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AP · Class 7 · 🧮 Maths · Chapter 8

Rational Numbers

అకరణీయ సంఖ్యల నిర్వచనంధనాత్మక మరియు రుణాత్మక అకరణీయ సంఖ్యలుతుల్య అకరణీయ సంఖ్యలుసంఖ్యారేఖపై అకరణీయ సంఖ్యలుఅకరణీయ సంఖ్యల పోలికఅకరణీయ సంఖ్యలపై కార్యకలాపాలు

అకరణీయ సంఖ్యలు అనే అధ్యాయం విద్యార్థులకు సంఖ్యల ప్రపంచంలో ఒక ముఖ్యమైన భావనను పరిచయం చేస్తుంది. ఈ అధ్యాయంలో, మీరు అకరణీయ సంఖ్యల అర్థం, భిన్నాలు మరియు అకరణీయ సంఖ్యల మధ్య వ్యత్యాసం, ధనాత్మక మరియు రుణాత్మక అకరణీయ సంఖ్యలను గుర్తించడం నేర్చుకుంటారు. సంఖ్యారేఖపై అకరణీయ సంఖ్యలను ఎలా సూచించాలి, రెండు అకరణీయ సంఖ్యల మధ్య అకరణీయ సంఖ్యలను కనుగొనడం మరియు వాటిని ఆరోహణ లేదా అవరోహణ క్రమంలో అమర్చడం వంటివి కూడా తెలుసుకుంటారు. అదనంగా, అకరణీయ సంఖ్యలపై కూడిక, తీసివేత, గుణకారం మరియు భాగహారం వంటి ప్రాథమిక గణిత కార్యకలాపాలను ఎలా నిర్వహించాలో కూడా ఈ అధ్యాయం వివరిస్తుంది. ఈ భావనలు భవిష్యత్తులో మరింత సంక్లిష్ట గణిత సమస్యలను పరిష్కరించడానికి పునాదిని ఏర్పరుస్తాయి.

परिमेय संख्याएँ: परिभाषा और प्रकार

परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जिन्हें \(p/q\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\) है।

  • पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers): 0 और सभी धनात्मक पूर्णांक (जैसे 0, 1, 2, 3...). ये बिना भिन्न या दशमलव वाले होते हैं।
  • पूर्णांक (Integers): सभी पूर्ण संख्याएँ और उनके ऋणात्मक (जैसे ...-3, -2, -1, 0, 1, 2, 3...). इनमें भिन्न या दशमलव शामिल नहीं होते।
  • भिन्न (Fractions): एक संख्यात्मक मान जो एक पूर्ण का हिस्सा होता है (जैसे \(1/2\), \(3/4\)). भिन्न कभी ऋणात्मक नहीं होते।

परिमेय संख्या और भिन्न में अंतर

  • भिन्न: हमेशा धनात्मक होते हैं। उदाहरण: \(1/2\), \(3/5\).
  • परिमेय संख्याएँ: धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती हैं। उदाहरण: \(-1/3\), \(5/6\), \(-7/8\).

हर भिन्न एक परिमेय संख्या होती है, लेकिन हर परिमेय संख्या एक भिन्न नहीं होती (ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ भिन्न नहीं होतीं)।

परिमेय संख्याओं के प्रकार

  • धनात्मक परिमेय संख्याएँ: यदि अंश और हर दोनों धनात्मक हों या दोनों ऋणात्मक हों।
  • उदाहरण: \(1/5\), \(3/17\), \(-16/-2\) (जो \(16/2\) के बराबर है)।
  • ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ: यदि अंश या हर में से कोई एक ऋणात्मक हो।
  • उदाहरण: \(-7/8\), \(5/-9\) (जो \(-5/9\) के बराबर है)।
📖నిర్వచనం

परिमेय संख्या (Rational Number): एक संख्या जिसे \(p/q\) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं और \(q \neq 0\) है।

ముఖ్యమైనది

याद रखें, हर भिन्न एक परिमेय संख्या है, लेकिन हर परिमेय संख्या एक भिन्न नहीं है (क्योंकि भिन्न ऋणात्मक नहीं हो सकते)।

