CIRCLES
ఈ అధ్యాయంలో, విద్యార్థులు వృత్తానికి స్పర్శరేఖల ఉనికిని మరియు స్పర్శరేఖల లక్షణాలను నేర్చుకుంటారు. వృత్తం, జ్యా, వ్యాసం, కేంద్రం, చుట్టుకొలత, వృత్తఖండం, సెక్టార్ వంటి ప్రాథమిక పదాల గురించి మునుపటి జ్ఞానాన్ని ఉపయోగించి, స్పర్శరేఖ మరియు స్పర్శ బిందువును నిర్వచించడం, స్పర్శరేఖ వ్యాసార్థానికి లంబంగా ఉంటుందని గుర్తించడం, బాహ్య బిందువు నుండి గీసిన స్పర్శరేఖల పొడవులు సమానంగా ఉంటాయని నిరూపించడం వంటివి నేర్చుకుంటారు. ఇది నిజ జీవిత అనువర్తనాలకు కూడా సహాయపడుతుంది.
वृत्त और संबंधित पद: एक पुनरीक्षण
इस खंड में, हम वृत्त से संबंधित कुछ बुनियादी अवधारणाओं को दोहराएंगे जो स्पर्श रेखाओं को समझने के लिए आवश्यक हैं।
- वृत्त (Circle): एक समतल में उन सभी बिंदुओं का समूह जो एक निश्चित बिंदु (केंद्र) से एक निश्चित दूरी (त्रिज्या) पर होते हैं।
- केंद्र (Centre): वृत्त का निश्चित बिंदु, जिसे आमतौर पर
Oसे दर्शाया जाता है। - त्रिज्या (Radius): केंद्र से वृत्त पर किसी भी बिंदु तक की दूरी। सभी त्रिज्याएँ समान लंबाई की होती हैं।
- जीवा (Chord): वृत्त पर दो बिंदुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड।
- व्यास (Diameter): वह जीवा जो केंद्र से होकर गुजरती है। यह वृत्त की सबसे लंबी जीवा होती है और त्रिज्या का दोगुना होती है (
d = 2r)। - चाप (Arc): वृत्त का एक निरंतर भाग।
- परिधि (Circumference): वृत्त की कुल लंबाई (
C = 2πr)। - वृत्तखंड (Segment): एक जीवा और उसके संगत चाप के बीच का क्षेत्र।
- लघु वृत्तखंड (Minor Segment): छोटा क्षेत्र।
- दीर्घ वृत्तखंड (Major Segment): बड़ा क्षेत्र।
- त्रिज्यखंड (Sector): दो त्रिज्याओं और उनके संगत चाप के बीच का क्षेत्र।
- लघु त्रिज्यखंड (Minor Sector): छोटा क्षेत्र।
- दीर्घ त्रिज्यखंड (Major Sector): बड़ा क्षेत्र।
याद रखें: ये सभी पद वृत्त की ज्यामिति को समझने की नींव बनाते हैं।
एक वृत्त में, केंद्र से जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है।
छेदक रेखा और स्पर्श रेखा
वृत्त और एक रेखा के बीच के संबंधों को समझने के लिए, हम तीन मुख्य संभावनाओं पर विचार करते हैं:
- रेखा वृत्त को प्रतिच्छेद नहीं करती (Non-intersecting line):
- रेखा और वृत्त के बीच कोई उभयनिष्ठ बिंदु नहीं होता है।
- केंद्र से रेखा की लंबवत दूरी त्रिज्या से अधिक होती है।
- छेदक रेखा (Secant):
- एक रेखा जो वृत्त को दो अलग-अलग बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है।
- केंद्र से छेदक रेखा की लंबवत दूरी त्रिज्या से कम होती है।
- छेदक रेखा वृत्त के अंदर एक जीवा बनाती है।
- स्पर्श रेखा (Tangent):
- एक रेखा जो वृत्त को ठीक एक बिंदु पर स्पर्श करती है।
- इस उभयनिष्ठ बिंदु को स्पर्श बिंदु (Point of Contact) कहते हैं।
- केंद्र से स्पर्श रेखा की लंबवत दूरी त्रिज्या के बराबर होती है।
छेदक रेखा और स्पर्श रेखा के बीच संबंध:
- हम एक छेदक रेखा को स्पर्श रेखा के एक विशेष मामले के रूप में सोच सकते हैं। यदि छेदक रेखा के दो प्रतिच्छेदन बिंदु एक-दूसरे के करीब आते जाते हैं और अंततः संपाती हो जाते हैं, तो छेदक रेखा स्पर्श रेखा बन जाती है।
- यह दर्शाता है कि स्पर्श रेखा एक छेदक रेखा की 'सीमा' स्थिति है।
स्पर्श बिंदु (Point of Contact): वृत्त और स्पर्श रेखा का एकमात्र उभयनिष्ठ बिंदु।
वृत्त के किसी बिंदु पर स्पर्श रेखा
यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो स्पर्श रेखाओं के गुणों की नींव रखती है।
- अद्वितीयता (Uniqueness): वृत्त के किसी भी बिंदु पर, केवल एक और केवल एक स्पर्श रेखा खींची जा सकती है।
- यदि आप वृत्त पर एक बिंदु
Pलेते हैं, तोPसे गुजरने वाली केवल एक सीधी रेखा होगी जो वृत्त कोPके अलावा किसी अन्य बिंदु पर नहीं काटेगी।
