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पूर्णांक
Chhattisgarh · Class 6 · 🧮 Maths · Chapter 4

पूर्णांक

पूर्णांकसंख्या रेखा पर पूर्णांकों का निरूपणपूर्णांकों का जोड़ और घटावयोज्य प्रतिलोमपूर्णांकों का गुणापूर्णांकों का भाग

यह अध्याय छात्रों को पूर्णांकों की अवधारणा से परिचित कराता है, जिसमें धनात्मक, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य शामिल हैं। छात्र संख्या रेखा पर पूर्णांकों को निरूपित करना सीखते हैं और पूर्णांकों पर विभिन्न अंकगणितीय संक्रियाएँ जैसे जोड़, घटाव, गुणा और भाग करना सीखते हैं। इसमें योज्य प्रतिलोम और गुणन तत्समक जैसे महत्वपूर्ण गुण भी शामिल हैं, जो पूर्णांकों की गहरी समझ के लिए आवश्यक हैं। यह अध्याय दैनिक जीवन में पूर्णांकों के अनुप्रयोगों को समझने में मदद करता है।

ऋणात्मक संख्याएँ

संख्या रेखा पर धनात्मक और ऋणात्मक संख्याएँ
संख्या रेखा पर धनात्मक और ऋणात्मक संख्याएँ
तालाब के पानी का स्तर: ऋणात्मक परिवर्तन
तालाब के पानी का स्तर: ऋणात्मक परिवर्तन

पूर्णांकों को समझने से पहले, ऋणात्मक संख्याओं को समझना आवश्यक है।

  • परिभाषा: वे संख्याएँ जो शून्य से छोटी होती हैं, ऋणात्मक संख्याएँ कहलाती हैं। इन्हें ऋण चिह्न (-) के साथ दर्शाया जाता है, जैसे -1, -2, -3, आदि।
  • दैनिक जीवन में उपयोग:
  • तापमान: 0°C से नीचे का तापमान (-5°C)।
  • बैंक खाता: खाते में जमा राशि से अधिक निकासी (ओवरड्राफ्ट) (-₹500)।
  • ऊंचाई/गहराई: समुद्र तल से नीचे की गहराई (-100 मीटर)।
  • खेल: किसी खेल में हारने पर प्राप्त नकारात्मक अंक।
  • संख्या रेखा पर निरूपण:
  • शून्य (0) संख्या रेखा के केंद्र में होता है।
  • शून्य के दाईं ओर धनात्मक संख्याएँ (1, 2, 3...) होती हैं।
  • शून्य के बाईं ओर ऋणात्मक संख्याएँ (-1, -2, -3...) होती हैं।
  • जैसे-जैसे हम संख्या रेखा पर बाईं ओर जाते हैं, संख्याओं का मान कम होता जाता है
  • जैसे-जैसे हम संख्या रेखा पर दाईं ओर जाते हैं, संख्याओं का मान बढ़ता जाता है
  • उदाहरण: -5 < -2 < 0 < 3 < 7

संख्या रेखा पर ऋणात्मक संख्याओं की तुलना:

  • कोई भी धनात्मक संख्या किसी भी ऋणात्मक संख्या से बड़ी होती है। (जैसे 5 > -100)
  • शून्य (0) किसी भी ऋणात्मक संख्या से बड़ा होता है। (जैसे 0 > -5)
  • दो ऋणात्मक संख्याओं में, वह संख्या बड़ी होती है जिसका आंकिक मान छोटा होता है। (जैसे -2 > -5 क्योंकि 2 < 5)

[IMAGE: the_number_line_positive_and_negative_numbers_fig4] शून्य के बाईं ओर ऋणात्मक संख्याएँ और दाईं ओर धनात्मक संख्याएँ होती हैं।

महत्त्वपूर्ण

याद रखें:

  • सबसे छोटी धनात्मक पूर्णांक 1 है।
  • सबसे बड़ी ऋणात्मक पूर्णांक -1 है।
  • शून्य न तो धनात्मक है और न ही ऋणात्मक।

