आरेख (GRAPH)
यह अध्याय छात्रों को आरेख (ग्राफ) की मूल अवधारणाओं से परिचित कराता है, जिसमें किसी बिंदु की स्थिति को संख्या युग्म (निर्देशांक) द्वारा दर्शाना शामिल है। इसमें कार्तीय तल, X और Y अक्षों की पहचान, मूल बिंदु के निर्देशांक, और विभिन्न चतुर्थांशों में बिंदुओं की स्थिति को समझाया गया है। छात्र संख्या और उनके गुणज, वर्ग की भुजा और परिमाप, तथा समय और साधारण ब्याज जैसे संबंधों के बीच आरेख खींचना सीखते हैं। अध्याय में आरेखों को पढ़ना और उनसे जानकारी निकालना भी शामिल है, जिससे छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं को ग्राफिक रूप से समझने और हल करने में मदद मिलती है।
स्थिति का निर्धारण
किसी वस्तु या स्थान की स्थिति को बताने के लिए हमें संदर्भ बिंदुओं (reference points) की आवश्यकता होती है।
- कक्षा में सीट की स्थिति:
- हम पंक्ति संख्या और प्रारंभ से स्थान संख्या का उपयोग करके किसी छात्र की सीट की स्थिति बता सकते हैं।
- उदाहरण: 'चौथी पंक्ति में प्रारंभ से दूसरी स्थान पर'।
- यह एक विशिष्ट स्थान पर पहुँचने में मदद करता है और भ्रम से बचाता है।
- नक्शे पर रास्ता ढूँढना:
- नक्शे पर किसी स्थान तक पहुँचने के लिए हमें दिशाओं और दूरी का उपयोग करना होता है।
- एक प्रारंभिक बिंदु से शुरू करके, निश्चित दिशाओं में निश्चित दूरी तय करते हुए गंतव्य तक पहुँचते हैं।
- यह किसी भी बिंदु की स्थिति को सटीक रूप से निर्धारित करने का एक व्यवस्थित तरीका है।
- स्थिति बताने के लिए आवश्यक जानकारी:
- अक्सर एक से अधिक जानकारी की आवश्यकता होती है (उदाहरण: दिशा और दूरी)।
- यह हमें एक संदर्भ बिंदु से किसी अन्य बिंदु तक पहुँचने में मदद करता है।
- क्रियाकलाप 1 से सीख:
- चौक से मकानों तक पहुँचने के लिए सबसे कम दूरी का रास्ता चुनना।
- केवल एक बार मुड़कर या बिना मुड़े रेखा पर चलना।
- यह हमें दिशाओं और दूरियों के संयोजन से स्थिति निर्धारित करने का अभ्यास कराता है।
उदाहरण:
- मकान A: चौक से पूर्व की ओर एक खाना (1 इकाई)
- मकान C: चौक से पश्चिम की ओर 3 खाने फिर दक्षिण की ओर 2 खाने (कुल 5 खाने)।
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किसी भी वस्तु की स्थिति बताने के लिए कम से कम दो स्वतंत्र जानकारियों की आवश्यकता होती है, जैसे दिशा और दूरी या दो दूरियाँ।
युग्म द्वारा स्थिति दर्शाना
गणित में, किसी बिंदु की स्थिति को दर्शाने के लिए हम क्रमित युग्म (ordered pair) का उपयोग करते हैं।
- क्रमित युग्म का स्वरूप: इसे \((x, y)\) के रूप में लिखा जाता है।
xपहला मान होता है (जैसे क्षैतिज दिशा में दूरी)।yदूसरा मान होता है (जैसे ऊर्ध्वाधर दिशा में दूरी)।
- क्रम का महत्व: क्रमित युग्म में मानों का क्रम महत्वपूर्ण होता है।
- \((30, 20)\) और \((20, 30)\) दो अलग-अलग स्थितियाँ दर्शाते हैं।
- उदाहरण: विद्यालय के झंडे की स्थिति (चित्र 10.3)
- केन्द्र से झंडे B तक पहुँचने के लिए:
- मोहन: पूर्व में 30 मीटर, फिर उत्तर में 20 मीटर।
- लिली: उत्तर में 20 मीटर, फिर पूर्व में 30 मीटर।
- दोनों ही मामलों में, झंडे B की स्थिति को (30 मीटर, 20 मीटर) या संक्षेप में (30, 20) से दर्शाया जाता है।
