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AP · Class 6 · 🔬 Science · Chapter 11

Light

కాంతివర్ణపటంకాంతి విక్షేపణంన్యూటన్ డిస్క్ఇంద్రధనస్సు రంగులు

ఈ అధ్యాయం కాంతి యొక్క ప్రాథమిక భావనలను పరిచయం చేస్తుంది. తెల్లని కాంతి ఏడు రంగుల సమ్మేళనం అని, కాంతి విక్షేపణం ద్వారా వర్ణపటం ఎలా ఏర్పడుతుందో వివరిస్తుంది. న్యూటన్ డిస్క్ వంటి కార్యకలాపాల ద్వారా విద్యార్థులు ఈ భావనలను ఆచరణాత్మకంగా అర్థం చేసుకోవడానికి సహాయపడుతుంది. ఇది ప్రకృతిలో ఇంద్రధనస్సు ఏర్పడటానికి గల కారణాలను కూడా తెలియజేస్తుంది.

प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)

प्रकाश का परावर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किरणें किसी सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आती हैं।

परावर्तन के नियम (Laws of Reflection)

  1. आपतन कोण (Angle of incidence) हमेशा परावर्तन कोण (Angle of reflection) के बराबर होता है। \((\angle i = \angle r)\)
  2. आपतित किरण (Incident ray), परावर्तित किरण (Reflected ray) और आपतन बिंदु पर अभिलंब (Normal to the surface at the point of incidence) तीनों एक ही तल में होते हैं।

समतल दर्पण (Plane Mirror)

  • प्रतिबिंब की प्रकृति (Nature of Image):
  • आभासी (Virtual): इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
  • सीधा (Erect): वस्तु के सापेक्ष सीधा बनता है।
  • पार्श्व परिवर्तित (Laterally Inverted): वस्तु का दायाँ भाग प्रतिबिंब में बायाँ और बायाँ भाग दायाँ दिखाई देता है।
  • वस्तु के समान आकार (Same size as object): प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
  • दर्पण से उतनी ही दूरी पर (Equidistant from mirror): प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है।
  • उपयोग (Uses):
  • घरों में, दुकानों में, ड्रेसिंग टेबल में।
  • पेरिस्कोप (Periscope) में।

गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

ये ऐसे दर्पण होते हैं जिनकी परावर्तक सतह एक खोखले गोले का भाग होती है।

अवतल दर्पण (Concave Mirror)

  • परावर्तक सतह अंदर की ओर मुड़ी हुई (Reflecting surface curved inwards) होती है।
  • अभिसारी दर्पण (Converging Mirror): यह समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के नियम (Rules for Image Formation by Concave Mirror)
  1. मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है।
  2. मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
  3. वक्रता केंद्र (C) से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद उसी पथ पर वापस लौट जाती है।
  4. ध्रुव (P) पर आपतित किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के साथ समान कोण बनाते हुए परावर्तित होती है।
अवतल दर्पण द्वारा विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिंब (Images formed by Concave Mirror at different positions)

| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति | |---|---|---|---| | अनंत पर | फोकस (F) पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार | वास्तविक, उल्टा | | C से परे | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा | | C पर | C पर | समान आकार | वास्तविक, उल्टा | | C और F के बीच | C से परे | बड़ा | वास्तविक, उल्टा | | F पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक, उल्टा | | P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |

  • उपयोग (Uses):
  • टॉर्च, सर्चलाइट और वाहनों की हेडलाइट में परावर्तक के रूप में (समानांतर प्रकाश पुंज प्राप्त करने के लिए)।
  • शेविंग दर्पण के रूप में (बड़ा, सीधा प्रतिबिंब देखने के लिए)।
  • दंत चिकित्सक दांतों का बड़ा प्रतिबिंब देखने के लिए।
  • सौर भट्टियों में सूर्य के प्रकाश को केंद्रित करने के लिए।

उत्तल दर्पण (Convex Mirror)

