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AP · Class 10 · 🧮 Maths · Chapter 34

ch34

దృష్టి రేఖఊర్ధ్వ కోణంఅధో కోణంత్రికోణమితి నిష్పత్తులుఎత్తులు మరియు దూరాలునిజ జీవిత అనువర్తనాలు

ఈ అధ్యాయం త్రికోణమితి నిష్పత్తులైన సైన్, కోసైన్, టాంజెంట్, కోసెక్, సెక్ మరియు కాట్ యొక్క అనువర్తనాలను వివరిస్తుంది. విద్యార్థులు ఎత్తులు మరియు దూరాలను కొలవడానికి త్రికోణమితిని ఎలా ఉపయోగించాలో నేర్చుకుంటారు. దృష్టి రేఖ, ఊర్ధ్వ కోణం మరియు అధో కోణం వంటి భావనలు పరిచయం చేయబడతాయి. నిజ జీవిత సమస్యలను పరిష్కరించడానికి త్రికోణమితి సూత్రాలను ఎలా వర్తింపజేయాలో ఈ అధ్యాయం వివరిస్తుంది, ఇది ఇంజనీరింగ్, భౌతిక శాస్త్రం మరియు నావిగేషన్ వంటి రంగాలలో చాలా ముఖ్యమైనది.

त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios)

एक समकोण त्रिभुज में, न्यून कोण के सापेक्ष भुजाओं के अनुपातों को त्रिकोणमितीय अनुपात कहते हैं।

  • समकोण त्रिभुज (Right-angled Triangle): एक त्रिभुज जिसमें एक कोण 90° का होता है।
  • कर्ण (Hypotenuse): 90° के सामने वाली भुजा। सबसे लंबी भुजा।
  • लंब (Perpendicular): दिए गए न्यून कोण के सामने वाली भुजा।
  • आधार (Base): दिए गए न्यून कोण से संलग्न भुजा (कर्ण के अलावा)।
  • छह त्रिकोणमितीय अनुपात:
  • sine (sin): \(\sin \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}} = \frac{P}{H}\)
  • cosine (cos): \(\cos \theta = \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}} = \frac{B}{H}\)
  • tangent (tan): \(\tan \theta = \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}} = \frac{P}{B}\)
  • cosecant (cosec): \(\text{cosec } \theta = \frac{1}{\sin \theta} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{लंब}} = \frac{H}{P}\)
  • secant (sec): \(\text{sec } \theta = \frac{1}{\cos \theta} = \frac{\text{कर्ण}}{\text{आधार}} = \frac{H}{B}\)
  • cotangent (cot): \(\text{cot } \theta = \frac{1}{\tan \theta} = \frac{\text{आधार}}{\text{लंब}} = \frac{B}{P}\)
  • महत्वपूर्ण संबंध:
  • \(\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta}\)
  • \(\cot \theta = \frac{\cos \theta}{\sin \theta}\)
  • याद रखने का तरीका (निमोनिक):
  • पंडित बद्री प्रसाद, हर हर बोले, सोना चांदी तोले
  • P = Perpendicular (लंब)
  • B = Base (आधार)
  • H = Hypotenuse (कर्ण)
  • S = Sin, C = Cos, T = Tan
  • \(\frac{P}{H}\) = Sin, \(\frac{B}{H}\) = Cos, \(\frac{P}{B}\) = Tan
  • त्रिकोणमितीय अनुपातों का मान कोण पर निर्भर करता है, त्रिभुज के आकार पर नहीं। यदि कोण समान है, तो सभी समरूप त्रिभुजों के लिए अनुपात समान रहेंगे।
  • \(\sin A\) या \(\cos A\) का अर्थ \(\sin \times A\) नहीं है। \(\sin\) कोण \(A\) का sine है।
ముఖ్యమైనది

त्रिकोणमितीय अनुपात हमेशा एक न्यून कोण (0° से 90° के बीच) के लिए परिभाषित होते हैं।

