वर्ग एवं घन
यह अध्याय छात्रों को वर्ग और घन संख्याओं की अवधारणाओं से परिचित कराता है। इसमें पूर्ण वर्ग और पूर्ण घन संख्याओं की पहचान करने के लिए अभाज्य गुणनखंड विधि का उपयोग करना सिखाया गया है। छात्र वर्गमूल और घनमूल ज्ञात करने की विभिन्न विधियों, जैसे अभाज्य गुणनखंड विधि और भाग विधि, का अध्ययन करेंगे। अध्याय में पाइथागोरियन त्रिक और संख्याओं के दिलचस्प पैटर्न भी शामिल हैं, जो छात्रों की संख्यात्मक समझ को बढ़ाते हैं।
वर्ग संख्याएँ
जब किसी संख्या को स्वयं से गुणा किया जाता है, तो प्राप्त गुणनफल को उस संख्या का वर्ग कहते हैं।
- उदाहरण: \(3 \times 3 = 9\), यहाँ 9, 3 का वर्ग है। इसे \(3^2\) लिखा जाता है।
- पूर्ण वर्ग संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिन्हें समान पंक्तियों और स्तंभों में बिन्दुओं के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि वे किसी पूर्णांक का वर्ग होती हैं।
- जैसे: 4 (2x2), 9 (3x3), 16 (4x4) पूर्ण वर्ग संख्याएँ हैं।
- लेकिन 10, 11, 12 पूर्ण वर्ग संख्याएँ नहीं हैं क्योंकि इन्हें किसी पूर्णांक को स्वयं से गुणा करके प्राप्त नहीं किया जा सकता।
- पूर्ण वर्ग संख्याओं की पहचान के लिए [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t1_scene2] देखें।
वर्ग (Square): किसी संख्या को स्वयं से गुणा करने पर प्राप्त गुणनफल। जैसे \(n \times n = n^2\)।
पूर्ण वर्ग संख्या (Perfect Square Number): वह संख्या जो किसी पूर्णांक का वर्ग हो।
अभाज्य गुणनखण्ड व पूर्ण वर्ग संख्या की पहचान
पूर्ण वर्ग संख्या की पहचान करने का एक प्रभावी तरीका अभाज्य गुणनखंड विधि है।
विधि के चरण:
- दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- समान अभाज्य गुणनखंडों के जोड़े बनाएँ।
- यदि सभी अभाज्य गुणनखंडों के जोड़े बन जाते हैं (यानी, प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड दो बार आता है), तो वह संख्या एक पूर्ण वर्ग होती है।
- यदि कोई अभाज्य गुणनखंड बिना जोड़े के रह जाता है, तो वह संख्या पूर्ण वर्ग नहीं होती।
- उदाहरण: 144 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 3 \times 3\) हैं। यहाँ 2 के दो जोड़े और 3 का एक जोड़ा है। सभी गुणनखंडों के जोड़े बन गए हैं, अतः 144 एक पूर्ण वर्ग संख्या है।
- उदाहरण: 252 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 2 \times 3 \times 3 \times 7\) हैं। यहाँ 7 का कोई जोड़ा नहीं है, अतः 252 एक पूर्ण वर्ग संख्या नहीं है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t1_scene4] में उदाहरण देखें।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t2_scene2] और [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t2_scene3] में अभाज्य गुणनखंड विधि का सिद्धांत और उदाहरण देखें।
अभाज्य गुणनखंड विधि पूर्ण वर्ग संख्याओं की पहचान करने और उन्हें पूर्ण वर्ग बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। इसे अच्छी तरह समझें।
पूर्ण वर्ग संख्याओं के कुछ गुण
पूर्ण वर्ग संख्याएँ कुछ विशिष्ट गुण प्रदर्शित करती हैं जो उनकी पहचान में सहायक होते हैं:
1. इकाई का अंक:
- किसी भी पूर्ण वर्ग संख्या का इकाई का अंक कभी भी 2, 3, 7 या 8 नहीं हो सकता।
- पूर्ण वर्ग संख्याओं के इकाई के अंक केवल 0, 1, 4, 5, 6 या 9 हो सकते हैं।
- उदाहरण: \(1^2 = 1, 2^2 = 4, 3^2 = 9, 4^2 = 16, 5^2 = 25, 6^2 = 36, 7^2 = 49, 8^2 = 64, 9^2 = 81, 10^2 = 100\).
