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दैनिक जीवन में रसायन
Chhattisgarh · Class 10 · 🔬 Science · Chapter 17

दैनिक जीवन में रसायन

जल की कठोरतासोडियम क्लोराइड का महत्वसोडा के प्रकार और उपयोगप्लास्टर ऑफ पेरिस का निर्माण और उपयोगविरंजक चूर्ण के अनुप्रयोगसीमेंट और काँच का उत्पादन

यह अध्याय छात्रों को दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण रासायनिक पदार्थों से परिचित कराता है। इसमें जल की कठोरता, साधारण नमक का निर्माण और उपयोग, बेकिंग सोडा, कपड़े धोने का सोडा, प्लास्टर ऑफ पेरिस, विरंजक चूर्ण, सीमेंट और काँच जैसे पदार्थों के रासायनिक गुण, निर्माण विधि और उनके अनुप्रयोगों के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह अध्याय छात्रों को इन रसायनों के महत्व और हमारे जीवन पर उनके प्रभाव को समझने में मदद करता है।

जल के गुणधर्म

जल पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके कुछ महत्वपूर्ण गुणधर्म और प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • जल की अवस्थाएँ: पृथ्वी पर जल तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है:
  • ठोस: बर्फ
  • द्रव: जल
  • गैस: जलवाष्प
  • घनत्व का असामान्य व्यवहार:
  • सामान्यतः ठोस अवस्था का घनत्व द्रव अवस्था से अधिक होता है।
  • लेकिन, बर्फ का घनत्व (0.9 g/mL) जल के घनत्व (4°C पर 1 g/mL) से कम होता है।
  • यह गुण जलीय जीवन के लिए वरदान है, क्योंकि ठंडे क्षेत्रों में नदियों और झीलों की सतह पर बर्फ जमने के बाद भी नीचे जल द्रव अवस्था में रहता है, जिससे जलीय जीव जीवित रह पाते हैं। बर्फ ऊष्मा की कुचालक होती है, जो नीचे के पानी को धीरे-धीरे ठंडा होने देती है।
  • सार्वत्रिक विलायक (Universal Solvent):
  • जल सर्वाधिक पदार्थों को घोल लेता है, इसलिए इसे सार्वत्रिक विलायक कहते हैं।
  • मृदु जल (Soft Water):
  • साबुन के साथ जल्दी और अधिक झाग देने वाला जल।
  • उदाहरण: वर्षा का जल, आसुत जल।
  • कठोर जल (Hard Water):
  • साबुन के साथ देर से तथा बहुत कम झाग देने वाला जल।
  • साबुन ऐसे जल के साथ फटकर थक्का या अवक्षेप बनाता है।
  • जल की कठोरता का कारण:
  • जल में कैल्सियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) के हाइड्रोजनकार्बोनेट, सल्फेट और क्लोराइड लवणों की उपस्थिति।
  • सोडियम के लवण घुले होने पर जल मृदु होता है।
  • साबुन की अभिक्रिया: साबुन (उच्च वसीय अम्लों का सोडियम लवण, जैसे सोडियम स्टिऐरेट C₁₇H₃₅COONa) कठोर जल में Ca²⁺ या Mg²⁺ आयनों से अभिक्रिया करके अघुलनशील अवक्षेप बनाता है।

$$2C_{17}H_{35}COONa + M^{2+} \rightarrow (C_{17}H_{35}COO)_2M \downarrow + 2Na^+(aq)$$ (यहाँ M²⁺ = Ca²⁺ या Mg²⁺)

  • यह अवक्षेप कपड़ों पर चिपक जाता है, जिससे कपड़े मलिन (dull) हो जाते हैं और बहुत सारा साबुन व्यर्थ चला जाता है।
  • कठोरता के प्रकार:
  • 1. अस्थायी कठोरता (Temporary Hardness):
  • कारण: कैल्सियम और मैग्नीशियम के हाइड्रोजनकार्बोनेट (जैसे Ca(HCO₃)₂, Mg(HCO₃)₂) की उपस्थिति।
  • दूर करने की विधि:
  • उबालना: गर्म करने पर विलेय हाइड्रोजनकार्बोनेट अविलेय कार्बोनेट में बदलकर अवक्षेपित हो जाते हैं।

$$Ca(HCO_3)_2(aq) \xrightarrow{गर्म करने पर} CaCO_3\downarrow + H_2O(l) + CO_2\uparrow$$ $$Mg(HCO_3)_2(aq) \xrightarrow{गर्म करने पर} MgCO_3\downarrow + H_2O(l) + CO_2\uparrow$$

