सर्वांगसमता
अध्याय 'सर्वांगसमता' में आप ऐसी आकृतियों के बारे में जानेंगे जो आकार और माप में बिल्कुल समान होती हैं। आप सीखेंगे कि दो वस्तुओं को सर्वांगसम कैसे पहचानें, रेखाखंडों और कोणों की सर्वांगसमता के क्या नियम हैं, और त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए कौन-कौन से मानदंड (SSS, SAS, ASA, RHS) होते हैं। यह अध्याय ज्यामिति की नींव रखता है और आपको विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों के गुणों को समझने में मदद करता है।
सर्वांगसमता की अवधारणा
सर्वांगसमता का अर्थ है 'सभी प्रकार से समान'।
- दो वस्तुएँ या आकृतियाँ सर्वांगसम कहलाती हैं यदि उनका आकार (shape) और माप (size) बिल्कुल समान हो।
- यदि एक आकृति को दूसरी आकृति के ऊपर रखा जाए और वे एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक लें, तो वे सर्वांगसम होती हैं। इसे अध्यारोपण (Superposition) कहते हैं।
- दैनिक जीवन के उदाहरण:
- एक ही कंपनी द्वारा बनाए गए दो बिस्कुट।
- एक ही मूल्यवर्ग के दो सिक्के।
- एक ही साँचे से बनी दो ईंटें।
- एक ही पेड़ की दो पत्तियाँ (यदि वे समान आकार और माप की हों)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t1_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t1_scene2] में पत्तों के उदाहरण से सर्वांगसमता को समझाया गया है।
सर्वांगसमता के लिए आकार और माप दोनों का समान होना अनिवार्य है।
सर्वांगसम आकृतियाँ और सर्वांगसमता की परिभाषा
- गणित में, दो आकृतियों को सर्वांगसम कहा जाता है यदि उनके सभी संगत भाग (जैसे भुजाएँ और कोण) समान हों।
- सर्वांगसमता को गणितीय रूप से '≅' चिह्न द्वारा दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: यदि त्रिभुज ABC, त्रिभुज PQR के सर्वांगसम है, तो इसे \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) लिखा जाता है।
- यह चिह्न दो आकृतियों के बीच पूर्ण समानता को व्यक्त करता है।
- सर्वांगसम आकृतियों के उदाहरण:
- एक ही कंपनी द्वारा निर्मित दो बिस्कुट।
- एक ही मूल्यवर्ग के दो सिक्के।
- एक ही आकार के दो फोटो फ्रेम।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t2_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t2_scene2] में सर्वांगसमता की परिभाषा और प्रतीक को दर्शाया गया है।
सर्वांगसमता (Congruence): दो आकृतियाँ सर्वांगसम कहलाती हैं यदि उनका आकार और माप समान हो, अर्थात वे एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक सकें।
ज्यामिति में सर्वांगसमता और अध्यारोपण का सिद्धांत
- ज्यामिति में, एक आकृति को उसके माप एवं आकार में परिवर्तन किए बिना एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।
- इसे "अध्यारोपण की स्वयं सिद्धि" (Axiom of Superposition) कहते हैं।
- इस सिद्धांत के अनुसार, यदि एक आकृति को दूसरी आकृति पर रखने पर वे एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक लेती हैं, तो वे सर्वांगसम होती हैं।
- सरल रेखाएँ: दो सरल रेखाएँ सदैव सर्वांगसम होती हैं क्योंकि उनकी लंबाई असीमित होती है और वे एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक सकती हैं।
- रेखाखण्ड: रेखाखण्डों की लंबाई निश्चित होती है। दो रेखाखण्ड तभी सर्वांगसम होंगे जब उनकी लंबाइयाँ समान हों।
अध्यारोपण का सिद्धांत सर्वांगसमता की मूल अवधारणा है। यह हमें यह निर्धारित करने में मदद करता है कि दो आकृतियाँ वास्तव में समान हैं या नहीं।
रेखाखण्डों की सर्वांगसमता
- एक रेखाखण्ड (Line Segment) रेखा का एक भाग होता है जिसके दो निश्चित अंत बिंदु होते हैं और उसकी लंबाई भी निश्चित होती है।
- दो रेखाखण्डों को सर्वांगसम कहा जाता है यदि उनकी लंबाई समान हो।