समतुल्य परिमेय संख्याएँ

समतुल्य परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ होती हैं जो अलग-अलग अंश और हर होने पर भी मान में बराबर होती हैं।

  • उदाहरण: \(1/2\) और \(3/6\) समतुल्य हैं, क्योंकि \(3/6\) को सरल करने पर \(1/2\) प्राप्त होता है।

समतुल्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की विधि

किसी भी परिमेय संख्या के समतुल्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने के लिए, हम अंश और हर दोनों को एक ही गैर-शून्य संख्या से गुणा या भाग करते हैं।

उदाहरण: \(7/5\) के समतुल्य परिमेय संख्याएँ ज्ञात करें।

  • अंश और हर को 2 से गुणा करने पर: \((7 \times 2) / (5 \times 2) = 14/10\)
  • अंश और हर को 3 से गुणा करने पर: \((7 \times 3) / (5 \times 3) = 21/15\)
  • अंश और हर को -1 से गुणा करने पर: \((7 \times -1) / (5 \times -1) = -7/-5\)

इस प्रकार, \(14/10\), \(21/15\), \(-7/-5\) आदि \(7/5\) के समतुल्य परिमेय संख्याएँ हैं।

📖నిర్వచనం

समतुल्य परिमेय संख्याएँ (Equivalent Rational Numbers): वे परिमेय संख्याएँ जिनका मान समान होता है, भले ही उनके अंश और हर भिन्न हों।

संख्या रेखा पर परिमेय संख्याओं का निरूपण

संख्या रेखा पर परिमेय संख्याओं को निरूपित करने के लिए, हम एक रेखा खींचते हैं और उस पर शून्य (0) को चिह्नित करते हैं।

  • धनात्मक परिमेय संख्याएँ: 0 के दाईं ओर निरूपित की जाती हैं।
  • ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ: 0 के बाईं ओर निरूपित की जाती हैं।

निरूपण के चरण

  1. संख्या रेखा खींचें: एक सीधी रेखा खींचें और उस पर 0 चिह्नित करें।
  2. इकाई अंतराल निर्धारित करें: पूर्णांकों (जैसे 1, 2, -1, -2) को समान दूरी पर चिह्नित करें।
  3. हर के अनुसार विभाजन: यदि परिमेय संख्या \(p/q\) है, तो 0 और 1 (या संबंधित पूर्णांकों) के बीच के अंतराल को \(q\) बराबर भागों में विभाजित करें।
  4. अंश के अनुसार बिंदु चिह्नित करें: \(p\)वें भाग पर बिंदु चिह्नित करें।

उदाहरण 1: \(1/5\) को संख्या रेखा पर निरूपित करें।

  • 0 और 1 के बीच के अंतराल को 5 बराबर भागों में बाँटें।
  • पहला भाग \(1/5\) को दर्शाता है।

उदाहरण 2: \(5/2\) को संख्या रेखा पर निरूपित करें।

  • \(5/2\) को मिश्रित भिन्न में बदलें: \(2 \frac{1}{2}\).
  • इसका मतलब है कि संख्या 2 और 3 के बीच है।
  • 2 और 3 के बीच के अंतराल को 2 बराबर भागों में बाँटें (क्योंकि हर 2 है)।
  • पहला भाग \(2 \frac{1}{2}\) या \(5/2\) को दर्शाता है।

उदाहरण 3: \(-2/5\) को संख्या रेखा पर निरूपित करें।

  • यह संख्या 0 और -1 के बीच है।
  • 0 और -1 के बीच के अंतराल को 5 बराबर भागों में बाँटें।
  • 0 से बाईं ओर दूसरा भाग \(-2/5\) को दर्शाता है।
💡సూచన

संख्या रेखा पर ऋणात्मक संख्याओं को निरूपित करते समय, बाईं ओर की दिशा का ध्यान रखें। \(-1/2\) 0 और -1 के बीच होता है, न कि 0 और 1 के बीच।

परिमेय संख्याओं का मानक रूप

एक परिमेय संख्या को मानक रूप (Standard Form) में तब कहा जाता है जब:

  1. उसके अंश और हर में 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड न हो (यानी, उनका महत्तम समापवर्तक (GCD) 1 हो)।
  2. उसका हर धनात्मक पूर्णांक हो।

मानक रूप में बदलने के चरण

  1. परिमेय संख्या प्राप्त करें।
  2. हर को धनात्मक बनाएँ: यदि हर ऋणात्मक है, तो अंश और हर दोनों को \(-1\) से गुणा करें।
  • उदाहरण: \(5/-9 = (5 \times -1) / (-9 \times -1) = -5/9\).
  1. GCD ज्ञात करें: अंश और हर का महत्तम समापवर्तक (GCD या HCF) ज्ञात करें।
  2. GCD से भाग दें: अंश और हर दोनों को उनके GCD से भाग दें। परिणामी परिमेय संख्या मानक रूप में होगी।

उदाहरण: \(81/18\) को मानक रूप में बदलें।

  • चरण 1: परिमेय संख्या \(81/18\) है।
  • चरण 2: हर (18) पहले से ही धनात्मक है।
  • चरण 3: \(81\) और \(18\) का GCD ज्ञात करें।
  • \(81 = 3 \times 3 \times 3 \times 3\)
  • \(18 = 2 \times 3 \times 3\)
  • GCD \(= 3 \times 3 = 9\)
  • चरण 4: अंश और हर को 9 से भाग दें।
  • \(81 \div 9 = 9\)
  • \(18 \div 9 = 2\)
  • अतः, \(81/18\) का मानक रूप \(9/2\) है।

उदाहरण: \(-12/18\) को मानक रूप में बदलें।

  • चरण 1: परिमेय संख्या \(-12/18\) है।
  • चरण 2: हर (18) धनात्मक है।
  • चरण 3: \(12\) और \(18\) का GCD ज्ञात करें।
  • \(12 = 2 \times 2 \times 3\)
  • \(18 = 2 \times 3 \times 3\)
  • GCD \(= 2 \times 3 = 6\)
  • चरण 4: अंश और हर को 6 से भाग दें।
  • \(-12 \div 6 = -2\)
  • \(18 \div 6 = 3\)
  • अतः, \(-12/18\) का मानक रूप \(-2/3\) है।
🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

मानक रूप में बदलते समय हर को हमेशा धनात्मक रखना याद रखें। यदि हर ऋणात्मक है, तो अंश और हर दोनों को \(-1\) से गुणा करें।

परिमेय संख्याओं की तुलना

दो परिमेय संख्याओं की तुलना करने के लिए, हम विभिन्न तरीकों का उपयोग कर सकते हैं।

1. संख्या रेखा का उपयोग करके तुलना

  • संख्या रेखा पर, जो संख्या दाईं ओर होती है वह हमेशा बाईं ओर वाली संख्या से बड़ी होती है
  • उदाहरण 1: \(3/5\) और \(2/6\) की तुलना करें।
  • \(2/6 = 1/3\) (सरल रूप में)
  • \(1/3 \approx 0.33\) और \(3/5 = 0.6\).
  • संख्या रेखा पर, \(0.6\) \(0.33\) के दाईं ओर होगा।
  • अतः, \(3/5 > 2/6\).
  • उदाहरण 2: \(-5/8\) और \(4/7\) की तुलना करें।
  • धनात्मक संख्याएँ हमेशा ऋणात्मक संख्याओं से बड़ी होती हैं।
  • अतः, \(-5/8 < 4/7\).

2. समान हर विधि का उपयोग करके तुलना (LCM विधि)

यह विधि विशेष रूप से तब उपयोगी होती है जब संख्या रेखा पर निरूपण मुश्किल हो या कई संख्याओं की तुलना करनी हो।

  1. हरों का LCM ज्ञात करें: दी गई परिमेय संख्याओं के हरों का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात करें।
  2. समान हर में बदलें: प्रत्येक परिमेय संख्या को एक समतुल्य परिमेय संख्या में बदलें जिसका हर LCM के बराबर हो।
  3. अंशों की तुलना करें: जिस परिमेय संख्या का अंश बड़ा होगा, वह संख्या बड़ी होगी।
  • उदाहरण: \(3/4\) और \(5/6\) की तुलना करें।
  • चरण 1: 4 और 6 का LCM = 12।
  • चरण 2:
  • \(3/4 = (3 \times 3) / (4 \times 3) = 9/12\)
  • \(5/6 = (5 \times 2) / (6 \times 2) = 10/12\)
  • चरण 3: \(9 < 10\).
  • अतः, \(9/12 < 10/12\), जिसका अर्थ है \(3/4 < 5/6\).

