आकृतियाँ (द्विविमीय एवं त्रिविमीय)
यह अध्याय छात्रों को द्विविमीय (2D) और त्रिविमीय (3D) आकृतियों की दुनिया से परिचित कराता है। आप रेखा, त्रिभुज, चतुर्भुज, वृत्त जैसी 2D आकृतियों को पहचानना और उनके गुणों को समझना सीखते हैं। इसके बाद, अध्याय घनाभ, घन, त्रिभुजीय प्रिज्म, बेलन, शंकु, चतुष्फलक और पिरामिड जैसी 3D आकृतियों के निर्माण और उनके फलकों, कोरों और शीर्षों की गणना पर केंद्रित है। यूलर संबंध (V-E+F=2) की अवधारणा भी समझाई गई है, जो बहुफलकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूत्र है। यह अध्याय छात्रों को अपने आसपास की वस्तुओं में ज्यामितीय आकृतियों को देखने और समझने में मदद करता है।
आकृतियाँ (द्विविमीय एवं त्रिविमीय)
गणित में, आकृतियों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है:
- द्विविमीय (2D) आकृतियाँ:
- इन्हें समतल आकृतियाँ भी कहते हैं।
- इनमें केवल लंबाई और चौड़ाई होती है।
- इनमें कोई ऊँचाई या गहराई नहीं होती।
- इन्हें कागज पर आसानी से बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: त्रिभुज, वर्ग, आयत, वृत्त, समांतर चतुर्भुज, समचतुर्भुज, समलंब चतुर्भुज, बहुभुज।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t1_scene2] में विभिन्न द्विविमीय आकृतियाँ दिखाई गई हैं।
- त्रिविमीय (3D) आकृतियाँ:
- इन्हें ठोस आकृतियाँ भी कहते हैं।
- इनमें लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई (या गहराई) तीनों होती हैं।
- ये स्थान घेरती हैं और वास्तविक दुनिया की वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- इन्हें कागज पर दर्शाने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
- उदाहरण: घनाभ, घन, बेलन, शंकु, गोला, प्रिज्म, पिरामिड।
- 2D और 3D आकृतियों में अंतर:
- 2D आकृतियाँ सपाट होती हैं, जबकि 3D आकृतियाँ ठोस होती हैं।
- 2D आकृतियों में क्षेत्रफल होता है, जबकि 3D आकृतियों में आयतन होता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t1_scene4] आकृतियों की पहचान को दर्शाता है।
- दैनिक जीवन में आकृतियाँ:
- हमारे आस-पास की अधिकांश वस्तुएँ त्रिविमीय होती हैं।
- उदाहरण के लिए, एक ईंट घनाभ का आकार है, एक गेंद गोले का आकार है, एक आइसक्रीम कोन शंकु का आकार है।
- इन 3D वस्तुओं को कागज पर 2D चित्र के रूप में दर्शाना एक महत्वपूर्ण कौशल है।
सभी 2D आकृतियाँ एक समतल पर बनती हैं, जबकि 3D आकृतियाँ अंतरिक्ष में स्थान घेरती हैं।
वस्तु की अलग-अलग स्थितियों का चित्र
जब हम किसी त्रिविमीय वस्तु को देखते हैं, तो वह हमारी देखने की स्थिति (प्रेक्षण बिंदु) के आधार पर अलग-अलग दिख सकती है।
- दृश्यों का महत्व:
- एक ही वस्तु के अलग-अलग दृश्य (जैसे सामने से, ऊपर से, बगल से) हमें उस वस्तु की पूरी संरचना को समझने में मदद करते हैं।
- यह इंजीनियरिंग, वास्तुकला और कला में बहुत महत्वपूर्ण है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t2_scene1] आकृतियों को पहचानना दर्शाता है।
- उदाहरण 1: माचिस की डिब्बी:
- माचिस की डिब्बी को उसकी पतली सतह पर खड़ा करने पर वह एक पतले आयत जैसी दिखती है।
- उसे उसकी बड़ी सतह पर रखने पर वह एक चौड़े आयत जैसी दिखती है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t2_scene2] माचिस की डिब्बी के अवलोकन को दर्शाता है।
- उदाहरण 2: चॉक का डिब्बा:
- चॉक के डिब्बे को ठीक ऊपर से देखने पर केवल चॉक का वृत्ताकार ऊपरी सिरा दिखता है, लंबाई नहीं।
