सर्वसमिकाएं
अध्याय 'सर्वसमिकाएं' बीजगणितीय सर्वसमिकाओं के मूलभूत सिद्धांतों से संबंधित है। छात्र (a+b)² = a² + 2ab + b², (a-b)² = a² - 2ab + b² और (a+b)(a-b) = a² - b² जैसी महत्वपूर्ण सर्वसमिकाओं को सीखते हैं। यह अध्याय इन सर्वसमिकाओं का उपयोग करके व्यंजकों को सरल बनाने, संख्याओं के मान ज्ञात करने और गुणनखंडन करने के तरीकों पर केंद्रित है। यह बीजगणित की आगे की पढ़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनाता है।
\((a+b)^2 = a^2 + 2ab + b^2\)
इस खंड में, हम पहली महत्वपूर्ण बीजीय सर्वसमिका \((a+b)^2 = a^2 + 2ab + b^2\) का अध्ययन करेंगे। यह सर्वसमिका बताती है कि दो पदों के योग का वर्ग कैसे ज्ञात किया जाता है।
- सर्वसमिका का अर्थ: एक सर्वसमिका एक समीकरण है जो उसमें शामिल चरों के सभी मानों के लिए सत्य होती है।
- व्युत्पत्ति: \((a+b)^2\) का अर्थ है \((a+b)\) को \((a+b)\) से गुणा करना।
- \((a+b)(a+b) = a(a+b) + b(a+b)\)
- \(= a^2 + ab + ba + b^2\)
- \(= a^2 + 2ab + b^2\) (क्योंकि \(ab = ba\))
- ज्यामितीय निरूपण: [IMAGE: cg_c8_maths_ch09_chapter_hero] में \((a+b)^2\) का ज्यामितीय निरूपण दिखाया गया है। एक बड़े वर्ग जिसकी भुजा \((a+b)\) है, का क्षेत्रफल चार छोटे क्षेत्रों (एक \(a^2\) वर्ग, एक \(b^2\) वर्ग और दो \(ab\) आयत) के योग के बराबर होता है।
- अनुप्रयोग: इस सर्वसमिका का उपयोग संख्याओं के वर्गों की गणना को सरल बनाने और बीजीय व्यंजकों को विस्तारित करने के लिए किया जाता है।
- उदाहरण: \((101)^2 = (100+1)^2 = 100^2 + 2(100)(1) + 1^2 = 10000 + 200 + 1 = 10201\)
- उदाहरण: \((3x+4y)^2 = (3x)^2 + 2(3x)(4y) + (4y)^2 = 9x^2 + 24xy + 16y^2\)
- सत्यता की जाँच: किसी भी सर्वसमिका की सत्यता की जाँच करने के लिए, हम उसमें शामिल चरों के लिए विभिन्न संख्यात्मक मानों को प्रतिस्थापित कर सकते हैं। यदि सर्वसमिका के दोनों पक्ष (बायां पक्ष और दायां पक्ष) इन सभी मानों के लिए बराबर आते हैं, तो सर्वसमिका सत्य मानी जाती है।
सर्वसमिका I: \((a+b)^2 = a^2 + 2ab + b^2\)
अर्थात् \((\text{प्रथम पद} + \text{द्वितीय पद})^2 = (\text{प्रथम पद})^2 + 2(\text{प्रथम पद})(\text{द्वितीय पद}) + (\text{द्वितीय पद})^2\)
यह सर्वसमिका किसी भी वास्तविक संख्या \(a\) और \(b\) के लिए सत्य होती है।
सर्वसमिका - 2: \((a-b)^2 = a^2 - 2ab + b^2\)
इस खंड में, हम दूसरी महत्वपूर्ण बीजीय सर्वसमिका \((a-b)^2 = a^2 - 2ab + b^2\) का अध्ययन करेंगे। यह सर्वसमिका बताती है कि दो पदों के अंतर का वर्ग कैसे ज्ञात किया जाता है।
- व्युत्पत्ति: \((a-b)^2\) का अर्थ है \((a-b)\) को \((a-b)\) से गुणा करना।
- \((a-b)(a-b) = a(a-b) - b(a-b)\)
- \(= a^2 - ab - ba + b^2\)
- \(= a^2 - 2ab + b^2\) (क्योंकि \(ab = ba\))
- \((a+b)^2\) से तुलना: \((a+b)^2\) और \((a-b)^2\) में मुख्य अंतर मध्य पद के चिह्न में है। \((a+b)^2\) में यह \(+2ab\) होता है, जबकि \((a-b)^2\) में यह \(-2ab\) होता है।
- अनुप्रयोग: इस सर्वसमिका का उपयोग संख्याओं के वर्गों की गणना को सरल बनाने और बीजीय व्यंजकों को विस्तारित करने के लिए किया जाता है।
