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AP · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 11

ch11

బహుపదుల నిర్వచనంబహుపదుల రకాలుబహుపదుల శూన్యాలుశేష సిద్ధాంతంకారణాంక సిద్ధాంతంబహుపదుల కారణాంకీకరణ

ఈ అధ్యాయం బహుపదుల ప్రాథమిక భావనలను, వాటి రకాలను, వాటిని ఎలా కూడాలి, తీసివేయాలి, గుణించాలి మరియు భాగించాలి అనే వాటిని వివరిస్తుంది. బహుపదుల శూన్యాలు, శేష సిద్ధాంతం మరియు కారణాంక సిద్ధాంతం వంటి ముఖ్యమైన అంశాలు కూడా ఇందులో ఉన్నాయి. ఈ భావనలు బీజగణితంలో బలమైన పునాదిని ఏర్పరుస్తాయి మరియు భవిష్యత్ గణిత అధ్యయనాలకు చాలా ముఖ్యమైనవి.

बहुपद और उनके प्रकार

एक बहुपद एक बीजगणितीय व्यंजक होता है जिसमें चर (variables) की घात (powers) हमेशा पूर्ण संख्याएँ (whole numbers) होती हैं।

  • बहुपद की घात (Degree of a Polynomial): चर की उच्चतम घात
  • उदाहरण: \(5x^3 - 2x^2 + 7x - 1\) की घात 3 है।
  • बहुपद के प्रकार (Types of Polynomials):
  • पदों की संख्या के आधार पर:
  • एकपदी (Monomial): एक पद वाला बहुपद। उदाहरण: \(5x\), \(7y^2\), \(9\).
  • द्विपदी (Binomial): दो पद वाला बहुपद। उदाहरण: \(x + y\), \(2x^2 - 3\).
  • त्रिपदी (Trinomial): तीन पद वाला बहुपद। उदाहरण: \(x^2 + 2x + 1\), \(a + b + c\).
  • घात के आधार पर:
  • अचर बहुपद (Constant Polynomial): घात 0। उदाहरण: \(5\), \(-7\). (शून्य बहुपद की घात अपरिभाषित होती है।)
  • रैखिक बहुपद (Linear Polynomial): घात 1। उदाहरण: \(ax + b\), जहाँ \(a \neq 0\).
  • द्विघात बहुपद (Quadratic Polynomial): घात 2। उदाहरण: \(ax^2 + bx + c\), जहाँ \(a \neq 0\).
  • त्रिघात बहुपद (Cubic Polynomial): घात 3। उदाहरण: \(ax^3 + bx^2 + cx + d\), जहाँ \(a \neq 0\).
  • मान ज्ञात करना (Value of a Polynomial): यदि \(p(x)\) एक बहुपद है, तो \(x=a\) पर बहुपद का मान \(p(a)\) होता है।
  • उदाहरण: यदि \(p(x) = x^2 + 2x + 1\), तो \(p(1) = (1)^2 + 2(1) + 1 = 1 + 2 + 1 = 4\).
  • मानक रूप (Standard Form): बहुपद को उसकी घातों के घटते क्रम में लिखना।
  • उदाहरण: \(7x - 2x^2 + 5x^3 - 1\) का मानक रूप \(5x^3 - 2x^2 + 7x - 1\) है।
ముఖ్యమైనది

ध्यान दें: \(x + \frac{1}{x}\), \(\sqrt{x} + 5\) या \(\frac{1}{x^2 + 1}\) बहुपद नहीं हैं क्योंकि इनमें चर की घात पूर्ण संख्या नहीं है (जैसे \(x^{-1}\) या \(x^{1/2}\)).

📖నిర్వచనం

शून्य बहुपद (Zero Polynomial): वह बहुपद जिसके सभी गुणांक (coefficients) शून्य हों। इसकी घात अपरिभाषित होती है।

बहुपद के शून्यक

एक वास्तविक संख्या \(k\) बहुपद \(p(x)\) का शून्यक (zero) कहलाती है, यदि \(p(k) = 0\).