  • परावर्तक सतह बाहर की ओर मुड़ी हुई (Reflecting surface curved outwards) होती है।
  • अपसारी दर्पण (Diverging Mirror): यह समानांतर प्रकाश किरणों को फैलाता है।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के नियम (Rules for Image Formation by Convex Mirror)
  1. मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद फोकस (F) से अपसरित होती हुई प्रतीत होती है।
  2. फोकस (F) की ओर निर्देशित होने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
  3. वक्रता केंद्र (C) की ओर निर्देशित होने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के बाद उसी पथ पर वापस लौट जाती है।
  4. ध्रुव (P) पर आपतित किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के साथ समान कोण बनाते हुए परावर्तित होती है।
उत्तल दर्पण द्वारा विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिंब (Images formed by Convex Mirror at different positions)

| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति | |---|---|---|---| | अनंत पर | फोकस (F) पर (दर्पण के पीछे) | अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार | आभासी, सीधा | | अनंत और P के बीच | P और F के बीच (दर्पण के पीछे) | छोटा | आभासी, सीधा |

  • उपयोग (Uses):
  • वाहनों में रियर-व्यू मिरर (Rear-view mirror) के रूप में (बड़े क्षेत्र का छोटा, सीधा प्रतिबिंब देखने के लिए)।
  • दुकानों और मॉल में सुरक्षा दर्पण के रूप में।

दर्पण सूत्र (Mirror Formula)

\(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}\) जहाँ:

  • \(f\) = दर्पण की फोकस दूरी (Focal length)
  • \(v\) = प्रतिबिंब की दूरी (Image distance)
  • \(u\) = वस्तु की दूरी (Object distance)

आवर्धन (Magnification)

\(m = \frac{h'}{h} = -\frac{v}{u}\) जहाँ:

  • \(h'\) = प्रतिबिंब की ऊँचाई (Height of image)
  • \(h\) = वस्तु की ऊँचाई (Height of object)

चिन्ह परिपाटी (Sign Convention) - कार्टेशियन चिन्ह परिपाटी

  • सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (P) से मापी जाती हैं।
  • आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक (+) होती हैं।
  • आपतित प्रकाश की दिशा के विपरीत मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक (-) होती हैं।
  • मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक (+) होती है।
  • मुख्य अक्ष के नीचे की ऊँचाई ऋणात्मक (-) होती है।

| राशि | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण | |---|---|---| | फोकस दूरी (f) | ऋणात्मक (-) | धनात्मक (+) | | वस्तु दूरी (u) | हमेशा ऋणात्मक (-) | हमेशा ऋणात्मक (-) | | वास्तविक प्रतिबिंब (v) | ऋणात्मक (-) | - | | आभासी प्रतिबिंब (v) | धनात्मक (+) | धनात्मक (+) | | वास्तविक प्रतिबिंब (h') | ऋणात्मक (-) | - | | आभासी प्रतिबिंब (h') | धनात्मक (+) | धनात्मक (+) |

ముఖ్యమైనది

परावर्तन के नियम सभी प्रकार की परावर्तक सतहों पर लागू होते हैं, चाहे वे समतल हों या गोलीय।

💡సూచన

किरण आरेख (Ray Diagrams) का अभ्यास करें। यह अवतल और उत्तल दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण को समझने और बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light)

प्रकाश का अपवर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करते समय अपनी दिशा बदल लेती है। यह प्रकाश की चाल में परिवर्तन के कारण होता है।

अपवर्तन के नियम (Laws of Refraction) - स्नेल का नियम (Snell's Law)

  1. आपतित किरण (Incident ray), अपवर्तित किरण (Refracted ray) और दो माध्यमों को अलग करने वाली सतह के आपतन बिंदु पर अभिलंब (Normal to the interface at the point of incidence) तीनों एक ही तल में होते हैं।
  2. किन्हीं दो माध्यमों और प्रकाश के किसी विशेष रंग के लिए, आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात स्थिर होता है।

\(\frac{\sin i}{\sin r} = \text{स्थिरांक (constant)} = n_{21}\) जहाँ \(n_{21}\) माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक (Refractive Index) है।

अपवर्तनांक (Refractive Index, n)

