Acids and Bases
ఈ అధ్యాయం ఆమ్లాలు మరియు క్షారాల ప్రాథమిక లక్షణాలను పరిచయం చేస్తుంది, వాటి రుచి, స్పర్శ మరియు తుప్పు పట్టే స్వభావం వంటివి. లిట్మస్, ఫినాల్ఫ్తలీన్, మిథైల్ ఆరెంజ్ వంటి సూచికలను ఉపయోగించి ఆమ్లాలు మరియు క్షారాలను ఎలా గుర్తించాలో వివరిస్తుంది. అలాగే, ఉల్లిపాయ, లవంగ నూనె, వెనిల్లా ఎసెన్స్ వంటి ఘ్రాణ సూచికల గురించి కూడా చర్చిస్తుంది. లోహాలు, లోహ కార్బోనేట్లు మరియు లోహ హైడ్రోజన్ కార్బోనేట్లతో ఆమ్లాలు మరియు క్షారాల రసాయన చర్యలను ఈ అధ్యాయం వివరిస్తుంది, హైడ్రోజన్ మరియు కార్బన్ డయాక్సైడ్ వాయువుల ఉత్పత్తిని నొక్కి చెబుతుంది. విద్యుత్ వాహకత మరియు అయాన్ల ఏర్పాటు గురించి కూడా తెలుసుకుంటారు. ఈ అధ్యాయం రసాయన శాస్త్రంలో ఆమ్లాలు మరియు క్షారాల ప్రాముఖ్యతను అర్థం చేసుకోవడానికి పునాదిని అందిస్తుంది.
अम्ल और क्षार की पहचान: सूचक (Indicators)
अम्ल (Acids) और क्षार (Bases) ऐसे पदार्थ हैं जो रासायनिक रूप से एक-दूसरे से भिन्न होते हैं. इन्हें पहचानने के लिए हम सूचकों (Indicators) का उपयोग करते हैं.
1.1 सूचक (Indicators)
सूचक ऐसे पदार्थ होते हैं जो अम्ल या क्षार के संपर्क में आने पर अपना रंग या गंध बदल देते हैं. ये हमें बताते हैं कि दिया गया पदार्थ अम्लीय है या क्षारीय.
1.1.1 प्राकृतिक सूचक (Natural Indicators)
ये प्रकृति में पाए जाते हैं.
- लिटमस (Litmus): सबसे सामान्य प्राकृतिक सूचक. यह लाइकेन (Lichen) से प्राप्त होता है.
- अम्लीय विलयन में: नीले लिटमस को लाल कर देता है.
- क्षारीय विलयन में: लाल लिटमस को नीला कर देता है.
- उदासीन विलयन में: कोई रंग परिवर्तन नहीं.
- हल्दी (Turmeric):
- अम्लीय विलयन में: पीला रंग रहता है.
- क्षारीय विलयन में: लाल-भूरा हो जाता है. (जैसे साबुन के घोल में)
- लाल पत्ता गोभी का रस (Red Cabbage Juice):
- अम्लीय विलयन में: लाल रंग.
- क्षारीय विलयन में: हरा रंग.
1.1.2 संश्लेषित सूचक (Synthetic Indicators)
ये प्रयोगशाला में बनाए जाते हैं.
- फिनोल्फथेलिन (Phenolphthalein):
- अम्लीय विलयन में: रंगहीन.
- क्षारीय विलयन में: गुलाबी रंग.
- मिथाइल ऑरेंज (Methyl Orange):
- अम्लीय विलयन में: लाल रंग.
- क्षारीय विलयन में: पीला रंग.
1.1.3 गंधीय सूचक (Olfactory Indicators)
ये ऐसे पदार्थ हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है. ये दृष्टिबाधित छात्रों के लिए उपयोगी होते हैं.
- प्याज (Onion):
- अम्लीय विलयन में: तीव्र गंध बरकरार रहती है.
- क्षारीय विलयन में: गंध समाप्त हो जाती है.
- वैनिला एसेंस (Vanilla Essence):
- अम्लीय विलयन में: गंध बरकरार रहती है.
- क्षारीय विलयन में: गंध समाप्त हो जाती है.
- लौंग का तेल (Clove Oil):
- अम्लीय विलयन में: गंध बरकरार रहती है.
- क्षारीय विलयन में: गंध समाप्त हो जाती है.
