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AP · Class 9 · 🧮 Maths · Chapter 6

Lines and Angles

కోణాల రకాలుపూరక మరియు సంపూరక కోణాలుఆసన్న మరియు సరళ జత కోణాలుశీర్షాభిముఖ కోణాలుఖండన మరియు సమాంతర రేఖలుతిర్యగ్రేఖ ద్వారా ఏర్పడే కోణాలు

ఈ అధ్యాయం రేఖలు మరియు కోణాల ప్రాథమిక భావనలను పరిచయం చేస్తుంది. కోణాల రకాలు (పూరక, సంపూరక, ఆసన్న, సరళ జత, శీర్షాభిముఖ కోణాలు), ఖండన మరియు ఖండించని రేఖలు (సమాంతర రేఖలు), మరియు తిర్యగ్రేఖ సమాంతర రేఖలను ఖండించినప్పుడు ఏర్పడే కోణాల గురించి వివరిస్తుంది. ఈ భావనలు జ్యామితిలో బలమైన పునాదిని నిర్మిస్తాయి మరియు భవిష్యత్ అధ్యయనాలకు చాలా ముఖ్యమైనవి.

मूलभूत पद और परिभाषाएँ

ज्यामिति की नींव बिंदु, रेखा, किरण, और रेखाखंड हैं। इन्हें अच्छी तरह समझना आवश्यक है।

1.1 मूलभूत अवधारणाएँ

  • बिंदु (Point): एक सटीक स्थिति या स्थान। इसकी कोई विमा नहीं होती (न लंबाई, न चौड़ाई, न ऊँचाई)। इसे एक बड़े अक्षर से दर्शाया जाता है, जैसे P
  • रेखा (Line): बिंदुओं का एक संग्रह जो दोनों दिशाओं में अनंत तक फैला होता है। इसकी कोई निश्चित लंबाई नहीं होती और न ही कोई अंत बिंदु होता है। इसे \(\overleftrightarrow{AB}\) या एक छोटे अक्षर l से दर्शाया जाता है।
  • रेखाखंड (Line Segment): एक रेखा का भाग जिसके दो अंत बिंदु होते हैं। इसकी एक निश्चित लंबाई होती है। इसे \(\overline{AB}\) से दर्शाया जाता है।
  • किरण (Ray): एक रेखा का भाग जिसका एक अंत बिंदु होता है और यह एक दिशा में अनंत तक फैला होता है। इसे \(\overrightarrow{AB}\) से दर्शाया जाता है, जहाँ A प्रारंभिक बिंदु है।

1.2 संरेख और असंरेख बिंदु

  • संरेख बिंदु (Collinear Points): तीन या अधिक बिंदु जो एक ही सीधी रेखा पर स्थित हों।
  • असंरेख बिंदु (Non-collinear Points): तीन या अधिक बिंदु जो एक ही सीधी रेखा पर स्थित न हों।

1.3 कोण (Angle)

  • जब दो किरणें एक ही अंत बिंदु से प्रारंभ होती हैं, तो एक कोण बनता है।
  • किरणों को कोण की भुजाएँ (Arms) कहा जाता है और उभयनिष्ठ अंत बिंदु को शीर्ष (Vertex) कहा जाता है।

1.4 कोणों के प्रकार

| कोण का प्रकार | परिभाषा | माप | |---|---|---| | न्यून कोण (Acute Angle) | 0° से बड़ा और 90° से छोटा | \(0^\circ < \theta < 90^\circ\) | | सम कोण (Right Angle) | ठीक 90° | \(\theta = 90^\circ\) | | अधिक कोण (Obtuse Angle) | 90° से बड़ा और 180° से छोटा | \(90^\circ < \theta < 180^\circ\) | | ऋजु कोण (Straight Angle) | ठीक 180° | \(\theta = 180^\circ\) | | प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle) | 180° से बड़ा और 360° से छोटा | \(180^\circ < \theta < 360^\circ\) | | पूर्ण कोण (Complete Angle) | ठीक 360° | \(\theta = 360^\circ\) |

1.5 पूरक और संपूरक कोण

  • पूरक कोण (Complementary Angles): दो कोण जिनका योग 90° हो। यदि \(\angle A + \angle B = 90^\circ\), तो \(\angle A\) और \(\angle B\) पूरक कोण हैं।
  • संपूरक कोण (Supplementary Angles): दो कोण जिनका योग 180° हो। यदि \(\angle A + \angle B = 180^\circ\), तो \(\angle A\) और \(\angle B\) संपूरक कोण हैं।
ముఖ్యమైనది

