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ठोस आकृतियों का पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन
Chhattisgarh · Class 10 · 🧮 Maths · Chapter 15

ठोस आकृतियों का पृष्ठीय क्षेत्रफल एवं आयतन

घन और घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफलबेलन का वक्रपृष्ठ और आयतनशंकु का पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतनगोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतनसंयोजित ठोसों का क्षेत्रफल एवं आयतन

यह अध्याय छात्रों को विभिन्न ठोस आकृतियों जैसे घन, घनाभ, बेलन, शंकु और गोले के पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन की गणना करना सिखाता है। इसमें इन आकृतियों के पृष्ठीय जाल, विकर्णों की अवधारणा और संयोजित ठोसों के क्षेत्रफल व आयतन ज्ञात करने के तरीके शामिल हैं। यह दैनिक जीवन में इन ज्यामितीय अवधारणाओं के अनुप्रयोगों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, जैसे कि किसी वस्तु को बनाने में लगने वाली सामग्री का अनुमान लगाना या किसी कमरे में रखी जा सकने वाली सबसे लंबी वस्तु की लंबाई निर्धारित करना।

त्रिविमीय आकृतियों का परिचय और पृष्ठीय जाल

त्रिविमीय आकृतियाँ वे होती हैं जिनकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई होती है। इन्हें ठोस आकृतियाँ भी कहते हैं।

  • पृष्ठीय जाल (Net): किसी त्रिविमीय आकृति को खोलकर एक समतल पर रखने पर प्राप्त द्विविमीय आकृति को उसका पृष्ठीय जाल कहते हैं।
  • यह आकृति को बनाने के लिए आवश्यक सामग्री का क्षेत्रफल ज्ञात करने में सहायक होता है।
  • एक ही ठोस आकृति के कई अलग-अलग पृष्ठीय जाल हो सकते हैं।
  • घन का पृष्ठीय जाल: एक घन के 11 अलग-अलग पृष्ठीय जाल हो सकते हैं।
  • घनाभ का पृष्ठीय जाल: घनाभ के भी कई पृष्ठीय जाल हो सकते हैं, जो उसकी भुजाओं की लंबाई पर निर्भर करते हैं।
  • उदाहरण: पुट्ठे के डिब्बे को काटकर फैलाना।

महत्व: पृष्ठीय जाल की अवधारणा हमें ठोस आकृतियों के पृष्ठीय क्षेत्रफल की गणना करने में मदद करती है, क्योंकि यह हमें दिखाता है कि कौन से पृष्ठ मिलकर कुल क्षेत्रफल बनाते हैं।

महत्त्वपूर्ण

किसी त्रिविमीय आकृति का पृष्ठीय जाल (Net) एक द्विविमीय आकृति होती है।

घन और घनाभ के शीर्ष, कोर और पृष्ठ

घन और घनाभ दोनों ही बहुफलकीय ठोस होते हैं।

  • पृष्ठ (Face): ठोस की समतल सतहें।
  • घन और घनाभ दोनों में 6 पृष्ठ होते हैं।
  • घनाभ में सम्मुख पृष्ठ बराबर होते हैं।
  • घन में सभी 6 पृष्ठ बराबर होते हैं (वर्ग होते हैं)।
  • कोर (Edge): दो पृष्ठों के मिलने से बनी रेखा खंड।
  • घन और घनाभ दोनों में 12 कोरें होती हैं।
  • घनाभ में सम्मुख कोरें बराबर होती हैं।
  • घन में सभी 12 कोरें बराबर होती हैं।
  • शीर्ष (Vertex): तीन या अधिक कोरों के मिलने से बना बिंदु।
  • घन और घनाभ दोनों में 8 शीर्ष होते हैं।

सारांश तालिका: | विशेषता | घन | घनाभ | |---|---|---| | पृष्ठों की संख्या | 6 | 6 | | कोरों की संख्या | 12 | 12 | | शीर्षों की संख्या | 8 | 8 | | पृष्ठों का आकार | सभी वर्ग | आयत (सम्मुख बराबर) | | कोरों की लंबाई | सभी बराबर | सम्मुख बराबर |