  • शून्यक का अर्थ: यह वह मान है जिस पर बहुपद का मान शून्य हो जाता है।
  • रैखिक बहुपद का शून्यक: एक रैखिक बहुपद \(ax + b\) (जहाँ \(a \neq 0\)) का केवल एक ही शून्यक होता है, जो \(-\frac{b}{a}\) है।
  • उदाहरण: \(p(x) = 2x + 4\) का शून्यक \(2x + 4 = 0 \Rightarrow 2x = -4 \Rightarrow x = -2\) है।
  • द्विघात बहुपद के शून्यक: एक द्विघात बहुपद के अधिकतम दो शून्यक हो सकते हैं।
  • त्रिघात बहुपद के शून्यक: एक त्रिघात बहुपद के अधिकतम तीन शून्यक हो सकते हैं।
  • सामान्यीकरण: एक \(n\) घात वाले बहुपद के अधिकतम \(n\) शून्यक हो सकते हैं।
  • शून्यक ज्ञात करने के तरीके:
  1. सीधा हल करना: \(p(x) = 0\) सेट करके \(x\) के लिए हल करें। (रैखिक बहुपदों के लिए)
  2. गुणनखंडन विधि (Factorisation Method): बहुपद को गुणनखंडित करके शून्यक ज्ञात करें। (द्विघात और कुछ त्रिघात बहुपदों के लिए)
  3. शेषफल प्रमेय/गुणनखंड प्रमेय का उपयोग: यह जांचने के लिए कि कोई दिया गया मान शून्यक है या नहीं।
గుర్తుంచుకోండి

एक बहुपद का शून्यक और समीकरण के मूल (roots) एक ही बात है।

शेषफल प्रमेय (Remainder Theorem)

यदि \(p(x)\) एक या एक से अधिक घात वाला बहुपद है और \(a\) कोई वास्तविक संख्या है, तो जब \(p(x)\) को ==रैखिक बहुपद \((x - a))\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(a)\) होता है।

  • प्रमेय का कथन: \(p(x)\) को \((x-a)\) से भाग देने पर शेषफल \(p(a)\) होता है।
  • उपयोगिता: बिना वास्तविक विभाजन किए शेषफल ज्ञात करने के लिए।
  • विभाजन एल्गोरिथम (Division Algorithm): \(p(x) = g(x) \cdot q(x) + r(x)\)
  • जहाँ \(p(x)\) = भाज्य (Dividend)
  • \(g(x)\) = भाजक (Divisor)
  • \(q(x)\) = भागफल (Quotient)
  • \(r(x)\) = शेषफल (Remainder)
  • \(r(x) = 0\) या \(\text{deg}(r(x)) < \text{deg}(g(x))\).
  • शेषफल प्रमेय का प्रमाण:
  • जब \(p(x)\) को \((x-a)\) से विभाजित किया जाता है, तो भागफल \(q(x)\) और शेषफल \(r\) (एक अचर, क्योंकि भाजक की घात 1 है) होता है।
  • अतः, \(p(x) = (x-a)q(x) + r\)
  • \(x = a\) रखने पर:
  • \(p(a) = (a-a)q(a) + r\)
  • \(p(a) = 0 \cdot q(a) + r\)
  • \(p(a) = r\)
  • अतः, शेषफल \(p(a)\) है।
💡సూచన

यदि भाजक \((ax + b)\) के रूप में है, तो इसे \(a(x + \frac{b}{a}))\) के रूप में लिखें। शून्यक \(-\frac{b}{a}\) होगा। अतः शेषफल \(p(-\frac{b}{a}))\) होगा।

गुणनखंड प्रमेय (Factor Theorem)

गुणनखंड प्रमेय शेषफल प्रमेय का एक विशेष मामला है।

  • प्रमेय का कथन:
  1. यदि \(p(a) = 0\), तो \((x - a))\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड होता है।
  2. यदि \((x - a))\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है, तो \(p(a) = 0\).
  • उपयोगिता:
  • यह जांचने के लिए कि कोई दिया गया रैखिक बहुपद किसी बहुपद का गुणनखंड है या नहीं।
  • बहुपदों का गुणनखंडन करने के लिए, विशेषकर द्विघात और त्रिघात बहुपदों का।
  • गुणनखंड प्रमेय का प्रमाण:
  • भाग 1: यदि \(p(a) = 0\), तो \((x-a))\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है।
  • शेषफल प्रमेय के अनुसार, जब \(p(x)\) को \((x-a))\) से विभाजित किया जाता है, तो शेषफल \(p(a)\) होता है।
  • हमें दिया गया है कि \(p(a) = 0\). इसका अर्थ है कि शेषफल शून्य है।
  • यदि शेषफल शून्य है, तो \((x-a))\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है।
  • भाग 2: यदि \((x-a))\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है, तो \(p(a) = 0\).
  • यदि \((x-a))\) बहुपद \(p(x)\) का एक गुणनखंड है, तो \(p(x)\) को \((x-a))\) से विभाजित करने पर शेषफल शून्य होगा।
  • शेषफल प्रमेय के अनुसार, शेषफल \(p(a)\) होता है।
  • अतः, \(p(a) = 0\).
ముఖ్యమైనది

