प्रकाश का परावर्तन
यह अध्याय प्रकाश के परावर्तन के मूल सिद्धांतों का परिचय देता है, जिसमें समतल और गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब का बनना शामिल है। छात्र नियमित और अनियमित परावर्तन, पार्श्व परिवर्तन, और वास्तविक तथा आभासी प्रतिबिंबों के बीच अंतर सीखते हैं। यह अध्याय गोलीय दर्पणों के प्रकार (अवतल और उत्तल), उनके उपयोग और लेंसों द्वारा प्रतिबिंब बनने की प्रक्रिया को भी समझाता है। सूर्य के प्रकाश के विभिन्न रंगों के मिश्रण होने की अवधारणा भी इसमें शामिल है। यह छात्रों को प्रकाशिकी की दुनिया की एक ठोस नींव प्रदान करता है।
प्रकाश का परावर्तन और दर्पण का निर्माण
प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो हमें वस्तुओं को देखने में मदद करती है।
- जब प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है, तो वह वस्तु प्रकाश को सभी दिशाओं में फैला देती है। इसे विसरित परावर्तन कहते हैं।
- यह फैला हुआ प्रकाश जब हमारी आँखों में प्रवेश करता है, तो हमें वह वस्तु दिखाई देती है।
- जब प्रकाश की किरणें किसी समतल और अत्यधिक चमकदार सतह, जैसे दर्पण पर पड़ती हैं, तो वे एक निश्चित पैटर्न में और एक विशेष दिशा में परावर्तित होती हैं।
दर्पण का निर्माण
- दर्पण एक ऐसी प्रकाशीय युक्ति है जो प्रकाश के परावर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है।
- विधि:
- आमतौर पर एक समतल काँच की शीट ली जाती है।
- इस शीट की एक सतह को अत्यधिक परावर्तक बनाने के लिए उस पर चाँदी या एल्यूमीनियम जैसी धातु की पतली परत चढ़ाई जाती है।
- इस धात्विक परत को ऑक्सीकरण और घर्षण से बचाने के लिए, इसके ऊपर गहरे रंग का पेंट कर दिया जाता है।
- जिस सतह पर धातु की परत नहीं होती, वह परावर्तक सतह के रूप में कार्य करती है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t1_scene3] में दर्पण के निर्माण को दर्शाया गया है।
परावर्तन क्या है?
- परावर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश की किरणें किसी चिकनी या चमकदार सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट आती हैं।
- यह प्रकाश का एक मौलिक गुण है जो हमें दर्पण में अपनी छवि देखने और अन्य परावर्तक सतहों के माध्यम से वस्तुओं को देखने में सक्षम बनाता है।
- परावर्तन के नियम इस घटना को नियंत्रित करते हैं, जिसमें आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है।
- आपतित किरण (Incident Ray): वह प्रकाश किरण जो किसी परावर्तक सतह पर पड़ती है।
- परावर्तित किरण (Reflected Ray): सतह से टकराने के बाद, जो प्रकाश किरण वापस लौटती है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t1_scene5] में आपतित और परावर्तित किरणों को दर्शाया गया है।
प्रकाश के परावर्तन के कारण ही हम वस्तुओं को देख पाते हैं। बिना प्रकाश के परावर्तन के कोई भी वस्तु दिखाई नहीं देगी।
परावर्तन के नियम
प्रकाश के परावर्तन को दो मुख्य नियमों द्वारा समझाया जाता है। ये नियम सभी प्रकार की परावर्तक सतहों पर लागू होते हैं, चाहे वह समतल हो या घुमावदार।
प्रमुख पद
- आपतन बिंदु (Point of Incidence): परावर्तक सतह पर वह बिंदु जहाँ आपतित किरण टकराती है।
- अभिलम्ब (Normal): आपतन बिंदु पर परावर्तक सतह के लंबवत (90°) खींची गई काल्पनिक रेखा। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t2_scene1]
- आपतन कोण (Angle of Incidence, \(i\)): आपतित किरण और अभिलम्ब के बीच बनने वाला कोण।
- परावर्तन कोण (Angle of Reflection, \(r\)): परावर्तित किरण और अभिलम्ब के बीच बनने वाला कोण।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t2_scene2] में आपतन कोण और परावर्तन कोण को दर्शाया गया है।
परावर्तन के नियम
- पहला नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर दर्पण की सतह पर खींचा गया अभिलम्ब, ये तीनों एक ही तल (plane) में होते हैं।