ऋणात्मक परिमेय संख्याओं की तुलना

  • दो ऋणात्मक परिमेय संख्याओं की तुलना करते समय, जिस संख्या का निरपेक्ष मान (absolute value) कम होता है, वह संख्या बड़ी होती है
  • उदाहरण: \(-1/2\) और \(-1/3\) की तुलना करें।
  • \(|-1/2| = 1/2\) और \(|-1/3| = 1/3\).
  • चूंकि \(1/3 < 1/2\), इसलिए \(-1/3 > -1/2\).
  • संख्या रेखा पर, \(-1/3\) \(-1/2\) के दाईं ओर होता है।
ముఖ్యమైనది

धनात्मक संख्याएँ हमेशा ऋणात्मक संख्याओं से बड़ी होती हैं। शून्य (0) सभी ऋणात्मक संख्याओं से बड़ा और सभी धनात्मक संख्याओं से छोटा होता है।

💡సూచన

जब दो ऋणात्मक परिमेय संख्याओं की तुलना कर रहे हों, तो पहले उनके धनात्मक रूपों की तुलना करें, फिर परिणाम को पलट दें। उदाहरण के लिए, \(1/2 > 1/3\) तो \(-1/2 < -1/3\).

परिमेय संख्याओं को आरोही और अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना

परिमेय संख्याओं को आरोही (बढ़ते क्रम) या अवरोही (घटते क्रम) में व्यवस्थित करने के लिए, हम उन्हें पहले तुलना करने योग्य बनाते हैं। LCM विधि सबसे प्रभावी है।

व्यवस्थित करने के चरण

  1. हरों का LCM ज्ञात करें: दी गई सभी परिमेय संख्याओं के हरों का LCM ज्ञात करें।
  2. समान हर में बदलें: प्रत्येक परिमेय संख्या को एक समतुल्य परिमेय संख्या में बदलें जिसका हर LCM के बराबर हो।
  3. अंशों की तुलना करें: अब, अंशों की तुलना करके संख्याओं को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें।
  • आरोही क्रम: सबसे छोटे अंश वाली संख्या पहले।
  • अवरोही क्रम: सबसे बड़े अंश वाली संख्या पहले।

उदाहरण: \(3/4, -1/2, 5/6, -2/3, 1/3\) को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें।

  • चरण 1: हरों (4, 2, 6, 3, 3) का LCM ज्ञात करें।
  • LCM(4, 2, 6, 3) = 12।
  • चरण 2: प्रत्येक संख्या को हर 12 वाली समतुल्य संख्या में बदलें।
  • \(3/4 = (3 \times 3) / (4 \times 3) = 9/12\)
  • \(-1/2 = (-1 \times 6) / (2 \times 6) = -6/12\)
  • \(5/6 = (5 \times 2) / (6 \times 2) = 10/12\)
  • \(-2/3 = (-2 \times 4) / (3 \times 4) = -8/12\)
  • \(1/3 = (1 \times 4) / (3 \times 4) = 4/12\)
  • चरण 3: अब अंशों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें: \(-8, -6, 4, 9, 10\).
  • अतः, परिमेय संख्याओं का आरोही क्रम है:

\(-8/12, -6/12, 4/12, 9/12, 10/12\) या मूल रूप में: \(-2/3, -1/2, 1/3, 3/4, 5/6\)

अवरोही क्रम के लिए: अंशों को घटते क्रम में व्यवस्थित करें: \(10, 9, 4, -6, -8\).

