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AP · Class 10 · 🧮 Maths · Chapter 36

INTRODUCTION TO TRIGONOMETRY

త్రికోణమితి నిష్పత్తులుసైన్, కోసైన్, టాంజెంట్కోసెక్, సెక్, కాట్పైథాగరియన్ గుర్తింపులుసైన్ నియమంకోసైన్ నియమం

ఈ అధ్యాయం త్రికోణమితి ప్రాథమిక భావనలను పరిచయం చేస్తుంది, ఇది గణితంలో ఒక ముఖ్యమైన శాఖ. త్రికోణమితి అంటే ఏమిటి, దాని చరిత్ర, మరియు లంబకోణ త్రిభుజాలలో కోణాలు మరియు భుజాల మధ్య సంబంధాలను ఎలా అధ్యయనం చేయాలో విద్యార్థులు నేర్చుకుంటారు. సైన్, కోసైన్, టాంజెంట్ వంటి త్రికోణమితి నిష్పత్తులు మరియు వాటి విలోమాలు, అలాగే పైథాగరియన్ గుర్తింపులు మరియు సైన్, కోసైన్ నియమాలు వివరించబడతాయి. ఈ భావనలు భవిష్యత్తులో ఉన్నత స్థాయి గణిత అధ్యయనాలకు మరియు ఇంజనీరింగ్, భౌతిక శాస్త్రం వంటి వివిధ రంగాలలో సమస్యలను పరిష్కరించడానికి పునాదిని ఏర్పరుస్తాయి.

समकोण त्रिभुज के त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios of a Right Triangle)

त्रिकोणमिति गणित की वह शाखा है जो त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंधों का अध्ययन करती है। कक्षा 10 में, हम मुख्य रूप से समकोण त्रिभुज (Right-angled triangle) के त्रिकोणमितीय अनुपातों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

1.1. मूल परिभाषाएँ

एक समकोण त्रिभुज ABC में, जहाँ कोण B समकोण \((90^\circ)\) है:

  • कर्ण (Hypotenuse): समकोण के सामने वाली भुजा (AC)। यह त्रिभुज की सबसे लंबी भुजा होती है।
  • लंब (Perpendicular): विचाराधीन कोण (जैसे कोण A) के सामने वाली भुजा (BC)।
  • आधार (Base): विचाराधीन कोण (जैसे कोण A) से संलग्न भुजा (AB)।

SOH CAH TOA mnemonic का उपयोग करके इन अनुपातों को याद रखना आसान है:

  • SOH: Sine = Opposite / Hypotenuse (लंब / कर्ण)
  • CAH: Cosine = Adjacent / Hypotenuse (आधार / कर्ण)
  • TOA: Tangent = Opposite / Adjacent (लंब / आधार)

1.2. छह त्रिकोणमितीय अनुपात

कोण A के लिए, छह त्रिकोणमितीय अनुपात इस प्रकार परिभाषित किए गए हैं:

  1. Sine A (sin A): \(\frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}} = \frac{BC}{AC}\)
  2. Cosine A (cos A): \(\frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}} = \frac{AB}{AC}\)
  3. Tangent A (tan A): \(\frac{\text{लंब}}{\text{आधार}} = \frac{BC}{AB}\)

इनके व्युत्क्रम (Reciprocals) भी महत्वपूर्ण हैं:

  1. Cosecant A (cosec A या csc A): \(\frac{1}{\sin A} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{लंब}} = \frac{AC}{BC}\)
  2. Secant A (sec A): \(\frac{1}{\cos A} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{आधार}} = \frac{AC}{AB}\)
  3. Cotangent A (cot A): \(\frac{1}{\tan A} = \frac{\text{आधार}}{\text{लंब}} = \frac{AB}{BC}\)

महत्वपूर्ण संबंध:

  • \(\tan A = \frac{\sin A}{\cos A}\)
  • \(\cot A = \frac{\cos A}{\sin A}\)

ध्यान दें:

