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AP · Class 10 · 📘 Social · Chapter 1

POWER SHARING

అధికార భాగస్వామ్యంబహుసంఖ్యాకవాదంబెల్జియం నమూనాశ్రీలంకలో అంతర్యుద్ధంఅధికార భాగస్వామ్య రూపాలుక్షితిజ సమాంతర పంపిణీ

ఈ అధ్యాయం 'అధికార భాగస్వామ్యం' యొక్క ప్రాముఖ్యతను వివరిస్తుంది. బెల్జియం మరియు శ్రీలంక దేశాల ఉదాహరణల ద్వారా అధికార భాగస్వామ్యం యొక్క ప్రయోజనాలు మరియు లోపాలను వివరిస్తుంది. అధికార భాగస్వామ్యం ఎందుకు అవసరం, ప్రజాస్వామ్యానికి అది ఎలా ఆత్మ వంటిది, మరియు ప్రభుత్వంలోని వివిధ అంగాల మధ్య, వివిధ స్థాయిల మధ్య, అలాగే వివిధ సామాజిక సమూహాల మధ్య అధికారం ఎలా పంచుకోబడుతుందో ఈ అధ్యాయం వివరిస్తుంది. ఇది విద్యార్థులకు ప్రజాస్వామ్య వ్యవస్థల పనితీరుపై లోతైన అవగాహనను అందిస్తుంది.

सत्ता की साझेदारी का परिचय

लोकतंत्र में, सत्ता की साझेदारी का अर्थ है कि सरकार की शक्ति किसी एक अंग या व्यक्ति के हाथ में न होकर, विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों के बीच बँटी होती है। यह लोकतंत्र की आत्मा है।

  • सत्ता की साझेदारी (Power Sharing): शासन की शक्ति का विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों के बीच बँटवारा।
  • महत्व:
  • सामाजिक समूहों के बीच संघर्ष की संभावना को कम करता है।
  • राजनीतिक व्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करता है।
  • लोकतंत्र की भावना को बनाए रखता है।
  • सरकार के अंग:
  • विधायिका (Legislature): कानून बनाती है।
  • कार्यपालिका (Executive): कानूनों को लागू करती है।
  • न्यायपालिका (Judiciary): कानूनों की व्याख्या करती है।
  • सरकार के स्तर:
  • केंद्रीय सरकार (Central Government): पूरे देश के लिए।
  • राज्य सरकार (State Government): राज्यों के लिए।
  • स्थानीय सरकार (Local Government): जिला, मंडल और ग्राम स्तर पर।
  • जातीय (Ethnic) समूह: एक सामाजिक विभाजन जो साझा संस्कृति पर आधारित होता है। एक ही जातीय समूह के लोग अपनी सामान्य वंश परंपरा में विश्वास करते हैं क्योंकि उनकी शारीरिक बनावट या संस्कृति या दोनों समान होते हैं। उनका धर्म या राष्ट्रीयता हमेशा एक जैसी होना आवश्यक नहीं है।
ముఖ్యమైనది

लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी ही उसकी आत्मा है।

बेल्जियम में सत्ता की साझेदारी का मॉडल

बेल्जियम यूरोप का एक छोटा सा देश है, जिसका क्षेत्रफल हरियाणा राज्य से भी कम है। इसकी सीमाएँ फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और लक्ज़मबर्ग से लगती हैं।