- यदि रेखाखण्ड AB की लंबाई रेखाखण्ड CD की लंबाई के बराबर है, तो हम कहते हैं कि रेखाखण्ड AB, रेखाखण्ड CD के सर्वांगसम है। इसे \(AB \cong CD\) से दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: 5 सेमी लंबाई के सभी रेखाखण्ड एक-दूसरे के सर्वांगसम होंगे।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t4_scene2] में सर्वांगसम रेखाखण्डों को दर्शाया गया है।
रेखाखण्डों की सर्वांगसमता केवल उनकी लंबाई पर निर्भर करती है।
कोणों की सर्वांगसमता
- दो कोण सर्वांगसम कहलाते हैं यदि उनका माप (डिग्री में) समान हो।
- कोण बनाने वाली भुजाओं की लंबाई से सर्वांगसमता पर कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि किरणें अनंत तक फैली होती हैं।
- उदाहरण: यदि \(\angle A = 60^\circ\) और \(\angle B = 60^\circ\) है, तो \(\angle A \cong \angle B\) होगा, भले ही उनकी भुजाएँ अलग-अलग लंबाई की हों।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t5_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t5_scene2] में कोणों की सर्वांगसमता को समझाया गया है।
कोणों की सर्वांगसमता के लिए केवल कोण का माप महत्वपूर्ण है, भुजाओं की लंबाई नहीं।
आकृतियों की सर्वांगसमता के सामान्य नियम
- दो आकृतियाँ सर्वांगसम होती हैं यदि वे माप एवं आकार में समान हों।
- उनकी स्थितियाँ या दिशाएँ अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन वे एक-दूसरे को पूरी तरह से ढक लेती हैं।
- संगत भुजाएँ और कोण: दो सर्वांगसम आकृतियों में, एक आकृति की प्रत्येक भुजा और प्रत्येक कोण का माप दूसरी आकृति की संगत भुजा और संगत कोण के माप के बराबर होता है।
- सर्वांगसम नहीं होने की शर्तें: यदि केवल कुछ भाग समान हों और संगत भुजाओं या कोणों की माप में अंतर हो, तो आकृतियाँ सर्वांगसम नहीं होंगी।
- विशेष आकृतियों में सर्वांगसमता:
- वर्ग: यदि दो वर्गों की भुजाओं की माप समान हो, तो वे सर्वांगसम होते हैं (क्योंकि सभी कोण 90° होते हैं)।
- वृत्त: यदि दो वृत्तों की त्रिज्याएँ समान हों, तो वे सर्वांगसम होते हैं (क्योंकि त्रिज्या ही वृत्त के आकार और माप को निर्धारित करती है)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t6_scene1], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t6_scene2], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t6_scene3], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t6_scene4] में सर्वांगसमता के सामान्य नियमों को दर्शाया गया है।
केवल समान आकार (shape) होने से आकृतियाँ सर्वांगसम नहीं होतीं। माप (size) भी समान होना चाहिए। उदाहरण के लिए, दो समबाहु त्रिभुज जिनके कोण 60° होते हैं, लेकिन भुजाएँ अलग-अलग हों, सर्वांगसम नहीं होते।
त्रिभुजों की सर्वांगसमता की शर्तें
- दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं यदि एक त्रिभुज के तीनों भुजाएँ एवं तीनों कोण दूसरे त्रिभुज के तीनों संगत भुजाएँ एवं तीनों संगत कोणों के बराबर हों।
- हालांकि, त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए सभी छह संगत अवयवों (तीन भुजाएँ और तीन कोण) को बराबर दिखाना हमेशा आवश्यक नहीं होता। कुछ न्यूनतम शर्तें होती हैं जो सर्वांगसमता को सुनिश्चित करती हैं।
- इन न्यूनतम शर्तों को सर्वांगसमता नियम या कसौटियाँ कहते हैं।
- ये नियम हमें बताते हैं कि यदि कुछ विशिष्ट संगत भाग बराबर हों, तो पूरे त्रिभुज सर्वांगसम होंगे।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t9_scene1] में सर्वांगसमता की जाँच के नियम का परिचय दिया गया है।
सर्वांगसमता के लिए संगतता (Correspondence) बहुत महत्वपूर्ण है। यदि \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) है, तो A, P के संगत; B, Q के संगत; और C, R के संगत होगा।
सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत अवयव ज्ञात करना
