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AP · Class 8 · 📘 Social · Chapter 9

MAKING OF THE NATIONAL MOVEMENT 1860’S -1947

భారత జాతీయ కాంగ్రెస్మితవాదులు మరియు అతివాదులుబెంగాల్ విభజనగాంధీజీ ఉద్యమాలుసహాయ నిరాకరణోద్యమందండి మార్చ్

ఈ అధ్యాయం 1860ల నుండి 1947 వరకు భారత జాతీయ ఉద్యమం యొక్క ఆవిర్భావం మరియు పరిణామాన్ని వివరిస్తుంది. ఇది భారత జాతీయ కాంగ్రెస్ స్థాపన, మితవాదులు మరియు అతివాదుల పాత్ర, బెంగాల్ విభజన, గాంధీజీ ఆగమనం మరియు ఆయన ప్రారంభ ఉద్యమాలు, సహాయ నిరాకరణోద్యమం, సైమన్ కమిషన్, దండి మార్చ్, క్విట్ ఇండియా ఉద్యమం మరియు భారతదేశ విభజన వంటి కీలక సంఘటనలను చర్చిస్తుంది. జాతీయ ఉద్యమంలో వివిధ వర్గాల భాగస్వామ్యం మరియు ముఖ్య నాయకుల కృషిని అర్థం చేసుకోవడం ద్వారా విద్యార్థులు భారత స్వాతంత్ర్య పోరాటం యొక్క ప్రాముఖ్యతను తెలుసుకుంటారు.

1885 से पहले का काल और नरमपंथी (1885-1905)

राष्ट्रवाद का उदय: प्रारंभिक चरण (1860-1885)

  • जागरूकता का विकास: 1850 के बाद गठित राजनीतिक संघों ने ब्रिटिश शासन की अन्यायपूर्ण प्रकृति के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाई।
  • प्रमुख संगठन: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन से पहले विभिन्न शहरों में कई महत्वपूर्ण संगठन बने।
  • बंग भाषा प्रकाशिका सभा (1836): राजा राम मोहन राय द्वारा।
  • जमींदारी एसोसिएशन (1838): द्वारकानाथ टैगोर द्वारा।
  • ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी (इंग्लैंड, 1839): विलियम एडम द्वारा।
  • द बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी (1843): जॉर्ज थॉमसन द्वारा।
  • मद्रास नेटिव एसोसिएशन (1849): गजुला लक्ष्मी नरसु सेट्टी द्वारा।
  • ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन (1851): द्वारकानाथ टैगोर और जॉर्ज थॉमसन द्वारा।
  • बॉम्बे नेटिव एसोसिएशन (1852): दादाभाई नौरोजी, जगन्नाथ शंकर शेठ द्वारा।
  • द ईस्ट इंडिया एसोसिएशन (लंदन, 1866): दादाभाई नौरोजी द्वारा।
  • द पूना सार्वजनिक सभा (1867): महादेव गोविंद रानाडे द्वारा।
  • द इंडियन लीग (1875): शिशिर कुमार घोष द्वारा।
  • द इंडियन एसोसिएशन ऑफ कलकत्ता (1876): सुरेंद्रनाथ बनर्जी, आनंद मोहन बोस द्वारा।
  • द मद्रास महाजन सभा (1884): एम. वीरा राघवाचारी, पी. आनंद चार्युलु, सुब्रमण्यम अय्यर द्वारा।
  • बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन (1885): बदरुद्दीन तैयबजी, फिरोजशाह मेहता, के.टी. तेलंग द्वारा।

ब्रिटिश नीतियां और भारतीय प्रतिक्रिया

  • आर्म्स एक्ट (1878): भारतीयों को हथियार रखने से रोका गया। यह भारतीयों के आत्मरक्षा के अधिकार का हनन था।
  • वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878): सरकार को आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित करने वाले समाचार पत्रों की संपत्ति और प्रिंटिंग प्रेस जब्त करने की अनुमति दी। यह प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला था।
  • इल्बर्ट बिल (1883): ब्रिटिश या यूरोपीय व्यक्तियों पर भारतीय न्यायाधीशों द्वारा मुकदमा चलाने का प्रावधान था। यूरोपीय समुदाय के विरोध के कारण इसे वापस ले लिया गया, जिससे भारतीयों में असंतोष बढ़ा।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन (1885)