- स्पर्श रेखा और त्रिज्या का संबंध (Tangent-Radius Relationship):
- प्रमेय 10.1: वृत्त के किसी भी बिंदु पर स्पर्श रेखा, स्पर्श बिंदु से जाने वाली त्रिज्या पर लंब होती है।
- अर्थात्, यदि
Oवृत्त का केंद्र है,Pस्पर्श बिंदु है, औरPQस्पर्श रेखा है, तोOP ⊥ PQ। - यह गुण स्पर्श रेखाओं से संबंधित कई समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण है।
इस प्रमेय का महत्व:
- यह हमें बताता है कि स्पर्श बिंदु पर त्रिज्या और स्पर्श रेखा के बीच का कोण हमेशा
90°होता है। - यह हमें पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके स्पर्श रेखाओं से संबंधित दूरियों और लंबाइयों की गणना करने में मदद करता है।
प्रमेय 10.1: वृत्त के किसी भी बिंदु पर स्पर्श रेखा, स्पर्श बिंदु से जाने वाली त्रिज्या पर लंब होती है।
एक बाहरी बिंदु से वृत्त पर स्पर्श रेखाओं की संख्या
एक वृत्त और एक बिंदु की सापेक्ष स्थिति के आधार पर, हम वृत्त पर खींची जा सकने वाली स्पर्श रेखाओं की संख्या निर्धारित कर सकते हैं।
- जब बिंदु वृत्त के अंदर हो:
- वृत्त के अंदर स्थित किसी भी बिंदु से वृत्त पर कोई स्पर्श रेखा नहीं खींची जा सकती है।
- ऐसी कोई भी रेखा जो वृत्त के अंदर के बिंदु से होकर गुजरती है, वह वृत्त को दो बिंदुओं पर काटेगी, इसलिए वह एक छेदक रेखा होगी।
- जब बिंदु वृत्त पर हो:
- वृत्त पर स्थित किसी भी बिंदु से वृत्त पर ठीक एक स्पर्श रेखा खींची जा सकती है। (जैसा कि हमने पिछले अनुभाग में देखा)।
- जब बिंदु वृत्त के बाहर हो:
- वृत्त के बाहर स्थित किसी भी बिंदु से वृत्त पर ठीक दो स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं।
- ये दोनों स्पर्श रेखाएँ उस बाहरी बिंदु से वृत्त के स्पर्श बिंदुओं तक खींची जाती हैं।
स्पर्श रेखा की लंबाई (Length of the Tangent):
- बाहरी बिंदु से स्पर्श बिंदु तक की दूरी को स्पर्श रेखा की लंबाई कहा जाता है।
- उदाहरण के लिए, यदि
Pएक बाहरी बिंदु है औरAस्पर्श बिंदु है, तोPAस्पर्श रेखा की लंबाई है।
यह प्रश्न अक्सर बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) में पूछा जाता है: 'एक बाहरी बिंदु से वृत्त पर कितनी स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं?' उत्तर है 'दो'।
बाहरी बिंदु से खींची गई स्पर्श रेखाओं की लंबाई
यह स्पर्श रेखाओं से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण प्रमेय है।
- प्रमेय 10.2: किसी बाहरी बिंदु से वृत्त पर खींची गई स्पर्श रेखाओं की लंबाई बराबर होती है।
प्रमेय 10.2 का प्रमाण (Proof of Theorem 10.2): मान लीजिए O वृत्त का केंद्र है, और P एक बाहरी बिंदु है। PQ और PR वृत्त पर Q और R पर खींची गई दो स्पर्श रेखाएँ हैं। हमें सिद्ध करना है कि PQ = PR।
उपपत्ति (Proof):
OQ,ORऔरOPको मिलाइए।- हम जानते हैं कि स्पर्श बिंदु पर त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लंब होती है (प्रमेय 10.1)।
- इसलिए,
OQ ⊥ PQऔरOR ⊥ PR। - अतः,
∠OQP = 90°और∠ORP = 90°।
- अब, समकोण त्रिभुज
ΔOQPऔरΔORPपर विचार करें।
OQ = OR(एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ)।OP = OP(उभयनिष्ठ भुजा)।∠OQP = ∠ORP = 90°।
- इसलिए,
ΔOQP ≅ ΔORP(RHS सर्वांगसमता नियम द्वारा)। - सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं (CPCTC)।
- अतः,
PQ = PR।
इस प्रमेय के परिणाम (Corollaries):
∠QPO = ∠RPO(अर्थात्,OPकोण∠QPRको समद्विभाजित करता है)।∠QOP = ∠ROP(अर्थात्,OPकोण∠QORको समद्विभाजित करता है)।OPरेखाखंडQRका लंब समद्विभाजक है।
ये परिणाम भी समस्याओं को हल करने में बहुत उपयोगी होते हैं।
प्रमेय 10.2: किसी बाहरी बिंदु से वृत्त पर खींची गई स्पर्श रेखाओं की लंबाई बराबर होती है।
प्रमेय 10.2 का प्रमाण बोर्ड परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। इसे अच्छी तरह से अभ्यास करें।