- यदि दो त्रिभुज सर्वांगसम हैं, तो उनके सभी संगत अवयव (भुजाएँ और कोण) बराबर होते हैं। इसे CPCTC (Corresponding Parts of Congruent Triangles) कहते हैं।
- संगत शीर्ष: यदि \(\triangle ABC \cong \triangle EFG\) है, तो शीर्ष A, E के संगत; B, F के संगत; और C, G के संगत होगा।
- संगत भुजाएँ:
- \(AB = EF\)
- \(BC = FG\)
- \(CA = GE\)
- संगत कोण:
- \(\angle A = \angle E\)
- \(\angle B = \angle F\)
- \(\angle C = \angle G\)
- त्रिभुज के कोण योग गुण: किसी भी त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग \(180^\circ\) होता है। इस गुण का उपयोग करके, यदि दो कोण ज्ञात हों तो तीसरा कोण ज्ञात किया जा सकता है।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t8_scene2] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t8_scene3] में संगत भुजाओं और कोणों को ज्ञात करना समझाया गया है।
परीक्षा में संगतता का सही क्रम लिखना महत्वपूर्ण है। यदि \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) है, तो \(\triangle BAC \cong \triangle QPR\) भी सही है, लेकिन \(\triangle ABC \cong \triangle QPR\) गलत होगा।
त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए आवश्यक शर्तें
- त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए सभी छह संगत अवयवों (तीन भुजाएँ और तीन कोण) को बराबर दिखाना आवश्यक नहीं है। कुछ न्यूनतम शर्तें होती हैं जो सर्वांगसमता को सुनिश्चित करती हैं।
- ये शर्तें सर्वांगसमता नियम कहलाती हैं:
- भुजा-भुजा-भुजा (SSS) सर्वांगसमता नियम: यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की तीनों संगत भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- भुजा-कोण-भुजा (SAS) सर्वांगसमता नियम: यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दूसरे त्रिभुज की दो संगत भुजाओं और उनके बीच के संगत कोण के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। यहाँ 'बीच का कोण' (included angle) होना बहुत महत्वपूर्ण है।
- कोण-भुजा-कोण (ASA) सर्वांगसमता नियम: यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा (यानी, उन दो कोणों के बीच की भुजा) दूसरे त्रिभुज के दो संगत कोणों और उनकी अंतर्गत भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- समकोण-कर्ण-भुजा (RHS) सर्वांगसमता नियम: (केवल समकोण त्रिभुजों के लिए) यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण और कोई एक अन्य भुजा, दूसरे त्रिभुज के कर्ण और संगत भुजा के बराबर हो, तो वे दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t9_scene3], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t9_scene4], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t9_scene5] में इन नियमों को दर्शाया गया है।
AAA (कोण-कोण-कोण) सर्वांगसमता नियम नहीं है। यदि दो त्रिभुजों के सभी कोण समान हों, तो वे समरूप (Similar) हो सकते हैं, लेकिन सर्वांगसम नहीं। सर्वांगसमता के लिए भुजाओं का बराबर होना भी आवश्यक है।
भुजा-भुजा-भुजा (SSS) सर्वांगसमता नियम
- नियम: यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की तीनों संगत भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- इसे संक्षेप में भु-भु-भु सर्वांगसमता (S.S.S. Congruence) कहते हैं।
- उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) में:
- \(AB = DE\)
- \(BC = EF\)
- \(CA = FD\)
तो \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\) (SSS नियम से)।
- इस नियम का उपयोग करके, हम बिना कोणों को मापे भी त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध कर सकते हैं।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t10_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t10_scene2] में SSS नियम को समझाया गया है।
