गुणनखण्ड एवं गुणज
यह अध्याय 'गुणनखण्ड एवं गुणज' छात्रों को संख्याओं के महत्वपूर्ण गुणों से परिचित कराता है। इसमें गुणनखण्ड, गुणज, अभाज्य संख्याएँ, भाज्य संख्याएँ, सह-अभाज्य संख्याएँ, सम और विषम संख्याएँ जैसे मूलभूत अवधारणाएँ शामिल हैं। छात्र विभिन्न संख्याओं के गुणनखण्ड और गुणज ज्ञात करना सीखते हैं, साथ ही अभाज्य गुणनखण्ड विधि और भाग विधि का उपयोग करके महत्तम समापवर्तक (म.स.प.) और लघुत्तम समापवर्त्य (ल.स.प.) की गणना करना भी सीखते हैं। विभाज्यता के नियम भी विस्तार से समझाए गए हैं, जो बड़ी संख्याओं के साथ काम करने में सहायता करते हैं। यह अध्याय संख्या प्रणाली की गहरी समझ विकसित करने और भविष्य की गणितीय अवधारणाओं के लिए एक मजबूत नींव बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
गुणनखंड
किसी संख्या के गुणनखंड वे संख्याएँ होती हैं जो उस संख्या को पूरी तरह विभाजित करती हैं, यानी भाग देने पर कोई शेषफल नहीं बचता है।
- उदाहरण: 10 के गुणनखंड 1, 2, 5, 10 हैं क्योंकि 10 को इन सभी संख्याओं से पूरा-पूरा भाग दिया जा सकता है।
- \(10 \div 1 = 10\)
- \(10 \div 2 = 5\)
- \(10 \div 5 = 2\)
- \(10 \div 10 = 1\)
- गुणनखंडों की विशेषताएँ:
- प्रत्येक संख्या का सबसे छोटा गुणनखंड 1 होता है।
- प्रत्येक संख्या का सबसे बड़ा गुणनखंड वह संख्या स्वयं होती है।
- किसी भी संख्या के गुणनखंडों की संख्या सीमित होती है।
- प्रत्येक संख्या 1 और स्वयं से अवश्य विभाजित होती है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t1_scene1] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t1_scene2] में गुणनखंडों की अवधारणा को समझाया गया है। [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t1_scene3] में बताया गया है कि 1 और स्वयं संख्या हमेशा गुणनखंड होते हैं।
गुणनखंड (Factor): किसी संख्या के गुणनखंड वे संख्याएँ होती हैं जो उस संख्या को बिना शेषफल छोड़े पूरी तरह विभाजित करती हैं।
प्रत्येक संख्या का गुणनखंड 1 और वह स्वयं संख्या होती है।
भाज्य संख्याएँ
भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers) वे संख्याएँ होती हैं जिनके 1 और स्वयं उस संख्या के अलावा कम से कम एक और गुणनखंड होता है। इसका अर्थ है कि उनके दो से अधिक गुणनखंड होते हैं।
- उदाहरण:
- 4: गुणनखंड हैं 1, 2, 4 (तीन गुणनखंड)
- 6: गुणनखंड हैं 1, 2, 3, 6 (चार गुणनखंड)
- 12: गुणनखंड हैं 1, 2, 3, 4, 6, 12 (छह गुणनखंड)
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t2_scene1] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t2_scene3] भाज्य संख्याओं को समझने में सहायक हैं।
भाज्य संख्या (Composite Number): वह संख्या जिसके 1 और स्वयं उस संख्या के अतिरिक्त कम से कम एक और गुणनखंड हो (अर्थात दो से अधिक गुणनखंड हों)।
अभाज्य संख्याएँ
अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers) वे संख्याएँ होती हैं जिनके केवल दो गुणनखंड होते हैं: 1 और स्वयं वह संख्या।
- उदाहरण:
- 2: गुणनखंड हैं 1, 2
- 3: गुणनखंड हैं 1, 3
- 5: गुणनखंड हैं 1, 5
- 7: गुणनखंड हैं 1, 7
- 13: गुणनखंड हैं 1, 13
- महत्वपूर्ण तथ्य:
- 1 न तो अभाज्य संख्या है और न ही भाज्य संख्या। यह एक अद्वितीय संख्या है।
- 2 ही एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t3_scene1] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t3_scene3] अभाज्य संख्याओं के महत्व को दर्शाते हैं। [IMAGE: prime_and_composite_numbers_fig38] भाज्य और अभाज्य संख्याओं के गुणनखंडों की तुलना करता है।