  • जातीय संरचना (Ethnic Composition):
  • कुल जनसंख्या: 1 करोड़ से थोड़ी अधिक (हरियाणा की आधी)।
  • देश में:
  • 59% फ्लेमिश क्षेत्र में रहते हैं और डच बोलते हैं।
  • 40% वालोनिया क्षेत्र में रहते हैं और फ्रेंच बोलते हैं।
  • शेष 1% जर्मन बोलते हैं।
  • राजधानी ब्रुसेल्स में:
  • 80% लोग फ्रेंच बोलते हैं।
  • 20% लोग डच बोलते हैं।
  • समस्या:
  • अल्पसंख्यक फ्रेंच-भाषी समुदाय तुलनात्मक रूप से अधिक समृद्ध और शक्तिशाली था।
  • डच-भाषी समुदाय को आर्थिक विकास और शिक्षा का लाभ बहुत बाद में मिला, जिससे उनमें असंतोष था।
  • 1950 और 1960 के दशक में डच और फ्रेंच-भाषी समुदायों के बीच तनाव बढ़ा।
  • ब्रुसेल्स में समस्या अधिक गंभीर थी: देश में डच-भाषी बहुसंख्यक थे, लेकिन राजधानी में अल्पसंख्यक।
  • बेल्जियम मॉडल (1970-1993): बेल्जियम के नेताओं ने क्षेत्रीय विविधताओं और सांस्कृतिक भिन्नताओं को पहचाना और 1970 से 1993 के बीच अपने संविधान में चार बार संशोधन किए ताकि सभी को एक साथ रहने का अवसर मिल सके।
  • संविधान में प्रावधान:
  • केंद्रीय सरकार में डच और फ्रेंच-भाषी मंत्रियों की संख्या समान होगी।
  • केंद्रीय सरकार की कई शक्तियाँ देश के दो क्षेत्रों की राज्य सरकारों को दी गईं।
  • ब्रुसेल्स में एक अलग सरकार है जिसमें दोनों समुदायों का समान प्रतिनिधित्व है।
  • सामुदायिक सरकार (Community Government):
  • यह एक तीसरी प्रकार की सरकार है।
  • यह एक भाषा समुदाय (डच, फ्रेंच और जर्मन-भाषी) के लोगों द्वारा चुनी जाती है, चाहे वे कहीं भी रहते हों।
  • इस सरकार के पास सांस्कृतिक, शैक्षिक और भाषा संबंधी मुद्दों पर निर्णय लेने की शक्ति है।
  • परिणाम:
  • इस मॉडल ने दोनों प्रमुख समुदायों के बीच नागरिक संघर्ष और देश के भाषाई आधार पर संभावित विभाजन को टाल दिया।
  • जब यूरोपीय संघ का गठन हुआ, तो ब्रुसेल्स को उसका मुख्यालय चुना गया।

निष्कर्ष: बेल्जियम ने समझदारी से सत्ता की साझेदारी करके अपने देश को टूटने से बचाया और शांति व स्थिरता स्थापित की।

💡సూచన

बेल्जियम मॉडल के मुख्य तत्वों को याद रखें, खासकर सामुदायिक सरकार की अवधारणा। यह अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में पूछा जाता है।

श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism)

श्रीलंका भारत के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर दूर एक द्वीपीय राष्ट्र है। इसकी जनसंख्या लगभग 2 करोड़ है, जो हरियाणा के बराबर है।