  • स्थान और तिथि: बॉम्बे, दिसंबर 1885।
  • प्रतिनिधि: 72 प्रतिनिधि।
  • संस्थापक: ए.ओ. ह्यूम (एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक)।
  • प्रमुख नेता: दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, बदरुद्दीन तैयबजी, डब्ल्यू.सी. बनर्जी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, रमेश चंद्र दत्त, सुब्रमण्यम अय्यर आदि।
  • उद्देश्य: भारतीयों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाना और ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ एकजुट आवाज उठाना।

प्रारंभिक राष्ट्रवादियों (नरमपंथियों) की मुख्य मांगें (1885-1905)

  • राजनीतिक मांगें:
  • सरकार और प्रशासन में भारतीयों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व
  • विधान परिषदों में अधिक प्रतिनिधित्व और परिषदों को अधिक शक्तियां देना।
  • प्रांतीय स्तर पर परिषदों की शुरुआत।
  • भारत में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करना।
  • न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना।
  • आर्म्स एक्ट को रद्द करना।
  • भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देना।
  • आर्थिक मांगें:
  • इंग्लैंड को धन के निकास को कम करना
  • भू-राजस्व में कमी।
  • सैन्य खर्च में कटौती।
  • सिंचाई के लिए अधिक धन उपलब्ध कराना।

नरमपंथियों की कार्यप्रणाली

  • जन जागरूकता: ब्रिटिश शासन की अन्यायपूर्ण प्रकृति के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करना।
  • प्रकाशन: समाचार पत्र प्रकाशित करना और लेख लिखना, यह दिखाना कि कैसे ब्रिटिश शासन ने भारत को बर्बाद किया।
  • याचिका, विरोध और प्रार्थना (3P's): अपनी मांगों को ब्रिटिश सरकार तक पहुंचाने के लिए इन तरीकों का इस्तेमाल किया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रस्ताव

  • नमक कर का विरोध।
  • विदेशों में भारतीय मजदूरों की दुर्दशा।
  • वनवासियों की पीड़ा।
  • ब्रिटिश शासन के कारण गरीबी और अकाल।
📖నిర్వచనం

सार्वभौम (Sovereign): बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता।

ముఖ్యమైనది

दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" में 'धन के निकास' (Drain of Wealth) सिद्धांत का उल्लेख किया।

💡సూచన

नरमपंथियों की '3 P's' (Petition, Protest, Prayer) कार्यप्रणाली को याद रखें। यह उनकी मांगों को रखने का मुख्य तरीका था।

गरमपंथी काल (1905-1919)

नरमपंथियों का विरोध और गरमपंथियों का उदय

  • 1890 के दशक के बाद, कई नेताओं ने नरमपंथियों की कार्यप्रणाली को अप्रभावी माना।
  • उन्होंने अधिक आक्रामक तरीकों और पूर्ण स्वराज के लक्ष्य की वकालत की।
  • प्रमुख गरमपंथी नेता:
  • बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र): "स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!" का नारा दिया। केसरी समाचार पत्र का संपादन किया।
  • बिपिन चंद्र पाल (बंगाल)
  • लाला लाजपत राय (पंजाब)
  • इन्हें सामूहिक रूप से "लाल-बाल-पाल" के नाम से जाना जाता है।

बंगाल का विभाजन (1905)

  • घोषणा: 1905 में वायसराय कर्जन द्वारा।
  • कारण:
  • ब्रिटिश तर्क: प्रशासनिक सुविधा के लिए बंगाल का विभाजन (उस समय बंगाल ब्रिटिश भारत का सबसे बड़ा प्रांत था, जिसमें बिहार और उड़ीसा के कुछ हिस्से शामिल थे)।
  • वास्तविक मकसद: बंगाली राजनेताओं के प्रभाव को कम करना और बंगाली लोगों को विभाजित करना ('फूट डालो और राज करो' की नीति)।
  • प्रभाव: पूरे भारत में लोगों को आक्रोशित किया। कांग्रेस के सभी वर्गों (नरमपंथी और गरमपंथी) ने इसका विरोध किया।