पूर्णांक (Integer) एवं संख्या रेखा पर पूर्णांक संख्या को निरूपित करना

संख्या रेखा पर पूर्णांकों का निरूपण
संख्या रेखा पर पूर्णांकों का निरूपण
वास्तविक संख्याओं का वर्गीकरण
वास्तविक संख्याओं का वर्गीकरण
  • परिभाषा: पूर्णांक संख्याओं का एक संग्रह है जिसमें सभी धनात्मक संख्याएँ (1, 2, 3, ...), सभी ऋणात्मक संख्याएँ (-1, -2, -3, ...) और शून्य (0) शामिल हैं।
  • पूर्णांकों के समुच्चय को I या Z से दर्शाया जाता है।
  • I = \(... , -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ...\)
  • प्राकृत संख्याएँ: 1, 2, 3, ... (धनात्मक पूर्णांक)
  • पूर्ण संख्याएँ: 0, 1, 2, 3, ... (शून्य और धनात्मक पूर्णांक)
  • पूर्णांक: पूर्ण संख्याएँ + ऋणात्मक संख्याएँ

संख्या रेखा पर पूर्णांकों का निरूपण:

  1. एक सीधी रेखा खींचें।
  2. रेखा पर समान दूरी पर कुछ बिंदु अंकित करें।
  3. रेखा के केंद्र में एक बिंदु को शून्य (0) मानें।
  4. शून्य के दाईं ओर के बिंदुओं पर 1, 2, 3, ... जैसी धनात्मक संख्याएँ लिखें।
  5. शून्य के बाईं ओर के बिंदुओं पर -1, -2, -3, ... जैसी ऋणात्मक संख्याएँ लिखें।
  6. यह रेखा संख्या रेखा कहलाती है।

[IMAGE: number_line_fig17] एक संख्या रेखा का चित्रण।

  • सबसे बड़ा/सबसे छोटा पूर्णांक: सबसे बड़ा पूर्णांक या सबसे छोटा पूर्णांक ज्ञात करना संभव नहीं है, क्योंकि संख्याएँ अनंत होती हैं।

[IMAGE: classification_of_real_numbers_fig76] वास्तविक संख्याओं का वर्गीकरण, जिसमें पूर्णांक भी शामिल हैं।

📖परिभाषा

पूर्णांक (Integers): संख्याओं का वह समूह जिसमें धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य शामिल होते हैं।

पूर्णांकों का योग (संख्या रेखा पर)

संख्या रेखा पर पूर्णांकों का योग \(8 + (-5) = 3\)
संख्या रेखा पर पूर्णांकों का योग \(8 + (-5) = 3\)

पूर्णांकों को संख्या रेखा पर जोड़ना एक दृश्य तरीका है जिससे अवधारणा को आसानी से समझा जा सकता है।

नियम:

  • धनात्मक संख्या जोड़ने पर: संख्या रेखा पर दाईं ओर चलें।
  • ऋणात्मक संख्या जोड़ने पर: संख्या रेखा पर बाईं ओर चलें।

विभिन्न स्थितियाँ:

  1. जब दोनों संख्याएँ धनात्मक हों (जैसे 3 + 5):
  • शून्य से शुरू करके 3 इकाई दाईं ओर जाएँ।
  • फिर, उस बिंदु से 5 इकाई और दाईं ओर जाएँ।
  • आप 8 पर पहुँचेंगे। अतः, \(3 + 5 = 8\).
  • [IMAGE: addition_of_integers_on_a_number_line_fig827]
  1. जब दोनों संख्याएँ ऋणात्मक हों (जैसे \((-2) + (-5)\)):
  • शून्य से शुरू करके 2 इकाई बाईं ओर जाएँ (-2 पर)।
  • फिर, उस बिंदु से 5 इकाई और बाईं ओर जाएँ (-7 पर)।
  • आप -7 पर पहुँचेंगे। अतः, \((-2) + (-5) = -7\).
  1. जब एक धनात्मक और एक ऋणात्मक संख्या हो:
  • (अ) \(8 + (-5)\):
  • शून्य से शुरू करके 8 इकाई दाईं ओर जाएँ (8 पर)।
  • फिर, उस बिंदु से 5 इकाई बाईं ओर जाएँ (3 पर)।
  • आप 3 पर पहुँचेंगे। अतः, \(8 + (-5) = 3\).
  • [IMAGE: addition_of_integers_on_a_number_line_fig827]
  • (ब) \((-8) + 5\):
  • शून्य से शुरू करके 8 इकाई बाईं ओर जाएँ (-8 पर)।
  • फिर, उस बिंदु से 5 इकाई दाईं ओर जाएँ (-3 पर)।
  • आप -3 पर पहुँचेंगे। अतः, \((-8) + 5 = -3\).

