बहुपद
अध्याय 'बहुपद' कक्षा 10 गणित का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह छात्रों को बहुपदों की अवधारणा, उनके जोड़, घटाव, गुणा और भाग से परिचित कराता है। अध्याय में शेषफल प्रमेय और गुणनखंड प्रमेय जैसे महत्वपूर्ण प्रमेय शामिल हैं, जो बहुपदों के गुणनखंडन और उनके शून्यक ज्ञात करने में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त, यह द्विघातीय बहुपदों के गुणांकों और उनके शून्यकों के बीच संबंध को भी समझाता है, जो बीजगणित की गहरी समझ के लिए आवश्यक है। यह अध्याय छात्रों को उच्च गणितीय अवधारणाओं के लिए तैयार करता है।
बहुपद का परिचय और मूलभूत संक्रियाएँ
बहुपद एक ऐसा बीजीय व्यंजक है जिसमें चर की घात पूर्ण संख्या होती है।
- बहुपदों का जोड़ना:
- समान घात वाले पदों को एक साथ रखा जाता है।
- उनके गुणांकों को जोड़ा जाता है।
- उदाहरण: \((2x+3) + (x+4) = (2x+x) + (3+4) = 3x+7\)
- बहुपदों का घटाना:
- समान घात वाले पदों को एक साथ रखा जाता है।
- घटाए जाने वाले बहुपद के सभी पदों के चिह्न बदल दिए जाते हैं।
- उदाहरण: \((2x^2+3x+5) - (x^2+x-2) = 2x^2+3x+5-x^2-x+2 = (2x^2-x^2) + (3x-x) + (5+2) = x^2+2x+7\)
- बहुपदों का गुणा करना:
- प्रत्येक पद को दूसरे बहुपद के प्रत्येक पद से गुणा किया जाता है।
- गुणा करते समय चरों की घातें जुड़ जाती हैं।
- उदाहरण: \((x+5)(x-7) = x(x-7) + 5(x-7) = x^2-7x+5x-35 = x^2-2x-35\)
बहुपद में चर की घात हमेशा पूर्ण संख्या (0, 1, 2, ...) होनी चाहिए।
बहुपदों का भाग: परिचय और आवश्यकता
बहुपदों का भाग भी अंकगणित के भाग के समान ही होता है, लेकिन इसमें चर और उनकी घातों का विशेष ध्यान रखना होता है।
- भाग की आवश्यकता:
- जब किसी राशि को बराबर भागों में बांटना हो।
- जब किसी क्षेत्रफल या आयतन से संबंधित अज्ञात विमा ज्ञात करनी हो।
- उदाहरण:
- कार की चाल = \(\frac{\text{दूरी}}{\text{समय}} = \frac{x}{4}\) किमी/घंटे।
- आयत की चौड़ाई = \(\frac{\text{क्षेत्रफल}}{\text{लंबाई}} = \frac{40x^2}{10x} = 4x\) मीटर।
- एकपदीय बहुपद से भाग:
- जब भाजक एकपदीय होता है, तो भाज्य के प्रत्येक पद को भाजक से अलग-अलग भाग दिया जा सकता है।
- उदाहरण: \(\frac{18x^2+9x}{3x} = \frac{18x^2}{3x} + \frac{9x}{3x} = 6x+3\)
- उदाहरण: \(\frac{4x^4+12x^3+8x^2}{4x^2} = \frac{4x^4}{4x^2} + \frac{12x^3}{4x^2} + \frac{8x^2}{4x^2} = x^2+3x+2\)
- गुणनखण्डन विधि से भाग (जब संभव हो):
- यदि भाज्य और भाजक में कोई समान गुणनखण्ड हो, तो उसे उभयनिष्ठ निकालकर रद्द किया जा सकता है।
- उदाहरण: \(\frac{18x^2+9x}{3x} = \frac{9x(2x+1)}{3x} = 3(2x+1) = 6x+3\)
- दीर्घ भाजन विधि की आवश्यकता:
- जब भाज्य और भाजक में कोई स्पष्ट समान गुणनखण्ड न हो, तो दीर्घ भाजन विधि का उपयोग किया जाता है।
- यह विधि अंकगणित के भाग के समान ही होती है।
भाग करते समय, यदि भाज्य और भाजक दोनों एकपदीय हों, तो भागफल भी एकपदीय हो सकता है।
बहुपदों की दीर्घ भाजन विधि
बहुपदों के भाग के लिए दीर्घ भाजन विधि एक व्यवस्थित प्रक्रिया है।
- चरण-दर-चरण प्रक्रिया:
- घातों का अवरोही क्रम: भाज्य और भाजक को उनके चरों की घातों के अवरोही क्रम में लिखें। यदि कोई घात अनुपस्थित हो, तो उसे शून्य गुणांक के साथ लिखें (जैसे \(0x^2\))।
