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संख्याओं का खेल
Chhattisgarh · Class 8 · 🧮 Maths · Chapter 17

संख्याओं का खेल

पूर्ण संख्याओं के गुणधर्मविभाज्यता के नियमभिन्न संख्याएँपरिमेय संख्याएँगणितीय पहेलियाँ

यह अध्याय 'संख्याओं का खेल' छात्रों को पूर्ण संख्याओं, भिन्नों, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं के गुणों और संक्रियाओं से परिचित कराता है। इसमें योग, घटाव, गुणा और भाग के नियमों के साथ-साथ विभाज्यता के नियमों की भी विस्तृत व्याख्या की गई है। छात्र संख्याओं के पैटर्न और गणितीय पहेलियों के माध्यम से अपनी तार्किक सोच विकसित करते हैं। यह अध्याय गणित की बुनियादी समझ को मजबूत करने और संख्या प्रणाली के साथ खेलने के लिए महत्वपूर्ण है।

पूर्ण संख्याओं का योग

पूर्ण संख्याएँ (0, 1, 2, 3...) गणित की मूलभूत संख्याएँ हैं। इनके योग के कुछ महत्वपूर्ण गुणधर्म निम्नलिखित हैं:

  • संवरक नियम (Closure Property):
  • दो पूर्ण संख्याओं का योगफल हमेशा एक पूर्ण संख्या होता है।
  • यदि \(a\) और \(b\) कोई भी दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a + b = c\) भी एक पूर्ण संख्या होगी।
  • उदाहरण: \(18 + 12 = 30\) (30 एक पूर्ण संख्या है)।
  • क्रमविनिमेय नियम (Commutative Property):
  • दो पूर्ण संख्याओं को किसी भी क्रम में जोड़ने पर योगफल समान रहता है।
  • यदि \(a\) और \(b\) कोई भी दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a + b = b + a\)।
  • उदाहरण: \(25 + 43 = 68\) और \(43 + 25 = 68\)।
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  • योग का तत्समक (Additive Identity):
  • किसी भी पूर्ण संख्या में शून्य (0) जोड़ने पर या शून्य में किसी पूर्ण संख्या को जोड़ने पर, संख्या का मान अपरिवर्तित रहता है।
  • यदि \(a\) कोई पूर्ण संख्या है, तो \(a + 0 = 0 + a = a\)।
  • शून्य को योग का तत्समक कहते हैं।
  • उदाहरण: \(15 + 0 = 15\) और \(0 + 15 = 15\).
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  • साहचर्य नियम (Associative Property):
  • तीन या अधिक पूर्ण संख्याओं को जोड़ते समय, संख्याओं के समूहन (grouping) को बदलने से योगफल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • यदि \(a, b, c\) तीन पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \((a + b) + c = a + (b + c)\)।
  • उदाहरण: \((17 + 29) + 44 = 46 + 44 = 90\) और \(17 + (29 + 44) = 17 + 73 = 90\)।
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महत्त्वपूर्ण

पूर्ण संख्याएँ 0 से शुरू होती हैं और अनंत तक जाती हैं (0, 1, 2, 3, ...)।

📖परिभाषा

संवरक नियम: किसी संक्रिया के तहत संख्याओं का एक समुच्चय 'बंद' होता है यदि उस संक्रिया को समुच्चय के किन्हीं भी दो तत्वों पर लागू करने पर परिणाम भी उसी समुच्चय का एक तत्व हो।

पूर्ण संख्याओं के घटाने के नियम

पूर्ण संख्याओं के घटाने में योग के नियमों से कुछ भिन्नताएँ होती हैं:

  • संवरक नियम का उल्लंघन:
  • दो पूर्ण संख्याओं का घटाव हमेशा एक पूर्ण संख्या नहीं होता है।
  • यदि \(a > b\) या \(a = b\) हो, तो \(a - b\) एक पूर्ण संख्या होगी।
  • उदाहरण: \(15 - 8 = 7\) (पूर्ण संख्या), \(18 - 18 = 0\) (पूर्ण संख्या)।
  • यदि \(a < b\) हो, तो \(a - b\) एक पूर्ण संख्या नहीं होगी (यह एक ऋणात्मक पूर्णांक होगी)।
  • उदाहरण: \(16 - 23 = -7\) (पूर्ण संख्या नहीं)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t2_scene1]
  • क्रमविनिमेय नियम का उल्लंघन:
  • घटाने में संख्याओं का क्रम बदलने पर परिणाम बदल जाता है।
  • यदि \(a\) और \(b\) दो भिन्न पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a - b \neq b - a\)।
  • उदाहरण: \(25 - 8 = 17\) लेकिन \(8 - 25 = -17\)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t2_scene2]
  • साहचर्य नियम का उल्लंघन:
  • तीन या अधिक पूर्ण संख्याओं के घटाने में समूहन बदलने पर परिणाम बदल जाता है।
  • \((a - b) - c \neq a - (b - c)\)।
  • उदाहरण: \((25 - 8) - 6 = 17 - 6 = 11\) जबकि \(25 - (8 - 6) = 25 - 2 = 23\)।
  • शून्य का गुणधर्म:
  • किसी पूर्ण संख्या में से शून्य घटाने पर वही संख्या प्राप्त होती है: \(a - 0 = a\)।
  • उदाहरण: \(5 - 0 = 5\), \(18 - 0 = 18\)।
  • किसी पूर्ण संख्या में से उसी संख्या को घटाने पर शून्य प्राप्त होता है: \(a - a = 0\)।
  • उदाहरण: \(15 - 15 = 0\), \(23 - 23 = 0\)।
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🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर घटाने में क्रमविनिमेय और साहचर्य नियमों को लागू करने की गलती करते हैं। याद रखें, ये नियम केवल योग और गुणा के लिए मान्य हैं, घटाव और भाग के लिए नहीं।

याद रखें

घटाने की क्रिया पूर्ण संख्याओं के समुच्चय पर 'बंद' नहीं होती है क्योंकि परिणाम हमेशा एक पूर्ण संख्या नहीं होता है।

पूर्ण संख्याओं का गुणा

पूर्ण संख्याओं के गुणा के महत्वपूर्ण गुणधर्म निम्नलिखित हैं:

  • संवरक नियम (Closure Property):
  • दो पूर्ण संख्याओं का गुणनफल हमेशा एक पूर्ण संख्या होता है।
  • यदि \(a\) और \(b\) कोई भी दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a \times b = c\) भी एक पूर्ण संख्या होगी।
  • उदाहरण: \(18 \times 8 = 144\) (144 एक पूर्ण संख्या है)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t3_scene1]
  • क्रमविनिमेय नियम (Commutative Property):
  • दो पूर्ण संख्याओं को किसी भी क्रम में गुणा करने पर गुणनफल समान रहता है।
  • यदि \(a\) और \(b\) कोई भी दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a \times b = b \times a\)।
  • उदाहरण: \(5 \times 8 = 40\) और \(8 \times 5 = 40\)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t3_scene2]
  • साहचर्य नियम (Associative Property):
  • तीन या अधिक पूर्ण संख्याओं को गुणा करते समय, संख्याओं के समूहन को बदलने से गुणनफल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • यदि \(a, b, c\) तीन पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \((a \times b) \times c = a \times (b \times c)\)।
  • उदाहरण: \((4 \times 5) \times 6 = 20 \times 6 = 120\) और \(4 \times (5 \times 6) = 4 \times 30 = 120\)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t3_scene2]
  • शून्य से गुणा का गुणधर्म:
  • किसी भी पूर्ण संख्या को शून्य से गुणा करने पर गुणनफल हमेशा शून्य होता है।
  • यदि \(a\) कोई पूर्ण संख्या है, तो \(a \times 0 = 0\)।
  • उदाहरण: \(8 \times 0 = 0\), \(19 \times 0 = 0\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t3_scene3]
  • एक (1) से गुणा का गुणधर्म (गुणन तत्समक):
  • किसी भी पूर्ण संख्या को एक से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
  • यदि \(a\) कोई पूर्ण संख्या है, तो \(a \times 1 = a\)।
  • संख्या '1' को गुणन तत्समक (Multiplicative Identity) कहते हैं।
  • उदाहरण: \(7 \times 1 = 7\), \(25 \times 1 = 25\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t3_scene3]
  • वितरण नियम (Distributive Property):
  • गुणा योग या घटाव पर वितरित होता है।
  • यदि \(a, b, c\) पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a \times (b + c) = (a \times b) + (a \times c)\) और \(a \times (b - c) = (a \times b) - (a \times c)\)।
  • उदाहरण (योग पर): \(5 \times (8 + 4) = 5 \times 12 = 60\) और \(5 \times 8 + 5 \times 4 = 40 + 20 = 60\)।
  • उदाहरण (घटाव पर): \(5 \times (8 - 4) = 5 \times 4 = 20\) और \(5 \times 8 - 5 \times 4 = 40 - 20 = 20\)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t3_scene4]
💡सुझाव

