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सममिति
Chhattisgarh · Class 7 · 🧮 Maths · Chapter 18

सममिति

सममिति की पहचानसममिति अक्षदर्पण रेखा2D आकृतियों में सममिति3D आकृतियों के फलक, किनारे और शीर्ष

अध्याय 'सममिति' छात्रों को उनके दैनिक जीवन में सममित आकृतियों की पहचान करना सिखाता है। इसमें सममिति अक्ष, दर्पण सममिति और विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों में सममिति की संख्या जैसे विषयों को शामिल किया गया है। छात्र 2D और 3D आकृतियों में सममिति को पहचानना सीखते हैं, जिससे उनकी स्थानिक तर्क क्षमता विकसित होती है। यह अध्याय छात्रों को अपने परिवेश में पैटर्न और संतुलन को समझने में मदद करता है, जो ज्यामिति की नींव के लिए महत्वपूर्ण है।

सममिति का परिचय

सममिति का परिचय
सममिति का परिचय

सममिति हमारे चारों ओर की वस्तुओं में एक संतुलित अनुपात और सुंदरता को दर्शाती है।

  • जब कोई आकृति इस प्रकार से व्यवस्थित हो कि उसके विभिन्न भाग एक-दूसरे से मेल खाते हों या एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हों, तो उसे सममित आकृति कहते हैं।
  • उदाहरण: फूल, तितलियाँ, इमारतें, रंगोली के डिजाइन।
  • सममिति हमें वस्तुओं को सुंदर और सुडौल बनाती हुई प्रतीत होती है।
  • यह अवधारणा गणित, विज्ञान, कला और वास्तुकला में महत्वपूर्ण है।
महत्त्वपूर्ण

सममिति का अर्थ है आकृति के भागों का संतुलन और अनुरूपता

सममिति अक्ष

सममिति अक्ष वह काल्पनिक या वास्तविक रेखा है जिस पर किसी आकृति को मोड़ने पर उसके दोनों भाग एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक लेते हैं।

  • इसे दर्पण रेखा भी कहते हैं, क्योंकि इस रेखा पर दर्पण रखने पर आकृति का एक भाग दूसरे भाग का प्रतिबिंब होता है।
  • एक आकृति में एक, दो, तीन या उससे भी अधिक सममिति अक्ष हो सकते हैं। कुछ आकृतियों में कोई सममिति अक्ष नहीं होता।
  • पहचानने का तरीका:
  1. आकृति को एक रेखा के अनुदिश मोड़ने का प्रयास करें।
  2. यदि दोनों भाग पूरी तरह से संपाती (एक-दूसरे पर फिट) हो जाते हैं, तो वह रेखा सममिति अक्ष है।
  3. दर्पण रखकर भी जांच की जा सकती है।
📖परिभाषा

सममिति अक्ष: वह रेखा जो एक आकृति को दो सर्वांगसम दर्पण प्रतिबिंब भागों में विभाजित करती है।

सममित आकृतियों की पहचान

किसी आकृति को सममित कहने के लिए उसमें कम से कम एक सममिति अक्ष होना आवश्यक है।

  • सममित आकृति: वह आकृति जिसे एक रेखा के अनुदिश मोड़ने पर उसके दोनों भाग एक-दूसरे पर पूरी तरह से संपाती हो जाते हैं।
  • असममित आकृति: वह आकृति जिसमें कोई सममिति अक्ष नहीं होता, अर्थात उसे किसी भी रेखा के अनुदिश मोड़ने पर उसके भाग एक-दूसरे पर संपाती नहीं होते।
  • पहचानने के चरण:
  1. दी गई आकृति का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें।
  2. संभावित सममिति अक्षों की कल्पना करें।
  3. मानसिक रूप से या कागज पर मोड़कर जांच करें कि क्या दोनों भाग पूरी तरह से मेल खाते हैं।
  • उदाहरण:
  • तितली: सममित (एक ऊर्ध्वाधर अक्ष)।
  • अंग्रेजी अक्षर 'A': सममित (एक ऊर्ध्वाधर अक्ष)।
  • मानव चेहरा: लगभग सममित (एक ऊर्ध्वाधर अक्ष)।
💡सुझाव