1.1.4 सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator)
यह कई सूचकों का मिश्रण होता है जो अम्ल और क्षार की प्रबलता के आधार पर विभिन्न रंग देता है. यह pH स्केल पर pH मान निर्धारित करने में मदद करता है.
अम्ल और क्षार को कभी भी चखकर या छूकर नहीं पहचानना चाहिए क्योंकि वे संक्षारक (corrosive) हो सकते हैं और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
गंधीय सूचकों का उपयोग दृष्टिबाधित छात्रों द्वारा अम्ल और क्षार की पहचान के लिए किया जा सकता है.
अम्ल और क्षार के रासायनिक गुणधर्म
अम्ल और क्षार विभिन्न पदार्थों के साथ अलग-अलग तरह से अभिक्रिया करते हैं. इन अभिक्रियाओं को समझना महत्वपूर्ण है.
2.1 धातुओं के साथ अभिक्रिया (Reaction with Metals)
2.1.1 अम्ल की धातुओं के साथ अभिक्रिया
- अम्ल + धातु $\rightarrow$ लवण + हाइड्रोजन गैस
- अधिकांश अम्ल धातुओं के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण और हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) उत्पन्न करते हैं.
- उदाहरण:
- जिंक (Zn) की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ($\text{H}_2\text{SO}_4$) के साथ अभिक्रिया:
$\text{Zn(s)} + \text{H}_2\text{SO}_4\text{(aq)} \rightarrow \text{ZnSO}_4\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)}$
- जिंक (Zn) की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया:
$\text{Zn(s)} + 2\text{HCl(aq)} \rightarrow \text{ZnCl}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)}$
- हाइड्रोजन गैस का परीक्षण: जब जलती हुई माचिस की तीली या मोमबत्ती को हाइड्रोजन गैस के पास लाया जाता है, तो वह 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है. यह हाइड्रोजन गैस की उपस्थिति का सूचक है.
- ध्यान दें: सभी धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं, और कुछ धातुएँ बहुत धीरे अभिक्रिया करती हैं (जैसे कॉपर तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया नहीं करता).
2.1.2 क्षार की धातुओं के साथ अभिक्रिया
- क्षार + धातु $\rightarrow$ लवण + हाइड्रोजन गैस
- सभी क्षार धातुओं के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं. केवल कुछ धातुएँ जैसे जिंक (Zn), एल्यूमीनियम (Al) प्रबल क्षारों के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती हैं.
- उदाहरण:
- जिंक (Zn) की सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) के साथ अभिक्रिया:
$2\text{NaOH(aq)} + \text{Zn(s)} \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)}$ (सोडियम जिंकेट)
- निष्कर्ष: अम्ल और क्षार दोनों ही धातुओं के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस उत्पन्न कर सकते हैं, लेकिन सभी धातुएँ सभी अम्लों या क्षारों के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं.
2.2 धातु कार्बोनेट और धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया (Reaction with Metal Carbonates and Metal Hydrogen Carbonates)
2.2.1 अम्ल की धातु कार्बोनेट और धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया
- अम्ल + धातु कार्बोनेट $\rightarrow$ लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
- अम्ल + धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट $\rightarrow$ लवण + कार्बन डाइऑक्साइड + जल
- जब अम्ल धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करते हैं, तो वे संगत लवण, कार्बन डाइऑक्साइड गैस ($\text{CO}_2$) और जल उत्पन्न करते हैं.
- उदाहरण:
- सोडियम कार्बोनेट ($\text{Na}_2\text{CO}_3$) की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया:
$\text{Na}_2\text{CO}_3\text{(s)} + 2\text{HCl(aq)} \rightarrow 2\text{NaCl(aq)} + \text{CO}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{O(l)}$
- सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट ($\text{NaHCO}_3$) की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया:
$\text{NaHCO}_3\text{(s)} + \text{HCl(aq)} \rightarrow \text{NaCl(aq)} + \text{CO}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{O(l)}$
- कार्बन डाइऑक्साइड गैस का परीक्षण: कार्बन डाइऑक्साइड गैस को चूने के पानी (calcium hydroxide solution) में प्रवाहित करने पर चूने का पानी दूधिया हो जाता है. यह कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति का सूचक है.
$\text{Ca(OH)}_2\text{(aq)} + \text{CO}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CaCO}_3\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)}$ (चूने का पानी) (सफेद अवक्षेप)
- अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड प्रवाहित करने पर: यदि अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, तो दूधियापन गायब हो जाता है क्योंकि अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट, घुलनशील कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट में बदल जाता है.