गुणनखंड प्रमेय बहुपदों के गुणनखंडन की कुंजी है।

बहुपदों का गुणनखंडन (Factorisation of Polynomials)

बहुपद का गुणनखंडन का अर्थ है उसे दो या दो से अधिक बहुपदों के गुणनफल के रूप में व्यक्त करना।

  • मध्य पद को विभक्त करके गुणनखंडन (Splitting the Middle Term): (द्विघात बहुपदों के लिए \(ax^2 + bx + c\))
  1. \(a\) और \(c\) का गुणनफल \(ac\) ज्ञात करें।
  2. दो संख्याएँ \(p\) और \(q\) ज्ञात करें जिनका योग \(b\) हो और गुणनफल \(ac\) हो। (अर्थात \(p+q=b\) और \(pq=ac\)).
  3. मध्य पद \(bx\) को \(px + qx\) के रूप में लिखें।
  4. पदों को समूहित करके गुणनखंड करें।
  • गुणनखंड प्रमेय का उपयोग करके गुणनखंडन (Using Factor Theorem): (त्रिघात बहुपदों और उच्च घातों के लिए)
  1. बहुपद \(p(x)\) के अचर पद के सभी संभावित गुणनखंडों (जैसे \(\pm 1, \pm 2, \dots\)) को ज्ञात करें।
  2. इनमें से प्रत्येक मान के लिए \(p(x)\) का मान ज्ञात करें। जिस मान \(a\) के लिए \(p(a) = 0\) हो, वह \(p(x)\) का एक शून्यक होगा, और \((x-a))\) एक गुणनखंड होगा।
  3. \(p(x)\) को \((x-a))\) से भाग दें (लंबे विभाजन या संश्लेषित विभाजन का उपयोग करके) भागफल \(q(x)\) प्राप्त करें।
  4. यदि \(q(x)\) एक द्विघात बहुपद है, तो उसे मध्य पद को विभक्त करके गुणनखंडित करें।
  5. इस प्रकार \(p(x)\) के सभी गुणनखंड प्राप्त करें।
  • बीजगणितीय सर्वसमिकाओं का उपयोग करके गुणनखंडन (Using Algebraic Identities):
  • कुछ विशेष बहुपदों को सीधे सर्वसमिकाओं का उपयोग करके गुणनखंडित किया जा सकता है। (अगले खंड में देखें)
🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

मध्य पद को विभक्त करते समय, \(p\) और \(q\) के सही चिह्नों का चयन करना महत्वपूर्ण है।

बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ (Algebraic Identities)

बीजगणितीय सर्वसमिकाएँ ऐसे समीकरण होते हैं जो चरों के सभी मानों के लिए सत्य होते हैं। ये गुणनखंडन और व्यंजकों के सरलीकरण में बहुत उपयोगी होते हैं।

  • महत्वपूर्ण सर्वसमिकाएँ:
  1. \((a + b)^2 = a^2 + 2ab + b^2\)
  2. \((a - b)^2 = a^2 - 2ab + b^2\)
  3. \(a^2 - b^2 = (a - b)(a + b)\)
  4. \((x + a)(x + b) = x^2 + (a + b)x + ab\)
  5. \((a + b + c)^2 = a^2 + b^2 + c^2 + 2ab + 2bc + 2ca\)
  6. \((a + b)^3 = a^3 + b^3 + 3ab(a + b) = a^3 + b^3 + 3a^2b + 3ab^2\)
  7. \((a - b)^3 = a^3 - b^3 - 3ab(a - b) = a^3 - b^3 - 3a^2b + 3ab^2\)
  8. \(a^3 + b^3 = (a + b)(a^2 - ab + b^2)\)
  9. \(a^3 - b^3 = (a - b)(a^2 + ab + b^2)\)
  10. \(a^3 + b^3 + c^3 - 3abc = (a + b + c)(a^2 + b^2 + c^2 - ab - bc - ca)\)
  • विशेष स्थिति (Special Case):
  • यदि \(a + b + c = 0\), तो सर्वसमिका 10 से, \(a^3 + b^3 + c^3 = 3abc\).
🧮సూత్రం

सभी सर्वसमिकाओं को कंठस्थ करें। ये न केवल गुणनखंडन में बल्कि समीकरणों को हल करने और व्यंजकों को सरल बनाने में भी बहुत उपयोगी हैं।

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