अभाज्य संख्या (Prime Number): वह संख्या जिसका गुणनखंड केवल 1 तथा स्वयं वही संख्या हो (अर्थात ठीक दो गुणनखंड हों)।
संख्या 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य। यह एक अद्वितीय संख्या है।
2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
क्रियाकलाप
क्रियाकलाप 1 में 1 से 10 तक की संख्याओं के गुणनखंडों को पहचानना और उन्हें एक, दो या दो से अधिक गुणनखंडों वाली संख्याओं में वर्गीकृत करना शामिल है।
- एक गुणनखंड वाली संख्या: केवल 1।
- दो गुणनखंडों वाली संख्याएँ: 2, 3, 5, 7 (ये अभाज्य संख्याएँ हैं)।
- दो से अधिक गुणनखंडों वाली संख्याएँ: 4, 6, 8, 9, 10 (ये भाज्य संख्याएँ हैं)।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t4_scene1] इस क्रियाकलाप के उद्देश्य को स्पष्ट करता है।
एरटोस्थनीज की छलनी
एरटोस्थनीज की छलनी (Sieve of Eratosthenes) 1 से 100 तक की अभाज्य संख्याओं को ज्ञात करने की एक प्राचीन और प्रभावी विधि है।
एरटोस्थनीज की छलनी के चरण:
- 1 को काट दें (यह न तो अभाज्य है और न ही भाज्य)।
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या 2 को घेरें और 2 के सभी गुणजों (4, 6, 8, ...) को काट दें।
- अगली बिना कटी संख्या 3 को घेरें और 3 के सभी गुणजों (6, 9, 12, ...) को काट दें।
- यह प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक 100 तक की सभी संख्याएँ कट न जाएँ या घिर न जाएँ।
- घेरे के अंदर की सभी संख्याएँ अभाज्य संख्याएँ होंगी और 1 को छोड़कर, कटी हुई सभी संख्याएँ भाज्य संख्याएँ होंगी।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t4_scene3] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t5_scene3] एरटोस्थनीज की छलनी की प्रक्रिया को दर्शाते हैं।
एरटोस्थनीज की छलनी का उपयोग करके 1 से 100 तक की अभाज्य संख्याओं को याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी हो सकता है।
सहभाज्य संख्याएँ
सहभाज्य संख्याएँ (Co-Prime Numbers) वे संख्याएँ होती हैं जिनका 1 के अतिरिक्त कोई अन्य उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं होता। इन्हें अपेक्षाकृत अभाज्य संख्याएँ (Relatively Prime Numbers) भी कहते हैं।
- उदाहरण:
- 8 और 15:
- 8 के गुणनखंड: 1, 2, 4, 8
- 15 के गुणनखंड: 1, 3, 5, 15
- उभयनिष्ठ गुणनखंड केवल 1 है, अतः 8 और 15 सहभाज्य संख्याएँ हैं।
- 9, 10 और 49:
- 9 के गुणनखंड: 1, 3, 9
- 10 के गुणनखंड: 1, 2, 5, 10
- 49 के गुणनखंड: 1, 7, 49
- तीनों में उभयनिष्ठ गुणनखंड केवल 1 है, अतः 9, 10 और 49 सहभाज्य संख्याएँ हैं।
- महत्वपूर्ण बिंदु:
- सहभाज्य होने के लिए संख्याओं का अभाज्य होना आवश्यक नहीं है। (जैसे 8 और 15 दोनों भाज्य संख्याएँ हैं, फिर भी सहभाज्य हैं)।
- दो क्रमागत संख्याएँ हमेशा सहभाज्य होती हैं (जैसे 4 और 5, 12 और 13)।
- दो अभाज्य संख्याएँ हमेशा सहभाज्य होती हैं (जैसे 7 और 11, 13 और 17)।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t6_scene1], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t6_scene2] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t6_scene3] सहभाज्य संख्याओं की अवधारणा को स्पष्ट करते हैं।
