संख्याओं का खेल
यह अध्याय छात्रों को संख्याओं के साथ विभिन्न गणितीय खेलों के माध्यम से पूर्ण संख्याओं के गुणों जैसे संवरक नियम, क्रम विनिमेय नियम, साहचर्य नियम और वितरण नियम से परिचित कराता है। इसमें शून्य और एक के विशेष गुणों पर भी चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, अध्याय भिन्नों, पूर्णांकों और परिमेय संख्याओं की अवधारणाओं को संख्या रेखा पर उनके निरूपण के साथ समझाता है। यह छात्रों को संख्याओं के पैटर्न और उनके बीच संबंधों को समझने में मदद करता है, जिससे उनकी संख्यात्मक क्षमता बढ़ती है।
संख्याओं का खेल
संख्याओं के साथ खेलना गणित को मजेदार बनाता है और उनके गुणों को समझने में मदद करता है।
- 9 से विभाज्यता का रहस्य:
- कोई भी संख्या सोचें।
- उसके अंकों का योगफल ज्ञात करें।
- संख्या में से अंकों का योगफल घटाएँ।
- यह अंतर हमेशा 9 से विभाज्य होगा।
- उदाहरण: संख्या 7324
- अंकों का योग = \(7 + 3 + 2 + 4 = 16\)
- अंतर = \(7324 - 16 = 7308\)
- \(7308\) के अंकों का योग = \(7 + 3 + 0 + 8 = 18\), जो \(9\) से विभाज्य है। अतः \(7308\) भी \(9\) से विभाज्य है।
- कारण: किसी भी संख्या को उसके अंकों के योगफल के रूप में \(9\) के गुणज के साथ लिखा जा सकता है। जब हम संख्या में से उसके अंकों का योग घटाते हैं, तो हमें हमेशा \(9\) का गुणज मिलता है।
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9 से विभाज्यता का नियम: यदि किसी संख्या के अंकों का योग \(9\) से विभाज्य है, तो वह संख्या भी \(9\) से विभाज्य होगी।
पूर्ण संख्याओं का योग
पूर्ण संख्याएँ \(0, 1, 2, 3, ...\) होती हैं।
- 1. संवरक नियम (Closure Property):
- दो पूर्ण संख्याओं का योगफल हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है।
- यदि \(a\) और \(b\) दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a + b = c\) भी एक पूर्ण संख्या होगी।
- उदाहरण: \(18 + 12 = 30\) (\(30\) एक पूर्ण संख्या है)।
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- 2. क्रम विनिमेय नियम (Commutative Property):
- पूर्ण संख्याओं के योग में, संख्याओं का क्रम बदलने पर भी योगफल समान रहता है।
- यदि \(a\) और \(b\) दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a + b = b + a\) होगा।
- उदाहरण: \(25 + 43 = 68\) और \(43 + 25 = 68\).
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- 3. शून्य का योग तत्समक गुण (Additive Identity Property of Zero):
- किसी भी पूर्ण संख्या में शून्य जोड़ने पर या शून्य में किसी पूर्ण संख्या को जोड़ने पर संख्या के मान में कोई परिवर्तन नहीं होता है।
- अर्थात् \(a + 0 = a\) और \(0 + a = a\).
- उदाहरण: \(15 + 0 = 15\) और \(0 + 28 = 28\).
- शून्य को योग का तत्समक कहते हैं।
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- 4. साहचर्य नियम (Associative Property):
- तीन या अधिक पूर्ण संख्याओं को जोड़ते समय, संख्याओं के समूहन का क्रम बदलने पर भी योगफल समान रहता है।
- यदि \(a, b, c\) तीन पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \((a + b) + c = a + (b + c)\) होगा।
- उदाहरण: \((17 + 29) + 44 = 46 + 44 = 90\)
- \(17 + (29 + 44) = 17 + 73 = 90\).
