भिन्न
यह अध्याय छात्रों को भिन्न (fractions) की अवधारणा से परिचित कराता है, जिसमें समान भिन्न, समतुल्य भिन्न, उचित भिन्न, अनुचित भिन्न और मिश्रित भिन्न शामिल हैं। छात्र भिन्नों की तुलना करना, उन्हें आरोही और अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना सीखते हैं। इसके अतिरिक्त, अध्याय में भिन्नों के जोड़, घटाव, गुणा और भाग की संक्रियाओं को भी समझाया गया है। यह अध्याय दैनिक जीवन में भिन्नों के उपयोग को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
भिन्न (FRACTIONS)
एक भिन्न किसी पूर्ण वस्तु के बराबर भागों में से कुछ भागों को दर्शाती है।
- उदाहरण: यदि एक रोटी के 4 बराबर टुकड़े किए जाएँ और उनमें से 1 टुकड़ा लिया जाए, तो इसे \( \frac{1}{4} \) (एक-चौथाई) भिन्न से दर्शाया जाता है।
- भिन्न में दो भाग होते हैं:
- अंश (Numerator): ऊपर वाली संख्या, जो लिए गए भागों की संख्या बताती है।
- हर (Denominator): नीचे वाली संख्या, जो कुल बराबर भागों की संख्या बताती है।
- उदाहरण: \( \frac{3}{5} \) में, 3 अंश है और 5 हर है। इसका मतलब है कि कुल 5 बराबर भागों में से 3 भाग लिए गए हैं।
- भिन्न का महत्व: भिन्न हमें उन मात्राओं को व्यक्त करने में मदद करती है जो पूर्ण संख्याएँ नहीं होतीं, जैसे किसी वस्तु का आधा, चौथाई या तीन-चौथाई हिस्सा।
- दैनिक जीवन में भिन्न:
- खाना बाँटना (जैसे पूड़ियाँ, केक)
- समय बताना (जैसे आधा घंटा, चौथाई घंटा)
- माप (जैसे आधा मीटर कपड़ा)
- भिन्न को समझना:
- किसी भी वस्तु को जितने बराबर भागों में बांटा जाता है, वह हर होता है।
- उन बराबर भागों में से जितने भाग लिए जाते हैं, वह अंश होता है।
- भिन्न हमेशा पूर्ण वस्तु के बराबर भागों को दर्शाती है।
याद रखें: भिन्न के अंश और हर दोनों हमेशा पूर्ण संख्याएँ होती हैं, और हर कभी भी शून्य नहीं हो सकता।
समतुल्य भिन्न
समतुल्य भिन्न वे भिन्न होती हैं जो देखने में अलग-अलग लग सकती हैं, लेकिन उनका मान एक ही होता है।
- उदाहरण: \( \frac{1}{2} \), \( \frac{2}{4} \), \( \frac{3}{6} \) सभी समतुल्य भिन्न हैं क्योंकि वे सभी एक ही मात्रा (आधा) को दर्शाती हैं।
- समतुल्य भिन्न बनाने के नियम:
- गुणा द्वारा: किसी भिन्न के अंश और हर दोनों को एक ही गैर-शून्य संख्या से गुणा करने पर समतुल्य भिन्न प्राप्त होती है।
- उदाहरण: \( \frac{1}{2} \) को \( \frac{2}{2} \) से गुणा करने पर \( \frac{1 \times 2}{2 \times 2} = \frac{2}{4} \) प्राप्त होता है।
- भाग द्वारा: किसी भिन्न के अंश और हर दोनों को एक ही गैर-शून्य संख्या से भाग देने पर भी समतुल्य भिन्न प्राप्त होती है।