योग के गुणधर्म:

  • संवरक गुण: दो पूर्णांकों का योग हमेशा एक पूर्णांक होता है। (जैसे \(3 + (-5) = -2\), जो एक पूर्णांक है।)
  • क्रम विनिमेय गुण: पूर्णांकों का योग क्रम विनिमेय होता है। \(a + b = b + a\) (जैसे \(3 + (-5) = -2\) और \((-5) + 3 = -2\))
  • साहचर्य गुण: पूर्णांकों का योग साहचर्य होता है। \(a + (b + c) = (a + b) + c\)
  • योज्य तत्समक: किसी भी पूर्णांक में शून्य जोड़ने पर वही पूर्णांक प्राप्त होता है। शून्य को योज्य तत्समक कहते हैं। \(a + 0 = a\) (जैसे \(5 + 0 = 5\), \(-7 + 0 = -7\))
याद रखें

दो धनात्मक पूर्णांकों का योग हमेशा धनात्मक होता है। दो ऋणात्मक पूर्णांकों का योग हमेशा ऋणात्मक होता है। एक धनात्मक और एक ऋणात्मक पूर्णांक का योग:

  • यदि धनात्मक पूर्णांक का आंकिक मान अधिक है, तो योग धनात्मक होगा।
  • यदि ऋणात्मक पूर्णांक का आंकिक मान अधिक है, तो योग ऋणात्मक होगा।

पूर्णांकों का व्यवकलन (योज्य प्रतिलोम)

संख्या रेखा पर पूर्णांकों का व्यवकलन \(5 - 3 = 2\)
संख्या रेखा पर पूर्णांकों का व्यवकलन \(5 - 3 = 2\)

पूर्णांकों का व्यवकलन (घटाना) योग की विपरीत संक्रिया है।

योज्य तत्समक (Additive Identity):

  • वह संख्या जिसे किसी पूर्णांक में जोड़ने पर पूर्णांक का मान नहीं बदलता है।
  • शून्य (0) योज्य तत्समक है। \(a + 0 = a\).

योज्य प्रतिलोम (Additive Inverse):

  • किसी संख्या का योज्य प्रतिलोम वह संख्या है जिसे उस संख्या में जोड़ने पर योज्य तत्समक (शून्य) प्राप्त होता है।
  • किसी धनात्मक संख्या का योज्य प्रतिलोम एक ऋणात्मक संख्या होती है। (जैसे 5 का योज्य प्रतिलोम -5 है, क्योंकि \(5 + (-5) = 0\))
  • किसी ऋणात्मक संख्या का योज्य प्रतिलोम एक धनात्मक संख्या होती है। (जैसे -7 का योज्य प्रतिलोम +7 है, क्योंकि \((-7) + (+7) = 0\))
  • सूत्र: संख्या + संख्या का योज्य प्रतिलोम = 0

पूर्णांकों का व्यवकलन योज्य प्रतिलोम का उपयोग करके:

  • किसी पूर्णांक में से दूसरे पूर्णांक को घटाने का अर्थ है, पहली संख्या में दूसरी संख्या के योज्य प्रतिलोम को जोड़ना
  • उदाहरण 1: \(12 - (5)\)
  • 5 का योज्य प्रतिलोम -5 है।
  • तो, \(12 - (5) = 12 + (-5) = 7\).
  • उदाहरण 2: \(12 - (-5)\)
  • -5 का योज्य प्रतिलोम +5 है।
  • तो, \(12 - (-5) = 12 + (+5) = 12 + 5 = 17\).

