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सांख्यिकी
Chhattisgarh · Class 7 · 🧮 Maths · Chapter 17

सांख्यिकी

आँकड़ेटैली विधिबारम्बारता सारणीदण्ड आरेखमाध्य (समान्तर माध्य)माध्यिका

सांख्यिकी अध्याय में, विद्यार्थी आँकड़ों को इकट्ठा करना, व्यवस्थित करना और प्रस्तुत करना सीखते हैं। इसमें टैली विधि का उपयोग करके बारम्बारता सारणी बनाना, दण्ड आरेख और चित्र आरेख के माध्यम से आँकड़ों का चित्रात्मक प्रदर्शन करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थी माध्य, माध्यिका और बहुलक जैसे केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों की गणना करना सीखते हैं, जो आँकड़ों का विश्लेषण करने में मदद करते हैं। यह अध्याय दैनिक जीवन में निर्णय लेने और विभिन्न घटनाओं की परिवर्तनशीलता को समझने के लिए सांख्यिकी के महत्व पर भी प्रकाश डालता है।

भूमिका और आँकड़ों का परिचय

सांख्यिकी गणित की वह शाखा है जो आँकड़ों के संग्रह, संगठन, विश्लेषण, व्याख्या और प्रस्तुति से संबंधित है। दैनिक जीवन में निर्णय लेने के लिए हमें अक्सर विभिन्न प्रकार की जानकारियों की आवश्यकता होती है।

  • आँकड़े (Data): ये वे आवश्यक संख्यात्मक जानकारियाँ होती हैं जिनकी आवश्यकता कोई निर्णय लेने के लिए होती है।
  • उदाहरण: कक्षा में छात्रों के पसंदीदा रंग, परीक्षा में प्राप्त अंक, जानवरों की संख्या आदि।
  • आँकड़ों का संग्रह: आँकड़ों को व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा करना।
  • टैली विधि (Tally Method): आँकड़ों को गिनने और व्यवस्थित करने की एक सरल विधि।
  • प्रत्येक अवलोकन के लिए एक खड़ी लकीर ('|') का उपयोग किया जाता है।
  • प्रत्येक पाँचवें अवलोकन के लिए, पिछली चार खड़ी लकीरों को काटते हुए एक तिरछी लकीर लगाई जाती है (जैसे '||||' के लिए '||||/'). यह गिनने में आसानी प्रदान करता है।
  • बारम्बारता (Frequency): किसी विशेष मान या अवलोकन की संख्या जो एक डेटा सेट में कितनी बार आता है।
  • बारम्बारता सारणी (Frequency Table): एक सारणी जो विभिन्न मानों और उनकी संगत बारम्बारताओं को दर्शाती है।

टैली विधि के चरण:

  1. सभी संभावित मानों को सूचीबद्ध करें।
  2. प्रत्येक मान के लिए टैली चिह्न कॉलम में खड़ी लकीरें लगाएं।
  3. प्रत्येक पाँचवें चिह्न को तिरछी रेखा से काटें।
  4. टैली चिह्नों को गिनकर बारम्बारता लिखें।
📖परिभाषा

आँकड़े (Data): वे संख्यात्मक जानकारियाँ जो किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए एकत्र की जाती हैं।

महत्त्वपूर्ण

टैली विधि आँकड़ों को व्यवस्थित करने और उनकी बारम्बारता ज्ञात करने का एक सरल और प्रभावी तरीका है।

आँकड़ों का चित्रात्मक प्रदर्शन (चित्र आरेख और दण्ड आरेख)

खेलों की लोकप्रियता का चित्र आरेख
खेलों की लोकप्रियता का चित्र आरेख
खेलों की लोकप्रियता का दण्ड आरेख
खेलों की लोकप्रियता का दण्ड आरेख

आँकड़ों को केवल सारणी में प्रस्तुत करने के बजाय, उन्हें चित्रों या आरेखों के माध्यम से प्रदर्शित करना अधिक आकर्षक और समझने में आसान होता है।

चित्र आरेख (Pictograph)

  • परिभाषा: आँकड़ों को चित्रों या प्रतीकों का उपयोग करके प्रदर्शित करना चित्र आरेख कहलाता है।
  • विशेषताएँ:
  • प्रत्येक चित्र या प्रतीक एक निश्चित संख्यात्मक मान का प्रतिनिधित्व करता है।
  • चित्रों को देखकर आँकड़ों की तुलना करना आसान होता है।
  • यह आँकड़ों को सरल और मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करता है
  • सीमाएँ:
  • बड़े आँकड़ों के सेट के लिए बहुत सारे चित्रों की आवश्यकता हो सकती है, जिससे यह अव्यावहारिक हो जाता है।
  • आँकड़ों के आंशिक मानों को दर्शाना मुश्किल हो सकता है।