  • क्लार्क विधि (चूने का पानी मिलाकर): चूने के पानी (Ca(OH)₂) की निश्चित मात्रा मिलाने पर।

$$Ca(HCO_3)_2(aq) + Ca(OH)_2(aq) \rightarrow 2CaCO_3\downarrow + 2H_2O(l)$$

  • 2. स्थायी कठोरता (Permanent Hardness):
  • कारण: कैल्सियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड और सल्फेट लवणों (जैसे CaCl₂, MgCl₂, CaSO₄, MgSO₄) की उपस्थिति।
  • दूर करने की विधि: इसे उबालने या चूने के पानी से दूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए आधुनिक विधियाँ जैसे आयन विनिमय रेजिन या विपरीत परासरण (RO) का उपयोग किया जाता है।
  • कठोर जल के मृदुकरण की आधुनिक विधियाँ:
  • विपरीत परासरण (Reverse Osmosis/RO): उच्च दाब का उपयोग कर सांद्र विलयन (कठोर जल) से पानी के अणुओं को अर्धपारगम्य झिल्ली से पार कराया जाता है, जिससे शुद्ध जल प्राप्त होता है। इसमें पानी की अधिक मात्रा व्यर्थ होती है।
  • आयन विनिमय रेजिन विधि: सोडियम आयन युक्त रेजिन (रंध्रयुक्त पदार्थ) का उपयोग किया जाता है। कठोर जल रेजिन से गुजरने पर Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों का विनिमय रेजिन के Na⁺ आयनों से हो जाता है, जिससे जल मृदु हो जाता है।
  • पीने योग्य जल (Potable Water):
  • स्वच्छ, रंगहीन, गंधहीन और रोगाणुरहित होना चाहिए।
  • आवश्यक विलेय लवणों की उपयुक्त मात्रा होनी चाहिए।
  • शुद्धिकरण: फिटकरी, विरंजक चूर्ण, लाल दवा (पोटैशियम परमैंगनेट), क्लोरीन मिलाकर या पराबैंगनी किरणों से शोधन किया जाता है।
  • आसुत जल (Distilled Water): आसवन द्वारा प्राप्त, प्रायोगिक कार्यों, गाड़ियों की बैटरी और मेडिकल क्षेत्रों में उपयोग होता है।
  • जल के उपयोग:
  • विलायक के रूप में।
  • कृषि में सिंचाई हेतु।
  • उद्योगों में (वस्त्र, कागज, खनन)।
  • कपड़े धोने एवं साफ-सफाई में।
  • उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण भाप इंजन, बॉयलर, कूलर आदि में।
  • जल प्रदूषण (Water Pollution):
  • कारण: औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू साफ-सफाई का जल, मल-वाहित जल, हानिकारक कीटनाशक, मानवीय क्रियाकलाप (नहाना, कपड़े धोना, पूजा सामग्री विसर्जन)।
  • नियंत्रण के उपाय:
  • औद्योगिक अपशिष्ट जल का उपचार।
  • घरेलू एवं मल-वाहित जल का उपचार।
  • हानिकारक कीटनाशकों का नियंत्रित उपयोग।
  • मानवीय क्रियाकलापों पर नियंत्रण।
महत्त्वपूर्ण

बर्फ का घनत्व जल से कम होने के कारण यह जल पर तैरती है, जिससे जलीय जीव ठंडे मौसम में भी जीवित रह पाते हैं।

📖परिभाषा

सार्वत्रिक विलायक: वह पदार्थ जो अधिकतम पदार्थों को अपने में घोलने की क्षमता रखता है, जैसे जल।

💡सुझाव

अस्थायी कठोरता को उबालकर दूर किया जा सकता है, जबकि स्थायी कठोरता को नहीं। यह अंतर अक्सर पूछा जाता है।

साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड - NaCl)