स्वदेशी आंदोलन

  • उत्पत्ति: बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुआ।
  • उद्देश्य:
  • ब्रिटिश शासन का विरोध करना।
  • आत्मनिर्भरता, स्वदेशी उद्यम, राष्ट्रीय शिक्षा और भारतीय भाषाओं के उपयोग के विचारों को प्रोत्साहित करना।
  • ब्रिटिश संस्थानों और वस्तुओं का बहिष्कार।
  • कार्यप्रणाली:
  • बड़े पैमाने पर सार्वजनिक सभाएँ और प्रदर्शन।
  • ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार और विदेशी कपड़ों की होली जलाना।
  • कुछ व्यक्तियों ने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए "क्रांतिकारी हिंसा" की भी वकालत की।
  • अन्य नाम: डेल्टा आंध्र में इसे वंदेमातरम आंदोलन के नाम से जाना जाता था।
  • परिणाम: लंबे संघर्षों के बाद, 1911 में बंगाल का विभाजन रद्द कर दिया गया।

मुस्लिम लीग का गठन (1906)

  • गठन: 1906 में ढाका में मुस्लिम जमींदारों और नवाबों के एक समूह द्वारा।
  • उद्देश्य:
  • मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना।
  • बंगाल के विभाजन का समर्थन किया।
  • मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचक मंडल की मांग की, जिसे सरकार ने 1909 में मान लिया।

कांग्रेस का विभाजन (सूरत, 1907)

  • कारण: नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच कार्यप्रणाली और लक्ष्यों को लेकर मतभेद।
  • परिणाम: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 1907 में सूरत अधिवेशन में विभाजित हो गई।

महत्वपूर्ण घटनाएँ

  • 1905: बंगाल का विभाजन।
  • 1906: मुस्लिम लीग का गठन।
  • 1907: कांग्रेस पार्टी का विभाजन (सूरत)।
  • 1909: परिषदों में मुसलमानों के लिए विशेष सीटें आरक्षित की गईं।
  • 1911: बंगाल विभाजन का रद्द होना।
  • 1915: कांग्रेस के दोनों गुटों (नरमपंथी और गरमपंथी) का पुनर्मिलन।
  • 1916: लखनऊ समझौता (कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच)।

लखनऊ समझौता (1916)

  • हस्ताक्षर: कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच।
  • उद्देश्य: देश में प्रतिनिधि सरकार के लिए मिलकर काम करना।
📖నిర్వచనం

स्वदेशी आंदोलन: 'स्वदेशी' शब्द का अर्थ है अपने देश के उत्पादों और सेवाओं का उपयोग करना। इस आंदोलन ने विदेशी वस्तुओं और ब्रिटिश संस्थानों के बहिष्कार की वकालत की।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

अक्सर छात्र बंगाल विभाजन के ब्रिटिश तर्क (प्रशासनिक सुविधा) और वास्तविक मकसद (फूट डालो और राज करो) के बीच भ्रमित हो जाते हैं। दोनों को स्पष्ट रूप से समझें।

గుర్తుంచుకోండి

गरमपंथियों को नरमपंथियों द्वारा 'राजनीतिक भिखारी' कहा जाता था क्योंकि वे अपनी मांगों के लिए ब्रिटिश सरकार से 'प्रार्थना' करते थे।

जन आंदोलन से पहले (1918-1920)

जन राष्ट्रवाद का विकास (1919 के बाद)

  • 1919 के बाद ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष धीरे-धीरे एक जन आंदोलन बन गया।
  • विभिन्न वर्गों की भागीदारी:
  • किसान
  • आदिवासी
  • छात्र
  • महिलाएं
  • कारखाना मजदूर
  • व्यापारी समूह

भागीदारी के कारण

  • प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव:
  • प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) ने भारत में आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को बदल दिया।
  • ब्रिटिश सरकार ने व्यक्तिगत आय और व्यावसायिक मुनाफे पर कर बढ़ा दिए।
  • गाँवों पर सैनिकों की आपूर्ति के लिए दबाव डाला गया।
  • युद्ध के कारण वस्तुओं की कीमतें दोगुनी हो गईं, जिससे आम लोगों की कठिनाइयाँ बढ़ गईं।
  • रूसी क्रांति (1917) की प्रेरणा:
  • रूसी क्रांति ने किसानों और श्रमिकों के संघर्षों को उजागर किया, जिससे भारतीय राष्ट्रवादियों को प्रेरणा मिली।

महात्मा गांधी का आगमन (1915)