- यहाँ, 30 पूर्व की ओर दूरी और 20 उत्तर की ओर दूरी को दर्शाता है।
- अन्य झंडों की स्थिति (चित्र 10.3 के आधार पर):
- कक्षा 5वीं का झंडा (A): पूर्व की ओर 30 मीटर, उत्तर की ओर 20 मीटर $\rightarrow$ (30, 20) (यह NCERT के चित्र में B है, लेकिन उदाहरण में A के रूप में दिया गया है। हम उदाहरण का पालन करेंगे)
- कक्षा 8वीं का झंडा (B): पूर्व की ओर 30 मीटर, उत्तर की ओर 20 मीटर $\rightarrow$ (30, 20)
- कक्षा 6वीं का झंडा (C): पश्चिम की ओर 30 मीटर, दक्षिण की ओर 20 मीटर $\rightarrow$ (-30, -20)
- कक्षा 7वीं का झंडा (D): पूर्व की ओर 30 मीटर, दक्षिण की ओर 20 मीटर $\rightarrow$ (30, -20)
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क्रमित युग्म (Ordered Pair): दो संख्याओं का एक युग्म जिसमें संख्याओं का क्रम महत्वपूर्ण होता है। इसे \((x, y)\) के रूप में लिखा जाता है, जहाँ \(x\) पहला निर्देशांक और \(y\) दूसरा निर्देशांक होता है।
संख्या रेखाएँ और स्थिति निरूपण
स्थिति निरूपण के लिए हम दो परस्पर लंबवत संख्या रेखाओं का उपयोग करते हैं।
- संख्या रेखा का परिचय:
- एक सीधी रेखा जिस पर संख्याओं को बराबर दूरी पर अंकित किया जाता है।
- इसमें एक केंद्र बिंदु होता है जिसे शून्य (0) कहते हैं।
- शून्य के दाईं ओर धनात्मक संख्याएँ और बाईं ओर ऋणात्मक संख्याएँ होती हैं।
- निर्देशांक प्रणाली में संख्या रेखाएँ:
- एक क्षैतिज (आड़ी) संख्या रेखा (पूर्व-पश्चिम)।
- एक ऊर्ध्वाधर (खड़ी) संख्या रेखा (उत्तर-दक्षिण)।
- दोनों संख्या रेखाएँ एक दूसरे को मूल बिंदु (Origin) पर काटती हैं।
- दिशाओं का निर्धारण:
- क्षैतिज संख्या रेखा (X-अक्ष):
- 0 के दाईं ओर (पूर्व) $\rightarrow$ धनात्मक \((+)\) दिशा।
- 0 के बाईं ओर (पश्चिम) $\rightarrow$ ऋणात्मक \((-\)) दिशा।
- ऊर्ध्वाधर संख्या रेखा (Y-अक्ष):
- 0 के ऊपर (उत्तर) $\rightarrow$ धनात्मक \((+)\) दिशा।
- 0 के नीचे (दक्षिण) $\rightarrow$ ऋणात्मक \((-\)) दिशा।
- संख्या युग्म द्वारा स्थिति निरूपण (चित्र 10.4 के आधार पर):
- 8वीं का झंडा: \((30, 20)\) (पूर्व में 30, उत्तर में 20)
- 5वीं का झंडा: \((-30, 20)\) (पश्चिम में 30, उत्तर में 20)
- 6वीं का झंडा: \((-30, -20)\) (पश्चिम में 30, दक्षिण में 20)
- 7वीं का झंडा: \((30, -20)\) (पूर्व में 30, दक्षिण में 20)
- मूल बिंदु की स्थिति:
- केन्द्र की स्थिति को \((0, 0)) से दर्शाया जाता है।
- यह वह बिंदु है जहाँ दोनों अक्ष एक दूसरे को काटते हैं।
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किसी समतल में एक बिंदु की स्थिति को एक क्रमित युग्म \((x, y)\) द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ \(x\) x-निर्देशांक और \(y\) y-निर्देशांक होता है।
निर्देशांक अक्ष और कार्तीय तल
किसी समतल में बिंदुओं की स्थिति को दर्शाने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रणाली को निर्देशांक ज्यामिति कहते हैं।
- निर्देश अक्ष (Coordinate Axes):
- ये वे दो परस्पर लंबवत संख्या रेखाएँ होती हैं जो एक तल में किसी बिंदु की स्थिति को परिभाषित करने के लिए उपयोग की जाती हैं।
