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AP · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 7

ch07

కోణాల రకాలురేఖీయ జతశీర్షాభిముఖ కోణాలుసమాంతర రేఖలు మరియు ఛేదకాలుత్రిభుజాల కోణాల ధర్మాలు

ఈ అధ్యాయం రేఖలు మరియు కోణాల ప్రాథమిక భావనలను పరిచయం చేస్తుంది. మీరు వివిధ రకాల కోణాలు (పూరక, సంపూరక, ఆసన్న, శీర్షాభిముఖ), సమాంతర రేఖలు మరియు ఛేదకాల ద్వారా ఏర్పడే కోణాలు (సరూప, ఏకాంతర అంతర, ఏకాంతర బాహ్య, అంతర కోణాలు) గురించి నేర్చుకుంటారు. త్రిభుజాల కోణాల మొత్తం ధర్మం మరియు బాహ్య కోణ ధర్మం కూడా చర్చించబడతాయి. ఈ భావనలు జ్యామితిలో మరింత సంక్లిష్ట సమస్యలను పరిష్కరించడానికి పునాదిని ఏర్పరుస్తాయి.

मूलभूत पद और परिभाषाएँ

ज्यामिति में, कुछ मूलभूत पद अपरिभाषित होते हैं लेकिन सहज रूप से समझे जाते हैं।

  • बिंदु (Point): एक सटीक स्थिति को दर्शाता है। इसकी कोई विमा नहीं होती।
  • रेखा (Line): बिंदुओं का एक संग्रह जो दोनों दिशाओं में अनंत तक फैला होता है। इसकी कोई मोटाई नहीं होती।
  • रेखाखंड (Line Segment): एक रेखा का भाग जिसके दो अंत बिंदु होते हैं।
  • किरण (Ray): एक रेखा का भाग जिसका एक अंत बिंदु होता है और दूसरी दिशा में अनंत तक फैला होता है।
  • संरेख बिंदु (Collinear Points): तीन या अधिक बिंदु जो एक ही रेखा पर स्थित हों।
  • असंरेख बिंदु (Non-collinear Points): वे बिंदु जो एक ही रेखा पर स्थित न हों।
  • कोण (Angle): जब दो किरणें एक ही अंत बिंदु से शुरू होती हैं, तो एक कोण बनता है।
  • किरणों को कोण की भुजाएँ (arms) कहा जाता है।
  • सामान्य अंत बिंदु को शीर्ष (vertex) कहा जाता है।

कोण का मापन: कोणों को डिग्री (°) में मापा जाता है। एक पूर्ण घूर्णन 360° का होता है।

कोणों का वर्गीकरण उनके माप के आधार पर:

  • न्यून कोण (Acute Angle): \(0^\circ < \theta < 90^\circ\)
  • समकोण (Right Angle): \(\theta = 90^\circ\)
  • अधिक कोण (Obtuse Angle): \(90^\circ < \theta < 180^\circ\)
  • ऋजु कोण (Straight Angle): \(\theta = 180^\circ\) (एक सीधी रेखा बनाता है)
  • प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): \(180^\circ < \theta < 360^\circ\)

कोण समद्विभाजक (Angle Bisector): एक किरण जो एक कोण को दो बराबर भागों में विभाजित करती है।

ముఖ్యమైనది

यूक्लिड की अभिधारणाएँ: याद रखें कि ज्यामिति की नींव यूक्लिड की अभिधारणाओं पर आधारित है, जहाँ बिंदु, रेखा और तल जैसे पद अपरिभाषित माने जाते हैं।

कोणों के प्रकार

विभिन्न कोण युग्म और उनके संबंध:

  • पूरक कोण (Complementary Angles):
  • जब दो कोणों का योग \(90^\circ\) हो।
  • उदाहरण: \(30^\circ\) और \(60^\circ\) पूरक कोण हैं।
  • संपूरक कोण (Supplementary Angles):
  • जब दो कोणों का योग \(180^\circ\) हो।
  • उदाहरण: \(70^\circ\) और \(110^\circ\) संपूरक कोण हैं।
  • आसन्न कोण (Adjacent Angles):
  • एक उभयनिष्ठ शीर्ष (common vertex) और एक उभयनिष्ठ भुजा (common arm) वाले कोण, जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत दिशा में हों।
  • उभयनिष्ठ शीर्ष और उभयनिष्ठ भुजा होना आवश्यक है।
  • रैखिक युग्म (Linear Pair of Angles):
  • आसन्न कोणों का एक युग्म जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं।
  • रैखिक युग्म के कोणों का योग हमेशा \(180^\circ\) होता है। (एक अभिगृहीत)
  • शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles):
  • जब दो रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो प्रतिच्छेदन बिंदु पर बनने वाले कोणों के युग्म जो एक दूसरे के विपरीत होते हैं।
  • शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं। (एक प्रमेय)