  • त्रिकोणमितीय अनुपात कोण के माप पर निर्भर करते हैं, न कि त्रिभुज के आकार पर। समान कोण वाले सभी समरूप त्रिभुजों (similar triangles) के लिए अनुपात समान होते हैं।
  • \(\sin A\) का अर्थ \(\sin\) और \(A\) का गुणनफल नहीं है। \(\sin A\) कोण \(A\) के sine अनुपात को दर्शाता है।
  • \((\sin A)^2\) को \(\sin^2 A\) लिखा जाता है, \((\cos A)^2\) को \(\cos^2 A\) लिखा जाता है, आदि। लेकिन \((\sin A)^{-1}\) को \(\sin^{-1} A\) नहीं लिखा जाता, क्योंकि यह \(A\) के arcsine को दर्शाता है। \((\sin A)^{-1}\) का अर्थ \(\frac{1}{\sin A}\) है।

1.3. पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग

समकोण त्रिभुज में, पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras Theorem) के अनुसार: \((\text{कर्ण})^2 = (\text{लंब})^2 + (\text{आधार})^2\) इसका उपयोग किसी भी दो भुजाओं के ज्ञात होने पर तीसरी भुजा को ज्ञात करने के लिए किया जाता है, जो त्रिकोणमितीय अनुपातों को ज्ञात करने में मदद करता है।

ముఖ్యమైనది

किसी भी न्यून कोण (acute angle) \(\theta\) के लिए, \(0 < \sin \theta < 1\) और \(0 < \cos \theta < 1\) होता है। \(\tan \theta\) का मान \(0\) से अनंत तक कुछ भी हो सकता है।

💡సూచన

प्रश्न में दिए गए कोण के सापेक्ष 'लंब' और 'आधार' की पहचान करना महत्वपूर्ण है। कर्ण हमेशा समकोण के सामने वाली भुजा होती है।

कुछ विशिष्ट कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios of Some Specific Angles)

कुछ विशिष्ट कोणों जैसे \(0^\circ, 30^\circ, 45^\circ, 60^\circ\) और \(90^\circ\) के लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों के मान याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। ये मान विभिन्न समस्याओं को हल करने में सीधे उपयोग किए जाते हैं।

2.1. \(45^\circ\) के त्रिकोणमितीय अनुपात

एक समद्विबाहु समकोण त्रिभुज (Isosceles right-angled triangle) ABC पर विचार करें, जहाँ \(\angle B = 90^\circ\) और \(AB = BC = a\)। तब, \(\angle A = \angle C = 45^\circ\)। पाइथागोरस प्रमेय से, \(AC = \sqrt{AB^2 + BC^2} = \sqrt{a^2 + a^2} = \sqrt{2a^2} = a\sqrt{2}\).

  • \(\sin 45^\circ = \frac{BC}{AC} = \frac{a}{a\sqrt{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}}\
  • \(\cos 45^\circ = \frac{AB}{AC} = \frac{a}{a\sqrt{2}} = \frac{1}{\sqrt{2}}\
  • \(\tan 45^\circ = \frac{BC}{AB} = \frac{a}{a} = 1\)

2.2. \(30^\circ\) और \(60^\circ\) के त्रिकोणमितीय अनुपात

एक समबाहु त्रिभुज (Equilateral triangle) ABC पर विचार करें, जिसकी प्रत्येक भुजा \(2a\) है। शीर्ष A से BC पर लंब AD खींचिए। तब D, BC का मध्यबिंदु होगा, और \(BD = DC = a\)। साथ ही, \(\angle BAD = \angle CAD = 30^\circ\) और \(\angle ADB = 90^\circ\). समकोण त्रिभुज ABD में: पाइथागोरस प्रमेय से, \(AD = \sqrt{AB^2 - BD^2} = \sqrt{(2a)^2 - a^2} = \sqrt{4a^2 - a^2} = \sqrt{3a^2} = a\sqrt{3}\).

कोण \(30^\circ\) के लिए (त्रिभुज ABD में \(\angle BAD = 30^\circ\)):

  • \(\sin 30^\circ = \frac{BD}{AB} = \frac{a}{2a} = \frac{1}{2}\
  • \(\cos 30^\circ = \frac{AD}{AB} = \frac{a\sqrt{3}}{2a} = \frac{\sqrt{3}}{2}\
  • \(\tan 30^\circ = \frac{BD}{AD} = \frac{a}{a\sqrt{3}} = \frac{1}{\sqrt{3}}\

कोण \(60^\circ\) के लिए (त्रिभुज ABD में \(\angle ABD = 60^\circ\)):