यूलर का सूत्र: किसी भी बहुफलकीय ठोस के लिए, V - E + F = 2 होता है, जहाँ V = शीर्षों की संख्या, E = कोरों की संख्या, F = पृष्ठों की संख्या।

  • घन/घनाभ के लिए: \(8 - 12 + 6 = 2\).
याद रखें

घन एक विशेष प्रकार का घनाभ है जहाँ सभी भुजाएँ बराबर होती हैं।

घन और घनाभ के विकर्णों की पहचान

घन और घनाभ में दो प्रकार के विकर्ण होते हैं:

  1. पृष्ठीय विकर्ण (Face Diagonal):
  • ये विकर्ण किसी एक पृष्ठ (फलक) पर स्थित होते हैं।
  • ये एक ही पृष्ठ के विपरीत शीर्षों को जोड़ते हैं।
  • घनाभ में 6 पृष्ठ होते हैं, और प्रत्येक पृष्ठ पर 2 विकर्ण होते हैं। अतः कुल 12 पृष्ठीय विकर्ण होते हैं।
  • घन में भी 12 पृष्ठीय विकर्ण होते हैं।
  1. आकाशीय विकर्ण (Space Diagonal) / घनाभ का विकर्ण:
  • ये विकर्ण ठोस के भीतर होते हैं और दो विपरीत पृष्ठों के विपरीत शीर्षों को जोड़ते हैं।
  • ये किसी भी एक पृष्ठ पर स्थित नहीं होते हैं।
  • घन और घनाभ दोनों में 4 आकाशीय विकर्ण होते हैं।
  • ये किसी भी ठोस में रखी जा सकने वाली सबसे लंबी छड़ की लंबाई दर्शाते हैं।

कुल विकर्ण: घन या घनाभ में कुल \(12 \text{ (पृष्ठीय)} + 4 \text{ (आकाशीय)} = 16\) विकर्ण होते हैं।

उदाहरण: एक कमरे में सबसे लंबी छड़ रखने के लिए उसे कमरे के एक कोने से विपरीत कोने तक (आकाशीय विकर्ण के अनुदिश) रखना होगा।

💡सुझाव

परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि किसी कमरे में रखी जा सकने वाली सबसे लंबी छड़ की लंबाई क्या होगी। यह हमेशा आकाशीय विकर्ण की लंबाई होती है।

घन और घनाभ के विकर्णों की लंबाई ज्ञात करना

विकर्णों की लंबाई ज्ञात करने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग किया जाता है।

घनाभ के विकर्ण

माना घनाभ की लंबाई \(l\), चौड़ाई \(b\) और ऊँचाई \(h\) है।

  1. पृष्ठीय विकर्ण की लंबाई:
  • किसी भी पृष्ठ के विकर्ण की लंबाई उस पृष्ठ की भुजाओं पर निर्भर करती है।
  • उदाहरण के लिए, एक पृष्ठ जिसकी भुजाएँ \(l\) और \(b\) हैं, उसका पृष्ठीय विकर्ण \(d_1 = \sqrt{l^2 + b^2}\) होगा।
  • इसी प्रकार, अन्य पृष्ठीय विकर्ण \(d_2 = \sqrt{b^2 + h^2}\) और \(d_3 = \sqrt{l^2 + h^2}\) होंगे।
  • घनाभ में 3 अलग-अलग लंबाई के पृष्ठीय विकर्ण हो सकते हैं (यदि \(l, b, h\) सभी भिन्न हों)।
  1. आकाशीय विकर्ण की लंबाई:
  • घनाभ का आकाशीय विकर्ण \(D = \sqrt{l^2 + b^2 + h^2}\) होता है।
  • यह घनाभ में रखी जा सकने वाली सबसे लंबी वस्तु की लंबाई होती है।

घन के विकर्ण

माना घन की भुजा \(a\) है। (यहाँ \(l=b=h=a\))

  1. पृष्ठीय विकर्ण की लंबाई:
  • घन के किसी भी पृष्ठ का विकर्ण \(d = \sqrt{a^2 + a^2} = \sqrt{2a^2} = a\sqrt{2}\) इकाई होता है।
  • घन के सभी 12 पृष्ठीय विकर्णों की लंबाई समान होती है।
  1. आकाशीय विकर्ण की लंबाई:
  • घन का आकाशीय विकर्ण \(D = \sqrt{a^2 + a^2 + a^2} = \sqrt{3a^2} = a\sqrt{3}\) इकाई होता है।
  • घन के सभी 4 आकाशीय विकर्णों की लंबाई समान होती है।

