हमारी पृथ्वी
यह अध्याय हमारी पृथ्वी की संरचना, इसके विभिन्न क्षेत्रों (स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल) और सौर मंडल में इसकी स्थिति का परिचय देता है। छात्र पृथ्वी के आंतरिक परतों - भूपर्पटी, प्रावार और क्रोड - के बारे में सीखते हैं। यह अध्याय जीवन के लिए आवश्यक मूलभूत आवश्यकताओं जैसे भोजन, जल, वायु, मिट्टी और प्रकाश पर भी प्रकाश डालता है, और बताता है कि क्यों पृथ्वी सौर मंडल का एक अद्वितीय ग्रह है।
पृथ्वी की संरचना
पृथ्वी एक गोलाकार पिंड है, लेकिन यह खोखली नहीं बल्कि ठोस है। इसकी सतह समतल नहीं है, बल्कि कहीं ऊँची (पहाड़) और कहीं नीची (घाटियाँ) है। वैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से इसकी आंतरिक संरचना को समझा है।
पृथ्वी को प्याज की तरह तीन प्रमुख परतों में बांटा गया है:
- भूपर्पटी (Crust):
- यह पृथ्वी की सबसे बाहरी और सबसे पतली परत है।
- महाद्वीप और महासागर इसी परत पर स्थित हैं।
- यह वह परत है जहाँ हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी पदार्थ मिलते हैं: वायु, जल, भोजन, मिट्टी और खनिज।
- इसकी ऊपरी परत में मृत पौधों और जंतुओं के सड़े-गले अवशेष होते हैं, जो इसे उपजाऊ बनाते हैं।
- विभिन्न खनिज जैसे लोहा, एल्युमीनियम, ताँबा, कोयला, चूना-पत्थर, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि इसी परत से प्राप्त होते हैं।
- प्रावार (Mantle):
- यह भूपर्पटी के ठीक नीचे स्थित है।
- यह गर्म, पिघली हुई चट्टानों से बनी एक मोटी परत है।
- इसे पृथ्वी की मध्य परत भी कहते हैं।
- इसमें पिघली हुई चट्टानें विभिन्न गैसों सहित पाई जाती हैं।
- क्रोड (Core):
- यह पृथ्वी का सबसे भीतरी भाग है, जो प्रावार के नीचे स्थित है।
- यह प्रावार से भी अधिक गर्म है।
- माना जाता है कि इसके केंद्रीय भाग में लोहा और निकैल धातुएँ ठोस रूप में हैं।
- जबकि इसके बाहरी भाग में लोहा पिघले हुए रूप में पाया जाता है।
पृथ्वी की आंतरिक संरचना को समझना भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं और संसाधनों की उपलब्धता के लिए महत्वपूर्ण है।
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पृथ्वी का आकार: पृथ्वी गोलाकार है, लेकिन इसकी सतह समतल या चिकनी नहीं है। यह कहीं ऊँची (पहाड़) और कहीं नीची (घाटियाँ) है।
भूपर्पटी: पृथ्वी की सबसे बाहरी और पतली परत, जिस पर महाद्वीप और महासागर स्थित हैं।
प्रावार: भूपर्पटी के नीचे गर्म पिघली चट्टानों से बनी मोटी मध्य परत।
क्रोड: पृथ्वी का सबसे भीतरी और अत्यधिक गर्म भाग, जिसमें लोहा और निकैल धातुएँ पाई जाती हैं।
पृथ्वी के क्षेत्र
पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाने वाले तीन प्रमुख क्षेत्र हैं, जिन्हें हम मंडल कहते हैं। ये तीनों मंडल आपस में जुड़े हुए हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं:
- जलमंडल (Hydrosphere):
- पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल का लगभग तीन-चौथाई (3/4) भाग जल से ढका है।
- इसमें समुद्र, झीलें, नदियाँ (द्रव रूप में) और ध्रुवों पर बर्फ (ठोस रूप में) शामिल हैं।
- यह क्षेत्र पृथ्वी का जलमंडल कहलाता है।
- ग्लोब पर नीला रंग जलमंडल को दर्शाता है, जबकि सफेद रंग ध्रुवों पर जमी बर्फ को।
- स्थलमंडल (Lithosphere):
- पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल का लगभग एक-चौथाई (1/4) भाग भूमि या जमीन है।
- इस क्षेत्र में पहाड़, घाटियाँ, मैदान और मरुस्थल जैसी विभिन्न स्थलाकृतियाँ शामिल हैं।
- ग्लोब पर पीले, भूरे या हरे रंग से स्थलमंडल को दर्शाया जाता है।