सहभाज्य संख्याएँ (Co-Prime Numbers): ऐसी संख्याएँ जिनका केवल एक ही उभयनिष्ठ गुणनखंड 1 हो, सहभाज्य संख्याएँ कहलाती हैं।
सहभाज्य होने के लिए संख्याओं का अभाज्य होना आवश्यक नहीं है।
संख्याओं के अन्य प्रकार (सम और विषम संख्याएँ)
संख्याओं को उनकी विभाज्यता के आधार पर विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है।
सम संख्याएँ (Even Numbers)
- वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित होती हैं।
- इन संख्याओं का इकाई अंक 0, 2, 4, 6, या 8 होता है।
- उदाहरण: 2, 4, 6, 8, 10, 12, ...
विषम संख्याएँ (Odd Numbers)
- वे संख्याएँ जो 2 से पूर्णतः विभाजित नहीं होती हैं (अर्थात 2 से भाग देने पर 1 शेषफल बचता है)।
- इन संख्याओं का इकाई अंक 1, 3, 5, 7, या 9 होता है।
- उदाहरण: 1, 3, 5, 7, 9, 11, ...
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t7_scene1] सम संख्याओं को और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t7_scene2] विषम संख्याओं को समझाते हैं।
सम संख्या: वह संख्या जो 2 से पूर्णतः विभाजित हो।
विषम संख्या: वह संख्या जो 2 से पूर्णतः विभाजित न हो (शेषफल 1 बचे)।
अभाज्य गुणनखंड
किसी संख्या के अभाज्य गुणनखंड (Prime Factors) वे गुणनखंड होते हैं जो स्वयं अभाज्य संख्याएँ हों। किसी भी भाज्य संख्या को उसके अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। यह अंकगणित का आधारभूत प्रमेय (Fundamental Theorem of Arithmetic) कहलाता है।
- उदाहरण:
- 6 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 6। इनमें से अभाज्य गुणनखंड हैं 2 और 3। अतः \(6 = 2 \times 3\).
- 42 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 6, 7, 14, 21, 42। इनमें से अभाज्य गुणनखंड हैं 2, 3, 7। अतः \(42 = 2 \times 3 \times 7\).
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t8_scene2] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t8_scene3] अभाज्य गुणनखंडों के महत्व को बताते हैं।
अभाज्य गुणनखंड: किसी संख्या के वे गुणनखंड जो स्वयं अभाज्य संख्याएँ हों।
अंकगणित का आधारभूत प्रमेय: प्रत्येक भाज्य संख्या को अभाज्य संख्याओं के गुणनफल के रूप में अद्वितीय रूप से व्यक्त किया जा सकता है (गुणनखंडों के क्रम को छोड़कर)।
अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करना
अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करने के लिए हम भाग विधि (Division Method) का उपयोग करते हैं। इसमें दी गई संख्या को सबसे छोटी अभाज्य संख्या से भाग देना शुरू करते हैं और यह प्रक्रिया तब तक दोहराते हैं जब तक भागफल 1 न आ जाए।
चरण-दर-चरण विधि:
- दी गई संख्या को सबसे छोटी अभाज्य संख्या (2) से भाग दें।
- यदि भागफल 2 से विभाज्य है, तो उसे फिर से 2 से भाग दें। यह तब तक करें जब तक भागफल 2 से विभाज्य न रहे।
- जब भागफल 2 से विभाज्य न रहे, तो अगली सबसे छोटी अभाज्य संख्या (3) से भाग दें। यदि भागफल 3 से विभाज्य है, तो उसे तब तक 3 से भाग दें जब तक वह 3 से विभाज्य न रहे।
- इसी प्रकार, अगली अभाज्य संख्याओं (5, 7, 11, ...) से भाग देते रहें जब तक कि अंतिम भागफल 1 प्राप्त न हो जाए।
- सभी भाजक उस संख्या के अभाज्य गुणनखंड होते हैं।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t9_scene2] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t9_scene3] अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करने की प्रक्रिया को दर्शाते हैं।
अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करते समय हमेशा सबसे छोटी अभाज्य संख्या से शुरू करें और क्रम से आगे बढ़ें।
किसी संख्या के सभी गुणनखंड ज्ञात करना
किसी संख्या के सभी गुणनखंड ज्ञात करने के लिए, हम 1 से शुरू करके उस संख्या तक की सभी संख्याओं से भाग देकर देखते हैं। यदि कोई संख्या, दी गई संख्या को पूरी तरह विभाजित करती है, तो वह उसका गुणनखंड होती है।
विधि 1: भाग विधि
- 1 से शुरू करके संख्या तक की सभी संख्याओं से भाग देकर देखें।
- जिन संख्याओं से पूरा-पूरा भाग चला जाए, वे गुणनखंड हैं।
विधि 2: गुणन विधि (युग्म बनाकर)
- संख्या को 1 से गुणा करके शुरू करें, फिर 2 से, 3 से, आदि।
- जब गुणनफल मूल संख्या के बराबर हो, तो गुणा करने वाली संख्याएँ और प्राप्त गुणनफल के घटक गुणनखंड होते हैं।
- यह प्रक्रिया तब तक जारी रखें जब तक गुणनखंडों के युग्म दोहराने न लगें।
उदाहरण: 18 के गुणनखंड
- \(1 \times 18 = 18\)
- \(2 \times 9 = 18\)
- \(3 \times 6 = 18\)
- \(4 \times ? \neq 18\)
- \(5 \times ? \neq 18\)
- \(6 \times 3 = 18\) (दोहराव शुरू)
अतः 18 के सभी गुणनखंड हैं: 1, 2, 3, 6, 9, 18।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t10_scene1] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t10_scene2] गुणनखंड ज्ञात करने की विधि को समझाते हैं।
सभी गुणनखंड ज्ञात करते समय, विभाज्यता के नियमों का उपयोग करने से समय बचता है।
विभाज्यता की जाँच के नियम
विभाज्यता के नियम हमें किसी संख्या को बिना वास्तव में भाग दिए यह जानने में मदद करते हैं कि वह किसी अन्य संख्या से पूरी तरह विभाजित होगी या नहीं।
- 2 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या का इकाई का अंक 0, 2, 4, 6, 8 हो।
- उदाहरण: 24, 136, 500
- 3 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या के सभी अंकों का योगफल 3 से विभाजित होता हो।
- उदाहरण: 123 (1+2+3=6, 6, 3 से विभाज्य है)
- 4 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या के दहाई एवं इकाई के अंकों से बनी संख्या 4 से विभाजित होती हो, अथवा दहाई व इकाई के स्थान पर शून्य हो।
- उदाहरण: 512 (12, 4 से विभाज्य है), 1300
- 5 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या का इकाई का अंक 0 अथवा 5 हो।
- उदाहरण: 75, 120
- 6 से विभाज्यता: यदि कोई संख्या 2 तथा 3 दोनों से अलग-अलग विभाजित हो।
- उदाहरण: 216 (2 और 3 दोनों से विभाज्य है)
- 7 से विभाज्यता: किसी संख्या के अंतिम अंक का दुगुना कर शेष अंकों की संख्या से घटाएँ। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक 1 या 2 अंक की संख्या प्राप्त न हो जाए। यदि प्राप्त संख्या 7 से विभाज्य हो।
- उदाहरण: 1729: \(172 - (9 \times 2) = 172 - 18 = 154\). \(15 - (4 \times 2) = 15 - 8 = 7\). 7, 7 से विभाज्य है।
- 8 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या के सैकड़ा, दहाई, इकाई वाले तीन अंकों की संख्या 8 से विभाजित हो, या सैकड़ा, दहाई व इकाई के स्थान पर शून्य हो।
- उदाहरण: 31000, 1816 (816, 8 से विभाज्य है)
- 9 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या के अंकों का योग 9 से विभाज्य हो।
- उदाहरण: 3663 (3+6+6+3=18, 18, 9 से विभाज्य है)
- 10 से विभाज्यता: यदि किसी संख्या का इकाई का अंक शून्य हो।
- उदाहरण: 100, 250