घटाने के गुणधर्म:

  • संवरक गुण: दो पूर्णांकों का अंतर हमेशा एक पूर्णांक होता है। (जैसे \(5 - 8 = -3\), जो एक पूर्णांक है।)
  • क्रम विनिमेय गुण: पूर्णांकों का व्यवकलन क्रम विनिमेय नहीं होता है। \(a - b \neq b - a\) (जैसे \(5 - 3 = 2\) लेकिन \(3 - 5 = -2\))
  • साहचर्य गुण: पूर्णांकों का व्यवकलन साहचर्य नहीं होता है। \(a - (b - c) \neq (a - b) - c\)
  • शून्य घटाना: किसी पूर्णांक में से शून्य घटाने पर उसका मान नहीं बदलता। \(a - 0 = a\).

[IMAGE: subtraction_on_a_number_line_fig829] संख्या रेखा पर घटाव \(5 - 3 = 2\).

🧮सूत्र

योज्य प्रतिलोम: संख्या \(a\) का योज्य प्रतिलोम \(-a\) है। संख्या \(-a\) का योज्य प्रतिलोम \(a\) है।

याद रखें

घटाने का नियम: \(a - b = a + (-b)\) अर्थात्, घटाने वाली संख्या का चिन्ह बदलकर जोड़ दें।

घटाने की संक्षिप्त विधि

घटाने की संक्षिप्त विधि का परिचय
घटाने की संक्षिप्त विधि का परिचय
संक्षिप्त विधि के उदाहरण
संक्षिप्त विधि के उदाहरण

जब किसी संख्या को 10, 100, 1000 आदि से घटाना होता है, तो एक विशेष संक्षिप्त विधि का उपयोग किया जा सकता है। यह विधि हासिल लेने की प्रक्रिया को सरल बनाती है।

विधि का सिद्धांत:

  • हम सबसे बड़े स्थान के '1' को छोटी इकाइयों में बदलते हैं।
  • उदाहरण के लिए, 100 को 9 दहाई और 10 इकाई में बदला जा सकता है। \(100 = 90 + 10\).
  • 1000 को 9 सैकड़ा, 9 दहाई और 10 इकाई में बदला जा सकता है। \(1000 = 900 + 90 + 10\).

संक्षिप्त नियम:

  • घटाए जाने वाली संख्या के इकाई के अंक को 10 से घटाया जाता है
  • उसके बाईं ओर के सभी अंकों को 9 से घटाया जाता है

उदाहरण:

  1. \(100 - 23\):
  • इकाई अंक: \(10 - 3 = 7\)
  • दहाई अंक: \(9 - 2 = 7\)
  • उत्तर: 77
  1. \(1000 - 512\):
  • इकाई अंक: \(10 - 2 = 8\)
  • दहाई अंक: \(9 - 1 = 8\)
  • सैकड़ा अंक: \(9 - 5 = 4\)
  • उत्तर: 488
  1. \(10000 - 8374\):
  • इकाई अंक: \(10 - 4 = 6\)
  • दहाई अंक: \(9 - 7 = 2\)
  • सैकड़ा अंक: \(9 - 3 = 6\)
  • हजार अंक: \(9 - 8 = 1\)
  • उत्तर: 1626

[IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t5_scene2] घटाने की संक्षिप्त विधि का परिचय। [IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t5_scene3] संक्षिप्त विधि के उदाहरण।

💡सुझाव

यह विधि विशेष रूप से उन संख्याओं के लिए उपयोगी है जो 10, 100, 1000 आदि की घातों से घटाई जाती हैं। यह गणना को तेज और त्रुटि-मुक्त बनाती है।

बीजांक से जोड़-घटाने की जाँच

बीजांक क्या है?
बीजांक क्या है?
जोड़ की जाँच बीजांक से
जोड़ की जाँच बीजांक से
घटाने की जाँच बीजांक से
घटाने की जाँच बीजांक से
  • बीजांक (Digital Root): किसी संख्या के अंकों का योग तब तक करते हैं जब तक एक अंक वाली संख्या न मिल जाए। यही अंतिम अंक उस संख्या का बीजांक होता है।
  • उदाहरण 1: 45 का बीजांक \(4 + 5 = 9\).
  • उदाहरण 2: 457 का बीजांक \(4 + 5 + 7 = 16\). चूंकि 16 दो अंकों की संख्या है, तो \(1 + 6 = 7\). अतः 457 का बीजांक 7 है।