  • \(\sin 60^\circ = \frac{AD}{AB} = \frac{a\sqrt{3}}{2a} = \frac{\sqrt{3}}{2}\
  • \(\cos 60^\circ = \frac{BD}{AB} = \frac{a}{2a} = \frac{1}{2}\
  • \(\tan 60^\circ = \frac{AD}{BD} = \frac{a\sqrt{3}}{a} = \sqrt{3}\)

2.3. \(0^\circ\) और \(90^\circ\) के त्रिकोणमितीय अनुपात

इन कोणों के लिए, हम एक समकोण त्रिभुज में कोणों को सीमांत स्थितियों (limiting cases) के रूप में कल्पना करते हैं।

\(0^\circ\) के लिए: जब न्यून कोण \(A\) शून्य के करीब पहुंचता है, तो लंब \(BC\) शून्य के करीब पहुंचता है और आधार \(AB\) कर्ण \(AC\) के करीब पहुंचता है।

  • \(\sin 0^\circ = 0\)
  • \(\cos 0^\circ = 1\)
  • \(\tan 0^\circ = 0\)

\(90^\circ\) के लिए: जब न्यून कोण \(A\) \(90^\circ\) के करीब पहुंचता है, तो आधार \(AB\) शून्य के करीब पहुंचता है और लंब \(BC\) कर्ण \(AC\) के करीब पहुंचता है।

  • \(\sin 90^\circ = 1\)
  • \(\cos 90^\circ = 0\)
  • \(\tan 90^\circ = \text{अपरिभाषित (Undefined)}\) (क्योंकि \(\frac{1}{0}\) होता है)

2.4. त्रिकोणमितीय अनुपातों की सारणी

💡సూచన

इस सारणी को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। इसे याद रखने का एक आसान तरीका है: \(\sin\) के मान \(0\) से \(1\) तक बढ़ते हैं, और \(\cos\) के मान \(1\) से \(0\) तक घटते हैं। \(\cos\) के मान \(\sin\) के मानों का उलटा क्रम हैं।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

\(\tan 90^\circ\), \(\text{cosec } 0^\circ\) और \(\text{cot } 0^\circ\) के मान 'अपरिभाषित' होते हैं, 'अनंत' नहीं। यह एक सामान्य गलती है।

पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios of Complementary Angles)

दो कोणों को पूरक कोण (Complementary Angles) कहा जाता है यदि उनका योग \(90^\circ\) हो। एक समकोण त्रिभुज ABC में, जहाँ \(\angle B = 90^\circ\), हम जानते हैं कि \(\angle A + \angle C = 90^\circ\)। इसलिए, \(\angle C = 90^\circ - \angle A\)।

अब, कोण A के लिए अनुपात:

  • \(\sin A = \frac{BC}{AC}\)
  • \(\cos A = \frac{AB}{AC}\)
  • \(\tan A = \frac{BC}{AB}\)

कोण C (या \(90^\circ - A\)) के लिए अनुपात:

  • \(\sin (90^\circ - A) = \frac{AB}{AC}\)
  • \(\cos (90^\circ - A) = \frac{BC}{AC}\)
  • \(\tan (90^\circ - A) = \frac{AB}{BC}\)

इनकी तुलना करने पर, हमें निम्नलिखित संबंध मिलते हैं:

  • \(\sin (90^\circ - A) = \cos A\)
  • \(\cos (90^\circ - A) = \sin A\)
  • \(\tan (90^\circ - A) = \cot A\)
  • \(\cot (90^\circ - A) = \tan A\)
  • \(\sec (90^\circ - A) = \text{cosec } A\)
  • \(\text{cosec } (90^\circ - A) = \sec A\)

ये संबंध केवल \(0^\circ < A < 90^\circ\) के लिए मान्य हैं। \(A = 0^\circ\) और \(A = 90^\circ\) के लिए भी ये संबंध लागू होते हैं यदि हम अपरिभाषित मानों को ध्यान में रखें।

उदाहरण:

  • \(\sin 20^\circ = \cos (90^\circ - 20^\circ) = \cos 70^\circ\)
  • \(\tan 65^\circ = \cot (90^\circ - 65^\circ) = \cot 25^\circ\)

इन संबंधों का उपयोग अक्सर व्यंजकों को सरल बनाने या अज्ञात कोणों को ज्ञात करने के लिए किया जाता है।

గుర్తుంచుకోండి

पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात एक दूसरे के 'सह-अनुपात' (co-ratios) होते हैं। जैसे \(\sin\) का \(\cos\), \(\tan\) का \(\cot\) और \(\sec\) का \(\text{cosec}\) होता है।

