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AP · Class 7 · 🧮 Maths · Chapter 5

LINES AND ANGLES

రేఖాఖండంకిరణంరేఖకోణంపూరక కోణాలుసంపూరక కోణాలు

ఈ అధ్యాయం రేఖలు, రేఖాఖండాలు మరియు కిరణాలు వంటి ప్రాథమిక జ్యామితీయ భావనలను పరిచయం చేస్తుంది. ఇది కోణాల వర్గీకరణ (పూరక, సంపూరక, ఆసన్న, శీర్షాభిముఖ కోణాలు), ఖండన రేఖలు, తిర్యగ్రేఖలు మరియు సమాంతర రేఖల మధ్య ఏర్పడే కోణాల సంబంధాలను (అనురూప, ఏకాంతర, తిర్యగ్రేఖకు ఒకే వైపున ఉన్న అంతర కోణాలు) వివరిస్తుంది. ఈ భావనలు జ్యామితీయ సమస్యలను పరిష్కరించడానికి పునాదిని అందిస్తాయి.

रेखाखंड, रेखा और किरण

गणित में, रेखाएँ और कोण ज्यामिति के मूल निर्माण खंड हैं।

  • रेखाखंड (Line Segment):
  • इसके दो अंत बिंदु होते हैं।
  • इसकी एक निश्चित लंबाई होती है।
  • इसे \( \overline{AB} \) या AB से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: स्केल का किनारा, मेज का किनारा।
  • रेखा (Line):
  • इसका कोई अंत बिंदु नहीं होता है।
  • यह दोनों दिशाओं में अनंत तक फैली होती है।
  • इसकी कोई निश्चित लंबाई नहीं होती।
  • इसे \( \overleftrightarrow{AB} \) या AB से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: क्षितिज, एक सीधी सड़क।
  • किरण (Ray):
  • इसका एक अंत बिंदु (प्रारंभिक बिंदु) होता है।
  • यह एक दिशा में अनंत तक फैली होती है।
  • इसे \( \overrightarrow{OP} \) या OP से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: सूर्य की किरणें, टॉर्च से निकलने वाली रोशनी।
  • कोण (Angle):
  • दो किरणें या रेखाखंड जो एक ही बिंदु से शुरू होते हैं, कोण बनाते हैं
  • उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु को शीर्ष (Vertex) कहते हैं।
  • किरणों को कोण की भुजाएँ (Arms of the angle) कहते हैं।
  • कोण को \( \angle ABC \) या \( \angle B \) से दर्शाया जाता है, जहाँ B शीर्ष है।
  • कोणों को डिग्री (\( ^\circ \)) में मापा जाता है।
  • कोणों का वर्गीकरण (Classification of Angles):
  • न्यून कोण (Acute Angle): \( 0^\circ \) से \( 90^\circ \) के बीच।
  • समकोण (Right Angle): ठीक \( 90^\circ \) का कोण।
  • अधिक कोण (Obtuse Angle): \( 90^\circ \) से \( 180^\circ \) के बीच।
  • ऋजु कोण (Straight Angle): ठीक \( 180^\circ \) का कोण।
  • प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): \( 180^\circ \) से \( 360^\circ \) के बीच।
  • पूर्ण कोण (Complete Angle): ठीक \( 360^\circ \) का कोण।
ముఖ్యమైనది

कोण का माप लिखते समय, \( m\angle ABC \) के बजाय केवल \( \angle ABC \) भी लिख सकते हैं, संदर्भ से स्पष्ट हो जाता है।

संबंधित कोण (Related Angles)

कुछ कोणों के युग्मों के बीच विशेष संबंध होते हैं।

पूरक कोण (Complementary Angles)