🚧తప్పుడు అభిప్రాయం

छात्र अक्सर लंब और आधार को कोण के सापेक्ष गलत पहचानते हैं। हमेशा याद रखें, लंब कोण के सामने वाली भुजा होती है और आधार कोण से सटी हुई भुजा होती है (कर्ण के अलावा)

कुछ विशिष्ट कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios of Some Specific Angles)

कुछ विशिष्ट कोणों (0°, 30°, 45°, 60°, 90°) के लिए त्रिकोणमितीय अनुपातों के मान याद रखना महत्वपूर्ण है।

  • मानों की सारणी:

| कोण \(\theta\) | \(\sin \theta\) | \(\cos \theta\) | \(\tan \theta\) | \(\text{cosec } \theta\) | \(\text{sec } \theta\) | \(\text{cot } \theta\) | |:---------------:|:---------------:|:---------------:|:---------------:|:-------------------:|:-----------------:|:-----------------:| | 0° | 0 | 1 | 0 | अपरिभाषित | 1 | अपरिभाषित | | 30° | \(\frac{1}{2}\) | \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) | \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)| 2 | \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)| \(\sqrt{3}\) | | 45° | \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)| \(\frac{1}{\sqrt{2}}\)| 1 | \(\sqrt{2}\) | \(\sqrt{2}\) | 1 | | 60° | \(\frac{\sqrt{3}}{2}\)| \(\frac{1}{2}\) | \(\sqrt{3}\) | \(\frac{2}{\sqrt{3}}\)| 2 | \(\frac{1}{\sqrt{3}}\)| | 90° | 1 | 0 | अपरिभाषित | 1 | अपरिभाषित | 0 |

  • सारणी याद रखने की विधि:
  1. \(\sin\) मान: 0, 1, 2, 3, 4 लिखें। प्रत्येक को 4 से भाग दें और वर्गमूल लें।
  • \(\sqrt{\frac{0}{4}}=0\), \(\sqrt{\frac{1}{4}}=\frac{1}{2}\), \(\sqrt{\frac{2}{4}}=\frac{1}{\sqrt{2}}\), \(\sqrt{\frac{3}{4}}=\frac{\sqrt{3}}{2}\), \(\sqrt{\frac{4}{4}}=1\)
  1. \(\cos\) मान: \(\sin\) के मानों को उल्टे क्रम में लिखें।
  2. \(\tan\) मान: \(\tan \theta = \frac{\sin \theta}{\cos \theta}\) का उपयोग करें।
  3. \(\text{cosec}\), \(\text{sec}\), \(\text{cot}\) मान: ये क्रमशः \(\sin\), \(\cos\), \(\tan\) के व्युत्क्रम होते हैं।
  • कुछ महत्वपूर्ण अवलोकन:
  • जैसे-जैसे \(\theta\) 0° से 90° तक बढ़ता है, \(\sin \theta\) का मान 0 से 1 तक बढ़ता है।
  • जैसे-जैसे \(\theta\) 0° से 90° तक बढ़ता है, \(\cos \theta\) का मान 1 से 0 तक घटता है।
  • \(\tan 90°\) और \(\cot 0°\) अपरिभाषित हैं।
  • \(\text{sec } 90°\) और \(\text{cosec } 0°\) अपरिभाषित हैं।
💡సూచన

यह सारणी बहुत महत्वपूर्ण है। इसे याद करने के साथ-साथ, इसे जल्दी से बनाने का तरीका भी सीखें ताकि परीक्षा में कोई गलती न हो।

पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात (Trigonometric Ratios of Complementary Angles)

जब दो कोणों का योग 90° होता है, तो वे पूरक कोण कहलाते हैं। एक समकोण त्रिभुज में, दो न्यून कोण हमेशा पूरक होते हैं।