जोड़ की जाँच बीजांक से:

  1. जोड़ी जाने वाली संख्याओं का बीजांक ज्ञात करें।
  2. इन बीजांकों का योग करें।
  3. प्राप्त योग का बीजांक ज्ञात करें।
  4. अब, योगफल (उत्तर) का बीजांक ज्ञात करें।
  5. यदि चरण 3 और चरण 4 के बीजांक बराबर हैं, तो उत्तर सही है।
  • उदाहरण: \(453 + 158 = 611\)
  • 453 का बीजांक: \(4+5+3 = 12 \rightarrow 1+2 = 3\)
  • 158 का बीजांक: \(1+5+8 = 14 \rightarrow 1+4 = 5\)
  • बीजांकों का योग: \(3 + 5 = 8\)
  • उत्तर 611 का बीजांक: \(6+1+1 = 8\)
  • चूंकि \(8 = 8\), उत्तर सही है।

घटाने की जाँच बीजांक से:

  1. उत्तर का बीजांक ज्ञात करें।
  2. घटाई जाने वाली संख्या का बीजांक ज्ञात करें।
  3. चरण 1 और चरण 2 के बीजांकों को जोड़ें।
  4. इस योग का बीजांक ज्ञात करें।
  5. अब, ऊपर वाली संख्या (जिसमें से घटाया गया था) का बीजांक ज्ञात करें।
  6. यदि चरण 4 और चरण 5 के बीजांक बराबर हैं, तो उत्तर सही है।
  • उदाहरण: \(587 - 235 = 352\)
  • उत्तर 352 का बीजांक: \(3+5+2 = 10 \rightarrow 1+0 = 1\)
  • घटाई जाने वाली संख्या 235 का बीजांक: \(2+3+5 = 10 \rightarrow 1+0 = 1\)
  • बीजांकों का योग: \(1 + 1 = 2\)
  • ऊपर वाली संख्या 587 का बीजांक: \(5+8+7 = 20 \rightarrow 2+0 = 2\)
  • चूंकि \(2 = 2\), उत्तर सही है।

[IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t6_scene1] बीजांक क्या है? [IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t6_scene2] जोड़ की जाँच बीजांक से। [IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t6_scene3] घटाने की जाँच बीजांक से।

💡सुझाव

बीजांक विधि एक त्वरित जाँच उपकरण है, लेकिन यह 100% सटीक नहीं होती (जैसे अंकों के क्रम बदलने पर बीजांक समान रह सकता है)। फिर भी, यह अधिकांश गणना त्रुटियों को पकड़ने में सहायक है।

पूर्णांकों का गुणन

पूर्णांकों के गुणा के नियम
पूर्णांकों के गुणा के नियम
9, 99, 999 से गुणा करने का पैटर्न
9, 99, 999 से गुणा करने का पैटर्न
दो अंकों की संख्याओं का गुणा: चरण-दर-चरण
दो अंकों की संख्याओं का गुणा: चरण-दर-चरण
पूर्णांकों में गुणन संक्रिया के गुण
पूर्णांकों में गुणन संक्रिया के गुण

पूर्णांकों के गुणन में संख्याओं के चिन्ह महत्वपूर्ण होते हैं।

गुणन के नियम:

  1. दो धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल: हमेशा धनात्मक होता है।
  • उदाहरण: \(3 \times 4 = 12\)
  1. दो ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल: हमेशा धनात्मक होता है।
  • उदाहरण: \((-6) \times (-2) = 12\)
  1. एक धनात्मक और एक ऋणात्मक पूर्णांक का गुणनफल: हमेशा ऋणात्मक होता है।
  • उदाहरण: \((-5) \times 2 = -10\), \(3 \times (-6) = -18\)

संक्षेप में चिन्ह नियम:

  • \((+) \times (+) = (+)\)
  • \((-) \times (-) = (+)\)
  • \((+) \times (-) = (-)\)
  • \((-) \times (+) = (-)\)