साधारण नमक हमारे दैनिक जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है।

  • प्राकृतिक स्रोत:
  • समुद्र का खारा पानी: इसमें 30-35g लवण प्रति लीटर होता है, जिसमें मुख्यतः सोडियम क्लोराइड होता है।
  • नमक की खदानें (खनिज नमक): माना जाता है कि ये समुद्र के किसी हिस्से के सूख जाने से बनी होंगी।
  • नमक का निर्माण (समुद्री जल से):
  • समुद्र के जल को उथले गड्ढों में इकट्ठा करके वाष्पीकृत होने के लिए छोड़ दिया जाता है।
  • जल के वाष्पीकृत होने पर कच्चा नमक बच जाता है, जिसमें नमक के अलावा अन्य लवण और रेत भी होती है।
  • इस कच्चे नमक को शुद्ध और क्रिस्टलीकृत कर उपयोग में लाया जाता है।
  • आयोडीन युक्त नमक:
  • नमक में पोटैशियम आयोडेट (KIO₃) के रूप में आयोडीन मिलाया जाता है।
  • महत्व: आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो सकता है, इसलिए आयोडीन युक्त नमक का सेवन आवश्यक है।
  • जैविक महत्व:
  • नमक जैविक प्रक्रियाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
  • शरीर में इसकी अधिक मात्रा उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) और कम मात्रा निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) का कारण बन सकती है।
  • पैकेट बंद नमकीन खाद्य पदार्थों (जैसे सेव, चिप्स) में नमक की अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
  • उपयोग:
  • परिरक्षक (Preservative): खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए, यह बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकता है।
  • कच्चा पदार्थ: कॉस्टिक सोडा (NaOH), बेकिंग सोडा (NaHCO₃), कपड़े धोने का सोडा (Na₂CO₃·10H₂O), विरंजक चूर्ण (CaOCl₂) आदि के निर्माण में।
  • पुनर्योजी विलयन (ORS): नमक और शक्कर के पानी में घुलने से बने ORS का उपयोग शरीर में जल की मात्रा कम होने पर प्राथमिक उपचार के लिए किया जाता है।
याद रखें

साधारण नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड (NaCl) है।

खाने का सोडा (सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट - NaHCO₃)

खाने का सोडा रसोई घर में खाद्य पदार्थों को स्पंजी बनाने और शीघ्रता से पकाने के लिए उपयोग होता है।

  • रासायनिक नाम: सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (या सोडियम बाइकार्बोनेट)।
  • रासायनिक सूत्र: NaHCO₃
  • निर्माण विधि (साल्वे अमोनिया विधि):
  • सोडियम क्लोराइड (NaCl), जल (H₂O), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और अमोनिया (NH₃) की अभिक्रिया से।
  • $$NaCl + H_2O + CO_2 + NH_3 \rightarrow NH_4Cl + NaHCO_3$$

(अमोनियम क्लोराइड + सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट)

  • गुणधर्म:
  • यह एक क्षारीय लवण है, इसलिए इसका उपयोग अम्लीय विलयन को उदासीन करने के लिए किया जाता है।
  • गर्म करने पर अपघटन: गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) बनाता है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस मुक्त करता है।

$$2NaHCO_3 \xrightarrow{गर्म करने पर} Na_2CO_3 + H_2O + CO_2\uparrow$$

  • उपयोग:
  • बेकिंग पाउडर बनाने में: बेकिंग पाउडर, खाने का सोडा (NaHCO₃) और टार्टरिक अम्ल (या अन्य दुर्बल खाद्य अम्ल) का मिश्रण होता है।
  • जल में मिलाने पर अभिक्रिया:

$$NaHCO_3 + H^+(अम्ल से) \rightarrow CO_2\uparrow + H_2O + अम्ल का सोडियम लवण$$

  • उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड गैस के कारण ब्रेड, खमण और केक फूल जाते हैं, जिससे वे मुलायम और स्पंजी हो जाते हैं।
  • प्रति अम्ल (Antacid) के रूप में: पेट की अम्लीयता (acidity) कम करने में उपयोग होता है। क्षारीय प्रकृति के कारण यह पेट के अम्ल को उदासीन करता है।
  • सोडा-अम्ल अग्निशामक यंत्र में: आग बुझाने के लिए CO₂ उत्पन्न करने में उपयोग होता है।
🧮सूत्र

खाने का सोडा का सूत्र: NaHCO₃

महत्त्वपूर्ण

बेकिंग पाउडर में खाने का सोडा के साथ अम्ल मिलाया जाता है ताकि गर्म करने पर CO₂ गैस उत्पन्न हो, जो खाद्य पदार्थों को फुलाती है।