SSS सर्वांगसमता: यदि \(AB = DE\), \(BC = EF\), \(CA = FD\) तो \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\)
भुजा-कोण-भुजा (SAS) सर्वांगसमता नियम
- नियम: यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दूसरे त्रिभुज की संगत दो भुजाओं और उनके बीच के संगत कोण के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- इसे संक्षेप में भु-को-भु सर्वांगसमता (S.A.S. Congruence) कहते हैं।
- 'बीच का कोण' का महत्व: यह बहुत महत्वपूर्ण है कि कोण उन्हीं दो भुजाओं के बीच बना हो जिनकी लंबाई बराबर है। यदि कोण बीच का नहीं है, तो त्रिभुज सर्वांगसम नहीं होंगे।
- उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle PQR\) में:
- \(AB = PQ\)
- \(\angle B = \angle Q\)
- \(BC = QR\)
तो \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) (SAS नियम से)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t11_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t11_scene3] में SAS नियम और अंतर्निहित कोण के महत्व को समझाया गया है।
SAS सर्वांगसमता: यदि \(AB = DE\), \(\angle B = \angle E\), \(BC = EF\) तो \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\)
SAS नियम में 'अंतर्निहित कोण' (Included Angle) की शर्त को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। कोण हमेशा उन दो भुजाओं के बीच होना चाहिए जिनकी समानता दी गई है।
कोण-भुजा-कोण (ASA) सर्वांगसमता नियम
- नियम: यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा (यानी, उन दो कोणों के बीच की भुजा) दूसरे त्रिभुज के दो संगत कोणों और उनकी अंतर्गत भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- इसे संक्षेप में को-भु-को सर्वांगसमता (A.S.A. Congruence) कहते हैं।
- 'अंतर्गत भुजा' का महत्व: भुजा दोनों कोणों के बीच होनी चाहिए।
- उदाहरण: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle PQR\) में:
- \(\angle B = \angle Q\)
- \(BC = QR\)
- \(\angle C = \angle R\)
तो \(\triangle ABC \cong \triangle PQR\) (ASA नियम से)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t12_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t12_scene2] में ASA नियम को समझाया गया है।
ASA सर्वांगसमता: यदि \(\angle B = \angle E\), \(BC = EF\), \(\angle C = \angle F\) तो \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\)
SAS सर्वांगसमता नियम का अनुप्रयोग
- SAS नियम का उपयोग करके दो त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए, हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दूसरे त्रिभुज की संगत दो भुजाओं और उनके बीच के कोण के बराबर हों।
- उदाहरण: \(\triangle CAB\) और \(\triangle RPQ\) में (चित्र-8.36):
- \(CB = RQ = 4\) सेमी
- \(\angle B = \angle Q = 120^\circ\)
- \(AB = PQ = 3\) सेमी
- चूंकि दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दूसरे त्रिभुज की संगत दो भुजाओं और उनके बीच के कोण के बराबर हैं, अतः SAS सर्वांगसमता नियम से \(\triangle CAB \cong \triangle RPQ\)।
- CPCTC का उपयोग: यदि \(\triangle CAB \cong \triangle RPQ\) है, तो उनके संगत भाग भी बराबर होंगे:
- \(AC = PR\)
- \(\angle C = \angle R\)
- \(\angle A = \angle P\)
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t13_scene1], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t13_scene2], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t13_scene3], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t13_scene4] में SAS नियम का अनुप्रयोग और CPCTC को समझाया गया है।
जब दो त्रिभुज सर्वांगसम सिद्ध हो जाएँ, तो उनके संगत भागों को बराबर दिखाने के लिए CPCTC (Corresponding Parts of Congruent Triangles) का उपयोग करें। यह अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।