- उदाहरण: \((98)^2 = (100-2)^2 = 100^2 - 2(100)(2) + 2^2 = 10000 - 400 + 4 = 9604\)
- उदाहरण: \((3x-8y)^2 = (3x)^2 - 2(3x)(8y) + (8y)^2 = 9x^2 - 48xy + 64y^2\)
सर्वसमिका II: \((a-b)^2 = a^2 - 2ab + b^2\)
अर्थात् \((\text{प्रथम पद} - \text{द्वितीय पद})^2 = (\text{प्रथम पद})^2 - 2(\text{प्रथम पद})(\text{द्वितीय पद}) + (\text{द्वितीय पद})^2\)
छात्र अक्सर \((a-b)^2\) में मध्य पद \(-2ab\) के चिह्न को भूल जाते हैं। याद रखें, जब अंतर का वर्ग करते हैं, तो मध्य पद ऋणात्मक होता है।
सर्वसमिका - 3: \((a+b)(a-b) = a^2 - b^2\)
इस खंड में, हम तीसरी महत्वपूर्ण बीजीय सर्वसमिका \((a+b)(a-b) = a^2 - b^2\) का अध्ययन करेंगे। यह सर्वसमिका बताती है कि दो पदों के योग और उनके अंतर का गुणनफल कैसे ज्ञात किया जाता है।
- व्युत्पत्ति: \((a+b)(a-b)\) का गुणनफल:
- \((a+b)(a-b) = a(a-b) + b(a-b)\)
- \(= a^2 - ab + ba - b^2\)
- \(= a^2 - b^2\) (क्योंकि \(-ab + ba = 0\))
- विशेषता: यह सर्वसमिका दो पूर्ण वर्गों के अंतर के रूप में एक द्विपद गुणनफल को दर्शाती है।
- अनुप्रयोग: इस सर्वसमिका का उपयोग गुणनफलों की गणना को सरल बनाने और बीजीय व्यंजकों का गुणनखण्डन करने के लिए किया जाता है।
- उदाहरण: \((105 \times 95) = (100+5)(100-5) = 100^2 - 5^2 = 10000 - 25 = 9975\)
- उदाहरण: \((7x+2y)(7x-2y) = (7x)^2 - (2y)^2 = 49x^2 - 4y^2\)
सर्वसमिका III: \((a+b)(a-b) = a^2 - b^2\)
अर्थात् \((\text{प्रथम पद} + \text{द्वितीय पद})(\text{प्रथम पद} - \text{द्वितीय पद}) = (\text{प्रथम पद})^2 - (\text{द्वितीय पद})^2\)
इस सर्वसमिका में, मध्य पद \(-ab\) और \(+ab\) हमेशा एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं, जिससे केवल वर्गों का अंतर बचता है।
सर्वसमिकाओं का उपयोग कर गुणनखण्डन करना
सर्वसमिकाएं केवल व्यंजकों को विस्तारित करने के लिए ही नहीं, बल्कि उनके गुणनखण्डन के लिए भी बहुत उपयोगी होती हैं। गुणनखण्डन का अर्थ है एक व्यंजक को उसके गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखना।
- सर्वसमिका I का उपयोग: \(a^2 + 2ab + b^2 = (a+b)^2 = (a+b)(a+b)\)
- जब कोई व्यंजक पूर्ण वर्ग त्रिपद के रूप में हो, यानी उसमें दो पदों का वर्ग हो और एक पद उन दोनों पदों के गुणनफल का दोगुना हो, तो हम इस सर्वसमिका का उपयोग करते हैं।
- उदाहरण: \(9x^2 + 24xy + 16y^2 = (3x)^2 + 2(3x)(4y) + (4y)^2 = (3x+4y)^2\)
- सर्वसमिका II का उपयोग: \(a^2 - 2ab + b^2 = (a-b)^2 = (a-b)(a-b)\)
- जब कोई व्यंजक पूर्ण वर्ग त्रिपद के रूप में हो, लेकिन मध्य पद ऋणात्मक हो, तो हम इस सर्वसमिका का उपयोग करते हैं।
- उदाहरण: \(p^2 - 4pq + 4q^2 = (p)^2 - 2(p)(2q) + (2q)^2 = (p-2q)^2\)
- सर्वसमिका III का उपयोग: \(a^2 - b^2 = (a+b)(a-b)\)
- जब कोई व्यंजक दो पूर्ण वर्गों के अंतर के रूप में हो, तो हम इस सर्वसमिका का उपयोग करते हैं। यह सबसे सामान्य और उपयोगी गुणनखण्डन सर्वसमिकाओं में से एक है।