- 11 से विभाज्यता: यदि विषम स्थानों के अंकों का योग तथा सम स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0, 11 अथवा 11 का गुणज हो।
- उदाहरण: 856592: विषम स्थानों का योग (8+6+9=23), सम स्थानों का योग (5+5+2=12)। अंतर \(23 - 12 = 11\). 11, 11 से विभाज्य है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t11_scene1], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t11_scene2], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t11_scene3] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t11_scene4] विभाज्यता के नियमों को विस्तृत रूप से बताते हैं।
विभाज्यता के नियम बड़ी संख्याओं के गुणनखंड ज्ञात करने और म.स. व ल.स. निकालने में बहुत सहायक होते हैं। इन्हें अच्छी तरह याद करें।
महत्तम समापवर्तक (म.स.) की अवधारणा
महत्तम समापवर्तक (म.स.) (Highest Common Factor - HCF) दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड होता है। इसे सबसे बड़ा समान भाजक (Greatest Common Divisor - GCD) भी कहते हैं।
- यह वह सबसे बड़ी संख्या है जो दी गई सभी संख्याओं को पूरी तरह विभाजित करती है।
- उदाहरण: 12 और 9 का म.स.
- 12 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 12
- 9 के गुणनखंड: 1, 3, 9
- उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 3
- सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड: 3। अतः 12 और 9 का म.स. 3 है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t12_scene1], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t12_scene2], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t12_scene3] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t12_scene4] म.स. की अवधारणा को स्पष्ट करते हैं।
महत्तम समापवर्तक (म.स. / HCF): दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड।
महत्तम समापवर्तक ज्ञात करने की विधियाँ
म.स. ज्ञात करने की मुख्य तीन विधियाँ हैं:
1. गुणनखंड विधि (Factorisation Method)
- प्रत्येक संख्या के सभी गुणनखंड ज्ञात करें।
- सभी संख्याओं के उभयनिष्ठ गुणनखंडों को पहचानें।
- इन उभयनिष्ठ गुणनखंडों में से सबसे बड़ा गुणनखंड ही म.स. होगा।
उदाहरण: 24, 36, 60 का म.स.
- 24 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 24
- 36 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 9, 12, 18, 36
- 60 के गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 10, 12, 15, 20, 30, 60
- उभयनिष्ठ गुणनखंड: 1, 2, 3, 4, 6, 12
- सबसे बड़ा उभयनिष्ठ गुणनखंड: 12। अतः म.स. = 12।
2. अभाज्य गुणनखंड विधि (Prime Factorisation Method)
- प्रत्येक संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- सभी संख्याओं में उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों को पहचानें।
- प्रत्येक उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड की सबसे छोटी घात को लेकर गुणा करें। प्राप्त गुणनफल ही म.स. होगा।
उदाहरण: 24, 36, 60 का म.स.
- \(24 = 2 \times 2 \times 2 \times 3 = 2^3 \times 3^1\)
- \(36 = 2 \times 2 \times 3 \times 3 = 2^2 \times 3^2\)
- \(60 = 2 \times 2 \times 3 \times 5 = 2^2 \times 3^1 \times 5^1\)
- उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंड: 2 और 3।
- 2 की सबसे छोटी घात \(2^2\) और 3 की सबसे छोटी घात \(3^1\).