  • जब दो कोणों के मापों का योग \( 90^\circ \) होता है, तो वे पूरक कोण कहलाते हैं।
  • प्रत्येक कोण दूसरे का पूरक होता है।
  • उदाहरण: \( 30^\circ \) और \( 60^\circ \) पूरक कोण हैं। \( 30^\circ \) का पूरक \( 60^\circ \) है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • दो न्यून कोण पूरक हो सकते हैं। (जैसे \( 40^\circ \) और \( 50^\circ \))
  • दो अधिक कोण पूरक नहीं हो सकते। (योग \( 90^\circ \) से अधिक होगा)
  • दो समकोण पूरक नहीं हो सकते। (योग \( 180^\circ \) होगा)

संपूरक कोण (Supplementary Angles)

  • जब दो कोणों के मापों का योग \( 180^\circ \) होता है, तो वे संपूरक कोण कहलाते हैं।
  • प्रत्येक कोण दूसरे का संपूरक होता है।
  • उदाहरण: \( 70^\circ \) और \( 110^\circ \) संपूरक कोण हैं। \( 70^\circ \) का संपूरक \( 110^\circ \) है।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • दो न्यून कोण संपूरक नहीं हो सकते। (योग \( 180^\circ \) से कम होगा)
  • दो अधिक कोण संपूरक नहीं हो सकते। (योग \( 180^\circ \) से अधिक होगा)
  • दो समकोण संपूरक हो सकते हैं। (योग \( 90^\circ + 90^\circ = 180^\circ \))

आसन्न कोण (Adjacent Angles)

  • दो कोण आसन्न कोण कहलाते हैं यदि उनमें एक उभयनिष्ठ शीर्ष, एक उभयनिष्ठ भुजा और उनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ उभयनिष्ठ भुजा के विपरीत हों
  • उदाहरण: [IMAGE: TODO: आसन्न कोणों का उदाहरण] में \( \angle AOB \) और \( \angle BOC \) आसन्न कोण हैं।
  • उभयनिष्ठ शीर्ष: O
  • उभयनिष्ठ भुजा: OB
  • गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ: OA और OC, OB के विपरीत हैं।

रैखिक युग्म (Linear Pair)

  • एक रैखिक युग्म आसन्न कोणों का एक युग्म होता है जिनकी गैर-उभयनिष्ठ भुजाएँ एक रेखा बनाती हैं।
  • रैखिक युग्म बनाने वाले कोण हमेशा संपूरक होते हैं (उनका योग \( 180^\circ \) होता है)।
  • उदाहरण: [IMAGE: TODO: रैखिक युग्म का उदाहरण] में \( \angle AOC \) और \( \angle BOC \) एक रैखिक युग्म बनाते हैं। \( \angle AOC + \angle BOC = 180^\circ \).

शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles)

  • जब दो रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं, तो प्रतिच्छेदन बिंदु पर बने कोणों के युग्म को शीर्षाभिमुख कोण कहते हैं।
  • शीर्षाभिमुख कोण हमेशा बराबर होते हैं
  • उदाहरण: [IMAGE: TODO: शीर्षाभिमुख कोणों का उदाहरण] में, रेखाएँ AB और CD बिंदु O पर प्रतिच्छेद करती हैं।
  • \( \angle AOC \) और \( \angle BOD \) शीर्षाभिमुख कोण हैं। \( \angle AOC = \angle BOD \).
  • \( \angle AOD \) और \( \angle BOC \) शीर्षाभिमुख कोण हैं। \( \angle AOD = \angle BOC \).
🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर पूरक और संपूरक कोणों के योग में भ्रमित होते हैं। याद रखें: पूरक में 'पू' है, जो 'पूरा' (90) जैसा लगता है। संपूरक में 'सं' है, जो 'सम' (180) जैसा लगता है।

గుర్తుంచుకోండి

रैखिक युग्म हमेशा संपूरक होते हैं, लेकिन सभी संपूरक कोण रैखिक युग्म नहीं होते (उनके आसन्न होना आवश्यक नहीं है)।

रेखाओं के युग्म (Pairs of Lines)

रेखाएँ विभिन्न तरीकों से एक दूसरे से संबंधित हो सकती हैं।

प्रतिच्छेदी रेखाएँ (Intersecting Lines)