  • \(5/6, 3/4, 1/3, -1/2, -2/3\)
💡సూచన

हमेशा पहले LCM ज्ञात करें और फिर सभी परिमेय संख्याओं को समान हर वाली समतुल्य संख्याओं में बदलें। यह तुलना को बहुत आसान बनाता है।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

ऋणात्मक संख्याओं को व्यवस्थित करते समय गलती न करें। जितना बड़ा ऋणात्मक अंश, उतनी ही छोटी संख्या। उदाहरण: \(-8/12\) \(-6/12\) से छोटा है।

दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना

दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं। उन्हें ज्ञात करने के लिए कई विधियाँ हैं।

विधि 1: समान हर विधि (LCM का उपयोग करके)

  1. समान हर बनाएँ: दी गई परिमेय संख्याओं के हरों का LCM ज्ञात करें और उन्हें समान हर वाली समतुल्य संख्याओं में बदलें।
  2. अंशों के बीच की संख्याएँ: यदि अंशों के बीच पर्याप्त पूर्णांक हैं, तो उन पूर्णांकों को अंश के रूप में उपयोग करके और सामान्य हर को बनाए रखते हुए परिमेय संख्याएँ लिखें।
  3. गुणा करें (यदि आवश्यक हो): यदि अंशों के बीच पर्याप्त पूर्णांक नहीं हैं, तो अंश और हर दोनों को एक बड़ी संख्या (जैसे 10, 100, आदि) से गुणा करें ताकि अंशों के बीच अधिक अंतराल बन सके।

उदाहरण 1: 4 और 5 के बीच दो परिमेय संख्याएँ ज्ञात करें।

  • 4 और 5 को परिमेय संख्या के रूप में लिखें: \(4/1\) और \(5/1\).
  • अंश और हर को एक बड़ी संख्या से गुणा करें, मान लीजिए 6 से (2 संख्याएँ ज्ञात करनी हैं, तो \(2+1=3\) या कोई भी बड़ी संख्या ले सकते हैं)।
  • \(4/1 = (4 \times 6) / (1 \times 6) = 24/6\)
  • \(5/1 = (5 \times 6) / (1 \times 6) = 30/6\)
  • अब \(24/6\) और \(30/6\) के बीच की संख्याएँ हैं: \(25/6, 26/6, 27/6, 28/6, 29/6\).
  • कोई भी दो चुनें, जैसे \(25/6\) और \(26/6\).

उदाहरण 2: \(-1/9\) और \(2/5\) के बीच दो परिमेय संख्याएँ ज्ञात करें।

  • चरण 1: हरों (9 और 5) का LCM = 45।
  • चरण 2: समान हर वाली समतुल्य संख्याएँ बनाएँ।
  • \(-1/9 = (-1 \times 5) / (9 \times 5) = -5/45\)
  • \(2/5 = (2 \times 9) / (5 \times 9) = 18/45\)
  • चरण 3: अब \(-5/45\) और \(18/45\) के बीच कई संख्याएँ हैं।
  • उदाहरण: \(-4/45, -3/45, 0/45, 1/45, ..., 17/45\).
  • कोई भी दो चुनें, जैसे \(0/45\) (जो 0 है) और \(1/45\).

विधि 2: मध्यमान विधि (Mean Method)

दो परिमेय संख्याओं \(a\) और \(b\) के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात करने के लिए, उनका औसत ज्ञात करें: \((a+b)/2\).

  • उदाहरण: \(1/2\) और \(1/3\) के बीच एक परिमेय संख्या ज्ञात करें।
  • \((1/2 + 1/3) / 2 = (3/6 + 2/6) / 2 = (5/6) / 2 = 5/12\).
  • अब \(1/2\) और \(5/12\) के बीच एक और संख्या ज्ञात कर सकते हैं, या \(5/12\) और \(1/3\) के बीच।
గుర్తుంచుకోండి

दो परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं। आपको कितनी संख्याएँ ज्ञात करनी हैं, उसके आधार पर गुणा करने वाली संख्या चुनें।

परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएँ

परिमेय संख्याओं पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग की संक्रियाएँ की जा सकती हैं।