  • जातीय संरचना:
  • सिंहली-भाषी: 74% (अधिकांश बौद्ध)।
  • तमिल-भाषी: 18%
  • श्रीलंकाई तमिल: 13% (देश के मूल निवासी, उत्तर और पूर्व में केंद्रित)।
  • भारतीय तमिल: 5% (औपनिवेशिक काल में बागानों में काम करने आए भारतीयों के वंशज)।
  • ईसाई: 7% (सिंहली और तमिल दोनों)।
  • बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism): यह एक ऐसी मान्यता है कि बहुसंख्यक समुदाय को देश पर अपनी इच्छानुसार शासन करने में सक्षम होना चाहिए, अल्पसंख्यकों की इच्छाओं और जरूरतों की अनदेखी करके।
  • श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद:
  • 1948 में श्रीलंका एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
  • सिंहली समुदाय के नेताओं ने अपनी बहुसंख्यक संख्या के बल पर सरकार पर प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास किया।
  • लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार ने सिंहली वर्चस्व स्थापित करने के लिए कई बहुसंख्यकवादी उपाय अपनाए।
  • बहुसंख्यकवादी उपाय (1956 के बाद):
  • 1956 का अधिनियम: सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया, जिससे तमिल भाषा की उपेक्षा हुई।
  • तरजीही नीतियाँ: सिंहली आवेदकों को विश्वविद्यालय के पदों और सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी गई।
  • नया संविधान: राज्य बौद्ध धर्म की रक्षा और उसे बढ़ावा देगा।
  • परिणाम:
  • इन सरकारी उपायों से श्रीलंकाई तमिलों में अलगाव की भावना बढ़ी।
  • उन्हें लगा कि बौद्ध सिंहली नेताओं द्वारा संचालित कोई भी प्रमुख राजनीतिक दल उनकी भाषा और संस्कृति के प्रति संवेदनशील नहीं है।
  • उन्हें लगा कि संविधान और सरकारी नीतियाँ उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वंचित करती हैं, नौकरियों और अन्य अवसरों में उनके साथ भेदभाव करती हैं, और उनके हितों की अनदेखी करती हैं।
  • परिणामस्वरूप, सिंहली और तमिल समुदायों के बीच संबंध समय के साथ तनावपूर्ण हो गए।
  • गृहयुद्ध (Civil War):
  • श्रीलंकाई तमिलों ने तमिल को राजभाषा के रूप में मान्यता देने, क्षेत्रीय स्वायत्तता और शिक्षा व रोजगार में समान अवसरों के लिए संघर्ष शुरू किया।
  • तमिल बहुल प्रांतों को अधिक स्वायत्तता देने की उनकी मांग बार-बार ठुकराई गई।
  • 1980 के दशक तक, उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका में एक स्वतंत्र तमिल ईलम (राज्य) की मांग करने वाले कई राजनीतिक संगठन बने।
  • दोनों समुदायों के बीच अविश्वास व्यापक संघर्ष में बदल गया और जल्द ही गृहयुद्ध का रूप ले लिया।
  • हजारों लोग मारे गए, कई परिवार शरणार्थी के रूप में देश छोड़ने को मजबूर हुए, और कई लोगों ने अपनी आजीविका खो दी।
  • गृहयुद्ध (2009 में समाप्त) ने देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन को भयानक झटका दिया।

निष्कर्ष: श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद की नीति अपनाकर अपने देश में गृहयुद्ध को जन्म दिया, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ और देश का विकास बाधित हुआ।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर बेल्जियम और श्रीलंका के मामलों को मिला देते हैं। याद रखें, बेल्जियम ने सत्ता साझा की और शांति पाई, जबकि श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद अपनाया और गृहयुद्ध का सामना किया।

सत्ता की साझेदारी क्यों वांछनीय है?

बेल्जियम और श्रीलंका के उदाहरण हमें सत्ता की साझेदारी के महत्व को स्पष्ट रूप से समझाते हैं। सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो मुख्य तर्क दिए जा सकते हैं:

  • विवेकपूर्ण कारण (Prudential Reasons):
  • यह सामाजिक समूहों के बीच संघर्ष की संभावना को कम करने में मदद करता है।
  • सामाजिक संघर्ष अक्सर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता को जन्म देता है।
  • बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को दूसरों पर थोपना अल्पकाल में आकर्षक लग सकता है, लेकिन दीर्घकाल में यह राष्ट्र की एकता को कमजोर करता है।
  • सत्ता की साझेदारी राजनीतिक व्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करने का एक अच्छा तरीका है।
  • नैतिक कारण (Moral Reasons):
  • सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है।
  • एक लोकतांत्रिक शासन में शक्ति उन लोगों के साथ साझा की जाती है जो इसके प्रयोग से प्रभावित होते हैं और जिन्हें इसके प्रभावों के साथ जीना होता है।
  • लोगों को यह अधिकार है कि उनसे कैसे शासन किया जाए, इस बारे में सलाह ली जाए।
  • एक वैध सरकार वह है जिसमें नागरिक भागीदारी के माध्यम से सत्ता में हिस्सेदारी प्राप्त करते हैं।

| विशेषताएँ | विवेकपूर्ण कारण | नैतिक कारण | |---|---|---| | आधार | लाभ और हानि की सावधानीपूर्वक गणना (परिणामों पर जोर) | अंतर्निहित मूल्य और सिद्धांत (नैतिकता पर जोर) | | मुख्य तर्क | संघर्ष कम करता है, स्थिरता लाता है, हिंसा से बचाता है | लोकतंत्र की आत्मा, लोगों का अधिकार, वैध सरकार | | दीर्घकालिक प्रभाव | राष्ट्र की एकता को मजबूत करता है | लोकतंत्र को मजबूत और समावेशी बनाता है |

