदूषण के कारणों, प्रभावों और बचाव के उपायों पर भी प्रकाश डालता है, साथ ही ग्रीनहाउस प्रभाव और अम्ल वर्षा जैसी पर्यावरणीय घटनाओं की व्याख्या करता है। वायुमंडलीय दाब और उसके मापन को भी इसमें शामिल किया गया है, जिससे छात्रों को अपने आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।

वायुमण्डल

वायुमंडल की संरचना और ओजोन परत का महत्व
वायुमंडल की संरचना और ओजोन परत का महत्व

पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए गैसों के आवरण को वायुमंडल कहते हैं। यह पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वायुमंडल की संरचना

  • वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है।
  • मुख्य घटक और उनका प्रतिशत:
  • नाइट्रोजन (N₂): लगभग 78%
  • ऑक्सीजन (O₂): लगभग 21%
  • आर्गन (Ar): लगभग 0.9%
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): लगभग 0.03%
  • जलवाष्प: लगभग 0.04%
  • अन्य गैसें (सल्फर डाइऑक्साइड, नियॉन, हीलियम आदि) और धूल के कण: शेष मात्रा

ओजोन परत (Ozone Layer)

  • स्थान: पृथ्वी की सतह से 16 से 23 किलोमीटर की ऊँचाई पर समताप मंडल (Stratosphere) में पाई जाती है।
  • संरचना: ओजोन का एक अणु (O₃) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनता है।
  • महत्व:
  • यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है।
  • पराबैंगनी किरणें मनुष्यों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती हैं।
  • यह पौधों और समुद्री जीवन को भी नुकसान पहुँचाती हैं।
  • ओजोन परत पृथ्वी पर जीवन को इन हानिकारक प्रभावों से बचाकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

[IMAGE: cg_c8_science_ch03_t1_scene3] ओजोन परत का महत्व दर्शाती है।

महत्त्वपूर्ण

वायुमंडल में नाइट्रोजन और ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक संतुलन बनाए रखती है।

ऑक्सीजन बनाने की विधि

ऑक्सीजन गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि
ऑक्सीजन गैस बनाने की प्रयोगशाला विधि

ऑक्सीजन एक प्राणदायिनी गैस है और इसका निर्माण प्रयोगशाला में पोटैशियम परमैंगनेट को गर्म करके किया जा सकता है।

प्रयोगशाला विधि

  1. सामग्री: मोटे काँच की परखनली, पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄), स्टैंड, गर्म करने का साधन (बर्नर), निकासनली, टब, पानी, दो परखनलियाँ, कार्क, रुई की डॉट।
  2. प्रक्रिया:
  • मोटे काँच की परखनली में 2-3 ग्राम पोटैशियम परमैंगनेट लें।
  • उपकरण को चित्र 3.1 के अनुसार व्यवस्थित करें।
  • परखनली को गर्म करें।
  • निकलने वाली गैस को पानी से भरी उल्टी रखी परखनली में पानी के नीचे विस्थापन विधि द्वारा एकत्र करें।
  • पानी से भरी परखनली को तैयार करने के लिए, एक परखनली को पानी से पूरा भरें, मुँह को अंगूठे से बंद करके पानी से भरे टब में उल्टा खड़ा करें और अंगूठा हटा लें।
  • जब परखनली में गैस भर जाए तो उसे हटाकर कार्क लगा दें। यह एकत्रित गैस ऑक्सीजन है।

रासायनिक अभिक्रिया

$$2KMnO₄ \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} K₂MnO₄ + MnO₂ + O₂$$

  • पोटैशियम परमैंगनेट (Potassium Permanganate) विघटित होकर
  • पोटैशियम मैंगनेट (Potassium Manganate),
  • मैंगनीज डाइऑक्साइड (Manganese Dioxide) और
  • ऑक्सीजन गैस (Oxygen Gas) बनाता है।