- पहला पद ज्ञात करें: भाज्य के पहले पद को भाजक के पहले पद से भाग दें। यह भागफल का पहला पद होगा।
- गुणा और घटाव: भागफल के पहले पद से भाजक का गुणा करें और प्राप्त गुणनफल को भाज्य में से घटाएँ।
- नया भाज्य: घटाने पर प्राप्त परिणाम को नया भाज्य मानें।
- प्रक्रिया दोहराएँ: चरण 2 से 4 को तब तक दोहराएँ जब तक:
- शेषफल शून्य न हो जाए।
- शेषफल के चर की घात भाजक के चर की घात से कम न हो जाए।
- भाग एल्गोरिथम:
- भाज्य = भाजक \(\times\) भागफल + शेषफल
- यदि \(p(x)\) भाज्य है, \(g(x)\) भाजक है, \(q(x)\) भागफल है और \(r(x)\) शेषफल है, तो \(p(x) = g(x) \cdot q(x) + r(x)\) जहाँ \(r(x) = 0\) या \(\text{घात}(r(x)) < \text{घात}(g(x))\)।
दीर्घ भाजन विधि में चिह्नों का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। घटाते समय पदों के चिह्न बदल जाते हैं।
भागफल और शेषफल भी बहुपद होते हैं।
शेषफल प्रमेय
शेषफल प्रमेय हमें बिना वास्तविक भाग किए शेषफल ज्ञात करने में मदद करता है।
- प्रमेय का कथन:
- यदि किसी बहुपद \(f(x)\) को \((x-a)\) से भाग दिया जाए, तो शेषफल \(f(a)\) होता है।
- यहाँ \(f(a)\) का अर्थ है \(x=a\) पर बहुपद \(f(x)\) का मान।
- उपपत्ति (Proof):
- भाग एल्गोरिथम से: \(f(x) = (x-a) \cdot q(x) + r\)
- जहाँ \(q(x)\) भागफल है और \(r\) शेषफल है (क्योंकि \((x-a)\) की घात 1 है, इसलिए शेषफल की घात 0 होगी, यानी शेषफल एक अचर होगा)।
- \(x=a\) रखने पर:
\(f(a) = (a-a) \cdot q(a) + r\) \(f(a) = 0 \cdot q(a) + r\) \(f(a) = r\)
- अतः, शेषफल \(r = f(a)\) होता है।
- उपयोग:
- किसी बहुपद को \((x-a)\) से भाग देने पर शेषफल ज्ञात करने के लिए, बस \(x\) के स्थान पर \(a\) रख दें।
- यदि भाजक \((x+a)\) हो, तो \(x=-a\) रखने पर शेषफल \(f(-a)\) होगा।
- यदि भाजक \((ax-b)\) हो, तो \(x=\frac{b}{a}\) रखने पर शेषफल \(f(\frac{b}{a})\) होगा।
शेषफल प्रमेय: \(p(x)\) को \((x-a)\) से भाग देने पर शेषफल \(p(a)\) होता है।
शेषफल प्रमेय का उपयोग बहुविकल्पीय प्रश्नों में समय बचाने के लिए बहुत उपयोगी है।
गुणनखण्ड प्रमेय
गुणनखण्ड प्रमेय शेषफल प्रमेय का एक विशेष मामला है, जहाँ शेषफल शून्य होता है।
- प्रमेय का कथन:
- यदि \(x=a\) बहुपद \(f(x)\) का एक शून्यक है (अर्थात \(f(a)=0\)), तो \((x-a)\), \(f(x)\) का एक गुणनखण्ड होता है।
- विलोम: यदि \((x-a)\) बहुपद \(f(x)\) का एक गुणनखण्ड है, तो \(f(a)=0\) होता है।
- उपपत्ति (Proof):
- शेषफल प्रमेय से, हम जानते हैं कि \(f(x) = (x-a) \cdot q(x) + f(a)\)।
- यदि \(f(a)=0\) है, तो समीकरण बन जाता है: \(f(x) = (x-a) \cdot q(x) + 0\)
- \(f(x) = (x-a) \cdot q(x)\)
- यह दर्शाता है कि \((x-a)\), \(f(x)\) का एक गुणनखण्ड है।
- विलोम की उपपत्ति:
- यदि \((x-a)\) बहुपद \(f(x)\) का एक गुणनखण्ड है, तो \(f(x)\) को \((x-a)\) से भाग देने पर शेषफल शून्य होगा।
- शेषफल प्रमेय के अनुसार, शेषफल \(f(a)\) होता है।
- अतः, \(f(a)=0\)।
- उपयोग:
- यह जांचने के लिए कि कोई दिया गया व्यंजक बहुपद का गुणनखण्ड है या नहीं, उस व्यंजक को \((x-a)\) के रूप में लिखें और \(x=a\) पर बहुपद का मान ज्ञात करें। यदि मान शून्य आता है, तो वह गुणनखण्ड है।
- उदाहरण: क्या \((x-2)\), \(p(x) = x^3 - 3x^2 + 4x - 4\) का एक गुणनखण्ड है?