- उदाहरण: \( \frac{6}{8} \) को \( \frac{2}{2} \) से भाग देने पर \( \frac{6 \div 2}{8 \div 2} = \frac{3}{4} \) प्राप्त होता है।
- समतुल्य भिन्नों की पहचान:
- दो भिन्नें \( \frac{a}{b} \) और \( \frac{c}{d} \) समतुल्य होती हैं यदि \( a \times d = b \times c \) (तिर्यक गुणा नियम)।
- उदाहरण: \( \frac{1}{2} \) और \( \frac{2}{4} \) समतुल्य हैं क्योंकि \( 1 \times 4 = 2 \times 2 \) (यानी \( 4 = 4 \))।
- सरलतम रूप (Lowest Term):
- जब किसी भिन्न के अंश और हर का 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड (common factor) न हो, तो वह भिन्न अपने सरलतम रूप में होती है।
- उदाहरण: \( \frac{6}{8} \) का सरलतम रूप \( \frac{3}{4} \) है।
परीक्षा सुझाव: समतुल्य भिन्न ज्ञात करने के लिए अंश और हर को हमेशा एक ही संख्या से गुणा या भाग करें। अलग-अलग संख्याओं से करने पर गलत उत्तर मिलेगा।
भिन्नों का क्रमण
भिन्नों को उनके मान के अनुसार बढ़ते (आरोही) या घटते (अवरोही) क्रम में व्यवस्थित करना 'भिन्नों का क्रमण' कहलाता है।
- स्थिति 1: जब अंश समान हों
- यदि भिन्नों के अंश समान हों, तो जिस भिन्न का हर छोटा होता है, वह भिन्न बड़ी होती है।
- उदाहरण: \( \frac{1}{2} > \frac{1}{3} > \frac{1}{4} \) (क्योंकि 2 < 3 < 4, लेकिन भिन्न का मान उल्टा होता है)।
- स्थिति 2: जब हर समान हों
- यदि भिन्नों के हर समान हों, तो जिस भिन्न का अंश बड़ा होता है, वह भिन्न बड़ी होती है।
- उदाहरण: \( \frac{3}{5} > \frac{2}{5} > \frac{1}{5} \) (क्योंकि 3 > 2 > 1)।
- स्थिति 3: जब अंश और हर दोनों असमान हों
- इस स्थिति में, भिन्नों की तुलना करने के लिए उन्हें समान हर वाली समतुल्य भिन्नों में बदला जाता है।
- चरण:
- सभी भिन्नों के हरों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात करें।
- प्रत्येक भिन्न को इस LCM के बराबर हर वाली समतुल्य भिन्न में बदलें।
- अब, सभी भिन्नों के हर समान हो गए हैं, तो उनके अंशों की तुलना करके उन्हें क्रमबद्ध करें (स्थिति 2 के अनुसार)।
- उदाहरण: \( \frac{2}{3} \) और \( \frac{3}{4} \) की तुलना करें।
- हर 3 और 4 का LCM = 12।
- \( \frac{2}{3} = \frac{2 \times 4}{3 \times 4} = \frac{8}{12} \)
- \( \frac{3}{4} = \frac{3 \times 3}{4 \times 3} = \frac{9}{12} \)
- अब \( \frac{8}{12} \) और \( \frac{9}{12} \) की तुलना करें। क्योंकि 9 > 8, इसलिए \( \frac{9}{12} > \frac{8}{12} \), अर्थात \( \frac{3}{4} > \frac{2}{3} \) ।
सामान्य गलती: जब अंश समान हों, तो छात्र अक्सर बड़े हर वाली भिन्न को बड़ा मान लेते हैं, जो गलत है। याद रखें, हर जितना बड़ा होगा, टुकड़े उतने ही छोटे होंगे।
भिन्नों का जोड़ना और घटाना