1. परिमेय संख्याओं का जोड़ (Addition)

  • समान हर होने पर: केवल अंशों को जोड़ें और हर को वैसे ही रखें।
  • उदाहरण: \(3/4 + 7/4 = (3+7)/4 = 10/4 = 5/2\).
  • भिन्न हर होने पर:
  1. हरों का LCM ज्ञात करें।
  2. प्रत्येक परिमेय संख्या को समान हर (LCM) वाली समतुल्य संख्या में बदलें।
  3. अंशों को जोड़ें और हर को वैसे ही रखें।
  • उदाहरण: \(2/7 + 3/11\)
  • LCM(7, 11) = 77.
  • \(2/7 = (2 \times 11) / (7 \times 11) = 22/77\)
  • \(3/11 = (3 \times 7) / (11 \times 7) = 21/77\)
  • \(22/77 + 21/77 = (22+21)/77 = 43/77\).
  • ऋणात्मक संख्याएँ शामिल होने पर: पूर्णांकों के जोड़ के नियमों का पालन करें।
  • उदाहरण: \(-5/8 + 3/8 = (-5+3)/8 = -2/8 = -1/4\).
  • उदाहरण: \(-2/3 + 1/5\)
  • LCM(3, 5) = 15.
  • \(-2/3 = (-2 \times 5) / (3 \times 5) = -10/15\)
  • \(1/5 = (1 \times 3) / (5 \times 3) = 3/15\)
  • \(-10/15 + 3/15 = (-10+3)/15 = -7/15\).

2. परिमेय संख्याओं का घटाव (Subtraction)

जोड़ के समान ही, LCM विधि का उपयोग करें।

  1. हरों का LCM ज्ञात करें।
  2. प्रत्येक परिमेय संख्या को समान हर (LCM) वाली समतुल्य संख्या में बदलें।
  3. अंशों को घटाएँ और हर को वैसे ही रखें।
  • उदाहरण: \(8/7 - 2/5\)
  • LCM(7, 5) = 35.
  • \(8/7 = (8 \times 5) / (7 \times 5) = 40/35\)
  • \(2/5 = (2 \times 7) / (5 \times 7) = 14/35\)
  • \(40/35 - 14/35 = (40-14)/35 = 26/35\).
  • उदाहरण: \(11/12 - 13/16\)
  • LCM(12, 16) = 48.
  • \(11/12 = (11 \times 4) / (12 \times 4) = 44/48\)
  • \(13/16 = (13 \times 3) / (16 \times 3) = 39/48\)
  • \(44/48 - 39/48 = (44-39)/48 = 5/48\).

3. परिमेय संख्याओं का गुणा (Multiplication)

अंश को अंश से और हर को हर से गुणा करें।

  • उदाहरण 1: \(3/5 \times 7/8\)
  • \((3 \times 7) / (5 \times 8) = 21/40\).
  • उदाहरण 2: \(-2/3 \times 5/7\)
  • \((-2 \times 5) / (3 \times 7) = -10/21\).
  • एक पूर्णांक से गुणा: पूर्णांक को \(p/1\) के रूप में लिखें।
  • उदाहरण: \(-2 \times 3/4 = -2/1 \times 3/4 = (-2 \times 3) / (1 \times 4) = -6/4 = -3/2\).

4. परिमेय संख्याओं का भाग (Division)

एक परिमेय संख्या को दूसरी परिमेय संख्या से भाग देने के लिए, भाजक के व्युत्क्रम से गुणा करें

  • उदाहरण 1: \(3/4 \div 5/7\)
  • \(5/7\) का व्युत्क्रम \(7/5\) है।
  • \(3/4 \div 5/7 = 3/4 \times 7/5 = (3 \times 7) / (4 \times 5) = 21/20\).
  • उदाहरण 2: \(-6/5 \div 2/3\)
  • \(2/3\) का व्युत्क्रम \(3/2\) है।
  • \(-6/5 \div 2/3 = -6/5 \times 3/2 = (-6 \times 3) / (5 \times 2) = -18/10 = -9/5\).
  • उदाहरण 3: \(11/22 \div -44/17\)
  • \(-44/17\) का व्युत्क्रम \(17/-44\) है।
  • \(11/22 \times 17/-44 = (11 \times 17) / (22 \times -44) = 187 / -968 = -187/968\) (सरल करने पर \(-17/88\)).
గుర్తుంచుకోండి