- यह वह क्षेत्र है जहाँ जीव निवास करते हैं और अधिकांश मानवीय गतिविधियाँ होती हैं।
- वायुमंडल (Atmosphere):
- पृथ्वी के चारों ओर वायु का घेरा वायुमंडल कहलाता है।
- हमें हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन हम इसे महसूस कर सकते हैं।
- वायुमंडल की मोटाई पृथ्वी के आकार की तुलना में बहुत कम है।
- यह पृथ्वी के लिए सुरक्षात्मक आवरण का कार्य करता है, जो हमें सूर्य की हानिकारक किरणों और अत्यधिक ताप से बचाता है।
- वायुमंडल में विभिन्न गैसें, जलवाष्प और धूल के कण होते हैं।
क्रियाकलाप 1: वायु में जलवाष्प की उपस्थिति
- अवलोकन: ठंडे गिलास की बाहरी सतह पर पानी की बूँदें दिखाई देती हैं।
- कारण: वायु में उपस्थित जलवाष्प ठंडी सतह के संपर्क में आकर संघनित होकर पानी की बूँदों में बदल जाती है।
- निष्कर्ष: वायु में जलवाष्प उपस्थित होती है।
क्रियाकलाप 2: वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति
- प्रयोग: चूने के पानी वाली बोतल में नली 'ख' से हवा खींचने पर नली 'क' से वायु चूने के पानी में बुलबुलों के रूप में जाती है।
- अवलोकन: कुछ समय बाद चूने का पानी दूधिया हो जाता है।
- कारण: कार्बन डाइऑक्साइड गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
- निष्कर्ष: वायु में कार्बन डाइऑक्साइड गैस मौजूद होती है।
क्रियाकलाप 3: वायु में धूल के कणों की उपस्थिति
- प्रयोग: अंधेरे कमरे में एक संकरी झिरी से आती सूर्य की किरणों को देखना।
- अवलोकन: सूर्य की किरणों में छोटे-छोटे चमकीले कण दिखाई देते हैं।
- निष्कर्ष: ये कण वायु में उपस्थित धूल के कण हैं। इनकी मात्रा स्थान और समय के साथ बदल सकती है।
ये तीनों मंडल मिलकर पृथ्वी पर जीवन को संभव बनाते हैं।
पृथ्वी का जलमंडल: पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल का लगभग 3/4 भाग जल से ढका है।
पृथ्वी का स्थलमंडल: पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल का लगभग 1/4 भाग भूमि है।
वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल की परिभाषाएँ और उनके मुख्य घटक अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। क्रियाकलाप 2 (कार्बन डाइऑक्साइड की पहचान) एक महत्वपूर्ण प्रायोगिक प्रश्न है।
वायु किससे बनी है?
वायु विभिन्न गैसों का मिश्रण है। यह पृथ्वी के चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षात्मक आवरण बनाती है।
वायु के मुख्य घटक:
- नाइट्रोजन (Nitrogen): लगभग 78%
- ऑक्सीजन (Oxygen): लगभग 21%
- अन्य गैसें (Other Gases): लगभग 1% (इसमें कार्बन डाइऑक्साइड, आर्गन, नियॉन, हीलियम आदि शामिल हैं)
- जलवाष्प (Water Vapour): वायुमंडल में पानी का गैसीय रूप, जो संघनन से तरल बूंदों में बदल सकता है।
- धूल के कण (Dust Particles): इनकी मात्रा स्थान और समय के अनुसार बदलती रहती है। ये प्रकाश के प्रकीर्णन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे आकाश नीला दिखाई देता है।
वायुमंडल का महत्व:
- यह पृथ्वी के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण का कार्य करता है।
- यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करता है।
- यह पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित रखता है, जिससे जीवन संभव हो पाता है।
- इसमें ऑक्सीजन होती है, जो श्वसन के लिए अनिवार्य है।
- इसमें कार्बन डाइऑक्साइड होती है, जो पौधों के प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
याद रखें: वायुमंडल की मोटाई पृथ्वी के आकार की तुलना में बहुत कम है, लेकिन इसका महत्व बहुत अधिक है।
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वायुमंडल का 99% भाग लगभग 40 किलोमीटर की ऊँचाई तक पाया जाता है।