सावधानियाँ

  • पोटैशियम परमैंगनेट को गर्म करते समय मोटे काँच की परखनली को हिलाते रहना चाहिए ताकि पोटैशियम परमैंगनेट उछल कर ऊपर न आए।
  • ऑक्सीजन गैस को पानी के नीचे विस्थापन विधि द्वारा एकत्र किया जाता है क्योंकि यह पानी में अल्प विलेय होती है और वायु से थोड़ी भारी होती है।
💡सुझाव

ऑक्सीजन बनाने की विधि का नामांकित चित्र अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है। अभिक्रिया और सावधानियों को याद रखें।

ऑक्सीजन के भौतिक और रासायनिक गुण

ऑक्सीजन की दहन सहायक प्रकृति
ऑक्सीजन की दहन सहायक प्रकृति

ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण गैस है जिसके विशिष्ट भौतिक और रासायनिक गुण हैं।

भौतिक गुण

  • अवस्था: सामान्य ताप पर गैस
  • रंग: रंगहीन
  • गंध: गंधहीन
  • स्वाद: स्वादहीन
  • जल में विलेयता: अल्प विलेय (कम घुलनशील)।
  • वायु से तुलना: वायु से थोड़ी भारी

रासायनिक गुण

  1. दहन में सहायक:
  • ऑक्सीजन स्वयं नहीं जलती, लेकिन दहन (जलने) में सहायक होती है।
  • उदाहरण: जलती हुई अगरबत्ती को ऑक्सीजन से भरी परखनली के पास ले जाने पर वह तेजी से जलने लगती है
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t3_scene3] ऑक्सीजन की दहन सहायक प्रकृति को दर्शाता है।
  1. ऑक्साइड बनाना:
  • ऑक्सीजन धातुओं और अधातुओं दोनों के साथ अभिक्रिया करके उनके ऑक्साइड बनाती है।
  • धातुओं के साथ:
  • मैग्नीशियम का दहन: मैग्नीशियम ऑक्सीजन के साथ जलकर सफेद चूर्ण, मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।

$$2Mg + O₂ \rightarrow 2MgO$$

  • मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड
  • अधातुओं के साथ:
  • कार्बन का दहन: कोयले (कार्बन) को ऑक्सीजन में जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है।

$$C + O₂ \rightarrow CO₂$$

  • कार्बन + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड
  • सल्फर का दहन: गंधक (सल्फर) को ऑक्सीजन में जलाने पर सल्फर डाइऑक्साइड गैस बनती है।

$$S + O₂ \rightarrow SO₂$$

  • सल्फर + ऑक्सीजन → सल्फर डाइऑक्साइड

चूने के पानी का परीक्षण

  • कार्बन डाइऑक्साइड गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है। यह कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति का परीक्षण है।
याद रखें

ऑक्सीजन स्वयं नहीं जलती, लेकिन जलने में सहायता करती है। यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

ऑक्सीजन के उपयोग

ऑक्सीजन के श्वसन और चिकित्सा संबंधी उपयोग
ऑक्सीजन के श्वसन और चिकित्सा संबंधी उपयोग
ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग
ऑक्सीजन के औद्योगिक उपयोग