  • यह दर्शाता है कि किसी माध्यम में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल की तुलना में कितनी कम है।
  • निरपेक्ष अपवर्तनांक (Absolute Refractive Index): \(n_m = \frac{\text{निर्वात में प्रकाश की चाल (c)}}{\text{माध्यम में प्रकाश की चाल (v)}}\)
  • सापेक्ष अपवर्तनांक (Relative Refractive Index): \(n_{21} = \frac{n_2}{n_1} = \frac{v_1}{v_2}\)
  • यदि \(n_2 > n_1\), तो माध्यम 2 माध्यम 1 की तुलना में सघन (denser) है। प्रकाश अभिलंब की ओर मुड़ता है।
  • यदि \(n_2 < n_1\), तो माध्यम 2 माध्यम 1 की तुलना में विरल (rarer) है। प्रकाश अभिलंब से दूर मुड़ता है।

लेंस (Lenses)

लेंस पारदर्शी पदार्थ के बने होते हैं जिनके एक या दोनों पृष्ठ गोलीय होते हैं।

उत्तल लेंस (Convex Lens)

  • बीच में मोटा और किनारों पर पतला (Thicker in the middle, thinner at edges) होता है।
  • अभिसारी लेंस (Converging Lens): यह समानांतर प्रकाश किरणों को एक बिंदु पर केंद्रित करता है।
  • फोकस दूरी (f) धनात्मक (+) होती है।
उत्तल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के नियम (Rules for Image Formation by Convex Lens)
  1. मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरण अपवर्तन के बाद द्वितीय मुख्य फोकस (F2) से होकर गुजरती है।
  2. प्रथम मुख्य फोकस (F1) से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
  3. प्रकाशिक केंद्र (O) से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण बिना विचलित हुए सीधी निकल जाती है।
उत्तल लेंस द्वारा विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिंब (Images formed by Convex Lens at different positions)

| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति | |---|---|---|---| | अनंत पर | F2 पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार | वास्तविक, उल्टा | | 2F1 से परे | F2 और 2F2 के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा | | 2F1 पर | 2F2 पर | समान आकार | वास्तविक, उल्टा | | F1 और 2F1 के बीच | 2F2 से परे | बड़ा | वास्तविक, उल्टा | | F1 पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक, उल्टा | | F1 और O के बीच | वस्तु की ओर, लेंस के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |

  • उपयोग (Uses):
  • आवर्धक लेंस (Magnifying glass) के रूप में।
  • कैमरा, दूरबीन, सूक्ष्मदर्शी में।
  • दूरदृष्टि दोष (Hypermetropia) के निवारण में।

अवतल लेंस (Concave Lens)

  • बीच में पतला और किनारों पर मोटा (Thinner in the middle, thicker at edges) होता है।
  • अपसारी लेंस (Diverging Lens): यह समानांतर प्रकाश किरणों को फैलाता है।
  • फोकस दूरी (f) ऋणात्मक (-) होती है।
अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के नियम (Rules for Image Formation by Concave Lens)
  1. मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरण अपवर्तन के बाद द्वितीय मुख्य फोकस (F2) से अपसरित होती हुई प्रतीत होती है।
  2. प्रथम मुख्य फोकस (F1) की ओर निर्देशित होने वाली प्रकाश किरण अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
  3. प्रकाशिक केंद्र (O) से होकर गुजरने वाली प्रकाश किरण बिना विचलित हुए सीधी निकल जाती है।
अवतल लेंस द्वारा विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिंब (Images formed by Concave Lens at different positions)

| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति | |---|---|---|---| | अनंत पर | F1 पर (लेंस के सामने) | अत्यधिक छोटा, बिंदु आकार | आभासी, सीधा | | अनंत और O के बीच | F1 और O के बीच (लेंस के सामने) | छोटा | आभासी, सीधा |

  • उपयोग (Uses):
  • निकटदृष्टि दोष (Myopia) के निवारण में।
  • कुछ दूरबीनों और दरवाजों के पीपहोल (peephole) में।

लेंस सूत्र (Lens Formula)

\(\frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u}\) जहाँ:

  • \(f\) = लेंस की फोकस दूरी (Focal length)
  • \(v\) = प्रतिबिंब की दूरी (Image distance)
  • \(u\) = वस्तु की दूरी (Object distance)

लेंस की क्षमता (Power of Lens, P)

  • यह लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित या अपसरित करने की क्षमता का माप है।
  • \(P = \frac{1}{f}\) (जहाँ \(f\) मीटर में हो)
  • मात्रक (Unit): डायोप्टर (Dioptre, D)।
  • उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक (+) और अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक (-) होती है।
🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर दर्पण सूत्र और लेंस सूत्र में '+' और '-' के चिन्हों को लेकर भ्रमित होते हैं। याद रखें: दर्पण सूत्र में '+' और लेंस सूत्र में '-' होता है।