  • भारत वापसी: गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।
  • दक्षिण अफ्रीका में अनुभव:
  • 1895 में, उन्होंने अन्य भारतीयों के साथ मिलकर नटाल कांग्रेस की स्थापना की, ताकि नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लड़ा जा सके।
  • उनके दक्षिण अफ्रीकी अभियानों ने उन्हें विभिन्न प्रकार के भारतीयों के संपर्क में लाया: हिंदू, मुस्लिम, पारसी और ईसाई; गुजराती, तमिल और उत्तर भारतीय; और उच्च वर्ग के व्यापारी, वकील और मजदूर।
  • उन्होंने सत्याग्रह (अहिंसक प्रतिरोध) की अपनी अनूठी पद्धति विकसित की।

महात्मा गांधी के शुरुआती हस्तक्षेप

  • चंपारण सत्याग्रह (1916): बिहार के चंपारण क्षेत्र में किसानों के समर्थन में आंदोलन, जो जबरन नील की खेती के खिलाफ था। यह भारत में गांधीजी का पहला सफल सत्याग्रह था।
  • खेड़ा सत्याग्रह (1918): गुजरात के खेड़ा क्षेत्र में किसानों का आंदोलन, जो प्लेग और अकाल के कारण करों से छूट की मांग कर रहे थे।
  • अहमदाबाद मिल हड़ताल (मार्च, 1918): कपड़ा मिल के मजदूरों ने आर्थिक न्याय के लिए संघर्ष किया जब मिल मालिकों ने उनके प्लेग बोनस को रोक दिया था।

रॉलेट सत्याग्रह (1919)

  • रॉलेट एक्ट (1919): 'अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम', जिसे लोकप्रिय रूप से रॉलेट एक्ट के नाम से जाना जाता है, 1919 में पारित किया गया।
  • इस अधिनियम के तहत, किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे और न्यायिक समीक्षा के कैद किया जा सकता था।
  • इसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाया और पुलिस शक्तियों को मजबूत किया।
  • विरोध: महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और अन्य ने इस अधिनियम की आलोचना "शैतानी" और अत्याचारी के रूप में की।
  • सत्याग्रह: गांधीजी ने भारतीय लोगों से 6 अप्रैल 1919 को "अपमान और प्रार्थना" के दिन के रूप में मनाने का आह्वान किया।
  • परिणाम: अप्रैल 1919 में देश भर में कई प्रदर्शन और हड़तालें हुईं, और सरकार ने उन्हें दबाने के लिए क्रूर उपाय किए। रॉलेट सत्याग्रह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ पहला अखिल भारतीय संघर्ष साबित हुआ।

जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)

  • घटना: 13 अप्रैल 1919 को, अमृतसर में वार्षिक बैसाखी मेले के दौरान, रॉलेट एक्ट और सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में जलियांवाला बाग में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए।
  • जनरल डायर की क्रूरता: ब्रिटिश ब्रिगेडियर जनरल आर.ई.एच. डायर ने लोगों को घेर लिया और अपनी टुकड़ियों के साथ भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया।
  • परिणाम: सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। इस अमानवीय कृत्य को जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है। सभी राष्ट्रीय नेताओं ने इस दिन को 'अमानवीय दिवस' या 'काला दिवस' के रूप में मनाया।
  • रवींद्रनाथ टैगोर का त्याग: रवींद्रनाथ टैगोर ने जलियांवाला बाग की क्रूरता के विरोध में अपनी नाइटहुड की उपाधि त्याग दी।
📖నిర్వచనం

नाइटहुड: ब्रिटिश क्राउन द्वारा असाधारण व्यक्तिगत उपलब्धि या सार्वजनिक सेवा के लिए दिया जाने वाला सम्मान। रवींद्रनाथ टैगोर को यह सम्मान मिला था।

ముఖ్యమైనది

गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में नटाल कांग्रेस की स्थापना की थी, जो उनके प्रारंभिक राजनीतिक कार्यों में से एक था।

💡సూచన

गांधीजी के भारत में शुरुआती तीन सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद) का क्रम और उनके पीछे के कारण महत्वपूर्ण हैं।

1920 के दशक में राष्ट्रीय आंदोलन

खिलाफत आंदोलन (1920)