जोड़ और घटाव के लिए समान हर आवश्यक है। गुणा और भाग के लिए इसकी आवश्यकता नहीं होती।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

भाग करते समय, केवल भाजक का व्युत्क्रम करें, भाज्य का नहीं। और भाग के चिन्ह को गुणा के चिन्ह में बदलना न भूलें।

योगात्मक प्रतिलोम और व्युत्क्रम (गुणात्मक प्रतिलोम)

ये दो महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं जो परिमेय संख्याओं पर संक्रियाओं को समझने में मदद करती हैं।

1. योगात्मक प्रतिलोम (Additive Inverse)

  • एक संख्या का योगात्मक प्रतिलोम वह संख्या होती है जिसे मूल संख्या में जोड़ने पर परिणाम शून्य (0) प्राप्त होता है
  • किसी परिमेय संख्या \(a/b\) का योगात्मक प्रतिलोम \(-a/b\) होता है।
  • नियम: धनात्मक संख्या का योगात्मक प्रतिलोम ऋणात्मक होता है, और ऋणात्मक संख्या का योगात्मक प्रतिलोम धनात्मक होता है।
  • उदाहरण:
  • \(1/6\) का योगात्मक प्रतिलोम \(-1/6\) है, क्योंकि \(1/6 + (-1/6) = 0\).
  • \(-1/5\) का योगात्मक प्रतिलोम \(1/5\) है, क्योंकि \(-1/5 + 1/5 = 0\).
  • \(3/4\) का योगात्मक प्रतिलोम \(-3/4\) है।
  • \(-14/17\) का योगात्मक प्रतिलोम \(14/17\) है।

2. व्युत्क्रम या गुणात्मक प्रतिलोम (Reciprocal or Multiplicative Inverse)

  • एक संख्या का व्युत्क्रम वह संख्या होती है जिसे मूल संख्या से गुणा करने पर परिणाम एक (1) प्राप्त होता है
  • किसी परिमेय संख्या \(a/b\) का व्युत्क्रम \(b/a\) होता है (जहाँ \(a \neq 0\) और \(b \neq 0\)).
  • व्युत्क्रम ज्ञात करने के लिए अंश और हर को आपस में बदल दिया जाता है।
  • उदाहरण:
  • \(5/6\) का व्युत्क्रम \(6/5\) है, क्योंकि \(5/6 \times 6/5 = 1\).
  • \(-8/9\) का व्युत्क्रम \(-9/8\) है, क्योंकि \(-8/9 \times -9/8 = 1\).
  • \(8/13\) का व्युत्क्रम \(13/8\) है।
  • \(-14/17\) का व्युत्क्रम \(17/-14\) या \(-17/14\) है।
  • शून्य का व्युत्क्रम: शून्य (0) का कोई व्युत्क्रम नहीं होता, क्योंकि \(1/0\) अपरिभाषित है। किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर 1 प्राप्त नहीं हो सकता।
  • किसी भी गैर-शून्य परिमेय संख्या का व्युत्क्रम हमेशा एक गैर-शून्य परिमेय संख्या होती है
📖నిర్వచనం

योगात्मक प्रतिलोम (Additive Inverse): वह संख्या जिसे मूल संख्या में जोड़ने पर योग 0 प्राप्त होता है। \(a/b\) का योगात्मक प्रतिलोम \(-a/b\) है।

📖నిర్వచనం

व्युत्क्रम (Reciprocal / Multiplicative Inverse): वह संख्या जिसे मूल संख्या से गुणा करने पर गुणनफल 1 प्राप्त होता है। \(a/b\) का व्युत्क्रम \(b/a\) है (जहाँ \(a, b \neq 0\)).

ముఖ్యమైనది

शून्य (0) का कोई व्युत्क्रम नहीं होता क्योंकि \(1/0\) अपरिभाषित है।

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