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ऊष्मा का संचरण
Chhattisgarh · Class 7 · 🔬 Science · Chapter 8

ऊष्मा का संचरण

चालनसंवहनविकिरणऊष्मा के सुचालकऊष्मा के कुचालकथर्मस फ्लास्क

यह अध्याय ऊष्मा के संचरण की विभिन्न विधियों - चालन, संवहन और विकिरण का विस्तृत विवरण प्रदान करता है। छात्र ठोस, द्रव और गैसों में ऊष्मा के संचरण के सिद्धांतों को समझेंगे, साथ ही दैनिक जीवन में ऊष्मा के सुचालक और कुचालकों के उपयोग को भी जानेंगे। थर्मस फ्लास्क की कार्यप्रणाली और ऊष्मा संचरण को रोकने के लिए इसकी डिज़ाइन भी इस अध्याय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह अध्याय छात्रों को ऊष्मा के व्यवहार और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों की गहरी समझ विकसित करने में मदद करता है।

ऊष्मा संचरण की परिभाषा और विधियाँ

ऊष्मा संचरण की विधियाँ
ऊष्मा संचरण की विधियाँ

ऊष्मा संचरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा ऊष्मा ऊर्जा एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित होती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि दोनों स्थानों का तापमान समान न हो जाए। ऊष्मा का संचरण हमेशा उच्च तापमान वाले क्षेत्र से निम्न तापमान वाले क्षेत्र की ओर होता है।

ऊष्मा संचरण की मुख्य तीन विधियाँ हैं:

  • चालन (Conduction): मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में।
  • संवहन (Convection): द्रवों और गैसों में।
  • विकिरण (Radiation): किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं, निर्वात में भी संभव।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • ऊष्मा संचरण की विधि पदार्थ की प्रकृति और उसकी अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) पर निर्भर करती है।
  • सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का पहुँचना विकिरण का एक प्रमुख उदाहरण है।
📖परिभाषा

ऊष्मा संचरण: ऊष्मा के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचने की प्रक्रिया को ऊष्मा का संचरण कहते हैं।

चालन

ऊष्मा का चालन
ऊष्मा का चालन
ऊष्मा का चालन (चम्मच)
ऊष्मा का चालन (चम्मच)

चालन ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें ऊष्मा पदार्थ के कणों के सीधे संपर्क द्वारा एक कण से दूसरे कण तक स्थानांतरित होती है, लेकिन कण स्वयं अपने स्थान से विस्थापित नहीं होते।

  • यह विधि मुख्य रूप से ठोस पदार्थों में होती है।
  • ठोस में कण एक निश्चित स्थान पर कंपन करते हुए ऊर्जा का स्थानांतरण करते हैं।
  • धातुएँ ऊष्मा की अच्छी चालक होती हैं।

चालन द्वारा ऊष्मा संचरण की शर्तें:

  1. दोनों वस्तुएँ एक-दूसरे के संपर्क में हों।
  2. उनके ताप भिन्न हों (एक गर्म, दूसरा ठंडा)।

उदाहरण:

  • गर्म लोहे की छड़ के एक सिरे को गर्म करने पर दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है।
  • खाना पकाने के बर्तन का हैंडल गर्म हो जाना।

क्रियाकलाप 1 का निष्कर्ष: धातु का चम्मच गर्म पानी में डुबोने पर उसका दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है, क्योंकि धातु ऊष्मा की सुचालक है और चालन द्वारा ऊष्मा का स्थानांतरण होता है।

📖परिभाषा

चालन: ऊष्मा संचरण की वह प्रक्रिया जिसमें पदार्थ के अणु अपने स्थान से स्थानांतरित हुए बिना ऊष्मा संचरण का कार्य करते हैं।

संवहन

संवहन धाराएँ
संवहन धाराएँ
संवहन का प्रदर्शन
संवहन का प्रदर्शन
ठोस में संवहन क्यों नहीं?
ठोस में संवहन क्यों नहीं?

