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पदार्थों का पृथक्करण
Chhattisgarh · Class 6 · 🔬 Science · Chapter 4

पदार्थों का पृथक्करण

मिश्रण और उनके अवयवपृथक्करण की आवश्यकतापृथक्करण की विभिन्न विधियाँजल शुद्धिकरणएक से अधिक विधियों का प्रयोग

यह अध्याय छात्रों को मिश्रणों, उनके अवयवों और उन्हें अलग करने की विभिन्न विधियों जैसे हाथ से बीनना, चालना, उड़ावनी, चुम्बकीय पृथक्करण, निथारना, छानना, वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण, आसवन और ऊर्ध्वपातन से परिचित कराता है। यह दैनिक जीवन में पृथक्करण की आवश्यकता और जल शोधन संयंत्रों में इसके उपयोग पर भी प्रकाश डालता है। यह छात्रों को पदार्थों के गुणों के आधार पर पृथक्करण की विधियों का चयन करना सिखाता है।

मिश्रण और पृथक्करण

मिश्रण दो या दो से अधिक पदार्थों का संयोजन होता है जहाँ पदार्थ रासायनिक रूप से संयोजित नहीं होते और अपने मूल गुणों को बनाए रखते हैं।

  • मिश्रण के अवयव: वे पदार्थ जिनसे मिलकर मिश्रण बनता है।
  • उदाहरण: शरबत (नींबू का रस, शक्कर, पानी), समुद्री जल (जल, विभिन्न लवण)।
  • मिश्रण के प्रकार:
  • ठोस-ठोस मिश्रण: चावल में कंकड़, रेत में लोहे का चूर्ण।
  • ठोस-द्रव मिश्रण: पानी में मिट्टी, पानी में रेत।
  • द्रव-द्रव मिश्रण: तेल और पानी, नींबू पानी।
  • गैस-गैस मिश्रण: वायु (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, अन्य गैसें)।
  • गैस-ठोस मिश्रण: मोटर वाहन से निकलने वाला धुआँ (गैसें + कार्बन कण)।
  • पृथक्करण: मिश्रण के अवयवों को अलग करने की प्रक्रिया।
  • यह अवयवों के भौतिक गुणों में अंतर पर आधारित होती है।

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📖परिभाषा

मिश्रण: दो या दो से अधिक पदार्थ जब किसी भी अनुपात में एक साथ मिलते हैं और अपने मूल गुणों को बनाए रखते हैं, तो वह मिश्रण कहलाता है।

📖परिभाषा

पृथक्करण: किसी मिश्रण के विभिन्न अवयवों को उचित विधि या विधियों का उपयोग करके अलग करने की प्रक्रिया को पृथक्करण कहते हैं।

पृथक्करण की आवश्यकता

मिश्रणों से पदार्थों को अलग करना कई कारणों से आवश्यक है:

  1. अवांछनीय अवयवों को हटाने के लिए:
  • हानिकारक या अनुपयोगी पदार्थों को दूर करना
  • उदाहरण: चिमनियों से धुएँ से बिना जला कार्बन और राख के कणों को अलग करना ताकि वायु प्रदूषण कम हो। जल संयंत्रों में नदियों के जल से अघुलनशील अशुद्धियों और सूक्ष्म जीवों को हटाकर पानी को पीने योग्य बनाना। चावल से कंकड़ हटाना।
  1. उपयोगी पदार्थ प्राप्त करने के लिए:
  • मिश्रण में से वांछित या मूल्यवान घटक को निकालना
  • उदाहरण: समुद्र के पानी का वाष्पीकरण करके साधारण नमक प्राप्त करना। अनाज से भूसा अलग करना।
  1. शुद्ध पदार्थ प्राप्त करने के लिए:
  • किसी पदार्थ को उसके शुद्धतम रूप में प्राप्त करना
  • उदाहरण: गन्ने के रस से शक्कर के रवे (क्रिस्टल) प्राप्त करना, जबकि अशुद्धियाँ रस में ही रह जाती हैं। प्रयोगशाला में शुद्ध रसायन प्राप्त करना।

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महत्त्वपूर्ण

पृथक्करण की विधि का चुनाव मिश्रण के अवयवों के भौतिक गुणों में अंतर (जैसे आकार, घनत्व, चुम्बकीय गुण, घुलनशीलता, क्वथनांक) पर निर्भर करता है।

ठोस-ठोस मिश्रण के पृथक्करण की विधियाँ

ठोस-ठोस मिश्रणों को अलग करने के लिए कई विधियाँ उपयोग की जाती हैं, जो उनके कणों के आकार, रंग, घनत्व या चुम्बकीय गुणों पर आधारित होती हैं।