कपड़े धोने का सोडा (सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट - Na₂CO₃·10H₂O)

कपड़े धोने का सोडा, जिसे धावन सोडा भी कहते हैं, एक महत्वपूर्ण क्षारीय लवण है।

  • रासायनिक नाम: सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट।
  • रासायनिक सूत्र: Na₂CO₃·10H₂O
  • निर्माण विधि:
  • बेकिंग सोडा (NaHCO₃) को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) प्राप्त किया जाता है।

$$2NaHCO_3 \xrightarrow{गर्म करने पर} Na_2CO_3 + H_2O + CO_2$$

  • सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलीकरण से कपड़े धोने का सोडा प्राप्त होता है।

$$Na_2CO_3(s) + 10H_2O(l) \rightarrow Na_2CO_3 \cdot 10H_2O(s)$$

  • क्रिस्टलन जल (Water of Crystallisation):
  • किसी भी लवण के सूत्र में जुड़े जल के निश्चित अणुओं की संख्या को क्रिस्टलन जल कहते हैं।
  • धावन सोडा में प्रति अणु 10 जल के अणु होते हैं। यह इसे आर्द्र (गीला) नहीं बनाता, बल्कि यह एक सफेद क्रिस्टलीय पदार्थ होता है।
  • उत्फुल्लन (Efflorescence):
  • धावन सोडा के क्रिस्टल को वायु में खुला छोड़ने पर, यह अपने क्रिस्टलन जल के नौ अणुओं को खो देता है और एक सफेद चूर्ण सोडियम कार्बोनेट मोनोहाइड्रेट (Na₂CO₃·H₂O) में परिवर्तित हो जाता है।
  • इस गुण को उत्फुल्लन कहते हैं।

$$Na_2CO_3 \cdot 10H_2O(s) \xrightarrow{खुला रखने पर} Na_2CO_3 \cdot H_2O(s) + 9H_2O$$

  • उपयोग:
  • घरों में साफ-सफाई के लिए।
  • काँच, साबुन, वस्त्र और कागज उद्योगों में।
  • जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए।
🧮सूत्र

कपड़े धोने का सोडा का सूत्र: Na₂CO₃·10H₂O

📖परिभाषा

उत्फुल्लन: जब कोई क्रिस्टलीय पदार्थ वायु में खुला रखने पर अपने क्रिस्टलन जल के अणुओं को खो देता है और चूर्ण में बदल जाता है।

प्लास्टर ऑफ पेरिस (कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट - CaSO₄·½H₂O)

प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) एक महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिक है जिसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में होता है।

  • रासायनिक नाम: कैल्सियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट।
  • रासायनिक सूत्र: CaSO₄·½H₂O या (CaSO₄)₂·H₂O
  • निर्माण विधि:
  • इसे जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) को 100°C (373 K) पर गर्म करके बनाया जाता है।
  • $$CaSO_4 \cdot 2H_2O \xrightarrow{100°C} CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O + 1\frac{1}{2}H_2O$$

(जिप्सम → प्लास्टर ऑफ पेरिस + जल)

  • गुणधर्म:
  • यह एक सफेद चूर्ण है।
  • जल के साथ अभिक्रिया: जल के साथ मिलाने पर यह पुनः जिप्सम में परिवर्तित हो जाता है, जो एक कठोर पदार्थ होता है।

$$CaSO_4 \cdot \frac{1}{2}H_2O + 1\frac{1}{2}H_2O \rightarrow CaSO_4 \cdot 2H_2O$$

  • इसे वायुरोधी (air tight) डिब्बे में रखा जाता है ताकि यह वायुमंडलीय नमी से अभिक्रिया करके कठोर जिप्सम में न बदल जाए।
  • उपयोग:
  • चिकित्सा क्षेत्र में: डॉक्टर टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में स्थिर रखने के लिए इसका उपयोग करते हैं (प्लास्टर चढ़ाने में)।
  • मूर्तियाँ और खिलौने बनाने में।
  • साँचे और मॉडल बनाने में।
  • चॉक बनाने में।
  • अग्निरोधी पदार्थ के रूप में।
  • पर्यावरणीय चिंता: POP से बनी मूर्तियों को नदी और तालाब में विसर्जित करने से जल स्रोत प्रदूषित होते हैं।
🧮सूत्र