संवहन ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें ऊष्मा का स्थानांतरण माध्यम के कणों की वास्तविक गति द्वारा होता है।

  • यह विधि मुख्य रूप से द्रवों और गैसों में होती है।
  • जब द्रव या गैस का निचला हिस्सा गर्म होता है, तो उसके कण फैलते हैं, हल्के होकर ऊपर उठते हैं।
  • ऊपर के ठंडे और भारी कण नीचे आते हैं, गर्म होते हैं और फिर ऊपर उठते हैं।
  • यह निरंतर चक्र संवहन धाराओं का निर्माण करता है, जिससे ऊष्मा पूरे तरल में फैल जाती है।

संवहन धाराएँ: गर्म होते समय द्रव या गैसों में चलने वाली इन धाराओं को संवहन धाराएँ कहते हैं।

ठोस में संवहन क्यों नहीं?

  • ठोस के कण अपनी निश्चित स्थिति पर स्थिर होते हैं और वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति नहीं कर सकते।
  • चूंकि संवहन में कणों की वास्तविक गति आवश्यक है, इसलिए ठोस में संवहन द्वारा ऊष्मा का संचरण संभव नहीं है।

दैनिक जीवन में संवहन धाराएँ:

  • घरों और कारखानों में धुआँ: गर्म हवा हल्की होकर चिमनियों से बाहर निकलती है, ठंडी हवा नीचे से प्रवेश करती है।
  • रेफ्रिजरेटर: फ्रीजर ऊपर रखा जाता है ताकि ठंडी, भारी हवा नीचे आए और गर्म हवा ऊपर जाकर ठंडी हो सके।
  • सीलिंग फैन: बंद कमरे में गर्म हवा ऊपर होती है, पंखा चलाने पर पहले गर्म हवा देता है।

क्रियाकलाप 3 का निष्कर्ष: पोटैशियम परमैंगनेट के रंगीन कणों की गति से संवहन धाराओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिससे पता चलता है कि गर्म पानी ऊपर उठता है और ठंडा पानी नीचे आता है।

क्रियाकलाप 4 का निष्कर्ष: परखनली में ऊपर से गर्म करने पर बर्फ नहीं पिघलती क्योंकि पानी ऊष्मा का कुचालक है और संवहन नीचे की ओर नहीं होता।

📖परिभाषा

संवहन: ऊष्मा संचरण की वह प्रक्रिया जिसमें द्रव एवं गैस के अणुओं की गति के फलस्वरूप ऊष्मा का स्थानांतरण होता है।

महत्त्वपूर्ण

संवहन में ऊष्मा सदैव नीचे से ऊपर की ओर संचारित होती है।

विकिरण

विकिरण
विकिरण
विकिरण के गुण
विकिरण के गुण
अच्छे अवशोषक और उत्सर्जक
अच्छे अवशोषक और उत्सर्जक

विकिरण ऊष्मा संचरण की वह विधि है जिसमें ऊष्मा का स्थानांतरण विद्युत चुम्बकीय तरंगों (जैसे अवरक्त तरंगें) के रूप में होता है।

  • इस प्रक्रिया में ऊष्मा को संचरित होने के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
  • यह निर्वात में भी हो सकता है।
  • विकिरण ऊष्मा संचरण की सबसे तीव्र विधि है (प्रकाश की गति से)।

उदाहरण:

  • सूर्य से पृथ्वी तक ऊष्मा का पहुँचना।
  • अलाव या हीटर के पास खड़े होने पर गर्मी महसूस होना।

विकिरण ऊर्जा का उत्सर्जन: सभी गर्म वस्तुएँ (ठोस, द्रव या गैस) ऊष्मा का उत्सर्जन करती हैं। उत्सर्जित ऊष्मा का परिमाण निम्न दो बातों पर निर्भर करता है:

  1. वस्तु का ताप: जितना अधिक ताप, उतना अधिक विकिरण।
  2. वस्तु का रंग या उसकी सतह की प्रकृति:
  • काली/गहरी सतहें ऊष्मा विकिरण की अच्छी अवशोषक और अच्छी उत्सर्जक होती हैं।
  • चमकीली/हल्की सतहें ऊष्मा विकिरण की खराब अवशोषक और खराब उत्सर्जक होती हैं (अधिकांश विकिरण को परावर्तित कर देती हैं)।

दैनिक जीवन में ऊष्मा विकिरण:

  • गर्मियों में हल्के रंग के कपड़े: कम ऊष्मा अवशोषित करते हैं, गर्मी कम लगती है।
  • सर्दियों में गहरे रंग के कपड़े: अधिक ऊष्मा अवशोषित करते हैं, शरीर गर्म रहता है।
  • सोलर कुकर: भीतरी सतह काली होती है ताकि अधिकतम ऊष्मा अवशोषित हो।
  • चाय की केतली: चमकदार रखी जाती है ताकि विकिरण द्वारा ऊष्मा की हानि कम हो।

क्रियाकलाप 5 का निष्कर्ष: मोमबत्ती की लौ के पास थर्मामीटर रखने पर ताप में वृद्धि होती है, जो विकिरण द्वारा ऊष्मा संचरण को दर्शाता है क्योंकि चालन और संवहन नीचे की ओर प्रभावी नहीं होते।

क्रियाकलाप 6 और 7 का निष्कर्ष: काली सतहें चमकदार सतहों की तुलना में ऊष्मा विकिरण की अच्छी अवशोषक और अच्छी उत्सर्जक होती हैं।

📖परिभाषा

विकिरण: ऊष्मा संचरण की वह प्रक्रिया जिसमें ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरित होने में किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

महत्त्वपूर्ण

सूर्य से ऊष्मा हमें विकिरण द्वारा प्राप्त होती है।

ऊष्मा के सुचालक और कुचालक

ऊष्मा के सुचालक
ऊष्मा के सुचालक
ऊष्मा के कुचालक
ऊष्मा के कुचालक
पदार्थ की ऊष्मा चालकता
पदार्थ की ऊष्मा चालकता
ऊष्मा का सर्वोत्तम चालक
ऊष्मा का सर्वोत्तम चालक

ऊष्मा के सुचालक (Conductors):

  • वे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने अंदर से आसानी से प्रवाहित होने देते हैं
  • इनमें ऊष्मा का संचरण तेजी से होता है।
  • उदाहरण: सभी धातुएँ (चाँदी, ताँबा, एल्युमिनियम, लोहा), पारा (एकमात्र द्रव सुचालक)।
  • उपयोग: खाना पकाने के बर्तन, हीटिंग एलीमेंट्स, रेडिएटर्स।

ऊष्मा के कुचालक (Insulators):

  • वे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने अंदर से आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते। इन्हें ऊष्मारोधी भी कहते हैं।
  • ये पदार्थ ऊष्मा के प्रवाह को धीमा कर देते हैं या रोक देते हैं।
  • उदाहरण: लकड़ी, प्लास्टिक, हवा, रबर, थर्मोकोल, ऊन, काँच, कॉर्क, कागज, निर्वात।
  • उपयोग: गर्म बर्तनों के हैंडल, ऊनी कपड़े, रेफ्रिजरेटर की दीवारें, भवन निर्माण में इन्सुलेशन।

चालकता का महत्व:

  • सुचालक: ऊष्मा के कुशल स्थानांतरण के लिए आवश्यक।
  • कुचालक: ऊष्मा के प्रवाह को नियंत्रित करने और ऊर्जा बचाने में मदद करते हैं।

क्रियाकलाप 2 और 3 का निष्कर्ष:

  • लोहे की पट्टी पर कीलें: गर्म करने पर कीलें क्रम से गिरती हैं, जो दर्शाता है कि ऊष्मा धीरे-धीरे संचरित होती है।
  • विभिन्न धातुओं की छड़ें: चाँदी में सबसे अधिक दूरी तक मोम पिघलता है, फिर ताँबे में, और लकड़ी में सबसे कम। यह उनकी चालकता के अंतर को दर्शाता है: चाँदी > ताँबा > एल्युमिनियम > लोहा > सीसा > लकड़ी

दैनिक जीवन में ऊष्मा चालकता के प्रभाव:

  1. खाना पकाने के बर्तन: ताँबा, एल्युमिनियम, पीतल जैसे सुचालक धातुओं से बने होते हैं ताकि भोजन जल्दी पके।
  2. कागज की कटोरी में पानी गर्म करना: कागज की ऊष्मा पानी में स्थानांतरित हो जाती है, जिससे कागज का ताप नहीं बढ़ता और वह जलता नहीं।
  3. लोहे के हथौड़े पर कागज: लोहे की उच्च चालकता के कारण ऊष्मा फैल जाती है, कागज नहीं जलता।
  4. बर्तनों के हैंडल: लकड़ी या बैकेलाइट जैसे कुचालक पदार्थों के बने होते हैं ताकि उन्हें आसानी से पकड़ा जा सके।
  5. बर्फ को बोरे/भूसे से ढकना: बोरा/भूसा ऊष्मा के कुचालक होते हैं, जो वायुमंडल की ऊष्मा को बर्फ तक पहुँचने से रोकते हैं।
  6. ऊनी कपड़े: ऊन और उसके रेशों के बीच फँसी हवा दोनों ही ऊष्मा के कुचालक होते हैं, जो शरीर की ऊष्मा को बाहर जाने से रोकते हैं। गर्मियों में रेगिस्तान में ऊनी कपड़े बाहर की गर्मी से बचाते हैं।
📖परिभाषा

सुचालक: वे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने अंदर से आसानी से प्रवाहित होने देते हैं। कुचालक: वे पदार्थ जो ऊष्मा को अपने अंदर से आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते।

💡सुझाव

पारा एकमात्र द्रव है जो ऊष्मा का सुचालक है। इसे याद रखें!

थर्मस फ्लास्क की कार्यप्रणाली

थर्मस फ्लास्क
थर्मस फ्लास्क
चालन और संवहन से ऊष्मा का बचाव
चालन और संवहन से ऊष्मा का बचाव
विकिरण से ऊष्मा की हानि को रोकना
विकिरण से ऊष्मा की हानि को रोकना
थर्मस फ्लास्क के अन्य भाग और सुरक्षा
थर्मस फ्लास्क के अन्य भाग और सुरक्षा

थर्मस फ्लास्क एक विशेष प्रकार का कंटेनर है जिसे तरल पदार्थों को उनके प्रारंभिक तापमान पर लंबे समय तक बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह गर्म तरल पदार्थों को गर्म और ठंडे तरल पदार्थों को ठंडा रखता है।

थर्मस फ्लास्क की संरचना और ऊष्मा हानि को रोकने के तरीके:

  1. चालन और संवहन से बचाव:
  • इसमें दोहरी दीवार वाली पतली काँच की बोतल होती है।
  • इन दोनों दीवारों के बीच की हवा निकालकर निर्वात (वैक्यूम) कर दिया जाता है।
  • निर्वात में कोई माध्यम नहीं होता, इसलिए ऊष्मा का चालन और संवहन द्वारा स्थानांतरण संभव नहीं हो पाता।
  • कार्क या प्लास्टिक का ढक्कन: बोतल को ऊपर से बंद करने के लिए उपयोग किया जाता है, जो ऊष्मा के चालन और संवहन को रोकता है।
  1. विकिरण से बचाव:
  • दोहरी दीवार वाली काँच की बोतल की भीतरी और बाहरी सतहों पर चाँदी की पॉलिश की जाती है।
  • ये चमकदार सतहें ऊष्मा विकिरण को परावर्तित करती हैं।
  • यदि अंदर गर्म द्रव है, तो उसकी ऊष्मा अंदर ही परावर्तित हो जाती है (बाहर नहीं जाती)।
  • यदि ठंडा द्रव है, तो बाहर की ऊष्मा अंदर आने से परावर्तित हो जाती है (अंदर नहीं आती)।
  1. बाहरी आवरण और सुरक्षा:
  • काँच की बोतल को एक बाहरी आवरण (आमतौर पर प्लास्टिक या धातु) के अंदर रखा जाता है।
  • इसे सुरक्षित रखने के लिए स्प्रिंग या कार्क के आधार का उपयोग किया जाता है, जो बोतल को टूट-फूट से बचाता है और अतिरिक्त इन्सुलेशन प्रदान करता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार, थर्मस फ्लास्क में ऊष्मा का स्थानांतरण चालन, संवहन और विकिरण तीनों विधियों द्वारा रुक जाता है, जिससे अंदर रखे द्रव का तापमान लंबे समय तक अपरिवर्तित रहता है।

महत्त्वपूर्ण

थर्मस फ्लास्क ऊष्मा संचरण की तीनों विधियों (चालन, संवहन, विकिरण) को रोकने के सिद्धांत पर कार्य करता है।

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