9, 99, 999... आदि से गुणा करने का पैटर्न:

  • किसी संख्या को 9 से गुणा करने पर, गुणनफल का दहाई अंक गुण्य से एक कम होता है, और इकाई अंक 9 में से दहाई अंक के पूरक को घटाकर प्राप्त होता है।
  • उदाहरण: \(8 \times 9 = 72\) (8 से 1 कम = 7 दहाई, \(9 - 7 = 2\) इकाई)
  • उदाहरण: \(6 \times 9 = 54\) (6 से 1 कम = 5 दहाई, \(9 - 5 = 4\) इकाई)
  • इसी तरह, 99, 999 आदि से गुणा करने पर भी पैटर्न बनता है।
  • उदाहरण: \(47 \times 99 = 4653\) (47 से 1 कम = 46, \(99 - 46 = 53\))
  • उदाहरण: \(217 \times 999 = 216783\) (217 से 1 कम = 216, \(999 - 216 = 783\))

दो अंकों की संख्याओं का गुणन (चरण-दर-चरण विधि):

यह विधि वैदिक गणित के 'ऊर्ध्वतिर्यग्भ्याम्' सूत्र पर आधारित है।

  • उदाहरण: \(13 \times 12\)
  1. इकाई के अंकों का गुणा: \(3 \times 2 = 6\) (इकाई स्थान पर लिखें)
  2. क्रॉस-गुणा और योग: \((1 \times 2) + (3 \times 1) = 2 + 3 = 5\) (दहाई स्थान पर लिखें)
  3. दहाई के अंकों का गुणा: \(1 \times 1 = 1\) (सैकड़ा स्थान पर लिखें)
  • उत्तर: 156
  • हासिल के साथ उदाहरण: \(43 \times 12\)
  1. इकाई: \(3 \times 2 = 6\)
  2. क्रॉस-गुणा: \((4 \times 2) + (3 \times 1) = 8 + 3 = 11\). 1 दहाई लिखें, 1 सैकड़ा हासिल।
  3. दहाई: \(4 \times 1 = 4\). हासिल 1 जोड़ें: \(4 + 1 = 5\) सैकड़ा।
  • उत्तर: 516

गुणन संक्रिया के गुणधर्म:

  1. संवरक गुण: दो पूर्णांकों का गुणनफल हमेशा एक पूर्णांक होता है। (जैसे \(3 \times (-6) = -18\))
  2. क्रम विनिमेय गुण: पूर्णांकों का गुणन क्रम विनिमेय होता है। \(a \times b = b \times a\) (जैसे \((-7) \times 2 = -14\) और \(2 \times (-7) = -14\))
  3. गुणन तत्समक अवयव: किसी भी पूर्णांक को 1 से गुणा करने पर वही पूर्णांक प्राप्त होता है। 1 को गुणन तत्समक कहते हैं। \(a \times 1 = a\) (जैसे \((-4) \times 1 = -4\))
  4. शून्य का गुणनफल: किसी भी पूर्णांक को शून्य से गुणा करने पर गुणनफल हमेशा शून्य होता है। \(a \times 0 = 0\) (जैसे \((-3) \times 0 = 0\))
  5. साहचर्य गुण: पूर्णांकों का गुणन साहचर्य होता है। \(a \times (b \times c) = (a \times b) \times c\)
  • उदाहरण: \((-3) \times (4 \times 5) = (-3 \times 4) \times 5\)
  • \((-3) \times 20 = (-12) \times 5\)
  • \(-60 = -60\)
  1. वितरण गुण: गुणन संक्रिया योग संक्रिया पर वितरण गुण का पालन करती है। \(a \times (b + c) = a \times b + a \times c\)
  • उदाहरण: \(3 \times (-4 + 5) = 3 \times (-4) + 3 \times 5\)
  • \(3 \times 1 = -12 + 15\)
  • \(3 = 3\)

[IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t7_scene1] पूर्णांकों के गुणा के नियम। [IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t7_scene2] 9, 99, 999 से गुणा करने का पैटर्न। [IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t7_scene3] दो अंकों की संख्याओं का गुणा: चरण-दर-चरण। [IMAGE: cg_c6_maths_ch04_t7_scene4] पूर्णांकों में गुणन संक्रिया के गुण।