परीक्षा में आकृतियाँ दी जा सकती हैं और आपको सममिति अक्ष खींचने या सममित/असममित पहचानने के लिए कहा जा सकता है।

अक्षरों में सममिति

अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं के अक्षरों में सममिति देखी जा सकती है।

  • अंग्रेजी अक्षर:
  • एक ऊर्ध्वाधर सममिति अक्ष: A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y
  • एक क्षैतिज सममिति अक्ष: B, C, D, E, H, I, K, O, X
  • दो सममिति अक्ष (ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज): H, I, O, X
  • कोई सममिति अक्ष नहीं: F, G, J, L, N, P, Q, R, S, Z
  • हिंदी अक्षर:
  • कई हिंदी अक्षरों में भी सममिति होती है, जैसे 'अ', 'म', 'ह' (कुछ फोंट में)। यह फोंट पर निर्भर करता है।
  • छात्रों को विभिन्न अक्षरों को काटकर या लिखकर जांच करनी चाहिए।
🚧ग़लत धारणा

अक्षरों में सममिति की पहचान करते समय फोंट (लिखावट की शैली) का ध्यान रखें। कुछ फोंट में अक्षर सममित नहीं दिख सकते हैं।

स्याही के धब्बे से सममिति

यह एक सरल क्रियाकलाप है जिससे सममिति को आसानी से समझा जा सकता है।

  • विधि:
  1. एक कागज को बीच से मोड़ें।
  2. एक आधे भाग पर स्याही या रंग की कुछ बूंदें डालें।
  3. कागज को फिर से मोड़ें और दबाएं।
  4. कागज खोलने पर एक सममित आकृति प्राप्त होगी।
  • यह आकृति हमेशा सममित होगी क्योंकि मोड़ की रेखा ही उसका सममिति अक्ष होगी।
  • यह दर्शाता है कि कैसे एक साधारण प्रक्रिया से भी सममित पैटर्न बन सकते हैं।
याद रखें

स्याही के धब्बे से बनी आकृति में मोड़ की रेखा हमेशा सममिति अक्ष होती है

प्रकृति और कला में सममिति

सममिति केवल ज्यामितीय आकृतियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और कला में भी व्यापक रूप से पाई जाती है।

  • प्रकृति में:
  • पत्तियाँ: अधिकांश पत्तियों में एक मध्य-शिरा होती है जो सममिति अक्ष का काम करती है।
  • फूल: कई फूलों में रेडियल (घूर्णी) या द्विपक्षीय सममिति होती है।
  • जानवर: तितलियाँ, मानव शरीर, अधिकांश जानवरों में द्विपक्षीय सममिति होती है।
  • कला और वास्तुकला में:
  • रंगोली: भारतीय कला का एक रूप जिसमें अक्सर जटिल सममित पैटर्न होते हैं।
  • मेहंदी: हाथों पर लगाई जाने वाली मेहंदी के डिजाइन भी अक्सर सममित होते हैं।
  • इमारतें: कई ऐतिहासिक और आधुनिक इमारतों की संरचना में सममिति का उपयोग किया जाता है (जैसे ताजमहल)।
  • दीवार चित्र: पारंपरिक दीवार चित्रों में भी सममित डिजाइन देखे जा सकते हैं।
महत्त्वपूर्ण

सममिति सौंदर्य और संतुलन का प्रतीक है, इसलिए यह प्रकृति और कला दोनों में पाई जाती है।