ऑक्सीजन पृथ्वी पर जीवन के लिए आधारभूत है और इसके अनेक महत्वपूर्ण उपयोग हैं।

  1. श्वसन (Respiration):
  • सभी सजीवों (पौधे और जीवधारी) के श्वसन के लिए अनिवार्य है।
  • श्वसन प्रक्रिया से जीव ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
  • विशेष परिस्थितियाँ:
  • पर्वतारोही: ऊँचाई पर कम वायुमंडलीय दाब और ऑक्सीजन की कमी के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग करते हैं।
  • अंतरिक्ष यात्री और गोताखोर: प्रतिकूल वातावरण में श्वसन के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर साथ ले जाते हैं।
  • चिकित्सा: अस्पतालों में दमा, हृदय रोग के मरीजों और नवजात शिशुओं को श्वसन में सहायता के लिए ऑक्सीजन मास्क का उपयोग किया जाता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t4_scene2] ऑक्सीजन के श्वसन संबंधी उपयोगों को दर्शाता है।
  1. वेल्डिंग (Welding):
  • धातुओं को जोड़ने या काटने के लिए उच्च तापमान वाली ज्वाला उत्पन्न करने में उपयोग होती है।
  • ऑक्सीजन को एसिटिलीन जैसी अन्य ज्वलनशील गैसों के साथ मिलाकर ऑक्सी-एसिटिलीन ज्वाला बनाई जाती है।
  • ऑक्सीजन की उपस्थिति दहन प्रक्रिया को तीव्र करती है, जिससे आवश्यक उच्च तापमान प्राप्त होता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t4_scene3] औद्योगिक उपयोगों को दर्शाता है।
  1. औद्योगिक प्रक्रियाएँ:
  • स्टील उत्पादन: स्टील बनाने की प्रक्रिया में अशुद्धियों को हटाने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग होता है।
  • रासायनिक संश्लेषण: विभिन्न रसायनों के निर्माण में।
  • जल उपचार: जल उपचार संयंत्रों में।
  • रॉकेट ईंधन: रॉकेट में ऑक्सीकारक (oxidizer) के रूप में।
  1. अन्य उपयोग:
  • जल उपचार संयंत्रों में।
  • रॉकेट ईंधन में ऑक्सीकारक के रूप में।
  • विभिन्न रासायनिक उद्योगों में।
महत्त्वपूर्ण

ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में अधिकांश दहन प्रक्रियाएँ संभव नहीं हैं, जो इसके औद्योगिक महत्व को दर्शाता है।

नाइट्रोजन का उपयोग

नाइट्रोजन का महत्व
नाइट्रोजन का महत्व
नाइट्रोजन के विविध उपयोग
नाइट्रोजन के विविध उपयोग

वायुमंडल में लगभग 78% नाइट्रोजन गैस होती है, जो ऑक्सीजन की सक्रियता को नियंत्रित करती है और अनेक महत्वपूर्ण उपयोगों में आती है।

नाइट्रोजन का महत्व

  • ऑक्सीजन की सक्रियता का नियंत्रण: यदि केवल ऑक्सीजन होती, तो दहन प्रक्रियाएँ बहुत तेज़ी से होतीं और जीवन के लिए आवश्यक कई रासायनिक प्रक्रियाएँ अनियंत्रित हो जातीं। नाइट्रोजन की उपस्थिति एक स्थिर और संतुलित वातावरण प्रदान करती है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t5_scene1] नाइट्रोजन के महत्व को दर्शाता है।

नाइट्रोजन के उपयोग

  1. जीवधारियों की वृद्धि:
  • यह पौधों और जीवधारियों के लिए प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड और अन्य जैविक अणुओं का एक अनिवार्य घटक है।
  • उनकी वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है।
  1. उर्वरक उत्पादन:
  • नाइट्रोजन का उपयोग हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया करके अमोनिया (NH₃) बनाने के लिए किया जाता है (हैबर विधि)।
  • अमोनिया से यूरिया जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक बनते हैं, जो कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।
  1. विद्युत लैंप:
  • अपनी निष्क्रिय प्रवृत्ति के कारण, नाइट्रोजन को विद्युत लैंपों (बल्बों) में भरा जाता है।
  • यह फिलामेंट के ऑक्सीकरण को रोकती है और बल्ब की आयु बढ़ाती है।
  1. खाद्य संरक्षण:
  • भंडारित भोज्य पदार्थों को ताजा बनाए रखने के लिए उपयोग की जाती है।
  • पैकेट बंद जलपान सामग्री (जैसे आलू चिप्स) और बिना पके/तले भोजन के पैकेट में नाइट्रोजन गैस भरी जाती है।
  • यह भोज्य पदार्थों का हवा की ऑक्सीजन से संपर्क नहीं होने देती, जिससे ऑक्सीकरण और खराब होने से बचाव होता है।
  1. अन्य उपयोग:
  • रसायन उद्योग में।
  • शीतलन (refrigeration) में (तरल नाइट्रोजन)।
  • टायरों में हवा भरने में (विशेषकर विमान और रेसिंग कारों के टायरों में)।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t5_scene2] नाइट्रोजन के विविध उपयोगों को दर्शाता है।
याद रखें