  1. हाथ से बीनना (Hand-picking):
  • सिद्धांत: मिश्रण के अवयवों के आकार, रंग या आकृति में स्पष्ट अंतर होता है।
  • प्रक्रिया: बड़े, अवांछित कणों को हाथ से चुनकर अलग किया जाता है।
  • उदाहरण: चावल/दाल से कंकड़, पत्थर या अन्य अशुद्धियों को अलग करना।
  • उपयोग: घरेलू स्तर पर छोटे पैमाने पर।
  1. चालना (Sieving):
  • सिद्धांत: मिश्रण के अवयवों के आकार में अंतर
  • प्रक्रिया: मिश्रण को एक जालीदार छलनी से गुजारा जाता है। बड़े कण छलनी पर रह जाते हैं जबकि छोटे कण छिद्रों से निकल जाते हैं।
  • उदाहरण: आटे से चोकर अलग करना, रेत से कंकड़/पत्थर अलग करना (भवन निर्माण में)।
  • महत्व: आटे को चालने से चोकर (रुक्षांश) अलग हो जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। अतः रोटी बनाने से पूर्व आटे को चालना उचित नहीं है।
  • [IMAGE: methods_of_separation_sieving_fig42]
  1. उड़ावनी एवं फटकना (Winnowing and Threshing):
  • सिद्धांत: मिश्रण के अवयवों के घनत्व (भार) में अंतर और हवा का उपयोग।
  • उड़ावनी (Winnowing):
  • प्रक्रिया: किसान ऊँचे स्थान पर खड़े होकर अनाज और भूसे के मिश्रण को नीचे गिराते हैं। भारी अनाज सीधे नीचे गिरता है, जबकि हल्का भूसा हवा के साथ दूर उड़ जाता है।
  • उदाहरण: धान से भूसा अलग करना।
  • [IMAGE: winnowing_fig411]
  • फटकना:
  • प्रक्रिया: सूप में अनाज को हिलाकर फटकते हैं, जिससे हल्के कण (जैसे भूसा) आगे आ जाते हैं और भारी अनाज पीछे रह जाता है।
  • उदाहरण: अनाज से भूसा या धूल अलग करना।
  1. चुम्बकीय पृथक्करण (Magnetic Separation):
  • सिद्धांत: मिश्रण के एक अवयव का चुम्बकीय गुण होना।
  • प्रक्रिया: चुम्बक को मिश्रण के ऊपर घुमाया जाता है। चुम्बकीय पदार्थ (जैसे लोहे का चूर्ण) चुम्बक से चिपक जाते हैं और अलग हो जाते हैं, जबकि अचुम्बकीय पदार्थ शेष रह जाते हैं।
  • उदाहरण: रेत और लोहे के चूर्ण का पृथक्करण। कारखानों में कचरे के ढेर से लोहे के टुकड़ों को विद्युत चुम्बक द्वारा अलग करना।
  • [IMAGE: magnetic_separation_fig44] [IMAGE: separation_by_electromagnet_fig48]
💡सुझाव

ठोस-ठोस मिश्रणों के पृथक्करण के लिए, अवयवों के आकार, रंग, घनत्व या चुम्बकीय गुणों में अंतर को पहचानना महत्वपूर्ण है।

ठोस-द्रव मिश्रण के पृथक्करण की विधियाँ (अघुलनशील ठोस)