ASA सर्वांगसमता नियम का अनुप्रयोग
- ASA नियम का उपयोग करके दो त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए, हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि एक त्रिभुज के दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा दूसरे त्रिभुज के संगत दो कोणों और उनकी अंतर्गत भुजा के बराबर हों।
- उदाहरण: चित्र-8.37 में, \(\triangle ABD\) और \(\triangle ACD\) में:
- \(\angle BAD = \angle CAD\) (दिया है)
- \(AD = AD\) (उभयनिष्ठ भुजा)
- \(\angle ADB = \angle ADC\) (दिया है)
- चूंकि दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा बराबर हैं, अतः ASA सर्वांगसमता नियम से \(\triangle ABD \cong \triangle ACD\)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t14_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t14_scene2] में ASA नियम का अनुप्रयोग समझाया गया है।
उभयनिष्ठ भुजा (Common Side) या उभयनिष्ठ कोण (Common Angle) अक्सर सर्वांगसमता सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
SSS सर्वांगसमता नियम का अनुप्रयोग
- SSS नियम का उपयोग करके दो त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए, हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की तीनों संगत भुजाओं के बराबर हों।
- उदाहरण: चित्र-8.38 में, \(\triangle PQR\) और \(\triangle XYZ\) में:
- \(PQ = XY = 2.9\) सेमी
- \(QR = YZ = 6\) सेमी
- \(RP = ZX = 5.3\) सेमी
- चूंकि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की संगत तीनों भुजाओं के बराबर हैं, अतः SSS सर्वांगसमता नियम से \(\triangle PQR \cong \triangle XYZ\)।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t15_scene1], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t15_scene2], [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t15_scene3] में SSS नियम का अनुप्रयोग समझाया गया है।
समकोण-कर्ण-भुजा (RHS) सर्वांगसमता नियम
- नियम: (यह नियम केवल समकोण त्रिभुजों पर लागू होता है) यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण (Hypotenuse) और कोई एक अन्य भुजा, दूसरे त्रिभुज के कर्ण और संगत भुजा के बराबर हो, तो वे दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
- इसे संक्षेप में R.H.S. सर्वांगसमता (Right angle - Hypotenuse - Side Congruence) कहते हैं।
- शर्तें:
- दोनों त्रिभुज समकोण त्रिभुज होने चाहिए (अर्थात एक कोण \(90^\circ\) का हो)।
- एक त्रिभुज का कर्ण दूसरे त्रिभुज के कर्ण के बराबर हो।
- एक त्रिभुज की कोई एक भुजा (समकोण बनाने वाली) दूसरे त्रिभुज की संगत भुजा के बराबर हो।
- [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t16_scene1] और [IMAGE: cg_c7_maths_ch08_t16_scene2] में RHS नियम को समझाया गया है।
RHS सर्वांगसमता: यदि \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) समकोण त्रिभुज हैं, और \(\angle B = \angle E = 90^\circ\) \(AC = DF\) (कर्ण) \(AB = DE\) (एक भुजा) तो \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\)
RHS सर्वांगसमता नियम का अनुप्रयोग
- RHS नियम का उपयोग करके दो समकोण त्रिभुजों की सर्वांगसमता सिद्ध करने के लिए, हमें यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके कर्ण और एक संगत भुजा बराबर हों।
- उदाहरण: चित्र-8.42 में, \(\triangle ABC\) और \(\triangle DEF\) में:
- \(\angle B = \angle E = 90^\circ\) (समकोण)
- \(AC = DF = 5\) सेमी (कर्ण)
- \(BC = EF = 4\) सेमी (भुजा)
- चूंकि ये समकोण त्रिभुज हैं और उनके कर्ण तथा एक संगत भुजा बराबर हैं, अतः RHS सर्वांगसमता नियम से \(\triangle ABC \cong \triangle DEF\)।