नाइट्रोजन की निष्क्रिय प्रकृति ही इसे कई अनुप्रयोगों में उपयोगी बनाती है, खासकर जहाँ ऑक्सीकरण से बचाव की आवश्यकता होती है।

वायु प्रदूषण और बचाव के उपाय

वायु प्रदूषण के मुख्य कारण
वायु प्रदूषण के मुख्य कारण
वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय
वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय

वायु प्रदूषण वह स्थिति है जब वायुमंडल में हानिकारक पदार्थ इतनी अधिक मात्रा में जमा हो जाते हैं कि वे मानव स्वास्थ्य, जीव-जंतुओं और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं।

वायु प्रदूषण के कारण

  1. वाहन (Vehicles):
  • पेट्रोल और डीज़ल के अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOₓ), सीसा (Lead) और अन्य हानिकारक गैसें निकलती हैं।
  • वाहनों की बढ़ती संख्या और पुरानी तकनीक वाले इंजन प्रदूषण बढ़ाते हैं।
  1. उद्योग (Industrialization):
  • स्टील, सीमेंट, उर्वरक उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित ठोस कण और गैसें (जैसे सल्फर डाइऑक्साइड)।
  • कोयले के बढ़ते इस्तेमाल से राख और अन्य प्रदूषक निकलते हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t6_scene2] वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों को दर्शाता है।
  1. खुले में कचरा जलाना:
  • सूखे पत्ते, कचरा और लकड़ी जलाने से धुआँ और हानिकारक गैसें निकलती हैं।
  1. प्राकृतिक स्रोत:
  • ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली गैसें।
  • जंगल की आग से उठने वाला धुआँ।

वायु प्रदूषक

  • निलंबित कण (Suspended Particulate Matter - SPM): धूल, धुआँ, राख।
  • गैसीय प्रदूषक: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), सीसा।

वायु प्रदूषण के प्रभाव

  • मानव स्वास्थ्य: सांस संबंधी रोग (दमा, ब्रोंकाइटिस), आँखों में जलन, गले में खराश, फेफड़ों को नुकसान।
  • पर्यावरण: पौधों को नुकसान (पत्तियाँ पीली पड़ना), मृदा की उर्वरता में कमी, जलीय जीवन को खतरा।
  • संरचनाएँ: इमारतों, मूर्तियों और ऐतिहासिक स्मारकों का क्षरण (जैसे ताजमहल)।

वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय

  1. औद्योगिक सुधार: निर्माण प्रक्रियाओं में बदलाव लाकर प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करना।
  2. स्वच्छ ऊर्जा: सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे गैर-प्रदूषणकारी ऊर्जा स्रोतों का अधिक उपयोग करना।
  3. वाहन नियंत्रण: वाहनों की नियमित प्रदूषण जाँच करवाना। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना।
  4. कचरा प्रबंधन: सूखे पत्तों, कचरे को खुले में न जलाना, बल्कि उनका सुरक्षित निपटान करना।
  5. वृक्षारोपण: अधिक वृक्ष उगाना, क्योंकि पेड़ हवा को शुद्ध करते हैं ('प्रकृति के फेफड़े')।
  6. चिमनियों की ऊँचाई: फैक्ट्री की चिमनी की ऊँचाई बढ़ाना ताकि प्रदूषित वायु निचले इलाकों में सीमित न रहे।
  7. व्यक्तिगत आदतें: धूम्रपान से बचना, इत्र और स्प्रे का कम उपयोग करना, पेट्रोल/डीज़ल का उपयोग आवश्यकतानुसार ही करना।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t6_scene3] प्रदूषण से बचाव के उपायों को दर्शाता है।
💡सुझाव

वायु प्रदूषण के कारण और बचाव के उपाय बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं। इन्हें बिंदुवार याद रखें।

धूम कोहरा

धूम कोहरा क्या है?
धूम कोहरा क्या है?
धूम कोहरे के प्रभाव और बचाव
धूम कोहरे के प्रभाव और बचाव

धूम कोहरा (Smog) शब्द 'धुआँ' (Smoke) और 'कोहरा' (Fog) से मिलकर बना है। यह एक गंभीर वायुमंडलीय घटना है जो स्वास्थ्य और दृश्यता को प्रभावित करती है।

धूम कोहरा क्या है?