वितरण नियम (Distributive Property) बड़ी संख्याओं के गुणा को सरल बनाने में बहुत उपयोगी है। जैसे \(15 \times 102 = 15 \times (100 + 2) = 15 \times 100 + 15 \times 2 = 1500 + 30 = 1530\).

पूर्ण संख्याओं का विभाजन

पूर्ण संख्याओं के विभाजन के नियम:

  • गुणन क्रिया का प्रतिलोम:
  • भाग की क्रिया गुणन क्रिया का उल्टा (प्रतिलोम) होती है।
  • यदि \(a \div b = c\), तो \(c \times b = a\)।
  • उदाहरण: \(40 \div 4 = 10\) का अर्थ है \(10 \times 4 = 40\)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t4_scene1]
  • संवरक नियम का उल्लंघन:
  • दो पूर्ण संख्याओं का भागफल हमेशा एक पूर्ण संख्या नहीं होता है।
  • भाग की क्रिया में शेषफल (remainder) बच सकता है।
  • उदाहरण: \(20 \div 5 = 4\) (पूर्ण संख्या, शेषफल 0) लेकिन \(25 \div 4 = 6\) और शेषफल 1 (पूर्ण संख्या नहीं)।
  • अतः, पूर्ण संख्याओं का समुच्चय भाग की संक्रिया के तहत 'बंद' नहीं होता है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t4_scene3]
  • शून्य से विभाजन:
  • किसी भी संख्या को शून्य से विभाजित करना अपरिभाषित है। \(a \div 0\) का कोई अर्थ नहीं है।
  • शून्य को किसी गैर-शून्य पूर्ण संख्या से विभाजित करने पर भागफल हमेशा शून्य होता है: \(0 \div a = 0\) (जहाँ \(a \neq 0\))।
  • स्वयं से विभाजन:
  • शून्य को छोड़कर, किसी भी पूर्ण संख्या को उसी संख्या से विभाजित करने पर भागफल सदैव 1 प्राप्त होता है।
  • यदि \(a\) कोई पूर्ण संख्या है (जहाँ \(a \neq 0\)), तो \(a \div a = 1\)।
  • उदाहरण: \(28 \div 28 = 1\), \(49 \div 49 = 1\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t4_scene2]
  • 1 से विभाजन:
  • किसी भी पूर्ण संख्या को 1 से विभाजित करने पर भागफल सदैव वही संख्या प्राप्त होती है।
  • यदि \(a\) कोई पूर्ण संख्या है, तो \(a \div 1 = a\)।
  • उदाहरण: \(15 \div 1 = 15\), \(40 \div 1 = 40\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t4_scene2]
  • क्रमविनिमेय और साहचर्य नियमों का उल्लंघन:
  • घटाव की तरह, भाग में भी क्रमविनिमेय और साहचर्य नियम लागू नहीं होते हैं।
  • \(a \div b \neq b \div a\) (जब तक \(a=b\) या \(a=b=1\) न हो)।
  • \((a \div b) \div c \neq a \div (b \div c)\).
महत्त्वपूर्ण

गणित में शून्य से भाग देना अपरिभाषित है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जिसे हमेशा याद रखना चाहिए।