  • दो रेखाएँ प्रतिच्छेदी कहलाती हैं यदि वे एक उभयनिष्ठ बिंदु पर मिलती हैं
  • इस उभयनिष्ठ बिंदु को प्रतिच्छेदन बिंदु (Point of Intersection) कहते हैं।
  • उदाहरण: सड़क क्रॉसिंग, कैंची की भुजाएँ।
  • दो रेखाएँ एक से अधिक बिंदु पर प्रतिच्छेद नहीं कर सकतीं।

समांतर रेखाएँ (Parallel Lines)

  • दो रेखाएँ समांतर कहलाती हैं यदि वे कभी नहीं मिलतीं, चाहे उन्हें कितना भी आगे बढ़ाया जाए।
  • वे हमेशा एक दूसरे से समान दूरी पर रहती हैं।
  • समांतर रेखाओं को \( l \parallel m \) से दर्शाया जाता है।
  • उदाहरण: रेलवे ट्रैक, नोटबुक की रेखाएँ।

तिर्यक रेखा (Transversal)

  • एक रेखा जो दो या दो से अधिक रेखाओं को अलग-अलग बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, उसे तिर्यक रेखा कहते हैं।
  • उदाहरण: [IMAGE: TODO: तिर्यक रेखा का उदाहरण] में, रेखा p, रेखाओं l और m को प्रतिच्छेद करती है।
  • यदि एक रेखा दो रेखाओं को केवल एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती है, तो वह तिर्यक रेखा नहीं होती।

तिर्यक रेखा द्वारा बने कोण (Angles Made by a Transversal)

जब एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को काटती है, तो आठ कोण बनते हैं। इन कोणों के विशेष नाम और संबंध होते हैं।

[IMAGE: TODO: तिर्यक रेखा द्वारा बने 8 कोणों का चित्र]

  • आंतरिक कोण (Interior Angles): \( \angle 3, \angle 4, \angle 5, \angle 6 \)
  • ये दो रेखाओं के 'अंदर' स्थित होते हैं।
  • बाहरी कोण (Exterior Angles): \( \angle 1, \angle 2, \angle 7, \angle 8 \)
  • ये दो रेखाओं के 'बाहर' स्थित होते हैं।
  • संगत कोण (Corresponding Angles):
  • ये तिर्यक रेखा के एक ही ओर होते हैं।
  • ये दो रेखाओं के सापेक्ष 'संगत' स्थिति में होते हैं (या तो ऊपर या नीचे, या बाईं ओर या दाईं ओर)।
  • युग्म: \( (\angle 1, \angle 5), (\angle 2, \angle 6), (\angle 3, \angle 7), (\angle 4, \angle 8) \)
  • याद रखने का तरीका: 'F' आकार बनाते हैं।
  • एकांतर आंतरिक कोण (Alternate Interior Angles):
  • ये तिर्यक रेखा के विपरीत ओर होते हैं।
  • ये दोनों रेखाओं के 'अंदर' स्थित होते हैं।
  • युग्म: \( (\angle 3, \angle 6), (\angle 4, \angle 5) \)
  • याद रखने का तरीका: 'Z' आकार बनाते हैं।
  • एकांतर बाहरी कोण (Alternate Exterior Angles):
  • ये तिर्यक रेखा के विपरीत ओर होते हैं।
  • ये दोनों रेखाओं के 'बाहर' स्थित होते हैं।
  • युग्म: \( (\angle 1, \angle 8), (\angle 2, \angle 7) \)
  • तिर्यक रेखा के एक ही ओर के आंतरिक कोण (Interior Angles on the Same Side of the Transversal):
  • ये तिर्यक रेखा के एक ही ओर होते हैं।
  • ये दोनों रेखाओं के 'अंदर' स्थित होते हैं।
  • युग्म: \( (\angle 3, \angle 5), (\angle 4, \angle 6) \)
  • इन्हें सह-आंतरिक कोण (Consecutive Interior Angles) भी कहते हैं।
💡సూచన