धूल के कण प्रकाश के प्रकीर्णन में भूमिका निभाते हैं, जिससे हमें आकाश नीला दिखाई देता है।
पृथ्वी तथा सौर मंडल
हमारा सौर मंडल सूर्य, ग्रहों और उनके उपग्रहों से मिलकर बना एक विशाल परिवार है।
सूर्य (Sun):
- यह हमारे सौर मंडल का केंद्र है।
- सूर्य एक तारा है, जो लगातार प्रकाश और ऊष्मा उत्सर्जित करता है।
- इसी प्रकाश और ऊष्मा के कारण पृथ्वी पर जीवन संभव है।
- सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण सभी ग्रह और अन्य आकाशीय पिंड इसके चारों ओर घूमते हैं।
ग्रह (Planets):
- ये वे आकाशीय पिंड हैं जो सूर्य के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं।
- इनमें अपना प्रकाश नहीं होता, ये सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं।
- सौर मंडल में 8 ग्रह हैं।
- सूर्य से बढ़ती दूरी के क्रम में ग्रह:
- बुध (Mercury)
- शुक्र (Venus) - पृथ्वी का सबसे निकटस्थ ग्रह
- पृथ्वी (Earth)
- मंगल (Mars)
- बृहस्पति (Jupiter)
- शनि (Saturn)
- अरुण (Uranus)
- वरुण (Neptune)
उपग्रह (Satellites):
- ये वे आकाशीय पिंड हैं जो किसी ग्रह के चारों ओर घूमते हैं।
- इनमें भी अपना प्रकाश नहीं होता, ये सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं।
- उपग्रह दो प्रकार के होते हैं:
- प्राकृतिक उपग्रह:
- वे आकाशीय पिंड जो किसी ग्रह की प्राकृतिक रूप से परिक्रमा करते हैं।
- बुध और शुक्र के अतिरिक्त सभी ग्रहों के अपने उपग्रह हैं।
- चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है।
- कृत्रिम उपग्रह:
- ये मानव द्वारा निर्मित होते हैं और रॉकेट की सहायता से अंतरिक्ष में स्थापित किए जाते हैं।
- ये किसी ग्रह की परिक्रमा करते हैं।
- उदाहरण: आर्यभट, भास्कर, एप्पल, इनसैट (ये सभी भारतीय कृत्रिम उपग्रह हैं)।
- उपयोग: दूरदर्शन और आकाशवाणी प्रसारण, टेलीफोन सेवाएँ, मौसम की भविष्यवाणी, भूगर्भीय सर्वेक्षण, अंतरिक्ष अनुसंधान आदि।
सौर मंडल (Solar System):
- सूर्य, सभी ग्रह और उनके उपग्रह मिलकर सौर मंडल या सौर परिवार का निर्माण करते हैं।
- सभी सदस्य एक-दूसरे के गुरुत्वाकर्षण बल से बंधे हुए हैं और एक व्यवस्थित तरीके से गति करते हैं।
प्लूटो ग्रह नहीं है:
- अंतर्राष्ट्रीय खगोल सम्मेलन में ग्रहों की नई परिभाषा तय की गई।
- इस परिभाषा के अनुसार, प्लूटो ग्रह की श्रेणी में नहीं आता।
आर्यभट:
- प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक (जन्म 476 ईस्वी, पाटलिपुत्र)।
- सर्वप्रथम बताया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन और रात होते हैं।
- बताया कि चंद्रमा पर अंधेरा है और वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है।
- उनकी पुस्तकें: "आर्यभटीय" (खगोलशास्त्र, रेखागणित, वर्गमूल, घनमूल) और "आर्यभट सिद्धांत" (दैनिक खगोलीय गणना)।
- भारत के पहले उपग्रह का नाम उनके सम्मान में "आर्यभट" रखा गया।
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ग्रहों की संख्या: सौर मंडल में कुल 8 ग्रह हैं।
सूर्य का सबसे निकटस्थ ग्रह बुध है, और पृथ्वी का सबसे निकटस्थ ग्रह शुक्र है।
ग्रहों के नाम सूर्य से दूरी के क्रम में याद रखना महत्वपूर्ण है। कृत्रिम उपग्रहों के उपयोग और आर्यभट के योगदान पर प्रश्न आ सकते हैं।
पृथ्वी पर जीवन के लिये मूल आवश्यकताएँ
पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए कुछ मूलभूत आवश्यकताएँ अनिवार्य हैं। ये आवश्यकताएँ सभी जीवधारियों (मनुष्य, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे) के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं:
- भोजन (Food):