भिन्नों को जोड़ने या घटाने के लिए उनका हर समान होना अनिवार्य है। यदि हर समान नहीं हैं, तो उन्हें पहले समान हर वाली समतुल्य भिन्नों में बदलना होगा।
- स्थिति 1: जब हर समान हों
- समान हर वाली भिन्नों को जोड़ने या घटाने के लिए, केवल उनके अंशों को जोड़ें या घटाएँ और हर को वही रहने दें।
- उदाहरण (जोड़): \( \frac{2}{7} + \frac{3}{7} = \frac{2+3}{7} = \frac{5}{7} \)
- उदाहरण (घटाव): \( \frac{5}{9} - \frac{2}{9} = \frac{5-2}{9} = \frac{3}{9} = \frac{1}{3} \) (सरलतम रूप में)
- स्थिति 2: जब हर असमान हों
- चरण:
- सभी भिन्नों के हरों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात करें।
- प्रत्येक भिन्न को इस LCM के बराबर हर वाली समतुल्य भिन्न में बदलें।
- अब, सभी भिन्नों के हर समान हो गए हैं, तो उनके अंशों को जोड़ें या घटाएँ (स्थिति 1 के अनुसार)।
- यदि आवश्यक हो, तो परिणाम को सरलतम रूप में लिखें।
- उदाहरण (जोड़): \( \frac{1}{2} + \frac{1}{3} \)
- हर 2 और 3 का LCM = 6।
- \( \frac{1}{2} = \frac{1 \times 3}{2 \times 3} = \frac{3}{6} \)
- \( \frac{1}{3} = \frac{1 \times 2}{3 \times 2} = \frac{2}{6} \)
- \( \frac{3}{6} + \frac{2}{6} = \frac{3+2}{6} = \frac{5}{6} \)
- उदाहरण (घटाव): \( \frac{3}{4} - \frac{1}{6} \)
- हर 4 और 6 का LCM = 12।
- \( \frac{3}{4} = \frac{3 \times 3}{4 \times 3} = \frac{9}{12} \)
- \( \frac{1}{6} = \frac{1 \times 2}{6 \times 2} = \frac{2}{12} \)
- \( \frac{9}{12} - \frac{2}{12} = \frac{9-2}{12} = \frac{7}{12} \)
- मिश्र भिन्नों का जोड़/घटाव:
- मिश्र भिन्नों को पहले अनुचित भिन्नों में बदलें।
- फिर उपरोक्त नियमों का पालन करें।
- उदाहरण: \( 1 \frac{1}{2} + 2 \frac{1}{3} = \frac{3}{2} + \frac{7}{3} \)
- हर 2 और 3 का LCM = 6।
- \( \frac{3}{2} = \frac{9}{6} \), \( \frac{7}{3} = \frac{14}{6} \)
- \( \frac{9}{6} + \frac{14}{6} = \frac{23}{6} \) या \( 3 \frac{5}{6} \)
याद रखें: भिन्नों को जोड़ते या घटाते समय, हर कभी नहीं जुड़ते या घटते। वे केवल यह दर्शाते हैं कि पूर्ण वस्तु को कितने बराबर भागों में बांटा गया है।
उचित, अनुचित और मिश्र भिन्न
भिन्नों को उनके अंश और हर के संबंध के आधार पर तीन मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
- 1. उचित भिन्न (Proper Fraction):
- वह भिन्न जिसमें अंश हर से छोटा होता है।
- इनका मान हमेशा 1 से कम होता है।
- उदाहरण: \( \frac{1}{2}, \frac{3}{4}, \frac{5}{7} \)
- 2. अनुचित भिन्न (Improper Fraction):
- वह भिन्न जिसमें अंश हर से बड़ा या उसके बराबर होता है।
- इनका मान हमेशा 1 के बराबर या 1 से अधिक होता है।
- उदाहरण: \( \frac{5}{3}, \frac{7}{4}, \frac{9}{9} \)