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t3_scene1] और [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t3_scene2] में इकाई के अंक का पैटर्न देखें।
2. शून्यों की संख्या:
- यदि किसी संख्या के अंत में शून्य हैं, तो उसके वर्ग के अंत में शून्यों की संख्या हमेशा सम होगी।
- उदाहरण: \(10^2 = 100\) (2 शून्य), \(20^2 = 400\) (2 शून्य), \(100^2 = 10000\) (4 शून्य)।
- यदि किसी संख्या के अंत में विषम संख्या में शून्य हैं, तो वह पूर्ण वर्ग नहीं हो सकती।
3. सम और विषम संख्याओं के वर्ग:
- सम संख्या का वर्ग हमेशा सम होता है। (जैसे \(2^2 = 4, 4^2 = 16\))
- विषम संख्या का वर्ग हमेशा विषम होता है। (जैसे \(3^2 = 9, 5^2 = 25\))
4. क्रमागत विषम संख्याओं का योग:
- प्रथम \(n\) विषम संख्याओं का योग \(n^2\) के बराबर होता है।
- उदाहरण: \(1 = 1^2\)
- \(1 + 3 = 4 = 2^2\)
- \(1 + 3 + 5 = 9 = 3^2\)
- \(1 + 3 + 5 + 7 = 16 = 4^2\)
- यह गुण वर्गमूल ज्ञात करने की 'घटाने की विधि' का आधार है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t8_scene2] में इसे देखें।
5. कुछ विशेष पैटर्न:
- \(1^2 = 1\)
- \(11^2 = 121\)
- \(111^2 = 12321\)
- \(1111^2 = 1234321\)
- यह पैटर्न दर्शाता है कि यदि किसी संख्या में 'n' बार 1 आता है, तो उसके वर्ग में अंक 1 से 'n' तक बढ़ते क्रम में और फिर 'n-1' से 1 तक घटते क्रम में होते हैं। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t3_scene4] में इस पैटर्न को देखें।
याद रखें, यदि किसी संख्या का इकाई का अंक 0, 1, 4, 5, 6 या 9 है, तो यह आवश्यक नहीं कि वह पूर्ण वर्ग हो। यह केवल एक शर्त है, पर्याप्त नहीं। उदाहरण के लिए, 10 एक पूर्ण वर्ग नहीं है, लेकिन इसका इकाई अंक 0 है।
पाइथागोरिय त्रिक
1. क्रमागत संख्याओं के वर्गों का अंतर:
- दो क्रमागत संख्याओं के वर्गों का अंतर उन संख्याओं के योगफल के बराबर होता है।
- सूत्र: \(a^2 - b^2 = (a-b)(a+b)\)
- यदि \(a\) और \(b\) क्रमागत संख्याएँ हैं, तो \(a-b = 1\)। अतः, \(a^2 - b^2 = a+b\).
- उदाहरण: \(4^2 - 3^2 = 16 - 9 = 7\) और \(4 + 3 = 7\).
- उदाहरण: \(9^2 - 8^2 = 81 - 64 = 17\) और \(9 + 8 = 17\).
