मापन
अध्याय 'मापन' छात्रों को दैनिक जीवन में मापन के महत्व से परिचित कराता है। यह भौतिक राशियों, मानक मात्रकों की आवश्यकता, मात्रकों की विभिन्न प्रणालियों (CGS, FPS, MKS, SI) और उनके गुणजों व अपवर्तकों की व्याख्या करता है। छात्र लंबाई, आयतन, द्रव्यमान, समय और ताप को मापने के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न उपकरणों और विधियों के बारे में सीखते हैं, साथ ही मापन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों को भी समझते हैं। यह अध्याय भारत सरकार के माप-तौल विभाग की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है।
परिचय
मापन हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है। यह हमें वस्तुओं और घटनाओं के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।
- अनुमान की सीमाएँ:
- दैनिक जीवन में कई बार हम अनुमान के आधार पर निर्णय लेते हैं (जैसे चाय में शक्कर, स्कूल पहुँचने का समय)।
- ये अनुमान तब तक ठीक होते हैं जब तक बहुत अधिक शुद्धता की आवश्यकता न हो।
- अनुमान अक्सर गलत साबित हो सकते हैं और सही जानकारी नहीं दे पाते।
- मापन की आवश्यकता:
- महत्वपूर्ण कार्यों में, जैसे कपड़े सिलना, सब्जी तौलना, रोगी का तापमान मापना, सटीक मापन अत्यंत आवश्यक है।
- माप-तौल के बिना किसी वस्तु की लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन, द्रव्यमान या ताप के बारे में सही निर्णय लेना संभव नहीं है।
- ज्ञानेंद्रियों की सीमा:
- हमारी ज्ञानेंद्रियाँ (जैसे आँखें) कभी-कभी हमें भ्रमित कर सकती हैं।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t1_scene1] में रेखाओं का उदाहरण या [IMAGE: glass_tumblers_with_different_water_levels_fig104] में बर्तनों में पानी का आयतन इसका प्रमाण है।
- अतः, वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने के लिए मापन एक अनिवार्य प्रक्रिया है।
- भौतिक राशियाँ:
- वे राशियाँ जिन्हें मापा जा सकता है, जैसे लम्बाई, क्षेत्रफल, आयतन, द्रव्यमान, समय, ताप आदि, भौतिक राशियाँ कहलाती हैं।
- इस अध्याय में हम लम्बाई, आयतन, द्रव्यमान, समय और ताप मापने की विधियों पर ध्यान देंगे।
मापन एक तुलनात्मक प्रक्रिया है जिसमें एक अज्ञात राशि की तुलना उसी प्रकार की ज्ञात राशि की निश्चित मात्रा (मात्रक) से की जाती है।
मापन का अर्थ
मापन का अर्थ है किसी अज्ञात राशि की तुलना उसी प्रकार की ज्ञात राशि की निश्चित मात्रा से करना।
- मात्रक (Unit):
- ज्ञात राशि की इस निश्चित मात्रा को मात्रक कहते हैं।
- मापन के दो भाग:
- प्रत्येक मापन में दो भाग होते हैं:
- संख्यात्मक मान (Numerical Value): यह बताता है कि मात्रक कितनी बार शामिल है।
- मात्रक (Unit): यह बताता है कि किस राशि को मापा जा रहा है।
- उदाहरण: मेज की लम्बाई 2 मीटर है। यहाँ '2' संख्यात्मक मान है और 'मीटर' मात्रक है।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t2_scene3] में बताया गया है कि '5' चीनी या 'किलोग्राम चीनी' दोनों अधूरे हैं, '5 किलोग्राम' ही पूर्ण जानकारी है।