व्युत्पत्ति (Derivation):

  • घनाभ का आकाशीय विकर्ण:
  1. एक घनाभ \(ABCD-EFGH\) पर विचार करें जिसकी लंबाई \(l\), चौड़ाई \(b\) और ऊँचाई \(h\) है।
  2. पृष्ठीय विकर्ण \(AC\) की लंबाई ज्ञात करें। \(\triangle ABC\) में, \(AC^2 = AB^2 + BC^2 = l^2 + b^2\) (पाइथागोरस प्रमेय से)।
  3. अब \(\triangle ACG\) पर विचार करें। यह एक समकोण त्रिभुज है जहाँ \(CG\) ऊँचाई \(h\) है और \(AC\) आधार है।
  4. आकाशीय विकर्ण \(AG\) की लंबाई \(AG^2 = AC^2 + CG^2\) होगी।
  5. \(AG^2 = (l^2 + b^2) + h^2\)
  6. अतः, \(AG = \sqrt{l^2 + b^2 + h^2}\).

सूत्रों का सारांश:

  • घनाभ का पृष्ठीय विकर्ण: \(\sqrt{l^2 + b^2}\) या \(\sqrt{b^2 + h^2}\) या \(\sqrt{l^2 + h^2}\)
  • घनाभ का आकाशीय विकर्ण: \(\sqrt{l^2 + b^2 + h^2}\)
  • घन का पृष्ठीय विकर्ण: \(a\sqrt{2}\)
  • घन का आकाशीय विकर्ण: \(a\sqrt{3}\)
🧮सूत्र

घनाभ का आकाशीय विकर्ण \(D = \sqrt{l^2 + b^2 + h^2}\) घन का आकाशीय विकर्ण \(D = a\sqrt{3}\)

बेलन का परिचय और पृष्ठीय जाल

बेलन एक त्रिविमीय आकृति है जिसमें दो सर्वांगसम (congruent) और समांतर वृत्तीय पृष्ठ (आधार) होते हैं, जो एक वक्र पृष्ठ द्वारा जुड़े होते हैं।

  • बेलन के भाग:
  • आधार (Base): दो वृत्तीय पृष्ठ।
  • ऊँचाई (Height, \(h\)): दोनों वृत्तीय पृष्ठों के बीच की लंबवत दूरी।
  • त्रिज्या (Radius, \(r\)): वृत्तीय आधार की त्रिज्या।
  • अक्ष (Axis): वृत्तीय आधारों के केंद्रों को मिलाने वाला रेखाखंड।
  • बेलन के प्रकार:
  • लंब वृत्तीय बेलन (Right Circular Cylinder): जब अक्ष आधार के साथ समकोण बनाता है। (सामान्यतः हम इसी का अध्ययन करते हैं)
  • तिर्यक बेलन (Oblique Cylinder): जब अक्ष आधार के लंबवत नहीं होता है।

बेलन का पृष्ठीय जाल

  • एक बंद बेलन को खोलकर समतल करने पर हमें एक आयत और दो वृत्त प्राप्त होते हैं।
  • आयत: यह बेलन का वक्र पृष्ठ होता है।
  • आयत की लंबाई = बेलन के आधार की परिधि = \(2\pi r\)
  • आयत की चौड़ाई = बेलन की ऊँचाई = \(h\)
  • वृत्त: ये बेलन के दोनों आधार होते हैं, प्रत्येक की त्रिज्या \(r\) होती है।

उपयोग: पृष्ठीय जाल हमें बेलन के वक्रपृष्ठ और संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल के सूत्रों को समझने में मदद करता है।

महत्त्वपूर्ण

दैनिक जीवन में बेलन के उदाहरण: पाइप, ट्यूब लाइट, पानी की बोतल, आदि।

लंब वृत्तीय बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल

बेलन के पृष्ठीय क्षेत्रफल में वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल और आधारों का क्षेत्रफल शामिल होता है।

  • वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल (Curved Surface Area, CSA):
  • जब बेलन को खोला जाता है, तो वक्रपृष्ठ एक आयत बन जाता है।
  • आयत की लंबाई = आधार की परिधि = \(2\pi r\)
  • आयत की चौड़ाई = बेलन की ऊँचाई = \(h\)
  • अतः, बेलन का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल \(= \text{लंबाई} \times \text{चौड़ाई} = 2\pi r h\) वर्ग इकाई
  • संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल (Total Surface Area, TSA):
  • संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल + दोनों आधारों का क्षेत्रफल।
  • प्रत्येक वृत्तीय आधार का क्षेत्रफल = \(\pi r^2\).
  • दोनों आधारों का क्षेत्रफल = \(2 \times \pi r^2 = 2\pi r^2\).
  • अतः, बेलन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= 2\pi r h + 2\pi r^2 = 2\pi r (h + r)\) वर्ग इकाई

जहाँ:

  • \(r\) = बेलन के आधार की त्रिज्या
  • \(h\) = बेलन की ऊँचाई
  • \(\pi \approx \frac{22}{7}\) या 3.14

खोखले बेलन का पृष्ठीय क्षेत्रफल:

  • यदि बेलन खोखला हो (जैसे पाइप), तो उसके आंतरिक और बाहरी वक्रपृष्ठ होते हैं।
  • बाहरी त्रिज्या \(R\), आंतरिक त्रिज्या \(r\).
  • बाहरी वक्रपृष्ठ = \(2\pi R h\)
  • आंतरिक वक्रपृष्ठ = \(2\pi r h\)
  • यदि सिरे खुले हों, तो कुल वक्रपृष्ठ = \(2\pi R h + 2\pi r h = 2\pi h (R+r)\).
  • यदि सिरे बंद हों (यानी ऊपर और नीचे वलय हों), तो कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल = \(2\pi h (R+r) + 2\pi (R^2 - r^2)\).

इकाइयाँ: क्षेत्रफल हमेशा वर्ग इकाइयों (जैसे \(cm^2\), \(m^2\)) में व्यक्त किया जाता है।

🧮सूत्र

बेलन का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल \(= 2\pi r h\) बेलन का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= 2\pi r (h + r)\)

लंब वृत्तीय बेलन का आयतन

किसी ठोस का आयतन वह स्थान होता है जो वह घेरता है।

  • बेलन का आयतन उसके आधार के क्षेत्रफल और उसकी ऊँचाई के गुणनफल के बराबर होता है।
  • आधार का क्षेत्रफल: बेलन का आधार एक वृत्त होता है, जिसका क्षेत्रफल \(\pi r^2\) होता है।
  • ऊँचाई: बेलन की ऊँचाई \(h\) होती है।
  • अतः, बेलन का आयतन \(= \text{आधार का क्षेत्रफल} \times \text{ऊँचाई} = \pi r^2 h\) घन इकाई

व्युत्पत्ति की अवधारणा:

  • हम एक घनाभ से शुरू कर सकते हैं जिसके आधार में भुजाओं की संख्या बढ़ती जाती है। जैसे-जैसे भुजाओं की संख्या असीमित होती जाती है, आधार एक वृत्त बन जाता है और घनाभ एक बेलन में परिवर्तित हो जाता है।
  • चूंकि घनाभ का आयतन = आधार का क्षेत्रफल \(\times\) ऊँचाई, इसी तर्क से बेलन का आयतन भी आधार का क्षेत्रफल \(\times\) ऊँचाई होगा।

जहाँ:

  • \(r\) = बेलन के आधार की त्रिज्या
  • \(h\) = बेलन की ऊँचाई
  • \(\pi \approx \frac{22}{7}\) या 3.14

खोखले बेलन का आयतन:

  • खोखले बेलन का आयतन = बाहरी बेलन का आयतन - आंतरिक बेलन का आयतन
  • \(V = \pi R^2 h - \pi r^2 h = \pi h (R^2 - r^2)\) घन इकाई।
  • जहाँ \(R\) बाहरी त्रिज्या और \(r\) आंतरिक त्रिज्या है।

इकाइयाँ: आयतन हमेशा घन इकाइयों (जैसे \(cm^3\), \(m^3\), लीटर) में व्यक्त किया जाता है।