प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र: CaSO₄·½H₂O

💡सुझाव

POP को वायुरोधी डिब्बे में क्यों रखते हैं, यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है। इसका कारण है कि यह नमी से अभिक्रिया कर जिप्सम में बदलकर कठोर हो जाता है।

विरंजक चूर्ण (कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड - CaOCl₂)

विरंजक चूर्ण एक महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिक है जिसका उपयोग विरंजन और कीटाणुशोधन में होता है।

  • रासायनिक नाम: कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड।
  • रासायनिक सूत्र: CaOCl₂ (इसे चूने का क्लोराइड भी कहते हैं)।
  • निर्माण विधि:
  • इसे शुष्क बुझे हुए चूने [Ca(OH)₂] पर क्लोरीन गैस (Cl₂) प्रवाहित करके बनाया जाता है।
  • $$Ca(OH)_2(s) + Cl_2(g) \rightarrow CaOCl_2(s) + H_2O(g)$$

(बुझा हुआ चूना + क्लोरीन → विरंजक चूर्ण + जल)

  • गुणधर्म:
  • यह पीलापन लिए हुए एक सफेद चूर्ण है।
  • इसमें क्लोरीन की तीक्ष्ण गंध होती है।
  • वायु में खुला छोड़ने पर: यह कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के साथ अभिक्रिया कर क्लोरीन गैस मुक्त करता है।

$$CaOCl_2(s) + CO_2(g) \rightarrow CaCO_3(s) + Cl_2(g)$$

  • उपयोग:
  • वस्त्र उद्योग में: सूती कपड़ों के विरंजन (bleaching) में। विरंजन की क्रिया इसमें से निकलने वाली क्लोरीन गैस के कारण होती है।
  • कागज उद्योग में: काष्ठ लुगदी के विरंजन में।
  • जल शुद्धिकरण में: पीने वाले जल को रोगाणु मुक्त करने में (कीटाणुनाशक के रूप में)।
  • रासायनिक उद्योगों में एक उपचायक (oxidizing agent) के रूप में।
🧮सूत्र

विरंजक चूर्ण का सूत्र: CaOCl₂

महत्त्वपूर्ण

विरंजक चूर्ण से निकलने वाली क्लोरीन गैस ही विरंजन और रोगाणुनाशन का कार्य करती है।

सीमेंट: परिचय एवं गुणधर्म

सीमेंट भवन निर्माण के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पदार्थ है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'जोड़ने या चिपकाने वाला' होता है।

  • परिचय:
  • सबसे पहले जोसेफ आस्पडिन ने बनाया और इसका नाम पोर्टलैण्ड सीमेंट रखा।
  • यह रासायनिक यौगिक नहीं, बल्कि अनेक रासायनिक यौगिकों जैसे कैल्सियम के सिलिकेटों तथा ऐलुमिनेटों का मिश्रण होता है।
  • अतः इसका संघटन, रासायनिक सूत्र और गलनांक निश्चित नहीं होता है।
  • सीमेंट के अवयवों का प्रतिशत संघटन (औसत):

| पदार्थ | सूत्र | प्रतिशत संघटन | |:-----------------|:------------|:-------------| | कैल्सियम ऑक्साइड | CaO | 61-65% | | सिलिका | SiO₂ | 20-25% | | ऐलुमिना | Al₂O₃ | 5-10% | | मैग्नीशिया | MgO | 2-3% | | आयरन ऑक्साइड | Fe₂O₃ | 1-2% |

  • सीमेंट का जमना (Setting of Cement):
  • जब सीमेंट का महीन पाउडर जल के संपर्क में आता है, तो वह रासायनिक अभिक्रियाओं के कारण कठोर पदार्थ के रूप में जम जाता है
  • जिप्सम का कार्य: सीमेंट के जमने की गति को धीमा करने के लिए इसमें 2-3% जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) मिलाया जाता है, ताकि इसे उपयोग करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
  • आधुनिक सीमेंट निर्माण:
  • लागत कम करने और अपशिष्ट उपयोग के लिए आजकल फ्लाई ऐश (fly ash) और धान के कोढ़े (भूसे) की राख का भी उपयोग सीमेंट बनाने में किया जाता है, क्योंकि इनमें सिलिका की मात्रा अधिक होती है।
  • छत्तीसगढ़ में सीमेंट उद्योग: रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार जिलों में सीमेंट उद्योग स्थित हैं।
महत्त्वपूर्ण