- सामने से देखने पर चॉक की लंबाई दिखती है, वृत्ताकार सिरा नहीं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t2_scene3] चॉक के डिब्बे के अवलोकन को दर्शाता है।
- मुख्य बिंदु:
- एक 3D वस्तु के 2D चित्र उसकी देखने की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
- किसी वस्तु के विभिन्न दृश्यों को बनाने का अभ्यास उसकी ज्यामितीय समझ को बढ़ाता है।
परीक्षा में अक्सर किसी 3D वस्तु के सामने, ऊपर और बगल के दृश्यों को बनाने के लिए कहा जाता है। प्रत्येक दृश्य केवल दो विमाओं (लंबाई, चौड़ाई या ऊँचाई) को दर्शाता है।
घनाभ की आकृति बनाना
घनाभ एक त्रिविमीय आकृति है जिसके छह आयताकार फलक, 12 कोर और 8 शीर्ष होते हैं। इसे कागज पर बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
- आयताकार आधार बनाना:
- कागज पर एक आयत ABCD बनाइए। यह घनाभ के एक फलक का प्रतिनिधित्व करता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t3_scene1] आयताकार आधार बनाना दर्शाता है।
- दूसरा आयत बनाना:
- पहले आयत ABCD से थोड़ा ऊपर और दाईं ओर खिसकाकर एक और समान आयत EFGH बनाइए।
- इस आयत को छायांकित किया जा सकता है ताकि यह अलग दिखे।
- शीर्षों को जोड़ना:
- पहले आयत के शीर्षों (A, B, C, D) को दूसरे आयत के संगत शीर्षों (E, F, G, H) से सीधी रेखाओं (AE, BF, CG, DH) द्वारा जोड़िए।
- ये रेखाएँ घनाभ की ऊँचाई और गहराई को दर्शाती हैं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t3_scene2] दूसरा आयत बनाना और जोड़ना दर्शाता है।
- घनाभ के भाग:
- फलक: ABCD, ABFE, BCGF, CDHG, DAEH, EFGH (6 आयताकार फलक)
- कोर: AB, BC, CD, DA, AE, BF, CG, DH, EF, FG, GH, HE (12 कोर)
- शीर्ष: A, B, C, D, E, F, G, H (8 शीर्ष)
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t3_scene3] घनाभ के फलक, कोर और शीर्ष दर्शाता है।
- घनाभ की आकृति का सार:
- यह विधि 3D वस्तु को 2D सतह पर दर्शाने में मदद करती है।
- यह ज्यामितीय समझ को बढ़ाती है और वास्तविक दुनिया की वस्तुओं की संरचना का विश्लेषण करने में सहायक है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t3_scene4] घनाभ की आकृति का सार बताता है।
घनाभ के सभी फलक आयताकार होते हैं। घन एक विशेष प्रकार का घनाभ है जिसके सभी फलक वर्गाकार होते हैं।
त्रिभुजीय प्रिज्म की आकृति बनाना
त्रिभुजीय प्रिज्म एक त्रिविमीय आकृति है जिसमें दो त्रिभुजाकार आधार और तीन आयताकार पार्श्व फलक होते हैं। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
- त्रिभुजाकार आधार बनाना:
- कागज पर एक त्रिभुज (आकृति i) बनाइए।
- इससे कुछ दूरी पर एक और समान त्रिभुज (आकृति ii) बनाइए।
- ये दोनों त्रिभुज प्रिज्म के आधार बनेंगे।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t4_scene1] त्रिभुजाकार गत्ते का उपयोग दर्शाता है।
- नामांकन और जोड़ना:
- पहले त्रिभुज के शीर्षों को A, A₁, A₂ और दूसरे त्रिभुज के शीर्षों को B, B₁, B₂ से नामांकित कीजिए।
- संगत शीर्षों को सीधी रेखाओं (AB, A₁B₁, A₂B₂) से मिलाइए। ये रेखाएँ प्रिज्म के पार्श्व कोर बनाती हैं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t4_scene2] आकृतियों का नामांकन और जोड़ना दर्शाता है।
- त्रिभुजीय प्रिज्म के भाग:
- फलक: तीन आयताकार फलक (जैसे AB B₁ A₂, A₁ A₂ B₂ B₁ और AA₁ B₁ B) और दो त्रिभुजाकार फलक (AA₁ A₂ और BB₁ B₂)। कुल 5 फलक।
- कोर: AB, A₁ B₁, A₂ B₂, AA₁, A₁ A₂, A₂A, BB₁, B₁B₂, B₂B। कुल 9 कोर।