- महत्व:
- किसी भी राशि के मापन में संख्यात्मक मान और मात्रक, दोनों का उल्लेख आवश्यक होता है। इसके बिना जानकारी अधूरी और भ्रामक हो सकती है।
मापन: किसी अज्ञात भौतिक राशि की तुलना उसी प्रकार की एक ज्ञात मानक राशि से करना।
मानक मात्रकों की आवश्यकता
प्राचीन काल में लोग लम्बाई मापने के लिए अपने शरीर के अंगों का उपयोग करते थे, जैसे कदम, बित्ता (बालिश्त), भुजा की लम्बाई आदि।
- गैर-मानक मात्रकों की समस्याएँ:
- विभिन्न व्यक्तियों के शरीर के अंगों की लम्बाई अलग-अलग होती है।
- उदाहरण: एक व्यक्ति का 'बित्ता' दूसरे व्यक्ति के 'बित्ते' से भिन्न हो सकता है, जिससे मापन में समानता नहीं आती।
- [IMAGE: measuring_with_handspans_fig152] में बित्ते से मापन की विधि दिखाई गई है, जो व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करती है।
- मानक मात्रकों की आवश्यकता:
- समानता और विश्वसनीयता के लिए माप के समान मात्रक का होना आवश्यक है।
- बाजार में खरीदने और बेचने के लिए समान मात्रकों का उपयोग किया जाता है ताकि कोई भ्रम या विवाद न हो।
- मानक मात्रक: एक ऐसा मात्रक जिसे किसी समूह के लोग माप के लिए सर्वसम्मति से स्वीकार करते हैं।
- मानक मात्रक का एक निश्चित परिमाण होता है जो कभी भी, कहीं भी, और किसी के भी द्वारा मापने पर समान रहता है।
- मात्रकों की पद्धतियाँ:
- विश्व भर में मापन के लिए कई पद्धतियाँ प्रचलित रही हैं, जो मुख्य रूप से लम्बाई, द्रव्यमान और समय के मात्रकों पर आधारित हैं।
- CGS पद्धति: लम्बाई - सेंटीमीटर (cm), द्रव्यमान - ग्राम (g), समय - सेकंड (s)।
- FPS पद्धति: लम्बाई - फुट (foot), द्रव्यमान - पाउण्ड (pound), समय - सेकंड (s)।
- MKS पद्धति: लम्बाई - मीटर (m), द्रव्यमान - किलोग्राम (kg), समय - सेकंड (s)।
- [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t3_scene3] इन पद्धतियों के विकास को दर्शाता है।
- पैमाने का इतिहास:
- प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक मापन के उपकरणों और मात्रकों का विकास हुआ है।
- शुरुआत में शरीर के अंगों का उपयोग, फिर निश्चित लम्बाई की छड़ें, और अंततः अंतर्राष्ट्रीय मानक इकाई मीटर का विकास हुआ।
मानक मात्रक वह निश्चित परिमाण है जो मापन में समानता और परिशुद्धता सुनिश्चित करता है, चाहे मापन कहीं भी और किसी के भी द्वारा किया जाए।
मात्रकों की अंतर्राष्ट्रीय पद्धति (SI) और संकेतों की परिपाटी
विश्व के सभी वैज्ञानिक मापन में एक सर्वमान्य मानक मात्रक पद्धति का उपयोग करते हैं, जिसे अंतर्राष्ट्रीय मात्रक पद्धति या SI पद्धति (International System of Units) कहा जाता है।
- SI पद्धति के मानक मात्रक:
- लम्बाई: मीटर (m)
- द्रव्यमान: किलोग्राम (kg)
- समय: सेकंड (s)
- ताप: केल्विन (K) (व्यवहारिक मात्रक डिग्री सेल्सियस (°C) है)
- अंतर्राष्ट्रीय मात्रकों तथा उनके संकेतों को लिखने की प्रचलित परिपाटी:
- छोटे अक्षर: राशियों के मात्रकों के संकेतों को अंग्रेजी के छोटे अक्षरों में लिखा जाता है (जैसे: मीटर का 'm', किलोग्राम का 'kg', सेकंड का 's')।
- बड़े अक्षर: वैज्ञानिक के नाम पर रखे गए मात्रकों के संकेत अंग्रेजी के बड़े अक्षरों में लिखे जाते हैं (जैसे: केल्विन का 'K', डिग्री सेल्सियस का '°C')।
- विराम बिंदु नहीं: मात्रकों के संकेतों के पश्चात् कोई विराम बिंदु नहीं लगाया जाता (जैसे: 'm', 'kg', 's', न कि 'm.', 'kg.', 's.')। यदि संकेत वाक्य के अंत में आता है तो विराम बिंदु लगाया जा सकता है।
- एकवचन: मात्रकों के संकेत हमेशा एकवचन में ही लिखे जाते हैं, बहुवचन में नहीं (जैसे: 10 m, न कि 10 ms)।
- छोटे अक्षर (पूरा नाम): अंग्रेजी भाषा में लिखते समय किसी भी मात्रक को सदैव छोटे अक्षरों में ही लिखा जाता है (जैसे: metre, kilogram, second, kelvin, celsius)।
SI पद्धति विश्व स्तर पर स्वीकृत है, जिससे वैज्ञानिक संचार और व्यापार में एकरूपता आती है।
मात्रकों के अपवर्तक तथा गुणज
मापन की सुविधा के लिए, मानक मात्रकों के छोटे (अपवर्तक) और बड़े (गुणज) मात्रक भी उपयोग किए जाते हैं।
- अपवर्तक (Submultiples):
- मानक मात्रक से छोटे मात्रक को उसका अपवर्तक कहते हैं।
- उदाहरण: सेंटीमीटर (cm) मीटर का अपवर्तक है।
- 1 मीटर (m) = 100 सेंटीमीटर (cm)
- 1 सेंटीमीटर (cm) = 10 मिलीमीटर (mm)
- ग्राम (g) और मिलीग्राम (mg) किलोग्राम के अपवर्तक हैं।
- 1 किलोग्राम (kg) = 1000 ग्राम (g)
- 1 ग्राम (g) = 1000 मिलीग्राम (mg)
- गुणज (Multiples):
- मानक मात्रक से बड़े मात्रक को उसका गुणज कहते हैं।
- उदाहरण: किलोमीटर (km) मीटर का गुणज है।
- 1 किलोमीटर (km) = 1000 मीटर (m)
- क्विंटल और टन किलोग्राम के गुणज हैं।
- 1 क्विंटल = 100 किलोग्राम (kg)
- 1 टन = 10 क्विंटल = 1000 किलोग्राम (kg)
- लम्बाई, द्रव्यमान और समय के मात्रकों के गुणज तथा अपवर्तक:
- लम्बाई (Length):
- 10 मिलीमीटर (mm) = 1 सेंटीमीटर (cm)
- 10 सेंटीमीटर (cm) = 1 डेसीमीटर (dm)
- 10 डेसीमीटर (dm) = 1 मीटर (m)
- 1000 मीटर (m) = 1 किलोमीटर (km)
- द्रव्यमान (Weight):
- 1000 मिलीग्राम (mg) = 1 ग्राम (g)
- 1000 ग्राम (g) = 1 किलोग्राम (kg)
- 100 किलोग्राम (kg) = 1 क्विंटल
- 10 क्विंटल = 1000 किलोग्राम = 1 मीट्रिक टन
- समय (Time):
- 60 सेकंड (s) = 1 मिनट (min)
- 60 मिनट (min) = 1 घण्टा (h)
- 24 घण्टे (h) = 1 दिन
- 365 दिन = 1 वर्ष
- 10 वर्ष = 1 दशक (दशाब्दी)
- 10 दशाब्दी = 100 वर्ष = 1 शताब्दी (शतक)
मात्रकों के गुणज और अपवर्तक हमें बहुत बड़ी या बहुत छोटी राशियों को सुविधाजनक तरीके से व्यक्त करने में मदद करते हैं।
लम्बाई का मापन
लम्बाई मापने के लिए विभिन्न उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जैसे मापद फीता (टेप), मीटर छड़, मीटर स्केल।
- उपकरण का चयन:
- उपकरण का चयन मापी जाने वाली वस्तु की प्रकृति पर निर्भर करता है।
- वृक्ष के तने का घेरा या छाती की माप के लिए फीता उपयुक्त है।
- पेंसिल की लम्बाई मापने के लिए मीटर स्केल या ज्यामिति बॉक्स का स्केल उपयुक्त है।