$\text{CaCO}_3\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)} + \text{CO}_2\text{(g)} \rightarrow \text{Ca(HCO}_3)_2\text{(aq)}$
2.2.2 क्षार की धातु कार्बोनेट और धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया
- क्षार धातु कार्बोनेट या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं.
2.3 अम्ल और क्षार की परस्पर अभिक्रिया (उदासीनीकरण अभिक्रिया) (Reaction of Acids and Bases with each other - Neutralisation Reaction)
- अम्ल + क्षार $\rightarrow$ लवण + जल
- जब एक अम्ल और एक क्षार एक दूसरे के साथ अभिक्रिया करते हैं, तो वे एक दूसरे के प्रभाव को उदासीन कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप लवण और जल का निर्माण होता है. इस अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralisation Reaction) कहते हैं.
- उदाहरण:
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) और सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) की अभिक्रिया:
$\text{HCl(aq)} + \text{NaOH(aq)} \rightarrow \text{NaCl(aq)} + \text{H}_2\text{O(l)}$ (अम्ल) (क्षार) (लवण) (जल)
- यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (exothermic) होती है, अर्थात इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है.
2.4 धात्विक ऑक्साइडों की अम्लों के साथ अभिक्रिया (Reaction of Metallic Oxides with Acids)
- धात्विक ऑक्साइड + अम्ल $\rightarrow$ लवण + जल
- धात्विक ऑक्साइड प्रकृति में क्षारीय होते हैं, इसलिए वे अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, जैसे एक क्षार करता है.
- उदाहरण:
- कॉपर ऑक्साइड ($\text{CuO}$) की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) के साथ अभिक्रिया:
$\text{CuO(s)} + 2\text{HCl(aq)} \rightarrow \text{CuCl}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{O(l)}$ (कॉपर क्लोराइड का नीला-हरा रंग विलयन)
2.5 अधात्विक ऑक्साइडों की क्षारों के साथ अभिक्रिया (Reaction of Non-Metallic Oxides with Bases)
- अधात्विक ऑक्साइड + क्षार $\rightarrow$ लवण + जल
- अधात्विक ऑक्साइड प्रकृति में अम्लीय होते हैं, इसलिए वे क्षारों के साथ अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, जैसे एक अम्ल करता है.
- उदाहरण:
- कार्बन डाइऑक्साइड ($\text{CO}_2$) की कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{Ca(OH)}_2$) के साथ अभिक्रिया:
$\text{CO}_2\text{(g)} + \text{Ca(OH)}_2\text{(aq)} \rightarrow \text{CaCO}_3\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)}$ (चूने का पानी) (कैल्शियम कार्बोनेट)
2.6 जल में अम्ल और क्षार (Acids and Bases in Water)
- अम्ल: जल में घुलकर $\text{H}^+\text{(aq)}$ आयन (या हाइड्रोनियम आयन, $\text{H}_3\text{O}^+$) उत्पन्न करते हैं.
- $\text{HCl(g)} + \text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{H}_3\text{O}^+\text{(aq)} + \text{Cl}^-\text{(aq)}$
- अम्ल की अम्लीय प्रकृति उसके $\text{H}^+$ आयनों के कारण होती है.
- क्षार: जल में घुलकर $\text{OH}^-\text{(aq)}$ आयन उत्पन्न करते हैं.
- $\text{NaOH(s)} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}} \text{Na}^+\text{(aq)} + \text{OH}^-\text{(aq)}$
- क्षार की क्षारीय प्रकृति उसके $\text{OH}^-$ आयनों के कारण होती है.
- क्षारक (Bases) और क्षार (Alkalis):
- वे क्षारक जो जल में घुलनशील होते हैं, क्षार (Alkalis) कहलाते हैं. (जैसे $\text{NaOH}$, $\text{KOH}$, $\text{Ca(OH)}_2$)
- सभी क्षार क्षारक होते हैं, लेकिन सभी क्षारक क्षार नहीं होते (क्योंकि सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते).
- तनुकरण (Dilution): अम्ल या क्षार को जल में घोलने की प्रक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है. हमेशा अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाना चाहिए, जल को अम्ल में नहीं. ऐसा करने से अत्यधिक ऊष्मा के कारण मिश्रण उछलकर बाहर आ सकता है और जलने का कारण बन सकता है.