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t4_scene1] और [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t4_scene2] में इस पैटर्न का अवलोकन करें।
2. पाइथागोरिय त्रिक:
- तीन धनात्मक पूर्णांकों \((a, b, c)\) का एक समूह जिसमें सबसे बड़ी संख्या का वर्ग, शेष दो संख्याओं के वर्गों के योगफल के बराबर होता है, पाइथागोरिय त्रिक कहलाता है।
- सूत्र: \(a^2 + b^2 = c^2\), जहाँ \(c\) सबसे बड़ी संख्या है।
- ये त्रिक समकोण त्रिभुज की भुजाओं की लंबाई को दर्शाते हैं।
- उदाहरण: \((3, 4, 5)\) एक पाइथागोरिय त्रिक है क्योंकि \(3^2 + 4^2 = 9 + 16 = 25 = 5^2\).
- उदाहरण: \((6, 8, 10)\) एक पाइथागोरिय त्रिक है क्योंकि \(6^2 + 8^2 = 36 + 64 = 100 = 10^2\).
- उदाहरण: \((5, 12, 13)\) एक पाइथागोरिय त्रिक है क्योंकि \(5^2 + 12^2 = 25 + 144 = 169 = 13^2\).
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t4_scene3] और [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t4_scene4] में पाइथागोरिय त्रिक की पहचान और जाँच देखें।
पाइथागोरिय त्रिक ज्ञात करने का सामान्य सूत्र:
- किसी भी प्राकृत संख्या \(m > 1\) के लिए, \((2m, m^2-1, m^2+1)\) एक पाइथागोरिय त्रिक होता है।
- उदाहरण: यदि \(m=2\), तो \((2 \times 2, 2^2-1, 2^2+1) = (4, 3, 5)\).
- उदाहरण: यदि \(m=3\), तो \((2 \times 3, 3^2-1, 3^2+1) = (6, 8, 10)\).
पाइथागोरस प्रमेय केवल समकोण त्रिभुजों पर लागू होती है।
संख्याओं से पूर्ण वर्ग संख्याएँ बनाना
यदि कोई संख्या पूर्ण वर्ग नहीं है, तो उसे गुणा या भाग करके पूर्ण वर्ग बनाया जा सकता है। इसके लिए अभाज्य गुणनखंड विधि का उपयोग किया जाता है।
1. गुणा करके पूर्ण वर्ग बनाना:
- यदि किसी संख्या के अभाज्य गुणनखंडों में कोई गुणनखंड बिना जोड़े का रह जाता है, तो उस गुणनखंड से संख्या को गुणा करने पर वह पूर्ण वर्ग बन जाती है।
- यह गुणा करने वाली न्यूनतम संख्या होती है।
- उदाहरण: 720 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 3 \times 3 \times 5\) हैं। यहाँ 5 का जोड़ा नहीं बन रहा है। अतः, 720 को 5 से गुणा करने पर \(720 \times 5 = 3600 = 60^2\) एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाएगी। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t5_scene2] में इसे देखें।
2. भाग देकर पूर्ण वर्ग बनाना:
- यदि किसी संख्या के अभाज्य गुणनखंडों में कोई गुणनखंड बिना जोड़े का रह जाता है, तो उस गुणनखंड से संख्या को भाग देने पर भागफल एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाता है।
- यह भाग देने वाली न्यूनतम संख्या होती है।
- उदाहरण: 140 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 2 \times 5 \times 7\) हैं। यहाँ 5 और 7 के जोड़े नहीं बन रहे हैं। अतः, 140 को \(5 \times 7 = 35\) से भाग देने पर \(140 \div 35 = 4 = 2^2\) एक पूर्ण वर्ग संख्या बन जाएगी। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t5_scene3] में इसे देखें।
3. न्यूनतम पूर्ण वर्ग संख्या ज्ञात करना जो दी गई संख्याओं से विभाजित हो:
- दी गई संख्याओं का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात करें।
- LCM के अभाज्य गुणनखंड करें।
- जिन गुणनखंडों के जोड़े नहीं बन रहे हैं, उन्हें पूर्ण जोड़े बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या से LCM को गुणा करें।
- उदाहरण: 6 और 8 से विभाजित होने वाली न्यूनतम पूर्ण वर्ग संख्या।
- 6 और 8 का LCM = 24।
- 24 के अभाज्य गुणनखंड = \(2 \times 2 \times 2 \times 3\). यहाँ 2 का एक जोड़ा है, लेकिन एक 2 और एक 3 बिना जोड़े के हैं।
- पूर्ण वर्ग बनाने के लिए \(2 \times 3 = 6\) से गुणा करना होगा।
- अतः, \(24 \times 6 = 144\) वह न्यूनतम पूर्ण वर्ग संख्या है जो 6 और 8 दोनों से विभाजित होती है।
किसी संख्या को पूर्ण वर्ग बनाने के लिए, हमेशा न्यूनतम संख्या से गुणा या भाग करना होता है। यह न्यूनतम संख्या उन अभाज्य गुणनखंडों का गुणनफल होती है जिनके जोड़े नहीं बन रहे होते हैं।
घन संख्याएँ
जब किसी संख्या को स्वयं से तीन बार गुणा किया जाता है, तो प्राप्त गुणनफल को उस संख्या का घन कहते हैं।
- इसे संख्या के ऊपर घात 3 लगाकर दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: \(2 \times 2 \times 2 = 8\), यहाँ 8, 2 का घन है। इसे \(2^3\) लिखा जाता है।
- उदाहरण: \(7 \times 7 \times 7 = 343\), यहाँ 343, 7 का घन है। इसे \(7^3\) लिखा जाता है।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t6_scene1] में घन की अवधारणा देखें।
पूर्ण घन संख्याएँ:
- वे संख्याएँ जो किसी पूर्णांक का घन होती हैं, पूर्ण घन संख्याएँ कहलाती हैं।
- उदाहरण: 1 (\(1^3\)), 8 (\(2^3\)), 27 (\(3^3\)), 64 (\(4^3\)), 125 (\(5^3\)) आदि।
घन संख्याओं के गुण:
- सम संख्या का घन हमेशा सम होता है। (जैसे \(2^3 = 8, 4^3 = 64\))
- विषम संख्या का घन हमेशा विषम होता है। (जैसे \(3^3 = 27, 5^3 = 125\))
घन संख्याओं के इकाई के अंक का पैटर्न:
- \(1^3 = 1\) (इकाई अंक 1)
- \(2^3 = 8\) (इकाई अंक 8)
- \(3^3 = 27\) (इकाई अंक 7)
- \(4^3 = 64\) (इकाई अंक 4)
- \(5^3 = 125\) (इकाई अंक 5)
- \(6^3 = 216\) (इकाई अंक 6)
- \(7^3 = 343\) (इकाई अंक 3)
- \(8^3 = 512\) (इकाई अंक 2)
- \(9^3 = 729\) (इकाई अंक 9)
- \(10^3 = 1000\) (इकाई अंक 0)
- ध्यान दें कि घन संख्याओं के इकाई के अंक में सभी अंक (0-9) आ सकते हैं, वर्ग संख्याओं के विपरीत।
घन (Cube): किसी संख्या को स्वयं से तीन बार गुणा करने पर प्राप्त गुणनफल। जैसे \(n \times n \times n = n^3\)।
घन संख्याओं की पहचान
किसी संख्या को पूर्ण घन संख्या पहचानने के लिए अभाज्य गुणनखंड विधि का उपयोग किया जाता है।
विधि के चरण:
- दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- समान अभाज्य गुणनखंडों के तीन-तीन के समूह (त्रिक) बनाएँ।
- यदि सभी अभाज्य गुणनखंड सफलतापूर्वक त्रिकों में व्यवस्थित हो जाते हैं और कोई भी गुणनखंड शेष नहीं बचता, तो वह संख्या एक पूर्ण घन संख्या होती है।
- यदि एक या अधिक अभाज्य गुणनखंड त्रिक बनाने से छूट जाते हैं, तो वह संख्या पूर्ण घन नहीं होती है।