- म.स. \(= 2^2 \times 3^1 = 4 \times 3 = 12\).
3. भाग विधि (Division Method)
- दो संख्याओं के लिए:
- छोटी संख्या से बड़ी संख्या को भाग दें।
- शेषफल को नया भाजक और पहले वाले भाजक को नया भाज्य मानें।
- यह प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक शेषफल शून्य न आ जाए।
- जिस भाजक से शेषफल शून्य आता है, वही म.स. होता है।
उदाहरण: 15 और 63 का म.स.
- \(63 \div 15 = 4\) (शेषफल 3)
- \(15 \div 3 = 5\) (शेषफल 0)
- अतः म.स. = 3।
- तीन या अधिक संख्याओं के लिए (संयुक्त भाग विधि):
- सभी संख्याओं को एक साथ लिखें।
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या से उन सभी संख्याओं को भाग दें जो विभाज्य हों।
- जो संख्याएँ विभाज्य न हों, उन्हें वैसे ही नीचे उतार लें।
- यह प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक कोई भी अभाज्य संख्या सभी संख्याओं को विभाजित न कर पाए।
- सभी उभयनिष्ठ भाजकों का गुणनफल ही म.स. होगा।
उदाहरण: 60, 90, 210 का म.स. ` 2 | 60, 90, 210 3 | 30, 45, 105 5 | 10, 15, 35 | 2, 3, 7 `
- उभयनिष्ठ भाजक: 2, 3, 5
- म.स. \(= 2 \times 3 \times 5 = 30\).
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t13_scene1], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t13_scene2], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t13_scene3] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t13_scene4] म.स. ज्ञात करने की विधियों को दर्शाते हैं।
परीक्षा में अक्सर अभाज्य गुणनखंड विधि या भाग विधि का उपयोग करके म.स. ज्ञात करने के लिए कहा जाता है। दोनों विधियों का अभ्यास करें।
महत्तम समापवर्तक की विशेषताएँ
म.स. की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं जो समस्याओं को हल करने में सहायक होती हैं:
- जब एक संख्या दूसरी को पूरी तरह विभाजित करे: यदि दो संख्याओं में बड़ी संख्या छोटी संख्या से पूरी तरह विभाजित होती है, तो छोटी संख्या ही दोनों संख्याओं का म.स. होगी।
- उदाहरण: 15 और 60। 60, 15 से पूरी तरह विभाजित होता है (\(60 \div 15 = 4\)). अतः 15 और 60 का म.स. 15 होगा।
- सहभाज्य संख्याओं का म.स.: ऐसी संख्याएँ जिनका 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं होता (अर्थात सहभाज्य संख्याएँ), उनका म.स. हमेशा 1 होता है।
- उदाहरण: 15 और 16। इनके उभयनिष्ठ गुणनखंड केवल 1 है। अतः 15 और 16 का म.स. 1 होगा।
- दो अभाज्य संख्याओं का म.स. भी हमेशा 1 होता है (जैसे 13 और 17 का म.स. 1)।
- म.स. संख्याओं से बड़ा नहीं हो सकता: दो या दो से अधिक संख्याओं का म.स. हमेशा उन संख्याओं में से सबसे छोटी संख्या के बराबर या उससे छोटा होता है।
- उदाहरण: 6 और 8 का म.स. 2 है, जो दोनों संख्याओं से छोटा है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t14_scene1], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t14_scene2] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t14_scene3] म.स. की विशेषताओं को उदाहरणों सहित समझाते हैं। [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t14_scene4] सामान्य गलतियों से बचने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देता है।
यदि बड़ी संख्या छोटी संख्या से पूर्णतः विभाज्य हो, तो छोटी संख्या ही म.स. होती है।
सहभाज्य संख्याओं का म.स. हमेशा 1 होता है।
म.स. कभी भी दी गई संख्याओं से बड़ा नहीं हो सकता। यह हमेशा सबसे छोटी संख्या के बराबर या उससे छोटा होता है।
गुणज की अवधारणा
किसी संख्या के गुणज (Multiples) वे संख्याएँ होती हैं जो उस संख्या को किसी भी पूर्णांक (जैसे 1, 2, 3, 4, ...) से गुणा करने पर प्राप्त होती हैं। इन्हें अपवर्त्य (Apurtya) भी कहते हैं।
- उदाहरण: 5 के गुणज
- \(5 \times 1 = 5\)
- \(5 \times 2 = 10\)
- \(5 \times 3 = 15\)
- \(5 \times 4 = 20\)
- अतः 5 के गुणज हैं: 5, 10, 15, 20, 25, ...