सीमेंट एक मिश्रण है, कोई एकल रासायनिक यौगिक नहीं, इसलिए इसका कोई निश्चित रासायनिक सूत्र या गलनांक नहीं होता।

💡सुझाव

सीमेंट में जिप्सम क्यों मिलाया जाता है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसका उत्तर है सीमेंट के जमने की गति को नियंत्रित करने के लिए।

सीमेंट का निर्माण

सीमेंट के निर्माण में मुख्य रूप से चूना पत्थर, चिकनी मिट्टी और जिप्सम का उपयोग होता है।

  • कच्चे पदार्थ (Raw Materials):
  • चूना पत्थर (Limestone): CaCO₃ (कैल्सियम कार्बोनेट)
  • चिकनी मिट्टी (Clay): इसमें ऐलुमिनियम, सिलिकन और आयरन के ऑक्साइड होते हैं।
  • जिप्सम: CaSO₄·2H₂O
  • निर्माण के चरण:
  • 1. मिश्रण और पिसाई: तीन भाग चूना पत्थर और एक भाग चिकनी मिट्टी के मिश्रण को बारीक पीस लिया जाता है।
  • 2. गर्म करना (घूर्णी भट्टी में): इस मिश्रण को एक घूर्णी भट्टी (rotary kiln) में 1100-1800°C के बीच गर्म किया जाता है।
  • 3. तापीय वियोजन (1100°C पर): चूने के पत्थर का तापीय वियोजन होकर कैल्सियम ऑक्साइड बनता है।

$$CaCO_3 \xrightarrow{1100°C} CaO + CO_2$$

  • 4. सिलिकेट और ऐलुमिनेट का निर्माण (1400-1500°C पर): कैल्सियम ऑक्साइड, मिट्टी में उपस्थित अन्य ऑक्साइडों (सिलिका, ऐलुमिना, आयरन ऑक्साइड) से क्रिया करता है।
  • $$2CaO + SiO_2 \xrightarrow{1400-1500°C} 2CaO \cdot SiO_2$$ (डाइ कैल्सियम सिलिकेट)
  • $$3CaO + SiO_2 \xrightarrow{1400-1500°C} 3CaO \cdot SiO_2$$ (ट्राइ कैल्सियम सिलिकेट)
  • $$3CaO + Al_2O_3 \xrightarrow{1400-1500°C} 3CaO \cdot Al_2O_3$$ (ट्राइ कैल्सियम ऐलुमिनेट)
  • $$4CaO + Al_2O_3 + Fe_2O_3 \xrightarrow{1500°C से ऊपर} 4CaO \cdot Al_2O_3 \cdot Fe_2O_3$$ (ट्रेटा कैल्सियम ऐलुमिनो फेराइट)
  • 5. क्लिंकर (Clinker) निर्माण: भट्टी से प्राप्त सिलिकेट और ऐलुमिनेट का मिश्रण छोटे-छोटे कंकड़ों (गोली) के रूप में प्राप्त होता है, जिसे क्लिंकर कहते हैं।
  • 6. पिसाई और जिप्सम मिलाना: क्लिंकर को ठंडा करके उसमें 2-3% जिप्सम (CaSO₄·2H₂O) मिलाया जाता है और मिश्रण को बारीक पीसकर सीमेंट प्राप्त किया जाता है।
याद रखें