🧮సూత్రం

लेंस की क्षमता (Power of Lens): \(P = \frac{1}{f}\) (फोकस दूरी मीटर में) मात्रक: डायोप्टर (D)

इंद्रधनुष और प्रकाश का वर्ण विक्षेपण (Rainbow and Dispersion of Light)

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light)

  • सफेद प्रकाश का अपने घटक रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल - VIBGYOR) में विभाजित होने की घटना को प्रकाश का वर्ण विक्षेपण कहते हैं।
  • यह तब होता है जब सफेद प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम (जैसे प्रिज्म या पानी की बूंद) से गुजरता है।
  • प्रत्येक रंग का प्रकाश अलग-अलग कोणों पर अपवर्तित होता है क्योंकि विभिन्न रंगों के लिए माध्यम का अपवर्तनांक थोड़ा भिन्न होता है (बैंगनी रंग का विचलन सबसे अधिक और लाल रंग का सबसे कम होता है)।

स्पेक्ट्रम (Spectrum)

  • वर्ण विक्षेपण के बाद प्राप्त रंगों के बैंड को स्पेक्ट्रम कहते हैं।
  • सफेद प्रकाश का स्पेक्ट्रम सात रंगों का होता है: बैंगनी (Violet), जामुनी (Indigo), नीला (Blue), हरा (Green), पीला (Yellow), नारंगी (Orange), लाल (Red)।

इंद्रधनुष (Rainbow)

  • इंद्रधनुष एक प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है जो बारिश के बाद या पानी की फुहार में आकाश में दिखाई देता है।
  • यह सूर्य के प्रकाश के वर्ण विक्षेपण (Dispersion), आंतरिक परावर्तन (Internal Reflection) और अपवर्तन (Refraction) के कारण होता है, जब यह पानी की छोटी बूंदों से होकर गुजरता है।

इंद्रधनुष बनने की प्रक्रिया (Process of Rainbow Formation)

  1. सूर्य का प्रकाश वर्षा की बूंद में प्रवेश करता है और अपवर्तित (refracts) होता है।
  2. बूंद के अंदर, प्रकाश अपने सात घटक रंगों में वर्ण विक्षेपित (disperses) हो जाता है।
  3. ये रंगीन किरणें बूंद की पिछली सतह से आंतरिक रूप से परावर्तित (internally reflect) होती हैं।
  4. परावर्तित किरणें बूंद से बाहर निकलते समय फिर से अपवर्तित (refract) होती हैं और दर्शक की आँखों तक पहुँचती हैं, जिससे इंद्रधनुष दिखाई देता है।
  • इंद्रधनुष हमेशा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखाई देता है।

न्यूटन की डिस्क (Newton's Disc)

  • यह एक ऐसी डिस्क है जिस पर VIBGYOR के सात रंग समान अनुपात में चित्रित होते हैं।
  • जब इस डिस्क को तेजी से घुमाया जाता है, तो सभी रंग आपस में मिल जाते हैं और डिस्क सफेद (white) दिखाई देती है।
  • यह दर्शाता है कि सफेद प्रकाश वास्तव में सात रंगों का मिश्रण है।
ముఖ్యమైనది

इंद्रधनुष के निर्माण में प्रकाश की तीन घटनाएँ शामिल होती हैं: अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण और पूर्ण आंतरिक परावर्तन।

గుర్తుంచుకోండి

VIBGYOR क्रम याद रखें: Violet, Indigo, Blue, Green, Yellow, Orange, Red.