  • यह सर्दियों के दिनों में विशेष रूप से बनता है जब वायुमंडल में नमी अधिक होती है और तापमान कम होता है
  • धुएँ में उपस्थित नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOₓ) और अन्य वायु प्रदूषक (जैसे सल्फर डाइऑक्साइड, निलंबित कण) कोहरे की बूंदों के साथ मिलकर एक घना और जहरीला मिश्रण बनाते हैं।
  • यह मिश्रण जमीन के करीब एक मोटी, पीली-भूरी परत के रूप में दिखाई देता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t7_scene2] धूम कोहरे की अवधारणा को दर्शाता है।

धूम कोहरे के प्रभाव

  • स्वास्थ्य पर:
  • सांस से संबंधित गंभीर रोग जैसे दमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस (Bronchitis) और लगातार खाँसी।
  • आँखों में जलन, गले में खराश और फेफड़ों को नुकसान।
  • बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक।
  • दृश्यता पर:
  • दृश्यता (visibility) बहुत कम हो जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के उपाय

  • वायु प्रदूषण को कम करना ही धूम कोहरे से बचाव का मुख्य उपाय है।
  • सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना।
  • ऊर्जा बचाना।
  • औद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करना।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t7_scene3] धूम कोहरे के प्रभावों और बचाव को दर्शाता है।
🚧ग़लत धारणा

धूम कोहरा केवल कोहरा नहीं है; यह प्रदूषण और कोहरे का मिश्रण है।

पौधाघर प्रभाव (ग्रीनहाउस प्रभाव)

सूर्य की किरणें और पृथ्वी
सूर्य की किरणें और पृथ्वी
अवरक्त किरणें और वायुमंडल
अवरक्त किरणें और वायुमंडल
ग्रीनहाउस गैसें
ग्रीनहाउस गैसें
पौधाघर प्रभाव का महत्व
पौधाघर प्रभाव का महत्व

पौधाघर प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो पृथ्वी के औसत तापमान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रक्रिया

  1. सूर्य की किरणें: सूर्य से आने वाली ऊर्जा विद्युतचुंबकीय विकिरणों के रूप में पृथ्वी तक पहुँचती है।
  2. ऊष्मा का अवशोषण: पृथ्वी की सतह इन विकिरणों के एक बड़े हिस्से को अवशोषित कर लेती है, जिससे उसका तापमान बढ़ जाता है।
  3. अवरक्त किरणों का परावर्तन: पृथ्वी द्वारा अवशोषित ऊष्मा का एक भाग अवरक्त विकिरणों (Infrared radiations) के रूप में वापस अंतरिक्ष में परावर्तित होता है।
  4. ग्रीनहाउस गैसों द्वारा अवशोषण: वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें, जिन्हें ग्रीनहाउस गैसें कहा जाता है, इन अवरक्त किरणों को अवशोषित कर लेती हैं।
  5. ऊष्मा का फँसना: ये गैसें इन किरणों को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर निकलने से रोकती हैं, जिससे पृथ्वी की सतह और निचला वायुमंडल गर्म बना रहता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t8_scene2] अवरक्त किरणों और वायुमंडल के बीच संबंध को दर्शाता है।

ग्रीनहाउस गैसें

  • वे गैसीय घटक जो वायुमंडल में अवरक्त विकिरणों को अवशोषित और उत्सर्जित करती हैं।
  • प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें:
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
  • मीथेन (CH₄)
  • नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)
  • ओजोन (O₃)
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t8_scene3] ग्रीनहाउस गैसों को दर्शाता है।