एक बिंदु से अनंत रेखाएँ गुजर सकती हैं। एक रेखा खींचने के लिए न्यूनतम दो बिंदुओं की आवश्यकता होती है।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

किरण \(\overrightarrow{AB}\) और \(\overrightarrow{BA}\) अलग-अलग हैं। \(\overrightarrow{AB}\) का प्रारंभिक बिंदु A है, जबकि \(\overrightarrow{BA}\) का प्रारंभिक बिंदु B है।

प्रतिच्छेदी और अप्रतिच्छेदी रेखाएँ, कोणों के युग्म

रेखाएँ एक-दूसरे के सापेक्ष विभिन्न तरीकों से स्थित हो सकती हैं, जिससे विशिष्ट कोण युग्म बनते हैं।

2.1 प्रतिच्छेदी और अप्रतिच्छेदी रेखाएँ

  • प्रतिच्छेदी रेखाएँ (Intersecting Lines): दो रेखाएँ जो एक उभयनिष्ठ बिंदु पर एक-दूसरे को काटती हैं। इस उभयनिष्ठ बिंदु को प्रतिच्छेदन बिंदु कहा जाता है।
  • अप्रतिच्छेदी रेखाएँ (Non-intersecting Lines) / समांतर रेखाएँ (Parallel Lines): दो रेखाएँ जो कभी एक-दूसरे को नहीं काटती हैं, चाहे उन्हें कितना भी बढ़ाया जाए। उनके बीच की लंबवत दूरी हमेशा समान रहती है। इन्हें \(l \parallel m\) से दर्शाया जाता है।

2.2 कोणों के युग्म

  • आसन्न कोण (Adjacent Angles): दो कोण जिनमें एक उभयनिष्ठ शीर्ष और एक उभयनिष्ठ भुजा होती है, और उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत दिशा में होती हैं। वे एक-दूसरे को ओवरलैप नहीं करते हैं।
  • उदाहरण: \(\angle AOB\) और \(\angle BOC\) आसन्न कोण हैं यदि OB उभयनिष्ठ भुजा है और O उभयनिष्ठ शीर्ष है।
  • रैखिक युग्म (Linear Pair of Angles): आसन्न कोणों का एक युग्म जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनाती हैं।
  • रैखिक युग्म के कोणों का योग हमेशा 180° होता है (वे संपूरक होते हैं)।
  • उदाहरण: यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी है, तो बनने वाले दो आसन्न कोण एक रैखिक युग्म बनाते हैं।
  • शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles): जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो प्रतिच्छेदन बिंदु पर बनने वाले कोणों के दो युग्म शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं।
  • शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं।
  • उदाहरण: यदि रेखाएँ AB और CD बिंदु O पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो \(\angle AOC\) और \(\angle BOD\) शीर्षाभिमुख कोण हैं, तथा \(\angle AOD\) और \(\angle BOC\) शीर्षाभिमुख कोण हैं।
📖నిర్వచనం

आसन्न कोण: एक उभयनिष्ठ शीर्ष, एक उभयनिष्ठ भुजा, और गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत दिशा में।

గుర్తుంచుకోండి

सभी रैखिक युग्म आसन्न कोण होते हैं, लेकिन सभी आसन्न कोण रैखिक युग्म नहीं होते। रैखिक युग्म के लिए गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सीधी रेखा बनानी चाहिए।

अभिगृहीत और प्रमेय

ज्यामिति में, अभिगृहीत वे कथन होते हैं जिन्हें बिना प्रमाण के सत्य मान लिया जाता है, जबकि प्रमेय वे कथन होते हैं जिन्हें सिद्ध किया जा सकता है।

3.1 रैखिक युग्म अभिगृहीत (Linear Pair Axiom)

  • अभिगृहीत 1: यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी है, तो इस प्रकार बने दो आसन्न कोणों का योग 180° होता है।
  • यदि किरण OC रेखा AB पर खड़ी है, तो \(\angle AOC + \angle BOC = 180^\circ\). (रैखिक युग्म)
  • अभिगृहीत 2 (अभिगृहीत 1 का विलोम): यदि दो आसन्न कोणों का योग 180° है, तो उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक रेखा बनाती हैं।
  • यदि \(\angle AOC + \angle BOC = 180^\circ\), तो A, O, B संरेख बिंदु हैं, अर्थात् AB एक रेखा है।