- उदाहरण: 216 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 2 \times 2 \times 3 \times 3 \times 3\) हैं। यहाँ 2 का एक त्रिक और 3 का एक त्रिक बन रहा है। सभी गुणनखंडों के त्रिक बन गए हैं, अतः 216 एक पूर्ण घन संख्या है (\(216 = 6^3\))।
- उदाहरण: 24 के अभाज्य गुणनखंड \(2 \times 2 \times 2 \times 3\) हैं। यहाँ 2 का एक त्रिक बनता है, लेकिन 3 अकेला रह जाता है। अतः, 24 एक पूर्ण घन संख्या नहीं है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t7_scene3] में इसे देखें।
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t6_scene2] और [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t7_scene4] में घन संख्याओं की पहचान का सिद्धांत देखें।
संख्याओं से पूर्ण घन संख्याएँ बनाना:
- गुणा करके पूर्ण घन बनाना: यदि किसी संख्या के अभाज्य गुणनखंडों में कोई गुणनखंड त्रिक बनाने के लिए कम पड़ रहा है (जैसे एक या दो बार आया है), तो उसे आवश्यक संख्या से गुणा करके पूर्ण घन बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: 68600 के गुणनखंड \(2 \times 2 \times 2 \times 5 \times 5 \times 7 \times 7 \times 7\) हैं। यहाँ 2 और 7 के त्रिक बन रहे हैं, लेकिन 5 केवल दो बार आया है। इसे पूर्ण घन बनाने के लिए एक और 5 से गुणा करना होगा। अतः, \(68600 \times 5 = 343000 = 70^3\) एक पूर्ण घन संख्या है।
- भाग देकर पूर्ण घन बनाना: यदि किसी संख्या के अभाज्य गुणनखंडों में कोई गुणनखंड त्रिक बनाने के बाद भी शेष बच जाता है, तो उसे उस गुणनखंड से भाग देकर पूर्ण घन बनाया जा सकता है।
- उदाहरण: 408375 के गुणनखंड \(3 \times 3 \times 3 \times 5 \times 5 \times 5 \times 11 \times 11\) हैं। यहाँ 3 और 5 के त्रिक बन रहे हैं, लेकिन 11 दो बार आया है। इसे पूर्ण घन बनाने के लिए \(11 \times 11 = 121\) से भाग देना होगा। अतः, \(408375 \div 121 = 3375 = 15^3\) एक पूर्ण घन संख्या है।
पूर्ण वर्ग और पूर्ण घन संख्याओं की पहचान के लिए अभाज्य गुणनखंड विधि में मुख्य अंतर यह है कि वर्ग के लिए दो-दो के जोड़े बनाते हैं, जबकि घन के लिए तीन-तीन के त्रिक बनाते हैं।
एक और मज़ेदार बात (वर्गमूल)
वर्गमूल (Square Root): वह संख्या जिसे स्वयं से गुणा करने पर दी गई संख्या प्राप्त होती है, उस संख्या का वर्गमूल कहलाती है। इसे '√' चिह्न से दर्शाते हैं।
- उदाहरण: \(\sqrt{9} = 3\) क्योंकि \(3 \times 3 = 9\).
घटाने की विधि द्वारा वर्गमूल ज्ञात करना:
- यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्रथम \(n\) विषम संख्याओं का योग \(n^2\) होता है।
- किसी पूर्ण वर्ग संख्या का वर्गमूल ज्ञात करने के लिए, हम उस संख्या में से क्रमबद्ध रूप से प्रारंभिक विषम संख्याएँ (1, 3, 5, 7, ...) घटाते जाते हैं।
- हम तब तक घटाते हैं जब तक शेषफल शून्य न हो जाए। जितनी बार विषम संख्याओं को घटाया जाता है, वही उस संख्या का वर्गमूल होता है।
- उदाहरण: \(\sqrt{25}\) ज्ञात करना:
- \(25 - 1 = 24\)
- \(24 - 3 = 21\)
- \(21 - 5 = 16\)
- \(16 - 7 = 9\)
- \(9 - 9 = 0\)
- यहाँ 5 बार घटाने पर 0 प्राप्त हुआ, अतः \(\sqrt{25} = 5\).