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योग के नियम:
- संवरक: \(a + b = c\) (पूर्ण संख्या)
- क्रम विनिमेय: \(a + b = b + a\)
- तत्समक: \(a + 0 = a\)
- साहचर्य: \((a + b) + c = a + (b + c)\)
पूर्ण संख्याओं के घटाने के नियम
पूर्ण संख्याओं के घटाने में कुछ विशेष नियम होते हैं:
- 1. संवरक नियम लागू नहीं:
- दो पूर्ण संख्याओं को घटाने पर हमेशा पूर्ण संख्या प्राप्त नहीं होती है।
- उदाहरण: \(15 - 8 = 7\) (पूर्ण संख्या), लेकिन \(16 - 23 = -7\) (पूर्ण संख्या नहीं)।
- यदि \(a > b\) या \(a = b\) हो, तो \(a - b\) एक पूर्ण संख्या होगी।
- यदि \(a < b\) हो, तो \(a - b\) एक पूर्ण संख्या नहीं होगी।
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- 2. क्रम विनिमेय नियम लागू नहीं:
- घटाने में संख्याओं का क्रम बदलने पर परिणाम बदल जाता है।
- अर्थात् \(a - b \neq b - a\).
- उदाहरण: \(25 - 8 = 17\), लेकिन \(8 - 25 = -17\).
- 3. साहचर्य नियम लागू नहीं:
- घटाने में संख्याओं के समूहन का क्रम बदलने पर परिणाम बदल जाता है।
- अर्थात् \((a - b) - c \neq a - (b - c)\).
- उदाहरण: \((25 - 8) - 6 = 17 - 6 = 11\)
- \(25 - (8 - 6) = 25 - 2 = 23\).
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- 4. शून्य को घटाना:
- किसी भी पूर्ण संख्या में से शून्य घटाने पर वही पूर्ण संख्या प्राप्त होती है।
- अर्थात् \(a - 0 = a\).
- उदाहरण: \(5 - 0 = 5\), \(18 - 0 = 18\).
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- 5. समान संख्या को घटाना:
- किसी पूर्ण संख्या में से उसी पूर्ण संख्या को घटाने पर परिणाम हमेशा शून्य होता है।
- अर्थात् \(a - a = 0\).
- उदाहरण: \(15 - 15 = 0\), \(23 - 23 = 0\).
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घटाने की क्रिया में क्रम विनिमेय और साहचर्य नियम लागू नहीं होते हैं। \(a - b \neq b - a\) और \((a - b) - c \neq a - (b - c)\).
पूर्ण संख्याओं का गुणा
पूर्ण संख्याओं के गुणा के नियम:
- 1. संवरक नियम (Closure Property):
- दो पूर्ण संख्याओं का गुणनफल हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है।
- यदि \(a\) और \(b\) दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a \times b = c\) भी एक पूर्ण संख्या होगी।
- उदाहरण: \(18 \times 8 = 144\) (\(144\) एक पूर्ण संख्या है)।
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- 2. क्रम विनिमेय नियम (Commutative Property):
- पूर्ण संख्याओं के गुणा में, संख्याओं का क्रम बदलने पर भी गुणनफल समान रहता है।
- यदि \(a\) और \(b\) दो पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \(a \times b = b \times a\) होगा।
- उदाहरण: \(5 \times 8 = 40\) और \(8 \times 5 = 40\).
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- 3. साहचर्य नियम (Associative Property):
- तीन या अधिक पूर्ण संख्याओं को गुणा करते समय, संख्याओं के समूहन का क्रम बदलने पर भी गुणनफल समान रहता है।
- यदि \(a, b, c\) तीन पूर्ण संख्याएँ हैं, तो \((a \times b) \times c = a \times (b \times c)\) होगा।
- उदाहरण: \((4 \times 5) \times 6 = 20 \times 6 = 120\)
- \(4 \times (5 \times 6) = 4 \times 30 = 120\).
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- 4. शून्य का गुण (Property of Zero):
- किसी भी पूर्ण संख्या को शून्य से गुणा करने पर गुणनफल हमेशा शून्य होता है।
- अर्थात् \(a \times 0 = 0\).
- उदाहरण: \(8 \times 0 = 0\), \(29 \times 0 = 0\).
- 5. एक का गुण (Property of One - Multiplicative Identity):
- किसी भी पूर्ण संख्या को एक से गुणा करने पर वही संख्या प्राप्त होती है।
- अर्थात् \(a \times 1 = a\).
- उदाहरण: \(19 \times 1 = 19\), \(45 \times 1 = 45\).
- एक को गुणन तत्समक कहते हैं।
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- 6. वितरण नियम (Distributive Property):
- गुणा का योग या अंतर पर वितरण नियम: \(a \times (b + c) = a \times b + a \times c\) और \(a \times (b - c) = a \times b - a \times c\).