  • पृष्ठभूमि: प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के बाद, 1920 में ब्रिटिशों ने तुर्की के सुल्तान या खलीफा पर एक कठोर संधि (वर्साय संधि) थोप दी।
  • भारतीय मुसलमानों की प्रतिक्रिया: भारतीय मुसलमान चाहते थे कि खलीफा को पूर्ववर्ती ओटोमन साम्राज्य में मुस्लिम पवित्र स्थलों पर नियंत्रण बनाए रखने की अनुमति दी जाए।
  • आंदोलन: मोहम्मद अली और शौकत अली के नेतृत्व में खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य खलीफा के सम्मान और शक्ति को बहाल करना था।
  • गांधीजी का समर्थन: गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया और कांग्रेस से "पंजाब के गलत कामों" (जलियांवाला बाग हत्याकांड), खिलाफत के गलत काम और स्वराज की मांग के खिलाफ अभियान चलाने का आग्रह किया। यह हिंदू-मुस्लिम एकता का एक महत्वपूर्ण क्षण था।

असहयोग आंदोलन (1920-1922)

  • शुरुआत: सितंबर 1920 में गांधीजी द्वारा शुरू किया गया।
  • उद्देश्य: ब्रिटिश सरकार के साथ असहयोग करके स्वराज प्राप्त करना।
  • मुख्य विशेषताएं:
  • हजारों छात्रों ने सरकारी नियंत्रण वाले स्कूलों और कॉलेजों को छोड़ दिया।
  • मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास, सी. राजगोपालाचारी और आसफ अली जैसे कई वकीलों ने अपनी वकालत छोड़ दी।
  • ब्रिटिश उपाधियाँ लौटा दी गईं।
  • विधानमंडलों का बहिष्कार किया गया।
  • लोगों ने विदेशी कपड़ों की सार्वजनिक होली जलाई।
  • कई मामलों में लोगों ने अहिंसक रूप से ब्रिटिश शासन का विरोध किया।

'जनता के महात्मा' और असहयोग आंदोलन

  • गांधीजी की छवि: कई लोगों ने गांधीजी को एक मसीहा के रूप में देखा, जो उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे।
  • विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव:
  • असम: चाय बागान के मजदूरों ने "गांधी महाराज की जय" के नारे लगाए और अपनी मजदूरी बढ़ाने की मांग की।
  • प्रतापगढ़ (संयुक्त प्रांत): किसानों ने अवैध बेदखली को रोकने में सफलता प्राप्त की और महसूस किया कि गांधीजी ने उनके लिए यह मांग जीती है।
  • गुंटूर जिला (आंध्र प्रदेश): आदिवासी और गरीब किसानों ने चराई शुल्क को समाप्त करने की मांग की।
  • खेड़ा (गुजरात): पाटीदार किसानों ने उच्च भू-राजस्व के खिलाफ आंदोलन किया।
  • पंजाब: सिखों ने भ्रष्ट महंतों को हटाने के लिए आंदोलन किया।

असहयोग आंदोलन का स्थगन (फरवरी 1922)

  • चौरी-चौरा घटना: 2 फरवरी 1922 को, चौरी-चौरा (उत्तर प्रदेश) में मांस की कीमतों और शराब के खिलाफ विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस ने गोलीबारी की।
  • हिंसक प्रतिक्रिया: भीड़ ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जिसमें बाईस पुलिसकर्मी मारे गए।
  • गांधीजी का निर्णय: हिंसा की इस घटना से दुखी होकर, महात्मा गांधी ने फरवरी 1922 में असहयोग आंदोलन को अचानक स्थगित कर दिया।

क्रांतिकारी राष्ट्रवाद

  • हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA):
  • 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव और अन्य द्वारा स्थापित।
  • उद्देश्य: श्रमिकों और किसानों की क्रांति के माध्यम से औपनिवेशिक शासन और धनी शोषक वर्गों के खिलाफ लड़ना।
  • प्रमुख घटनाएँ:
  • भगत सिंह, आजाद और राजगुरु ने सॉन्डर्स की हत्या की, जो लाला लाजपत राय की मृत्यु का कारण बनी लाठीचार्ज में शामिल था।
  • 8 अप्रैल 1929 को, भगत सिंह और बी.के. दत्त ने केंद्रीय विधान सभा में बम फेंका। उनका उद्देश्य "बहरों को सुनाना" था।
  • भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को फाँसी दे दी गई।