  • \(1 \text{ लीटर} = 1000 \text{ घन सेमी.}\)
  • \(1 \text{ घन मीटर} = 1000 \text{ लीटर}\)
🧮सूत्र

बेलन का आयतन \(= \pi r^2 h\)

महत्त्वपूर्ण

आयतन की गणना का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि किसी पात्र में कितनी सामग्री (पानी, रेत, आदि) आ सकती है।

शंकु का परिचय और उसके भाग

शंकु एक त्रिविमीय आकृति है जिसमें एक वृत्तीय आधार और एक शीर्ष होता है। शीर्ष से आधार की परिधि को जोड़ने वाले रेखाखंड शंकु की तिर्यक ऊँचाई बनाते हैं।

  • लंब वृत्तीय शंकु (Right Circular Cone): यदि शंकु के शीर्ष से आधार के केंद्र को मिलाने वाला रेखाखंड (ऊँचाई) आधार पर लंब हो, तो उसे लंब वृत्तीय शंकु कहते हैं। (सामान्यतः हम इसी का अध्ययन करते हैं)
  • शंकु के भाग:
  • आधार (Base): एक वृत्तीय पृष्ठ।
  • शीर्ष (Vertex): शंकु का नुकीला सिरा।
  • ऊँचाई (Height, \(h\)): शीर्ष से आधार के केंद्र तक की लंबवत दूरी।
  • त्रिज्या (Radius, \(r\)): वृत्तीय आधार की त्रिज्या।
  • तिर्यक ऊँचाई (Slant Height, \(l\)): शीर्ष से आधार की परिधि पर किसी बिंदु तक की दूरी।

शंकु का पृष्ठीय जाल

  • एक शंकु को उसकी तिर्यक ऊँचाई और आधार के किनारे से काटकर खोलने पर एक वृत्त का त्रिज्याखंड (sector) और एक वृत्त प्राप्त होता है।
  • त्रिज्याखंड: यह शंकु का वक्र पृष्ठ होता है।
  • इस त्रिज्याखंड की त्रिज्या शंकु की तिर्यक ऊँचाई \(l\) के बराबर होती है।
  • इस त्रिज्याखंड के चाप की लंबाई शंकु के आधार की परिधि \(2\pi r\) के बराबर होती है।
  • वृत्त: यह शंकु का आधार होता है, जिसकी त्रिज्या \(r\) होती है।

शंकु का पृष्ठीय क्षेत्रफल

  1. वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल (Curved Surface Area, CSA):
  • शंकु के वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल \(= \pi r l\) वर्ग इकाई।
  • यह सूत्र त्रिज्याखंड के क्षेत्रफल से व्युत्पन्न होता है।
  1. संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल (Total Surface Area, TSA):
  • संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल + आधार का क्षेत्रफल।
  • आधार का क्षेत्रफल = \(\pi r^2\).
  • अतः, शंकु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= \pi r l + \pi r^2 = \pi r (l + r)\) वर्ग इकाई

शंकु का आयतन

  • समान आधार त्रिज्या \(r\) और समान ऊँचाई \(h\) वाले बेलन और शंकु के आयतनों के बीच संबंध होता है।
  • एक बेलन को रेत से भरने के लिए, समान आधार और ऊँचाई वाले शंकु से तीन बार रेत भरनी पड़ती है।
  • अतः, शंकु का आयतन \(= \frac{1}{3} \times \text{बेलन का आयतन} = \frac{1}{3} \pi r^2 h\) घन इकाई

जहाँ:

  • \(r\) = शंकु के आधार की त्रिज्या
  • \(h\) = शंकु की ऊँचाई
  • \(l\) = शंकु की तिर्यक ऊँचाई
  • \(l^2 = r^2 + h^2\) (पाइथागोरस प्रमेय से)

इकाइयाँ: क्षेत्रफल वर्ग इकाइयों में और आयतन घन इकाइयों में।

🧮सूत्र

शंकु की तिर्यक ऊँचाई \(l = \sqrt{r^2 + h^2}\) शंकु का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल \(= \pi r l\) शंकु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= \pi r (l + r)\) शंकु का आयतन \(= \frac{1}{3} \pi r^2 h\)