- शीर्ष: A, A₁, A₂, B, B₁, B₂। कुल 6 शीर्ष।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t4_scene3] त्रिभुजीय प्रिज्म के भाग दर्शाता है।
- त्रिभुजीय प्रिज्म का निर्माण:
- यह विधि 2D प्रतिनिधित्व से 3D वस्तुओं को कल्पना करने और बनाने की क्षमता प्रदान करती है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t4_scene4] त्रिभुजीय प्रिज्म का निर्माण दर्शाता है।
प्रिज्म का नाम उसके आधार के आकार पर निर्भर करता है। यदि आधार त्रिभुज है, तो यह त्रिभुजीय प्रिज्म है; यदि वर्ग है, तो वर्गाकार प्रिज्म है।
बेलन की आकृति बनाना
बेलन एक त्रिविमीय आकृति है जिसमें दो वृत्तीय फलक (आधार और शीर्ष) और एक वक्रीय पार्श्व पृष्ठ होता है। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
- वृत्ताकार चकती के दृश्य:
- सामने से देखने पर वृत्ताकार चकती एक पूर्ण वृत्त दिखती है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t5_scene1]
- तिरछी स्थिति में देखने पर यह एक दीर्घवृत्त (अंडाकार) दिखती है।
- एक किनारे से देखने पर यह लगभग एक सीधी रेखा दिखती है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t5_scene2]
- बेलन की आकृति बनाना:
- कागज पर एक दीर्घवृत्तीय आकृति बनाइए (जो तिरछी चकती जैसी दिखती है)।
- उसी के समान एक और दीर्घवृत्तीय आकृति थोड़ी दूरी पर नीचे बनाइए।
- ऊपर वाले दीर्घवृत्त के व्यास के सिरे (A₁) को नीचे वाले दीर्घवृत्त के संगत सिरे (A₂) से मिलाइए।
- यही प्रक्रिया दूसरे सिरे (B₁ को B₂) के लिए भी दोहराइए।
- दोनों दीर्घवृत्तों के बाहरी किनारों को सीधी रेखाओं से जोड़िए, जिससे बेलन का वक्रीय पृष्ठ बनता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t5_scene3] बेलन की आकृति बनाना दर्शाता है।
- बेलन के भाग:
- फलक: दो वृत्तीय फलक (आधार और शीर्ष)।
- पार्श्व पृष्ठ: एक वक्रीय पृष्ठ।
- कोर: कोई सीधी कोर नहीं होती, लेकिन दो वृत्तीय किनारे होते हैं।
- शीर्ष: कोई शीर्ष नहीं होता।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t5_scene4] बेलन के भाग दर्शाता है।
छात्र अक्सर बेलन को बहुफलक मान लेते हैं। याद रखें, बहुफलक में केवल सपाट फलक होते हैं, जबकि बेलन में वक्रीय पृष्ठ होता है।
शंकु की आकृति बनाना
शंकु एक त्रिविमीय आकृति है जिसमें एक वृत्ताकार आधार, एक शीर्ष बिंदु और एक वक्रीय पार्श्व पृष्ठ होता है। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
- शंकु को समझना:
- शंकु का आधार एक वृत्त होता है।
- एक बिंदु (शीर्ष) आधार के केंद्र से ऊपर स्थित होता है।
- आधार से शीर्ष तक एक वक्रीय पृष्ठीय भाग होता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t6_scene1] शंकु को समझना दर्शाता है।
- शंकु की आकृति बनाना:
- कागज पर एक दीर्घवृत्तीय आकृति बनाइए (जो शंकु के आधार को दर्शाएगी)।
- इस दीर्घवृत्त के लगभग मध्य में कुछ दूरी पर एक बिंदु O₂ लीजिए (यह शंकु का शीर्ष होगा)।
- बिंदु O₂ को दीर्घवृत्त के व्यास के सिरों (A₁ और B₁) से सीधी रेखाओं द्वारा मिलाइए।
- यह प्राप्त आकृति शंकु का द्विविमीय निरूपण है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t6_scene2] शंकु की आकृति बनाना दर्शाता है।
- शंकु के भाग:
- फलक: एक वृत्ताकार फलक (आधार)।
- शीर्ष: एक शीर्ष बिंदु।
- पार्श्व पृष्ठ: एक वक्रीय पृष्ठीय भाग।
- कोर: कोई सीधी कोर नहीं होती, लेकिन आधार का वृत्तीय किनारा होता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t6_scene3] शंकु के फलक और शीर्ष दर्शाता है।