- 3. मिश्र भिन्न (Mixed Fraction):
- यह एक पूर्ण संख्या और एक उचित भिन्न का संयोजन होती है।
- यह अनुचित भिन्न को व्यक्त करने का एक और तरीका है।
- उदाहरण: \( 1 \frac{2}{3} \) (एक और दो-तिहाई), \( 2 \frac{1}{4} \) (दो और एक-चौथाई)
- अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न में बदलना:
- चरण:
- अंश को हर से भाग दें।
- भागफल (quotient) पूर्ण संख्या बनती है।
- शेषफल (remainder) नया अंश बनता है।
- हर वही रहता है।
- उदाहरण: \( \frac{7}{3} \) को मिश्र भिन्न में बदलें।
- 7 को 3 से भाग देने पर भागफल 2 और शेषफल 1 आता है।
- अतः, \( \frac{7}{3} = 2 \frac{1}{3} \)
- मिश्र भिन्न को अनुचित भिन्न में बदलना:
- चरण:
- पूर्ण संख्या को हर से गुणा करें।
- इस गुणनफल में अंश को जोड़ें। यह योगफल नया अंश बनेगा।
- हर वही रहता है।
- उदाहरण: \( 2 \frac{1}{3} \) को अनुचित भिन्न में बदलें।
- \( (2 \times 3) + 1 = 6 + 1 = 7 \)
- अतः, \( 2 \frac{1}{3} = \frac{7}{3} \)
मुख्य बिंदु: उचित भिन्नें हमेशा 0 और 1 के बीच होती हैं। अनुचित और मिश्र भिन्नें 1 या 1 से बड़ी होती हैं।
भिन्न संख्याओं का गुणा एवं भाग
भिन्न संख्याओं का गुणा और भाग, जोड़ और घटाव की तुलना में अक्सर सरल होता है क्योंकि इसमें हरों को समान करने की आवश्यकता नहीं होती।
- 1. भिन्न संख्याओं का गुणा:
- दो भिन्नों को गुणा करने के लिए, उनके अंशों को आपस में गुणा करें और उनके हरों को आपस में गुणा करें।
- सूत्र: \( \frac{a}{b} \times \frac{c}{d} = \frac{a \times c}{b \times d} \)
- उदाहरण: \( \frac{3}{8} \times \frac{2}{5} \)
- अंशों का गुणा: \( 3 \times 2 = 6 \)
- हरों का गुणा: \( 8 \times 5 = 40 \)
- परिणाम: \( \frac{6}{40} \)
- सरलतम रूप: \( \frac{6 \div 2}{40 \div 2} = \frac{3}{20} \)
- पूर्ण संख्या को भिन्न से गुणा करना:
- पूर्ण संख्या को भिन्न के अंश से गुणा करें और हर को वही रहने दें।
- उदाहरण: \( 5 \times \frac{2}{3} = \frac{5 \times 2}{3} = \frac{10}{3} \) या \( 3 \frac{1}{3} \)
- मिश्र भिन्नों का गुणा:
- मिश्र भिन्नों को पहले अनुचित भिन्नों में बदलें।
- फिर सामान्य गुणा नियम का पालन करें।
- उदाहरण: \( 1 \frac{1}{2} \times 2 \frac{1}{3} = \frac{3}{2} \times \frac{7}{3} = \frac{3 \times 7}{2 \times 3} = \frac{21}{6} = \frac{7}{2} \) या \( 3 \frac{1}{2} \)
- 2. भिन्न संख्याओं का भाग:
- एक भिन्न को दूसरी भिन्न से भाग देने के लिए, भाजक भिन्न का व्युत्क्रम (reciprocal) लें और फिर गुणा करें।
- व्युत्क्रम (Reciprocal): किसी भिन्न का व्युत्क्रम प्राप्त करने के लिए उसके अंश और हर को आपस में बदल दिया जाता है।