- [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t8_scene2] में इस विधि को देखें।
पूर्ण वर्ग संख्या की जाँच:
- इस विधि का उपयोग यह जाँचने के लिए भी किया जा सकता है कि कोई संख्या पूर्ण वर्ग है या नहीं।
- यदि संख्या में से क्रमबद्ध विषम संख्याओं को घटाने पर अंत में शेषफल शून्य प्राप्त नहीं होता है, तो वह संख्या पूर्ण वर्ग नहीं होती है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t8_scene3] में इसे देखें।
वर्गमूल (Square Root): वह संख्या जिसे स्वयं से गुणा करने पर दी गई संख्या प्राप्त होती है। इसे \(\sqrt{\ }\) चिह्न से दर्शाया जाता है।
अभाज्य गुणनखण्ड विधि से वर्गमूल
अभाज्य गुणनखंड विधि वर्गमूल ज्ञात करने का एक व्यवस्थित तरीका है, विशेषकर बड़ी संख्याओं के लिए।
विधि के चरण:
- दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- समान अभाज्य गुणनखंडों के जोड़े बनाएँ।
- प्रत्येक जोड़े से एक गुणनखंड चुनें।
- इन चुने हुए गुणनखंडों का गुणा करें। प्राप्त गुणनफल ही दी गई संख्या का वर्गमूल होगा।
- उदाहरण: 441 का वर्गमूल ज्ञात करें।
- \(441 = 3 \times 3 \times 7 \times 7\)
- जोड़े बनाने पर: \((3 \times 3) \times (7 \times 7)\)
- प्रत्येक जोड़े से एक गुणनखंड लेने पर: \(3 \times 7 = 21\)
- अतः, \(\sqrt{441} = 21\). [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t9_scene2] में उदाहरण देखें।
- उदाहरण: 1296 का वर्गमूल ज्ञात करें।
- \(1296 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 3 \times 3 \times 3 \times 3\)
- जोड़े बनाने पर: \((2 \times 2) \times (2 \times 2) \times (3 \times 3) \times (3 \times 3)\)
- प्रत्येक जोड़े से एक गुणनखंड लेने पर: \(2 \times 2 \times 3 \times 3 = 36\)
- अतः, \(\sqrt{1296} = 36\).
दैनिक जीवन में उपयोग:
- यदि किसी वर्गाकार क्षेत्र का क्षेत्रफल दिया गया हो, तो उसकी भुजा की लंबाई ज्ञात करने के लिए क्षेत्रफल का वर्गमूल ज्ञात करते हैं।
- उदाहरण: एक वर्गाकार चित्र का क्षेत्रफल 2025 वर्ग सेमी है। भुजा की लंबाई \(\sqrt{2025} = \sqrt{3 \times 3 \times 3 \times 3 \times 5 \times 5} = 3 \times 3 \times 5 = 45\) सेमी होगी।
- यदि पौधों को वर्गाकार रूप में लगाना हो (जितनी पंक्तियाँ, उतने ही प्रत्येक पंक्ति में पौधे), तो कुल पौधों की संख्या का वर्गमूल ज्ञात करके पंक्तियों की संख्या ज्ञात की जा सकती है।
- उदाहरण: 11025 आम के पौधे लगाए गए हैं। पंक्तियों की संख्या \(\sqrt{11025} = \sqrt{3 \times 3 \times 5 \times 5 \times 7 \times 7} = 3 \times 5 \times 7 = 105\) होगी। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t9_scene3] में इसे देखें।