शंकु को एक त्रिभुज को उसकी ऊँचाई के परितः घुमाने से भी प्राप्त किया जा सकता है।
चतुष्फलक की आकृति बनाना
चतुष्फलक एक त्रिविमीय आकृति है जिसके चार त्रिभुजीय फलक, 6 कोर और 4 शीर्ष होते हैं। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
- त्रिभुज आधार बनाना:
- कागज पर एक त्रिभुज ABC बनाइए और उसे छायांकित कीजिए। यह चतुष्फलक का आधार होगा।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t7_scene1] त्रिभुज आधार बनाना दर्शाता है।
- बिंदु P को जोड़ना:
- त्रिभुज के ऊपर कुछ दूरी पर एक बिंदु P लीजिए।
- बिंदु P को त्रिभुज के प्रत्येक शीर्ष (A, B, C) से सीधी रेखाओं द्वारा मिलाइए (AP, BP, CP)।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t7_scene2] बिंदु P को जोड़ना दर्शाता है।
- चतुष्फलक के भाग:
- फलक: ABC (आधार), BCP, CAP, ABP। कुल 4 त्रिभुजीय फलक।
- कोर: AB, BC, CA, AP, BP, CP। कुल 6 कोर।
- शीर्ष: A, B, C, P। कुल 4 शीर्ष।
- प्रत्येक शीर्ष पर तीन कोरें मिलती हैं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t7_scene3] चतुष्फलक के भाग पहचानना दर्शाता है।
- चतुष्फलक की संरचना:
- इसे त्रिभुजीय पिरामिड भी कहा जाता है।
- यह एक मौलिक ठोस आकृति है जो अधिक जटिल 3D संरचनाओं को समझने का आधार प्रदान करती है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t7_scene4] चतुष्फलक की संरचना दर्शाता है।
चतुष्फलक (Tetrahedron): एक बहुफलक जिसके चार फलक होते हैं, और ये सभी फलक त्रिभुजाकार होते हैं।
पिरामिड की आकृति बनाना
पिरामिड एक त्रिविमीय आकृति है जिसका आधार एक बहुभुज होता है और पार्श्व फलक त्रिभुजाकार होते हैं जो एक शीर्ष बिंदु पर मिलते हैं। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:
- पिरामिड का आधार बनाना:
- कागज पर एक वर्ग ABCD बनाइए और उसे छायांकित कीजिए। यह पिरामिड का आधार होगा।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t8_scene1] पिरामिड का आधार बनाना दर्शाता है।
- शीर्ष बिंदु को जोड़ना:
- वर्ग के ऊपर लगभग बीच में कुछ दूरी पर एक बिंदु P लीजिए। यह पिरामिड का शीर्ष होगा।
- बिंदु P को वर्ग के प्रत्येक शीर्ष (A, B, C, D) से सीधी रेखाओं द्वारा मिलाइए (AP, BP, CP, DP)।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t8_scene2] शीर्ष बिंदु को जोड़ना दर्शाता है।
- पिरामिड के भाग (वर्गाकार पिरामिड के लिए):
- फलक: एक वर्गाकार आधार (ABCD) और चार त्रिभुजीय पार्श्व फलक (ABP, BCP, CDP, DAP)। कुल 5 फलक।
- कोर: AB, BC, CD, DA (आधार की कोरें) और AP, BP, CP, DP (पार्श्व कोरें)। कुल 8 कोर।
- शीर्ष: A, B, C, D (आधार के शीर्ष) और P (शीर्ष बिंदु)। कुल 5 शीर्ष।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t8_scene3] पिरामिड के भाग दर्शाता है।
- पिरामिड की पहचान:
- पिरामिड का नाम उसके आधार के आकार पर निर्भर करता है (जैसे वर्गाकार पिरामिड, त्रिभुजाकार पिरामिड)।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t8_scene4] पिरामिड की पहचान दर्शाता है।
पिरामिड में सभी पार्श्व फलक त्रिभुजाकार होते हैं और एक ही शीर्ष बिंदु पर मिलते हैं।
छिपे पृष्ठों का बिन्दुकित रेखा द्वारा प्रदर्शन
जब हम किसी त्रिविमीय आकृति का द्विविमीय चित्र बनाते हैं, तो उसके कुछ भाग (शीर्ष, कोर या फलक) देखने वाले की दृष्टि से छिपे हुए हो सकते हैं। इन छिपे हुए भागों को दर्शाने के लिए बिन्दुकित रेखाओं का उपयोग किया जाता है।
- छिपे हुए भागों की पहचान:
- किसी 3D वस्तु को अलग-अलग कोणों से देखने पर उसके सभी पृष्ठ, कोर और शीर्ष एक साथ दिखाई नहीं देते।
- छिपे हुए भाग वस्तु की स्थिति और देखने वाले के कोण पर निर्भर करते हैं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t9_scene1] घनाभ की स्थितियाँ दर्शाता है।
- बिन्दुकित रेखाओं का उपयोग:
- त्रिविमीय आकृतियों के चित्रों में, जो भाग छिपे होते हैं, उन्हें बिन्दुकित (dotted) रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
- यह एक मानक चित्रण विधि है जो दर्शक को वस्तु की पूरी संरचना और गहराई को समझने में सहायता करती है।
- बिन्दुकित रेखाएँ यह संकेत देती हैं कि वहाँ एक भाग मौजूद है, लेकिन वह सीधे दिखाई नहीं दे रहा है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t9_scene2] बिन्दुकित रेखाओं का उपयोग दर्शाता है।
- महत्व:
- यह कौशल इंजीनियरिंग, वास्तुकला और ग्राफिक डिजाइन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।
- यह हमें किसी वस्तु की आंतरिक संरचना और उसके सभी आयामों को समझने में सक्षम बनाता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t9_scene3] आकृतियों को पुनः बनाना दर्शाता है।
परीक्षा में अक्सर 3D आकृतियों के छिपे हुए कोरों को बिन्दुकित रेखाओं से दर्शाने के लिए कहा जाता है। सही बिन्दुकित रेखाओं का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।
दी गई आकृतियों के शीर्ष, कोर और फलकों की पहचान एवं गणना करना।
त्रिविमीय आकृतियों के मुख्य भाग हैं शीर्ष (Vertices), कोर (Edges) और फलक (Faces)। इन्हें पहचानना और गिनना ज्यामितीय समझ के लिए आवश्यक है।
- परिभाषाएँ:
- शीर्ष (V): ये वे बिंदु होते हैं जहाँ तीन या अधिक कोर मिलते हैं। इन्हें 'कोना' भी कहा जा सकता है।
- कोर (E): ये वे रेखाखंड होते हैं जहाँ दो फलक मिलते हैं। इन्हें 'किनारा' भी कहा जा सकता है।
- फलक (F): ये आकृतियों की सपाट सतहें होती हैं। ये आमतौर पर बहुभुज (जैसे वर्ग, आयत, त्रिभुज) होते हैं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t10_scene1] आकृतियों के शीर्ष, कोर और फलकों की पहचान दर्शाता है।
- विभिन्न आकृतियों के भागों की गणना:
- घन (Cube): 8 शीर्ष, 12 कोर, 6 फलक।
- घनाभ (Cuboid): 8 शीर्ष, 12 कोर, 6 फलक।
- त्रिभुजाकार पिरामिड (चतुष्फलक): 4 शीर्ष, 6 कोर, 4 फलक।
- वर्गाकार पिरामिड: 5 शीर्ष, 8 कोर, 5 फलक।
- त्रिभुजाकार प्रिज्म: 6 शीर्ष, 9 कोर, 5 फलक।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t10_scene2] विभिन्न आकृतियों के भागों की गणना दर्शाता है।
- यूलर संबंध (Euler's Relation):
- यह किसी भी बहुफलक (चार या चार से अधिक फलकों वाली आकृति) के शीर्षों (V), कोरों (E) और फलकों (F) की संख्या के बीच एक स्थिर संबंध बताता है।
- सूत्र: V - E + F = 2
- यह संबंध सभी बहुफलकीय आकृतियों पर लागू होता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t10_scene3] यूलर संबंध: V-E+F = 2 दर्शाता है।
- सामान्य गलतियाँ:
- 2D चित्र को 3D वस्तु समझना और सभी कोर/फलक गिनना।
- बेलन और शंकु जैसी वक्र सतह वाली आकृतियों में कोर और शीर्ष की परिभाषा को बहुफलकों के समान मानना। बेलन और शंकु में कोई 'शीर्ष' या 'कोर' नहीं होते हैं जैसे बहुफलकों में होते हैं।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t10_scene4] आकृतियों के भागों को पहचानने की गलतियाँ दर्शाता है।
यूलर संबंध: \(V - E + F = 2\) जहाँ:
- \(V\) = शीर्षों की संख्या
- \(E\) = कोरों की संख्या
- \(F\) = फलकों की संख्या