पौधाघर प्रभाव का महत्व

  • यह पृथ्वी को इतना गर्म रखती है कि यहाँ तरल पानी मौजूद रह सके और जीवन पनप सके।
  • यदि ग्रीनहाउस गैसें न होतीं, तो पृथ्वी का औसत तापमान वर्तमान से लगभग 33°C कम होता, जिससे यह एक बर्फीला ग्रह बन जाता जहाँ जीवन का अस्तित्व लगभग असंभव होता।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t8_scene4] पौधाघर प्रभाव के महत्व को दर्शाता है।

पौधाघर (Greenhouse)

  • ठंडे प्रदेशों में पौधों को जीवित रखने के लिए काँच के घर (कमरे) में रखा जाता है।
  • काँच की दीवारें सूर्य का प्रकाश पौधों तक पहुँचने देती हैं, लेकिन पृथ्वी द्वारा परावर्तित अवरक्त किरणों को बाहर जाने नहीं देतीं।
  • इससे अंदर का वातावरण गर्म रहता है और पौधों को आवश्यक ऊष्मा मिलती है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t8_scene4] पौधाघर प्रभाव के महत्व को दर्शाता है।
महत्त्वपूर्ण

मानवीय गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।

अम्ल वर्षा और उसके प्रभाव

अम्ल वर्षा क्या है?
अम्ल वर्षा क्या है?
अम्ल वर्षा का निर्माण
अम्ल वर्षा का निर्माण
अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव
अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव

अम्ल वर्षा (Acid Rain) वह वर्षा है जिसका pH मान सामान्य वर्षा (pH 5.6) से कम होता है, यानी यह अधिक अम्लीय होती है।

अम्ल वर्षा का निर्माण

  1. प्रदूषक उत्सर्जन: औद्योगिक उत्सर्जन और वाहनों के धुएँ से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जैसी गैसें वायुमंडल में मिल जाती हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t9_scene1] अम्ल वर्षा की शुरुआत को दर्शाता है।
  1. रासायनिक अभिक्रिया: ये गैसें वायुमंडल में ऊपर उठती हैं और वहाँ मौजूद जलवाष्प (पानी) के साथ प्रतिक्रिया करती हैं।
  • सल्फर डाइऑक्साइड जल के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बनाती है।
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड जल के साथ मिलकर नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनाती है।
  1. अम्लीय वर्षा: ये अम्ल वर्षा के जल के pH मान को कम कर देते हैं, जिससे वर्षा सामान्य से अधिक अम्लीय हो जाती है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t9_scene2] अम्ल वर्षा के निर्माण को दर्शाता है।

अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभाव

  1. वनस्पति पर:
  • पौधों के पत्ते पहले पीले पड़ जाते हैं और फिर नष्ट हो जाते हैं
  • मृदा की उर्वरता को कम करती है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।
  • जंगलों को नुकसान पहुँचाती है।
  1. जलीय जीवन पर:
  • जल स्रोतों (नदियों, झीलों) को प्रदूषित करती है।
  • जलीय जीवन, विशेषकर मछलियों की प्रजातियों को खतरा होता है और वे विलुप्त हो सकती हैं।
  1. इमारतों और स्मारकों पर:
  • भवनों, मूर्तियों और ऐतिहासिक स्मारकों, विशेषकर पत्थर एवं संगमरमर से बनी वस्तुओं के साथ रासायनिक अभिक्रिया करके उनका क्षरण (corrosion) करती है।
  • उदाहरण: आगरा स्थित ताजमहल का क्षरण अम्ल वर्षा का एक प्रमुख उदाहरण है।
  1. मानव स्वास्थ्य पर:
  • सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t9_scene3] अम्ल वर्षा के हानिकारक प्रभावों को दर्शाता है।
याद रखें

अम्ल वर्षा के लिए मुख्य रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जिम्मेदार हैं, जो सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं।

