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AP · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 18

POLYNOMIALS

బహుపది యొక్క మూలాలుశేష సిద్ధాంతంకారణాంక సిద్ధాంతంవర్గ బహుపదుల కారకాలుమధ్య పదాన్ని విభజించడం

ఈ అధ్యాయం బహుపదుల యొక్క ప్రాథమిక భావనలను పరిచయం చేస్తుంది, వాటిని గుర్తించడం మరియు వాటి డిగ్రీలను నిర్ణయించడం. బహుపది యొక్క మూలాలు లేదా సున్నాలను కనుగొనడం, శేష సిద్ధాంతం మరియు కారణాంక సిద్ధాంతం యొక్క అనువర్తనాలు, మరియు వర్గ బహుపదులను కారకాలుగా విభజించే పద్ధతులు వంటి ముఖ్యమైన అంశాలను ఇది వివరిస్తుంది. ఈ భావనలు బీజగణితంలో బలమైన పునాదిని నిర్మించడానికి మరియు భవిష్యత్ గణిత అధ్యయనాలకు చాలా ముఖ్యమైనవి.

बहुपद के शून्यक (Zeros of a Polynomial)

एक वास्तविक संख्या \(\alpha\) बहुपद \(f(x) = a_n x^n + a_{n-1} x^{n-1} + \dots + a_1 x + a_0\) का शून्यक या मूल (root) कहलाती है यदि \(f(\alpha) = 0\). इसका मतलब है कि \(x = \alpha\) रखने पर बहुपद का मान शून्य हो जाता है।

  • बहुपद का मान (Value of a Polynomial):
  • किसी बहुपद \(f(x)\) का \(x = \alpha\) पर मान \(f(\alpha)\) द्वारा दर्शाया जाता है।
  • यह \(x\) के स्थान पर \(\alpha\) प्रतिस्थापित करके प्राप्त किया जाता है।
  • उदाहरण: यदि \(f(x) = 2x^3 - 13x^2 + 17x + 12\), तो \(x=1\) पर इसका मान \(f(1) = 2(1)^3 - 13(1)^2 + 17(1) + 12 = 2 - 13 + 17 + 12 = 18\) है।
  • शून्यक की पहचान:
  • यदि \(f(\alpha) = 0\), तो \(\alpha\) बहुपद का शून्यक है।
  • उदाहरण: \(f(x) = x^3 - 6x^2 + 11x - 6\) के लिए, \(f(3) = (3)^3 - 6(3)^2 + 11(3) - 6 = 27 - 54 + 33 - 6 = 0\)। अतः, \(x=3\) इस बहुपद का एक शून्यक है।
  • यदि \(f(\alpha) \neq 0\), तो \(\alpha\) बहुपद का शून्यक नहीं है।
  • उदाहरण: उपरोक्त बहुपद के लिए, \(f(-2) = (-2)^3 - 6(-2)^2 + 11(-2) - 6 = -8 - 24 - 22 - 6 = -60 \neq 0\)। अतः, \(x=-2\) इस बहुपद का शून्यक नहीं है।
  • रैखिक बहुपद के शून्यक:
  • एक रैखिक बहुपद \(f(x) = ax + b\), जहाँ \(a \neq 0\), का केवल एक शून्यक होता है।
  • शून्यक ज्ञात करने के लिए, \(f(x) = 0\) रखें:

\(ax + b = 0\) \(ax = -b\) \(x = -b/a\)

  • अतः, \(x = -b/a\) रैखिक बहुपद \(ax+b\) का एकमात्र शून्यक है।
  • बहुपद के शून्यकों की अधिकतम संख्या:
  • एक \(n\) घात के बहुपद के अधिकतम \(n\) वास्तविक शून्यक हो सकते हैं।
  • उदाहरण: एक द्विघात बहुपद (घात 2) के अधिकतम 2 शून्यक हो सकते हैं। एक त्रिघात बहुपद (घात 3) के अधिकतम 3 शून्यक हो सकते हैं।
📖నిర్వచనం

शून्यक (Zero of a Polynomial): एक वास्तविक संख्या \(\alpha\) बहुपद \(p(x)\) का शून्यक कहलाती है यदि \(p(\alpha) = 0\).