वर्गमूल ज्ञात करना किसी संख्या को 2 से भाग देने के समान नहीं है। \(\sqrt{441} = 21\), जबकि \(441 \div 2 = 220.5\). [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t9_scene4] में इस अंतर को समझें।
भाग विधि से वर्गमूल ज्ञात करना
भाग विधि एक सार्वभौमिक तरीका है जिससे किसी भी संख्या का वर्गमूल ज्ञात किया जा सकता है, चाहे वह पूर्ण वर्ग हो या नहीं, और दशमलव स्थानों तक भी।
विधि के चरण (पूर्णांकों के लिए):
- संख्या के इकाई अंक से शुरू करके, दो-दो अंकों के जोड़े बनाएँ। यदि संख्या में विषम अंक हों, तो सबसे बाईं ओर का अंक अकेला रह जाता है। इन जोड़ों पर एक छोटी आड़ी रेखा खींचें।
- सबसे बाईं ओर के जोड़े या अकेले अंक के लिए सबसे बड़ा पूर्ण वर्ग ज्ञात करें जो उससे कम या उसके बराबर हो। इस पूर्ण वर्ग का वर्गमूल भाजक और भागफल दोनों में लिखें।
- भाजक और भागफल के गुणनफल को पहले जोड़े के नीचे लिखकर घटाएँ।
- भाजक में वही अंक जोड़ें जो भागफल में लिखा गया था। इसे नए भाजक के रूप में नीचे लिखें।
- घटाने के बाद प्राप्त शेषफल के आगे अगला जोड़ा उतारें। यह नया भाज्य होगा।
- नए भाजक के आगे एक ऐसा अंक लिखें (और भागफल में भी) जिससे उस अंक और नए भाजक का गुणनफल नए भाज्य से अधिक न हो।
- इस प्रक्रिया को तब तक दोहराते रहें जब तक शेषफल 0 न हो जाए या आवश्यक दशमलव स्थानों तक वर्गमूल प्राप्त न हो जाए।
- उदाहरण: 625 का वर्गमूल ज्ञात करें।
- जोड़े बनाएँ: \(\overline{6}\overline{25}\)
- 6 के लिए सबसे बड़ा पूर्ण वर्ग 4 (\(2^2\)) है। भाजक और भागफल में 2 लिखें। \(6-4=2\).
- भाजक में 2 जोड़ें: \(2+2=4\). अगला जोड़ा 25 उतारें। नया भाज्य 225।
- 4 के आगे 5 लिखें (और भागफल में भी)। \(45 \times 5 = 225\). \(225-225=0\).
- अतः, \(\sqrt{625} = 25\). [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t10_scene2] में इसे देखें।
- उदाहरण: 9409 का वर्गमूल ज्ञात करें।
- जोड़े बनाएँ: \(\overline{94}\overline{09}\)
- 94 के लिए सबसे बड़ा पूर्ण वर्ग 81 (\(9^2\)) है। भाजक और भागफल में 9 लिखें। \(94-81=13\).
- भाजक में 9 जोड़ें: \(9+9=18\). अगला जोड़ा 09 उतारें। नया भाज्य 1309।
- 18 के आगे 7 लिखें (और भागफल में भी)। \(187 \times 7 = 1309\). \(1309-1309=0\).
- अतः, \(\sqrt{9409} = 97\).
दशमलव संख्याओं का वर्गमूल:
- दशमलव बिंदु के बाईं ओर के अंकों के जोड़े इकाई अंक से बाईं ओर बनाते हैं।
- दशमलव बिंदु के दाईं ओर के अंकों के जोड़े दशमलव बिंदु से दाईं ओर बनाते हैं, आवश्यकतानुसार शून्य जोड़कर।
- जब भागफल में दशमलव बिंदु के बाद का अंक नीचे उतारते हैं, तो भागफल में भी दशमलव बिंदु लगाते हैं। बाकी प्रक्रिया वैसी ही रहती है।
- उदाहरण: 51.84 का वर्गमूल।
- जोड़े बनाएँ: \(\overline{51}.\overline{84}\)
- 51 के लिए सबसे बड़ा पूर्ण वर्ग 49 (\(7^2\)) है। भाजक और भागफल में 7 लिखें। \(51-49=2\).