📖నిర్వచనం

विवेकपूर्ण (Prudential): विवेक या लाभ-हानि की सावधानीपूर्वक गणना पर आधारित। विवेकपूर्ण निर्णय आमतौर पर केवल नैतिक विचारों पर आधारित निर्णयों के विपरीत होते हैं।

सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूप

आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के कई रूप प्रचलित हैं।

  1. सरकार के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता की साझेदारी (क्षैतिज वितरण - Horizontal Distribution):
  • सत्ता विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसे सरकार के विभिन्न अंगों के बीच साझा की जाती है।
  • कोई भी अंग असीमित शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता।
  • यह नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था (Checks and Balances) सुनिश्चित करता है।
  • उदाहरण: न्यायपालिका कार्यपालिका के कामकाज या विधायिका द्वारा बनाए गए कानूनों की जाँच कर सकती है।
  • लाभ: शक्ति के केंद्रीकरण को रोकता है, प्रत्येक अंग को दूसरे पर नियंत्रण रखने की अनुमति देता है।
  1. सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच सत्ता की साझेदारी (ऊर्ध्वाधर वितरण - Vertical Distribution):
  • सत्ता पूरे देश के लिए एक सामान्य सरकार (केंद्रीय या संघीय सरकार) और प्रांतीय या क्षेत्रीय स्तरों पर सरकारों के बीच साझा की जाती है।
  • भारत में: केंद्रीय सरकार, राज्य सरकारें, और स्थानीय सरकारें (जिला, मंडल और ग्राम स्तर)।
  • इसे संघीय शासन (Federalism) भी कहा जाता है।
  • लाभ: विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं और विविधताओं को समायोजित करता है, स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा देता है।
  1. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी:
  • सत्ता धार्मिक और भाषाई समूहों जैसे विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच साझा की जा सकती है।
  • उदाहरण: बेल्जियम में 'सामुदायिक सरकार'।
  • यह अल्पसंख्यक समुदायों को सरकार में प्रतिनिधित्व देने का एक तरीका है।
  • लाभ: अल्पसंख्यक समुदायों को हाशिए पर जाने से रोकता है, सामाजिक विविधता का सम्मान करता है।
  1. राजनीतिक दलों, दबाव समूहों और आंदोलनों के बीच सत्ता की साझेदारी:
  • सत्ता उन लोगों द्वारा नियंत्रित या प्रभावित होती है जो सत्ता में हैं।
  • गठबंधन सरकार (Coalition Government): जब दो या दो से अधिक दल चुनाव लड़ने के लिए गठबंधन बनाते हैं और यदि वे चुने जाते हैं, तो वे एक गठबंधन सरकार बनाते हैं और इस प्रकार सत्ता साझा करते हैं।
  • दबाव समूह (Pressure Groups) और आंदोलन (Movements): ये सरकार की नीतियों को प्रभावित करके सत्ता साझा करते हैं। वे सरकार पर दबाव डालकर अपने हितों को बढ़ावा देते हैं।
  • लाभ: विभिन्न हितों और विचारों को प्रतिनिधित्व मिलता है, सरकार को अधिक जवाबदेह बनाता है।

सारांश: सत्ता की साझेदारी के ये विभिन्न रूप सुनिश्चित करते हैं कि लोकतंत्र में शक्ति का विकेंद्रीकरण हो और सभी वर्गों और स्तरों को शासन में भागीदारी का अवसर मिले।

గుర్తుంచుకోండి

नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था (Checks and Balances) क्षैतिज वितरण का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जबकि संघीय शासन (Federalism) ऊर्ध्वाधर वितरण का एक उदाहरण है।

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