भिन्न संख्या

भिन्न संख्याएँ पूर्ण इकाई के हिस्सों को दर्शाती हैं।

  • भिन्न की परिभाषा:
  • एक भिन्न में दो भाग होते हैं: अंश (Numerator) और हर (Denominator)
  • हर बताता है कि पूरी चीज़ को कितने बराबर भागों में बांटा गया है।
  • अंश बताता है कि उन भागों में से कितने लिए गए हैं।
  • उदाहरण: \(3/4\) में, 4 हर है (कुल 4 भाग) और 3 अंश है (3 भाग लिए गए)।
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  • भिन्नों के प्रकार:
  • उचित भिन्न (Proper Fraction):
  • अंश हर से छोटा होता है (अंश < हर)।
  • इनका मान हमेशा 1 से कम होता है।
  • उदाहरण: \(1/2, 3/4, 5/7\).
  • अनुचित भिन्न (Improper Fraction):
  • अंश हर से बड़ा या उसके बराबर होता है (अंश \(\ge\) हर)।
  • इनका मान 1 के बराबर या 1 से अधिक होता है।
  • उदाहरण: \(5/3, 7/2, 4/4\).
  • मिश्र भिन्न (Mixed Fraction):
  • यह एक पूर्ण संख्या और एक उचित भिन्न का संयोजन होता है।
  • यह अनुचित भिन्न को व्यक्त करने का एक और तरीका है।
  • उदाहरण: \(2 \frac{1}{3}\) (दो सही एक बटा तीन)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t5_scene2]
  • मिश्र भिन्न को अनुचित भिन्न में बदलना:
  • पूर्ण संख्या को हर से गुणा करें और उसमें अंश जोड़ें। यह नया अंश होगा। हर वही रहेगा।
  • सूत्र: \(A \frac{B}{C} = \frac{(A \times C) + B}{C}\)
  • उदाहरण: \(2 \frac{4}{37} = \frac{(2 \times 37) + 4}{37} = \frac{74 + 4}{37} = \frac{78}{37}\).
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  • अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न में बदलना:
  • अंश को हर से भाग दें।
  • भागफल पूर्ण संख्या होगी।
  • शेषफल नया अंश होगा।
  • भाजक (मूल हर) वही रहेगा।
  • उदाहरण: \(78/37\) को भाग देने पर भागफल 2 और शेषफल 4 मिलता है। अतः, \(78/37 = 2 \frac{4}{37}\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t5_scene4]
  • भिन्नों की तुलना:
  • जब अंश समान हों: जिस भिन्न का हर सबसे छोटा होता है, वह भिन्न सबसे बड़ी होती है। (जैसे \(1/2 > 1/3\)).
  • जब हर समान हों: जिस भिन्न का अंश सबसे बड़ा होता है, वह भिन्न सबसे बड़ी होती है। (जैसे \(7/8 > 6/8\)).
  • जब अंश और हर दोनों भिन्न हों: भिन्नों को समान हर वाली भिन्नों में बदलें (लघुत्तम समापवर्त्य - LCM लेकर) और फिर अंशों की तुलना करें।
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याद रखें

उचित भिन्न हमेशा 1 से छोटी होती है, जबकि अनुचित भिन्न 1 के बराबर या 1 से बड़ी होती है।

भिन्नों को संख्या रेखा पर प्रदर्शित करना

संख्या रेखा पर भिन्नों का निरूपण
संख्या रेखा पर भिन्नों का निरूपण

भिन्नों को संख्या रेखा पर दर्शाना एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो उनके मान को समझने में मदद करती है।

  • संख्या रेखा पर भिन्नों का निरूपण:
  • संख्या रेखा पर दो पूर्ण संख्याओं के बीच की दूरी को भिन्न के हर के बराबर भागों में बांटा जाता है।
  • उदाहरण: \(1/3\) को दर्शाने के लिए, 0 और 1 के बीच की दूरी को 3 बराबर भागों में बांटें। पहला भाग \(1/3\) होगा।
  • यदि भिन्न अनुचित है (जैसे \(4/3\)), तो इसे मिश्र भिन्न में बदलें (जैसे \(1 \frac{1}{3}\))। यह 1 और 2 के बीच में \(1/3\) दूरी पर होगा।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t6_scene2]
  • दो भिन्नों के बीच अनंत संख्याएँ:
  • किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं (जिनमें भिन्न भी शामिल हैं) के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
  • इसका अर्थ है कि आप संख्या रेखा पर दो भिन्नों के बीच हमेशा एक और भिन्न संख्या पा सकते हैं।
  • उदाहरण: \(4/3\) और \(13/9\) के बीच \(25/18, 37/27\) जैसी कई भिन्न संख्याएँ मौजूद हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t6_scene3]
💡सुझाव