1920 के दशक के मध्य की अन्य घटनाएँ

  • स्वराज पार्टी (1923): सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा गठित, जिन्होंने महात्मा के असहयोग आंदोलन के स्थगन का विरोध किया था।
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) (1925): केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर में हिंदू संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए स्थापित एक हिंदू संगठन।
  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) (1925): एम.एन. रॉय और अन्य द्वारा कानपुर में स्थापित।

साइमन कमीशन (1927)

  • गठन: 1927 में ब्रिटिश सरकार ने भारत के राजनीतिक भविष्य का फैसला करने के लिए लॉर्ड साइमन के नेतृत्व में एक आयोग भेजने का फैसला किया।
  • विरोध: आयोग में कोई भारतीय प्रतिनिधि नहीं था, इसलिए सभी राजनीतिक समूहों ने इसका बहिष्कार करने का फैसला किया।
  • नारे: जब आयोग भारत आया, तो उसका स्वागत "साइमन गो बैक" के नारों वाले प्रदर्शनों से हुआ।
📖నిర్వచనం

खिलाफत आंदोलन: प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खलीफा के सम्मान और शक्ति को बहाल करने के लिए भारतीय मुसलमानों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन।

ముఖ్యమైనది

असहयोग आंदोलन पहला जन-आधारित आंदोलन था जिसने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी और समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट किया।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

चौरी-चौरा घटना के कारण असहयोग आंदोलन को स्थगित किया गया था। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था।

1930 के दशक में राष्ट्रीय आंदोलन

पूर्ण स्वराज की मांग (1929)

  • लाहौर अधिवेशन (1929): जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस ने लाहौर में पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) के लिए लड़ने का प्रस्ताव पारित किया।
  • स्वतंत्रता दिवस: 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में "स्वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाया गया। इसी कारण 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

दांडी मार्च / सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)

  • नमक कानून का उल्लंघन: 1930 में, गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने के लिए एक मार्च का नेतृत्व करने की घोषणा की। इस कानून के अनुसार, नमक के निर्माण और बिक्री पर राज्य का एकाधिकार था।
  • दांडी यात्रा: गांधीजी और उनके अनुयायियों ने साबरमती से कच्छ तट पर स्थित दांडी गाँव तक 240 मील से अधिक की यात्रा की।
  • नमक बनाना: उन्होंने समुद्र तट पर पाए जाने वाले प्राकृतिक नमक को इकट्ठा करके और समुद्री जल को उबालकर नमक बनाकर सरकारी कानून तोड़ा।
  • भागीदारी: किसान, आदिवासी और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
  • सरकारी प्रतिक्रिया: सरकार ने शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों के खिलाफ क्रूर कार्रवाई की। हजारों को जेल भेज दिया गया।
  • आंदोलन का नाम: इस आंदोलन को सविनय अवज्ञा आंदोलन या नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है।

गोलमेज सम्मेलन (1930-1932)

  • ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के संवैधानिक सुधारों पर चर्चा करने के लिए आयोजित किए गए।
  • कांग्रेस ने पहले गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया। गांधीजी ने गांधी-इरविन समझौते के बाद दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।

पूना समझौता (1932)

  • पृष्ठभूमि: ब्रिटिश सरकार ने सांप्रदायिक पुरस्कार (Communal Award) की घोषणा की, जिसमें दलितों के लिए अलग निर्वाचक मंडल का प्रावधान था।
  • समझौता: महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच पूना समझौता हुआ, जिसने दलितों के लिए अलग निर्वाचक मंडल के बजाय आरक्षित सीटों का प्रावधान किया।

भारत सरकार अधिनियम, 1935

  • प्रावधान: ब्रिटिश संसद द्वारा 1935 में पारित एक अधिनियम, जिसने संघीय राज्यों की स्थापना और द्वैध शासन को कम करने का प्रावधान किया।
  • प्रांतीय स्वायत्तता: इसने प्रांतों को अपेक्षाकृत स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की।
  • भारतीय संविधान का आधार: यह भारतीय संविधान का मुख्य स्रोत है।

प्रांतीय विधानमंडलों के चुनाव (1937)

  • भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत 1937 में प्रांतीय विधानमंडलों के चुनाव हुए।
  • कांग्रेस ने अधिकांश प्रांतों में जीत हासिल की और सरकारें बनाईं।