- सभी जीवधारियों को कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो उन्हें भोजन से मिलती है।
- मनुष्य और जंतु अपना भोजन पेड़-पौधों या अन्य जंतुओं से प्राप्त करते हैं।
- हरे पेड़-पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
- जल (Water):
- जीवन के लिए जल अनिवार्य है।
- जीवधारियों के शरीर का अधिकांश भाग (लगभग 70%) जल होता है।
- शरीर में होने वाली सभी जैविक क्रियाओं के लिए जल आवश्यक है।
- क्रियाकलाप 4: जल में घुली वायु
- प्रयोग: परखनली में जल को गर्म करने पर बुलबुले ऊपर उठते हैं।
- निष्कर्ष: जल में वायु घुली होती है। इसी घुली हुई वायु से जलीय जीव (जैसे मछली) ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं।
- वायु (Air):
- भोजन और जल के अलावा, जीवित रहने के लिए वायु भी अनिवार्य है।
- श्वसन क्रिया में जीवधारी वायु से ऑक्सीजन गैस प्राप्त करते हैं।
- स्थलीय जीव अपने चारों ओर की वायु से ऑक्सीजन लेते हैं।
- जलीय जीव जल में घुली हुई वायु से ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं।
- मिट्टी (Soil):
- मिट्टी पौधों को सहारा देती है।
- यह पौधों को जल और अनिवार्य खनिज उपलब्ध कराती है।
- मिट्टी अनेक कीटों, केंचुओं और अन्य जीव-जंतुओं को आश्रय देती है।
- प्रकाश (Light):
- पौधों में भोजन का निर्माण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही होता है (प्रकाश संश्लेषण)।
- सूर्य से हमें प्रकाश के साथ-साथ ऊष्मा भी मिलती है, जो पृथ्वी पर तापमान को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
ये पाँचों आवश्यकताएँ पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व और विकास के लिए एक साथ महत्वपूर्ण हैं।
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जीवधारियों के शरीर के भार का लगभग 70% भाग जल होता है।
जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का उपयोग श्वसन के लिए करते हैं।
पृथ्वी: सौर परिवार का अद्वितीय ग्रह
सौर मंडल के आठ ग्रहों में से पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है। इसकी कुछ विशेष विशेषताओं के कारण इसे सौर परिवार का अद्वितीय ग्रह माना जाता है:
- उपयुक्त जलवायु: पृथ्वी की जलवायु मानव और अन्य जीवों के जीवित रहने के लिए अनुकूल है। यहाँ न तो बहुत अधिक गर्मी है और न ही बहुत अधिक ठंड।
- ऑक्सीजन की उपस्थिति: पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन गैस पर्याप्त मात्रा में उपस्थित है, जो जीवन के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
- सुरक्षात्मक वायुमंडल: पृथ्वी का वायुमंडल एक सुरक्षात्मक आवरण बनाता है। यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करता है और पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित रखता है, जिससे अत्यधिक गर्मी या ठंड से बचाव होता है।
- जल की विशाल मात्रा: पृथ्वी पर विशाल मात्रा में जल विभिन्न रूपों (ठोस, द्रव एवं जलवाष्प) में उपलब्ध है। जल जीवन के लिए एक मूलभूत आवश्यकता है।
- जीवन की आवश्यक सुविधाएँ: पृथ्वी जीवधारियों को भोजन, जल, वायु, मिट्टी और प्रकाश जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराती है।
इन सभी विशिष्टताओं का संयोजन पृथ्वी को सौर मंडल में एक विशेष स्थान दिलाता है, जहाँ जीवन फल-फूल सकता है।
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'पृथ्वी को अद्वितीय ग्रह क्यों माना जाता है?' यह प्रश्न अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है। इसके सभी पाँच मुख्य बिंदुओं को याद रखें।
पृथ्वी पर जल तीन रूपों में मिलता है: ठोस (बर्फ), द्रव (पानी) और गैस (जलवाष्प)।