वायुमंडलीय दाब और उसके प्रभाव

हम पिचकते क्यों नहीं?
हम पिचकते क्यों नहीं?
ऊँचाई के साथ दाब में परिवर्तन
ऊँचाई के साथ दाब में परिवर्तन
वायुमंडलीय दाब की अवधारणा
वायुमंडलीय दाब की अवधारणा
दैनिक जीवन में दाब का महत्व
दैनिक जीवन में दाब का महत्व

हमारे चारों ओर स्थित वायुमंडल द्वारा आरोपित दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं। वायु में उपस्थित गैसों के सूक्ष्म कण वस्तुओं की सतहों से टकराकर उन पर दाब डालते हैं।

वायुमंडलीय दाब की अवधारणा

  • कल्पना करें कि आपके सिर के ऊपर से लेकर वायुमंडल की ऊपरी सीमा तक हवा का एक बहुत बड़ा स्तंभ है। इस पूरे वायु स्तंभ का जो भार होता है, वह पृथ्वी की सतह पर दाब डालता है।
  • यह दाब हर दिशा में लगता है।
  • समुद्र तल पर वायुमंडलीय दाब सबसे अधिक होता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t11_scene2] वायुमंडलीय दाब की अवधारणा को दर्शाता है।

ऊँचाई के साथ दाब में परिवर्तन

  • जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर की ओर जाते हैं (जैसे पहाड़ों पर चढ़ते समय या हवाई जहाज में), वायु का घनत्व कम होता जाता है
  • वायु के घनत्व में कमी के कारण वायुमंडलीय दाब में भी कमी आ जाती है
  • प्रभाव:
  • अधिक ऊँचाई पर पर्वतारोहियों को सांस लेने में कठिनाई होती है और वे ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग करते हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t10_scene4] ऊँचाई के साथ दाब में परिवर्तन को दर्शाता है।

हम पिचकते क्यों नहीं?

  • हमारे शरीर पर वायुमंडल अत्यधिक दाब डालता है।
  • हमारा और अन्य जीवधारियों का शरीर कोशिकाओं का बना होता है, जिनमें तरल पदार्थ होते हैं जो अंदर से बाहर की ओर दाब आरोपित करते हैं।
  • कोशिका के अंदर से आरोपित यह दाब वायुमंडलीय दाब के लगभग बराबर होता है।
  • इस संतुलन के कारण अंदर और बाहर का दाब संतुलित हो जाता है और हम पिचकते नहीं हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t10_scene2] हम पिचकते क्यों नहीं, इसे समझाता है।

वायुमंडलीय दाब के कुछ प्रभाव

  • रक्त वाहिनियों पर:
  • यदि तरल पदार्थ के द्वारा कोशिका के अंदर से आरोपित दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाए, तो रक्त वाहिनियाँ फूल सकती हैं और फट भी सकती हैं।
  • ऊँचाई पर जाने पर वायुमंडलीय दाब कम होने से रक्त वाहिनियों का दाब अधिक हो जाता है, जिससे वे फूल जाती हैं।
  • मौसम पर:
  • वायुमंडलीय दाब में परिवर्तन मौसम को भी प्रभावित करता है।
  • जब किसी स्थान का वायुमंडलीय दाब अचानक कम हो जाता है, तब आंधी-तूफान आते हैं।
  • जब वायुमंडलीय दाब बहुत कम हो जाता है, तो वर्षा भी होने लगती है
  • दैनिक जीवन में:
  • हम स्ट्रॉ से तरल पदार्थ पी पाते हैं क्योंकि स्ट्रॉ के अंदर दाब कम होता है, जिससे बाहरी वायुमंडलीय दाब तरल को ऊपर धकेलता है।
  • फाउंटेन पेन, सिरिंज और टायर में हवा भरने जैसे कई कार्यों में भी वायुमंडलीय दाब का सिद्धांत लागू होता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t11_scene4] दैनिक जीवन में दाब के महत्व को दर्शाता है।
महत्त्वपूर्ण

वायुमंडलीय दाब का संतुलन हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। बाहरी दाब और आंतरिक दाब का संतुलन हमें सामान्य रूप से कार्य करने में मदद करता है।