याद रखें

शंकु का आयतन, समान आधार और ऊँचाई वाले बेलन के आयतन का एक तिहाई होता है।

गोला और अर्द्धगोले का परिचय और पृष्ठीय क्षेत्रफल

गोला एक त्रिविमीय आकृति है जो एक वृत्त को उसके व्यास के परितः घुमाने पर प्राप्त होती है। गोले पर स्थित प्रत्येक बिंदु उसके केंद्र से एक निश्चित दूरी (त्रिज्या) पर होता है।

  • गोले के भाग:
  • केंद्र (Center): गोले का मध्य बिंदु।
  • त्रिज्या (Radius, \(r\)): केंद्र से गोले की सतह पर किसी भी बिंदु तक की दूरी।
  • व्यास (Diameter, \(d\)): गोले के केंद्र से होकर जाने वाली और सतह पर दो बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखा, \(d = 2r\).

गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल

  • गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= 4\pi r^2\) वर्ग इकाई।
  • यह एक गतिविधि से समझा जा सकता है जहाँ एक गोले को रस्सी से लपेटा जाता है और फिर उस रस्सी से गोले की त्रिज्या के बराबर त्रिज्या वाले 4 वृत्त बनाए जा सकते हैं।
  • एक अन्य गतिविधि में, एक बेलन (जिसकी त्रिज्या गोले की त्रिज्या के बराबर हो और ऊँचाई गोले के व्यास के बराबर हो) के वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल गोले के पृष्ठीय क्षेत्रफल के बराबर होता है।
  • बेलन का वक्रपृष्ठ \(= 2\pi r h = 2\pi r (2r) = 4\pi r^2\).

अर्द्धगोला (Hemisphere)

  • अर्द्धगोला एक गोले का आधा भाग होता है।
  • इसमें एक वक्रपृष्ठ और एक वृत्तीय आधार होता है।
  1. अर्द्धगोले का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल (Curved Surface Area, CSA):
  • यह गोले के पृष्ठीय क्षेत्रफल का आधा होता है।
  • अर्द्धगोले का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल \(= \frac{1}{2} (4\pi r^2) = 2\pi r^2\) वर्ग इकाई।
  1. अर्द्धगोले का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल (Total Surface Area, TSA):
  • संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल = वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल + वृत्तीय आधार का क्षेत्रफल।
  • वृत्तीय आधार का क्षेत्रफल = \(\pi r^2\).
  • अतः, अर्द्धगोले का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= 2\pi r^2 + \pi r^2 = 3\pi r^2\) वर्ग इकाई

जहाँ:

  • \(r\) = गोले या अर्द्धगोले की त्रिज्या

इकाइयाँ: क्षेत्रफल हमेशा वर्ग इकाइयों में।

🧮सूत्र

गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= 4\pi r^2\) अर्द्धगोले का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल \(= 2\pi r^2\) अर्द्धगोले का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल \(= 3\pi r^2\)

गोले का आयतन

गोले का आयतन वह स्थान होता है जो वह त्रिविमीय स्थान में घेरता है।

  • गोले का आयतन \(= \frac{4}{3} \pi r^3\) घन इकाई।
  • यह सूत्र गोले की त्रिज्या के घन के समानुपाती होता है, जिसका अर्थ है कि त्रिज्या बढ़ने पर आयतन तेजी से बढ़ता है।

अर्द्धगोले का आयतन

  • अर्द्धगोले का आयतन गोले के आयतन का आधा होता है।
  • अर्द्धगोले का आयतन \(= \frac{1}{2} \times \frac{4}{3} \pi r^3 = \frac{2}{3} \pi r^3\) घन इकाई।

जहाँ:

  • \(r\) = गोले या अर्द्धगोले की त्रिज्या

इकाइयाँ: आयतन हमेशा घन इकाइयों (जैसे \(cm^3\), \(m^3\)) में व्यक्त किया जाता है।

ठोसों को पिघलाकर नए ठोस बनाना:

  • जब एक ठोस को पिघलाकर एक या अधिक नए ठोस बनाए जाते हैं, तो सामग्री का आयतन समान रहता है
  • उदाहरण: 64 छोटी गोलियों को पिघलाकर एक बड़ा गोला बनाना। छोटी गोलियों का कुल आयतन बड़े गोले के आयतन के बराबर होगा।
  • इस अवधारणा का उपयोग अक्सर परीक्षा में प्रश्न हल करने के लिए किया जाता है।

