वृत्त
यह अध्याय छात्रों को वृत्त की मूल अवधारणाओं से परिचित कराता है। इसमें वृत्त की पहचान करना, परकार की सहायता से वृत्त बनाना, और वृत्त के विभिन्न भागों जैसे केंद्र, त्रिज्या, व्यास और जीवा को समझना शामिल है। छात्र वृत्त के परिमाप और व्यास के बीच संबंध भी सीखते हैं, जिसमें पाई (π) की अवधारणा का परिचय दिया गया है। यह अध्याय ज्यामितीय आकृतियों की बुनियादी समझ विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
वृत्त की पहचान
वृत्त एक बंद, गोल ज्यामितीय आकृति है जिसके सभी बिंदु एक निश्चित केंद्र से समान दूरी पर होते हैं।
- दैनिक जीवन में वृत्त: चूड़ी, रोटी, सिक्का, घड़ी, बैलगाड़ी का पहिया आदि।
- वृत्त की मुख्य विशेषताएँ:
- यह पूरी तरह से गोल होता है।
- यह एक बंद आकृति होती है।
- इसके सभी बाहरी बिंदु एक निश्चित केंद्र से समान दूरी पर होते हैं।
- अपूर्ण वृत्त: ऐसी आकृतियाँ जो गोल दिखें लेकिन उनके किनारे टेढ़े-मेढ़े हों या वे पूरी तरह से बंद न हों, उन्हें पूर्ण वृत्त नहीं कहा जा सकता।
वृत्त बनाने के तरीके:
- वस्तुओं की सहायता से: चूड़ी, सिक्का, कटोरी आदि को कागज़ पर रखकर उनके किनारे के चारों ओर पेंसिल चलाने से वृत्त बनाया जा सकता है। यह विधि अक्सर कम सटीक होती है।
- परकार की सहायता से: यह सबसे सटीक तरीका है। परकार में एक नोक (केंद्र के लिए) और एक पेंसिल (परिधि बनाने के लिए) होती है।
[IMAGE: cg_c6_maths_ch05_t1_scene2] [IMAGE: cg_c6_maths_ch05_t1_scene3]
वृत्त (Circle): एक समतल में स्थित उन सभी बिंदुओं का समूह जो एक निश्चित बिंदु (केंद्र) से समान दूरी पर होते हैं, वृत्त कहलाता है।
एक सटीक वृत्त बनाने के लिए परकार का उपयोग करना सबसे अच्छा तरीका है।
परकार की सहायता से वृत्त खींचना
परकार का उपयोग करके वृत्त बनाना एक निश्चित केंद्र और त्रिज्या के साथ एक सटीक वृत्त बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
चरण-दर-चरण विधि:
- परकार तैयार करें: अपने ज्यामिति बॉक्स से परकार लें। इसमें एक पेंसिल लगाएँ और उसे अपनी इच्छित त्रिज्या के अनुसार थोड़ा फैलाएँ।
- केंद्र निर्धारित करें: परकार की नोक को कागज़ के बीचों-बीच रखें। यह बिंदु वृत्त का केंद्र होगा। इसे 'O' से चिह्नित करें।
- वृत्त बनाएँ: परकार की नोक को स्थिर रखते हुए, पेंसिल वाले सिरे को चारों ओर घुमाएँ। सुनिश्चित करें कि परकार की नोक अपनी जगह से हिले नहीं।
- वृत्त के बिंदु: वृत्त की परिधि पर कोई भी बिंदु (जैसे A, B, C, D, E, F) लें।
माप का महत्व:
- केंद्र 'O' से वृत्त की परिधि पर किसी भी बिंदु (जैसे A, B, C) तक की दूरी (OA, OB, OC) हमेशा समान होती है।
- यह समान दूरी ही वृत्त की त्रिज्या कहलाती है।
[IMAGE: points_at_equal_distance_from_a_center_fig31]
केंद्र (Center): वृत्त के ठीक बीच में स्थित वह निश्चित बिंदु जिससे वृत्त की परिधि पर स्थित सभी बिंदु समान दूरी पर होते हैं।
त्रिज्या (Radius): वृत्त के केंद्र से उसकी परिधि पर स्थित किसी भी बिंदु तक की दूरी। इसे 'r' से दर्शाया जाता है। एक ही वृत्त की सभी त्रिज्याएँ समान लंबाई की होती हैं।
परकार से वृत्त बनाते समय नोक को स्थिर रखना सबसे महत्वपूर्ण है, अन्यथा वृत्त गोल नहीं बनेगा।
वृत्त के विभिन्न भाग (केंद्र, त्रिज्या)
वृत्त के मुख्य भाग हैं:
- केंद्र (Center): वह निश्चित बिंदु जिससे वृत्त की परिधि पर स्थित सभी बिंदु समान दूरी पर होते हैं। इसे अक्सर 'O' से दर्शाया जाता है।
- त्रिज्या (Radius): केंद्र से वृत्त की परिधि पर किसी भी बिंदु तक की दूरी। इसे 'r' से दर्शाया जाता है।
- एक ही वृत्त की सभी त्रिज्याएँ समान होती हैं।
- उदाहरण: OA, OB, OC, OD सभी त्रिज्याएँ हैं और इनकी लंबाई समान है।