सीमेंट के मुख्य घटक कैल्सियम के सिलिकेट और ऐलुमिनेट होते हैं।

काँच: परिचय एवं गुणधर्म

काँच एक बहुमुखी पदार्थ है जिसका उपयोग दैनिक जीवन में व्यापक रूप से होता है।

  • परिचय:
  • काँच सिलिका (SiO₂) और धातु सिलिकेटों का मिश्रण है।
  • यह एक अक्रिस्टलीय (amorphous), कठोर, भंगुर, पारदर्शी, आभासी ठोस होता है।
  • वास्तव में, काँच एक अतिशीतलित द्रव (supercooled liquid) है, जिसमें बहने का गुण होते हुए भी ठोस दिखाई देता है।
  • काँच का सामान्य सूत्र: xR₂O·yMO·6SiO₂
  • जहाँ:
  • R – एक संयोजी क्षार धातु (जैसे Na, K)
  • M – द्विसंयोजी धातु (जैसे Ba, Ca, Pb, Zn)
  • x और y – अणुओं की संख्या दर्शाते हैं।
  • काँच के प्रकार (संघटन के आधार पर):
  • सोडा काँच (Soda-lime glass): सबसे सामान्य प्रकार, खिड़कियों, बोतलों आदि में उपयोग। (Na₂O·CaO·6SiO₂)
  • पोटैश काँच (Potash glass): उच्च ताप पर पिघलता है, प्रयोगशाला के उपकरण बनाने में। (K₂O·CaO·6SiO₂)
  • लेड काँच (Lead glass): उच्च अपवर्तनांक, ऑप्टिकल लेंस, सजावटी वस्तुओं में। (K₂O·PbO·6SiO₂)
  • बोरोसिलिकेट काँच (Borosilicate glass): ताप प्रतिरोधी, प्रयोगशाला के उपकरण (पाइरेक्स), रसोई के बर्तन। (Na₂O·B₂O₃·SiO₂)
  • क्वार्ट्ज काँच (Quartz glass): शुद्ध सिलिका, उच्च ताप प्रतिरोधी, पराबैंगनी किरणों के लिए पारदर्शी।
📖परिभाषा

अतिशीतलित द्रव: वह द्रव जिसे उसके हिमांक से नीचे ठंडा किया गया हो, लेकिन वह क्रिस्टलीकृत न हुआ हो और ठोस जैसा व्यवहार करता हो। काँच इसका एक उदाहरण है।

महत्त्वपूर्ण

काँच का कोई निश्चित गलनांक नहीं होता क्योंकि यह एक अक्रिस्टलीय ठोस है।

काँच का उत्पादन एवं रंग प्रदान करने वाले पदार्थ

काँच का उत्पादन विभिन्न कच्चे पदार्थों को उच्च ताप पर पिघलाकर किया जाता है।

  • काँच के उत्पादन में उपयोगी पदार्थ:
  • 1. सिलिका: रेत (SiO₂) के रूप में।
  • 2. क्षार धातु: सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) या पोटैशियम कार्बोनेट (K₂CO₃) के रूप में।
  • 3. द्विसंयोजक धातु: कैल्सियम (चूने का पत्थर CaCO₃ के रूप में), लेड (लिथार्ज PbO या सिंदूर Pb₃O₄ के रूप में)।
  • 4. ऑक्सीकारक या रंग उड़ाने वाले पदार्थ (विरंजक): मैंगनीज डाइऑक्साइड (MnO₂), पोटैशियम नाइट्रेट (KNO₃) या सोडियम नाइट्रेट (NaNO₃)।
  • 5. कलेट (Cullet): काँच के टूटे हुए टुकड़े। ये गालक (flux) का कार्य करते हैं, जिससे मिश्रण का गलनांक कम हो जाता है और पिघलने की प्रक्रिया तेज होती है।
  • काँच को रंग प्रदान करने वाले पदार्थ:

| काँच का रंग | रंग प्रदान करने वाले पदार्थ | |:-----------|:--------------------------| | हरा | क्रोमियम ऑक्साइड (Cr₂O₃) | | पीला | कैडमियम सल्फाइड (CdS) | | लाल | कॉपर ऑक्साइड (Cu₂O) | | बैंगनी | मैंगनीज ऑक्साइड (MnO₂) | | नीला | कोबाल्ट ऑक्साइड (CoO) |

  • काँच बनाने की विधि (टैंक भट्टी में):
  • 1. बैच तैयार करना: सोडियम कार्बोनेट, कैल्सियम कार्बोनेट और रेत को उचित अनुपात में मिलाकर बारीक पीस लिया जाता है। इसमें कलेट मिलाया जाता है। इस मिश्रण को बैच कहते हैं।
  • 2. पिघलाना: बैच को टैंक भट्टी में लगभग 1400°C तक गर्म करते हैं।
  • 3. रासायनिक अभिक्रियाएँ (सोडा काँच के लिए):
  • $$Na_2CO_3 + SiO_2 \rightarrow Na_2SiO_3 + CO_2\uparrow$$
  • $$CaCO_3 + SiO_2 \rightarrow CaSiO_3 + CO_2\uparrow$$
  • $$Na_2SiO_3 + CaSiO_3 + 4SiO_2 \rightarrow Na_2O \cdot CaO \cdot 6SiO_2$$ (काँच)
  • 4. आकार देना: पिघले हुए काँच से ब्लोअर या फूंकनी की सहायता से या साँचे में ढालकर इच्छित आकार की वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
  • 5. तापानुशीतन (Annealing): काँच की वस्तुओं को बनाते समय अचानक ठंडा करने पर वे टूट सकती हैं। इसलिए, उन्हें टूटने से बचाने के लिए धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है। इस क्रिया को तापानुशीतन कहते हैं। यह काँच में आंतरिक तनाव को कम करता है।
📖परिभाषा