3.2 शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय (Vertically Opposite Angles Theorem)

  • प्रमेय: यदि दो रेखाएँ एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं।
💡సూచన

रैखिक युग्म अभिगृहीत और शीर्षाभिमुख कोण प्रमेय का उपयोग अक्सर ज्यामितीय समस्याओं को हल करने और अन्य प्रमेयों को सिद्ध करने के लिए किया जाता है। इन्हें अच्छी तरह समझें।

समांतर रेखाएँ और तिर्यक रेखा

जब एक तिर्यक रेखा दो या अधिक रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो विभिन्न प्रकार के कोण बनते हैं जिनके बीच विशिष्ट संबंध होते हैं, खासकर यदि रेखाएँ समांतर हों।

4.1 तिर्यक रेखा (Transversal)

  • एक रेखा जो दो या अधिक रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तिर्यक रेखा कहलाती है।

4.2 तिर्यक रेखा द्वारा बनने वाले कोण

जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं (मान लीजिए l और m) को प्रतिच्छेद करती है, तो 8 कोण बनते हैं।

  • आंतरिक कोण (Interior Angles): रेखाओं l और m के बीच स्थित कोण।
  • \(\angle 3, \angle 4, \angle 5, \angle 6\)
  • बाह्य कोण (Exterior Angles): रेखाओं l और m के बाहर स्थित कोण।
  • \(\angle 1, \angle 2, \angle 7, \angle 8\)
  • संगत कोण (Corresponding Angles): तिर्यक रेखा के एक ही तरफ, एक आंतरिक और एक बाह्य कोण, जो आसन्न नहीं होते।
  • \((\angle 1, \angle 5), (\angle 2, \angle 6), (\angle 3, \angle 7), (\angle 4, \angle 8)\)
  • एकांतर आंतरिक कोण (Alternate Interior Angles): तिर्यक रेखा के विपरीत तरफ, दोनों आंतरिक कोण, जो आसन्न नहीं होते।
  • \((\angle 3, \angle 6), (\angle 4, \angle 5)\)
  • एकांतर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles): तिर्यक रेखा के विपरीत तरफ, दोनों बाह्य कोण, जो आसन्न नहीं होते।
  • \((\angle 1, \angle 8), (\angle 2, \angle 7)\)
  • क्रमागत आंतरिक कोण (Consecutive Interior Angles) / सह-आंतरिक कोण (Co-interior Angles): तिर्यक रेखा के एक ही तरफ, दोनों आंतरिक कोण।
  • \((\angle 4, \angle 6), (\angle 3, \angle 5)\)

4.3 समांतर रेखाओं के लिए अभिगृहीत और प्रमेय

जब एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो निम्नलिखित संबंध सत्य होते हैं:

  • अभिगृहीत 3 (संगत कोण अभिगृहीत): यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
  • विलोम: यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करती है कि संगत कोणों का एक युग्म बराबर है, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं।
  • प्रमेय 1 (एकांतर आंतरिक कोण प्रमेय): यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो एकांतर आंतरिक कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
  • विलोम: यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करती है कि एकांतर आंतरिक कोणों का एक युग्म बराबर है, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं।
  • प्रमेय 2 (क्रमागत आंतरिक कोण प्रमेय): यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो क्रमागत आंतरिक कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता है (अर्थात उनका योग 180° होता है)।
  • विलोम: यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करती है कि क्रमागत आंतरिक कोणों का एक युग्म संपूरक है, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं।
  • प्रमेय 3 (समांतर रेखाओं का गुण): वे रेखाएँ जो एक ही रेखा के समांतर होती हैं, आपस में भी समांतर होती हैं।
  • यदि \(l \parallel m\) और \(n \parallel m\), तो \(l \parallel n\).
ముఖ్యమైనది

ये अभिगृहीत और प्रमेय केवल तभी लागू होते हैं जब रेखाएँ समांतर हों। यदि रेखाएँ समांतर नहीं हैं, तो ये कोण संबंध सत्य नहीं होंगे।

💡సూచన

प्रमेयों के विलोम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। अक्सर, आपको यह सिद्ध करना होगा कि रेखाएँ समांतर हैं, जिसके लिए आपको कोण संबंधों का उपयोग करना होगा।

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