- मीटर स्केल की विशेषताएँ:
- ज्यामिति बॉक्स के स्केल की लम्बाई 15 सेमी होती है।
- 1 सेमी को 10 बराबर भागों में बांटा जाता है, जिससे प्रत्येक भाग 0.1 सेमी या 1 मिमी के बराबर होता है।
- अल्पतमांक (Least Count): किसी मापक यंत्र द्वारा मापी जा सकने वाली सबसे छोटी लम्बाई को उसका अल्पतमांक कहते हैं। मीटर स्केल का अल्पतमांक 1 मिमी (0.1 सेमी) है।
- लम्बाई मापने की सावधानियाँ:
- स्केल की स्थिति: स्केल को वस्तु से सटाकर उसकी लम्बाई के समानान्तर रखना चाहिए। [IMAGE: correct_ruler_placement_for_measurement_fig1110]
- टूटे हुए सिरे: यदि स्केल के सिरे टूटे हुए हों या शून्य चिन्ह स्पष्ट न हो, तो किसी अन्य सुविधाजनक चिन्ह से मापन शुरू करें (जैसे 1.0 सेमी से)। वस्तु की लम्बाई ज्ञात करने के लिए दूसरे सिरे के पाठ्यांक में से पहले सिरे के पाठ्यांक को घटाएँ। [IMAGE: correct_measurement_with_broken_scale_fig710]
- आँख की स्थिति: सही माप के लिए आँख की स्थिति पैमाने के जिस चिन्ह का पाठ्यांक लेना है, उसके लम्बवत् होनी चाहिए। [IMAGE: correct_eye_position_for_measurement_fig910]
- वक्र रेखा की लम्बाई मापना:
- वक्र रेखा की लम्बाई सीधे स्केल से नहीं मापी जा सकती। इसके लिए धागे का उपयोग किया जाता है।
- धागे को वक्र रेखा के साथ रखकर, छोटे-छोटे भागों में अंगूठे से दबाते हुए आगे बढ़ाएँ।
- वक्र रेखा के अंत में धागे पर निशान लगाएँ और फिर धागे को सीधा करके स्केल से उसकी लम्बाई माप लें। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t6_scene4]
अल्पतमांक की परिभाषा और मापन में सावधानियाँ बोर्ड परीक्षा में अक्सर पूछी जाती हैं।
आयतन की परिभाषा और द्रवों का आयतन
आयतन किसी वस्तु द्वारा घेरा गया त्रि-आयामी स्थान होता है।
- आयतन की परिभाषा:
- कोई वस्तु जितना स्थान घेरती है, वह उसका आयतन कहलाता है।
- इसमें लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई (या गहराई/मोटाई) तीनों विमाएँ शामिल होती हैं।
- आयतन का SI मात्रक घनमीटर (m³) है। इसका अर्थ है कि वस्तु कितने \(1 \text{ मीटर} \times 1 \text{ मीटर} \times 1 \text{ मीटर}\) के घनों के बराबर जगह घेरती है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t7_scene1]
- द्रवों का आयतन:
- पानी, दूध, तेल आदि द्रवों का आयतन लीटर (L) और मिलीलीटर (mL) में मापा जाता है।
- संबंध:
- \(1 \text{ लीटर (L)} = 1000 \text{ मिलीलीटर (mL)}\)
- \(1 \text{ मिलीलीटर (mL)} = 1 \text{ घन सेंटीमीटर (cm³)}\)
- धारिता (Capacity): किसी बर्तन को पूरी तरह से भरने के लिए द्रव के जितने आयतन की आवश्यकता होती है, उसे उस बर्तन की धारिता कहते हैं। यह वास्तव में बर्तन का आंतरिक आयतन होता है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t7_scene2]
- द्रवों के आयतन मापक उपकरण:
- द्रवों का आयतन मापने के लिए विभिन्न प्रकार के बर्तनों और उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