वायुमंडलीय दाब का मापन

वायुमंडलीय दाब का मापन
वायुमंडलीय दाब का मापन
दाबमापी से मापन
दाबमापी से मापन

वायुमंडलीय दाब का मापन मौसम विज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मौसम के पूर्वानुमान में मदद करता है।

बैरोमीटर

  • वायुमंडलीय दाब का मापन बैरोमीटर नामक यंत्र से किया जाता है।
  • सन् 1643 में इतालवी वैज्ञानिक टॉरिसेली ने इसका आविष्कार किया था।
  • बैरोमीटर के प्रकार:
  1. पारद बैरोमीटर (Mercury Barometer): पारे के स्तंभ की ऊँचाई के आधार पर दाब मापता है।
  2. ऐनीरॉयड बैरोमीटर (Aneroid Barometer): बिना तरल पदार्थ के दाब मापता है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t10_scene3] वायुमंडलीय दाब के मापन को दर्शाता है।

सामान्य वायुमंडलीय दाब का मान

  • सामान्यतः वायुमंडलीय दाब का मान निम्नलिखित के तुल्य होता है:
  • 1.013 x 10⁵ पास्कल (Pa)
  • 1.013 x 10⁵ न्यूटन/मीटर² (N/m²)
  • 76 सेमी पारे के स्तंभ का दाब

मौसम पूर्वानुमान में महत्व

  • उच्च दाब अक्सर साफ मौसम का संकेत देता है।
  • निम्न दाब तूफानी या वर्षा वाले मौसम का संकेत हो सकता है।
  • दाबमापी में पारे का स्तर या ऐनीरॉयड बैरोमीटर में संकेतक की गति वायुमंडलीय दाब में होने वाले परिवर्तनों को दर्शाती है।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t11_scene3] दाबमापी से मापन के महत्व को दर्शाता है।
📖परिभाषा

पास्कल (Pascal): दाब की SI इकाई है, जो 1 न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (N/m²) के बराबर होती है।

द्रवों द्वारा समान गहराई पर समान दाब

क्या द्रव समान गहराई पर समान दाब डालते हैं?
क्या द्रव समान गहराई पर समान दाब डालते हैं?
समान गहराई पर समान दाब
समान गहराई पर समान दाब

द्रव अपने अंदर डूबी हुई वस्तुओं पर और बर्तन की दीवारों पर दाब डालते हैं। यह दाब द्रव की गहराई पर निर्भर करता है।

क्रियाकलाप द्वारा प्रदर्शन

  1. सामग्री: प्लास्टिक की एक खाली बोतल या टिन का डिब्बा, पानी, कील।
  2. प्रक्रिया:
  • बोतल/डिब्बे में पेंदे से थोड़ा ऊपर, चारों ओर समान ऊँचाई पर कील की सहायता से एक-एक छेद करें।
  • अब बोतल को पानी से भर दें।
  1. अवलोकन: आप देखेंगे कि सभी छेदों से निकलता पानी बोतल से बराबर दूरी पर गिरता है
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t12_scene3] समान गहराई पर समान दाब को दर्शाता है।

निष्कर्ष

  • यह क्रियाकलाप दर्शाता है कि द्रव बर्तन की दीवारों पर समान गहराई पर समान दाब डालते हैं।
  • यदि दाब अलग-अलग होता, तो पानी अलग-अलग दूरी पर गिरता।

महत्व

  • यह सिद्धांत द्रवों के व्यवहार को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • इसका उपयोग कई इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों में होता है, जैसे कि बांधों के डिजाइन में या पनडुब्बियों के निर्माण में।
  • [IMAGE: cg_c8_science_ch03_t12_scene3] समान गहराई पर समान दाब के सिद्धांत को दर्शाता है।
महत्त्वपूर्ण

द्रवों में दाब गहराई के साथ बढ़ता है, लेकिन किसी एक निश्चित गहराई पर दाब सभी दिशाओं में समान होता है।

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