- भाजक में 7 जोड़ें: \(7+7=14\). दशमलव बिंदु के बाद का जोड़ा 84 उतारें। भागफल में दशमलव लगाएँ। नया भाज्य 284।
- 14 के आगे 2 लिखें (और भागफल में भी)। \(142 \times 2 = 284\). \(284-284=0\).
- अतः, \(\sqrt{51.84} = 7.2\). [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t10_scene3] में दशमलव संख्याओं का वर्गमूल देखें।
- यदि पूर्ण वर्ग संख्या न हो, तो दशमलव के बाद शून्य के जोड़े लगाकर आवश्यक दशमलव स्थानों तक वर्गमूल ज्ञात किया जा सकता है।
- उदाहरण: 2 का वर्गमूल दशमलव के तीन स्थानों तक ज्ञात करने के लिए, 2 को 2.000000 लिखें और फिर भाग विधि का उपयोग करें।
भाग विधि वर्गमूल ज्ञात करने की सबसे सटीक और सार्वभौमिक विधि है, खासकर गैर-पूर्ण वर्ग संख्याओं और दशमलव संख्याओं के लिए।
अभाज्य गुणनखण्ड विधि से घनमूल
घनमूल (Cube Root): वह संख्या जिसे स्वयं से तीन बार गुणा करने पर दी गई संख्या प्राप्त होती है, उस संख्या का घनमूल कहलाती है। इसे '\(\sqrt[3]{\ }\)' चिह्न से दर्शाते हैं।
- उदाहरण: \(\sqrt[3]{27} = 3\) क्योंकि \(3 \times 3 \times 3 = 27\).
अभाज्य गुणनखंड विधि से घनमूल ज्ञात करने के चरण:
- दी गई संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- समान अभाज्य गुणनखंडों के तीन-तीन के समूह (त्रिक) बनाएँ।
- प्रत्येक त्रिक से एक गुणनखंड चुनें।
- इन चुने हुए गुणनखंडों का गुणा करें। प्राप्त गुणनफल ही दी गई संख्या का घनमूल होगा।
- उदाहरण: 512 का घनमूल ज्ञात करें।
- \(512 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2\)
- त्रिक बनाने पर: \((2 \times 2 \times 2) \times (2 \times 2 \times 2) \times (2 \times 2 \times 2)\)
- प्रत्येक त्रिक से एक गुणनखंड लेने पर: \(2 \times 2 \times 2 = 8\)
- अतः, \(\sqrt[3]{512} = 8\). [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t11_scene2] में उदाहरण देखें।
- उदाहरण: 91,125 का घनमूल ज्ञात करें।
- \(91,125 = 3 \times 3 \times 3 \times 3 \times 3 \times 3 \times 5 \times 5 \times 5\)
- त्रिक बनाने पर: \((3 \times 3 \times 3) \times (3 \times 3 \times 3) \times (5 \times 5 \times 5)\)
- प्रत्येक त्रिक से एक गुणनखंड लेने पर: \(3 \times 3 \times 5 = 45\)
- अतः, \(\sqrt[3]{91,125} = 45\). [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t11_scene3] में उदाहरण देखें।
घनमूल ज्ञात करने का सिद्धांत:
- यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि यदि कोई संख्या पूर्ण घन है, तो उसके अभाज्य गुणनखंडों को तीन-तीन के समान समूहों (त्रिक) में व्यवस्थित किया जा सकता है।
- प्रत्येक त्रिक से एक गुणनखंड लेने पर और उनका गुणनफल ज्ञात करने पर, हमें मूल संख्या का घनमूल प्राप्त होता है। [IMAGE: cg_c8_maths_ch01_t11_scene4] में सिद्धांत देखें।
वर्गमूल के लिए दो-दो के जोड़े, और घनमूल के लिए तीन-तीन के त्रिक। यह याद रखना महत्वपूर्ण है।