- इसका अर्थ है कि ये सभी एक ही सपाट सतह पर मौजूद होते हैं और एक-दूसरे से संबंधित होते हैं। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t2_scene3]
- दूसरा नियम: आपतन कोण (\(i\)) हमेशा परावर्तन कोण (\(r\)) के बराबर होता है।
- गणितीय रूप से: \( \angle i = \angle r \)
- यह नियम परावर्तन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t2_scene4]
क्रियाकलाप द्वारा सत्यापन
- क्रियाकलाप 2 में परावर्तन के नियमों का सत्यापन किया गया है।
- इस क्रियाकलाप में, आपतन कोण \( \angle PON \) और परावर्तन कोण \( \angle SON \) को मापा जाता है।
- प्रेक्षण से यह सिद्ध होता है कि \( \angle PON = \angle SON \), जो परावर्तन के दूसरे नियम की पुष्टि करता है।
- साथ ही, आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब एक ही तल पर होते हैं।
परावर्तन के दोनों नियम परीक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें अच्छी तरह से याद करें और चित्र सहित अभ्यास करें।
नियमित तथा अनियमित परावर्तन
परावर्तन की घटना सतह की प्रकृति पर निर्भर करती है। सतह चिकनी या खुरदरी हो सकती है, जिसके आधार पर परावर्तन दो प्रकार का होता है:
1. नियमित परावर्तन (Regular Reflection)
- कब होता है: जब प्रकाश की समानांतर किरणें चिकनी, समतल और चमकदार सतह (जैसे दर्पण, स्थिर पानी की सतह) पर पड़ती हैं।
- परावर्तित किरणें: इस सतह से टकराने के बाद, सभी परावर्तित किरणें भी एक-दूसरे के समानांतर रहती हैं और एक ही निश्चित दिशा में परावर्तित होती हैं।
- प्रतिबिंब: इसी कारण हमें दर्पण में स्पष्ट और चमकीला प्रतिबिंब दिखाई देता है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t3_scene1] में नियमित परावर्तन को दर्शाया गया है।
2. अनियमित परावर्तन (Irregular/Diffused Reflection)
- कब होता है: जब प्रकाश की समानांतर किरणें किसी खुरदरी या असमान सतह (जैसे दीवार, कपड़ा, कागज) पर पड़ती हैं।
- परावर्तित किरणें: सतह की अनियमितताओं के कारण, प्रकाश की किरणें टकराने के बाद अलग-अलग दिशाओं में परावर्तित हो जाती हैं और एक-दूसरे के समानांतर नहीं रहतीं।
- प्रतिबिंब: यही कारण है कि हम खुरदरी सतहों पर अस्पष्ट या कोई प्रतिबिंब नहीं देख पाते।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t3_scene2] में अनियमित परावर्तन को दर्शाया गया है।
अंतर (तालिका)
| विशेषता | नियमित परावर्तन | अनियमित परावर्तन | |---|---|---| | सतह की प्रकृति | चिकनी, समतल और चमकदार | खुरदरी और असमान | | परावर्तित किरणें | एक-दूसरे के समानांतर रहती हैं | अलग-अलग दिशाओं में फैल जाती हैं | | प्रतिबिंब की प्रकृति | स्पष्ट और चमकीला | अस्पष्ट या कोई प्रतिबिंब नहीं | | उदाहरण | दर्पण, स्थिर पानी | दीवार, कागज, कपड़ा | | उपयोग | दर्पण में छवि देखना | वस्तुओं को सभी दिशाओं से देखना |
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t3_scene3] में नियमित और अनियमित परावर्तन के अंतर को संक्षेप में दर्शाया गया है।
अनियमित परावर्तन ही हमें आसपास की वस्तुओं को देखने में मदद करता है, क्योंकि यह प्रकाश को हर दिशा में फैला देता है, जिससे वस्तु किसी भी कोण से दिखाई देती है।
समतल दर्पण से प्रतिबिंब बनना
जब हम किसी समतल दर्पण के सामने खड़े होते हैं, तो दर्पण हमारी एक छवि बनाता है जिसे प्रतिबिंब कहते हैं।
प्रतिबिंब की विशेषताएँ
- आभासी (Virtual): प्रकाश की किरणें वास्तव में प्रतिबिंब बिंदु से नहीं आतीं, बल्कि आती हुई प्रतीत होती हैं। इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
- सीधा (Erect): प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष सीधा बनता है (ऊपर का भाग ऊपर और नीचे का भाग नीचे)।
- वस्तु के बराबर आकार का (Same Size): प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
- दर्पण के पीछे (Behind the Mirror): प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