ముఖ్యమైనది

एक \(n\) घात के बहुपद के अधिकतम \(n\) शून्यक हो सकते हैं।

शेषफल प्रमेय (Remainder Theorem)

शेषफल प्रमेय हमें बिना वास्तविक भाग किए बहुपद के भागफल का शेषफल ज्ञात करने में मदद करती है।

  • प्रमेय का कथन:
  • माना \(p(x)\) एक बहुपद है जिसकी घात एक या एक से अधिक है, और \(a\) कोई वास्तविक संख्या है।
  • यदि \(p(x)\) को \((x - a)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(a)\) होता है।
  • प्रमेय की उपपत्ति (Proof):
  • जब एक बहुपद \(p(x)\) को \((x - a)\) से विभाजित किया जाता है, तो हमें एक भागफल \(q(x)\) और एक शेषफल \(r(x)\) मिलता है।
  • विभाजन एल्गोरिथम के अनुसार:

\(p(x) = (x - a) \cdot q(x) + r(x)\)

  • यहाँ, \(r(x) = 0\) या \(deg(r(x)) < deg(x - a)\) होता है।
  • चूंकि \((x - a)\) की घात 1 है, इसलिए \(r(x)\) की घात 1 से कम होनी चाहिए, जिसका अर्थ है कि \(r(x)\) एक अचर (constant) होना चाहिए। मान लीजिए \(r(x) = r\).
  • तो, \(p(x) = (x - a) \cdot q(x) + r\).
  • अब, इस समीकरण में \(x = a\) रखने पर:

\(p(a) = (a - a) \cdot q(a) + r\) \(p(a) = 0 \cdot q(a) + r\) \(p(a) = r\)

  • अतः, शेषफल \(r\) वास्तव में \(p(a)\) है।
  • महत्वपूर्ण अवलोकन (Remarks):
  • यदि \(p(x)\) को \((x + a)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(-a)\) होता है।
  • यदि \(p(x)\) को \((ax - b)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(b/a)\) होता है।
  • यदि \(p(x)\) को \((ax + b)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(-b/a)\) होता है।
  • यदि \(p(x)\) को \((b - ax)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(b/a)\) होता है।
🧮సూత్రం

शेषफल प्रमेय: यदि बहुपद \(p(x)\) को \((x - a)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(a)\) होता है।

💡సూచన

शेषफल प्रमेय का उपयोग करके, आप बिना लंबी भाग प्रक्रिया के शेषफल जल्दी से ज्ञात कर सकते हैं। यह गुणनखंड प्रमेय का आधार भी है।

गुणनखंड प्रमेय (Factor Theorem)

गुणनखंड प्रमेय शेषफल प्रमेय का एक विशेष मामला है और यह बहुपद के गुणनखंड ज्ञात करने में बहुत उपयोगी है।

  • प्रमेय का कथन:
  • माना \(p(x)\) एक बहुपद है जिसकी घात एक या एक से अधिक है, और \(a\) कोई वास्तविक संख्या है।
  • स्थिति 1: यदि \(p(a) = 0\), तो \((x - a)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड होता है।
  • स्थिति 2: यदि \((x - a)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है, तो \(p(a) = 0\) होता है।
  • प्रमेय की उपपत्ति (Proof):
  • शेषफल प्रमेय के अनुसार, जब \(p(x)\) को \((x - a)\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(a)\) होता है।

\(p(x) = (x - a) \cdot q(x) + p(a)\)

  • स्थिति 1 (यदि \(p(a) = 0\)):
  • यदि \(p(a) = 0\), तो समीकरण बन जाता है:

\(p(x) = (x - a) \cdot q(x) + 0\) \(p(x) = (x - a) \cdot q(x)\)