- \(x=2\) रखने पर: \(p(2) = (2)^3 - 3(2)^2 + 4(2) - 4 = 8 - 12 + 8 - 4 = 0\)
- चूंकि \(p(2)=0\), अतः \((x-2)\) एक गुणनखण्ड है।
- अज्ञात गुणांकों का मान ज्ञात करने में, जब एक गुणनखण्ड दिया गया हो।
- उदाहरण: यदि \((x-1)\), \(p(x) = x^2+x+k\) का एक गुणनखण्ड है, तो \(p(1)=0\)।
- \((1)^2 + (1) + k = 0 \Rightarrow 1+1+k=0 \Rightarrow 2+k=0 \Rightarrow k=-2\)
बहुपद \(f(x)\) का शून्यक \(x\) का वह मान है जिसके लिए \(f(x)=0\) होता है।
यदि किसी बहुपद के दो गुणनखण्ड \((x-a)\) और \((x-b)\) हों, तो \(f(x) = (x-a)(x-b)q(x)\) होता है।
बहुपदों का गुणनखण्डन: उभयनिष्ठ और सर्वसमिकाएँ
किसी बहुपद का गुणनखण्डन करने का अर्थ है उसे ऐसे सरल बहुपदों के गुणनफल के रूप में लिखना जिन्हें गुणा करने पर मूल बहुपद प्राप्त हो।
- उभयनिष्ठ निकालकर गुणनखण्डन:
- यह विधि तब लागू होती है जब बहुपद के सभी पदों में कोई समान पद या गुणांक मौजूद हो।
- उस समान पद को बाहर निकालकर गुणनखण्डन किया जाता है।
- उदाहरण: \(12x+4x^2 = 4x(3+x)\)
- उदाहरण: \(ab+ac+a^2 = a(b+c+a)\)
- उदाहरण: \(2x^3+4x = 2x(x^2+2)\)
- सर्वसमिकाओं का उपयोग करके गुणनखण्डन:
- कुछ विशेष प्रकार के बहुपदों को मानक बीजीय सर्वसमिकाओं का उपयोग करके गुणनखण्डित किया जा सकता है।
- महत्वपूर्ण सर्वसमिकाएँ:
- \((a+b)^2 = a^2 + 2ab + b^2\)
- \((a-b)^2 = a^2 - 2ab + b^2\)
- \(a^2 - b^2 = (a+b)(a-b)\)
- उदाहरण: \(x^2-4 = x^2-2^2 = (x+2)(x-2)\)
- उदाहरण: \(x^2+6x+9 = x^2+2(x)(3)+3^2 = (x+3)^2 = (x+3)(x+3)\)
- उदाहरण: \(4x^2-20x+25 = (2x)^2-2(2x)(5)+5^2 = (2x-5)^2 = (2x-5)(2x-5)\)
गुणनखण्डन का उद्देश्य बहुपद को उसके सबसे सरल गुणनखण्डों में तोड़ना है।
मध्यपद को तोड़कर द्विघातीय बहुपदों का गुणनखण्डन
यह विधि \(ax^2+bx+c\) रूप के द्विघातीय बहुपदों के गुणनखण्डन के लिए उपयोग की जाती है, खासकर जब सीधी सर्वसमिका लागू न हो।
- प्रक्रिया:
- \(ac\) ज्ञात करें: \(x^2\) के गुणांक (\(a\)) और अचर पद (\(c\)) का गुणनफल ज्ञात करें।
- दो संख्याएँ ढूँढें: दो ऐसी संख्याएँ \(p\) और \(q\) ज्ञात करें जिनका योग मध्यपद के गुणांक \(b\) के बराबर हो (यानी \(p+q=b\)) और जिनका गुणनफल \(ac\) के बराबर हो (यानी \(p \cdot q = ac\))।
- मध्यपद को तोड़ें: मध्यपद \(bx\) को \(px+qx\) के रूप में लिखें।
- समूह बनाकर गुणनखण्डन: बहुपद को चार पदों में विभाजित करें और पहले दो पदों तथा अंतिम दो पदों में से उभयनिष्ठ निकालकर गुणनखण्डन करें।