- X-अक्ष (क्षैतिज निर्देश अक्ष): इसे \(XX'\) से दर्शाते हैं। इसे भुज-अक्ष (Abscissa-axis) भी कहते हैं।
- Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर निर्देश अक्ष): इसे \(YY'\) से दर्शाते हैं। इसे कोटि-अक्ष (Ordinate-axis) भी कहते हैं।
- कार्तीय तल (Cartesian Plane):
- वह समतल जिस पर निर्देशांक अक्ष (X-अक्ष और Y-अक्ष) स्थित होते हैं, उसे कार्तीय तल या निर्देशांक तल कहते हैं।
- इस प्रणाली को फ्रांसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक रेने डी कार्त (René Descartes) ने विकसित किया था, उन्हीं के नाम पर इसे कार्तीय तल कहा जाता है।
- यह तल दो अक्षों द्वारा चार चतुर्थांशों (Quadrants) में विभाजित होता है।
- निर्देश अंक (Coordinates):
- किसी बिंदु की स्थिति को दर्शाने वाली संख्याओं के जोड़े को निर्देशांक कहते हैं।
- ये हमेशा क्रमित युग्म \((x, y)\) के रूप में लिखे जाते हैं।
- X-निर्देशांक (भुज): क्रमित युग्म में पहली संख्या \((x)\) को X-निर्देशांक कहते हैं। यह बिंदु की Y-अक्ष से क्षैतिज दूरी बताती है।
- Y-निर्देशांक (कोटि): क्रमित युग्म में दूसरी संख्या \((y)\) को Y-निर्देशांक कहते हैं। यह बिंदु की X-अक्ष से ऊर्ध्वाधर दूरी बताती है।
उदाहरण: बिंदु \((30, 20)\) में,
- 30 X-निर्देशांक (भुज) है।
- 20 Y-निर्देशांक (कोटि) है।
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मूल बिंदु (Origin): वह बिंदु जहाँ X-अक्ष और Y-अक्ष एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करते हैं। इसके निर्देशांक हमेशा (0, 0) होते हैं।
कार्तीय तल के चार चतुर्थांश होते हैं:
- प्रथम चतुर्थांश (I): \((+, +)\)
- द्वितीय चतुर्थांश (II): \((-, +)\)
- तृतीय चतुर्थांश (III): \((-, -)\)
- चतुर्थ चतुर्थांश (IV): \((+, -)\)
निर्देशांक तल पर बिन्दुओं की स्थिति
किसी बिंदु को निर्देशांक तल पर दर्शाना या उसके निर्देशांक ज्ञात करना एक महत्वपूर्ण कौशल है।
- X-अक्ष पर स्थित बिंदु की स्थिति:
- X-अक्ष पर स्थित किसी भी बिंदु का Y-निर्देशांक हमेशा शून्य होता है।
- उदाहरण: बिंदु \(A(30, 0)\) का अर्थ है कि यह X-अक्ष पर मूल बिंदु से 30 इकाई की दूरी पर है।
- \(A(6,0)\) का मतलब है कि यह X-अक्ष पर मूल बिंदु से 6 इकाई दाईं ओर है।
- Y-अक्ष पर स्थित बिंदु की स्थिति:
- Y-अक्ष पर स्थित किसी भी बिंदु का X-निर्देशांक हमेशा शून्य होता है।
- उदाहरण: बिंदु \(C(0, 20)\) का अर्थ है कि यह Y-अक्ष पर मूल बिंदु से 20 इकाई की दूरी पर है।
- \(B(0, -4)\) का मतलब है कि यह Y-अक्ष पर मूल बिंदु से 4 इकाई नीचे की ओर है।
- मूल बिंदु (Origin):
- मूल बिंदु के निर्देशांक हमेशा \((0,0)) होते हैं।
- यह कार्तीय तल का केंद्र होता है।
- तल में बिंदु \(P(x,y)\) दर्शाना (आलेखन):
- मूल बिंदु \((0,0))\) से शुरू करें।
- X-निर्देशांक \((x))\) के लिए:
- यदि \(x\) धनात्मक है, तो X-अक्ष पर दाईं ओर \(x\) इकाई चलें।
- यदि \(x\) ऋणात्मक है, तो X-अक्ष पर बाईं ओर \(x\) इकाई चलें।
- Y-निर्देशांक \((y))\) के लिए:
- उस बिंदु से, यदि \(y\) धनात्मक है, तो Y-अक्ष के समानांतर ऊपर की ओर \(y\) इकाई चलें।