2.7 अम्ल और क्षार के जलीय विलयनों की विद्युत चालकता (Electrical Conductivity of Aqueous Solutions of Acids and Bases)
- अम्ल और क्षार के जलीय विलयन विद्युत के सुचालक होते हैं क्योंकि वे जल में घुलकर आयन उत्पन्न करते हैं. ये आयन विलयन में विद्युत धारा का वहन करते हैं.
- उदा. $\text{HCl}$ विलयन में $\text{H}^+$ और $\text{Cl}^-$ आयन होते हैं.
- उदा. $\text{NaOH}$ विलयन में $\text{Na}^+$ और $\text{OH}^-$ आयन होते हैं.
जल को अम्ल में कभी न मिलाएं! हमेशा अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाना चाहिए, लगातार हिलाते हुए. यह ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया को नियंत्रित करता है.
अम्ल केवल जल की उपस्थिति में ही $\text{H}^+$ आयन उत्पन्न करते हैं. शुष्क $\text{HCl}$ गैस लिटमस का रंग नहीं बदलती क्योंकि इसमें आयन नहीं बनते.
अम्ल और क्षार की प्रबलता: pH स्केल
किसी विलयन में $\text{H}^+$ आयनों की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया है, जिसे pH स्केल कहते हैं.
3.1 pH स्केल
- pH में 'p' 'पोटेंज़' (Potenz) का सूचक है, जो एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है 'शक्ति'.
- pH स्केल 0 (अत्यधिक अम्लीय) से 14 (अत्यधिक क्षारीय) तक के मानों को दर्शाता है.
- pH मान: किसी विलयन के pH का मान उसमें उपस्थित हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता का ऋणात्मक लघुगणक होता है.
$\text{pH} = -\log_{10}[\text{H}^+]$
- pH मान और प्रकृति:
- pH < 7: विलयन अम्लीय है. $\text{H}^+$ आयनों की सांद्रता अधिक होती है.
- pH = 7: विलयन उदासीन है. $\text{H}^+$ आयनों और $\text{OH}^-$ आयनों की सांद्रता बराबर होती है. (जैसे शुद्ध जल)
- pH > 7: विलयन क्षारीय है. $\text{OH}^-$ आयनों की सांद्रता अधिक होती है.
- प्रबलता:
- pH मान 7 से 0 की ओर जाने पर अम्लीय प्रकृति बढ़ती है ($\text{H}^+$ आयनों की सांद्रता बढ़ती है).
- pH मान 7 से 14 की ओर जाने पर क्षारीय प्रकृति बढ़ती है ($\text{OH}^-$ आयनों की सांद्रता बढ़ती है).
3.2 दैनिक जीवन में pH का महत्व
3.2.1 पौधे और पशु pH के प्रति संवेदनशील होते हैं
- हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH परास के बीच कार्य करता है.
- वर्षा जल का pH मान 5.6 से कम होने पर अम्लीय वर्षा कहलाती है. अम्लीय वर्षा का जल जब नदियों में प्रवाहित होता है, तो नदी के जल का pH मान कम हो जाता है, जिससे जलीय जीवों का जीवन कठिन हो जाता है.
3.2.2 मिट्टी का pH (pH in our Soil)
- स्वस्थ पौधों की वृद्धि के लिए एक विशिष्ट pH परास की आवश्यकता होती है.
- यदि मिट्टी बहुत अम्लीय या बहुत क्षारीय हो, तो किसान उसमें उपयुक्त पदार्थ (जैसे अम्लीय मिट्टी के लिए चूना, क्षारीय मिट्टी के लिए कार्बनिक पदार्थ) मिलाकर pH को संतुलित करते हैं.
3.2.3 हमारे पाचन तंत्र में pH (pH in our Digestive System)
- हमारा आमाशय हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($\text{HCl}$) उत्पन्न करता है जो भोजन के पाचन में मदद करता है.
- अपच की स्थिति में, आमाशय बहुत अधिक अम्ल उत्पन्न करता है, जिससे पेट में दर्द और जलन होती है. इसे दूर करने के लिए एंटासिड (Antacids) जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (मिल्क ऑफ मैग्नेशिया) का उपयोग किया जाता है, जो एक हल्का क्षार होता है और अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करता है.
3.2.4 pH परिवर्तन के कारण दंत क्षय (pH Change as the Cause of Tooth Decay)
- मुंह का pH मान 5.5 से कम होने पर दांतों का क्षय शुरू हो जाता है.