- सामान्य उपयोग: दूध, मिट्टी का तेल आदि मापने के लिए [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t8_scene2] जैसे उपकरण।
- प्रयोगशाला: मापक सिलिंडर (Measuring Cylinder) [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t8_scene2]
- दवाइयाँ: मापक कप (Measuring Cup) [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t8_scene2]
- इन सभी उपकरणों पर आयतन के चिन्ह अंकित होते हैं, जिससे सीधे द्रव का आयतन मापा जा सकता है।
आयतन: किसी वस्तु द्वारा घेरा गया त्रि-आयामी स्थान। SI मात्रक: घनमीटर (m³)।
\(1 \text{ L} = 1000 \text{ mL}\) \(1 \text{ mL} = 1 \text{ cm³}\)
मापक सिलिंडर से आयतन मापन
मापक सिलिंडर एक बेलनाकार काँच या प्लास्टिक का बर्तन होता है जिस पर आयतन मापने के लिए निशान बने होते हैं।
- अल्पतमांक ज्ञात करना:
- मापक सिलिंडर का उपयोग करने से पहले उसका अल्पतमांक (सबसे छोटा भाग) ज्ञात करें।
- उदाहरण: यदि 10 mL और 20 mL के बीच 2 छोटे भाग हैं, तो एक भाग का मान \( (20-10)/2 = 5 \text{ mL} \) होगा।
- यदि 10 mL और 20 mL के बीच 5 भाग हैं, तो एक भाग का मान \( (20-10)/5 = 2 \text{ mL} \) होगा। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t8_scene2]
- द्रव का आयतन ज्ञात करना:
- मापक सिलिंडर को सपाट सतह पर रखें और उसमें द्रव भरें।
- मेनिस्कस (Meniscus): द्रव की सतह कुछ गोलाई लिए हुए होती है, जिसे मेनिस्कस कहते हैं।
- पानी (जल): पानी की स्थिति में मेनिस्कस नीचे दबी हुई होती है (अवतल)। पाठ्यांक लेते समय आँख को द्रव सतह के निचले सिरे की सीध में रखें। [IMAGE: correct_eye_position_for_measurement_fig910]
- पारा: पारे की स्थिति में मेनिस्कस उभरी हुई होती है (उत्तल)। पाठ्यांक लेते समय आँख को द्रव की ऊपरी सतह की सीध में रखें। [IMAGE: correct_eye_position_for_measurement_fig910]
- सटीक मापन का महत्व:
- सटीक मापन केवल वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए ही नहीं, बल्कि दवा बनाने, खाना पकाने, रसायन मिलाने जैसे कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।
- गलत मापन से परिणाम बदल सकते हैं और खतरनाक भी हो सकते हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t8_scene4]
मापक सिलिंडर से पाठ्यांक लेते समय मेनिस्कस और आँख की सही स्थिति पर प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
ठोस वस्तुओं का आयतन मापन
ठोस वस्तुओं का आयतन उनकी आकृति के आधार पर दो प्रकार से मापा जा सकता है: नियमित आकृति वाली और अनियमित आकृति वाली।
- नियमित आकृति वाली ठोस वस्तुएँ:
- जिन वस्तुओं की आकृति निश्चित होती है (जैसे घनाभ, घन), उनका आयतन सूत्रों द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।
- घनाभ (Cuboid):
- उदाहरण: माचिस की डिबिया, पुस्तक, ईंट।
- आयतन = लम्बाई \( \times \) चौड़ाई \( \times \) ऊँचाई (\(a \times b \times c\)). [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t9_scene2]
- SI मात्रक \(m^3\), प्रायोगिक मात्रक \(cm^3\).