  • इसका अर्थ है कि \((x - a)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है।
  • स्थिति 2 (यदि \((x - a)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है):
  • यदि \((x - a)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है, तो हम \(p(x)\) को \(p(x) = (x - a) \cdot q(x)\) के रूप में लिख सकते हैं, जहाँ \(q(x)\) एक बहुपद है।
  • इस समीकरण में \(x = a\) रखने पर:

\(p(a) = (a - a) \cdot q(a)\) \(p(a) = 0 \cdot q(a)\) \(p(a) = 0\)

  • अतः, यदि \((x - a)\) एक गुणनखंड है, तो \(p(a) = 0\) होता है।
  • गुणनखंड प्रमेय का उपयोग:
  • यह बहुपद के गुणनखंड ज्ञात करने और यह जांचने के लिए उपयोग किया जाता है कि कोई दिया गया रैखिक व्यंजक बहुपद का गुणनखंड है या नहीं।
  • उच्च घात के बहुपदों का गुणनखंड करने के लिए, हम पहले संभावित पूर्णांक या परिमेय शून्यकों की तलाश करते हैं (पूर्णांक मूल प्रमेय और परिमेय मूल प्रमेय का उपयोग करके), फिर गुणनखंड प्रमेय का उपयोग करके उन्हें सत्यापित करते हैं।
🧮సూత్రం

गुणनखंड प्रमेय: \((x - a)\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है यदि और केवल यदि \(p(a) = 0\).

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर शेषफल प्रमेय और गुणनखंड प्रमेय को भ्रमित करते हैं। याद रखें, गुणनखंड प्रमेय शेषफल प्रमेय का एक विशेष मामला है जहाँ शेषफल शून्य होता है।

द्विघात बहुपद का गुणनखंड (Factorisation of Quadratic Polynomials)

एक द्विघात बहुपद \(ax^2 + bx + c\) (जहाँ \(a \neq 0\)) का गुणनखंड करने के दो मुख्य तरीके हैं:

1. पूर्ण वर्ग बनाने की विधि (By Method of Completion of Square)

  • विधि:
  1. बहुपद को \(a[x^2 + (b/a)x + (c/a)]\) के रूप में लिखें।
  2. कोष्ठक के अंदर के व्यंजक को \((x + k)^2 - m^2\) के रूप में पूर्ण वर्ग बनाएं। इसके लिए, \(x\) के गुणांक के आधे का वर्ग जोड़ें और घटाएं।
  3. \(A^2 - B^2 = (A - B)(A + B)\) सर्वसमिका का उपयोग करके गुणनखंड करें।
  • उदाहरण: \(x^2 - 31x + 220\) का गुणनखंड करें।

\(x^2 - 31x + 220\) \(= x^2 - 2 \cdot (31/2)x + (31/2)^2 - (31/2)^2 + 220\) \(= (x - 31/2)^2 - 961/4 + 220\) \(= (x - 31/2)^2 - (961 - 880)/4\) \(= (x - 31/2)^2 - 81/4\) \(= (x - 31/2)^2 - (9/2)^2\) \(= (x - 31/2 - 9/2)(x - 31/2 + 9/2)\) \(= (x - 40/2)(x - 22/2)\) \(= (x - 20)(x - 11)\)

2. मध्य पद को विभक्त करके (By Splitting the Middle Term)

  • विधि:
  1. बहुपद \(ax^2 + bx + c\) में, \(ac\) का गुणनफल ज्ञात करें।
  2. दो संख्याएँ \(p\) और \(q\) ज्ञात करें जिनका गुणनफल \(ac\) हो और योग \(b\) हो (अर्थात, \(p \cdot q = ac\) और \(p + q = b\))।
  3. मध्य पद \(bx\) को \(px + qx\) के रूप में लिखें।
  4. पहले दो पदों और अगले दो पदों में से सामान्य गुणनखंड लेकर समूह बनाएं।
  5. सामान्य द्विपद गुणनखंड को बाहर निकालें।
  • द्विघात व्यंजकों के प्रकार:
  • \(ax^2 + bx + c\)
  • \(ax^2 - bx + c\)
  • \(ax^2 - bx - c\)
  • \(ax^2 + bx - c\)
  • उदाहरण: \(x^2 - 14x + 24\) का गुणनखंड करें।
  • यहाँ, \(a=1, b=-14, c=24\).
  • गुणनफल \(ac = 1 \cdot 24 = 24\).
  • योग \(b = -14\).
  • दो संख्याएँ जिनका गुणनफल 24 और योग -14 हो, वे हैं -12 और -2।
  • मध्य पद को विभक्त करें:

\(x^2 - 12x - 2x + 24\)

  • समूह बनाएं और गुणनखंड करें:

\(x(x - 12) - 2(x - 12)\) \(= (x - 12)(x - 2)\)

  • भिन्न गुणांकों वाले उदाहरण: \(x^2 - 13x/24 - 1/12\) का गुणनखंड करें।
  • पहले पूरे व्यंजक को एक सामान्य हर पर लाएं:

\(x^2 - 13x/24 - 1/12 = (1/24)[24x^2 - 13x - 2]\)

  • अब \(24x^2 - 13x - 2\) का गुणनखंड करें। यहाँ \(a=24, b=-13, c=-2\).
  • गुणनफल \(ac = 24 \cdot (-2) = -48\).
  • योग \(b = -13\).
  • दो संख्याएँ जिनका गुणनफल -48 और योग -13 हो, वे हैं -16 और 3।
  • मध्य पद को विभक्त करें:

\((1/24)[24x^2 - 16x + 3x - 2]\)

  • समूह बनाएं और गुणनखंड करें:

\((1/24)[8x(3x - 2) + 1(3x - 2)]\) \(= (1/24)(3x - 2)(8x + 1)\)

💡సూచన

मध्य पद को विभक्त करने की विधि सबसे अधिक उपयोग की जाती है और परीक्षा में अक्सर पूछी जाती है। इस पर अच्छी पकड़ बनाएं।

గుర్తుంచుకోండి

पूर्ण वर्ग बनाने की विधि द्विघात समीकरणों को हल करने के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो आपको उच्च कक्षाओं में काम आएगी।

त्रिघात बहुपद का गुणनखंड (Factorisation of Cubic Polynomials)

त्रिघात बहुपदों का गुणनखंड करना द्विघात बहुपदों की तुलना में थोड़ा अधिक जटिल होता है। इसमें अक्सर गुणनखंड प्रमेय और लंबी भाग विधि का संयोजन शामिल होता है।

1. पूर्णांक मूल प्रमेय (Integral Root Theorem)

  • प्रमेय: यदि \(f(x)\) एक बहुपद है जिसके पूर्णांक गुणांक हैं और जिसका अग्रणी गुणांक 1 है (अर्थात, \(x^n\) का गुणांक 1 है), तो \(f(x)\) का कोई भी पूर्णांक मूल अचर पद का एक गुणनखंड होता है।
  • उपयोग: यह प्रमेय हमें संभावित पूर्णांक शून्यकों की पहचान करने में मदद करती है। हम अचर पद के सभी गुणनखंडों का परीक्षण करते हैं।
  • उदाहरण: \(f(x) = x^3 - 6x^2 + 11x - 6\) के पूर्णांक मूल ज्ञात करें।
  • अचर पद -6 है। इसके गुणनखंड हैं: \(\pm 1, \pm 2, \pm 3, \pm 6\).
  • \(f(1) = 1 - 6 + 11 - 6 = 0\) \(\Rightarrow x=1\) एक मूल है।
  • \(f(2) = 8 - 24 + 22 - 6 = 0\) \(\Rightarrow x=2\) एक मूल है।
  • \(f(3) = 27 - 54 + 33 - 6 = 0\) \(\Rightarrow x=3\) एक मूल है।
  • अतः, पूर्णांक मूल 1, 2, 3 हैं।

2. परिमेय मूल प्रमेय (Rational Root Theorem)