संख्या रेखा पर भिन्न दर्शाते समय, पहले यह निर्धारित करें कि भिन्न 0 और 1 के बीच है, 1 और 2 के बीच है, या किसी अन्य अंतराल में। अनुचित भिन्नों को मिश्र भिन्न में बदलना सहायक होता है।

पूर्णांक

पूर्णांक संख्याओं का एक महत्वपूर्ण समुच्चय है जो पूर्ण संख्याओं से अधिक व्यापक है।

  • पूर्णांकों की परिभाषा:
  • पूर्णांक वे संख्याएँ होती हैं जिनमें सभी धनात्मक संख्याएँ (1, 2, 3...), सभी ऋणात्मक संख्याएँ (-1, -2, -3...) और शून्य (0) शामिल होते हैं।
  • पूर्णांकों के समूह को 'I' या 'Z' से व्यक्त किया जाता है।
  • यह समूह अनंत होता है, जिसका अर्थ है कि इसमें न तो कोई सबसे बड़ी संख्या होती है और न ही कोई सबसे छोटी संख्या।
  • उदाहरण: \(... -4, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, 4 ...\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t7_scene1]
  • पूर्णांकों का समूह:
  • धनात्मक पूर्णांक: \(1, 2, 3, ...\)
  • ऋणात्मक पूर्णांक: \(-1, -2, -3, ...\)
  • शून्य: 0 (यह न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक)।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t7_scene2]
  • संख्या रेखा पर पूर्णांक:
  • संख्या रेखा पर शून्य केंद्र में होता है।
  • शून्य के दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक (बढ़ते क्रम में) होते हैं।
  • शून्य के बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक (घटते क्रम में) होते हैं।
  • संख्या रेखा पर दाईं ओर जाने पर संख्याओं का मान बढ़ता है, और बाईं ओर जाने पर मान घटता है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t7_scene3]
महत्त्वपूर्ण

सभी पूर्ण संख्याएँ पूर्णांक होती हैं, लेकिन सभी पूर्णांक पूर्ण संख्याएँ नहीं होतीं (क्योंकि ऋणात्मक संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ नहीं हैं)।

परिमेय संख्या

परिमेय संख्याएँ संख्याओं का एक और व्यापक समूह हैं।

  • परिमेय संख्याओं की परिभाषा:
  • वे संख्याएँ जिन्हें \(p/q\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\)।
  • ये संख्याएँ धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकती हैं।
  • उदाहरण: \(1/2, -3/4, 5/1, 0/7\) आदि।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t8_scene1]
  • परिमेय संख्याओं के उदाहरण:
  • धनात्मक भिन्न: \(6/4\)
  • ऋणात्मक भिन्न: \(-13/4\)
  • पूर्णांक: \(8\) (जिसे \(8/1\) के रूप में लिखा जा सकता है)
  • शून्य: \(0\) (जिसे \(0/7\) के रूप में लिखा जा सकता है)
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t8_scene2]
  • भिन्न और पूर्णांक भी परिमेय संख्याएँ:
  • सभी भिन्न परिमेय संख्याएँ होती हैं क्योंकि वे पहले से ही \(p/q\) रूप में होती हैं।
  • सभी पूर्णांक भी परिमेय संख्याएँ होती हैं क्योंकि किसी भी पूर्णांक को उसके हर में 1 लगाकर \(p/q\) के रूप में लिखा जा सकता है (जैसे \(7 = 7/1\), \(-2 = -2/1\))।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t8_scene3]
  • परिमेय संख्याओं के गुण:
  • तुलना: परिमेय संख्याओं की तुलना की जा सकती है (जैसे भिन्नों की तुलना करते हैं)।
  • संख्या रेखा पर निरूपण: इन्हें संख्या रेखा पर दर्शाया जा सकता है।
  • मानक रूप: परिमेय संख्याओं को उनके मानक रूप में परिवर्तित किया जा सकता है (जैसे \(16/20\) का मानक रूप \(4/5\) है)।
याद रखें

परिमेय संख्याओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त है कि हर \(q\) कभी भी शून्य नहीं होना चाहिए।

स्थानीय मान क्रियाकलाप

स्थानीय मान (Place Value) किसी अंक की संख्या में उसकी स्थिति के आधार पर उसके मान को दर्शाता है।