महत्वपूर्ण अंतर:

  • सभी रैखिक युग्म आसन्न कोण होते हैं, लेकिन सभी आसन्न कोण रैखिक युग्म नहीं होते।
  • पूरक/संपूरक कोणों के लिए आसन्न होना आवश्यक नहीं है।
💡సూచన

रैखिक युग्म और शीर्षाभिमुख कोणों पर आधारित प्रश्न अक्सर सीधे मान ज्ञात करने या सिद्ध करने के लिए आते हैं। इन गुणों को अच्छे से याद रखें।

प्रतिच्छेदी रेखाएँ और अप्रतिच्छेदी रेखाएँ

  • प्रतिच्छेदी रेखाएँ (Intersecting Lines): दो रेखाएँ जो एक उभयनिष्ठ बिंदु पर मिलती हैं।
  • इस उभयनिष्ठ बिंदु को प्रतिच्छेदन बिंदु (point of intersection) कहते हैं।
  • प्रतिच्छेदी रेखाएँ शीर्षाभिमुख कोण बनाती हैं।
  • अप्रतिच्छेदी रेखाएँ (Non-intersecting Lines) / समांतर रेखाएँ (Parallel Lines): दो रेखाएँ जो कभी एक दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं करतीं, चाहे उन्हें कितना भी बढ़ाया जाए।
  • इनके बीच की लंबवत दूरी हमेशा समान रहती है।
  • प्रतीक: \(l \parallel m\) का अर्थ है रेखा \(l\) रेखा \(m\) के समांतर है।

अभिगृहीत (Axiom): एक कथन जिसे बिना प्रमाण के सत्य मान लिया जाता है। प्रमेय (Theorem): एक कथन जिसे सिद्ध करने की आवश्यकता होती है।

अभिगृहीत 6.1 (रैखिक युग्म अभिगृहीत): यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दो आसन्न कोणों का योग \(180^\circ\) होता है।

अभिगृहीत 6.2 (रैखिक युग्म अभिगृहीत का विलोम): यदि दो आसन्न कोणों का योग \(180^\circ\) है, तो उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक रेखा बनाती हैं।

प्रमेय 6.1 (शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय): यदि दो रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।

గుర్తుంచుకోండి

अभिगृहीत और प्रमेय में अंतर महत्वपूर्ण है। अभिगृहीत सत्य माने जाते हैं, जबकि प्रमेय सिद्ध किए जाते हैं।

समांतर रेखाएँ और एक तिर्यक रेखा

जब एक तिर्यक रेखा (transversal) दो या दो से अधिक रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो विभिन्न प्रकार के कोण बनते हैं।

तिर्यक रेखा (Transversal): एक रेखा जो दो या दो से अधिक रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है।

तिर्यक रेखा द्वारा बनने वाले कोण:

  1. संगत कोण (Corresponding Angles):
  • तिर्यक रेखा के एक ही ओर और प्रतिच्छेदित रेखाओं के संगत स्थानों पर स्थित कोण।
  • उदाहरण: \(\angle 1\) और \(\angle 5\), \(\angle 2\) और \(\angle 6\), \(\angle 3\) और \(\angle 7\), \(\angle 4\) और \(\angle 8\).
  • अभिगृहीत 6.3 (संगत कोण अभिगृहीत): यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
  • अभिगृहीत 6.4 (संगत कोण अभिगृहीत का विलोम): यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि संगत कोणों का एक युग्म बराबर हो, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं।
  1. एकांतर अंतः कोण (Alternate Interior Angles):
  • तिर्यक रेखा के विपरीत ओर और प्रतिच्छेदित रेखाओं के अंदर स्थित कोण।
  • उदाहरण: \(\angle 3\) और \(\angle 6\), \(\angle 4\) और \(\angle 5\).
  • प्रमेय 6.2: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
  • प्रमेय 6.3 (विलोम): यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि एकांतर अंतः कोणों का एक युग्म बराबर हो, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं।
  1. एकांतर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles):
  • तिर्यक रेखा के विपरीत ओर और प्रतिच्छेदित रेखाओं के बाहर स्थित कोण।
  • उदाहरण: \(\angle 1\) और \(\angle 8\), \(\angle 2\) और \(\angle 7\).
  • प्रमेय: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर बाह्य कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
  1. तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण (Interior Angles on the Same Side of the Transversal) / क्रमागत अंतः कोण (Consecutive Interior Angles) / सह-अंतः कोण (Co-interior Angles):
  • तिर्यक रेखा के एक ही ओर और प्रतिच्छेदित रेखाओं के अंदर स्थित कोण।
  • उदाहरण: \(\angle 4\) और \(\angle 6\), \(\angle 3\) और \(\angle 5\).
  • प्रमेय 6.4: यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता है (योग \(180^\circ\) होता है)।
  • प्रमेय 6.5 (विलोम): यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का एक युग्म संपूरक हो, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं।