यूलर संबंध पर आधारित प्रश्न बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं। विभिन्न बहुफलकों के लिए V, E, F की संख्याएँ याद रखना और संबंध को सत्यापित करना सीखें।
संयुक्त आकृतियों की पहचान
संयुक्त आकृतियाँ वे होती हैं जो दो या दो से अधिक सरल ज्यामितीय आकृतियों के संयोजन से बनती हैं।
- संयुक्त आकृतियों को समझना:
- हमारे दैनिक जीवन में अधिकांश वस्तुएँ संयुक्त आकृतियों के उदाहरण हैं।
- उदाहरण के लिए, एक घर घनाभ और त्रिभुजीय प्रिज्म का संयोजन हो सकता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t11_scene1] घनाभ और शंकु का मेल दर्शाता है।
- पहचानने की प्रक्रिया:
- पूरी आकृति को ध्यान से देखें।
- मानसिक रूप से या रेखाएँ खींचकर उसे सरल ज्यामितीय भागों में विभाजित करने का प्रयास करें।
- प्रत्येक भाग को अलग से देखकर उसके आकार (जैसे वर्ग, आयत, त्रिभुज, वृत्त, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला) को पहचानें।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t11_scene2] संयुक्त आकृतियों को पहचानना दर्शाता है।
- महत्व:
- यह कौशल इंजीनियरिंग, वास्तुकला और डिजाइन में महत्वपूर्ण है।
- यह हमें वस्तुओं की संरचना और कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t11_scene3] संयुक्त आकृतियों का महत्व दर्शाता है।
- उदाहरण:
- पेंसिल: बेलन और शंकु का संयोजन।
- आइसक्रीम कोन: शंकु और गोले/अर्धगोले का संयोजन।
- टेंट: बेलन और शंकु या प्रिज्म और पिरामिड का संयोजन।
किसी भी जटिल वस्तु को सरल ज्यामितीय आकृतियों के संयोजन के रूप में देखा जा सकता है।
मॉडल बनाने हेतु सहायक आकृतियाँ
त्रिविमीय (3D) आकृतियों के मॉडल बनाने के लिए नेट (Net) नामक द्विविमीय (2D) आकृतियों का उपयोग किया जाता है। नेट एक 3D आकृति के सभी फलकों को एक समतल पर फैलाकर दिखाता है।
- नेट क्या है?
- नेट एक 2D आकृति है जिसे मोड़ने पर एक 3D आकृति बनती है।
- यह 3D आकृति के सभी फलकों को एक साथ, बिना किसी ओवरलैप या गैप के, समतल पर दर्शाता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t12_scene1] मॉडल बनाने हेतु सहायक आकृतियाँ दर्शाता है।
- विभिन्न आकृतियों के नेट:
- घन: छह वर्गाकार फलकों से बना होता है।
- घनाभ: छह आयताकार फलकों से बना होता है।
- बेलन: एक आयत और दो वृत्तों से बनता है।
- शंकु: एक वृत्त (आधार) और एक त्रिज्यखंड (पार्श्व पृष्ठ) से बनता है।
- पिरामिड: एक बहुभुज आधार और त्रिभुजाकार पार्श्व फलकों से बनता है।
- प्रिज्म: दो बहुभुज आधारों और आयताकार पार्श्व फलकों से बनता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t12_scene2] विभिन्न आकृतियों के नेट दर्शाता है।
- नेट से 3D मॉडल का निर्माण:
- वांछित 3D आकृति का नेट कागज़ पर बनाइए या प्रिंट कीजिए।
- नेट को बाहरी किनारों से सावधानीपूर्वक काटिए।
- नेट पर बनी सभी मोड़ने वाली रेखाओं (fold lines) पर कागज़ को मोड़िए।
- चिपकने वाले फ्लैप्स (glue flaps) का उपयोग करके किनारों को एक साथ चिपकाइए, जिससे एक ठोस 3D मॉडल बन जाएगा।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch15_t12_scene3] नेट से 3D मॉडल का निर्माण दर्शाता है।
- महत्व:
- नेट का उपयोग करके मॉडल बनाना 3D ज्यामितीय आकृतियों की संरचना को समझने का एक व्यावहारिक तरीका है।
- यह स्थानिक तर्क (spatial reasoning) कौशल को विकसित करता है।
एक ही 3D आकृति के कई अलग-अलग नेट हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, घन के 11 अलग-अलग नेट होते हैं।