द्वितीय विश्व युद्ध (1939)

  • सितंबर 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ गया।
  • ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों से परामर्श किए बिना भारत को युद्ध में शामिल कर लिया, जिससे कांग्रेस ने विरोध किया और प्रांतीय सरकारों से इस्तीफा दे दिया।

अनसुने व्यक्तित्व

  • अंबा बाई: 1886 में मैसूर में जन्मी। बारह साल की उम्र में शादी हुई। सोलह साल की उम्र में विधवा हो गईं, उन्होंने उडिपी में विदेशी कपड़े और शराब की दुकानों पर धरना दिया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
  • वीर लखन नायक: दक्षिण ओडिशा के एक आदिवासी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता। वह भूमिया जनजाति से संबंधित थे। नायक ने वन अधिकारियों द्वारा शोषण के खिलाफ विद्रोहियों को सफलतापूर्वक संगठित किया। 25 अगस्त 1942 को पापरंडी, नवरंगपुर में पुलिस फायरिंग में उन्नीस लोग मारे गए। इसके बाद नायक को फाँसी दे दी गई।
  • सरोजिनी नायडू: एक राजनीतिक कार्यकर्ता और कवयित्री। स्वतंत्रता के बाद संयुक्त प्रांत की पहली राज्यपाल के रूप में कार्य किया। 1920 के दशक की शुरुआत से राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय, नायडू दांडी मार्च की एक महत्वपूर्ण नेता थीं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1925) की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
  • बाजी मोहम्मद: नवरंगपुर, ओडिशा के अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों में से एक। उन्होंने 20,000 लोगों को राष्ट्रीय संघर्ष में शामिल होने के लिए संगठित किया। उन्होंने कई बार सत्याग्रह किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया।
📖నిర్వచనం

दांडी मार्च: इसे नमक मार्च या दांडी सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था। यह मार्च साबरमती आश्रम से कच्छ तट पर स्थित दांडी गाँव तक चला (12 मार्च 1930 से 5 अप्रैल 1930)।

ముఖ్యమైనది

भारत सरकार अधिनियम, 1935 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण आधार है।

గుర్తుంచుకోండి

पूर्ण स्वराज की मांग (1929) ने स्वतंत्रता आंदोलन के लक्ष्य को आत्म-शासन से पूर्ण स्वतंत्रता में बदल दिया।

1940 के दशक में राष्ट्रीय आंदोलन

सुभाष चंद्र बोस और INA (भारतीय राष्ट्रीय सेना)

  • जन्म: 23 जनवरी 1897 को कटक में।
  • कांग्रेस अध्यक्ष: 1938 में INC के अध्यक्ष चुने गए।
  • महानिदेशक दृष्टिकोण: ब्रिटिश से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए सैन्य दृष्टिकोण अपनाना चाहते थे।
  • फॉरवर्ड ब्लॉक: फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी की स्थापना की।
  • INA का गठन: मोहन सिंह ने 1942 में INA (आजाद हिंद फौज) की स्थापना की, जिसे 1943 में सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिया गया। उन्होंने सिंगापुर में भारतीय सैनिकों के साथ INA का गठन किया।
  • द्वितीय विश्व युद्ध में भूमिका: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, उन्होंने जर्मनी और जापान की मदद से स्वतंत्रता प्राप्त करने की कोशिश की। उन्होंने अपनी सेना के साथ पूर्वोत्तर भारत में एक स्वतंत्र सरकार स्थापित करने की कोशिश की।
  • मृत्यु: 1945 में एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, जबकि वे ब्रिटिशों से बचने की कोशिश कर रहे थे।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

  • शुरुआत: महात्मा गांधी द्वारा 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे में शुरू किया गया।
  • नारा: गांधीजी ने लोगों से कहा, "करो या मरो" (do or die) ब्रिटिशों से लड़ने के अपने प्रयास में - लेकिन आपको अहिंसक रूप से लड़ना होगा।
  • गिरफ्तारियां: गांधीजी और अन्य नेताओं को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन आंदोलन फैल गया।
  • परिणाम: 1943 के अंत तक 90,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, और पुलिस फायरिंग में लगभग 1,000 लोग मारे गए।