  • यदि \(A + B = 90°\), तो \(B = 90° - A\)।
  • पूरक कोणों के संबंध:
  • \(\sin (90° - A) = \cos A\)
  • \(\cos (90° - A) = \sin A\)
  • \(\tan (90° - A) = \cot A\)
  • \(\cot (90° - A) = \tan A\)
  • \(\text{sec } (90° - A) = \text{cosec } A\)
  • \(\text{cosec } (90° - A) = \text{sec } A\)
  • अनुप्रयोग: इन संबंधों का उपयोग उन त्रिकोणमितीय अनुपातों के मानों को खोजने के लिए किया जाता है जो विशिष्ट कोणों की सारणी में नहीं होते हैं, या व्यंजकों को सरल बनाने के लिए।
  • ध्यान दें: ये संबंध केवल 0° और 90° के बीच के कोणों के लिए लागू होते हैं।
గుర్తుంచుకోండి

पूरक कोणों के सूत्र याद रखें, ये अक्सर व्यंजकों को सरल बनाने में काम आते हैं।

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ (Trigonometric Identities)

एक समीकरण जिसमें त्रिकोणमितीय अनुपात शामिल होते हैं और जो कोणों के सभी मानों के लिए सत्य होता है, जिसके लिए त्रिकोणमितीय अनुपात परिभाषित होते हैं, उसे त्रिकोणमितीय सर्वसमिका कहते हैं।

  • तीन मुख्य सर्वसमिकाएँ:
  1. \(\sin^2 A + \cos^2 A = 1\)
  • इससे व्युत्पन्न: \(\sin^2 A = 1 - \cos^2 A\) और \(\cos^2 A = 1 - \sin^2 A\)
  1. \(1 + \tan^2 A = \text{sec}^2 A\)
  • इससे व्युत्पन्न: \(\text{sec}^2 A - \tan^2 A = 1\) और \(\tan^2 A = \text{sec}^2 A - 1\)
  1. \(1 + \cot^2 A = \text{cosec}^2 A\)
  • इससे व्युत्पन्न: \(\text{cosec}^2 A - \cot^2 A = 1\) और \(\cot^2 A = \text{cosec}^2 A - 1\)
  • सर्वसमिकाओं को सिद्ध करने के लिए युक्तियाँ:
  • आमतौर पर, LHS (बायां पक्ष) से शुरू करें और RHS (दायां पक्ष) तक पहुँचें, या इसके विपरीत।
  • कभी-कभी, दोनों पक्षों को अलग-अलग सरल करके एक ही बिंदु पर मिलना आसान होता है।
  • सभी त्रिकोणमितीय अनुपातों को \(\sin\) और \(\cos\) में बदलने का प्रयास करें।
  • बीजगणितीय सर्वसमिकाओं का उपयोग करें, जैसे \((a+b)^2 = a^2+2ab+b^2\), \((a-b)^2 = a^2-2ab+b^2\), \(a^2-b^2 = (a-b)(a+b)\) आदि।
  • यदि हर में \((1 \pm \sin A)\) या \((1 \pm \cos A)\) है, तो इसे संयुग्मी से गुणा करने का प्रयास करें।
  • यदि हर में \((\text{sec } A \pm \tan A)\) या \((\text{cosec } A \pm \cot A)\) है, तो इसे संयुग्मी से गुणा करने का प्रयास करें।
  • सर्वसमिका \(\text{sec}^2 A - \tan^2 A = 1\) और \(\text{cosec}^2 A - \cot^2 A = 1\) को \((a-b)(a+b)\) के रूप में विस्तारित किया जा सकता है।
  • महत्वपूर्ण नोट: कोण \(A\) के लिए, \(\text{cosec } A\) और \(\cot A\) 0° के लिए परिभाषित नहीं हैं, और \(\text{sec } A\) और \(\tan A\) 90° के लिए परिभाषित नहीं हैं।
🧮సూత్రం

तीन मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ:

  1. \(\sin^2 A + \cos^2 A = 1\)
  2. \(1 + \tan^2 A = \text{sec}^2 A\)
  3. \(1 + \cot^2 A = \text{cosec}^2 A\)
💡సూచన

त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं को सिद्ध करने वाले प्रश्न अक्सर बोर्ड परीक्षाओं में 3-5 अंकों के लिए पूछे जाते हैं। अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।

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