- उदाहरण (योग पर): \(5 \times (8 + 4) = 5 \times 12 = 60\)
- \(5 \times 8 + 5 \times 4 = 40 + 20 = 60\).
- उदाहरण (अंतर पर): \(5 \times (8 - 4) = 5 \times 4 = 20\)
- \(5 \times 8 - 5 \times 4 = 40 - 20 = 20\).
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गुणा के नियम:
- संवरक: \(a \times b = c\) (पूर्ण संख्या)
- क्रम विनिमेय: \(a \times b = b \times a\)
- साहचर्य: \((a \times b) \times c = a \times (b \times c)\)
- शून्य का गुण: \(a \times 0 = 0\)
- गुणन तत्समक: \(a \times 1 = a\)
- वितरण: \(a \times (b + c) = a \times b + a \times c\)
पूर्ण संख्याओं का विभाजन
विभाजन गुणन का प्रतिलोम (उल्टा) है।
- 1. गुणन से संबंध:
- यदि \(a \div b = c\), तो \(c \times b = a\).
- उदाहरण: \(40 \div 4 = 10\), तो \(10 \times 4 = 40\).
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- 2. संवरक नियम लागू नहीं:
- दो पूर्ण संख्याओं के विभाजन का परिणाम हमेशा पूर्ण संख्या नहीं होता है।
- उदाहरण: \(20 \div 5 = 4\) (पूर्ण संख्या), लेकिन \(25 \div 4 = 6\) और शेषफल \(1\) (पूर्ण संख्या नहीं)।
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- 3. विभाजन के विशेष नियम:
- समान संख्या से विभाजन: शून्य को छोड़कर, किसी भी पूर्ण संख्या \(a\) को उसी संख्या \(a\) से विभाजित करने पर भागफल हमेशा \(1\) प्राप्त होता है।
- अर्थात् \(a \div a = 1\) (जहाँ \(a \neq 0\)).
- उदाहरण: \(15 \div 15 = 1\), \(28 \div 28 = 1\).
- एक से विभाजन: किसी भी पूर्ण संख्या \(a\) को \(1\) से विभाजित करने पर भागफल सदैव वही संख्या \(a\) प्राप्त होती है।
- अर्थात् \(a \div 1 = a\).
- उदाहरण: \(15 \div 1 = 15\), \(28 \div 1 = 28\).
- शून्य से विभाजन: शून्य से विभाजन अपरिभाषित है। किसी भी संख्या को शून्य से भाग नहीं दिया जा सकता।
- शून्य का विभाजन: शून्य को किसी भी अशून्य पूर्ण संख्या से विभाजित करने पर भागफल शून्य प्राप्त होता है।
- अर्थात् \(0 \div a = 0\) (जहाँ \(a \neq 0\)).
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विभाजन के लिए क्रम विनिमेय और साहचर्य नियम लागू नहीं होते हैं।
भिन्न संख्या
भिन्न संख्याएँ एक पूर्ण इकाई के भागों को दर्शाती हैं।
- भिन्न के भाग:
- अंश (Numerator): यह बताता है कि कुल कितने भाग लिए गए हैं।
- हर (Denominator): यह बताता है कि पूर्ण इकाई को कुल कितने बराबर भागों में बांटा गया है।
- उदाहरण: \(\frac{1}{4}\) में \(1\) अंश है और \(4\) हर है।
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- भिन्नों के प्रकार:
- 1. उचित भिन्न (Proper Fraction):
- अंश का मान हर के मान से छोटा होता है।
- ये भिन्न हमेशा \(1\) से कम होती हैं।
- उदाहरण: \(\frac{3}{5}, \frac{1}{2}\).
- 2. अनुचित (विषम) भिन्न (Improper Fraction):
- अंश का मान हर के मान से बड़ा या उसके बराबर होता है।
- ये भिन्न \(1\) के बराबर या \(1\) से बड़ी होती हैं।
- उदाहरण: \(\frac{8}{3}, \frac{5}{5}\).
- 3. मिश्र भिन्न (Mixed Fraction):
- एक पूर्ण संख्या और एक उचित भिन्न का संयोजन होती है।
- अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न में बदलने के लिए, अंश को हर से भाग दिया जाता है। भागफल पूर्ण संख्या होती है, शेषफल अंश बनता है, और हर वही रहता है।
- उदाहरण: \(\frac{8}{3} = 2 \frac{2}{3}\).