कागज़ मोड़ने की गतिविधि से समझना:
- एक वृत्ताकार कागज़ काटें।
- इसे एक बार मोड़ें ताकि एक भाग दूसरे को ढक ले। यह मोड़ एक व्यास बनाएगा।
- इस अर्धवृत्ताकार आकृति को फिर से दो बराबर भागों में मोड़ें। यह दूसरा मोड़ पहले मोड़ के लंबवत होगा।
- कागज़ खोलने पर, आपको दो प्रतिच्छेदी रेखाएँ मिलेंगी जो वृत्त के केंद्र पर मिलती हैं।
- इन रेखाओं के सिरे वृत्त की परिधि पर होंगे।
- केंद्र से इन सिरों तक की दूरी (त्रिज्याएँ) समान होंगी।
[IMAGE: circular_paper_folding_fig850] [IMAGE: circle_divided_into_halves_fig830]
वृत्त के केंद्र से परिधि तक की दूरी को त्रिज्या कहते हैं।
जीवा और व्यास
जीवा (Chord):
- वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड जीवा कहलाता है।
- एक वृत्त में असंख्य जीवाएँ खींची जा सकती हैं।
- उदाहरण: चित्र में AB, EF, CD सभी जीवाएँ हैं।
व्यास (Diameter):
- वह जीवा जो वृत्त के केंद्र से होकर गुजरती है, व्यास कहलाती है।
- यह वृत्त की सबसे लंबी जीवा होती है।
- व्यास वृत्त को दो बराबर अर्धवृत्तों में विभाजित करता है।
- एक वृत्त में असंख्य व्यास खींचे जा सकते हैं, क्योंकि केंद्र से होकर जाने वाली कोई भी जीवा व्यास होती है।
- उदाहरण: चित्र में AD एक व्यास है।
[IMAGE: circle_chords_and_diameter_fig21]
जीवा (Chord): वृत्त की परिधि पर स्थित किन्हीं दो बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड।
व्यास (Diameter): वृत्त की सबसे लंबी जीवा जो उसके केंद्र से होकर गुजरती है। इसे 'd' से दर्शाया जाता है।
व्यास हमेशा केंद्र से होकर गुजरता है और वृत्त की सबसे लंबी जीवा होता है।
व्यास और त्रिज्या में संबंध
व्यास और त्रिज्या के बीच एक सीधा संबंध है:
- व्यास (d) हमेशा त्रिज्या (r) का दुगुना होता है।
- सूत्र: \(d = 2 \times r\) या \(d = 2r\)
- त्रिज्या (r) हमेशा व्यास (d) की आधी होती है।
- सूत्र: \(r = \frac{d}{2}\)
उदाहरण:
- यदि किसी वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी है, तो उसका व्यास \(2 \times 5 = 10\) सेमी होगा।
- यदि किसी वृत्त का व्यास 12 सेमी है, तो उसकी त्रिज्या \(\frac{12}{2} = 6\) सेमी होगी।
यह संबंध वृत्त के सभी मापों के लिए स्थिर रहता है।
व्यास और त्रिज्या का संबंध: \(d = 2r\) \(r = \frac{d}{2}\)
याद रखें, व्यास हमेशा केंद्र से होकर गुजरता है और दो त्रिज्याओं के बराबर होता है।
वृत्त का परिमाप और पाई (π)
परिमाप (Circumference):
- किसी भी बंद आकृति के घेरे की कुल लंबाई उसका परिमाप कहलाती है।
- वृत्त के परिमाप को उसकी परिधि (Circumference) भी कहते हैं।
- इसे मापने के लिए एक वृत्ताकार वस्तु को एक सीधी रेखा पर एक पूरा चक्कर घुमाकर तय की गई दूरी को मापा जा सकता है।
परिमाप और व्यास में संबंध:
- जब आप विभिन्न वृत्तों के परिमाप और उनके व्यास का अनुपात निकालते हैं, तो आप पाएँगे कि यह अनुपात हमेशा लगभग समान होता है।
- यह अनुपात एक स्थिरांक होता है जिसे ग्रीक अक्षर पाई (π) से दर्शाया जाता है।
- पाई (π) का मान:
- लगभग \(\frac{22}{7}\)
- या लगभग \(3.14\)
वृत्त के परिमाप का सूत्र:
- चूँकि \(\frac{\text{परिमाप}}{\text{व्यास}} = \pi\)
- तो, \(\text{परिमाप} = \pi \times \text{व्यास}\)
- और क्योंकि \(\text{व्यास} = 2 \times \text{त्रिज्या}\)
- इसलिए, \(\text{परिमाप} = \pi \times 2r\) या \(\text{परिमाप} = 2\pi r\)
[IMAGE: cg_c6_maths_ch05_t6_scene3]
परिमाप (Circumference): वृत्त के चारों ओर की कुल लंबाई।
पाई (π): वृत्त के परिमाप और व्यास का अनुपात। यह एक स्थिरांक है जिसका मान लगभग \(\frac{22}{7}\) या \(3.14\) होता है।
वृत्त के परिमाप का सूत्र: \(\text{परिमाप} = \pi d\) या \(\text{परिमाप} = 2\pi r\)