ये विधियाँ उन मिश्रणों के लिए हैं जहाँ ठोस पदार्थ द्रव में घुलनशील नहीं होता।

  1. अवसादन (Sedimentation) और निस्तारण (Decantation):
  • सिद्धांत: ठोस कणों का द्रव से भारी होना और गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ जाना।
  • अवसादन:
  • प्रक्रिया: मिश्रण को स्थिर छोड़ दिया जाता है। भारी, अघुलनशील ठोस कण बीकर की तली में बैठ जाते हैं, जिसे अवसाद (sediment) कहते हैं।
  • उदाहरण: पानी और रेत के मिश्रण में रेत का नीचे बैठना।
  • निस्तारण:
  • प्रक्रिया: अवसादन के बाद, ऊपरी स्वच्छ द्रव को सावधानी से दूसरे पात्र में उँडेल लिया जाता है, जिससे अवसाद हिलता नहीं है।
  • उदाहरण: रेत और पानी के मिश्रण से पानी को अलग करना, दाल धोने के बाद पानी को निथारना।
  • [IMAGE: sedimentation_and_decantation_fig46]
  1. भारण (Loading):
  • सिद्धांत: कुछ पदार्थों (जैसे फिटकरी) का उपयोग करके निलंबित कणों को भारी बनाना ताकि वे तेजी से नीचे बैठ जाएँ।
  • प्रक्रिया: गंदले जल में फिटकरी जैसे पदार्थ को मिलाया जाता है। फिटकरी मिट्टी के महीन कणों को आपस में जोड़कर भारी कर देती है, जिससे वे तेजी से नीचे बैठ जाते हैं। फिर निस्तारण द्वारा स्वच्छ जल अलग कर लिया जाता है।
  • उदाहरण: गंदले पानी को साफ करना।
  • [IMAGE: loading_bh_ran_fig43]
  1. अपकेंद्रण (Centrifugation):
  • सिद्धांत: घनत्व में अंतर के कारण कणों को तेजी से अलग करना।
  • प्रक्रिया: मिश्रण को बहुत तेज गति से घुमाया जाता है। भारी कण केंद्र से दूर बाहर की ओर धकेल दिए जाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं, जबकि हल्के कण ऊपर रह जाते हैं।
  • उदाहरण: दूध से क्रीम अलग करना, प्रयोगशालाओं में रक्त या मूत्र के नमूनों से कणों को अलग करना। कपड़े सुखाने वाली मशीन में पानी निकालना।
  • [IMAGE: hand_driven_centrifuge_fig413]
  1. छानना (Filtration):
  • सिद्धांत: अघुलनशील ठोस कणों का फिल्टर पेपर या जाली के छिद्रों से बड़ा होना
  • प्रक्रिया: मिश्रण को फिल्टर पेपर या किसी अन्य फिल्टर माध्यम से गुजारा जाता है। ठोस कण फिल्टर पर रुक जाते हैं (अवशेष), जबकि द्रव नीचे निकल जाता है (निस्यंद)।
  • उदाहरण: चाय से चायपत्ती अलग करना, गंदले पानी को फिल्टर पेपर से छानना, जल शोधन संयंत्रों में पानी को शुद्ध करना।
  • [IMAGE: filtration_process_fig45] [IMAGE: filtration_methods_fig410]
🚧ग़लत धारणा

छात्र अक्सर अवसादन और निस्तारण को एक ही प्रक्रिया मान लेते हैं। याद रखें, अवसादन कणों का नीचे बैठना है, जबकि निस्तारण ऊपरी द्रव को अलग करना है।

घुलनशील ठोस-द्रव मिश्रण के पृथक्करण की विधियाँ

ये विधियाँ उन मिश्रणों के लिए हैं जहाँ ठोस पदार्थ द्रव में घुलनशील होता है (जैसे नमक पानी में)।

  1. वाष्पीकरण (Evaporation):
  • सिद्धांत: द्रव का वाष्प में बदलना जबकि ठोस पीछे रह जाता है।
  • प्रक्रिया: मिश्रण को गर्म किया जाता है। द्रव (विलायक) वाष्प बनकर उड़ जाता है, और ठोस (विलेय) पात्र में शेष रह जाता है।
  • उदाहरण: समुद्री जल से नमक प्राप्त करना, नमक के घोल से नमक अलग करना।
  • [IMAGE: separation_by_evaporation_fig41]
  1. क्रिस्टलीकरण (Crystallization):
  • सिद्धांत: गर्म संतृप्त विलयन को ठंडा करने पर शुद्ध ठोस के क्रिस्टल प्राप्त होते हैं।
  • प्रक्रिया: अशुद्ध ठोस को एक उपयुक्त विलायक में घोला जाता है और गर्म करके एक संतृप्त विलयन बनाया जाता है। इस विलयन को छानकर अशुद्धियाँ दूर की जाती हैं और फिर ठंडा होने दिया जाता है। ठंडा होने पर शुद्ध ठोस के क्रिस्टल बन जाते हैं।
  • उदाहरण: नीलाथोथा (कॉपर सल्फेट) के क्रिस्टल प्राप्त करना, शक्कर के रवे बनाना।
  • लाभ: वाष्पीकरण से अधिक शुद्ध ठोस प्राप्त होता है।
  • [IMAGE: copper_sulphate_crystallization_fig47]
  1. आसवन (Distillation):
  • सिद्धांत: द्रव के क्वथनांक में अंतर का उपयोग करके विलेय और विलायक को अलग करना। इसमें वाष्पीकरण और संघनन दोनों प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
  • प्रक्रिया: मिश्रण को गर्म किया जाता है। द्रव वाष्प में बदल जाता है (वाष्पीकरण)। इस वाष्प को ठंडा करके वापस द्रव में बदला जाता है (संघनन), जिसे आसुत जल कहते हैं। ठोस (विलेय) फ्लास्क में ही रह जाता है।
  • उदाहरण: नमक के घोल से शुद्ध जल प्राप्त करना, शराब को शुद्ध करना।
  • उपयोग: शुद्ध जल प्राप्त करने और दो भिन्न क्वथनांक वाले द्रवों को अलग करने में।
  • [IMAGE: hand_driven_centrifuge_fig413] (यह चित्र आसवन उपकरण का है, हालाँकि asset_key नाम में 'centrifuge' है, चित्र 4.13 आसवन दर्शाता है)
याद रखें