🧮सूत्र

चिन्ह नियम (गुणा): \((+) \times (+) = (+)\) \((-) \times (-) = (+)\) \((+) \times (-) = (-)\) \((-) \times (+) = (-)\)

पूर्णांकों का भाग

पूर्णांकों का भाग गुणन की विपरीत संक्रिया है।

भाग के नियम (चिन्हों के लिए):

  • दो धनात्मक पूर्णांकों का भागफल: हमेशा धनात्मक होता है।
  • उदाहरण: \(12 \div 3 = 4\)
  • दो ऋणात्मक पूर्णांकों का भागफल: हमेशा धनात्मक होता है।
  • उदाहरण: \((-12) \div (-3) = 4\)
  • एक धनात्मक और एक ऋणात्मक पूर्णांक का भागफल: हमेशा ऋणात्मक होता है।
  • उदाहरण: \((-12) \div 3 = -4\), \(12 \div (-3) = -4\)

संक्षेप में चिन्ह नियम:

  • \((+) \div (+) = (+)\)
  • \((-) \div (-) = (+)\)
  • \((+) \div (-) = (-)\)
  • \((-) \div (+) = (-)\)

भाग संक्रिया के गुणधर्म:

  1. संवरक गुण: पूर्णांकों के भाग पर सदैव संवरक गुण लागू नहीं होता है।
  • उदाहरण: \(3 \div 4 = \frac{3}{4}\), जो एक पूर्णांक नहीं है।
  1. क्रम विनिमेय गुण: पूर्णांकों का भाग क्रम विनिमेय नहीं होता है। \(a \div b \neq b \div a\)
  2. साहचर्य गुण: पूर्णांकों का भाग साहचर्य नहीं होता है। \(a \div (b \div c) \neq (a \div b) \div c\)
  3. 1 से भाग: शून्य को छोड़कर प्रत्येक पूर्णांक को उसी पूर्णांक से भाग देने पर भागफल हमेशा 1 आता है। \(a \div a = 1\) (जहाँ \(a \neq 0\))
  • उदाहरण: \(7 \div 7 = 1\)
  1. योज्य प्रतिलोम से भाग: शून्य को छोड़कर प्रत्येक पूर्णांक को उसके योज्य प्रतिलोम से भाग देने पर परिणाम -1 प्राप्त होता है। \(a \div (-a) = -1\) (जहाँ \(a \neq 0\))
  • उदाहरण: \(15 \div (-15) = -1\)
  1. शून्य में भाग: शून्य में किसी भी गैर-शून्य पूर्णांक संख्या का भाग देने पर भागफल का मान शून्य ही रहता है। \(0 \div a = 0\) (जहाँ \(a \neq 0\))
  • उदाहरण: \(0 \div 16 = 0\)
  1. शून्य से भाग: किसी पूर्णांक संख्या में शून्य से भाग देना अपरिभाषित है। \(a \div 0 =\) अपरिभाषित।
  • उदाहरण: \(4 \div 0 =\) अपरिभाषित।

सारांश तालिका: पूर्णांकों के गुणधर्म | संक्रिया | संवरक | क्रम विनिमेय | साहचर्य | तत्समक अवयव | |:----------|:-----:|:-----------:|:-------:|:------------:| | योग (+) | हाँ | हाँ | हाँ | 0 (योज्य तत्समक) | | व्यवकलन (-) | हाँ | नहीं | नहीं | कोई नहीं | | गुणन (×) | हाँ | हाँ | हाँ | 1 (गुणन तत्समक) | | भाग (÷) | नहीं | नहीं | नहीं | कोई नहीं |

🚧ग़लत धारणा

शून्य से भाग देना अपरिभाषित है। इसे कभी भी 0 या किसी अन्य संख्या के बराबर न मानें।

🧮सूत्र

चिन्ह नियम (भाग): \((+) \div (+) = (+)\) \((-) \div (-) = (+)\) \((+) \div (-) = (-)\) \((-) \div (+) = (-)\)

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