- पार्श्व परिवर्तित (Laterally Inverted): प्रतिबिंब का दायाँ भाग वस्तु का बायाँ भाग और प्रतिबिंब का बायाँ भाग वस्तु का दायाँ भाग होता है। (विस्तार से t5 में)
प्रतिबिंब निर्माण की प्रक्रिया
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t5_scene1] में समतल दर्पण में प्रतिबिंब के अवलोकन को दर्शाया गया है।
- किरण आरेख (Ray Diagram):
- वस्तु A से चलने वाली दो किरणें AN और AN' समतल दर्पण MM' पर आपतित होती हैं।
- ये किरणें परावर्तन के नियमों का पालन करते हुए NR और N'R' दिशा में परावर्तित होती हैं।
- जब इन परावर्तित किरणों को पीछे की ओर बढ़ाया जाता है, तो वे दर्पण के पीछे एक बिंदु S पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं।
- यह बिंदु S वस्तु A का आभासी प्रतिबिंब है।
- वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image): जब प्रकाश की किरणें परावर्तन के बाद वास्तव में किसी बिंदु पर मिलती हैं, तो वास्तविक प्रतिबिंब बनता है। इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
- आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image): जब प्रकाश की किरणें परावर्तन के बाद किसी बिंदु पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं, तो आभासी प्रतिबिंब बनता है। इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा, वस्तु के बराबर आकार का और पार्श्व परिवर्तित होता है।
पार्श्व परिवर्तन
पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion) समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब की एक विशिष्ट विशेषता है।
परिभाषा
- पार्श्व परिवर्तन वह घटना है जिसमें समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब का दायाँ भाग वस्तु का बायाँ भाग और प्रतिबिंब का बायाँ भाग वस्तु का दायाँ भाग बन जाता है।
- इसका मतलब है कि दर्पण में हमारी छवि दाएँ-बाएँ उलट जाती है, लेकिन ऊपर-नीचे नहीं।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t5_scene2] में पार्श्व परिवर्तन की पहचान को दर्शाया गया है।
उदाहरण
- जब आप अपना बायाँ हाथ ऊपर उठाते हैं, तो दर्पण में आपके प्रतिबिंब का दायाँ हाथ ऊपर उठता हुआ दिखाई देता है।
- शब्दों में पार्श्व परिवर्तन: जब किसी शब्द को समतल दर्पण के सामने रखा जाता है, तो उसका प्रतिबिंब दाएँ-बाएँ उलट जाता है।
- उदाहरण के लिए, 'कमल' शब्द दर्पण में उलटा 'लमका' जैसा दिखाई देगा, जहाँ प्रत्येक अक्षर भी पार्श्व रूप से उलटा होगा।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t5_scene3] में शब्द 'कमल' में पार्श्व परिवर्तन को दर्शाया गया है।
- एम्बुलेंस (Ambulance): एम्बुलेंस वाहनों पर 'AMBULANCE' शब्द उल्टा लिखा होता है ताकि सामने वाले वाहन के ड्राइवर को अपने रियर-व्यू मिरर (जो समतल दर्पण की तरह कार्य करता है) में यह सीधा 'AMBULANCE' दिखाई दे और वह रास्ता दे सके।
महत्वपूर्ण बिंदु
- पार्श्व परिवर्तन केवल दाएँ-बाएँ उलटफेर को संदर्भित करता है, न कि ऊपर-नीचे उलटफेर को।
- यह समतल दर्पण की एक मौलिक विशेषता है और गोलीय दर्पणों में भी कुछ स्थितियों में देखा जा सकता है।
पार्श्व परिवर्तन की परिभाषा और एम्बुलेंस का उदाहरण अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है। इसे अच्छी तरह से समझ लें।
गोलीय दर्पण: प्रकार और परिभाषाएँ
गोलीय दर्पण ऐसे दर्पण होते हैं जिनकी परावर्तक सतह किसी खोखले गोले का एक भाग होती है। ये दर्पण समतल दर्पणों से भिन्न होते हैं क्योंकि इनकी सतहें सीधी न होकर वक्रित होती हैं।
- उदाहरण: चम्मच की चमकदार सतह इसका एक अच्छा उदाहरण है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t6_scene1]
गोलीय दर्पणों के प्रकार
गोलीय दर्पणों को उनकी परावर्तक सतह के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
- अवतल दर्पण (Concave Mirror):
- यदि दर्पण की भीतरी, दबी हुई सतह प्रकाश को परावर्तित करती है, तो वह अवतल दर्पण कहलाता है।
- यह प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है (अभिसारी)।