- गुणजों की विशेषताएँ:
- किसी भी संख्या का सबसे छोटा गुणज वह संख्या स्वयं होती है।
- किसी भी संख्या के गुणजों की संख्या अनंत होती है।
- किसी भी संख्या का गुणज उस संख्या के बराबर या उससे बड़ा होता है।
[IMAGE: multiples_of_13_on_a_number_line_fig15] संख्या रेखा पर 13 के गुणजों को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t15_scene2] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t15_scene3] गुणज की अवधारणा और विशेषताओं को समझाते हैं।
गुणज (Multiple): किसी संख्या को किसी पूर्णांक से गुणा करने पर प्राप्त होने वाली संख्या।
किसी संख्या के गुणजों की संख्या अनंत होती है।
लघुतम समापवर्त्य (ल.स.) की अवधारणा
लघुतम समापवर्त्य (ल.स.) (Lowest Common Multiple - LCM) दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज होता है।
- यह वह सबसे छोटी संख्या है जो दी गई सभी संख्याओं से पूरी तरह विभाजित हो जाती है।
- उदाहरण: 6 और 8 का ल.स.
- 6 के गुणज: 6, 12, 18, 24, 30, 36, 42, 48, ...
- 8 के गुणज: 8, 16, 24, 32, 40, 48, 56, ...
- उभयनिष्ठ गुणज: 24, 48, ...
- सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज: 24। अतः 6 और 8 का ल.स. 24 है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t17_scene1] ल.स. की अवधारणा को समझाता है।
लघुतम समापवर्त्य (ल.स. / LCM): दो या दो से अधिक संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज।
लघुतम समापवर्त्य ज्ञात करने की विधियाँ
ल.स. ज्ञात करने की मुख्य दो विधियाँ हैं:
1. अभाज्य गुणनखंड विधि (Prime Factorisation Method)
- प्रत्येक संख्या के अभाज्य गुणनखंड ज्ञात करें।
- सभी अभाज्य गुणनखंडों को पहचानें जो किसी भी संख्या में आए हों।
- प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की सबसे बड़ी घात को लेकर गुणा करें। प्राप्त गुणनफल ही ल.स. होगा।
उदाहरण: 16 और 24 का ल.स.
- \(16 = 2 \times 2 \times 2 \times 2 = 2^4\)
- \(24 = 2 \times 2 \times 2 \times 3 = 2^3 \times 3^1\)
- अभाज्य गुणनखंड: 2 और 3।
- 2 की सबसे बड़ी घात \(2^4\) (जो 16 में है) और 3 की सबसे बड़ी घात \(3^1\) (जो 24 में है)।
- ल.स. \(= 2^4 \times 3^1 = 16 \times 3 = 48\).
2. भाग विधि (Division Method)
- सभी संख्याओं को एक साथ लिखें।
- सबसे छोटी अभाज्य संख्या से उन सभी संख्याओं को भाग दें जो विभाज्य हों।
- जो संख्याएँ विभाज्य न हों, उन्हें वैसे ही नीचे उतार लें।
- यह प्रक्रिया तब तक दोहराएँ जब तक नीचे की पंक्ति में सभी संख्याएँ 1 न हो जाएँ।
- सभी भाजकों (जिनसे भाग दिया गया) और अंतिम बची हुई संख्याओं (जो भाग नहीं हुईं) का गुणनफल ही ल.स. होगा।
उदाहरण: 12, 16, 24 का ल.स. ` 2 | 12, 16, 24 2 | 6, 8, 12 2 | 3, 4, 6 2 | 3, 2, 3 (यहाँ 3 को 2 से भाग नहीं दिया जा सकता, उसे वैसे ही उतार लिया) 3 | 3, 1, 3 (यहाँ 1 को 3 से भाग नहीं दिया जा सकता, उसे वैसे ही उतार लिया) | 1, 1, 1 `
- ल.स. \(= 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 3 = 48\).