- यदि \(y\) ऋणात्मक है, तो Y-अक्ष के समानांतर नीचे की ओर \(y\) इकाई चलें।
- जहाँ आप पहुँचते हैं, वही बिंदु \(P(x,y)\) की स्थिति होती है।
उदाहरण:
- बिंदु \(P(4,3))\) दर्शाना:
- मूल बिंदु से X-अक्ष पर 4 इकाई दाईं ओर चलें।
- वहाँ से Y-अक्ष के समानांतर 3 इकाई ऊपर की ओर चलें।
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- बिंदु \(Q(-2,5))\) दर्शाना:
- मूल बिंदु से X-अक्ष पर 2 इकाई बाईं ओर चलें।
- वहाँ से Y-अक्ष के समानांतर 5 इकाई ऊपर की ओर चलें।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch10_t5_scene5]
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हमेशा पहले X-निर्देशांक (क्षैतिज) और फिर Y-निर्देशांक (ऊर्ध्वाधर) को देखें। क्रम बदलने से बिंदु की स्थिति बदल जाती है।
बिन्दुओं का आलेखन और निर्देशांक ज्ञात करना
कार्तीय तल पर बिंदुओं को आलेखित करना और आलेखित बिंदुओं के निर्देशांक ज्ञात करना एक दूसरे के पूरक हैं।
- बिन्दुओं का आलेखन (Plotting Points):
- किसी बिंदु \((x, y))\) को कार्तीय तल पर आलेखित करने के लिए:
- X-अक्ष पर मूल बिंदु से \(x\) इकाई दूरी तय करें (धनात्मक \(x\) के लिए दाईं ओर और ऋणात्मक \(x\) के लिए बाईं ओर)।
- फिर, उस बिंदु से Y-अक्ष के समानांतर \(y\) इकाई दूरी तय करें (धनात्मक \(y\) के लिए ऊपर की ओर और ऋणात्मक \(y\) के लिए नीचे की ओर)।
- जहाँ आप पहुँचते हैं, वही बिंदु \((x, y))\) होता है।
- आलेखित बिन्दु के निर्देशांक ज्ञात करना:
- किसी आलेखित बिंदु के निर्देशांक ज्ञात करने के लिए:
- उस बिंदु से X-अक्ष पर एक लंब खींचें। जहाँ यह लंब X-अक्ष को काटता है, वह बिंदु का x-निर्देशांक (भुज) होता है।
- इसी प्रकार, उस बिंदु से Y-अक्ष पर एक लंब खींचें। जहाँ यह लंब Y-अक्ष को काटता है, वह बिंदु का y-निर्देशांक (कोटि) होता है।
- इन दोनों मानों को क्रम से \((x, y))\) के रूप में लिखने पर बिंदु के निर्देशांक प्राप्त होते हैं।
क्रियाकलाप 2 से उदाहरण (चित्र 10.6):
- बिंदु H के निर्देशांक ज्ञात करना:
- H से X-अक्ष पर लंब खींचने पर, यह 2.5 पर काटता है $\rightarrow$ X-निर्देशांक = 2.5
- H से Y-अक्ष पर लंब खींचने पर, यह -3 पर काटता है $\rightarrow$ Y-निर्देशांक = -3
- अतः H के निर्देशांक \((2.5, -3)) हैं।
- बिंदु K के निर्देशांक ज्ञात करना:
- K, Y-अक्ष पर स्थित है।
- X-अक्ष की दिशा में दूरी = 0
- Y-अक्ष की दिशा में दूरी = 2
- अतः K के निर्देशांक \((0, 2)) हैं।
- बिंदु L के निर्देशांक ज्ञात करना:
- L से X-अक्ष पर लंब खींचने पर, यह -3 पर काटता है $\rightarrow$ X-निर्देशांक = -3
- L से Y-अक्ष पर लंब खींचने पर, यह 4 पर काटता है $\rightarrow$ Y-निर्देशांक = 4
- अतः L के निर्देशांक \((-3, 4)) हैं।
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परीक्षा में ग्राफ पेपर पर बिंदु आलेखित करते समय और निर्देशांक ज्ञात करते समय सटीकता बहुत महत्वपूर्ण है। पेंसिल और स्केल का सही उपयोग करें।
आलेख में पैमाना
आलेख खींचते समय, विशेषकर जब आंकड़े बड़े या छोटे हों, तो उचित पैमाना (मापनी) चुनना बहुत महत्वपूर्ण होता है।
- पैमाना क्या है?