- उत्तल दर्पण (Convex Mirror):
- यदि दर्पण की बाहरी, उभरी हुई सतह परावर्तक होती है, तो उसे उत्तल दर्पण कहते हैं।
- यह प्रकाश किरणों को फैला देता है (अपसारी)।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t6_scene2] में अवतल और उत्तल दर्पण को दर्शाया गया है।
गोलीय दर्पणों से संबंधित महत्वपूर्ण पद
- ध्रुव (Pole, P): गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह का केंद्रीय बिंदु। यह दर्पण के ज्यामितीय केंद्र को दर्शाता है और मुख्य अक्ष पर स्थित होता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t6_scene3]
- वक्रता केंद्र (Center of Curvature, C): उस खोखले गोले का केंद्र जिसका गोलीय दर्पण एक भाग है।
- अवतल दर्पण: वक्रता केंद्र परावर्तक सतह के सामने स्थित होता है।
- उत्तल दर्पण: वक्रता केंद्र परावर्तक सतह के पीछे स्थित होता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t6_scene4]
- वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature, R): ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) के बीच की दूरी। यह उस गोले की त्रिज्या होती है जिसका दर्पण एक भाग है।
- मुख्य अक्ष (Principal Axis): एक सीधी काल्पनिक रेखा जो गोलीय दर्पण के ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) से होकर गुजरती है। यह दर्पण के केंद्र से लंबवत होती है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t6_scene5]
- मुख्य फोकस (Principal Focus, F): मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (अवतल दर्पण) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण), उसे मुख्य फोकस कहते हैं।
- फोकस दूरी (Focal Length, f): ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच की दूरी।
- संबंध: \( f = R/2 \) (फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है)।
क्रियाकलाप 3: अवतल दर्पण का फोकस ज्ञात करना
- अवतल दर्पण सूर्य के प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करता है, जिसे मुख्य फोकस कहते हैं।
- इस बिंदु पर कागज रखने पर वह जलने लगता है, क्योंकि प्रकाश ऊर्जा केंद्रित हो जाती है।
- यह प्रतिबिंब वास्तविक होता है क्योंकि इसे पर्दे (कागज) पर प्राप्त किया जा सकता है।
फोकस दूरी (f): ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच की दूरी। वक्रता त्रिज्या (R): ध्रुव और वक्रता केंद्र के बीच की दूरी। संबंध: \( f = R/2 \)
गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश परावर्तन के नियम
गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण को समझने के लिए कुछ मूलभूत नियमों का पालन किया जाता है। ये नियम प्रकाश किरणों के पथ को निर्धारित करते हैं।
नियम 1: मुख्य अक्ष के समानांतर किरण
- अवतल दर्पण: जब कोई प्रकाश किरण अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित होती है, तो परावर्तन के पश्चात वह मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है।
- उत्तल दर्पण: जब कोई प्रकाश किरण उत्तल दर्पण के मुख्य अक्ष के समानांतर आपतित होती है, तो परावर्तन के बाद वह मुख्य फोकस से आती हुई प्रतीत होती है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t7_scene1] में इस नियम को दर्शाया गया है।
नियम 2: फोकस से गुजरने वाली किरण
- अवतल दर्पण: यदि कोई प्रकाश किरण अवतल दर्पण के मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है, तो परावर्तन के पश्चात वह मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
- उत्तल दर्पण: यदि कोई किरण मुख्य फोकस की ओर निर्देशित होती है, तो परावर्तन के बाद वह मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t7_scene2] में इस नियम को दर्शाया गया है।
नियम 3: वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण
- अवतल दर्पण: जब कोई प्रकाश किरण अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र (C) से होकर गुजरती है, तो परावर्तन के पश्चात वह उसी मार्ग पर वापस लौट जाती है।