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- भिन्नों की तुलना:
- 1. जब अंश समान हों:
- जिस भिन्न का हर बड़ा होता है, वह भिन्न छोटी होती है।
- उदाहरण: \(\frac{1}{2} > \frac{1}{4}\) क्योंकि \(2 < 4\).
- 2. जब हर समान हों:
- जिस भिन्न का अंश बड़ा होता है, वह भिन्न बड़ी होती है।
- उदाहरण: \(\frac{5}{8} > \frac{3}{8}\) क्योंकि \(5 > 3\).
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भिन्न: एक संख्या जो एक पूर्ण इकाई के भाग को दर्शाती है, जिसमें अंश और हर होते हैं।
भिन्नों को संख्या रेखा पर प्रदर्शित करना
भिन्नों को संख्या रेखा पर दर्शाने के चरण:
- 1. भिन्न का प्रकार पहचानें:
- यदि उचित भिन्न है (अंश < हर), तो वह \(0\) और \(1\) के बीच होगी।
- यदि अनुचित भिन्न है (अंश \(\ge\) हर), तो उसे मिश्र भिन्न में बदलें ताकि यह पता चल सके कि वह किन दो पूर्ण संख्याओं के बीच आती है।
- 2. खंडों में बांटना:
- जिस पूर्ण संख्या खंड में भिन्न आती है (जैसे \(0\) से \(1\), या \(1\) से \(2\)), उस खंड को भिन्न के हर के बराबर भागों में बांटें।
- 3. बिंदु चिह्नित करें:
- अंश के अनुसार सही बिंदु को चिह्नित करें।
- उदाहरण: \(\frac{1}{4}\) को दर्शाने के लिए, \(0\) और \(1\) के बीच के खंड को \(4\) बराबर भागों में बांटें और पहले भाग को \(\frac{1}{4}\) चिह्नित करें।
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- दो भिन्नों के बीच अनंत भिन्न:
- किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं (भिन्नों) के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- यह गुण भिन्नों को पूर्ण संख्याओं से अलग बनाता है, क्योंकि दो पूर्ण संख्याओं के बीच केवल सीमित पूर्ण संख्याएँ होती हैं।
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संख्या रेखा पर, जैसे-जैसे हम दाईं ओर बढ़ते हैं, संख्याओं का मान बढ़ता जाता है, और जैसे-जैसे हम बाईं ओर बढ़ते हैं, मान घटता जाता है।
पूर्णांक (Integer) एवं परिमेय संख्याएँ
संख्याओं की दुनिया का विस्तार:
- 1. पूर्णांक (Integers):
- पूर्णांक वे संख्याएँ हैं जिनमें सभी धनात्मक संख्याएँ \((1, 2, 3, ...)\), सभी ऋणात्मक संख्याएँ \((..., -3, -2, -1)\) और शून्य \((0)\) शामिल होते हैं।
- इन्हें \(I\) से दर्शाया जाता है: \(I = \{..., -4, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, 4, ...\}\).
- संख्या रेखा पर, शून्य केंद्र में होता है, धनात्मक संख्याएँ दाईं ओर और ऋणात्मक संख्याएँ बाईं ओर होती हैं।
- पूर्णांकों के समूह में न तो सबसे बड़ी कोई संख्या होती है और न ही सबसे छोटी।
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- 2. परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers):
- वे संख्याएँ जिन्हें \(\frac{p}{q}\) के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\) है।
- इन्हें \(Q\) से दर्शाया जाता है।
- ये संख्याएँ धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती हैं।
- उदाहरण: \(\frac{4}{6}, \frac{-13}{4}, \frac{8}{-9}, 0, \frac{1}{1}, \frac{-1}{-7}\).