- उदाहरण: \(16m^2 - 25n^2 = (4m)^2 - (5n)^2 = (4m+5n)(4m-5n)\)
- उदाहरण: \((4x-3y)^2 - 100 = (4x-3y)^2 - (10)^2 = (4x-3y+10)(4x-3y-10)\)
पहचानने के तरीके:
- सर्वसमिका I और II: व्यंजक में तीन पद होते हैं। दो पद पूर्ण वर्ग होते हैं (जैसे \(x^2\), \(4y^2\), \(9\)) और तीसरा पद उन वर्गमूलों के गुणनफल का दोगुना होता है। यदि मध्य पद धनात्मक है तो सर्वसमिका I, यदि ऋणात्मक है तो सर्वसमिका II।
- सर्वसमिका III: व्यंजक में दो पद होते हैं। दोनों पद पूर्ण वर्ग होते हैं और उनके बीच ऋणात्मक चिह्न होता है।
गुणनखण्डन करते समय, सबसे पहले यह पहचानें कि दिया गया व्यंजक किस सर्वसमिका के पैटर्न में फिट बैठता है। यह अभ्यास से आसान हो जाता है।
सर्वसमिका III \(a^2 - b^2 = (a+b)(a-b)\) का प्रयोग उस स्थिति में करते हैं जब व्यंजक के दो पद हों तथा दोनों पद पूर्ण वर्ग के रूप में हों व उनके मध्य ऋण चिह्न हो।
सर्वसमिकाओं के अनुप्रयोग और जाँच
इस खंड में, हम विभिन्न प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए सर्वसमिकाओं के अनुप्रयोगों को देखेंगे और उनकी सत्यता की जाँच कैसे करें, यह समझेंगे।
- संख्यात्मक मान ज्ञात करना: सर्वसमिकाओं का उपयोग बड़ी संख्याओं की गणना को सरल बनाने के लिए किया जा सकता है।
- उदाहरण: \(41^2 = (40+1)^2 = 40^2 + 2(40)(1) + 1^2 = 1600 + 80 + 1 = 1681\)
- उदाहरण: \(69^2 = (70-1)^2 = 70^2 - 2(70)(1) + 1^2 = 4900 - 140 + 1 = 4761\)
- उदाहरण: \(105 \times 95 = (100+5)(100-5) = 100^2 - 5^2 = 10000 - 25 = 9975\)
- बीजीय व्यंजकों का सरलीकरण: सर्वसमिकाएं जटिल बीजीय व्यंजकों को सरल बनाने में मदद करती हैं।
- उदाहरण: \((2x+5)^2 = 4x^2 + 20x + 25\)
- उदाहरण: \((x/2 - y/5)^2 = x^2/4 - 2(x/2)(y/5) + y^2/25 = x^2/4 - xy/5 + y^2/25\)
- सत्यता की जाँच: किसी भी सर्वसमिका की सत्यता की जाँच करने के लिए, हम चरों के लिए कुछ मान प्रतिस्थापित कर सकते हैं और देख सकते हैं कि क्या बायां पक्ष (LHS) दायां पक्ष (RHS) के बराबर आता है।
- उदाहरण: \((2x-3y)^2 = 4x^2 - 12xy + 9y^2\) की जाँच \(x=4\) और \(y=2\) के लिए करें।
- LHS: \((2(4) - 3(2))^2 = (8-6)^2 = 2^2 = 4\)
- RHS: \(4(4)^2 - 12(4)(2) + 9(2)^2 = 4(16) - 12(8) + 9(4) = 64 - 96 + 36 = 100 - 96 = 4\)
- चूंकि LHS = RHS, सर्वसमिका इन मानों के लिए सत्य है।
- शब्द समस्याओं में उपयोग: ज्यामितीय समस्याओं और अन्य वास्तविक जीवन परिदृश्यों में सर्वसमिकाओं का उपयोग किया जा सकता है।
- उदाहरण: यदि एक आयताकार खेत का क्षेत्रफल \((x^2 - 25)\) वर्गमीटर है और लंबाई \((x+5)\) मीटर है, तो चौड़ाई ज्ञात कीजिए।
- क्षेत्रफल = लंबाई \(\times\) चौड़ाई
- \(x^2 - 25 = (x+5) \times \text{चौड़ाई}\)
- \((x-5)(x+5) = (x+5) \times \text{चौड़ाई}\)
- चौड़ाई = \((x-5)\) मीटर।
किसी भी सर्वसमिका की सत्यता की जाँच करने के लिए, चरों के कम से कम दो अलग-अलग मानों के लिए दोनों पक्षों का मूल्यांकन करना एक अच्छा अभ्यास है।
शब्द समस्याओं में, दिए गए कथनों को बीजीय व्यंजकों में अनुवाद करें और फिर उपयुक्त सर्वसमिका का उपयोग करके हल करें।