  • प्रमेय: माना \(b/c\) एक परिमेय भिन्न है जो निम्नतम पदों में है। यदि \(b/c\) बहुपद \(f(x) = a_n x^n + a_{n-1} x^{n-1} + \dots + a_1 x + a_0\) का एक मूल है (जहाँ \(a_n \neq 0\) और पूर्णांक गुणांक हैं), तो \(b\) अचर पद \(a_0\) का एक गुणनखंड है और \(c\) अग्रणी गुणांक \(a_n\) का एक गुणनखंड है।
  • उपयोग: यह प्रमेय हमें संभावित परिमेय शून्यकों की पहचान करने में मदद करती है, खासकर जब अग्रणी गुणांक 1 न हो।
  • उदाहरण: \(f(x) = 6x^3 + 5x^2 - 3x - 2\) के संभावित परिमेय मूल ज्ञात करें।
  • अचर पद \(a_0 = -2\) के गुणनखंड \(\pm 1, \pm 2\) हैं।
  • अग्रणी गुणांक \(a_n = 6\) के गुणनखंड \(\pm 1, \pm 2, \pm 3, \pm 6\) हैं।
  • संभावित परिमेय मूल \(b/c\) के रूप में होंगे: \(\pm 1, \pm 2, \pm 1/2, \pm 1/3, \pm 2/3, \pm 1/6\).
  • इनमें से, -1, 1/2, -2/3 इस बहुपद के वास्तविक मूल हैं।

3. गुणनखंड विधि (Using Factor Theorem and Long Division/Synthetic Division)

  • विधि:
  1. पूर्णांक मूल प्रमेय या परिमेय मूल प्रमेय का उपयोग करके बहुपद का एक शून्यक (जैसे \(\alpha\)) ज्ञात करें।
  2. गुणनखंड प्रमेय के अनुसार, यदि \(\alpha\) एक शून्यक है, तो \((x - \alpha)\) बहुपद का एक गुणनखंड है।
  3. बहुपद को \((x - \alpha)\) से लंबी भाग विधि (Long Division) या संश्लेषित भाग विधि (Synthetic Division) का उपयोग करके विभाजित करें। इससे आपको एक द्विघात भागफल मिलेगा।
  4. प्राप्त द्विघात भागफल का मध्य पद को विभक्त करके या पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से गुणनखंड करें।
  • उदाहरण: \(p(x) = 2x^4 - 7x^3 - 13x^2 + 63x - 45\) का गुणनखंड करें।
  • अचर पद -45 के गुणनखंडों का परीक्षण करें: \(\pm 1, \pm 3, \pm 5, \pm 9, \pm 15, \pm 45\).
  • \(p(1) = 2 - 7 - 13 + 63 - 45 = 0\) \(\Rightarrow (x-1)\) एक गुणनखंड है।
  • \(p(3) = 2(3)^4 - 7(3)^3 - 13(3)^2 + 63(3) - 45 = 162 - 189 - 117 + 189 - 45 = 0\) \(\Rightarrow (x-3)\) एक गुणनखंड है।
  • अब, \(p(x)\) को \((x-1)(x-3) = x^2 - 4x + 3\) से विभाजित करें (या दो बार लंबी भाग करें)।
  • \(2x^4 - 7x^3 - 13x^2 + 63x - 45 = (x-1)(2x^3 - 5x^2 - 18x + 45)\)
  • अब \(2x^3 - 5x^2 - 18x + 45\) का गुणनखंड करें। हम जानते हैं कि \((x-3)\) इसका भी एक गुणनखंड है।
  • \(2x^3 - 5x^2 - 18x + 45 = 2x^2(x-3) + x(x-3) - 15(x-3)\)

\(= (x-3)(2x^2 + x - 15)\)

  • अब द्विघात व्यंजक \(2x^2 + x - 15\) का गुणनखंड करें (मध्य पद को विभक्त करके):

\(2x^2 + 6x - 5x - 15\) \(= 2x(x+3) - 5(x+3)\) \(= (x+3)(2x-5)\)