- सभी पूर्णांक और सभी भिन्न परिमेय संख्याएँ होती हैं।
- उदाहरण: \(4\) को \(\frac{4}{1}\) के रूप में लिखा जा सकता है, इसलिए यह एक परिमेय संख्या है।
- परिमेय संख्याओं को मानक रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
- उदाहरण: \(\frac{16}{20}\) का मानक रूप \(\frac{4}{5}\) है।
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परिमेय संख्या: कोई भी संख्या जिसे \(\frac{p}{q}\) के रूप में व्यक्त किया जा सके, जहाँ \(p, q\) पूर्णांक हों और \(q \neq 0\) हो।
संख्याओं के स्थानीय मान और विस्तारित रूप
किसी संख्या में प्रत्येक अंक का अपना एक स्थानीय मान होता है, जो उसके स्थान पर निर्भर करता है।
- 1. स्थानीय मान (Place Value):
- किसी अंक का मान उसके स्थान के अनुसार बदलता है (इकाई, दहाई, सैकड़ा, आदि)।
- उदाहरण: \(407\) में:
- \(4\) का स्थानीय मान \(400\) (सैकड़ा स्थान पर)
- \(0\) का स्थानीय मान \(0\) (दहाई स्थान पर)
- \(7\) का स्थानीय मान \(7\) (इकाई स्थान पर)
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- 2. प्रसारित रूप (Expanded Form):
- किसी संख्या को उसके अंकों के स्थानीय मानों के योग के रूप में लिखना उसका प्रसारित रूप कहलाता है।
- उदाहरण: \(407 = 4 \times 100 + 0 \times 10 + 7 \times 1\).
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- 3. तीन अंकों की संख्याएँ बनाना:
- तीन अंकों की संख्या बनाने के लिए, सैकड़ा, दहाई और इकाई के स्थान पर अंकों को व्यवस्थित किया जाता है।
- सबसे बाईं ओर का अंक उसका सबसे बड़ा स्थानीय मान दर्शाता है।
- यदि सबसे बाईं ओर \(0\) आता है, तो वह संख्या उतने अंकों की नहीं मानी जाती।
- उदाहरण: \(047\) का अर्थ \(47\) है, जो दो अंकों की संख्या है।
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- सारणी 1: तीन अंकों की संख्याएँ बनाना
| क्र.सं. | संख्या | प्रसारित रूप | क्या संख्या तीन अंकों की है? | |:-------|:-------|:-------------|:--------------------------| | 1. | 047 | \(0 \times 100 + 4 \times 10 + 7 \times 1\) | नहीं | | 2. | 407 | \(4 \times 100 + 0 \times 10 + 7 \times 1\) | हाँ | | 3. | 470 | \(4 \times 100 + 7 \times 10 + 0 \times 1\) | हाँ | | 4. | 704 | \(7 \times 100 + 0 \times 10 + 4 \times 1\) | हाँ | | 5. | 740 | \(7 \times 100 + 4 \times 10 + 0 \times 1\) | हाँ |
- सारणी 2: प्रसारित रूप से संख्या बनाना
| क्र.सं. | \(a, b, c\) के मान | \(100 \times a + 10 \times b + c\) | संख्या | |:-------|:-------------------|:------------------------------------|:-------| | 1. | \(a=9, b=2, c=8\) | \(100 \times 9 + 10 \times 2 + 8\) | 928 | | 2. | \(a=3, b=0, c=4\) | \(100 \times 3 + 10 \times 0 + 4\) | 304 | | 3. | \(a=0, b=7, c=5\) | \(100 \times 0 + 10 \times 7 + 5\) | 75 | | 4. | \(a=6, b=1, c=2\) | \(100 \times 6 + 10 \times 1 + 2\) | 612 | | 5. | \(a=8, b=9, c=0\) | \(100 \times 8 + 10 \times 9 + 0\) | 890 |
किसी भी पूर्णांक संख्या के पूर्व \(0\) (शून्य) का कोई मान नहीं होता है। जैसे \(047 = 47\).