- उदाहरण: \(x^2+5x+6\) का गुणनखण्डन करें।
- \(a=1, b=5, c=6\)। \(ac = 1 \times 6 = 6\)।
- ऐसी संख्याएँ जिनका योग 5 और गुणनफल 6 हो: 2 और 3 (क्योंकि \(2+3=5\) और \(2 \times 3 = 6\))।
- मध्यपद को तोड़ें: \(x^2+2x+3x+6\)
- समूह बनाकर गुणनखण्डन: \(x(x+2)+3(x+2) = (x+2)(x+3)\)
- उदाहरण: \(6x^2-5x-6\) का गुणनखण्डन करें।
- \(a=6, b=-5, c=-6\)। \(ac = 6 \times (-6) = -36\)।
- ऐसी संख्याएँ जिनका योग -5 और गुणनफल -36 हो: 4 और -9 (क्योंकि \(4+(-9)=-5\) और \(4 \times (-9) = -36\))।
- मध्यपद को तोड़ें: \(6x^2+4x-9x-6\)
- समूह बनाकर गुणनखण्डन: \(2x(3x+2)-3(3x+2) = (3x+2)(2x-3)\)
- भिन्नात्मक गुणांकों या करणी वाले गुणांकों के लिए भी समान विधि:
- उदाहरण: \(4\sqrt{3}x^2+5x-2\sqrt{3}\)
- \(a=4\sqrt{3}, b=5, c=-2\sqrt{3}\)
- \(ac = (4\sqrt{3}) \times (-2\sqrt{3}) = -8 \times 3 = -24\)
- ऐसी संख्याएँ जिनका योग 5 और गुणनफल -24 हो: 8 और -3।
- \(4\sqrt{3}x^2+8x-3x-2\sqrt{3}\)
- \(4x(\sqrt{3}x+2) - \sqrt{3}(\sqrt{3}x+2) = (\sqrt{3}x+2)(4x-\sqrt{3})\)
मध्यपद को तोड़ते समय, संख्याओं का चयन करते समय सही चिह्न का ध्यान रखना आवश्यक है।
यह विधि द्विघातीय बहुपदों के गुणनखण्डन के लिए सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण विधि है।
द्विघातीय बहुपद के मान और शून्यक
किसी बहुपद का मान \(x\) के एक विशिष्ट मान पर उस बहुपद में \(x\) का मान रखने पर प्राप्त होता है।
- बहुपद का मान:
- यदि \(p(x) = x^2-6x+9\) है, तो \(x=1\) पर \(p(1) = (1)^2-6(1)+9 = 1-6+9 = 4\) होगा।
- यह \(x=1\) के लिए बहुपद का मान है।
- बहुपद का शून्यक:
- \(x\) का वह मान जिसके लिए बहुपद का मान शून्य हो जाए, बहुपद का शून्यक कहलाता है।
- यदि \(p(x) = x^2-6x+9\) में \(x=3\) रखें, तो \(p(3) = (3)^2-6(3)+9 = 9-18+9 = 0\) होगा।
- अतः, 3 इस बहुपद का एक शून्यक है।
- शून्यक ज्ञात करने की विधि (गुणनखण्डन द्वारा):
- बहुपद को गुणनखण्डित करें।
- प्रत्येक गुणनखण्ड को शून्य के बराबर रखें।
- \(x\) के मानों को हल करें। ये मान बहुपद के शून्यक होंगे।
- उदाहरण: \(x^2-3x-4\) का शून्यक ज्ञात करें।
- गुणनखण्डन: \(x^2-3x-4 = (x-4)(x+1)\)
- गुणनखण्डों को शून्य के बराबर रखें: \((x-4)=0\) या \((x+1)=0\)
- \(x=4\) या \(x=-1\)
- अतः, 4 और -1 इस बहुपद के शून्यक हैं।
- महत्वपूर्ण संबंध:
- यदि \(k\) बहुपद \(p(x)\) का एक शून्यक है, तो \((x-k)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखण्ड होता है (गुणनखण्ड प्रमेय)।