- पैमाना एक अनुपात होता है जो ग्राफ पेपर पर एक इकाई की दूरी को वास्तविक दुनिया के एक निश्चित मान के बराबर दर्शाता है।
- इसका उपयोग तब किया जाता है जब हमें बहुत बड़े या बहुत छोटे आँकड़ों को एक सीमित स्थान (जैसे ग्राफ पेपर) पर दिखाना होता है।
- पैमाना क्यों आवश्यक है?
- यह हमें आँकड़ों को ग्राफ पेपर की सीमाओं के भीतर फिट करने में मदद करता है।
- उचित पैमाने के बिना, आँकड़े या तो बहुत छोटे और अस्पष्ट होंगे, या इतने बड़े होंगे कि ग्राफ पेपर पर फिट नहीं हो पाएंगे।
- सही पैमाना चुनने से ग्राफ स्पष्ट, सटीक और समझने में आसान बनता है।
- पैमाना कैसे चुनें और लिखें?
- पहले आँकड़ों की न्यूनतम और अधिकतम सीमा का निर्धारण करें।
- ग्राफ पेपर पर उपलब्ध स्थान को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक अक्ष के लिए एक उपयुक्त पैमाना चुनें।
- पैमाना आमतौर पर इस प्रकार लिखा जाता है:
- 'X-अक्ष पर 1 इकाई = (मान)'
- 'Y-अक्ष पर 1 इकाई = (मान)'
उदाहरण: गाँव की जनसंख्या का आलेख (चित्र 10.8)
- जनसंख्या के आंकड़े 500 से 1000 तक हैं, जो सीधे ग्राफ पेपर पर दर्शाना मुश्किल है।
- चुना गया पैमाना:
- X-अक्ष पर 10 छोटे खाने = 1 वर्ष
- Y-अक्ष पर 10 छोटे खाने = 100 (जनसंख्या)
- इसका अर्थ है कि 500 की जनसंख्या के लिए Y-अक्ष पर 50 छोटे खाने या 5 बड़े खाने लेने होंगे।
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ग्राफ बनाते समय हमेशा पैमाना स्पष्ट रूप से लिखें। यदि पैमाना नहीं लिखा जाता है, तो आपके अंक काटे जा सकते हैं।
विभिन्न संबंधों का आलेखीय निरूपण
आलेखीय निरूपण गणितीय संबंधों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की एक विधि है। यह डेटा को समझने और पैटर्न को पहचानने में सहायक होता है।
- आलेख के घटक:
- X-अक्ष (क्षैतिज): स्वतंत्र चर (independent variable) को दर्शाने के लिए।
- Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर): आश्रित चर (dependent variable) को दर्शाने के लिए।
- संख्या एवं उसके गुणज का आलेख (चित्र 10.7):
- संबंध: \(Y = 2X\) (Y, X का दोगुना है)
- आलेखन:
- X-अक्ष पर संख्या \(X\) को लें।
- Y-अक्ष पर उसका गुणज \(2X\) को लें।
- उदाहरण बिंदु: \((1,2), (2,4), (3,6), (-1,-2), (-4,-8)\)
- इन बिंदुओं को प्लॉट करने पर एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है।
- यह दर्शाता है कि \(Y\) और \(X\) के बीच सीधा आनुपातिक संबंध है।
- वर्ग की भुजा एवं परिमाप का आलेख (चित्र 10.9):
- संबंध: वर्ग का परिमाप \(y = 4x\) (जहाँ \(x\) वर्ग की भुजा है)
- आलेखन:
- X-अक्ष पर भुजा की लंबाई \((x))\) को लें।
- Y-अक्ष पर परिमाप \((y))\) को लें।
- उदाहरण बिंदु: \((1,4), (2,8), (3,12), (4,16)\)
- इन बिंदुओं को प्लॉट करने पर एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है।
- यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे भुजा बढ़ती है, परिमाप भी उसी अनुपात में बढ़ता है।
- समय तथा साधारण ब्याज का आलेख (चित्र 10.10):