- उदाहरण: \( \frac{1}{3} \) का व्युत्क्रम \( \frac{3}{1} \) या 3 है। \( 5 \) का व्युत्क्रम \( \frac{1}{5} \) है।
- सूत्र: \( \frac{a}{b} \div \frac{c}{d} = \frac{a}{b} \times \frac{d}{c} \)
- उदाहरण: \( \frac{3}{5} \div \frac{1}{6} \)
- भाजक \( \frac{1}{6} \) का व्युत्क्रम \( \frac{6}{1} \) है।
- भाग के चिन्ह को गुणा में बदलें: \( \frac{3}{5} \times \frac{6}{1} \)
- गुणा करें: \( \frac{3 \times 6}{5 \times 1} = \frac{18}{5} \) या \( 3 \frac{3}{5} \)
- पूर्ण संख्या को भिन्न से भाग देना:
- पूर्ण संख्या को \( \frac{\text{पूर्ण संख्या}}{1} \) के रूप में लिखें।
- फिर उपरोक्त भाग नियम का पालन करें।
- उदाहरण: \( 6 \div \frac{2}{3} = \frac{6}{1} \div \frac{2}{3} = \frac{6}{1} \times \frac{3}{2} = \frac{18}{2} = 9 \)
- भिन्न को पूर्ण संख्या से भाग देना:
- पूर्ण संख्या को \( \frac{\text{पूर्ण संख्या}}{1} \) के रूप में लिखें और फिर उसका व्युत्क्रम लें।
- फिर गुणा करें।
- उदाहरण: \( \frac{3}{4} \div 2 = \frac{3}{4} \div \frac{2}{1} = \frac{3}{4} \times \frac{1}{2} = \frac{3}{8} \)
परीक्षा सुझाव: गुणा और भाग में अक्सर छात्र सरलतम रूप में लिखना भूल जाते हैं। हमेशा अंतिम उत्तर को सरलतम रूप में प्रस्तुत करें।
संख्याओं का स्थानीय मान (Place Value)
स्थानीय मान वह मान होता है जो किसी अंक को संख्या में उसकी स्थिति के आधार पर प्राप्त होता है। भारतीय संख्या प्रणाली में, प्रत्येक स्थान अपने दाहिनी ओर के स्थान से 10 गुना अधिक मान रखता है।
- उदाहरण: संख्या 368 में:
- अंक 8 इकाई के स्थान पर है, इसका मान 8 है।
- अंक 6 दहाई के स्थान पर है, इसका मान \( 6 \times 10 = 60 \) है।
- अंक 3 सैकड़ा के स्थान पर है, इसका मान \( 3 \times 100 = 300 \) है।
- स्थानीय मान तालिका:
| स्थान | मान | | :--- | :--- | | लाख | 100,000 | | दस हज़ार | 10,000 | | हज़ार | 1,000 | | सैकड़ा | 100 | | दहाई | 10 | | इकाई | 1 |
- स्थानीय मान का महत्व:
- बड़ी संख्याओं को पढ़ने और लिखने में मदद करता है।
- जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी गणितीय संक्रियाओं का आधार है।
- दशमलव संख्याओं को समझने की नींव रखता है।
- जोड़ में स्थानीय मान का उपयोग:
- जब हम संख्याओं को जोड़ते हैं, तो हम समान स्थानीय मान वाले अंकों को एक साथ जोड़ते हैं।
- यदि किसी स्थान पर अंकों का योग 9 से अधिक हो जाता है, तो इकाई का अंक उसी स्थान पर रहता है और दहाई का अंक अगले बड़े स्थानीय मान वाले स्थान पर 'हासिल' (carry-over) के रूप में जुड़ जाता है।
- उदाहरण: 368 + 895
- इकाई: \( 8 + 5 = 13 \) (3 इकाई, 1 दहाई हासिल)