- उत्तल दर्पण: यदि कोई किरण वक्रता केंद्र की ओर निर्देशित होती है, तो परावर्तन के बाद वह उसी मार्ग पर वापस लौट जाती है।
- कारण: वक्रता केंद्र से दर्पण की सतह पर खींची गई कोई भी रेखा दर्पण पर अभिलंब होती है। चूँकि आपतित किरण अभिलंब के अनुदिश होती है (आपतन कोण \(i = 0^\circ\)), इसलिए परावर्तन कोण \(r\) भी \(0^\circ\) होता है, और किरण उसी पथ पर वापस लौट जाती है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t7_scene3] में इस नियम को दर्शाया गया है।
प्रतिबिंब निर्माण के लिए उपयोग
- गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति निर्धारित करने के लिए आमतौर पर इन तीन नियमों में से किन्हीं दो किरणों का उपयोग करके किरण आरेख बनाए जाते हैं। जहाँ ये दो परावर्तित किरणें मिलती हैं (या मिलती हुई प्रतीत होती हैं), वहीं प्रतिबिंब बनता है।
ये तीनों नियम गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के लिए आधारशिला हैं। इन्हें अच्छी तरह से समझें और किरण आरेख बनाने का अभ्यास करें।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण
अवतल दर्पण एक गोलीय दर्पण होता है जिसकी परावर्तक सतह अंदर की ओर वक्रित होती है। यह प्रकाश की समानांतर किरणों को परावर्तन के बाद एक बिंदु पर केंद्रित करता है, जिसे मुख्य फोकस कहते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t8_scene1] में अवतल दर्पण की पहचान को दर्शाया गया है।
- अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के लिए, वस्तु की विभिन्न स्थितियों के आधार पर प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति और आकार भिन्न-भिन्न होते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t8_scene2] में अवतल दर्पण से प्रतिबिंब बनने के नियम संक्षेप में दिए गए हैं।
वस्तु की विभिन्न स्थितियों के लिए प्रतिबिंब
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब की प्रकृति | प्रतिबिंब का आकार | किरण आरेख | |---|---|---|---|---| | अनंत पर | फोकस (F) पर | वास्तविक, उल्टा | अत्यधिक छोटा (बिंदु आकार) | [IMAGE: TODO: अवतल दर्पण - वस्तु अनंत पर] | | C से परे | F और C के बीच | वास्तविक, उल्टा | वस्तु से छोटा | [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t8_scene3] (सामान्य) / [IMAGE: चित्र 12.16 क] | | C पर | C पर | वास्तविक, उल्टा | वस्तु के बराबर | [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t8_scene3] (सामान्य) / [IMAGE: चित्र 12.16 ख] | | C और F के बीच | C से परे | वास्तविक, उल्टा | वस्तु से बड़ा (आवर्धित) | [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t8_scene3] (सामान्य) / [IMAGE: चित्र 12.16 ग] | | F पर | अनंत पर | वास्तविक, उल्टा | अत्यधिक बड़ा | [IMAGE: TODO: अवतल दर्पण - वस्तु फोकस पर] | | P और F के बीच | दर्पण के पीछे | आभासी, सीधा | वस्तु से बड़ा (आवर्धित) | [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t8_scene3] (सामान्य) / [IMAGE: चित्र 12.16 घ] |
क्रियाकलाप 4 और 5
- क्रियाकलाप 4: अवतल दर्पण की फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या ज्ञात करने के लिए मोमबत्ती का उपयोग। जब वस्तु (मोमबत्ती) वक्रता केंद्र पर होती है, तो प्रतिबिंब भी वक्रता केंद्र पर, वास्तविक, उल्टा और वस्तु के बराबर आकार का बनता है। इस दूरी को मापकर वक्रता त्रिज्या ज्ञात की जा सकती है, और फोकस दूरी \(f = R/2\) से निकाली जा सकती है। [IMAGE: चित्र 12.15]
- क्रियाकलाप 5: वस्तु की विभिन्न स्थितियों के लिए अवतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंबों की स्थिति, आकृति और प्रकृति का अध्ययन। यह ऊपर दी गई सारणी के परिणामों की पुष्टि करता है।
अवतल दर्पण के उपयोग
- टॉर्च, सर्चलाइट और वाहनों की हेडलाइट: प्रकाश की शक्तिशाली समानांतर किरण पुंज प्राप्त करने के लिए।