प्रमेय 6.6: वे रेखाएँ जो एक ही रेखा के समांतर हों, परस्पर समांतर होती हैं।

🧮సూత్రం

समांतर रेखाओं के गुण (सारांश):

  • समांतर रेखाओं को तिर्यक रेखा काटे तो:
  • संगत कोण बराबर होते हैं।
  • एकांतर अंतः कोण बराबर होते हैं।
  • एकांतर बाह्य कोण बराबर होते हैं।
  • तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण संपूरक होते हैं (योग \(180^\circ\))।

त्रिभुज का कोण योग गुण

एक त्रिभुज के तीनों अंतः कोणों का योग हमेशा \(180^\circ\) होता है।

प्रमेय 6.7 (त्रिभुज का कोण योग गुण): एक त्रिभुज के सभी कोणों का योग \(180^\circ\) होता है।

उपपत्ति (Proof):

  1. एक त्रिभुज ABC लीजिए।
  2. शीर्ष A से होकर भुजा BC के समांतर एक रेखा PQ खींचिए।
  3. चूंकि PQ \(\parallel\) BC और AB एक तिर्यक रेखा है, तो \(\angle PAB = \angle ABC\) (एकांतर अंतः कोण)।
  4. चूंकि PQ \(\parallel\) BC और AC एक तिर्यक रेखा है, तो \(\angle QAC = \angle ACB\) (एकांतर अंतः कोण)।
  5. रेखा PQ पर, \(\angle PAB + \angle BAC + \angle QAC = 180^\circ\) (रैखिक युग्म)।
  6. चरण 3 और 4 से मान रखने पर: \(\angle ABC + \angle BAC + \angle ACB = 180^\circ\).
  7. अतः, \(\angle A + \angle B + \angle C = 180^\circ\).

उपयोग: त्रिभुज के अज्ञात कोणों को ज्ञात करने में।

💡సూచన

त्रिभुज के कोण योग गुण का प्रमाण अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है। इसे अच्छी तरह से अभ्यास करें।

त्रिभुज का बहिष्कोण गुण

जब एक त्रिभुज की किसी भुजा को बढ़ाया जाता है, तो बनने वाला बहिष्कोण (exterior angle) उसके दोनों अभिमुख अंतः कोणों (interior opposite angles) के योग के बराबर होता है।

प्रमेय 6.8 (त्रिभुज का बहिष्कोण गुण): यदि एक त्रिभुज की एक भुजा को बढ़ाया जाए, तो इस प्रकार बना बहिष्कोण अपने दोनों अभिमुख अंतः कोणों के योग के बराबर होता है।

उपपत्ति (Proof):

  1. एक त्रिभुज ABC लीजिए और भुजा BC को D तक बढ़ाइए।
  2. बहिष्कोण \(\angle ACD\) बनता है।
  3. त्रिभुज के कोण योग गुण से: \(\angle ABC + \angle BAC + \angle ACB = 180^\circ\).
  4. रेखा BD पर, \(\angle ACB + \angle ACD = 180^\circ\) (रैखिक युग्म)।
  5. समीकरण 3 और 4 से, \(\angle ABC + \angle BAC + \angle ACB = \angle ACB + \angle ACD\).
  6. दोनों ओर से \(\angle ACB\) घटाने पर: \(\angle ABC + \angle BAC = \angle ACD\).
  7. अतः, बहिष्कोण \(\angle ACD\) = \(\angle A + \angle B\).

उपयोग: त्रिभुज के कोणों से संबंधित समस्याओं को हल करने में, विशेषकर जब बहिष्कोण दिए गए हों।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर बहिष्कोण को आसन्न अंतः कोण के साथ जोड़ देते हैं। याद रखें, बहिष्कोण = अभिमुख अंतः कोणों का योग, न कि आसन्न अंतः कोण का।

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