गणितीय पहेलियाँ और जादुई वर्ग
गणितीय खेल और पहेलियाँ तार्किक सोच और संख्या ज्ञान को बढ़ावा देती हैं।
- 1. जादुई त्रिभुज (Magic Triangle):
- त्रिभुज की भुजाओं पर संख्याओं को इस प्रकार व्यवस्थित करना कि प्रत्येक भुजा पर स्थित संख्याओं का योग समान हो।
- उदाहरण: \(1\) से \(6\) तक की संख्याओं का उपयोग करके त्रिभुज की भुजाओं का योग \(9, 10, 11\) या \(12\) प्राप्त किया जा सकता है।
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- 2. संख्या श्रेणियों को पूरा करना (Completing Number Series):
- दी गई संख्याओं के बीच के पैटर्न (जोड़, घटाव, गुणा, भाग, वर्ग, घन आदि) को पहचानना और अगली संख्याओं का अनुमान लगाना।
- उदाहरण:
- \(1, 2, 3, \underline{4}, \underline{5}, \underline{6}\) (क्रमागत संख्याएँ)
- \(3, 5, 7, \underline{9}, \underline{11}, \underline{13}\) (विषम संख्याएँ)
- \(1, 4, 9, \underline{16}, 25, \underline{36}\) (वर्ग संख्याएँ)
- \(7, 12, 18, \underline{25}, \underline{33}, \underline{42}\) (अंतर में \(5, 6, 7, 8, 9\) का क्रम)
- \(26, 23, 20, \underline{17}, \underline{14}, \underline{11}\) (\(3\) का घटाव)
- \(8, \underline{27}, 64, \underline{125}, \underline{216}, \underline{343}\) (घन संख्याएँ)
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- 3. बिना पूछे संख्या का अनुमान लगाना (Guessing a Number):
- यह पहेली संख्याओं के गुणों और बीजगणितीय पहचान पर आधारित है।
- विधि:
- तीन अंकों की एक संख्या लें, जिसके पहले और अंतिम अंक अलग-अलग हों (जैसे \(102\)).
- उसके अंकों को उलटकर बनी संख्या ज्ञात करें (जैसे \(201\)).
- बड़ी संख्या में से छोटी संख्या को घटाएँ (जैसे \(201 - 102 = 99\)).
- प्राप्त अंतर के अंकों को उलटकर बनी संख्या ज्ञात करें (जैसे \(99\) का उल्टा \(99\) या \(099\) का उल्टा \(990\)).
- इस संख्या को अंतर में जोड़ें (जैसे \(99 + 990 = 1089\)).
- परिणाम हमेशा \(1089\) आता है।
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- 4. जादुई वर्ग (Magic Square):
- एक \(n \times n\) ग्रिड जिसमें संख्याएँ इस प्रकार व्यवस्थित होती हैं कि प्रत्येक पंक्ति, प्रत्येक स्तंभ और दोनों मुख्य विकर्णों में संख्याओं का योग समान होता है (जादुई योग)।
- \(4 \times 4\) जादुई वर्ग के लिए, जिसमें \(1\) से \(16\) तक की संख्याओं का उपयोग किया जाता है, जादुई योग \(34\) होता है।
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- 5. उम्र की पहेली:
- यह पहेली बीजगणितीय व्यंजकों का उपयोग करके बनाई गई है।
- चरण:
- उम्र को दुगुना करें: \(2x\)
- \(5\) जोड़ें: \(2x + 5\)
- \(50\) से गुणा करें: \(50(2x + 5) = 100x + 250\)
- दूसरी उम्र \(y\) जोड़ें: \(100x + 250 + y\)
- \(365\) जोड़ें: \(100x + 250 + y + 365 = 100x + y + 615\)
- \(615\) घटाएँ: \(100x + y + 615 - 615 = 100x + y\)
- अंतिम परिणाम \(100x + y\) के रूप में होता है, जहाँ \(x\) पहली उम्र और \(y\) दूसरी उम्र है। यह एक तीन या चार अंकों की संख्या होगी जिसमें पहले दो अंक \(x\) और अंतिम दो अंक \(y\) होंगे।
- 6. छह अंकों की संख्या का रहस्य:
- तीन अंकों की कोई संख्या \(abc\) लें।
- उसे पुनः उसी क्रम में लिखकर छह अंकों की संख्या बनाएँ: \(abcabc\).
- यह संख्या \(1000 \times abc + abc = 1001 \times abc\) के बराबर है।
- \(1001 = 7 \times 11 \times 13\).
- इसलिए, \(abcabc\) हमेशा \(7, 11\) और \(13\) से विभाज्य होगी।
- यदि आप इसे क्रमशः \(7, 11\) और \(13\) से विभाजित करते हैं, तो आपको मूल संख्या \(abc\) वापस मिल जाएगी।
गणितीय पहेलियाँ और संख्या पैटर्न वाले प्रश्न तार्किक क्षमता का परीक्षण करते हैं। ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए धैर्य और विभिन्न गणितीय संक्रियाओं के ज्ञान की आवश्यकता होती है।