- घन (Cube):
- यदि घनाभ की लम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई बराबर हों, तो उसे घन कहते हैं।
- घन का आयतन = लम्बाई \( \times \) लम्बाई \( \times \) लम्बाई = लम्बाई³ (\(a^3\)). [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t9_scene3]
- 1 लीटर का प्रमाण:
- \(10 \text{ cm}\) भुजा वाले घनाकार बर्तन में \(1000 \text{ cm³}\) पानी समाता है, जो ठीक \(1 \text{ लीटर}\) के बराबर है।
- अतः, \(1 \text{ L} = 1000 \text{ cm³} = 1000 \text{ mL}\). [IMAGE: balance_scale_for_volume_measurement_fig611]
- अनियमित आकृति वाली ठोस वस्तुएँ:
- जिन वस्तुओं की आकृति निश्चित नहीं होती (जैसे पत्थर, सिक्का, चाबी), उनका आयतन विस्थापन विधि द्वारा ज्ञात किया जाता है।
- विस्थापन विधि:
- एक मापक सिलिंडर में पानी भरकर प्रारंभिक तल (\(V_1\)) नोट करें।
- अनियमित वस्तु को धागे से बाँधकर सावधानीपूर्वक पानी में पूरी तरह डुबोएँ।
- पानी का तल ऊपर उठ जाएगा। नए तल (\(V_2\)) को नोट करें।
- वस्तु का आयतन = \(V_2 - V_1\). [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t9_scene4]
- यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि ठोस वस्तु अपने आयतन के बराबर ही द्रव विस्थापित करती है।
विस्थापन विधि अनियमित वस्तुओं का आयतन मापने का एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक तरीका है, जो आर्किमिडीज़ के सिद्धांत पर आधारित है।
द्रव्यमान का मापन और तुलाएँ
द्रव्यमान किसी वस्तु में मौजूद पदार्थ की कुल मात्रा का माप है।
- द्रव्यमान की परिभाषा:
- जिस वस्तु में पदार्थ की मात्रा अधिक होती है, वह भारी महसूस होती है और उसका द्रव्यमान भी अधिक होता है।
- द्रव्यमान का SI मात्रक किलोग्राम (kg) है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t10_scene1]
- द्रव्यमान मापने के उपकरण:
- दण्ड-तुला (Beam Balance):
- सामान्यतः द्रव्यमान मापने के लिए उपयोग की जाती है।
- इसमें धातु का एक दण्ड होता है जो मध्य बिंदु पर टेक पर टिका होता है और स्वतंत्रपूर्वक हिल-डुल सकता है।
- दोनों पलड़ों में से एक पर वस्तु और दूसरे पर बाट रखे जाते हैं। [IMAGE: simple_balance_scale_fig119]
- भौतिक तुला या रासायनिक तुला (Physical/Chemical Balance):
- जहाँ बहुत कम मात्रा में या बहुत सटीक मापन की आवश्यकता होती है (जैसे सोने-चांदी की दुकानों पर या प्रयोगशालाओं में) वहाँ इनका उपयोग किया जाता है।
- ये तुलाएँ इतनी संवेदनशील होती हैं कि एक मिलीग्राम के दसवें भाग तक को भी यथार्थतापूर्वक माप सकती हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t10_scene3]
- इलेक्ट्रॉनिक तुला (Electronic Balance):
- प्रौद्योगिकी के विकास के साथ, इलेक्ट्रॉनिक तुलाएँ विकसित हुई हैं जो अत्यधिक परिशुद्धता से माप सकती हैं (1 ग्राम के दस लाखवें भाग तक)। [IMAGE: electronic_balance_fig112b]
- द्रव्यमान और भार में अंतर (अतिरिक्त जानकारी):
- द्रव्यमान: किसी वस्तु में पदार्थ की मात्रा। यह स्थान बदलने पर नहीं बदलता।
- भार: किसी वस्तु पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल। यह स्थान बदलने पर बदल सकता है (जैसे चंद्रमा पर भार कम होता है)।
द्रव्यमान: किसी वस्तु में निहित पदार्थ की मात्रा। SI मात्रक: किलोग्राम (kg)।
समय का मापन और प्राचीन घड़ियाँ
समय हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें दैनिक कार्यों को व्यवस्थित करने में मदद करता है।
- समय का महत्व:
- शाला जाना, यात्रा करना, खेल खेलना — सभी में समय का पालन आवश्यक है।
- समय के बिना, हमारे सभी कार्य अव्यवस्थित हो सकते हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t11_scene1]
- प्राचीन समय मापन:
- जब आधुनिक घड़ियाँ नहीं थीं, लोग समय मापने के लिए प्रकृति में होने वाली नियमित घटनाओं का उपयोग करते थे।
- दिन और रात: सबसे सामान्य और प्रारंभिक तरीका।
- धूपघड़ी (Sundial):
- सूर्य की स्थिति के आधार पर समय बताती थी।
- इसमें एक क्षैतिज तख्ते पर एक त्रिकोनी प्लेट (नोमोन) लगी होती थी, जिसकी छाया तख्ते पर पड़ती थी।
- छाया की स्थिति बदलने से समय का अनुमान लगाया जाता था। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t11_scene2]
- ऐतिहासिक धूपघड़ियाँ आज भी दिल्ली और जयपुर के जंतर-मंतर में देखी जा सकती हैं। (महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनवाई थीं)।
- सीमा: केवल दिन के समय और स्पष्ट मौसम में काम करती थी।
- रेतघड़ी (Hourglass):
- दो बर्तन एक बारीक छिद्र से जुड़े होते थे।
- रेत एक बर्तन से दूसरे में गिरती थी, और ऊपर का बर्तन खाली होने पर एक निश्चित समय अंतराल का पता चलता था। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t11_scene2]
- जल घड़ी (Water Clock): (घटिका यंत्र) इसमें पानी के बहाव से समय मापा जाता था।
- समय मापन का विकास:
- प्राचीन काल से लेकर आधुनिक परमाणु घड़ियों तक समय मापन में लगातार विकास हुआ है, जिससे सटीकता बढ़ी है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t11_scene4]
प्राचीन समय मापन यंत्र जैसे धूपघड़ी और रेतघड़ी नियमित प्राकृतिक घटनाओं पर आधारित थे, लेकिन उनकी सटीकता सीमित थी।
आधुनिक समय मापन उपकरण
आधुनिक समय मापन उपकरण अत्यधिक सटीक और विश्वसनीय होते हैं।
- समय मापन का महत्व:
- दवाई की खुराक, वैज्ञानिक प्रयोग, खेल प्रतियोगिता — सभी में सटीक समय मापन आवश्यक है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t12_scene1]
- लोलक घड़ी (Pendulum Clock):
- यह घड़ी लोलक के नियमित दोलनों के सिद्धांत पर कार्य करती है।
- लोलक एक निश्चित समय में समान संख्या में दोलन करता है, जिससे समय का सटीक मापन संभव होता है। [IMAGE: pendulum_clock_fig810]
- विराम घड़ी (Stopwatch):
- अल्प समय अंतराल को यथार्थतापूर्वक मापने के लिए उपयोग की जाती है (जैसे 100 मीटर दौड़ या तैराकी प्रतियोगिता)।
- इसे इच्छानुसार चालू या बंद किया जा सकता है।
- इसका उपयोग सामान्यतः प्रयोगशाला में या दौड़ प्रतियोगिता में समय मापन के लिए किया जाता है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t10_scene3]
- डिजिटल घड़ी (Digital Clock):
- इन घड़ियों में परम्परागत सुइयाँ नहीं होतीं, बल्कि ये अंकों में समय प्रदर्शित करती हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t10_scene3]
- समय की मानक इकाई:
- समय का अंतर्राष्ट्रीय मानक मात्रक सेकंड (s) है। यह SI पद्धति का एक मूल मात्रक है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t12_scene4]
- संबंध:
- 60 सेकंड = 1 मिनट
- 60 मिनट = 1 घंटा
- 24 घंटे = 1 दिन
- आधुनिक समय मापन उपकरण:
- क्वार्ट्ज़ घड़ियाँ, डिजिटल घड़ियाँ, परमाणु घड़ियाँ।
- परमाणु घड़ियाँ: सबसे सटीक समय मापन प्रदान करती हैं और इनका उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान तथा वैश्विक नेविगेशन प्रणालियों में होता है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t12_scene3]
सेकंड (s): समय का SI मात्रक।
ताप का मापन और तापमापी के प्रकार
ताप किसी वस्तु की उष्णता या शीतलता की माप है। यह हमें बताता है कि कोई वस्तु कितनी गर्म या कितनी ठंडी है।
- ताप की परिभाषा:
- बर्फ का ताप उबलते पानी की तुलना में कम होता है।
- ताप का व्यवहारिक मात्रक डिग्री सेल्सियस (°C) है।
- ताप का SI मात्रक केल्विन (K) है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t13_scene1]