दण्ड आरेख (Bar Graph)

  • परिभाषा: दण्ड आरेख आँकड़ों को समान चौड़ाई वाले आयताकार दण्डों (बार्स) के रूप में प्रस्तुत करता है। इन दण्डों की ऊँचाई या लम्बाई उनके संगत मानों के समानुपाती होती है।
  • विशेषताएँ:
  • दण्डों के बीच की दूरी समान होती है।
  • दण्डों को क्षैतिज (Horizontal) या उर्ध्वाधर (Vertical) दोनों तरह से बनाया जा सकता है।
  • यह विभिन्न श्रेणियों के आँकड़ों की तुलना करने में बहुत उपयोगी है।
  • इसे देखकर तुरंत निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं (जैसे सबसे अधिक/कम मान)।
  • दण्ड आरेख बनाने के चरण:
  1. अक्ष खींचना: एक क्षैतिज अक्ष (X-अक्ष) और एक उर्ध्वाधर अक्ष (Y-अक्ष) खींचें।
  2. पैमाना चुनना: Y-अक्ष पर आँकड़ों के मानों को दर्शाने के लिए एक उपयुक्त पैमाना चुनें। यह सुनिश्चित करें कि सभी मान आरेख पर फिट हो सकें।
  3. दण्ड बनाना: प्रत्येक श्रेणी के लिए, चुने हुए पैमाने के अनुसार एक दण्ड (आयताकार बार) बनाएं। दण्डों की चौड़ाई समान होनी चाहिए और उनके बीच समान दूरी होनी चाहिए।
  4. लेबल लगाना: अक्षों पर और दण्डों के नीचे/बगल में उचित लेबल लगाएं।
  5. शीर्षक देना: आरेख को एक उपयुक्त शीर्षक दें।
  • दण्ड आरेख के प्रकार:
  • उर्ध्वाधर दण्ड आरेख (Vertical Bar Graph): दण्ड उर्ध्वाधर होते हैं (ऊँचाई मान दर्शाती है)।
  • क्षैतिज दण्ड आरेख (Horizontal Bar Graph): दण्ड क्षैतिज होते हैं (लम्बाई मान दर्शाती है)।
💡सुझाव

दण्ड आरेख बनाते समय पैमाने का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। गलत पैमाना आरेख को भ्रामक बना सकता है या उसे कॉपी पर फिट होने से रोक सकता है।

🚧ग़लत धारणा

चित्र आरेख में, प्रत्येक चित्र का मान स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। दण्ड आरेख में, दण्डों की चौड़ाई समान और उनके बीच की दूरी भी समान होनी चाहिए।

केंद्रीय प्रवृत्ति के माप: समान्तर माध्य, बहुलक, माध्यिका

केंद्रीय प्रवृत्ति के माप वे मान होते हैं जो आँकड़ों के सेट के केंद्र या औसत मान को दर्शाते हैं। ये आँकड़ों के पूरे सेट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

समान्तर माध्य (Mean)

  • परिभाषा: समान्तर माध्य (या औसत) आँकड़ों के सभी मानों के योग को उनकी कुल संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। इसे 'M' या '$\bar{x}$' से दर्शाया जाता है।
  • सूत्र:

$$ \text{समान्तर माध्य (M)} = \frac{\text{प्रेक्षणों का योग}}{\text{प्रेक्षणों की संख्या}} $$ या $$ \text{M} = \frac{\sum x}{N} $$ जहाँ, $\sum x$ = सभी प्रेक्षणों का योग, N = प्रेक्षणों की कुल संख्या।

  • उपयोगिता: यह आँकड़ों के औसत प्रदर्शन या केंद्रीय मान को दर्शाता है।

बहुलक (Mode)

  • परिभाषा: बहुलक आँकड़ों के सेट में वह मान होता है जो सबसे अधिक बार आता है (अर्थात, जिसकी बारम्बारता सर्वाधिक होती है)। इसे 'Mo' से दर्शाया जाता है।
  • विशेषताएँ:
  • यह आँकड़ों में सबसे 'लोकप्रिय' या 'प्रचलित' मान को दर्शाता है।
  • एक डेटा सेट में एक से अधिक बहुलक हो सकते हैं (द्वि-बहुलक, त्रि-बहुलक)।
  • यदि सभी मान समान बार आते हैं, तो कोई बहुलक नहीं होता।
  • उपयोगिता: इसका उपयोग अक्सर पसंदीदा वस्तुओं, सबसे अधिक बिकने वाले आकार आदि को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

माध्यिका (Median)