वाष्पीकरण केवल द्रव को वाष्प में बदलता है, जबकि संघनन वाष्प को वापस द्रव में बदलता है। आसवन इन दोनों का संयोजन है।

ऊर्ध्वपातन (Sublimation)

यह एक विशेष विधि है जो कुछ ठोस पदार्थों के अद्वितीय गुण पर आधारित है।

  • सिद्धांत: कुछ ठोस पदार्थ गर्म करने पर बिना द्रव अवस्था में बदले सीधे गैसीय अवस्था में बदल जाते हैं, और ठंडा करने पर गैस से सीधे ठोस अवस्था में आ जाते हैं। इस प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं।
  • प्रक्रिया: मिश्रण को गर्म किया जाता है। ऊर्ध्वपातित होने वाला पदार्थ वाष्प में बदल जाता है और ठंडी सतह पर जम जाता है, जबकि दूसरा पदार्थ पात्र में ही रह जाता है।
  • उदाहरण:
  • नौसादर (अमोनियम क्लोराइड) और नमक का मिश्रण।
  • कपूर और रेत का मिश्रण।
  • आयोडीन और नमक का मिश्रण।
  • नैफ्थलीन (डामर गोली) और रेत का मिश्रण।
  • रासायनिक समीकरण (नौसादर के लिए):

$$ \text{नौसादर ठोस} \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} \text{नौसादर गैस} \xrightarrow{\text{ठंडा करने पर}} \text{नौसादर ठोस} $$

  • [IMAGE: cg_c6_science_ch04_t6_scene1] [IMAGE: cg_c6_science_ch04_t6_scene2] [IMAGE: cg_c6_science_ch04_t6_scene3] [IMAGE: cg_c6_science_ch04_t6_scene4]
महत्त्वपूर्ण

ऊर्ध्वपातन उन मिश्रणों के लिए उपयोगी है जिनमें एक घटक ऊर्ध्वपातित होता है और दूसरा नहीं। यह द्रव अवस्था को छोड़ देता है

एक से अधिक विधियों का उपयोग करके पृथक्करण

जब किसी मिश्रण में दो से अधिक अवयव होते हैं या अवयवों के गुण जटिल होते हैं, तो उन्हें पृथक करने के लिए एक से अधिक पृथक्करण विधियों का संयोजन उपयोग किया जाता है। इन विधियों को एक विशिष्ट क्रम में लागू किया जाता है।

  • उदाहरण: लौह चूर्ण, रेत और नमक के मिश्रण का पृथक्करण।
  1. चुम्बकीय पृथक्करण: मिश्रण को कागज पर फैलाकर चुम्बक घुमाएँ। लौह चूर्ण चुम्बक से चिपक कर अलग हो जाएगा।
  2. घोलना: शेष मिश्रण (रेत और नमक) को बीकर में लेकर पानी में घोलें। नमक पानी में घुल जाएगा, जबकि रेत अघुलनशील रहेगी।
  3. छानना: नमक के घोल और रेत के मिश्रण को फिल्टर पेपर से छानें। रेत फिल्टर पेपर पर रुक जाएगी (अवशेष), और नमक का घोल (निस्यंद) नीचे आ जाएगा।
  4. वाष्पीकरण: नमक के घोल को गर्म करें। पानी वाष्प बनकर उड़ जाएगा, और शुद्ध नमक पात्र में शेष रह जाएगा।
  • इस प्रकार, लौह चूर्ण, रेत और नमक तीनों को अलग-अलग कर लिया जाता है।

[IMAGE: cg_c6_science_ch04_t7_scene1] [IMAGE: cg_c6_science_ch04_t7_scene4]

💡सुझाव

जटिल मिश्रणों के पृथक्करण में, सही क्रम में विधियों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक विधि एक विशिष्ट गुण का लाभ उठाती है।

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