- सेल्सियस और केल्विन स्केल में संबंध:
- \( t \text{ °C} = (273 + t) \text{ K} \)
- उदाहरण: \(40 \text{ °C} = (273 + 40) \text{ K} = 313 \text{ K}\)
- तापमापी (Thermometer): ताप मापने के लिए उपयोग किया जाने वाला उपकरण।
- तापमापी के प्रकार:
- साधारण तापमापी (Ordinary Thermometer):
- इसमें एक मोटी दीवार वाली, बारीक केशिका नली होती है जिसके एक सिरे पर बल्ब में पारा भरा होता है।
- ताप बढ़ने पर पारा फैलता है और नली में ऊपर चढ़ता है; ताप कम होने पर सिकुड़ता है।
- केशिका नली की बाहरी सतह पर डिग्री सेल्सियस (°C) के चिन्ह होते हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t13_scene2]
- ज्वर तापमापी (Clinical Thermometer): (डॉक्टरी तापमापी)
- मानव शरीर का ताप मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
- साधारण तापमापी के समान, लेकिन इसकी केशिका नली बल्ब के पास संकरी और घुमावदार ('किंक') होती है।
- यह घुमाव पारे को तापमापी को शरीर से हटाने के बाद भी नीचे गिरने से रोकता है, जिससे पाठ्यांक लेना आसान होता है।
- स्वस्थ मानव शरीर का ताप \(37 \text{ °C}\) या \(98.6 \text{ °F}\) होता है।
- इसमें आमतौर पर \(35 \text{ °C}\) से \(42 \text{ °C}\) तक के चिन्ह अंकित होते हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t13_scene3]
- न्यूनतम-उच्चतम तापमापी (Minimum-Maximum Thermometer):
- किसी निश्चित समय अंतराल में किसी स्थान के न्यूनतम और अधिकतम ताप को ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- मौसम विज्ञान केंद्रों और बागवानी में उपयोगी है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t13_scene4]
ताप: किसी वस्तु की उष्णता या शीतलता की माप। SI मात्रक: केल्विन (K)।
ज्वर तापमापी में 'किंक' (संकरी घुमावदार नली) पारे को वापस बल्ब में गिरने से रोकता है, जिससे पाठ्यांक लेना आसान होता है।
मापन में भारत सरकार के माप-तौल विभाग की भूमिका
भारत में मात्रकों के मानकों के रखरखाव और मापन उपकरणों की शुद्धता सुनिश्चित करने में भारत सरकार के माप-तौल विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- राष्ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला (NPL), नई दिल्ली:
- यह भारत में मात्रकों के मानकों के रखरखाव का उत्तरदायित्व संभालती है।
- यहाँ मानक मीटर, मानक किलोग्राम और समय के मानक (जैसे परमाणु घड़ी) के प्रतिरूप सुरक्षित रखे गए हैं। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t14_scene1]
- आकाशवाणी पर समाचार से पहले सुनाई देने वाली 'पिप-पिप' ध्वनि समय की सही सूचना देती है, जो NPL द्वारा प्रदान की जाती है।
- माप-तौल विभाग का कार्य:
- यह सुनिश्चित करता है कि बाजार में उपयोग होने वाले मीटर छड़, बाट, तुला आदि मानकों के अनुरूप हों।
- मीटर छड़ की पहचान:
- सही मीटर छड़ के दोनों ओर \( \leftarrow \rightarrow \) जैसे चिन्ह बने होते हैं।
- इस पर माप-तौल विभाग की मोहर लगी होती है। [IMAGE: cg_c6_science_ch06_t10_scene3]
- सही बाट और तुला की पहचान:
- तुला दण्ड पर केन्द्रीय अक्ष के दोनों ओर माप-तौल विभाग की मोहर लगी होनी चाहिए।
- सही बाट के ऊपर उसका भार लिखा होता है और उसकी तली में एक छिद्र होता है जिसमें सीसा भरा होता है। इस पर भी माप-तौल विभाग की मोहर लगी होती है।
- मोहर न होने पर बाटों से कम या अधिक तौला जा सकता है।
- प्रमाणीकरण:
- भारत के समस्त दुकानदारों को अपनी मीटर छड़, बाटों और तराजू का प्रतिवर्ष प्रमाणीकरण (Calibration) माप-तौल विभाग के मानकों व निर्देशों के अनुसार कराना होता है।
उपभोक्ता के रूप में, हमें हमेशा माप-तौल विभाग की मोहर लगे हुए उपकरणों से ही खरीदारी करनी चाहिए ताकि सही मापन सुनिश्चित हो सके।