- संबंध: साधारण ब्याज \(= \frac{\text{मूलधन} \times \text{दर} \times \text{समय}}{100}\)
- यदि मूलधन और दर नियत हों, तो साधारण ब्याज \(= K \times \text{समय}\) (जहाँ \(K\) नियतांक है)।
- अर्थात्, साधारण ब्याज समय के अनुक्रमानुपाती होता है।
- आलेखन:
- X-अक्ष पर समय को लें।
- Y-अक्ष पर साधारण ब्याज को लें।
- उदाहरण बिंदु (मूलधन 1000 रु., दर 5%): \((1,50), (2,100), (3,150), (4,200), (5,250)\)
- इन बिंदुओं को प्लॉट करने पर एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है।
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यदि दो चरों के बीच अनुक्रमानुपाती संबंध हो, तो उनके मध्य प्राप्त आलेख हमेशा एक सरल रेखा होती है जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है। इसे रैखिक आलेख (Linear Graph) कहते हैं।
आलेख को पढ़ना
आलेख केवल बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि उनसे जानकारी निकालने और विश्लेषण करने के लिए भी महत्वपूर्ण होते हैं।
- आलेख से जानकारी कैसे निकालें?
- सबसे पहले, आलेख के अक्षों (X-अक्ष और Y-अक्ष) पर अंकित राशियों और उनके पैमानों को ध्यान से समझें।
- आलेख पर प्रत्येक बिंदु एक विशिष्ट निर्देशांक युग्म \((x, y))\) का प्रतिनिधित्व करता है।
- किसी विशेष \(x\) मान के लिए \(y\) मान ज्ञात करने के लिए, \(x\)-अक्ष पर उस मान का पता लगाएँ, फिर वहाँ से Y-अक्ष के समानांतर आलेख तक जाएँ, और फिर आलेख से X-अक्ष के समानांतर Y-अक्ष तक जाएँ। Y-अक्ष पर प्राप्त मान ही संगत \(y\) मान होगा।
- इसी प्रकार, किसी विशेष \(y\) मान के लिए \(x\) मान ज्ञात कर सकते हैं।
- उदाहरण 1: सामान्य रैखिक आलेख (चित्र 10.11)
- आलेख पर दिए गए बिंदु: \((-4, -20), (-1, -5), (1, 5), (6, 30)\)
- यह आलेख \(y = 5x\) संबंध को दर्शाता है।
- विश्लेषण:
- जब \(x = -4\), तब \(y = -20\)
- जब \(x = -1\), तब \(y = -5\)
- जब \(x = 1\), तब \(y = 5\)
- जब \(x = 6\), तब \(y = 30\)
- इस आलेख से स्पष्ट है कि \(x\) का मान बढ़ाने पर \(y\) का मान बढ़ता है और \(x\) का मान घटाने पर \(y\) का मान घटता है। अर्थात्, \(x\) और \(y\) अनुक्रमानुपाती हैं।
- उदाहरण 2: समय एवं दूरी के मध्य आरेख (चित्र 10.12)
- एक मोटरसाइकिल चालक की नियत चाल से तय की गई दूरी को दर्शाता है।
- X-अक्ष पर समय (घंटों में) और Y-अक्ष पर दूरी (किमी में) है।
- विश्लेषण (सारणी 6 के आधार पर):
- बिंदु \((2, 80))\): 2 घंटे में 80 किमी दूरी। चाल \(= \frac{80}{2} = 40\) किमी/घंटा।
- बिंदु \((4, 160))\): 4 घंटे में 160 किमी दूरी। चाल \(= \frac{160}{4} = 40\) किमी/घंटा।
- बिंदु \((6, 240))\): 6 घंटे में 240 किमी दूरी। चाल \(= \frac{240}{6} = 40\) किमी/घंटा।
- चूंकि चाल नियत है, इसलिए दूरी समय के अनुक्रमानुपाती है, और आलेख एक सीधी रेखा है जो मूल बिंदु से होकर गुजरती है।
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यदि चाल नियत हो, तो दूरी समय के अनुक्रमानुपाती होती है (दूरी \(= \text{चाल} \times \text{समय}\))। ऐसे में दूरी और समय के बीच का आलेख एक रैखिक आलेख होता है।