मानव आँख (Human Eye)

मानव आँख एक अद्भुत प्रकाश संवेदी अंग है जो हमें अपने आसपास की दुनिया को देखने में मदद करता है।

मानव आँख की संरचना (Structure of Human Eye)

  • कॉर्निया (Cornea): आँख के सामने का पारदर्शी, उभरा हुआ भाग। यह प्रकाश को आँख में प्रवेश करने देता है और अधिकांश अपवर्तन यहीं होता है।
  • आइरिस (Iris): कॉर्निया के पीछे एक गहरा पेशीय डायफ्राम। यह पुतली के आकार को नियंत्रित करता है।
  • पुतली (Pupil): आइरिस के केंद्र में एक छोटा सा छिद्र। यह आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है।
  • लेंस (Lens): एक उत्तल लेंस जो सिलियरी पेशियों (Ciliary muscles) द्वारा अपनी स्थिति में रहता है। यह रेटिना पर प्रकाश को केंद्रित करता है।
  • सिलियरी पेशियाँ (Ciliary Muscles): ये लेंस की वक्रता को बदलकर उसकी फोकस दूरी को समायोजित करती हैं, जिससे विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सके। इस क्षमता को समंजन क्षमता (Power of Accommodation) कहते हैं।
  • रेटिना (Retina): आँख के पिछले भाग में एक प्रकाश-संवेदी पर्दा। इसमें प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ (rods and cones) होती हैं जो प्रकाश को विद्युत संकेतों में परिवर्तित करती हैं।
  • छड़ कोशिकाएँ (Rods): कम प्रकाश में देखने के लिए संवेदनशील।
  • शंकु कोशिकाएँ (Cones): तेज प्रकाश में रंग देखने के लिए संवेदनशील।
  • ऑप्टिक तंत्रिका (Optic Nerve): विद्युत संकेतों को रेटिना से मस्तिष्क तक ले जाती है।
  • अंध बिंदु (Blind Spot): रेटिना पर वह बिंदु जहाँ ऑप्टिक तंत्रिका आँख छोड़ती है। यहाँ कोई प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ नहीं होती हैं, इसलिए यहाँ कोई प्रतिबिंब नहीं बनता।
  • पीत बिंदु (Yellow Spot/Macula): रेटिना के केंद्र में एक छोटा सा क्षेत्र जहाँ शंकु कोशिकाओं की सघनता सबसे अधिक होती है, जिससे सबसे स्पष्ट दृष्टि मिलती है।

दृष्टि दोष (Defects of Vision)

मानव आँख में कुछ सामान्य दोष होते हैं जिन्हें उचित लेंस का उपयोग करके ठीक किया जा सकता है।

1. निकट-दृष्टि दोष (Myopia / Short-sightedness)

  • कारण:
  • नेत्रगोलक का अत्यधिक लंबा होना।
  • लेंस की फोकस दूरी का कम होना (लेंस की अभिसारी शक्ति का बढ़ जाना)।
  • लक्षण: दूर की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं, लेकिन पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं। प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है।
  • निवारण: अवतल लेंस (Concave lens) का उपयोग करके। अवतल लेंस प्रकाश किरणों को अपसरित करता है, जिससे प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।

2. दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia / Long-sightedness)

  • कारण:
  • नेत्रगोलक का अत्यधिक छोटा होना।
  • लेंस की फोकस दूरी का अधिक होना (लेंस की अभिसारी शक्ति का कम हो जाना)।
  • लक्षण: पास की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं, लेकिन दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं। प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।
  • निवारण: उत्तल लेंस (Convex lens) का उपयोग करके। उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को अभिसरित करता है, जिससे प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।

3. जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia)

  • कारण: उम्र बढ़ने के साथ सिलियरी पेशियों का कमजोर होना और लेंस के लचीलेपन में कमी आना, जिससे समंजन क्षमता कम हो जाती है।
  • लक्षण: पास और दूर दोनों की वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है।
  • निवारण: द्विफोकसी लेंस (Bifocal lens) का उपयोग करके (ऊपरी भाग अवतल और निचला भाग उत्तल होता है)।

4. मोतियाबिंद (Cataract)

  • कारण: उम्र बढ़ने के साथ आँख का लेंस दूधिया और धुंधला हो जाता है।
  • लक्षण: दृष्टि आंशिक या पूर्ण रूप से बाधित हो जाती है।
  • निवारण: शल्य चिकित्सा द्वारा धुंधले लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस (artificial lens) लगाना।
📖నిర్వచనం

समंजन क्षमता (Power of Accommodation): आँख के लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाता है।

💡సూచన

दृष्टि दोषों के कारण, लक्षण और निवारण के लिए उपयोग किए जाने वाले लेंस को याद रखना बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

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