- दांतों का इनेमल (enamel) कैल्शियम फॉस्फेट का बना होता है, जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है. यह जल में नहीं घुलता, लेकिन मुंह का pH 5.5 से कम होने पर संक्षारित हो जाता है.
- भोजन के बाद मुंह में बचे शर्करा और खाद्य कणों का जीवाणु द्वारा अपघटन होने से अम्ल उत्पन्न होते हैं.
- इससे बचने के लिए क्षारीय दंतमंजन (toothpaste) का उपयोग किया जाता है, जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करता है.
3.2.5 पशुओं और पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा (Self-defence by Animals and Plants through Chemicals)
- मधुमक्खी का डंक: एक अम्ल छोड़ता है, जिससे दर्द और जलन होती है. इसे बेकिंग सोडा जैसे हल्के क्षार से राहत मिलती है.
- नेटल (Nettle) के पत्ते: मेथनोइक अम्ल (formic acid) छोड़ते हैं, जिससे जलन होती है. इसे डॉक पौधे (Dock plant) के पत्तों को रगड़कर राहत मिलती है, जो प्रकृति में क्षारीय होते हैं.
pH स्केल: हाइड्रोजन आयन सांद्रता को मापने का एक पैमाना, जो 0 (अत्यधिक अम्लीय) से 14 (अत्यधिक क्षारीय) तक होता है.
pH मान 7 से कम होने पर अम्लीयता बढ़ती है, जबकि pH मान 7 से अधिक होने पर क्षारीयता बढ़ती है. pH 7 उदासीन होता है.
लवण: उनके गुणधर्म और उपयोग
लवण (Salts) वे आयनिक यौगिक हैं जो अम्ल और क्षार की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बनते हैं. ये विभिन्न प्रकार के होते हैं और दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण उपयोग रखते हैं.
4.1 लवणों के परिवार (Family of Salts)
- एक ही अम्ल या एक ही क्षार से बने लवणों को एक ही परिवार का माना जाता है.
- उदाहरण: $\text{NaCl}$, $\text{KCl}$ (क्लोराइड लवण परिवार)
- उदाहरण: $\text{Na}_2\text{SO}_4$, $\text{K}_2\text{SO}_4$ (सल्फेट लवण परिवार)
4.2 लवणों का pH (pH of Salts)
- प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के लवण: उदासीन होते हैं, pH = 7. (उदा. $\text{NaCl}$)
- प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार के लवण: अम्लीय होते हैं, pH < 7. (उदा. $\text{NH}_4\text{Cl}$)
- दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के लवण: क्षारीय होते हैं, pH > 7. (उदा. $\text{CH}_3\text{COONa}$)
- दुर्बल अम्ल और दुर्बल क्षार के लवण: pH 7 के आसपास हो सकता है, जो अम्ल और क्षार की सापेक्ष प्रबलता पर निर्भर करता है.
4.3 कुछ महत्वपूर्ण लवण (Some Important Salts)
4.3.1 साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड, $\text{NaCl}$)
- स्रोत: समुद्री जल, चट्टानी नमक (rock salt).
- उपयोग:
- भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए.
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड, बेकिंग सोडा, वाशिंग सोडा, ब्लीचिंग पाउडर जैसे कई अन्य रसायनों के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल.
4.3.2 सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा, $\text{NaOH}$)
- निर्माण: सोडियम क्लोराइड के जलीय विलयन (ब्राइन) के विद्युत अपघटन (electrolysis) द्वारा. इस प्रक्रिया को क्लोर-क्षार प्रक्रिया (Chlor-alkali process) कहते हैं.
$2\text{NaCl(aq)} + 2\text{H}_2\text{O(l)} \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2\text{NaOH(aq)} + \text{Cl}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{(g)}$
- एनोड पर: क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) मुक्त होती है.
- कैथोड पर: हाइड्रोजन गैस ($\text{H}_2$) मुक्त होती है.
- कैथोड के पास: सोडियम हाइड्रॉक्साइड ($\text{NaOH}$) विलयन बनता है.
- उपयोग:
- साबुन और अपमार्जक (detergents) बनाने में.
- कागज बनाने में.
- धातुओं से ग्रीस हटाने में.
- कृत्रिम फाइबर बनाने में.