- एक द्विघातीय बहुपद के अधिकतम दो शून्यक हो सकते हैं।
बहुपद का शून्यक वह मान है जिस पर बहुपद का मान शून्य हो जाता है।
यदि \(x=k\) एक शून्यक है, तो \((x-k)\) एक गुणनखण्ड है।
द्विघातीय बहुपद के शून्यक और गुणांकों में संबंध
एक द्विघातीय बहुपद \(ax^2+bx+c\) (जहाँ \(a \neq 0\)) के शून्यकों और उसके गुणांकों के बीच एक निश्चित संबंध होता है।
- शून्यक और गुणनखण्ड:
- यदि \(\alpha\) और \(\beta\) द्विघातीय बहुपद \(ax^2+bx+c\) के शून्यक हैं, तो \((x-\alpha)\) और \((x-\beta)\) इसके गुणनखण्ड होंगे।
- अतः, हम लिख सकते हैं: \(ax^2+bx+c = k(x-\alpha)(x-\beta)\), जहाँ \(k\) एक अचर है।
- \(ax^2+bx+c = k(x^2 - (\alpha+\beta)x + \alpha\beta)\)
- \(ax^2+bx+c = kx^2 - k(\alpha+\beta)x + k\alpha\beta\)
- गुणांकों की तुलना:
- दोनों पक्षों के गुणांकों की तुलना करने पर:
- \(a = k\)
- \(b = -k(\alpha+\beta)\)
- \(c = k\alpha\beta\)
- संबंध स्थापित करना:
- शून्यकों का योगफल (Sum of Zeroes):
- \(b = -k(\alpha+\beta)\)
- \(\alpha+\beta = -\frac{b}{k}\)
- चूँकि \(k=a\), अतः \(\alpha+\beta = -\frac{b}{a}\)
- शून्यकों का योगफल = \(-\frac{\text{x का गुणांक}}{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}\)
- शून्यकों का गुणनफल (Product of Zeroes):
- \(c = k\alpha\beta\)
- \(\alpha\beta = \frac{c}{k}\)
- चूँकि \(k=a\), अतः \(\alpha\beta = \frac{c}{a}\)
- शून्यकों का गुणनफल = \(\frac{\text{अचर पद}}{\text{x}^2 \text{ का गुणांक}}\)
- उपयोग:
- बिना शून्यक ज्ञात किए उनके योगफल और गुणनफल को ज्ञात करना।
- शून्यक ज्ञात होने पर द्विघातीय बहुपद का निर्माण करना।
- उदाहरण: बहुपद \(6x^2+13x+7\) के शून्यकों का योगफल और गुणनफल ज्ञात करें।
- यहाँ \(a=6, b=13, c=7\)
- शून्यकों का योगफल = \(-\frac{b}{a} = -\frac{13}{6}\)
- शून्यकों का गुणनफल = \(\frac{c}{a} = \frac{7}{6}\)
- शून्यक ज्ञात होने पर बहुपद बनाना:
- यदि शून्यक \(\alpha\) और \(\beta\) ज्ञात हों, तो बहुपद \(p(x) = k[x^2 - (\alpha+\beta)x + \alpha\beta]\) होता है।
- सरलतम रूप में, \(x^2 - (\text{शून्यकों का योगफल})x + (\text{शून्यकों का गुणनफल})\)
शून्यकों का योगफल: \(\alpha+\beta = -\frac{b}{a}\) शून्यकों का गुणनफल: \(\alpha\beta = \frac{c}{a}\)
यह संबंध बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है, विशेषकर 1 या 2 अंकों के प्रश्नों में।