स्वतंत्रता की ओर

  • ब्रिटिशों का एहसास: भारत छोड़ो आंदोलन के बाद, ब्रिटिशों को एहसास हुआ कि वे भारत पर लंबे समय तक शासन नहीं कर सकते।
  • कैबिनेट मिशन (1946): स्वतंत्रता प्रदान करने की पुष्टि के लिए कैबिनेट मिशन नियुक्त किया गया।
  • संविधान सभा: मिशन के अनुसार, 1946 में संविधान सभा के लिए चुनाव कराए गए।
  • स्वतंत्रता और विभाजन (1947): अंततः 15 अगस्त 1947 को हमारे देश को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली, लेकिन यह विभाजन के दर्द और हिंसा के साथ मिली।

विभाजन के कारण

  • कैबिनेट मिशन की विफलता: कैबिनेट मिशन भारत के लिए एक स्वीकार्य समाधान खोजने में विफल रहा।
  • सांप्रदायिक तनाव: कुछ हिंदू और मुस्लिम समूहों के बीच बढ़ते सांप्रदायिक तनाव।
  • माउंटबेटन योजना: अंततः देश को माउंटबेटन योजना के तहत भारत और पाकिस्तान में विभाजित किया गया।
  • मुस्लिम लीग की भूमिका:
  • 1906 में मुस्लिम लीग का गठन।
  • 1909 में परिषदों में मुसलमानों के लिए विशेष सीटें आरक्षित की गईं।
  • ब्रिटिशों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति।
  • 1937 के चुनावों में संयुक्त प्रांत में संयुक्त कांग्रेस-लीग सरकार बनाने की लीग की इच्छा को अस्वीकार करना।
  • 1946 के चुनावों में मुसलमानों के लिए आरक्षित सीटों पर लीग की सफलता।
  • प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (16 अगस्त 1946): अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने भारत से ब्रिटिशों के बाहर निकलने के बाद एक अलग मुस्लिम मातृभूमि के लिए सीधी कार्रवाई करने का फैसला किया। इसे कलकत्ता किलिंग्स के नाम से भी जाना जाता है।

प्रमुख व्यक्तित्व

  • मौलाना अबुल कलाम आजाद:
  • मक्का में जन्मे। गांधीवादी आंदोलनों में सक्रिय भागीदार।
  • हिंदू-मुस्लिम एकता के कट्टर समर्थक। जिन्ना के द्वि-राष्ट्र सिद्धांत का विरोध किया।
  • भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया।
  • चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी):
  • एक अनुभवी राष्ट्रवादी और दक्षिण में नमक सत्याग्रह के नेता।
  • 1946 की अंतरिम सरकार के सदस्य के रूप में कार्य किया।
  • स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल।
  • मोहम्मद अली जिन्ना:
  • 1920 तक हिंदू-मुस्लिम एकता के राजदूत।
  • लखनऊ समझौते को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1934 के बाद, पाकिस्तान की मांग के प्रमुख प्रवक्ता बने।
  • पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य किया।
  • खान अब्दुल गफ्फार खान (बादशाह खान / सीमांत गांधी):
  • उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत के पठान नेता।
  • खुदाई खिदमतगारों के संस्थापक, पठानों के बीच एक शक्तिशाली अहिंसक आंदोलन।
  • भारत के विभाजन के कट्टर विरोधी।
  • सरदार वल्लभभाई पटेल (भारत के लौह पुरुष):
  • नाडियाड, गुजरात के एक गरीब किसान परिवार से थे।
  • 1918 से स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख आयोजक।
  • 1931 में कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
  • 1945-47 के दौरान स्वतंत्रता के लिए वार्ताओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • स्वतंत्रता के बाद रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • पहले मंत्रिमंडल में उप प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया।
📖నిర్వచనం

प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (Direct Action Day): अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त 1946 को भारत से ब्रिटिशों के बाहर निकलने के बाद एक अलग मुस्लिम मातृभूमि के लिए सीधी कार्रवाई करने का फैसला किया। इसे कलकत्ता किलिंग्स के नाम से भी जाना जाता है।

ముఖ్యమైనది

सुभाष चंद्र बोस का 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारा युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा था।

💡సూచన

भारत छोड़ो आंदोलन, INA और विभाजन के कारण बोर्ड परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इन पर कारण-प्रभाव विश्लेषण के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

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