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t17_scene3] ल.स. और म.स. के बीच संबंध को दर्शाता है। [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t17_scene4] संबंध की जाँच और निष्कर्ष बताता है।
ल.स. और म.स. दोनों के लिए अभाज्य गुणनखंड विधि और भाग विधि का अभ्यास करें। यह सुनिश्चित करें कि आप दोनों विधियों में अंतर समझते हैं।
ल.स. ज्ञात करते समय, उभयनिष्ठ अभाज्य गुणनखंडों की सबसे बड़ी घात लेते हैं, जबकि म.स. में सबसे छोटी घात। इस अंतर को याद रखें।
दो संख्याओं के गुणनफल और म.स. व ल.स. में संबंध
दो संख्याओं के गुणनफल, उनके महत्तम समापवर्तक (म.स.) और लघुतम समापवर्त्य (ल.स.) के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण संबंध होता है।
सूत्र: दो संख्याओं का गुणनफल = उनका म.स. \(\times\) उनका ल.स.
या
प्रथम संख्या \(\times\) द्वितीय संख्या = म.स. \(\times\) ल.स.
- उदाहरण: संख्याएँ 12 और 16
- दोनों संख्याओं का गुणनफल \(= 12 \times 16 = 192\)
- 12 और 16 का म.स. = 4
- 12 और 16 का ल.स. = 48
- म.स. \(\times\) ल.स. \(= 4 \times 48 = 192\)
- यहाँ, दोनों स्थितियों में गुणनफल समान है (192 = 192)।
इस संबंध के उपयोग:
- यदि दो संख्याओं में से एक संख्या, म.स. और ल.स. ज्ञात हों, तो दूसरी संख्या ज्ञात की जा सकती है।
- दूसरी संख्या \(= \frac{\text{म.स.} \times \text{ल.स.}}{\text{प्रथम संख्या}}\)
- यदि दो संख्याएँ ज्ञात हों और उनका म.स. ज्ञात हो, तो ल.स. ज्ञात किया जा सकता है।
- ल.स. \(= \frac{\text{प्रथम संख्या} \times \text{द्वितीय संख्या}}{\text{म.स.}}\)
अन्य महत्वपूर्ण संबंध:
- दो संख्याओं का म.स. हमेशा उनके ल.स. का एक गुणनखंड होता है।
- उदाहरण: 12 और 16 का म.स. 4 है और ल.स. 48 है। 4, 48 का एक गुणनखंड है (\(48 \div 4 = 12\)).
- ल.स. कभी भी दी गई संख्याओं से छोटा नहीं हो सकता। यह हमेशा सबसे बड़ी संख्या के बराबर या उससे बड़ा होता है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t18_scene1], [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t18_scene2] और [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t18_scene3] इस महत्वपूर्ण संबंध को उदाहरणों और गणितीय सिद्धांतों के साथ समझाते हैं। [IMAGE: cg_c6_maths_ch06_t18_scene4] इस विषय से संबंधित सामान्य गलतियों से बचने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
म.स. और ल.स. संबंध सूत्र: \(\text{प्रथम संख्या} \times \text{द्वितीय संख्या} = \text{म.स.} \times \text{ल.स.}\)
ल.स. कभी भी दी गई संख्याओं से छोटा नहीं हो सकता। यह हमेशा सबसे बड़ी संख्या के बराबर या उससे बड़ा होता है।
दो संख्याओं का म.स. उनके ल.स. का एक गुणनखंड होता है।