तापानुशीतन (Annealing): काँच की वस्तुओं को धीरे-धीरे ठंडा करने की प्रक्रिया ताकि उनमें आंतरिक तनाव कम हो और वे टूटने से बचें।

💡सुझाव

काँच निर्माण में कलेट का उपयोग क्यों किया जाता है, यह प्रश्न महत्वपूर्ण है। इसका मुख्य कारण है गलनांक को कम करना और पिघलने की प्रक्रिया को तेज करना।

साबुन तथा अपमार्जक की सफाई क्रियाविधि

साबुन और अपमार्जक दोनों ही सफाई के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनकी रासायनिक संरचना और कठोर जल में व्यवहार भिन्न होता है।

  • साबुन (Soap):
  • रासायनिक संरचना: लंबी श्रृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं।
  • सामान्य सूत्र: RCOOM (जहाँ R = लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला, M = Na या K)।
  • जल में विलेयता: जल में विलेय करने पर M⁺ और RCOO⁻ आयन में विभक्त हो जाता है।
  • RCOO⁻ आयन के भाग:
  • हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (R): यह जलविरोधी (hydrophobic) होती है और तेल/मैल के अणुओं से जुड़ती है (पूँछ)।
  • COO⁻ भाग: यह जलरागी (hydrophilic) होता है और जल में विलेय होता है (सिर)।
  • सफाई क्रियाविधि (मिसेल निर्माण):
  • अधिकांश मैल तैलीय होती है, जो पानी में अघुलनशील है।
  • जब कपड़े को साबुन के घोल में डुबाया जाता है, तो साबुन के RCOO⁻ आयन तेल (मैल) के चारों ओर गोलीय आकार में इस प्रकार व्यवस्थित हो जाते हैं कि हाइड्रोकार्बन पूँछ अंदर की ओर (मैल में) और COO⁻ सिर बाहर की ओर (पानी में) रहते हैं।
  • इस संरचना को मिसेल (micelle) कहते हैं।
  • मिसेल के कण पानी में वितरित हो जाते हैं और एक कोलाइड बनाते हैं।
  • रगड़ने पर ये मिसेल मैल को अपने साथ लेकर पानी की धारा के साथ बहकर अलग हो जाते हैं, जिससे कपड़ा साफ हो जाता है।
  • कठोर जल में: कठोर जल में उपस्थित Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों से अभिक्रिया करके अघुलनशील अवक्षेप (स्कम) बनाते हैं, जिससे झाग कम बनती है और सफाई प्रभावी नहीं होती।
  • अपमार्जक (Detergents):
  • रासायनिक संरचना: सामान्यतः लंबी कार्बन श्रृंखला वाले सल्फोनिल अम्लों के लवण होते हैं।
  • उदाहरण: सोडियम लॉरिल सल्फेट।
  • कठोर जल में: अपमार्जकों के आवेशित सिरे कठोर जल में उपस्थित Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों के साथ अघुलनशील पदार्थ नहीं बनाते हैं।
  • इस प्रकार, अपमार्जक कठोर जल में भी प्रभावी बने रहते हैं और झाग उत्पन्न करते हैं।
  • उपयोग: शैंपू एवं कपड़े धोने के उत्पाद बनाने में।
  • पर्यावरणीय चिंता: कुछ अपमार्जक जैव निम्नीकृत (biodegradable) नहीं होते, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है।
📖परिभाषा

मिसेल: साबुन के अणुओं द्वारा जल में मैल के चारों ओर बनाई गई गोलीय संरचना, जिसमें जलविरोधी पूँछ अंदर की ओर और जलरागी सिर बाहर की ओर होते हैं।

महत्त्वपूर्ण

साबुन कठोर जल में प्रभावी नहीं होते क्योंकि वे अवक्षेप बनाते हैं, जबकि अपमार्जक कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं क्योंकि वे अवक्षेप नहीं बनाते।

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