- दंत चिकित्सक: दांतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए, ताकि वे दांतों की समस्याओं का बेहतर ढंग से निदान कर सकें।
- शेविंग दर्पण: चेहरे का बड़ा और सीधा प्रतिबिंब देखने के लिए (जब चेहरा P और F के बीच हो)।
- सौर भट्टियाँ: सूर्य के प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करके अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए।
अवतल दर्पण द्वारा विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिंब निर्माण के किरण आरेख और उनकी विशेषताओं को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। यह अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण और उपयोग
उत्तल दर्पण एक ऐसा गोलीय दर्पण है जिसकी परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी हुई होती है। यह प्रकाश किरणों को फैला देता है (अपसारी)।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब की प्रकृति
- उत्तल दर्पण के सामने वस्तु को कहीं भी रखा जाए, यह हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
- यह प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे, ध्रुव (P) और फोकस (F) के बीच बनता है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t9_scene1] में उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब की प्रकृति को दर्शाया गया है।
उत्तल दर्पण के प्रमुख उपयोग
- वाहनों में साइड मिरर (पार्श्व दर्पण):
- यह ड्राइवर को पीछे से आने वाले वाहनों और सड़क का एक विस्तृत दृश्य प्रदान करता है।
- इसके छोटे प्रतिबिंब बनाने की क्षमता के कारण ही यह संभव हो पाता है, जिससे सुरक्षा बढ़ती है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t9_scene2] में उत्तल दर्पण के उपयोग को दर्शाया गया है।
- दुकानों में सुरक्षा दर्पण: दुकानों में बड़े क्षेत्र की निगरानी के लिए उपयोग किया जाता है।
- स्ट्रीट लाइट रिफ्लेक्टर: प्रकाश को बड़े क्षेत्र में फैलाने के लिए।
अवतल दर्पण से तुलना और उपयोग
- अवतल दर्पण:
- प्रकाश को अभिसारित (केंद्रित) करता है।
- वास्तविक और आभासी दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बना सकता है।
- प्रतिबिंब का आकार वस्तु से छोटा, बराबर या बड़ा हो सकता है।
- उपयोग: टॉर्च, सर्चलाइट, वाहनों की हेडलाइट, दंत चिकित्सक का दर्पण, शेविंग दर्पण, सौर भट्टियाँ।
- उत्तल दर्पण:
- प्रकाश को अपसारित (फैलाता) है।
- हमेशा आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
- प्रतिबिंब का आकार हमेशा वस्तु से छोटा होता है।
- उपयोग: वाहनों के पार्श्व दर्पण, सुरक्षा दर्पण, स्ट्रीट लाइट रिफ्लेक्टर।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t9_scene3] में अवतल दर्पण से तुलना और उपयोग को दर्शाया गया है।
उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, यही कारण है कि इसका उपयोग वाहनों में रियर-व्यू मिरर के रूप में किया जाता है।
लेंस: प्रकार और प्रतिबिंब निर्माण
लेंस एक पारदर्शी माध्यम होता है जो दो सतहों से घिरा होता है। ये सतहें आमतौर पर गोलाकार या बेलनाकार होती हैं। लेंस का मुख्य कार्य प्रकाश किरणों को अपवर्तित करके उन्हें एक बिंदु पर केंद्रित करना (अभिसरण) या उन्हें फैलाना (अपसरण) होता है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t10_scene1] में लेंस की परिभाषा को दर्शाया गया है।
लेंसों के प्रकार
- उत्तल लेंस (Convex Lens):
- यह लेंस किनारों की तुलना में बीच में मोटा होता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t10_scene2]
- यह अपने ऊपर पड़ने वाली समानांतर प्रकाश किरणों को अपवर्तन के बाद एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
- इस गुण के कारण इसे अभिसारी लेंस (Converging Lens) भी कहा जाता है।
- प्रतिबिंब: उत्तल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब वास्तविक या आभासी, सीधा या उल्टा, और वस्तु से छोटा, बराबर या बड़ा हो सकता है, जो वस्तु की स्थिति पर निर्भर करता है।