घनत्व और द्रव्यमान:

  • घनत्व \(= \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{आयतन}}\)
  • द्रव्यमान \(= \text{आयतन} \times \text{घनत्व}\)
  • यदि किसी ठोस का आयतन और उसके पदार्थ का घनत्व ज्ञात हो, तो उसका द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है।
🧮सूत्र

गोले का आयतन \(= \frac{4}{3} \pi r^3\) अर्द्धगोले का आयतन \(= \frac{2}{3} \pi r^3\)

महत्त्वपूर्ण

जब एक ठोस को पिघलाकर दूसरे ठोस में बदला जाता है, तो आयतन अपरिवर्तित रहता है। यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है।

संयोजित ठोसों का पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन

दैनिक जीवन में कई वस्तुएँ एक से अधिक मूलभूत ठोस आकृतियों के संयोजन से बनी होती हैं, जैसे कैप्सूल (बेलन + दो अर्द्धगोले), खिलौना (शंकु + अर्द्धगोला)।

संयोजित ठोसों का पृष्ठीय क्षेत्रफल

  • संयोजित ठोस का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए, हम उन सभी आकृतियों के वक्रपृष्ठों के क्षेत्रफल को जोड़ते हैं जो बाहरी सतह बनाते हैं।
  • महत्वपूर्ण बिंदु: जब दो ठोसों को जोड़ा जाता है, तो उनके जुड़ने वाले पृष्ठ (जो अंदर छिप जाते हैं) को कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल में शामिल नहीं किया जाता है।
  • उदाहरण: कैप्सूल (बेलन और दो अर्द्धगोले का संयोजन)
  • कैप्सूल का पृष्ठीय क्षेत्रफल = बेलन का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल + पहले अर्द्धगोले का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल + दूसरे अर्द्धगोले का वक्रपृष्ठ का क्षेत्रफल।
  • \( = 2\pi r h + 2\pi r^2 + 2\pi r^2 = 2\pi r h + 4\pi r^2\).

संयोजित ठोसों का आयतन

  • संयोजित ठोस का आयतन ज्ञात करने के लिए, हम उन सभी मूलभूत ठोस आकृतियों के आयतन को जोड़ते हैं जिनसे वह बना है।
  • आयतन की गणना में कोई पृष्ठ छिपता नहीं है, इसलिए सभी घटकों के आयतन को सीधे जोड़ा जाता है।
  • उदाहरण: कैप्सूल (बेलन और दो अर्द्धगोले का संयोजन)
  • कैप्सूल का आयतन = बेलन का आयतन + पहले अर्द्धगोले का आयतन + दूसरे अर्द्धगोले का आयतन।
  • \( = \pi r^2 h + \frac{2}{3}\pi r^3 + \frac{2}{3}\pi r^3 = \pi r^2 h + \frac{4}{3}\pi r^3\).

गणना के चरण:

  1. संयोजित ठोस को उसकी मूलभूत आकृतियों में पहचानें।
  2. प्रत्येक मूलभूत आकृति की विमाएँ (त्रिज्या, ऊँचाई, लंबाई, चौड़ाई) ज्ञात करें। ध्यान दें कि कुछ विमाएँ साझा हो सकती हैं।
  3. पृष्ठीय क्षेत्रफल के लिए, केवल उन पृष्ठों के क्षेत्रफल को जोड़ें जो बाहर से दिखाई देते हैं।
  4. आयतन के लिए, सभी मूलभूत आकृतियों के आयतन को सीधे जोड़ें।

सामान्य संयोजन:

  • बेलन + अर्द्धगोला
  • शंकु + अर्द्धगोला
  • घन + अर्द्धगोला
  • बेलन + शंकु (जैसे पेंसिल)
💡सुझाव

संयोजित ठोसों के पृष्ठीय क्षेत्रफल की गणना करते समय, जुड़ने वाले पृष्ठों के क्षेत्रफल को शामिल न करें। आयतन की गणना में सभी घटकों के आयतन को जोड़ा जाता है।

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