- दहाई: \( 6 + 9 + 1 \text{ (हासिल)} = 16 \) (6 दहाई, 1 सैकड़ा हासिल)
- सैकड़ा: \( 3 + 8 + 1 \text{ (हासिल)} = 12 \) (2 सैकड़ा, 1 हज़ार हासिल)
- हज़ार: \( 0 + 0 + 1 \text{ (हासिल)} = 1 \)
- योगफल = 1263
मुख्य नियम: किसी भी स्थान पर सबसे बड़ा अंक 9 ही हो सकता है। 10 होने पर वह अगले स्थान पर चला जाता है।
दशमलव संख्याओं का स्थानीय मान
दशमलव संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिनमें एक दशमलव बिंदु होता है, जो पूर्ण संख्या भाग को भिन्नात्मक भाग से अलग करता है। दशमलव बिंदु के बाद के अंकों का भी स्थानीय मान होता है।
- दशमलव बिंदु के बाद के स्थान:
- दशमलव बिंदु के ठीक बाद का पहला स्थान दशांश (tenths) कहलाता है, जिसका मान \( \frac{1}{10} \) या 0.1 होता है।
- दूसरा स्थान शतांश (hundredths) कहलाता है, जिसका मान \( \frac{1}{100} \) या 0.01 होता है।
- तीसरा स्थान सहस्रांश (thousandths) कहलाता है, जिसका मान \( \frac{1}{1000} \) या 0.001 होता है।
- जैसे-जैसे हम दशमलव बिंदु से दाईं ओर बढ़ते हैं, प्रत्येक स्थान का मान 10 गुना कम होता जाता है (यानी \( \frac{1}{10} \) गुना हो जाता है)।
- उदाहरण: संख्या 0.325 में:
- अंक 3 दशांश के स्थान पर है, इसका मान \( 3 \times \frac{1}{10} = 0.3 \) है।
- अंक 2 शतांश के स्थान पर है, इसका मान \( 2 \times \frac{1}{100} = 0.02 \) है।
- अंक 5 सहस्रांश के स्थान पर है, इसका मान \( 5 \times \frac{1}{1000} = 0.005 \) है।
- अतः, \( 0.325 = 0.3 + 0.02 + 0.005 \) या \( \frac{3}{10} + \frac{2}{100} + \frac{5}{1000} \)
- दशमलव संख्याओं का जोड़/घटाव:
- दशमलव संख्याओं को जोड़ते या घटाते समय, दशमलव बिंदुओं को एक सीध में रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
- यदि आवश्यक हो, तो दशमलव बिंदु के बाद शून्य जोड़कर दशमलव स्थानों की संख्या को बराबर करें।
- फिर सामान्य जोड़ या घटाव की तरह गणना करें।
- उदाहरण (जोड़): \( 12.5 + 3.75 \)
` 12.50 (0 जोड़ा गया)
- 3.75
------- 16.25 `
- उदाहरण (घटाव): \( 25.0 - 18.25 \)
` 25.00 (00 जोड़ा गया)
- 18.25
------- 6.75 `
- दशमलव संख्याओं का गुणा:
- दशमलव बिंदुओं को अनदेखा करते हुए संख्याओं को सामान्य पूर्ण संख्याओं की तरह गुणा करें।
- अंतिम उत्तर में, दशमलव बिंदु को उतने स्थानों पर रखें जितने गुणा की जाने वाली संख्याओं में कुल दशमलव स्थान थे।
- उदाहरण: \( 2.5 \times 1.2 \)
- \( 25 \times 12 = 300 \)
- 2.5 में 1 दशमलव स्थान है और 1.2 में 1 दशमलव स्थान है। कुल \( 1+1=2 \) दशमलव स्थान।
- अतः, उत्तर में दशमलव बिंदु को दाईं ओर से 2 स्थानों पर रखें: \( 3.00 \) या 3।