- क्रियाकलाप 6: उत्तल लेंस का उपयोग करके मोमबत्ती की लौ का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त किया जा सकता है। वस्तु को लेंस के पास लाने पर आभासी और सीधा प्रतिबिंब भी बनता है। [IMAGE: चित्र 12.19 (क)]
- अवतल लेंस (Concave Lens):
- यह लेंस किनारों की तुलना में बीच में पतला होता है। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t10_scene3]
- यह अपने ऊपर पड़ने वाली समानांतर प्रकाश किरणों को अपवर्तन के बाद फैला देता है।
- इस गुण के कारण इसे अपसारी लेंस (Diverging Lens) भी कहा जाता है।
- प्रतिबिंब: अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा होता है, चाहे वस्तु कहीं भी रखी हो। [IMAGE: चित्र 12.19 (ख)]
लेंसों के दैनिक जीवन में उपयोग
- चश्मे: दृष्टि दोषों (जैसे निकट दृष्टिदोष और दूर दृष्टिदोष) के सुधार के लिए।
- दूरबीन (Telescopes): दूर की वस्तुओं को देखने के लिए।
- सूक्ष्मदर्शी (Microscopes): छोटी वस्तुओं को बड़ा करके देखने के लिए।
- कैमरे: छवियों को कैप्चर करने के लिए।
- प्रोजेक्टर: छवियों को बड़ी स्क्रीन पर प्रदर्शित करने के लिए।
- मैग्नीफाइंग ग्लास (आवर्धक लेंस): छोटी वस्तुओं को बड़ा देखने के लिए। [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t10_scene4]
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t10_scene4] में लेंसों के दैनिक जीवन में उपयोगों को दर्शाया गया है।
छात्र अक्सर उत्तल लेंस को उत्तल दर्पण और अवतल लेंस को अवतल दर्पण के साथ भ्रमित करते हैं। याद रखें, लेंस अपवर्तन पर काम करते हैं जबकि दर्पण परावर्तन पर।
श्वेत प्रकाश का वर्ण विक्षेपण
सूर्य का प्रकाश, जिसे हम आमतौर पर श्वेत प्रकाश कहते हैं, वास्तव में विभिन्न रंगों के प्रकाश का मिश्रण है। जब यह प्रकाश किसी माध्यम से गुजरता है जो इसे अलग-अलग गति से मोड़ता है, तो इसके घटक रंग अलग-अलग हो जाते हैं, और हमें एक वर्णक्रम (spectrum) दिखाई देता है।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t11_scene2] में श्वेत प्रकाश के अनेक रंगों का मिश्रण होने को दर्शाया गया है।
इंद्रधनुष
- इंद्रधनुष एक प्राकृतिक घटना है जो तब होती है जब सूर्य का प्रकाश वर्षा की बूंदों से गुजरता है।
- ये वर्षा की बूंदें एक छोटे प्रिज्म की तरह काम करती हैं, जो श्वेत प्रकाश को उसके घटक रंगों में विभाजित कर देती हैं।
- इंद्रधनुष में मोटे तौर पर सात वर्ण (रंग) होते हैं: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी तथा बैंगनी (संक्षेप में 'बैजानीहपीनाला')।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t11_scene1] में इंद्रधनुष को दर्शाया गया है।
अन्य उदाहरण
- साबुन के बुलबुले: साबुन के बुलबुलों की पतली परतें भी प्रकाश के वर्ण विक्षेपण का प्रदर्शन करती हैं। जब श्वेत प्रकाश इन सतहों से परावर्तित होता है, तो यह अपने घटक रंगों में विभाजित हो जाता है, जिससे हमें रंगीन पैटर्न दिखाई देते हैं।
- कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी): सीडी की सूक्ष्म खांचे भी प्रकाश के विवर्तन और वर्ण विक्षेपण के कारण रंगीन दिखाई देती हैं।
- [IMAGE: cg_c7_science_ch12_t11_scene3] में साबुन के बुलबुले और सीडी के उदाहरणों को दर्शाया गया है।
वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light)
- वह घटना जिसमें श्वेत प्रकाश अपने घटक रंगों में विभाजित हो जाता है, वर्ण विक्षेपण कहलाती है।
- यह इसलिए होता है क्योंकि विभिन्न रंगों के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य अलग-अलग होती है, और जब वे किसी पारदर्शी माध्यम (जैसे प्रिज्म या पानी की बूंद) से गुजरते हैं, तो वे अलग-अलग कोणों पर अपवर्तित होते हैं।
श्वेत प्रकाश वास्तव में सात रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) का मिश्रण है। इंद्रधनुष और प्रिज्म इस घटना के प्राकृतिक उदाहरण हैं।