  • अंकों से संख्याएँ बनाना:
  • दिए गए अंकों का उपयोग करके विभिन्न संख्याएँ बनाई जा सकती हैं।
  • प्रत्येक अंक का मान उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।
  • उदाहरण: 470 में 4 का स्थानीय मान 400 है, जबकि 740 में 4 का स्थानीय मान 40 है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t9_scene1]
  • शून्य का स्थानीय मान:
  • किसी भी पूर्णांक संख्या के बाईं ओर लगे शून्य का कोई मान नहीं होता है।
  • उदाहरण: 047 को 47 के रूप में पढ़ा जाता है (यह दो अंकों की संख्या है, तीन अंकों की नहीं)। 005 का अर्थ केवल 5 होता है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t9_scene2]
  • संख्या का विस्तारित रूप (Expanded Form):
  • किसी भी संख्या का विस्तारित रूप उसके अंकों के स्थानीय मानों के योग को दर्शाता है।
  • तीन अंकों की संख्या \(abc\) के लिए:
  • \(a\) सैकड़ा के स्थान पर है, \(b\) दहाई के स्थान पर है, \(c\) इकाई के स्थान पर है।
  • विस्तारित रूप: \(100 \times a + 10 \times b + c\).
  • उदाहरण: संख्या 345 का विस्तारित रूप \(3 \times 100 + 4 \times 10 + 5 \times 1 = 300 + 40 + 5\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t9_scene3]
महत्त्वपूर्ण

स्थानीय मान की अवधारणा हमें यह समझने में मदद करती है कि संख्याएँ कैसे बनती हैं और प्रत्येक अंक का कुल मान में क्या योगदान होता है।

कुछ गणितीय खेल

गणितीय खेल संख्याओं के गुणों और पैटर्न को समझने का एक मजेदार तरीका हैं।

  • जादुई त्रिभुज (Magic Triangle):
  • इसमें संख्याओं को त्रिभुज की भुजाओं पर इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि प्रत्येक भुजा पर संख्याओं का योग समान हो।
  • उदाहरण: 1 से 6 तक की संख्याओं का उपयोग करके योगफल 9, 10, 11, 12 प्राप्त किया जा सकता है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t10_scene1]
  • संख्या क्रम को पूरा करना (Number Sequence Completion):
  • एक श्रृंखला में गायब संख्याओं को भरने के लिए पैटर्न (जैसे जोड़, घटाव, गुणा, भाग, वर्ग, घन) की पहचान करना।
  • उदाहरण: \(1, 2, 3, \_\_, \_\_, \_\_, 8\) (पैटर्न: +1)
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t10_scene2]
  • बिना पूछे संख्या का अनुमान लगाना (Guessing a Number):
  • एक प्रसिद्ध पहेली जहाँ तीन अंकों की संख्या (प्रथम और अंतिम अंक भिन्न) ली जाती है, उलटकर घटाई जाती है, फिर अंतर को उलटकर जोड़ा जाता है। परिणाम हमेशा 1089 होता है।
  • उदाहरण: संख्या 102, उलटा 201, अंतर \(201 - 102 = 99\), उलटा 990, योग \(99 + 990 = 1089\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t10_scene3]
  • उम्र बताने वाली पहेली:
  • बीजगणितीय सिद्धांतों का उपयोग करके उम्र का अनुमान लगाना। इसमें गणितीय संक्रियाओं की एक श्रृंखला शामिल होती है जिससे अंततः मूल उम्र का पता चलता है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t10_scene4]
  • जादुई वर्ग (Magic Square):
  • एक ग्रिड जिसमें संख्याओं को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है कि प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और मुख्य विकर्ण का योग समान हो।
  • उदाहरण: 1 से 16 तक की संख्याओं का उपयोग करके 4x4 जादुई वर्ग में योगफल 34 होता है।
  • छह अंकों की संख्या पहेली: तीन अंकों की संख्या को दो बार लिखकर छह अंकों की संख्या बनाना (जैसे \(abcabc\))। इसे 7, 11 और 13 से विभाजित करने पर मूल संख्या \(abc\) ही प्राप्त होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि \(7 \times 11 \times 13 = 1001\), और \(abc \times 1001 = abcabc\).
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t10_scene5]
याद रखें