तिर्यक रेखा द्वारा बने कोणों के नाम और उनकी स्थिति को अच्छी तरह से समझें। यह समांतर रेखाओं से संबंधित समस्याओं को हल करने की कुंजी है।

समांतर रेखाओं की तिर्यक रेखा (Transversal of Parallel Lines)

जब एक तिर्यक रेखा समांतर रेखाओं को काटती है, तो कोणों के बीच विशेष और महत्वपूर्ण संबंध होते हैं।

यदि \( l \parallel m \) (रेखा l, रेखा m के समांतर है) और t एक तिर्यक रेखा है, तो:

  1. संगत कोण बराबर होते हैं (Corresponding Angles are Equal):
  • \( \angle 1 = \angle 5 \)
  • \( \angle 2 = \angle 6 \)
  • \( \angle 3 = \angle 7 \)
  • \( \angle 4 = \angle 8 \)
  • याद रखें: 'F' आकार।
  1. एकांतर आंतरिक कोण बराबर होते हैं (Alternate Interior Angles are Equal):
  • \( \angle 3 = \angle 6 \)
  • \( \angle 4 = \angle 5 \)
  • याद रखें: 'Z' आकार।
  1. एकांतर बाहरी कोण बराबर होते हैं (Alternate Exterior Angles are Equal):
  • \( \angle 1 = \angle 8 \)
  • \( \angle 2 = \angle 7 \)
  1. तिर्यक रेखा के एक ही ओर के आंतरिक कोण संपूरक होते हैं (Interior Angles on the Same Side of the Transversal are Supplementary):
  • \( \angle 3 + \angle 5 = 180^\circ \)
  • \( \angle 4 + \angle 6 = 180^\circ \)
  • याद रखें: 'C' या 'U' आकार।

समांतर रेखाओं की जाँच (Checking for Parallel Lines)

उपरोक्त संबंधों का उपयोग यह जांचने के लिए भी किया जा सकता है कि दो रेखाएँ समांतर हैं या नहीं।

दो रेखाएँ समांतर होंगी यदि उन्हें एक तिर्यक रेखा द्वारा इस प्रकार काटा जाए कि:

  1. संगत कोणों का कोई भी युग्म बराबर हो। (यदि \( \angle 1 = \angle 5 \), तो \( l \parallel m \))
  2. एकांतर आंतरिक कोणों का कोई भी युग्म बराबर हो। (यदि \( \angle 3 = \angle 6 \), तो \( l \parallel m \))
  3. तिर्यक रेखा के एक ही ओर के आंतरिक कोणों का कोई भी युग्म संपूरक हो। (यदि \( \angle 3 + \angle 5 = 180^\circ \), तो \( l \parallel m \))

अन्य महत्वपूर्ण गुण:

  • एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ (Lines Parallel to the Same Line): यदि दो रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर हैं, तो वे एक दूसरे के भी समांतर होती हैं। यदि \( l \parallel p \) और \( m \parallel p \), तो \( l \parallel m \).
  • एक ही रेखा पर लंब रेखाएँ (Lines Perpendicular to the Same Line): यदि दो रेखाएँ एक ही रेखा पर लंबवत हैं, तो वे एक दूसरे के समांतर होती हैं। यदि \( l \perp p \) और \( m \perp p \), तो \( l \parallel m \).
🧮సూత్రం

समांतर रेखाओं के लिए कोण संबंध:

  • संगत कोण: बराबर
  • एकांतर आंतरिक कोण: बराबर
  • एकांतर बाहरी कोण: बराबर
  • तिर्यक रेखा के एक ही ओर के आंतरिक कोण: संपूरक (योग \( 180^\circ \))
💡సూచన

परीक्षा में अक्सर अज्ञात कोणों का मान ज्ञात करने के लिए इन गुणों का उपयोग करना होता है। प्रत्येक चरण में उपयोग किए गए गुण का उल्लेख करना न भूलें।

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