  • परिभाषा: माध्यिका आँकड़ों के सेट का मध्य मान होता है जब आँकड़ों को आरोही (बढ़ते क्रम) या अवरोही (घटते क्रम) में व्यवस्थित किया जाता है। इसे 'Ma' से दर्शाया जाता है।
  • माध्यिका ज्ञात करने के चरण:
  1. व्यवस्थित करना: दिए गए आँकड़ों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
  2. पदों की संख्या (N) ज्ञात करना: आँकड़ों में कुल पदों की संख्या गिनें।
  3. सूत्र का प्रयोग:
  • जब N विषम हो: माध्यिका = $$\left(\frac{N+1}{2}\right)^{\text{वाँ पद का मान}}$$
  • जब N सम हो: माध्यिका = $$\frac{\left(\frac{N}{2}\right)^{\text{वाँ पद का मान}} + \left(\frac{N}{2} + 1\right)^{\text{वाँ पद का मान}}}{2}$$
  • उपयोगिता: माध्यिका आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करती है, जहाँ आधे मान माध्यिका से कम और आधे मान माध्यिका से अधिक होते हैं। यह अत्यधिक बड़े या छोटे मानों (आउटलायर्स) से कम प्रभावित होती है।
🧮सूत्र

समान्तर माध्य: $M = \frac{\sum x}{N}$ माध्यिका (N विषम): $Ma = \left(\frac{N+1}{2}\right)^{\text{वाँ पद}}$ माध्यिका (N सम): $Ma = \frac{\left(\frac{N}{2}\right)^{\text{वाँ पद}} + \left(\frac{N}{2} + 1\right)^{\text{वाँ पद}}}{2}$ बहुलक: सबसे अधिक बार आने वाला मान।

याद रखें

माध्यिका ज्ञात करने के लिए आँकड़ों को हमेशा आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना अनिवार्य है। बहुलक के लिए क्रमबद्धता आवश्यक नहीं है, लेकिन यह गणना को आसान बनाती है।

परिवर्तनशीलता और संभावना का परिचय

प्रकृति और हमारे दैनिक जीवन में निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। इन परिवर्तनों को हम दो मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं:

निश्चित और क्रमिक परिवर्तन

  • ये वे परिवर्तन हैं जो एक निश्चित दिशा में होते हैं और जिनकी पुनरावृत्ति अनुमानित होती है
  • उदाहरण:
  • बाल्यावस्था, युवावस्था, वृद्धावस्था का क्रम।
  • बच्चों की ऊँचाई और वजन का बढ़ना।
  • सूर्य का उदय और अस्त होना।
  • दिन-रात का होना।
  • ऋतुओं का परिवर्तन (गर्मी के बाद वर्षा)।
  • इन परिवर्तनों के परिणाम का निश्चित अनुमान लगाया जा सकता है

अनिश्चित परिवर्तन (संभावना)

  • ये वे परिवर्तन हैं जिनके परिणाम का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता, केवल उनकी संभावना व्यक्त की जा सकती है।
  • उदाहरण:
  • बादल छाने पर वर्षा का होना (हो भी सकती है, नहीं भी)।
  • किसी सिक्के को उछालने पर चित या पट आना।
  • पासे को उछालने पर कोई निश्चित संख्या आना।
  • ताश के पत्तों में से कोई विशेष पत्ता निकलना।
  • कई रंगों की गेंदों में से एक निश्चित रंग की गेंद का निकलना।
  • इन घटनाओं में, पिछले परिणाम अगले परिणाम को प्रभावित नहीं करते (जैसे सिक्के की पिछली उछाल का अगली उछाल पर कोई असर नहीं)।
  • संभावित परिणाम: किसी घटना के घटित होने पर प्राप्त होने वाले सभी संभव परिणाम।
  • सिक्के की उछाल: चित, पट (2 संभावित परिणाम)।
  • पासे की उछाल: 1, 2, 3, 4, 5, 6 (6 संभावित परिणाम)।
  • गेंद निकालना: यदि 4 अलग-अलग रंगों की गेंदें हैं, तो 4 संभावित परिणाम।
  • निष्कर्ष: घटनाओं के आधार पर उनके संभावित परिणामों की संख्या निर्धारित होती है। यह अवधारणा हमें प्रायिकता (Probability) की ओर ले जाती है, जो उच्च कक्षाओं में विस्तार से पढ़ाई जाती है।
📖परिभाषा

संभावित परिणाम: किसी घटना के होने पर प्राप्त होने वाले सभी संभव नतीजे।

महत्त्वपूर्ण

अनिश्चित घटनाओं में, हम केवल संभावना व्यक्त कर सकते हैं, निश्चित परिणाम नहीं बता सकते

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