- दशमलव संख्याओं का भाग:
- भाजक (जिससे भाग दे रहे हैं) को पूर्ण संख्या बनाने के लिए दशमलव बिंदु को दाईं ओर ले जाएँ।
- भाजक में जितने स्थान दशमलव बिंदु को दाईं ओर ले गए हैं, उतने ही स्थान भाज्य (जिसे भाग दे रहे हैं) में भी दशमलव बिंदु को दाईं ओर ले जाएँ।
- फिर सामान्य भाग की तरह गणना करें।
- उदाहरण: \( 12.5 \div 0.5 \)
- भाजक 0.5 को 5 बनाने के लिए दशमलव बिंदु को 1 स्थान दाईं ओर ले जाएँ।
- भाज्य 12.5 में भी दशमलव बिंदु को 1 स्थान दाईं ओर ले जाएँ, यह 125 बन जाएगा।
- अब \( 125 \div 5 = 25 \)
सामान्य गलती: दशमलव संख्याओं को जोड़ते या घटाते समय दशमलव बिंदु को सीध में न रखना। इससे गलत उत्तर प्राप्त होता है।
दशमलव संख्याओं का दैनिक जीवन में उपयोग
दशमलव संख्याएँ हमारे दैनिक जीवन में कई स्थानों पर उपयोग होती हैं, खासकर जब हमें पूर्ण संख्याओं के बीच की मात्राओं को व्यक्त करना होता है।
- 1. लंबाई का माप:
- मीटर, सेंटीमीटर, किलोमीटर जैसी इकाइयों में दशमलव का उपयोग होता है।
- उदाहरण: 150.5 किमी, 65.7 किमी, 900 मी (जिसे 0.9 किमी में बदला जा सकता है)।
- परिवर्तन: 1 किमी = 1000 मीटर, इसलिए 1 मीटर = 0.001 किमी।
- गणना: विभिन्न इकाइयों को एक ही इकाई में बदलकर जोड़ना या घटाना।
- 2. रुपये-पैसे का हिसाब:
- भारतीय मुद्रा प्रणाली में रुपये और पैसे को दशमलव में दर्शाया जाता है।
- उदाहरण: 143.60 रुपये (143 रुपये और 60 पैसे)।
- परिवर्तन: 1 रुपया = 100 पैसे, इसलिए 1 पैसा = 0.01 रुपये।
- गणना: खरीददारी, बिल भुगतान, शेष राशि ज्ञात करने में।
- 3. तापमान का माप:
- तापमान को डिग्री सेल्सियस (°C) या फारेनहाइट (°F) में दशमलव के साथ व्यक्त किया जाता है।
- उदाहरण: 36.0°C, 28.5°C।
- गणना: तापमान में अंतर ज्ञात करने के लिए घटाव का उपयोग।
- 4. वजन का माप:
- किलोग्राम, ग्राम जैसी इकाइयों में दशमलव का उपयोग होता है।
- उदाहरण: 2.5 किग्रा चीनी, 500 ग्राम (0.5 किग्रा)।
- परिवर्तन: 1 किग्रा = 1000 ग्राम, इसलिए 1 ग्राम = 0.001 किग्रा।
- 5. अन्य उपयोग:
- खेलों में स्कोर (जैसे 9.8 सेकंड)।
- औसत (जैसे 3.5 औसत अंक)।
- वैज्ञानिक माप (जैसे 1.618 गोल्डन अनुपात)।
- दैनिक जीवन की समस्याओं को हल करने के चरण:
- समस्या में दी गई सभी मात्राओं को पहचानें।
- यदि आवश्यक हो, तो सभी मात्राओं को एक ही इकाई में बदलें (जैसे सभी को किलोमीटर में, या सभी को रुपये में)।
- दशमलव संख्याओं के जोड़, घटाव, गुणा या भाग के नियमों का उपयोग करके गणना करें।
- अंतिम उत्तर को उचित इकाई के साथ प्रस्तुत करें।
याद रखें: विभिन्न इकाइयों वाली मात्राओं को सीधे नहीं जोड़ा या घटाया जा सकता। उन्हें पहले एक समान इकाई में बदलना आवश्यक है।