4.3.3 विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर, $\text{CaOCl}_2$)
- निर्माण: शुष्क बुझे हुए चूने ($\text{Ca(OH)}_2$) पर क्लोरीन गैस ($\text{Cl}_2$) की अभिक्रिया से.
$\text{Ca(OH)}_2\text{(s)} + \text{Cl}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CaOCl}_2\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)}$
- उपयोग:
- वस्त्र उद्योग में सूती एवं लिनन के विरंजन के लिए.
- कागज उद्योग में लकड़ी के मज्जा (wood pulp) के विरंजन के लिए.
- पीने वाले जल को जीवाणुमुक्त करने के लिए एक ऑक्सीकारक के रूप में.
- रासायनिक उद्योगों में एक ऑक्सीकारक के रूप में.
4.3.4 बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, $\text{NaHCO}_3$)
- निर्माण: सोडियम क्लोराइड, कार्बन डाइऑक्साइड, अमोनिया और जल की अभिक्रिया से.
$\text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 + \text{NH}_3 \rightarrow \text{NH}_4\text{Cl} + \text{NaHCO}_3$
- गुणधर्म: यह एक हल्का, अ-संक्षारक क्षारीय लवण है.
- उपयोग:
- बेकिंग पाउडर का एक घटक: बेकिंग पाउडर बेकिंग सोडा ($\text{NaHCO}_3$) और एक हल्के खाद्य अम्ल (जैसे टार्टरिक अम्ल) का मिश्रण होता है. जब इसे गर्म किया जाता है या जल में मिलाया जाता है, तो $\text{CO}_2$ गैस निकलती है, जिससे केक और ब्रेड फूलते हैं.
$\text{NaHCO}_3 + \text{H}^+\text{(from acid)} \rightarrow \text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{Sodium salt of acid}$
- एंटासिड के रूप में: पेट में अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने के लिए.
- अग्निशामक में: सोडा-अम्ल अग्निशामक में उपयोग किया जाता है.
4.3.5 धावन सोडा (वाशिंग सोडा, $\text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O}$)
- निर्माण: बेकिंग सोडा को गर्म करके सोडियम कार्बोनेट प्राप्त किया जाता है, फिर उसके पुन: क्रिस्टलीकरण (recrystallization) से धावन सोडा प्राप्त होता है.
$2\text{NaHCO}_3\text{(s)} \xrightarrow{\text{ऊष्मा}} \text{Na}_2\text{CO}_3\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)} + \text{CO}_2\text{(g)}$ $\text{Na}_2\text{CO}_3\text{(s)} + 10\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O(s)}$
- गुणधर्म: यह एक क्षारीय लवण है.
- उपयोग:
- कांच, साबुन और कागज उद्योगों में.
- बोरेक्स जैसे सोडियम यौगिकों के निर्माण में.
- घरों में सफाई एजेंट के रूप में.
- जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए.
4.3.6 प्लास्टर ऑफ पेरिस (कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट, $\text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O}$)
- निर्माण: जिप्सम ($\text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O}$) को $373\text{K}$ पर गर्म करने पर जल के अणु त्यागकर प्लास्टर ऑफ पेरिस बनता है.
$\text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O(s)} \xrightarrow{373\text{K}} \text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O(s)} + 1\frac{1}{2}\text{H}_2\text{O(l)}$
- गुणधर्म: यह एक सफेद चूर्ण है जो जल में मिलाने पर पुनः जिप्सम में बदलकर कठोर ठोस बन जाता है.
$\text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O(s)} + 1\frac{1}{2}\text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O(s)}$
- उपयोग:
- डॉक्टरों द्वारा टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में रखने के लिए.
- खिलौने बनाने में.
- सजावट का सामान बनाने में.
- सतह को चिकना बनाने के लिए.
- अग्निरोधी सामग्री के रूप में.
क्रिस्टलन जल (Water of Crystallisation): लवण के एक सूत्र इकाई में उपस्थित जल के अणुओं की निश्चित संख्या को क्रिस्टलन जल कहते हैं. (उदा. $\text{CuSO}_4 \cdot 5\text{H}_2\text{O}$ में 5 अणु)
जिप्सम को $373\text{K}$ से अधिक तापमान पर गर्म करने पर यह सारा क्रिस्टलन जल खो देता है और मृत तापित प्लास्टर (Dead Burnt Plaster) बन जाता है, जो जल के साथ अभिक्रिया करके कठोर नहीं होता.