एक से अधिक सममिति अक्ष

कुछ आकृतियों में एक से अधिक सममिति अक्ष होते हैं।

  • उदाहरण:
  • आयत: दो सममिति अक्ष (लंबाई और चौड़ाई के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ)।
  • वर्ग: चार सममिति अक्ष (दो भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ और दो विकर्ण)।
  • समबाहु त्रिभुज: तीन सममिति अक्ष (प्रत्येक शीर्ष से सामने वाली भुजा के मध्य-बिंदु तक की रेखा)।
  • वृत्त: अनंत सममिति अक्ष (केंद्र से होकर गुजरने वाला प्रत्येक व्यास)।
  • सम षटभुज: छह सममिति अक्ष।
  • जितने अधिक सममिति अक्ष होते हैं, आकृति उतनी ही अधिक 'सममित' मानी जाती है।
याद रखें

किसी आकृति में सममिति अक्षों की संख्या उसकी ज्यामितीय विशेषताओं पर निर्भर करती है। वृत्त में अनंत सममिति अक्ष होते हैं

दर्पण सममिति

दर्पण सममिति सममिति का एक विशेष रूप है जहाँ एक आकृति का एक भाग किसी दर्पण में देखने पर दूसरे भाग जैसा दिखाई देता है।

  • यदि किसी आकृति के सममिति अक्ष पर एक समतल दर्पण रखा जाए, तो आकृति का एक भाग दर्पण में दूसरे भाग के रूप में दिखाई देगा, जिससे पूरी आकृति पूर्ण प्रतीत होगी
  • यह अवधारणा कला, डिजाइन और यहां तक कि दैनिक जीवन में भी उपयोग की जाती है (जैसे आधा चेहरा पूरा करना)।
  • उदाहरण:
  • एक छाते का आधा हिस्सा दर्पण में रखने पर पूरा छाता दिखाई देता है।
  • अधूरी आकृति को दर्पण के सामने रखकर पूरा करना।
महत्त्वपूर्ण

दर्पण सममिति में, सममिति अक्ष दर्पण की स्थिति को दर्शाता है।

द्विविमीय आकृतियों में सममिति

विभिन्न द्विविमीय (2D) ज्यामितीय आकृतियों में सममिति अक्षों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है।

| आकृति | सममिति अक्षों की संख्या | सममिति अक्षों की प्रकृति | |:---------------|:-----------------------|:---------------------------------------------------------| | वर्ग | 4 | दो भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ, दो विकर्ण | | आयत | 2 | लंबाई और चौड़ाई के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ | | समबाहु त्रिभुज | 3 | प्रत्येक शीर्ष से सामने वाली भुजा के मध्य-बिंदु तक की रेखा | | समद्विबाहु त्रिभुज | 1 | असमान भुजा के मध्य-बिंदु से शीर्ष तक की रेखा | | विषमबाहु त्रिभुज | 0 | कोई नहीं | | वृत्त | अनंत | केंद्र से होकर गुजरने वाला प्रत्येक व्यास | | अर्धवृत्त | 1 | व्यास के मध्य-बिंदु से चाप के मध्य-बिंदु तक की रेखा | | सम पंचभुज | 5 | प्रत्येक शीर्ष से सामने वाली भुजा के मध्य-बिंदु तक की रेखा | | सम षटभुज | 6 | प्रत्येक शीर्ष से विपरीत शीर्ष तक की रेखाएँ, प्रत्येक भुजा के मध्य-बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएँ | | समांतर चतुर्भुज | 0 | कोई नहीं (जब तक यह आयत या समचतुर्भुज न हो) | | समचतुर्भुज | 2 | दोनों विकर्ण | | दीर्घवृत्त | 2 | दीर्घ अक्ष और लघु अक्ष |

  • यह तालिका विभिन्न आकृतियों में सममिति अक्षों की संख्या को संक्षेप में प्रस्तुत करती है।
💡सुझाव

विभिन्न आकृतियों में सममिति अक्षों की संख्या को याद रखना परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