  • अतः, \(p(x) = (x-1)(x-3)(x+3)(2x-5)\).
💡సూచన

त्रिघात बहुपदों का गुणनखंड करने के लिए, हमेशा पहले पूर्णांक मूल प्रमेय का उपयोग करके एक या दो गुणनखंड ज्ञात करने का प्रयास करें। यह प्रक्रिया को बहुत सरल बनाता है।

గుర్తుంచుకోండి

यदि आपको कोई पूर्णांक या परिमेय मूल नहीं मिलता है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि बहुपद के सभी मूल अपरिमेय या अवास्तविक हैं, या आपने गणना में गलती की है।

बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ (Algebraic Identities)

बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ वे समीकरण हैं जो चरों के सभी मानों के लिए सत्य होती हैं। ये बहुपदों के गुणनखंड करने और व्यंजकों को सरल बनाने में बहुत उपयोगी होती हैं। कक्षा 9 में कुछ महत्वपूर्ण सर्वसमिकाएँ इस प्रकार हैं:

  • मूलभूत सर्वसमिकाएँ:
  1. \((a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2\)
  2. \((a - b)^2 = a^2 - 2ab + b^2\)
  3. \(a^2 - b^2 = (a - b)(a + b)\)
  4. \((x + a)(x + b) = x^2 + (a + b)x + ab\)
  • त्रिघात सर्वसमिकाएँ:
  1. \((a + b)^3 = a^3 + b^3 + 3ab(a + b) = a^3 + 3a^2b + 3ab^2 + b^3\)
  2. \((a - b)^3 = a^3 - b^3 - 3ab(a - b) = a^3 - 3a^2b + 3ab^2 - b^3\)
  3. \(a^3 + b^3 = (a + b)(a^2 - ab + b^2)\)
  4. \(a^3 - b^3 = (a - b)(a^2 + ab + b^2)\)
  • तीन चरों वाली सर्वसमिकाएँ:
  1. \((x + y + z)^2 = x^2 + y^2 + z^2 + 2xy + 2yz + 2zx\)
  2. \(x^3 + y^3 + z^3 - 3xyz = (x + y + z)(x^2 + y^2 + z^2 - xy - yz - zx)\)
  3. विशेष स्थिति: यदि \(x + y + z = 0\), तो \(x^3 + y^3 + z^3 = 3xyz\).
  • सर्वसमिकाओं का अनुप्रयोग:
  • गुणनखंड करना: उदाहरण के लिए, \(4x^2 + 12xy + 9y^2\) को \((2x)^2 + 2(2x)(3y) + (3y)^2 = (2x + 3y)^2\) के रूप में गुणनखंडित किया जा सकता है।
  • मान ज्ञात करना: उदाहरण के लिए, \(103^3\) का मान \((100 + 3)^3\) के रूप में ज्ञात किया जा सकता है।
  • व्यंजकों का सरलीकरण: जटिल बीजगणितीय व्यंजकों को सरल बनाने के लिए।
  • अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण:
  • सभी सर्वसमिकाओं को याद रखना और उन्हें पहचानना महत्वपूर्ण है।
  • विभिन्न प्रकार की समस्याओं में उनका उपयोग करने का अभ्यास करें।
  • कभी-कभी, व्यंजक सीधे सर्वसमिका के रूप में नहीं दिखते हैं; आपको उन्हें उस रूप में बदलने के लिए कुछ हेरफेर करने की आवश्यकता हो सकती है।
ముఖ్యమైనది

ये सर्वसमिकाएँ न केवल गुणनखंडन के लिए बल्कि समीकरणों को हल करने और व्यंजकों को सरल बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

💡సూచన

सर्वसमिका \(x^3 + y^3 + z^3 - 3xyz = (x + y + z)(x^2 + y^2 + z^2 - xy - yz - zx)\) और इसकी विशेष स्थिति \(x+y+z=0 \Rightarrow x^3+y^3+z^3=3xyz\) अक्सर परीक्षा में पूछी जाती हैं।

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