ये खेल न केवल मनोरंजक हैं बल्कि तार्किक सोच और संख्यात्मक तर्क कौशल को भी विकसित करते हैं।

विभाज्यता की जाँच

विभाज्यता की जाँच के नियम
विभाज्यता की जाँच के नियम

विभाज्यता के नियम हमें बिना वास्तविक भाग किए यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि कोई संख्या किसी निश्चित संख्या से पूरी तरह विभाजित होगी या नहीं।

  • 2 से विभाज्यता:
  • यदि किसी संख्या की इकाई का अंक 0, 2, 4, 6 या 8 हो।
  • उदाहरण: 612, 298, 520 सभी 2 से विभाज्य हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene2]
  • 3 से विभाज्यता:
  • यदि संख्या के अंकों का योग 3 से विभाजित होता हो।
  • उदाहरण: 5142 के अंकों का योग \(5+1+4+2 = 12\), जो 3 से विभाज्य है, अतः 5142 भी 3 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene3]
  • 4 से विभाज्यता:
  • यदि किसी संख्या के इकाई व दहाई के अंकों से बनी संख्या 4 से विभाजित होती हो, या इकाई और दहाई पर 00 हो।
  • उदाहरण: 3436 में 36, 4 से विभाज्य है, अतः 3436 भी 4 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene4]
  • 5 से विभाज्यता:
  • यदि किसी संख्या की इकाई का अंक 0 या 5 हो।
  • उदाहरण: 985, 270, 665 सभी 5 से विभाज्य हैं।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene2]
  • 6 से विभाज्यता:
  • यदि कोई संख्या 2 और 3 दोनों से विभाज्य हो।
  • उदाहरण: 456, 2 से विभाज्य है (इकाई अंक 6) और 3 से विभाज्य है (अंकों का योग 15), अतः 456 भी 6 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene4]
  • 7 से विभाज्यता:
  • इकाई के अंक को दोगुना कर शेष अंकों से बनी संख्या से घटाएँ। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ जब तक एक या दो अंकों की संख्या प्राप्त न हो। यदि प्राप्त संख्या 7 से विभाज्य हो, तो मूल संख्या भी 7 से विभाज्य होगी।
  • उदाहरण: 2457 \(\rightarrow\) \(245 - (7 \times 2) = 231\) \(\rightarrow\) \(23 - (1 \times 2) = 21\). चूंकि 21, 7 से विभाज्य है, अतः 2457 भी 7 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene5]
  • 8 से विभाज्यता:
  • यदि किसी संख्या के इकाई, दहाई और सैकड़ा के अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य हो, या तीनों स्थानों पर 000 हो।
  • उदाहरण: 93816 में 816, 8 से विभाज्य है, अतः 93816 भी 8 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene4]
  • 9 से विभाज्यता:
  • यदि संख्या के अंकों का योग 9 से विभाजित होता हो।
  • उदाहरण: 23436 के अंकों का योग \(2+3+4+3+6 = 18\), जो 9 से विभाज्य है, अतः 23436 भी 9 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene3]
  • 10 से विभाज्यता:
  • यदि किसी संख्या की इकाई का अंक 0 हो।
  • उदाहरण: 93410 की इकाई का अंक 0 है, अतः 93410, 10 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene2]
  • 11 से विभाज्यता:
  • इकाई से शुरू कर विषम स्थानों के अंकों का योग और सम स्थानों के अंकों का योग निकालें। यदि इन दोनों योगों का अंतर 0 अथवा 11 का गुणज हो, तो वह संख्या 11 से विभाज्य होगी।
  • उदाहरण: 934461 के विषम स्थानों के अंकों का योग \(1+4+3 = 8\)। सम स्थानों के अंकों का योग \(6+4+9 = 19\)। अंतर \(19-8 = 11\). चूंकि 11, 11 से विभाज्य है, अतः 934461 भी 11 से विभाज्य है।
  • [IMAGE: cg_c8_maths_ch17_t11_scene5]
💡सुझाव

विभाज्यता के नियम बड़ी संख्याओं के गुणनखंड करने और लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) व महत्तम समापवर्तक (HCF) ज्ञात करने में बहुत सहायक होते हैं। इन्हें अच्छी तरह याद रखें।

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