कागज काटकर सममित डिजाइन

कागज काटने की तकनीक का उपयोग करके जटिल सममित डिजाइन बनाए जा सकते हैं।

  • विधि:
  1. एक वर्गाकार या आयताकार कागज लें।
  2. इसे एक या अधिक बार मोड़ें (जैसे पहले ऊपर से नीचे, फिर बाएं से दाएं)।
  3. मोड़े हुए कागज पर किनारे से कुछ डिजाइन काटें।
  4. कागज को खोलने पर एक सुंदर सममित पैटर्न प्राप्त होगा।
  • मोड़ों की संख्या और काटने के तरीके के आधार पर विभिन्न प्रकार की सममिति (जैसे 2-गुना, 4-गुना) प्राप्त की जा सकती है।
  • यह क्रियाकलाप सममिति की अवधारणा को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद करता है।
याद रखें

कागज को जितनी बार मोड़ा जाता है, उतनी ही अधिक बार सममिति अक्षों की संभावना बनती है।

त्रिविमीय आकृतियों का परिचय

हम अपने दैनिक जीवन में कई ऐसी वस्तुएँ देखते हैं जिनका आकार सपाट (द्विविमीय) नहीं होता, बल्कि वे स्थान घेरती हैं। इन्हें त्रिविमीय (3D) आकृतियाँ कहते हैं।

  • इन आकृतियों में लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई (या गहराई) तीनों विमाएँ होती हैं।
  • सामान्य उदाहरण:
  • घन: पासा, रुबिक क्यूब
  • घनाभ: ईंट, किताब, माचिस की डिब्बी
  • बेलन: पानी की बोतल, पाइप, पेंसिल
  • शंकु: आइसक्रीम कोन, जोकर की टोपी
  • गोला: गेंद, फुटबॉल, ग्लोब
  • त्रिविमीय आकृतियों का अध्ययन उनके गुणों जैसे फलक, किनारे और शीर्षों के आधार पर किया जाता है।
📖परिभाषा

त्रिविमीय आकृतियाँ: वे आकृतियाँ जिनमें लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई तीनों विमाएँ होती हैं।

फलक, किनारे और शीर्ष

त्रिविमीय आकृतियों को समझने के लिए उनके फलक, किनारे और शीर्षों को पहचानना महत्वपूर्ण है।

  • फलक (Face): त्रिविमीय आकृति की सपाट सतह। ये आमतौर पर बहुभुज (जैसे वर्ग, आयत, त्रिभुज) होते हैं।
  • उदाहरण: घन में 6 वर्गाकार फलक होते हैं। घनाभ में 6 आयताकार फलक होते हैं।
  • किनारा (Edge): दो फलक जिस रेखाखंड पर मिलते हैं, उसे किनारा कहते हैं।
  • उदाहरण: घन में 12 किनारे होते हैं। घनाभ में 12 किनारे होते हैं।
  • शीर्ष (Vertex): तीन या अधिक किनारे जिस बिंदु पर मिलते हैं, उसे शीर्ष कहते हैं।
  • उदाहरण: घन में 8 शीर्ष होते हैं। घनाभ में 8 शीर्ष होते हैं।

विभिन्न त्रिविमीय आकृतियों के गुणधर्म:

| आकृति | फलक (समतल/वक्र) | किनारे (सीधे/वक्र) | शीर्ष | |:-------|:---------------|:-------------------|:------| | घन | 6 समतल | 12 सीधे | 8 | | घनाभ | 6 समतल | 12 सीधे | 8 | | बेलन | 2 समतल, 1 वक्र | 2 वक्र | 0 | | शंकु | 1 समतल, 1 वक्र | 1 वक्र | 1 | | गोला | 1 वक्र | 0 | 0 |

  • यह जानकारी त्रिविमीय आकृतियों के वर्गीकरण और उनकी विशेषताओं को समझने में मदद करती है।
महत्त्वपूर्ण

त्रिविमीय आकृतियों के फलक, किनारे और शीर्षों की संख्या उन्हें पहचानने और वर्गीकृत करने में सहायक होती है।

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