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ (Trigonometric Identities)

एक समीकरण को त्रिकोणमितीय सर्वसमिका (Trigonometric Identity) कहा जाता है यदि वह संबंधित कोणों के सभी मानों के लिए सत्य हो। ये सर्वसमिकाएँ त्रिकोणमितीय व्यंजकों को सरल बनाने और समीकरणों को हल करने में बहुत उपयोगी होती हैं।

4.1. मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ

एक समकोण त्रिभुज ABC में, जहाँ \(\angle B = 90^\circ\) और \(\angle A = \theta\): पाइथागोरस प्रमेय से, \(AB^2 + BC^2 = AC^2\).

सर्वसमिका 1: \(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1\)

  • पाइथागोरस प्रमेय के समीकरण को \(AC^2\) से भाग देने पर:

\(\frac{AB^2}{AC^2} + \frac{BC^2}{AC^2} = \frac{AC^2}{AC^2}\) \(\left(\frac{AB}{AC}\right)^2 + \left(\frac{BC}{AC}\right)^2 = 1\) \((\cos \theta)^2 + (\sin \theta)^2 = 1\) \(\cos^2 \theta + \sin^2 \theta = 1\) यह सर्वसमिका \(0^\circ \le \theta \le 90^\circ\) के लिए सत्य है।

सर्वसमिका 2: \(1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta\)

  • पाइथागोरस प्रमेय के समीकरण को \(AB^2\) से भाग देने पर (जहाँ \(AB \ne 0\), अर्थात \(\theta \ne 90^\circ\)):

\(\frac{AB^2}{AB^2} + \frac{BC^2}{AB^2} = \frac{AC^2}{AB^2}\) \(1 + \left(\frac{BC}{AB}\right)^2 = \left(\frac{AC}{AB}\right)^2\) \(1 + (\tan \theta)^2 = (\sec \theta)^2\) \(1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta\) यह सर्वसमिका \(0^\circ \le \theta < 90^\circ\) के लिए सत्य है।

सर्वसमिका 3: \(1 + \cot^2 \theta = \text{cosec}^2 \theta\)

  • पाइथागोरस प्रमेय के समीकरण को \(BC^2\) से भाग देने पर (जहाँ \(BC \ne 0\), अर्थात \(\theta \ne 0^\circ\)):

\(\frac{AB^2}{BC^2} + \frac{BC^2}{BC^2} = \frac{AC^2}{BC^2}\) \(\left(\frac{AB}{BC}\right)^2 + 1 = \left(\frac{AC}{BC}\right)^2\) \((\cot \theta)^2 + 1 = (\text{cosec } \theta)^2\) \(\cot^2 \theta + 1 = \text{cosec}^2 \theta\) यह सर्वसमिका \(0^\circ < \theta \le 90^\circ\) के लिए सत्य है।

4.2. सर्वसमिकाओं का उपयोग

इन सर्वसमिकाओं का उपयोग करके, हम एक त्रिकोणमितीय अनुपात को दूसरे के पदों में व्यक्त कर सकते हैं, या जटिल त्रिकोणमितीय व्यंजकों को सरल बना सकते हैं।

उदाहरण:

  • यदि \(\sin \theta\) ज्ञात है, तो \(\cos \theta = \sqrt{1 - \sin^2 \theta}\) (यदि \(\theta\) न्यून कोण है)
  • \(\sec^2 \theta - \tan^2 \theta = 1\)
  • \(\text{cosec}^2 \theta - \cot^2 \theta = 1\)

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं को सिद्ध करने के लिए, आमतौर पर एक पक्ष (LHS या RHS) से शुरू करते हैं और दूसरे पक्ष तक पहुँचने के लिए ज्ञात सर्वसमिकाओं और बीजगणितीय हेरफेर का उपयोग करते हैं।

🧮సూత్రం

तीन मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ:

  1. \(\sin^2 \theta + \cos^2 \theta = 1\)
  2. \(1 + \tan^2 \theta = \sec^2 \theta\)
  3. \(1 + \cot^2 \theta = \text{cosec}^2 \theta\)
💡సూచన

सर्वसमिकाओं को सिद्ध करते समय, अक्सर सभी पदों को \(\sin\) और \(\cos\) में बदलने से समस्या सरल हो जाती है।

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